आग जारी रहने के बीच दो हेक्टेयर तक जमीन जलाने की छूट हटाने की इंडोनेशिया की योजना

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Indonesia Plans to Remove Two Hectare Land Burning Exception as Fires Persist

68 कंपनियों की जांच के बीच कानूनी बदलाव का प्रस्ताव

इंडोनेशिया प्रति परिवार दो हेक्टेयर तक जमीन जलाने से जुड़ी स्थानीय परंपरा संबंधी छूट हटाने की योजना बना रहा है। इस बीच अधिकारी कंपनियों की रियायतों वाली जमीन पर लगी आग की जांच कर रहे हैं और जंगलों तथा भूमि में जारी आग को कुछ हफ्तों के भीतर बुझाने की कोशिश कर रहे हैं। पर्यावरण मंत्री जुन्हुर हिदायत ने कहा कि रियायतें रखने वाली 68 कंपनियों की गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है और उनका सत्यापन किया जा रहा है। दर्जनों लोगों को संदिग्ध के रूप में नामित किया गया है।

विषय-सूची
  1. 68 कंपनियों की जांच के बीच कानूनी बदलाव का प्रस्ताव
  2. दो हेक्टेयर की मौजूदा छूट का अर्थ
  3. प्रस्ताव कैसे आगे बढ़ा
  4. बिना खेती वाली रियायती जमीन की जांच क्यों हो रही है
  5. रियायतों पर रोक दोषसिद्धि नहीं है
  6. योजना में किफायती विकल्प भी शामिल
  7. 2023 की आग का विश्लेषण क्या बताता है
  8. पानी की कमी से आग बुझाने का लक्ष्य जटिल
  9. स्वास्थ्य जोखिम और जलवायु दावों का अलग-अलग आकलन जरूरी
  10. मुख्य बातें

यह प्रस्ताव पर्यावरण संरक्षण और प्रबंधन कानून, 2009 के कानून संख्या 32 की धारा 69(2) को बदलने से जुड़ा है। इसका उद्देश्य जमीन साफ करने की कुछ पारंपरिक प्रथाओं को कानूनी छूट देने वाले प्रावधान को हटाना है, न कि आग लगाकर जमीन साफ करने पर इंडोनेशिया का पहला प्रतिबंध लागू करना। धारा 69(1)(h) पहले से ही आग के जरिए जमीन साफ करने पर रोक लगाती है।

जुन्हुर ने 12 अक्टूबर 2026 को कहा कि सरकार ने प्रतिनिधि सभा, जिसे डीपीआर के नाम से जाना जाता है, के समक्ष संशोधन प्रस्ताव रखने पर सहमति जताई है। उन्होंने 13 अक्टूबर को जकार्ता में प्रसास्ती इंडोनेशिया पॉलिसी फोरम 2026 के बाद इस पहल पर फिर चर्चा की। संशोधन को कानून का रूप दिए जाने या संसदीय समय-सारिणी की कोई घोषणा नहीं हुई है।

पर्यावरण मंत्री ने कहा कि यह प्रावधान ऐसी आग का संभावित शुरुआती कारण हो सकता है, जो साफ की जा रही जमीन से आगे फैल जाती है।

"सरकार दो हेक्टेयर तक खेत जलाने की अनुमति देने वाले अनुच्छेद को हटाने की पहल कर रही है। हम आग लगाकर खेत साफ करने की छूट हटा देंगे," जुन्हुर ने कहा।

एक अलग प्रस्ताव के तहत पहले से बिना खेती वाली रियायती जमीन के जले हुए हिस्सों को औद्योगिक बागानों, जिनमें ऑयल पाम भी शामिल है, में बदलने से रोका जाएगा। दोनों उपाय अलग-अलग प्रोत्साहनों से निपटने का प्रयास करते हैं: परिवारों के लिए कम लागत में जमीन साफ करना और विकास की प्रतीक्षा कर रही जमीन पर आग लगने से संभावित व्यावसायिक लाभ।

