2032 के लक्ष्य के बीच सुरक्षा और वित्तपोषण की कसौटियों के चलते इंडोनेशिया ने पूर्वी कालीमंतान में परमाणु स्थल अध्ययन तेज किए

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Indonesia Steps Up East Kalimantan Nuclear Site Studies as 2032 Target Faces Safety and Funding Tests

तीन तटीय स्थानों पर बढ़ा ध्यान

इंडोनेशिया भविष्य के परमाणु ऊर्जा संयंत्र के लिए पूर्वी कालीमंतान के तीन तटीय क्षेत्रों का अध्ययन तेज कर रहा है: पूर्वी कुताई में सांगट्टा, कुताई कार्तनेगारा में साम्बोजा और उत्तरी पेनाजम पासेर में बाबुलु। राष्ट्रीय ऊर्जा परिषद तीसरे स्थान का अधिक विशिष्ट नाम बाबुलु लाउत बताती है।

विषय-सूची
  1. तीन तटीय स्थानों पर बढ़ा ध्यान
  2. तट की बारीकी से जांच क्यों जरूरी है
  3. सुरक्षा अनुसंधान में भूकंप से आगे की जांच
  4. तीन स्थान राष्ट्रीय खोज में कैसे शामिल हैं
  5. तैयारियों पर दबाव डालने वाली समय-सीमाएं
  6. रिएक्टर चुनना और ग्रिड तैयार करना
  7. खर्च कौन उठाएगा और जोखिम किस पर होगा?
  8. लाइसेंस और स्थानीय भागीदारी अहम
  9. कर्मचारियों और ईंधन के लिए अलग योजनाएं जरूरी
  10. मुख्य बिंदु

राष्ट्रीय अनुसंधान एवं नवाचार एजेंसी, जिसे BRIN के नाम से जाना जाता है, स्थानों और रिएक्टर तकनीक दोनों की जांच कर रही है। औद्योगिक बिजली की बढ़ती मांग से इंडोनेशिया की ऊर्जा योजनाओं पर तेजी से आगे बढ़ने का दबाव है। तत्काल चुनौती संभावनाशील तटीय स्थानों को ऐसे स्थलों में बदलने की है जो सुरक्षा, पर्यावरण और बिजली प्रणाली की आवश्यकताओं पर खरे उतरें।

BRIN प्रमुख अरिफ सात्रिया ने कहा कि देश के औद्योगिक विकास और कम कार्बन उत्सर्जन वाली अर्थव्यवस्था की ओर बदलाव के लिए परमाणु ऊर्जा तेजी से आवश्यक होती जा रही है।

"परमाणु ऊर्जा संयंत्र अब अपरिहार्य हो गया है। BRIN इसके विकास के लिए सबसे उपयुक्त तकनीक और सबसे उपयुक्त स्थान तय करने हेतु अनुसंधान जारी रखे हुए है," अरिफ ने कहा।

योजना के आंकड़े बढ़े हैं। सरकार के पहले के प्रस्ताव में 2032 में ग्रिड को 250 मेगावाट बिजली देने वाले संयंत्र की परिकल्पना की गई थी। PLN की 2025–2034 की बिजली आपूर्ति व्यवसाय योजना में शुरुआती 500 मेगावाट शामिल हैं, जिन्हें 2032–2034 के दौरान ग्रिड से जोड़ने का लक्ष्य है। यह पहले के प्रस्ताव की क्षमता से दोगुना है।

पूर्वी कालीमंतान के किसी अंतिम स्थल, रिएक्टर आपूर्तिकर्ता या वित्तपोषण व्यवस्था की घोषणा नहीं हुई है। अगले फैसलों में केवल जमीन चुनना शामिल नहीं है: अधिकारियों को रिएक्टर का क्षेत्रीय मांग से मेल बैठाना, इसका संचालन कौन करेगा यह तय करना, धन जुटाना और आवश्यक सुरक्षा आकलन पूरे करना होगा।

PLN 2027 में निविदा शुरू करने या विकास साझेदार चुनने की तैयारी कर रहा है। इसकी तैयारियों के चलते पूर्वी कालीमंतान के अध्ययन एक व्यापक राष्ट्रीय प्रयास का हिस्सा बन गए हैं, जिसमें पहली परियोजनाओं के लिए सुमात्रा और कालीमंतान पर विचार किया जा रहा है।

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तट की बारीकी से जांच क्यों जरूरी है

