AI के जवाबों से समाचार राजस्व और बाजार तक पहुंच पर सवाल
इंडोनेशिया का प्रतिस्पर्धा नियामक यह जांच कर रहा है कि समाचार वितरण, पाठकों के डेटा और विज्ञापन पर डिजिटल प्लेटफॉर्म का नियंत्रण प्रकाशकों को उन कंपनियों पर तेजी से निर्भर बना सकता है या नहीं, जो उनकी पत्रकारिता का इस्तेमाल AI के जवाब तैयार करने में भी करती हैं। प्रतिस्पर्धा आयुक्त रिधो जुस्मादी ने चेताया कि नियंत्रण का यह केंद्रीकरण प्लेटफॉर्म की बाजार शक्ति मजबूत कर सकता है और प्रकाशकों की मोलभाव करने की क्षमता कमजोर कर सकता है।
विषय-सूची
- AI के जवाबों से समाचार राजस्व और बाजार तक पहुंच पर सवाल
- सारांश प्रकाशकों के कारोबारी मॉडल में कैसे बाधा डाल सकते हैं
- ट्रैफिक को लेकर चेतावनी, लेकिन महत्वपूर्ण सीमाओं के साथ
- क्या प्रकाशक खोज में दृश्यता गंवाए बिना AI के इस्तेमाल से इनकार कर सकते हैं?
- कार्रवाई से पहले KPPU को किन बातों की जरूरत है
- प्रकाशकों के मौजूदा नियम और उनके पालन को लेकर चिंताएं
- नीतिगत काम ट्रैफिक में गिरावट से आगे तक जाता है
- समयरेखा और लंबित फैसले
- मुख्य बातें
चिंता सिर्फ वेबसाइट पर घटती विजिट तक सीमित नहीं है। जब कोई प्लेटफॉर्म तय करता है कि पाठक कौन-सी खबरें देखेंगे, यह दिखाने वाला डेटा नियंत्रित करता है कि वे खबरों तक कैसे पहुंचे और कारोबारी शर्तें तय करता है, तो प्रकाशकों का अपने काम के आर्थिक मूल्य पर प्रभाव सीमित हो सकता है। AI सारांश एक और दबाव जोड़ते हैं: पाठक उस लेख को खोले बिना जानकारी पा सकते हैं, जिससे वह जानकारी ली गई है।
इंडोनेशियाई प्रतिस्पर्धा आयोग, जिसे KPPU के नाम से जाना जाता है, समाचार सामग्री के इस्तेमाल, रैंकिंग एल्गोरिदम, रेफरल डेटा और कारोबारी व्यवस्थाओं में अधिक पारदर्शिता की मांग कर रहा है। वह प्लेटफॉर्म और प्रकाशकों के बीच सार्थक बातचीत भी चाहता है। कार्रवाई तभी होगी जब प्रतिस्पर्धा कानून के उल्लंघन के पर्याप्त सबूत हों; केवल AI तकनीक का अस्तित्व इसका आधार नहीं है।
2026 की दो घटनाएं इस बहस को संस्थागत संदर्भ देती हैं। KPPU ने 29 जुलाई को गुणवत्ता पत्रकारिता के लिए प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारियों की निगरानी करने वाली इंडोनेशियाई समिति के साथ सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए। 18 सितंबर के एक अलग विवरण में इंडोनेशियाई साइबर मीडिया एसोसिएशन, यानी AMSI, ने AI Overviews और AI में सामग्री इस्तेमाल करने की अनुमति से इनकार करने के नतीजों को लेकर चिंताएं जताईं।
सारांश प्रकाशकों के कारोबारी मॉडल में कैसे बाधा डाल सकते हैं
AI Overviews खोज परिणामों वाले पेज पर सीधे तैयार किए गए सारांश दिखाते हैं। कारोबारी चिंता यह है कि जवाब पाठक को प्रकाशक की वेबसाइट पर जाने से पहले ही संतुष्ट कर सकता है। इसे आम तौर पर जीरो-क्लिक सर्च कहा जाता है: खोज से उपयोगी जानकारी मिलती है, लेकिन मूल प्रकाशन पर कोई विजिट नहीं होती।