दोनों प्रस्तावों पर अभी कानूनी काम बाकी है। जानबूझकर आग लगाने के संदेहों की भी जांच जरूरी है; केवल इस आधार पर निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि आग कहां लगी।

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दो हेक्टेयर की मौजूदा छूट का अर्थ

बहस में सामान्य प्रतिबंध और स्थानीय परंपरा संबंधी छूट के बीच का अंतर अहम है। वन एवं पर्यावरण कानून के विशेषज्ञ सादिनो ने कहा कि कानून को उसकी व्याख्या के साथ पढ़ा जाना चाहिए। इसमें स्थानीय फसल किस्मों के लिए प्रति परिवार अधिकतम दो हेक्टेयर जमीन आग से साफ करने की बात है, और आग को फैलने से रोकने के लिए चारों ओर अग्नि-रोधी पट्टियां बनाने का उल्लेख है।

अग्नि-रोधी पट्टी ऐसा खाली हिस्सा होता है जिसका उद्देश्य एक इलाके से दूसरे इलाके तक आग को फैलने से रोकना है। ऐसी पट्टी होना पारंपरिक तरीके से जमीन साफ करने की बताई गई शर्तों में से एक है, लेकिन इससे यह गारंटी नहीं मिलती कि हर मौसम या जमीन की स्थिति में आग काबू में रहेगी।

सादिनो ने कहा कि यह प्रावधान जंगल या किसी भी दो हेक्टेयर के भूखंड को जलाने की सामान्य अनुमति नहीं है। इसकी सीमाएं खेती के उद्देश्य, जमीन साफ करने वाले परिवार और आग को रोकने के उपायों से तय होती हैं। एक विवरण में यह छूट प्रति परिवार प्रति वर्ष दो हेक्टेयर बताई गई है, जबकि कानून के अन्य विवरणों में सालाना अवधि बताए बिना प्रति परिवार की सीमा का उल्लेख है। संशोधन पर बहस में इस बात को स्पष्ट करना होगा।

सरकार का घोषित लक्ष्य धारा 69(2) से जुड़ा स्थानीय परंपरा संबंधी प्रावधान है, न कि धारा 69(1)(h) में मौजूद प्रतिबंध को हटाना। बदलाव के सटीक शब्द और दायरा तय करने के लिए संशोधन का मसौदा जरूरी होगा।

प्रस्ताव कैसे आगे बढ़ा

अक्टूबर की पहल से पहले राष्ट्रपति आग की रोकथाम और विकल्प उपलब्ध कराने के निर्देश दे चुके थे। यह उस नीति को भी आगे बढ़ाती है जिसमें लगातार सरकारों ने आग पर त्वरित कार्रवाई, समुदायों को सहायता और उल्लंघन करने वालों पर दंड को साथ रखा है।

  • 22 फरवरी 2021: राष्ट्रपति जोको विडोडो ने जकार्ता में एक राष्ट्रीय समन्वय बैठक में रोजाना निगरानी, तत्काल कार्रवाई, आग लगाने के स्थायी विकल्प और कड़े दंड की मांग की।
  • 17 सितंबर 2024: संयुक्त राष्ट्र आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्यालय ने इंडोनेशिया में 2023 की जंगल की आग का विश्लेषण प्रकाशित किया। इसमें जमीन जलाने के आर्थिक कारणों और पारंपरिक किसानों के साथ किए जाने वाले व्यवहार को लेकर चिंताएं शामिल थीं।
  • 24 अगस्त 2026: राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने रियाउ के पेकनबारू में अधिकारियों के साथ बैठक में आग लगाने पर प्रतिबंध को मजबूत करने, जमीन साफ करने में सहायता की व्यवस्था करने और कंपनियों की संदिग्ध भूमिका की जांच के निर्देश दिए।
  • 12 अक्टूबर 2026: जुन्हुर ने संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन सीओपी31 में इंडोनेशिया के प्रतिनिधिमंडल की तैयारियों के दौरान कानूनी संशोधन प्रस्तावित करने पर सहमति की घोषणा की।
  • 13 अक्टूबर 2026: जुन्हुर ने जकार्ता में प्रसास्ती इंडोनेशिया पॉलिसी फोरम में संशोधन, रियायतों की जांच और आग बुझाने के प्रयासों पर चर्चा की।

