परिवार को अवशेष मिले, लेकिन मौत की वजह नहीं बताई गई
अफगानिस्तान के दक्षिणी हेलमंद प्रांत के पूर्व पुलिस कमांडर अल्लाह दाद बड़ी ज़ई के अवशेष, तालिबान की खुफिया एजेंसी द्वारा उनकी कथित गिरफ्तारी के महीनों बाद परिवार को सौंपे गए। परिजनों का कहना है कि उनके साथ हिरासत में लिए गए एक दोस्त की भी हत्या कर दी गई और उसके अवशेष भी परिवार को लौटा दिए गए। परिजनों के मुताबिक, बड़ी ज़ई अपने पीछे तीन पत्नियां और 14 बच्चे छोड़ गए हैं।
विषय-सूची
- परिवार को अवशेष मिले, लेकिन मौत की वजह नहीं बताई गई
- गिरफ्तारी के बारे में क्या जानकारी है?
- परिजनों ने दूसरे पीड़ित और नाकाम अपील का जिक्र किया
- घटनाओं का क्रम अब भी विवादित
- आम माफी के वादे के दायरे में आने वाले पूर्व कमांडर
- सत्ता परिवर्तन के बाद यूएनएएमए ने क्या दर्ज किया
- बाद की निगरानी और लौटने वाले अफगानों के जोखिम
- तालिबान के इनकार और अनुत्तरित सवाल
- मुख्य बातें
बुनियादी घटनाक्रम को लेकर खबरें एक जैसी हैं: बड़ी ज़ई को प्रांतीय राजधानी लश्कर गाह के पुलिस जिला 1 से हिरासत में लिया गया, किसी अज्ञात जगह ले जाया गया और बाद में उनका शव परिवार को सौंपा गया। हालांकि, इस बात पर मतभेद है कि वह पांच या छह महीने पहले लापता हुए थे और शव रविवार या सोमवार को सौंपा गया।
उनकी मौत कैसे हुई, इस पर भी अहम मतभेद है। एक खबर में कहा गया है कि मौत की परिस्थितियां स्पष्ट नहीं हैं और जेल में उन्हें बुरी तरह प्रताड़ित किए जाने के पहले के आरोप का जिक्र किया गया है। परिजनों ने एक अलग बयान में कहा कि बड़ी ज़ई और उनके दोस्त को गिरफ्तारी के बाद गोली मार दी गई थी और उन्होंने तालिबान पर उनकी हत्या का आरोप लगाया। इस आरोप की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
यह मामला उन लोगों से जुड़ा है जिनकी सुरक्षा का तालिबान ने अगस्त 2021 में सत्ता में लौटने के बाद घोषित आम माफी के तहत वादा किया था। संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन अफगानिस्तान (यूएनएएमए) ने बाद में पूर्व अधिकारियों और सुरक्षा कर्मियों के खिलाफ सैकड़ों उल्लंघन दर्ज किए। इनमें ऐसे मामले भी शामिल थे जिनमें हिरासत में लोगों की मौत हुई या उनके शव परिजनों को सौंपे गए।
गिरफ्तारी के बारे में क्या जानकारी है?