जो प्रकाशक अपने पेजों पर विज्ञापनों से कमाई करते हैं, उनके लिए कम विजिट का मतलब विज्ञापन दिखाने के कम मौके हो सकते हैं। किसी सारांश में पत्रकारिता से ली गई जानकारी प्रसारित हो सकती है, लेकिन उससे उतने पाठक या उतना राजस्व नहीं मिलता जितना आम तौर पर वेबसाइट पर जाने से मिलता। यही वजह है कि KPPU वितरण और कमाई, दोनों की जांच कर रहा है।
AMSI के अध्यक्ष वाह्यु ध्यातमिका ने कहा कि खोज के बदलते तौर-तरीकों से समाचार वेबसाइटों पर ट्रैफिक में काफी कमी आ सकती है, परिचालन लागत बढ़ सकती है और मीडिया कंपनियों के कारोबारी मॉडल को खतरा हो सकता है। ये संभावित प्रभावों को लेकर चिंताएं हैं, किसी खास प्लेटफॉर्म के कानून तोड़ने के निष्कर्ष नहीं। परिचालन लागत में बढ़ोतरी का कोई संख्यात्मक अनुमान नहीं दिया गया।
यह अंतर महत्वपूर्ण है, क्योंकि अपने आप में ट्रैफिक में गिरावट गैरकानूनी आचरण साबित नहीं करती। KPPU को तय करना होगा कि प्लेटफॉर्म का व्यवहार प्रतिस्पर्धा को सीमित करता है या नहीं, कंपनियों के पास प्रभुत्वशाली स्थिति है या नहीं और जांच के दायरे में आया आचरण संबंधित बाजार में नुकसान पहुंचाता है या नहीं।
ट्रैफिक को लेकर चेतावनी, लेकिन महत्वपूर्ण सीमाओं के साथ
उप संचार एवं डिजिटल मामलों के मंत्री नेजार पत्रिया ने 2026 में इंडोनेशियाई पत्रकार संघ के रिट्रीट में अलग से चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि डिजिटल मीडिया का ट्रैफिक 40 प्रतिशत से अधिक गिर गया है, क्योंकि पाठक मूल समाचार वेबसाइटों के बजाय तेजी से AI प्लेटफॉर्म, सर्च इंजन और स्वचालित समाचार एग्रीगेशन की ओर जा रहे हैं।
यह आंकड़ा चिंता के पैमाने का संकेत देता है, लेकिन इसका दायरा स्पष्ट नहीं है। नेजार ने माप की अवधि, इसमें शामिल प्रकाशनों या यह नहीं बताया कि गिरावट इंडोनेशियाई मीडिया, अंतरराष्ट्रीय नमूने या किसी अन्य समूह से जुड़ी थी। इसलिए इसे इंडोनेशिया के पूरे प्रकाशन उद्योग के नुकसान का सत्यापित अनुमान नहीं माना जा सकता।
नेजार ने मीडिया पेशेवरों में घटते आशावाद पर रॉयटर्स इंस्टीट्यूट और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के शोध का भी जिक्र किया। उन्होंने किसी विशिष्ट रिपोर्ट का नाम नहीं बताया, इसलिए ट्रैफिक के आंकड़े को किसी खास डेटा सेट से सीधे जोड़ना संभव नहीं है।
यह बताते हुए कि संपादकीय नियंत्रण के साथ अब प्लेटफॉर्म के फैसले भी भूमिका निभाते हैं, नेजार ने समाचार वितरण को आकार देने वाली ताकतों का वर्णन किया:
"इसके बजाय, वितरण अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से संचालित प्लेटफॉर्म भी तय करते हैं, जो वैश्विक पाठकों के बीच दृश्यता, पहुंच और सामग्री के उपभोग के तरीकों को प्रभावित करते हैं," उन्होंने कहा।
उनकी चेतावनी में पाठकों तक पहुंच विवाद के केंद्र में है। अब कोई लेख प्रकाशित करना इस बात की गारंटी नहीं देता कि पाठक उसे न्यूज़रूम के साथ सीधे संबंध के जरिए देखेंगे। प्लेटफॉर्म यह प्रभावित कर सकते हैं कि लेख दिखेगा या नहीं और उसकी जानकारी देखने से वेबसाइट पर विजिट होगी या नहीं।
क्या प्रकाशक खोज में दृश्यता गंवाए बिना AI के इस्तेमाल से इनकार कर सकते हैं?
