जंगल के नीचे धधकती आग
इंडोनेशियाई बोर्नियो के ऊपर का आसमान बारिश से नहीं, बल्कि धुएँ से भारी और अंबर रंग का हो गया है। कालिमंतान के जंगलों और खेतों में लगी आग का घना धुआँ मलेशिया, ब्रुनेई, सिंगापुर और फिलीपींस तक फैल गया है। इससे रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है और सांस की तकलीफ के कारण लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं।
विषय-सूची
जमीन पर खतरा अक्सर छिपा रहता है। सतह पर लपटें छोटी दिख सकती हैं, जबकि आग नीचे सूखी पीट मिट्टी में फैलती रहती है। स्वयंसेवक मिट्टी खोदते हैं, भूमिगत नालियों में पानी डालते हैं और रातभर काम करते हैं, ताकि उन आगों को रोक सकें जो बुझी हुई लगने के कई दिन बाद फिर भड़क सकती हैं।
इस रिपोर्ट के लिए उपलब्ध कराई गई सामग्री के अनुसार, जुलाई की शुरुआत से इंडोनेशियाई बोर्नियो में करीब 200,000 हेक्टेयर जंगल और खेत आग से प्रभावित हुए हैं। ये आग एक बड़े राष्ट्रीय संकट का हिस्सा हैं। लंबे सूखे मौसम के दौरान इंडोनेशिया में हजारों आग के हॉटस्पॉट दर्ज किए गए हैं, जिसे शक्तिशाली अल नीनो प्रभाव ने और तीव्र किया है।
35 वर्षीय स्वयंसेवी अग्निशमनकर्मी द्वि सुजातमोको एक महीने से अधिक समय से धुएँ के बीच काम कर रहे हैं। उनके अनुसार, हवा का असर आंसू गैस जैसा है और नाक तथा आंखों में तुरंत जलन होती है।
जब आग बेकाबू हो जाती है, तो इससे बहुत से लोगों को नुकसान पहुंचता है। सिर्फ इंसानों को नहीं, बल्कि जानवरों और पेड़-पौधों को भी। अगर भूमिगत आग फैल जाए और उस पर काबू न रहे, तो नुकसान बहुत बड़ा होता है।
स्वयंसेवकों में कई इंडोनेशियाई दायक और बंजार समुदायों के लोग हैं, जो इस जमीन और यहां के जलमार्गों को जानते हैं। वे हाथ के औजारों, पोर्टेबल पंपों, गाड़ियों, पाइपों और अस्थायी कुओं की मदद से ऐसी आग का सामना करते हैं, जो सतह के नीचे फैल सकती है और जिसकी लपटें दिखाई नहीं देतीं।
पीट की आग बुझाना इतना मुश्किल क्यों है
पीट उन पौधों से बनती है जो हजारों साल तक जलभराव वाली परिस्थितियों में जमा होकर आंशिक रूप से सड़ते रहे हैं। पीटलैंड में पानी भरा होने के कारण ऑक्सीजन कम होती है और अपघटन धीमी गति से होता है। जैविक पदार्थों की परतें जमा होती जाती हैं। कालिमंतान के कुछ हिस्सों में इनकी गहराई 20 मीटर से भी अधिक है।
इसी वजह से पीटलैंड कार्बन के अहम भंडार हैं। पौधे जिस कार्बन को सोखते हैं, वह जमीन के नीचे जमा रहता है और जल्दी वातावरण में वापस नहीं पहुंचता। इंडोनेशिया के उष्णकटिबंधीय पीटलैंड पृथ्वी के सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक कार्बन भंडारों में शामिल हैं।
लेकिन पीट को सुखाने पर यही गुण आग का बड़ा खतरा बन जाता है। बागान विकसित करने के लिए आमतौर पर नहरें और पंप लगाए जाते हैं, ताकि भूजल का स्तर नीचे किया जा सके। जमीन सूखने के बाद उसमें आसानी से आग लग सकती है और बारिश न होने की लंबी अवधि में भी वह ज्वलनशील बनी रह सकती है।