खबरों के मुताबिक, बड़ी ज़ई को लश्कर गाह के पुलिस जिला 1 में तालिबान के खुफिया निदेशालय ने गिरफ्तार किया था। परिजनों ने जगह की अधिक सटीक पहचान तोरटंग के रूप में की है और कहा है कि उनके साथ एक दोस्त को भी गिरफ्तार किया गया था। कथित तौर पर दोनों को ऐसी जगह ले जाया गया, जिसके बारे में उनके परिवारों को पता नहीं था।
गिरफ्तारी की एक पहले की खबर में कहा गया था कि खुफिया कर्मियों ने बड़ी ज़ई को उनके घर के बाहर से उठाया था। उस खबर में उद्धृत प्रत्यक्षदर्शियों ने आरोप लगाया कि उन्हें पीटा गया और जबरन एक वाहन में बैठाया गया। गिरफ्तारी की कोई वजह नहीं बताई गई।
खबरों के मुताबिक, खुफिया निदेशालय ने उन्हें हिरासत में रखने से इनकार किया था। परिजनों ने कहा कि उन्हें उनके ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली, इसलिए वे यह पता नहीं लगा सके कि उन्हें कहां हिरासत में रखा गया था या उनके साथ क्या हुआ।
उनका शव कथित तौर पर लौटाए जाने से तीन महीने पहले एक सूत्र ने आरोप लगाया था कि तालिबान की जेल में बड़ी ज़ई को बुरी तरह प्रताड़ित किया जा रहा था। उस खबर में न तो जेल की जगह की पुष्टि की गई, न कथित रूप से जिम्मेदार लोगों की पहचान बताई गई और न ही कोई चिकित्सकीय निष्कर्ष दिया गया।
गिरफ्तारी के बाद हिरासत से इनकार किया जाना, जबरन गायब किए जाने के आरोप का केंद्रीय पहलू है। इस शब्द का अर्थ है अधिकारियों या उनके समर्थन से काम करने वालों द्वारा किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता छीनना और फिर उसके भाग्य या ठिकाने की जानकारी छिपाना। इस मामले में यह कानूनी परिभाषा लागू होती है या नहीं, यह तय करने के लिए गिरफ्तारी और उसके बाद की हिरासत की जांच जरूरी होगी।
परिजनों ने दूसरे पीड़ित और नाकाम अपील का जिक्र किया
बड़ी ज़ई के परिजनों का कहना है कि उनकी तलाश हेलमंद से बाहर तक चली। उन्होंने उनका पता लगाने के लिए कंधार में तालिबान नेता हिबतुल्लाह अखुंदज़ादा के कार्यालय में शिकायत की, लेकिन उनके मुताबिक, इससे कोई नतीजा नहीं निकला।
परिजनों के बयान के अनुसार, बड़ी ज़ई और उनके दोस्त की हत्या के बाद उनके अवशेष लश्कर गाह के आसपास रेतीले इलाकों में छोड़ दिए गए थे। इसके बाद सोमवार को परिवारों को उन्हें लेने के लिए प्रांतीय पुलिस कमान में बुलाया गया।
यह बयान मामले में दूसरे कथित पीड़ित का जिक्र करता है, जबकि अन्य खबरों में मुख्य रूप से पूर्व कमांडर की मौत का उल्लेख है। दोस्त का नाम नहीं बताया गया है। उसकी नौकरी, हिरासत में लिए जाने की वजह या पूर्व सुरक्षा बलों में उसकी सेवा के बारे में भी कोई जानकारी नहीं है।
परिजनों ने बताया कि उन्हें अवशेष सौंपे गए। यह फर्क अहम है, क्योंकि इससे यह पता नहीं चलता कि दोनों की मौत कब हुई, उनके शव कितनी देर बाहर पड़े रहे या उनकी पहचान कैसे की गई। किसी फॉरेंसिक जांच, मृत्यु प्रमाणपत्र या अवशेषों की हालत पर आधिकारिक स्पष्टीकरण का जिक्र नहीं है।
घटनाओं का क्रम अब भी विवादित