AMSI ने KPPU से जांच करने को कहा है कि जब प्रकाशक अपनी सामग्री का AI सिस्टम में इस्तेमाल करने की अनुमति देने से इनकार करते हैं, तो क्या होता है। एसोसिएशन के मुताबिक, ऐसा इनकार करने से खोज परिणामों में दृश्यता खो सकती है। यह एक ऐसा आरोप है जिसकी जांच जरूरी है; सभी प्लेटफॉर्म या सामग्री नियंत्रणों के बारे में यह स्थापित निष्कर्ष नहीं है।
प्रतिस्पर्धा से जुड़ा सवाल यह है कि क्या प्रकाशक के पास वास्तविक विकल्प है। AI उत्पाद में पत्रकारिता के इस्तेमाल की अनुमति और सामान्य खोज के जरिए पाठकों तक पहुंच, दो अलग-अलग कारोबारी हित हैं। अगर एक से इनकार करने पर दूसरा भी सीमित हो जाता है, तो न्यूज़रूम पर ऐसी शर्तें स्वीकार करने का दबाव पड़ सकता है जिन्हें वह अन्यथा ठुकरा देता।
KPPU के अध्यक्ष गोपरेरा पंगाबेअन ने कहा कि आयोग जांच करेगा कि अनुमति से इनकार करने के नतीजे मीडिया कंपनियों के साथ भेदभाव करते हैं या उनकी पहुंच सीमित करते हैं। उन्होंने AMSI से बाजार संरचना में बदलाव और उद्योग को हुए नुकसान के ठोस आंकड़े देने को कहा।
सटीक नियंत्रण, अनुबंध की शर्तें और खोज पर पड़े प्रभाव महत्वपूर्ण होंगे। उपलब्ध विवरण यह नहीं बताते कि किन प्रकाशकों ने अनुमति देने से इनकार किया, उनकी दृश्यता में क्या बदलाव आया या उन बदलावों को कैसे मापा गया। ऐसे सबूतों के बिना यह चिंता जांच का आधार तो बन सकती है, लेकिन उसके नतीजे को स्थापित नहीं कर सकती।
कार्रवाई से पहले KPPU को किन बातों की जरूरत है
गोपरेरा ने कहा कि KPPU को संबंधित बाजार, उसमें काम कर रहे व्यवसायों की स्थिति और संभावित नुकसान का आकलन करना होगा। संबंधित बाजार में उन उत्पादों या सेवाओं और भौगोलिक क्षेत्र का दायरा शामिल होता है, जिनके भीतर प्रतिस्पर्धा का आकलन किया जा रहा है। इसकी परिभाषा से यह तय करने में मदद मिलती है कि प्रकाशकों या ग्राहकों के पास वास्तव में कौन-से विकल्प हैं।
इसलिए जांच केवल AI सारांश शुरू होने से पहले और बाद की वेबसाइट विजिट की तुलना करने से कहीं अधिक जटिल है। आयोग को जांच के दायरे वाले आचरण का संबंध बाजार शक्ति और प्रतिस्पर्धा पर पड़ने वाले प्रभावों से जोड़ना होगा। पाठकों तक पहुंच, डेटा, वितरण और कमाई को लेकर रिधो की चिंताएं ऐसे कई पहलुओं की पहचान करती हैं जिनकी जांच की जा सकती है।
KPPU ने दो संभावित कदम बताए हैं। उल्लंघन के संकेत देने वाले सबूत मिलने पर कार्रवाई हो सकती है। अगर समस्या से नए नियमों की जरूरत सामने आती है, तो आयोग सरकार को नीतिगत बदलावों की सिफारिश कर सकता है। इनमें से किसी भी रास्ते पर पूरा हो चुका फैसला घोषित नहीं किया गया है।
AMSI भी कानून संख्या 5, 1999 में संशोधन का समर्थन करता है, ताकि इंडोनेशिया का प्रतिस्पर्धा ढांचा राष्ट्रीय सीमाओं के पार काम करने वाले AI प्लेटफॉर्म के कारोबारी मॉडल पर ध्यान दे सके। यह एक नीतिगत पक्षधरता है। किसी संशोधन को अपनाए जाने, विधायी समयसीमा या किसी खास नए प्रावधान की जानकारी नहीं दी गई है।