इंडोनेशियाई संरक्षण संगठन यायासन कोन्सेरवासी आलम नुसंतारा से जुड़ी पीटलैंड शोधकर्ता डॉ. निसा नोविता बताती हैं कि गहरी पीट में प्रति हेक्टेयर 6,000 टन से अधिक कार्बन हो सकता है। शोधकर्ता की ओर से दिए गए तुलनात्मक आंकड़े के अनुसार, यह करीब 4,800 कारों के एक साल के कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन के बराबर है।
पीटलैंड कार्बन जमा करने में बेहद प्रभावी हैं, क्योंकि जलभराव वाली परिस्थितियां अपघटन की गति धीमी कर देती हैं। इससे कार्बन हजारों साल तक जमीन के नीचे जमा हो सकता है। लेकिन यही पीटलैंड सूखने या जलने पर कार्बन बम बन सकते हैं, क्योंकि उनमें जमा कार्बन तेजी से वातावरण में पहुंच सकता है।
आग जब इस पदार्थ तक पहुंचती है, तो वह जमीन के नीचे कई हफ्तों तक सुलग सकती है। सतह पर डाला गया पानी जलती हुई परत तक न पहुंचे, ऐसा हो सकता है। अग्निशमनकर्मियों को जमीन में तब तक पानी भरना पड़ता है, जब तक पीट लगभग दलिया जैसी न हो जाए। इस दौरान वे बार-बार जांचते हैं कि नीचे गर्मी या धुआँ तो नहीं है।
क्षेत्रीय असर वाला कार्बन बम
पीट जलने से कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और मीथेन निकलती हैं। कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन ग्लोबल वार्मिंग बढ़ाती हैं, जबकि अधिक मात्रा में कार्बन मोनोऑक्साइड जहरीली होती है। आग से पैदा हुए महीन कण फेफड़ों के सबसे गहरे हिस्सों में पहुंचकर रक्तप्रवाह में जा सकते हैं।
लीसेस्टर विश्वविद्यालय की प्रोफेसर सुसान पेज तीन दशकों से एशियाई पीटलैंड का अध्ययन कर रही हैं। उनका कहना है कि धुएँ से प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोग जहरीली गैसों के साथ बेहद छोटे कण भी सांस के जरिए अंदर ले रहे हैं।
वे जहरीली कार्बन मोनोऑक्साइड सांस के साथ ले रहे हैं। साथ ही बेहद बारीक कण भी, जो फेफड़ों की वायुकोषिकाओं से होकर रक्तप्रवाह में पहुंच सकते हैं और शरीर के दूसरे हिस्सों में भी समस्याएं पैदा कर सकते हैं, जिनमें दिल से जुड़ी समस्याएं शामिल हैं।
कार्बन बम शब्द का इस्तेमाल कार्बन के बड़े भंडार के अचानक मुक्त होने के लिए किया जाता है। इसका यह मतलब नहीं कि पीट का हर हेक्टेयर एक ही घटना में अपना पूरा कार्बन छोड़ देगा। यह उस खतरे को दर्शाता है कि धीरे-धीरे जमा हुआ प्राकृतिक भंडार जमीन को सुखाकर जलाने पर तेजी से ग्रीनहाउस गैसों में बदल सकता है।
आग उस वनस्पति को भी नष्ट कर देती है जो पीट को नम और स्थिर बनाए रखने में मदद करती है। आग के बाद खुली जमीन तेजी से सूख सकती है, जिससे आगे आग लगने की आशंका बढ़ जाती है। बार-बार जलने से ऐसा चक्र बन सकता है जिसमें क्षतिग्रस्त जमीन को बहाल करना लगातार कठिन होता जाता है।
पेज का कहना है कि सूखे हुए पीटलैंड में आग न लगी हो, तब भी कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन होता है। इस लिहाज से लपटें जलनिकासी, जमीन के उपयोग में बदलाव और दीर्घकालिक उत्सर्जन से जुड़ी बड़ी समस्या का सबसे दिखाई देने वाला हिस्सा हैं।