खबरों में घटनाओं की तारीखों का एक समान क्रम नहीं दिया गया है। अधिकांश के अनुसार, बड़ी ज़ई के अवशेष लौटाए जाने से करीब छह महीने पहले उन्हें गिरफ्तार किया गया था; एक अन्य खबर में यह अवधि पांच महीने बताई गई है। एक खबर कहती है कि प्रांतीय पुलिस कमान ने उनका शव रविवार को सौंपा और सोमवार को मरजा जिले में उनका अंतिम संस्कार हुआ। दूसरी खबरें शव सोमवार को सौंपे जाने की बात कहती हैं, जिनमें से एक में 12 अक्टूबर की तारीख दी गई है।
एक अलग खबर में गिरफ्तारी की पहले की रिपोर्ट की तारीख अफगान कैलेंडर के 6 असद 1404 बताई गई है, जो जुलाई 2025 में पड़ती है। एक अन्य खबर में जून 2026 में समाप्त हुई यूएनएएमए की रिपोर्टिंग अवधि का जिक्र है। इन संदर्भों से शव सौंपे जाने का कोई एक विश्वसनीय साल तय नहीं होता। सापेक्ष समयावधियों को सटीक तारीख नहीं माना जाना चाहिए।
इन विसंगतियों को सुलझाए बिना घटनाओं का क्रम इस तरह बताया जा सकता है:
- कथित तौर पर शव सौंपे जाने से पांच या छह महीने पहले: बड़ी ज़ई को लश्कर गाह के पुलिस जिला 1 से गिरफ्तार कर अज्ञात जगह ले जाया गया।
- लापता रहने के दौरान: परिजनों ने जानकारी हासिल करने की कोशिश की, जिसमें कंधार स्थित अखुंदज़ादा के कार्यालय से संपर्क करना भी शामिल था।
- एक खबर के मुताबिक, शव सौंपे जाने से तीन महीने पहले: एक सूत्र ने जेल में गंभीर यातना दिए जाने का आरोप लगाया।
- खबर के अनुसार रविवार या सोमवार को: प्रांतीय पुलिस कमान ने कथित तौर पर उनका शव या अवशेष लौटाए।
- एक खबर के मुताबिक सोमवार को: मरजा जिले में उनका अंतिम संस्कार हुआ।
इन मतभेदों से गिरफ्तारी के बाद अवशेष लौटाए जाने का साझा आरोप खत्म नहीं होता। हालांकि, इनकी वजह से हिरासत की अवधि और मौत की तारीख के बारे में जिम्मेदारी से कुछ कह पाना सीमित हो जाता है।
आम माफी के वादे के दायरे में आने वाले पूर्व कमांडर
बड़ी ज़ई को मरजा के निवासी और स्थानीय पुलिस के पूर्व कमांडर के रूप में बताया गया है। परिजनों ने उनकी सेवा के बारे में अधिक विस्तार से बताया: उन्होंने हेलमंद पुलिस विभाग में आतंकवाद से निपटने की जिम्मेदारी संभाली और बाद में पूर्व राष्ट्रीय खुफिया सेवा की एक इकाई की कमान संभाली।
ये विवरण उनकी पहचान को लेकर परस्पर विरोधी होने के बजाय, उनके करियर के अलग-अलग चरणों से जुड़े हो सकते हैं। इससे वह उन पूर्व सुरक्षा कर्मियों में शामिल नजर आते हैं जिनके साथ हुए बर्ताव पर यूएनएएमए की मानवाधिकार निगरानी में बार-बार ध्यान दिया गया है।
तालिबान ने बार-बार कहा है कि वे सत्ता पर काबिज होने के बाद अखुंदज़ादा द्वारा घोषित आम माफी के प्रति प्रतिबद्ध हैं। इस वादे का मकसद पूर्व सरकारी अधिकारियों और सुरक्षा कर्मियों को उनकी पिछली सेवा के लिए प्रतिशोध से बचाना था।
आम माफी अपने आप में किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी की वजह नहीं बताती और न ही यह साबित करती है कि बाद में हुई हर मौत प्रतिशोध में की गई हत्या है। हालांकि, बड़ी ज़ई के मामले में हिरासत से इनकार, गिरफ्तारी की वजह न बताना और आखिरकार अवशेष लौटाया जाना, घटनाओं के मुख्य पहलुओं को अनसुलझा छोड़ते हैं।
सत्ता परिवर्तन के बाद यूएनएएमए ने क्या दर्ज किया