रिपोर्टों में फोरम में दिए गए वक्तव्य की तारीख 13 अक्टूबर पर सहमति है, लेकिन सप्ताह के दिन को लेकर अंतर है: एक रिपोर्ट इसे सोमवार बताती है, जबकि अन्य मंगलवार। नीति की घोषणा की तारीख लगातार 13 अक्टूबर 2026 ही दी गई है।

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बिना खेती वाली रियायती जमीन की जांच क्यों हो रही है

जुन्हुर ने कालीमंतान में बिना खेती वाली रियायतों के क्षेत्रों में लगी आग पर ध्यान केंद्रित किया है। कालीमंतान बोर्नियो द्वीप का इंडोनेशियाई हिस्सा है। रियायत के तहत किसी कंपनी को तय क्षेत्र में, उसके परमिट और कानूनी दायित्वों के अधीन, काम करने का अधिकार मिलता है। उस सीमा के भीतर आग लगने पर इस बात की जांच हो सकती है कि इलाके का प्रबंधन और सुरक्षा कैसे की गई।

मंत्री ने कहा कि अभी तक खेती के लिए इस्तेमाल नहीं हुई जमीन पर बार-बार आग लगना संदिग्ध है, क्योंकि इससे बागान क्षेत्र खोलने का आसान रास्ता मिल सकता है। उन्होंने इसकी तुलना उत्पादक बागानों में लगने वाली आग से की, जहां लपटें मौजूदा फसलें नष्ट कर सीधे कंपनी के कारोबार को नुकसान पहुंचाती हैं।

यह अंतर जांच का कारण है, अपराध का प्रमाण नहीं। यह तय करने के लिए जमीनी जांच और सबूत जरूरी हैं कि आग जानबूझकर लगाई गई, कहीं और से फैली या किसी अन्य परिस्थिति में लगी। सरकार का कहना है कि जानबूझकर आग लगाना साबित होने पर कड़ी सजा दी जाएगी।

प्रस्तावित रोपण प्रतिबंध का उद्देश्य आग लगने के बाद मिलने वाले संभावित लाभ को खत्म करना है। अधिकारियों को आशंका है कि अगर बिना खेती वाला इलाका जलने के बाद ऑयल पाम या किसी अन्य औद्योगिक फसल के लिए विकसित किया जा सकता है, तो आग लगाना जमीन का इस्तेमाल बदलने का कम खर्चीला रास्ता बन सकता है।

विवरणों में इस उपाय को अलग-अलग तरह से औद्योगिक फसलों पर प्रतिबंध और जली हुई, खाली रियायती जमीन पर बागानी फसलें लगाने पर रोक बताया गया है। इसका सटीक दायरा, कानूनी आधार और निर्णय प्रक्रिया सार्वजनिक रूप से तय नहीं की गई है। जहां पहले कोई फसल थी ही नहीं, वहां दोबारा रोपण कहने के बजाय भविष्य में रोपण पर प्रतिबंध कहना अधिक सटीक है।

रियायतों पर रोक दोषसिद्धि नहीं है

रियायतें रखने वाली 68 कंपनियों की गतिविधियों पर रोक प्रवर्तन और सत्यापन प्रक्रिया का हिस्सा है। इससे यह साबित नहीं होता कि सभी 68 कंपनियों ने जानबूझकर आग लगाई। घोषणा में किसी भी कंपनी के खिलाफ जांच पूरी होने का निष्कर्ष भी नहीं दिया गया है।