धुआँ सीमाएं पार कर रहा है
इंडोनेशिया की आग का धुआँ मलेशिया, ब्रुनेई, सिंगापुर और फिलीपींस के कुछ हिस्सों तक फैल गया है। कुछ इलाकों में वायु गुणवत्ता अस्वास्थ्यकर स्तर तक पहुंच गई है। उपलब्ध कराई गई सामग्री में बताए गए सबसे गंभीर मामलों में प्रदूषण विश्व स्वास्थ्य संगठन के सुझाए स्तर से लगभग 75 गुना अधिक दर्ज किया गया।
इंडोनेशिया के स्वास्थ्य मंत्रालय ने जुलाई और अगस्त के बीच जमीन और जंगलों की आग से जुड़े श्वसन संक्रमण के 50,000 से अधिक मामले दर्ज किए। इनमें से 12,000 से अधिक मामले पांच साल से कम उम्र के बच्चों के थे।
इंडोनेशिया के सबसे बुरी तरह प्रभावित शहरों में शामिल बंजारबारू में दृश्यता घटने के कारण स्कूल बंद कर दिए गए हैं। एक शिक्षण सहायक ने बताया कि हालात ऐसे थे कि लोगों को अपने पैर तक मुश्किल से दिखाई दे रहे थे। स्थानीय लोगों ने खांसी, गले में खराश, नाक बहने, सिरदर्द और आंखों में जलन की शिकायत की है।
मलेशिया के सारावाक राज्य में प्रदूषण गंभीर होने के दौरान करीब 600 स्कूल बंद किए गए, जिससे लगभग 200,000 विद्यार्थी प्रभावित हुए। सिंगापुर ने एन95 मास्क का भंडार जुटाकर और स्कूलों में बाहरी गतिविधियां कम करने की योजना बनाकर वायु गुणवत्ता और बिगड़ने की तैयारी की है। फिलीपींस के पलावन प्रांत के लोगों ने जली हुई चीजों जैसी गंध और आंखों तथा गले में जलन की शिकायत की है।
धुएँ से परिवहन भी प्रभावित होता है। इससे वाहन चालकों की दृश्यता घटती है और हवाई अड्डों, समुद्री मार्गों तथा सड़क यातायात पर असर पड़ सकता है। मूल आग से दूर रहने वाले समुदायों को भी इसकी आर्थिक कीमत चुकानी पड़ती है, जबकि लपटों के सबसे करीब रहने वाले लोगों को स्वास्थ्य का सबसे बड़ा जोखिम झेलना पड़ता है।
आग बार-बार क्यों लौटती है
इंडोनेशिया का पीटलैंड संकट दशकों से जमीन के उपयोग में हो रहे बदलावों से जुड़ा है। सुहार्तो के शासनकाल में कालिमंतान के बड़े वर्षावन और दलदली इलाके लकड़ी कटाई, बागानों और बड़ी विकास परियोजनाओं के लिए खोले गए। नहरों के जरिए उन पीटलैंड का पानी निकाला गया जो सदियों से नम बने हुए थे।
बागान कृषि का संबंध अक्सर तेल पाम और अन्य फसलों से होता है, जिन्हें बड़े और एकसमान क्षेत्रों में उगाया जाता है। इन परियोजनाओं से रोजगार और निवेश आ सकता है, लेकिन जमीन साफ करने और पानी निकालने से आसपास का इलाका आग की चपेट में आ सकता है। फिर तेज हवाएं, सूखी वनस्पति और भूजल का निचला स्तर आग को तेजी से फैलने देते हैं।
कभी-कभी आग के लिए स्थानीय समुदायों को जिम्मेदार ठहराया जाता है, क्योंकि खेती की कुछ पारंपरिक विधियों में छोटे खेत साफ करने के लिए नियंत्रित आग का इस्तेमाल होता है। पश्चिम कालिमंतान के दायक कनायतन समुदाय के प्रतिनिधि तोनो का कहना है कि इन समुदायों को अक्सर बलि का बकरा बनाया जाता है।