अगस्त 2023 की अपनी रिपोर्ट में यूएनएएमए ने 15 अगस्त 2021 से 30 जून 2023 के बीच पूर्व अफगान सरकारी अधिकारियों और पूर्व सुरक्षा बलों के सदस्यों के खिलाफ मानवाधिकार उल्लंघन के कम से कम 800 मामले दर्ज किए।
इन निष्कर्षों में कम से कम 218 गैर-न्यायिक हत्याएं, मनमानी गिरफ्तारी और हिरासत के 424 से अधिक मामले तथा यातना और दुर्व्यवहार की 144 से अधिक घटनाएं शामिल थीं। दर्ज अन्य उल्लंघनों में जबरन गुमशुदगी और धमकियां शामिल थीं। निशाना बनाए गए लोगों में पूर्व सेना कर्मी, पुलिस अधिकारी, खुफिया अधिकारी और अफगान स्थानीय पुलिस के सदस्य शामिल थे।
गैर-न्यायिक हत्या का मतलब है कानूनी न्यायिक प्रक्रिया से बाहर की गई गैरकानूनी हत्या। मनमानी हिरासत का अर्थ है वैध कानूनी आधार या जरूरी सुरक्षा उपायों के बिना किसी की स्वतंत्रता छीनना। ये अलग-अलग तरह के उल्लंघन हैं। आंकड़ों को अलग-अलग पीड़ितों की संख्या नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि एक व्यक्ति को कई तरह के दुर्व्यवहार झेलने पड़ सकते हैं।
यूएनएएमए ने ऐसे मामले दर्ज किए जिनमें तालिबान सुरक्षा बलों ने लोगों को मारने से पहले हिरासत में लिया। कुछ की हिरासत में मौत हुई; अन्य को अज्ञात जगह ले जाया गया, जहां बाद में उनके शव मिले या परिवारों को सौंपे गए। यातना के मामलों में पाइप और केबल से पीटना, धमकियां देना और गाली-गलौज करना शामिल था।
बड़ी ज़ई के मामले के आसपास लगे आरोपों से इन घटनाओं की समानता प्रासंगिक है, लेकिन यह इस बात का सबूत नहीं कि उनके साथ क्या हुआ। पहले के निष्कर्ष एक दर्ज पैटर्न की जांच-पड़ताल की जरूरत दिखाते हैं, इस खास मौत के बारे में फॉरेंसिक निष्कर्ष नहीं।
बाद की निगरानी और लौटने वाले अफगानों के जोखिम
अक्टूबर से दिसंबर 2023 के लिए यूएनएएमए की निगरानी में पूर्व अधिकारियों और सुरक्षा कर्मियों से जुड़े गैर-न्यायिक हत्या, मनमानी हिरासत, यातना और दुर्व्यवहार के मामले दर्ज होते रहे। इसने पाकिस्तान से लौटने वाले कुछ अफगानों के लिए जोखिम भी दर्ज किए, जिनमें वे लोग शामिल थे जिनकी लौटने के बाद कथित तौर पर हत्या कर दी गई।
अक्टूबर से दिसंबर 2025 की यूएनएएमए निगरानी पर आधारित एक बाद की खबर में पूर्व सुरक्षा और रक्षा कर्मियों से जुड़े गैर-न्यायिक हत्या के कम से कम 14 मामले, मनमानी गिरफ्तारी और हिरासत के 28 मामले तथा यातना या दुर्व्यवहार के सात मामले बताए गए हैं। खबरों के मुताबिक, निशाना बनाए गए लोगों में ईरान और पाकिस्तान से हाल ही में लौटे लोग शामिल थे।
दो उदाहरणों में 9 दिसंबर को परवान के जबल अल सराज जिले में अलग-अलग घटनाओं में अज्ञात हमलावरों द्वारा गोली मारे गए पुरुष शामिल थे। एक पूर्व गृह मंत्रालय अधिकारी था; दूसरा पूर्व उप पुलिस कमांडर का चचेरा भाई था। दोनों हाल ही में ईरान से लौटे थे।
एक अन्य खबर में यूएनएएमए की 1 अप्रैल से जून 2026 के अंत तक की निगरानी के दौरान आठ हत्याओं, मनमानी गिरफ्तारी और हिरासत के 29 मामलों तथा यातना या दुर्व्यवहार के पांच मामलों का जिक्र है। ये आंकड़े 2025 के आंकड़ों से अलग अवधि के हैं। मूल रिपोर्टों और उनके दायरे की जांच किए बिना इन्हें एक साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए और न ही इनके आधार पर किसी रुझान का दावा किया जाना चाहिए।