एजेंसी की बताई गई नीति तकनीकी नवाचार के लिए जगह छोड़ती है, साथ ही यह परखती है कि कारोबारी व्यवस्थाएं दूसरे व्यवसायों को प्रतिस्पर्धा करने से रोकती हैं या नहीं। गोपरेरा ने इस चुनौती की तुलना परिवहन ऐप से जुड़े पहले के बदलावों से की और नई सेवाओं तथा बाजार के अन्य प्रतिभागियों के अवसरों के बीच संतुलन की जरूरत बताई।
प्रकाशकों के मौजूदा नियम और उनके पालन को लेकर चिंताएं
इंडोनेशिया में पहले से ही ऐसा नीतिगत ढांचा मौजूद है जो प्लेटफॉर्म और पत्रकारिता के संबंधों को संबोधित करता है। राष्ट्रपति विनियमन संख्या 32, 2024 में गुणवत्ता पत्रकारिता को समर्थन देने के लिए प्रकाशकों के अधिकारों और डिजिटल प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारियों के नियम तय किए गए हैं। नेजार ने इसे समाचार संगठनों पर पड़ रहे दबाव के प्रति सरकार की ठोस प्रतिक्रिया बताया।
यह विनियमन प्रतिस्पर्धा उल्लंघन साबित करने की अलग जरूरत को खत्म नहीं करता। पत्रकारिता संबंधी ढांचे के तहत प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारियां और KPPU की बाजार व्यवहार संबंधी जांच आपस में जुड़ी हैं, लेकिन उनके सवाल अलग हैं: क्या कंपनियां अपने दायित्व पूरे करती हैं और क्या उनका व्यवहार गैरकानूनी रूप से प्रतिस्पर्धा को सीमित करता है।
गुणवत्ता पत्रकारिता के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म कंपनियों की जिम्मेदारी संबंधी समिति, जिसे KTP2JB कहा जाता है, के अध्यक्ष सुप्राप्तो सास्त्रो अत्मोजो ने कहा कि समिति ने विनियमन के अनुपालन को कम आंका है। उन्होंने कहा कि कंपनियों ने अपनी जिम्मेदारियां पूरी तरह नहीं निभाई हैं।
अनुपालन का कोई संख्यात्मक स्कोर, आकलन में शामिल कंपनियों की सूची या विस्तृत मूल्यांकन पद्धति नहीं दी गई। इसलिए इस रेटिंग को समिति का बताया गया आकलन समझना चाहिए, न कि हर प्लेटफॉर्म के अनुपालन का संख्यात्मक माप।
29 जुलाई को जकार्ता में KPPU और KTP2JB के बीच हुए समझौते का उद्देश्य समन्वय, डेटा के आदान-प्रदान, अध्ययनों और दोनों संस्थाओं के संबंधित दायित्वों के निर्वहन को मजबूत करना है। सुप्राप्तो ने मीडिया की स्थिरता में मदद के लिए व्यावहारिक कदमों की इच्छा जताई, जिनमें प्लेटफॉर्म के अनुपालन की निगरानी में KPPU की सहायता भी शामिल है।
नीतिगत काम ट्रैफिक में गिरावट से आगे तक जाता है
गोपरेरा ने कहा कि प्लेटफॉर्म और AI सामग्री के निर्माण, वितरण और इस्तेमाल के साथ-साथ पत्रकारिता के काम के आर्थिक मूल्य और डिजिटल विज्ञापन बाजार को भी प्रभावित करते हैं। उनका मानना है कि AI को सूचना तक पहुंच बढ़ानी चाहिए, न कि सूचना स्रोतों की विविधता घटानी चाहिए या उसे तैयार करने वाले मीडिया कारोबार को कमजोर करना चाहिए।
नेजार ने एक और पहलू उठाया: AI सिस्टम को प्रशिक्षित करने और चलाने के लिए तकनीकी कंपनियों द्वारा पत्रकारिता का इस्तेमाल। इससे खोज में दृश्यता के साथ मुआवजे और कॉपीराइट के सवाल भी चर्चा में आते हैं। सामग्री के इस्तेमाल की अनुमति, उसके लिए भुगतान और प्रकाशकों तक वापस पहुंचने वाले पाठक, अलग-अलग मुद्दे हैं, भले ही वे एक ही कारोबारी संबंध में उठें।