पहाड़ी इलाकों में खेती की जड़ें प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखने की सोच में हैं। इस पारंपरिक तरीके में योजना, सावधानी और पीढ़ी-दर-पीढ़ी मिलने वाला ज्ञान शामिल है।
छोटे क्षेत्र में नियंत्रित आग और औद्योगिक स्तर पर जमीन साफ करने के पैमाने तथा जोखिम अलग-अलग हैं। पारंपरिक किसान सीमित समय और स्थानीय नियमों के तहत काम कर सकते हैं, जबकि बड़े भूमि पट्टे हजारों हेक्टेयर में फैले हो सकते हैं और पूरे पीटलैंड के जल तंत्र को बदल सकते हैं। हर आग के कारण की जांच जरूरी है, लेकिन व्यापक रिकॉर्ड जमीन से पानी निकालने, कमजोर निगरानी, शुष्क मौसम और असुरक्षित तरीके से जमीन साफ करने की ओर इशारा करता है।
इस रिपोर्ट के लिए उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, 2025 में कालिमंतान में लगभग 160,000 हेक्टेयर जंगल नष्ट हुए। यह इंडोनेशिया में देशभर में हुए कुल वन नुकसान के एक तिहाई से अधिक था। साफ की गई जमीन के बड़े हिस्से को बागानों और एकल फसल वाली खेती के अन्य रूपों में बदला गया।
अग्निशमनकर्मियों पर थकान और छिपे खतरे
स्वयंसेवी दल ऐसी परिस्थितियों में काम कर रहे हैं जो लपटों के सीधे संपर्क से बचने पर भी उनकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकती हैं। धुएँ के संपर्क में वे लगातार रहते हैं, कुछ इलाकों में सुरक्षा उपकरण सीमित हैं और मिट्टी की दरारों से अचानक तेज गर्मी निकल सकती है।
खबरों के मुताबिक, मध्य कालिमंतान में आग बुझाते समय दो स्वयंसेवकों की तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। कुछ अन्य दल आग की सीमा के पास सोए हैं, ताकि भूमिगत आग सतह पर पहुंचते ही वे कार्रवाई कर सकें।
पानी जुटाना सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। अग्निशमनकर्मी तालाब और कुएँ खोदते हैं, नहरें खोलते या उनकी मरम्मत करते हैं और जमीन के नीचे पानी पहुंचाने के लिए पीट में पाइप डालते हैं। दूरदराज के इलाकों तक वाहन नहीं पहुंच पाते, इसलिए दल छोटे पंपों और हाथ से ढोई गई सामग्री पर निर्भर रहते हैं।
सुजातमोको का कहना है कि दल थके हुए हैं और उन्हें अपने परिवारों की याद आती है, फिर भी वे काम जारी रखते हैं, क्योंकि उन्हें अपने समुदायों की रक्षा की जिम्मेदारी महसूस होती है।
हम निश्चित रूप से थक चुके हैं। हमारी ताकत जवाब दे रही है। हमें अपने परिवारों, बच्चों और पत्नियों की याद आती है। लेकिन फिलहाल हम सभी इन बातों को एक तरफ रख रहे हैं। धुएँ के इस संकट से निपटने में मदद के लिए हम अपनी पूरी कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि यह हमारा कर्तव्य है।
बारिश होने से मदद मिलेगी, लेकिन भारी बारिश से सूखा हुआ पीटलैंड अपने आप बहाल नहीं हो जाता। पानी का स्तर फिर से बहाल करना और बनाए रखना जरूरी है। जमीन को दोबारा सूखने से रोकने के लिए नहरों को बंद करना, क्षतिग्रस्त वनस्पति को फिर से लगाना और भविष्य में जमीन के इस्तेमाल पर नजर रखना पड़ सकता है।
इंडोनेशिया ने आपात कार्रवाई बढ़ाई