पहचाने गए अधिकारियों और अज्ञात हमलावरों के बीच का फर्क भी अहम है। आरोप है कि कुछ मौतें तालिबान की हिरासत के बाद हुईं; अन्य मामलों में जिम्मेदार लोगों की पहचान नहीं हुई है। दोनों तरह के मामलों की जांच जरूरी है, लेकिन यह नहीं माना जा सकता कि दोनों में जिम्मेदारी एक जैसी है।
तालिबान के इनकार और अनुत्तरित सवाल
तालिबान के प्रवक्ता ज़बिहुल्लाह मुजाहिद ने 2025 की आखिरी तिमाही के लिए यूएनएएमए से जोड़े गए आंकड़ों पर सवाल उठाए और इस बात से इनकार किया कि तालिबान बलों ने संबंधित लोगों को निशाना बनाया था। उन्होंने निजी प्रतिशोध की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि कई मामलों में संदिग्धों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया गया है।
मुजाहिद ने कहा कि किसी को भी मनमाने ढंग से बदला लेने का अधिकार नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ गिरफ्तारियां अन्य गतिविधियों में संलिप्तता से जुड़ी हो सकती हैं। ये यूएनएएमए के निष्कर्षों पर सामान्य जवाब थे, बड़ी ज़ई की कथित गिरफ्तारी या मौत का स्पष्टीकरण नहीं।
यूएनएएमए की अगस्त 2023 की रिपोर्ट में कहा गया कि जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराने के लिए जांच और प्रयास बेहद सीमित रहे। उसने तालिबान अधिकारियों से आम माफी का पालन करने और पूर्व अधिकारियों तथा सुरक्षा कर्मियों के खिलाफ कथित दुर्व्यवहारों की विश्वसनीय और पारदर्शी जांच करने की अपील की।
बड़ी ज़ई के परिवार के लिए अवशेषों की वापसी से गुमशुदगी के सवाल का केवल एक हिस्सा हल होता है। इससे यह पता नहीं चलता कि गिरफ्तारी का आदेश किसने दिया, उन्हें और उनके दोस्त को कहां रखा गया था, उनकी मौत कब हुई या यातना और गोली मारे जाने के आरोपों की भौतिक सबूतों से पुष्टि होती है या नहीं।
किसी घोषित जांच, जिम्मेदारी तय करने वाले निष्कर्ष, मुकदमे या आगे की आधिकारिक प्रतिक्रिया की तारीख का जिक्र नहीं है। तत्काल अनसुलझा सवाल यह है कि क्या अधिकारी हिरासत के रिकॉर्ड और दोनों लोगों की मौतों का सत्यापन योग्य ब्यौरा देंगे।
मुख्य बातें
- तालिबान की खुफिया एजेंसी द्वारा लश्कर गाह में गिरफ्तार किए जाने की खबर के महीनों बाद अल्लाह दाद बड़ी ज़ई के अवशेष कथित तौर पर परिवार को सौंपे गए।
- खबरों में इस अवधि को लेकर मतभेद है कि यह पांच या छह महीने थी और अवशेष रविवार या सोमवार को सौंपे गए।
- परिजनों का आरोप है कि बड़ी ज़ई और उनके दोस्त को हिरासत के बाद गोली मारी गई; एक अन्य खबर में मौत की वजह स्पष्ट नहीं बताई गई है।
- खबरों के मुताबिक, खुफिया निदेशालय ने बड़ी ज़ई को हिरासत में रखने से इनकार किया था। परिजनों का कहना है कि अखुंदज़ादा के कार्यालय में की गई अपील बेनतीजा रही।
- आम माफी के बावजूद, यूएनएएमए ने अगस्त 2021 से जून 2023 के बीच पूर्व अधिकारियों और सुरक्षा कर्मियों के खिलाफ कम से कम 800 उल्लंघन दर्ज किए।
- इस मामले में मौत की सत्यापित वजह या घोषित जांच की पुष्टि नहीं हुई है।