सरकार राष्ट्रीय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रोडमैप तैयार कर रही है। नेजार ने कहा कि इसका उद्देश्य इंडोनेशिया में AI के विकास और इस्तेमाल को दिशा देना, मीडिया संगठनों तथा प्लेटफॉर्म के बीच सहयोग को समर्थन देना और गुणवत्ता पत्रकारिता की रक्षा करना है। इसके प्रकाशन की कोई समयसीमा या विस्तृत प्रावधान नहीं बताए गए।
KPPU ने कहा कि मीडिया पर प्रभाव उसके 2026 के अध्ययन का एक प्रमुख विषय है। इसमें प्रेस परिषद और संबंधित सरकारी निकायों के साथ बातचीत शामिल है। आयोग ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, यूरोपीय संघ और अमेरिका के नियामक तरीकों की तुलना भी कर रहा है। ये तुलनाएं अध्ययन का हिस्सा हैं; इसका मतलब यह घोषणा नहीं है कि इंडोनेशिया ने कोई खास विदेशी मॉडल चुन लिया है।
समयरेखा और लंबित फैसले
इन घटनाक्रमों में एक मौजूदा विनियमन, सहयोग समझौता और AI खोज के तरीकों की करीबी जांच की मांग शामिल है। तारीख के मुताबिक कदम इस प्रकार हैं:
- 2024: राष्ट्रपति विनियमन संख्या 32, 2024 में गुणवत्ता पत्रकारिता के समर्थन के लिए प्रकाशकों के अधिकारों और डिजिटल प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारियों के नियम तय किए गए।
- 29 जुलाई, 2026: KPPU और KTP2JB ने जकार्ता में सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए।
- 18 सितंबर, 2026: AMSI की चिंताओं के विवरण में AI Overviews, अनुमति से इनकार करने के नतीजों और प्रभुत्व के संभावित दुरुपयोग की जांच की उसकी मांग का उल्लेख है।
- 2026 के दौरान: KPPU संस्थागत बातचीत और अंतरराष्ट्रीय नियामक तरीकों की तुलना के जरिए मीडिया पर AI के प्रभावों का अध्ययन कर रहा है।
2026 के आयोजन के दौरान शुक्रवार को हुई नेजार की रिट्रीट में कही गई बातों के लिए कोई तारीख नहीं बताई गई है। 18 सितंबर की तारीख AMSI के बयान के विवरण के साथ दी गई है; इससे यह साबित नहीं होता कि एसोसिएशन की KPPU के साथ बैठक उसी दिन हुई थी।
अगला ठोस कदम सबूत जुटाना है। आयोग ने AMSI से डेटा मांगा है, जबकि सामग्री के इस्तेमाल, रैंकिंग, रेफरल और कारोबारी शर्तों में पारदर्शिता रिधो की चेतावनी के केंद्र में है। उल्लंघन का कोई औपचारिक निष्कर्ष, जुर्माना, सुनवाई की तारीख या AI रोडमैप की समयसीमा घोषित नहीं की गई है।
मुख्य बातें
- KPPU ने चेताया कि पाठकों, डेटा, वितरण और राजस्व पर प्लेटफॉर्म का नियंत्रण प्रकाशकों की निर्भरता बढ़ा सकता है।
- AMSI AI सारांश की जांच चाहता है और उसका दावा है कि AI में सामग्री के इस्तेमाल से इनकार करने पर खोज में दृश्यता घट सकती है।
- नेजार पत्रिया ने ट्रैफिक में 40 प्रतिशत से अधिक गिरावट का जिक्र किया, लेकिन उसकी समयावधि या दायरा नहीं बताया।
- प्रतिस्पर्धा कानून का उल्लंघन हुआ है या नहीं, यह तय करने से पहले KPPU को ठोस सबूत चाहिए।
- 29 जुलाई, 2026 का सहयोग समझौता पत्रकारिता के लिए प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारियों की निगरानी करने वाली समिति के साथ समन्वय को समर्थन देता है।
- इंडोनेशिया AI रोडमैप तैयार कर रहा है, लेकिन इसकी जारी होने की समयसीमा या कार्रवाई का नतीजा तय नहीं है।