अधिकारियों ने जमीन पर चल रहे अभियानों और हवाई अग्निशमन, दोनों को बढ़ाया है। सुमात्रा और बोर्नियो में 24,000 से अधिक अग्निशमनकर्मी तैनात किए गए हैं, हालांकि कुछ हॉटस्पॉट तक पहुंचना अब भी संभव नहीं है।
अधिकारियों ने उन इलाकों के लिए अतिरिक्त जल बमवर्षक विमानों की मांग की है, जहां दल नहीं पहुंच पा रहे हैं। इंडोनेशिया ने जल बमबारी और हवाई गश्त में मदद के लिए 35 विदेशी पंजीकरण वाले विमानों को भी अनुमति दी है, बशर्ते वे देश के विमानन सुरक्षा नियमों का पालन करें।
इंडोनेशियाई अधिकारियों के हवाले से दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, दक्षिण सुमात्रा में 1,429, पश्चिम कालिमंतान में 1,226 और मध्य कालिमंतान में 811 हॉटस्पॉट दर्ज किए गए। पूर्वी कालिमंतान में 576 और रियाउ में 503 हॉटस्पॉट दर्ज हुए। वानिकी आंकड़ों से पता चला कि सिर्फ जुलाई में लगभग 94,000 हेक्टेयर जमीन जल गई।
राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने मध्य कालिमंतान, रियाउ और दक्षिण सुमात्रा के आग प्रभावित इलाकों का दौरा किया। सरकार ने अग्निशमनकर्मियों के लिए और जल बमवर्षक हेलीकॉप्टर तथा ऑक्सीजन की आपूर्ति का वादा किया है। इंडोनेशिया क्षेत्रीय अधिकारियों को जन-जागरूकता और आग की रोकथाम में मदद देने के लिए सैन्य और पुलिसकर्मियों को भी तैनात कर रहा है।
इंडोनेशिया और मलेशिया ने बारिश कराने की कोशिश में उपयुक्त बादलों में नमक के कण फैलाकर क्लाउड सीडिंग अभियान शुरू किए हैं। मलेशिया को साझा सीमा के पास क्लाउड सीडिंग के लिए इंडोनेशियाई हवाई क्षेत्र में विमान भेजने की अनुमति मिली है और उसने अनुरोध किए जाने पर अतिरिक्त मदद की पेशकश की है।
इन उपायों से तत्काल खतरा कम हो सकता है, लेकिन विमान और आपातकालीन दल भू-दृश्य के प्रबंधन की जगह नहीं ले सकते। हवाई पानी की बौछार आग को ठंडा कर सकती है, पर वह पीट की सबसे गहरी परत तक न पहुंचे, ऐसा हो सकता है। क्लाउड सीडिंग भी उपयुक्त बादलों की मौजूदगी पर निर्भर करती है और शुष्क मौसम खत्म नहीं कर सकती।
रोकथाम के लिए पीट को नम रखना जरूरी
पीट की आग कम करने का सबसे भरोसेमंद तरीका उसे सूखने से रोकना है। इसके लिए पानी का प्राकृतिक स्तर बहाल करना, जलनिकासी नहरों को बंद करना, बचे हुए जंगलों की रक्षा करना और गहरी पीट वाले भंडारों में विकास सीमित करना जरूरी है।
शुरुआती चेतावनी प्रणालियां छोटे आग के फैलने से पहले समुदायों को कदम उठाने में मदद कर सकती हैं। उपग्रह निगरानी से हॉटस्पॉट का पता चलता है, जबकि स्थानीय दल जमीन की गर्मी जांच सकते हैं, जिसे धुएँ या वनस्पति के कारण उपग्रह हमेशा नहीं पहचान पाते। गांवों में आग से बचाव का प्रशिक्षण और उपकरण उपलब्ध कराने से खतरनाक आपात कार्रवाई की जरूरत भी कम हो सकती है।