जुन्हुर ने कहा कि कंपनियों के मामलों में सख्त दायित्व के सिद्धांत के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए, खासकर रियायत वाले क्षेत्रों में लगी आग के मामले में। पर्यावरण कानून में सख्त दायित्व का अर्थ है कि आम तौर पर गलती साबित किए बिना भी जिम्मेदारी तय हो सकती है। यह जानबूझकर आपराधिक कृत्य करने की पुष्टि से अलग बात है।

मंत्री ने यह भी कहा कि आग लगाने के संदेह वाली कंपनियों और जिनकी जमीन आग से प्रभावित हुई, उनके बीच अंतर करने के लिए सत्यापन जरूरी है। इसलिए अधिकारियों को पर्यावरणीय जिम्मेदारी, आग रोकने के दायित्व और जानबूझकर आग लगाने के सबूत से जुड़े अलग-अलग सवालों के जवाब देने होंगे।

अगस्त में प्रबोवो के निर्देशों में पुलिस, अभियोजकों और खुफिया एजेंसियों से कंपनियों की भूमिका की जांच करने और जिम्मेदार पाई गई कंपनियों के परिचालन परमिट रद्द करने को कहा गया था। सादिनो ने कहा कि परिवारों से जुड़े प्रावधान की समीक्षा करने से मौजूदा नियमों के तहत आग रोकने और उस पर कार्रवाई करने की कंपनियों की जिम्मेदारियां कम नहीं होतीं।

इन बयानों की रिपोर्टों में किसी कंपनी का नाम, मामले का अंतिम निष्कर्ष या संदिग्धों के रूप में नामित दर्जनों लोगों का विवरण नहीं दिया गया। प्रवर्तन के आंकड़े जांच के पैमाने को दिखाते हैं, लेकिन यह नहीं बताते कि कितनी जांचों के बाद दंड या अभियोजन होगा।

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योजना में किफायती विकल्प भी शामिल

इंडोनेशियाई वन रियायतधारक संघ, जिसे एपीएचआई के नाम से जाना जाता है, इस प्रावधान में संशोधन का समर्थन करता है। हालांकि, इसके अध्यक्ष सोएवार्सो ने कहा कि समुदायों को आग लगाने के तरीके से हटने के लिए व्यावहारिक सहायता चाहिए। उन्होंने ऐसे उपकरण, तकनीकी मार्गदर्शन और वित्तीय मदद की मांग की जिससे जमीन साफ करने के दूसरे तरीके किफायती बन सकें।

सोएवार्सो ने कहा कि केवल भूखंड का आकार सुरक्षा तय नहीं कर सकता। मौसम, जमीन की विशेषताएं, पानी की उपलब्धता, उपकरण और कर्मचारियों की संख्या भी इस बात को प्रभावित करती है कि आग पर काबू पाया जा सकता है या नहीं। उनका यह रुख कानूनी बदलाव को उसे लागू करने की समुदायों और अधिकारियों की क्षमता से जोड़ता है।

जुन्हुर ने कहा कि रियायत वाले क्षेत्रों से बाहर जमीन साफ करने के लिए धन की जरूरत वाले स्थानीय समुदायों के लिए सरकार समाधान तलाशेगी। संभावित सहायता दक्षिण सुमात्रा, कालीमंतान और अन्य निर्दिष्ट इलाकों को मिलेगी। उन्होंने आग से होने वाले उत्सर्जन से बचते हुए जमीन साफ करने की लागत पूरी करने के लिए जलवायु वित्तपोषण को एक संभावित तरीका बताया।

प्रस्तावित सहायता अभी तक ऐसा वित्तपोषित कार्यक्रम नहीं है जिसके पात्रता नियम, बजट या शुरुआत की तारीख प्रकाशित हुई हो। इसके संभावित पैमाने को लेकर भी विवरण अलग-अलग हैं: एक में कुल क्षेत्रफल कुछ हजार हेक्टेयर से कम बताया गया है, जबकि दूसरे में जुन्हुर के हवाले से कहा गया है कि क्षेत्रफल लाखों हेक्टेयर तक नहीं पहुंचेगा। किसी भी विवरण से सत्यापित कुल क्षेत्रफल तय नहीं होता।

प्रबोवो के अगस्त के प्रस्ताव में एक और रास्ता दिया गया था: निवासी स्थानीय अधिकारियों के जरिए सहायता मांगेंगे और किसान समूह जमीन साफ करने का काम व्यवस्थित करेंगे। इसके लिए सरकारी सब्सिडी वाले केयूआर ऋण सहकारी समितियों के माध्यम से दिए जा सकते हैं। ऋण और जलवायु वित्तपोषण अलग-अलग साधन हैं; इनके बीच कोई अंतिम संबंध घोषित नहीं किया गया है।

सादिनो ने आदिवासी और स्थानीय समुदायों, क्षेत्रीय सरकारों तथा शिक्षाविदों से परामर्श करने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि कानून में बदलाव निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होने चाहिए और जहां जरूरी हो, संबंधित सरकारी तथा क्षेत्रीय नियमों में भी संशोधन होना चाहिए।

2023 की आग का विश्लेषण क्या बताता है

संयुक्त राष्ट्र आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्यालय का 2023 की जंगल की आग का विश्लेषण, जो 17 सितंबर 2024 को प्रकाशित हुआ था, मौजूदा बहस के पीछे के जोखिमों का उपयोगी पैमाना देता है। इसके अनुसार 2023 में 11.6 लाख हेक्टेयर जमीन जली, जो 2022 के जले हुए क्षेत्रफल से पांच गुना थी।

विश्लेषण में 98 प्रतिशत आग के लिए मानवीय गतिविधियों को जिम्मेदार बताया गया और फसलों, खासकर ऑयल पाम, के लिए कम लागत में जमीन साफ करने को एक प्रमुख कारण माना गया। इसमें अल नीनो से जुड़ी लंबे समय तक चली शुष्क परिस्थितियों को भी 2023 में आग बढ़ने का अहम कारण बताया गया। आग का मानवीय स्रोत और शुष्क मौसम एक साथ असर डाल सकते हैं: एक आग शुरू करता है और दूसरा उसे काबू करना मुश्किल बनाता है।

अध्ययन में जनवरी से सितंबर 2023 के बीच 2,608 हॉटस्पॉट दर्ज किए गए, जबकि 2022 की इसी अवधि में इनकी संख्या 441 थी। यह करीब 5.9 गुना है। दक्षिण कालीमंतान, मध्य कालीमंतान और दक्षिण सुमात्रा सबसे अधिक प्रभावित प्रांतों में थे। ये इलाके उन क्षेत्रों से मेल खाते हैं जहां अब जमीन साफ करने के वैकल्पिक तरीकों के लिए सहायता पर चर्चा हो रही है।

हॉटस्पॉट ताप के ऐसे संकेत हैं जिनका पता लगाया जाता है; ये जले हुए हेक्टेयर का सीधा माप या जानबूझकर लगाई गई आग की प्रमाणित संख्या नहीं हैं। हॉटस्पॉट की कुल संख्या की तुलना करते समय पता लगाने की अवधि और तरीके भी महत्वपूर्ण होते हैं।

विश्लेषण में चेतावनी दी गई कि आग पर प्रतिबंधों की आलोचना इसलिए हुई है क्योंकि उनका असर पारंपरिक किसानों पर अनुपातहीन रूप से पड़ सकता है, जबकि बड़ी कंपनियों का पर्यावरणीय प्रभाव अधिक रहा है। यह निष्कर्ष कानूनी पाबंदियों के साथ किफायती विकल्प और परिवारों तथा कारोबारों पर समान रूप से लागू होने वाली व्यवस्था रखने के पक्ष को मजबूती देता है।