जवाबदेही भी कार्रवाई का एक हिस्सा है। इंडोनेशियाई पुलिस ने कुछ आग लगाने के संदेह में 72 लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि कम लागत में जमीन साफ करने के लिए आग इस्तेमाल करने के आरोप में चार कंपनियों की जांच हो रही है। जांच में जानबूझकर जमीन साफ करने, दुर्घटनावश आग लगने और पारंपरिक तरीकों के बीच फर्क करना जरूरी है। साथ ही यह भी देखना होगा कि कंपनियों ने कानूनी जल प्रबंधन और आग से बचाव के नियमों का पालन किया या नहीं।
रोकथाम की योजनाओं में मूलनिवासी समुदायों को शामिल किया जाना चाहिए, न कि उन्हें स्वतः संदिग्ध माना जाना चाहिए। मौसम के मौसमी बदलाव, मिट्टी की स्थितियों और स्थानीय जलमार्गों के बारे में उनका ज्ञान आग पर नजर रखने में मदद कर सकता है। साथ ही, शुष्क परिस्थितियों में आग के किसी भी इस्तेमाल के लिए स्पष्ट नियम जरूरी हैं, खासकर सूखे पीटलैंड के पास।
धुएँ का क्षेत्रीय असर इंडोनेशिया, मलेशिया, ब्रुनेई, सिंगापुर और फिलीपींस के बीच सहयोग की मांग करता है। धुआँ राष्ट्रीय सीमाओं के अनुरूप नहीं चलता, इसलिए द्वीपीय क्षेत्रों में आग फैलने पर सूचना साझा करना, विमानों की आवाजाही, स्वास्थ्य चेतावनी और समन्वित आपात योजना जरूरी हैं।
धुएँ के पीछे इंसानी कीमत
कार्बन बम का मुहावरा इंडोनेशिया की पीट आग से पैदा जलवायु खतरे को बयान करता है, लेकिन यह संकट तत्काल और निजी भी है। बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे, परिवार प्रदूषित हवा में सांस ले रहे हैं और स्वयंसेवक हफ्तों तक घर से दूर रह रहे हैं। कुछ अग्निशमनकर्मियों की मौत उस आपदा से समुदायों को बचाने की कोशिश में हुई है, जो जमीन की गहराई से शुरू हुई।
धुआँ इस बात की चेतावनी है कि प्राचीन आर्द्रभूमियों को खाली जमीन मानने का नतीजा क्या होता है। पीटलैंड कार्बन को इसलिए जमा रखते हैं, क्योंकि वे नम रहते हैं। जलनिकासी और सूखा जब इस सुरक्षा को खत्म कर देते हैं, तो जमा पदार्थ ईंधन बन जाता है, हवा खतरनाक हो जाती है और असर आग की मूल जगह से बहुत दूर तक फैलता है।
बारिश से बोर्नियो को अस्थायी राहत मिल सकती है, लेकिन लंबे समय तक सुरक्षा के लिए जल प्रबंधन, जमीन साफ करने की कड़ी निगरानी, स्थानीय अग्निशमनकर्मियों को मदद और आग के मौसमों के बीच भी लगातार ध्यान देना होगा। अभी लपटों का सामना कर रहे लोग ऐसा काम कर रहे हैं जिसे केवल आपात कार्रवाई से हल नहीं किया जा सकता।
मुख्य बिंदु
- जुलाई की शुरुआत से इंडोनेशियाई बोर्नियो में लगभग 200,000 हेक्टेयर जंगल और खेत प्रभावित हुए हैं।
- पीट हजारों साल तक कार्बन जमा रख सकती है, लेकिन जलनिकासी उसे भूमिगत आग के प्रति बेहद संवेदनशील बना देती है।
- धुआँ इंडोनेशिया, मलेशिया, ब्रुनेई, सिंगापुर और फिलीपींस तक फैल गया है।
- जुलाई और अगस्त के बीच इंडोनेशिया में आग से जुड़े श्वसन संक्रमण के 50,000 से अधिक मामले दर्ज हुए।
- स्वयंसेवक मिट्टी के नीचे लगी आग बुझाने के लिए पंप, कुएँ, नहरें और पाइप इस्तेमाल कर रहे हैं।
- अधिकारियों ने जमीन पर अभियान, जल बमबारी, क्लाउड सीडिंग और जांच का दायरा बढ़ाया है।
- लंबी अवधि की रोकथाम पीटलैंड को नम रखने और जमीन साफ करने पर नियंत्रण पर निर्भर करती है।