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पानी की कमी से आग बुझाने का लक्ष्य जटिल

जुन्हुर ने कहा कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी, जिसे बीएनपीबी के नाम से जाना जाता है, के साथ चर्चा के बाद उन्हें उम्मीद है कि आग पूरे एक महीने के बजाय कुछ हफ्तों में बुझा दी जाएगी। अक्टूबर के फोरम में यह एक लक्ष्य के रूप में कहा गया था, न कि इस पुष्टि के रूप में कि आग पर काबू पा लिया गया है।

उन्होंने सीमित जल आपूर्ति और आग पर पानी गिराने वाले विमानों के संचालन में आने वाली दिक्कतों का जिक्र किया। इंडोनेशिया ने आग बुझाने के लिए हजारों कर्मियों को तैनात किया था। इस कार्रवाई में जिला और प्रांतीय प्रशासन समेत कई संस्थाएं शामिल थीं।

आग बुझाने की मौजूदा चुनौती से पहले इंडोनेशिया में अगस्त में बड़े पैमाने पर दमकल तैनाती और कालीमंतान में सितंबर में पीटलैंड की आग पर कार्रवाई हुई थी। वहां स्वयंसेवकों ने सतह के नीचे लगी आग तक पहुंचने के लिए पंप, पाइप और अस्थायी कुओं का इस्तेमाल किया। सूखी पीट जमीन के नीचे सुलगती रह सकती है और बुझी दिखने वाली जगहों पर फिर आग लग सकती है, इसलिए पानी तक पहुंच खास तौर पर महत्वपूर्ण है।

जुन्हुर ने कहा कि विदेश से मिलने वाली सहायता के प्रस्तावों का उनकी उपयोगिता के आधार पर आकलन किया जाएगा। इंडोनेशिया की मौजूदा तैनाती के मुकाबले अतिरिक्त कर्मियों की छोटी टीमें सीमित असर डाल सकती हैं। वहीं, अतिरिक्त विमानों को परिचालन स्थितियों और पानी की उपलब्धता के अनुकूल होना होगा।

शुरुआती कार्रवाई पर जोर नया नहीं है। कैबिनेट सचिवालय के 2021 के रोकथाम संबंधी बयान के मुताबिक राष्ट्रपति जोको विडोडो ने अधिकारियों को रोजाना हॉटस्पॉट की निगरानी करने, गांव के स्तर पर कार्रवाई करने और जलाशयों, नहरों, कुओं तथा अन्य तरीकों से पीटलैंड को नम रखने का निर्देश दिया था।

उस समय इंडोनेशिया के राष्ट्रपति विडोडो ने चेताया था कि आग बुझाना मुश्किल हो जाने तक इंतजार न किया जाए।

"रोकथाम को प्राथमिकता दें। देर न करें, क्योंकि अगर देर हो गई और हम जितने चाहें उतने पानी गिराने वाले विमान तैनात कर दें, तब भी हमारे अनुभव के अनुसार आग बुझाना मुश्किल होगा," राष्ट्रपति ने कहा।

स्वास्थ्य जोखिम और जलवायु दावों का अलग-अलग आकलन जरूरी

सरकार का कहना है कि धुएं से जुड़े तीव्र श्वसन संक्रमणों से निपटना उसकी कार्रवाई का हिस्सा है। बच्चों, बुजुर्गों और अन्य संवेदनशील समूहों को विशेष जोखिम है। प्रस्तावित कानूनी संशोधन के साथ ऐसी बीमारियों की कोई मौजूदा राष्ट्रीय संख्या नहीं दी गई।

संयुक्त राष्ट्र की आपदा संबंधी रिपोर्ट में कालीमंतान और सुमात्रा में वायु गुणवत्ता के गंभीर रूप से बिगड़ने का उल्लेख है। धुंध दक्षिण-पूर्व एशिया के अन्य हिस्सों तक भी पहुंची। रिपोर्ट बार-बार धुएं के संपर्क में आने से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर और परिवहन, पर्यटन तथा रोजमर्रा की जिंदगी में आई बाधा का जिक्र करती है।

जुन्हुर ने आग से बचने के जरिए उत्सर्जन रोकने के लिए वैकल्पिक जमीन-सफाई सहायता को जलवायु वित्तपोषण से जोड़ा। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र का विश्लेषण दिखाता है कि जली हुई जमीन का क्षेत्रफल अकेले जलवायु पर असर का पैमाना नहीं हो सकता। रिपोर्ट के अनुसार 2023 में जला हुआ अधिकांश इलाका झाड़ीदार जमीन और क्षरित जंगल था। जला हुआ क्षेत्र बड़ा होने के बावजूद 2022 के मुकाबले ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन कम था।

जली हुई वनस्पति और मिट्टी का प्रकार मायने रखता है। पीट में जमा जैविक पदार्थ होता है, इसलिए सतह के नीचे तक पहुंचने वाली आग लगातार धुआं पैदा करने के साथ जमा कार्बन भी छोड़ सकती है। उत्सर्जन में कमी का आकलन करने के लिए केवल सहायता पाने वाले हेक्टेयर गिनना पर्याप्त नहीं होगा।

इसलिए अब ठोस फैसले लेने होंगे: प्रस्तावित संशोधन की भाषा, परामर्श की व्यवस्था, जमीन साफ करने के विकल्पों के लिए धन और जली हुई रियायती जमीन पर रोपण सीमित करने का कानूनी ढांचा। किसी सुनवाई, मतदान, सहायता की समय-सीमा या अंतिम कार्यान्वयन तारीख की घोषणा नहीं हुई है। फिलहाल समय-सीमा के तौर पर जुन्हुर का जारी आग को कुछ हफ्तों में बुझाने का लक्ष्य है।

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मुख्य बातें

  • इंडोनेशिया कानून संख्या 32, 2009 की धारा 69(2) में संशोधन की योजना बना रहा है। इससे प्रति परिवार दो हेक्टेयर तक जमीन जलाने से जुड़ी स्थानीय परंपरा संबंधी छूट हट जाएगी।
  • कानून पहले से ही आग लगाकर जमीन साफ करने पर रोक लगाता है। पारंपरिक प्रथा संबंधी मौजूदा प्रावधान में स्थानीय फसलों और अग्नि-रोधी पट्टियों की शर्त शामिल है।
  • जुन्हुर ने कहा कि रियायतें रखने वाली 68 कंपनियों की गतिविधियों पर सत्यापन के लिए रोक लगाई गई है और दर्जनों लोगों को संदिग्ध के रूप में नामित किया गया है।
  • एक अलग प्रस्ताव जली हुई, पहले बिना खेती वाली रियायती जमीन पर औद्योगिक फसलें लगाने पर रोक लगाएगा। इसका कानूनी विवरण अभी तय नहीं है।
  • दक्षिण सुमात्रा, कालीमंतान और अन्य क्षेत्रों के समुदायों के लिए जमीन साफ करने के वैकल्पिक तरीकों की सहायता पर चर्चा हो रही है, जिसमें संभावित जलवायु वित्तपोषण शामिल है।
  • संयुक्त राष्ट्र के अनुसार 2023 में 11.6 लाख हेक्टेयर जमीन जली। उसने चेतावनी दी कि आग पर प्रतिबंधों का असर पारंपरिक किसानों पर अनुपातहीन रूप से पड़ सकता है।
  • संशोधन को कानून नहीं बनाया गया है और संसदीय समय-सारिणी की घोषणा नहीं हुई है। जुन्हुर का लक्ष्य जारी आग को कुछ हफ्तों में बुझाना है।
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