सांगट्टा, साम्बोजा और बाबुलु पर ध्यान इसलिए गया है कि यहां शीतलन के लिए समुद्री जल उपलब्ध है और भूवैज्ञानिक परिस्थितियों को बड़े भूकंपों से अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है। परमाणु संयंत्र बिजली पैदा करने के लिए ऊष्मा उत्पन्न करते हैं और संचालन के दौरान शीतलन प्रणालियों को सुरक्षित ढंग से यह ऊष्मा हटानी होती है।

तटीय स्थानों पर बाढ़, सुनामी और समुद्रतट में बदलाव की भी बारीकी से जांच जरूरी है। BRIN का भूवैज्ञानिक अध्ययन संबंधी बयान मिट्टी और चट्टानों, भूकंप की आशंका, ज्वालामुखीय गतिविधि, द्रवीकरण और जमीन की हलचल के आकलन का उल्लेख करता है। द्रवीकरण तब होता है जब कंपन के कारण पानी से संतृप्त मिट्टी अपनी मजबूती खो देती है।

बयान में 4 मई को जकार्ता स्थित ऊर्जा एवं खनिज संसाधन मंत्रालय के महासचिव भवन में BRIN और भूविज्ञान एजेंसी के बीच हुई तकनीकी चर्चा का ब्यौरा है। भूविज्ञान एजेंसी की प्रमुख लाना सारिया ने आकलनों के लिए जरूरी आधार समझाया।

"किए जाने वाले विश्लेषण स्थल की भूवैज्ञानिक स्थितियों के शुरुआती मूल्यांकन के हिस्से के रूप में, क्षेत्र में मिले तथ्यों और वैज्ञानिक तरीकों पर आधारित होने चाहिए," उन्होंने कहा।

बैठक में क्षेत्रीय सर्वेक्षण के दो चरणों पर चर्चा हुई। BRIN के परमाणु ऊर्जा अनुसंधान संगठन के अध्यक्ष सैफुल बाखरी ने कहा कि कई संभावित स्थलों का अभी प्रारंभिक या डेस्क मूल्यांकन चल रहा है। इसका मतलब है कि शोधकर्ता अधिक विस्तृत जांच से पहले उपलब्ध जानकारी की समीक्षा कर रहे हैं।

BRIN अपने अध्ययन में मौसम, समुद्री परिस्थितियों, तटीय कटाव और तलछट के जमाव को भी शामिल करता है। ये प्रक्रियाएं दशकों में किसी केंद्र के आसपास की जमीन और पानी को बदल सकती हैं। एजेंसी के अनुसार परमाणु संयंत्रों को 80 साल तक संचालन के लिए डिजाइन किया जा सकता है, इसलिए आज स्थान तय करते समय दूर भविष्य की परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

सुरक्षा अनुसंधान में भूकंप से आगे की जांच

BRIN की शोधकर्ता खुुस्नुल खोतीमाह ने 20 से 24 अक्टूबर, 2025 तक वियना में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के NIRC–2025 सम्मेलन में इंडोनेशिया के तटीय परमाणु स्थलों पर काम प्रस्तुत किया। उनके अध्ययन में भूकंप, सुनामी और तटीय बाढ़ की जांच की गई।

BRIN के सम्मेलन संबंधी शोध विवरण के अनुसार, अध्ययन में HIRADC पद्धति इस्तेमाल की गई। इसका पूरा नाम Hazard Identification, Risk Assessment, and Determining Control है। सरल शब्दों में, यह पद्धति संभावित गड़बड़ियों की पहचान करती है, जोखिम का आकलन करती है और उनसे निपटने के उपाय तय करती है।

सम्मेलन में IAEA के 70 सदस्य देशों और नौ अंतरराष्ट्रीय संगठनों के 374 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। चर्चाओं में IAEA के सुरक्षा मानक और मार्गदर्शिकाएं SSR-1, SSG-9, SSG-18 और SSG-68 शामिल थीं, जो स्थलों और बाहरी खतरों के मूल्यांकन के लिए संदर्भ उपलब्ध कराती हैं।

BRIN ने बाहरी खतरों, उन्हें सहन करने की प्रतिष्ठानों की क्षमता और तटीय जोखिम प्रबंधन पर अनुसंधान में IAEA, कोरिया परमाणु ऊर्जा अनुसंधान संस्थान और जापान परमाणु ऊर्जा एजेंसी को सहयोगी बताया। इस काम से इंडोनेशिया को अपने हालात के अनुरूप सिफारिशें विकसित करते हुए तरीकों की अंतरराष्ट्रीय प्रचलनों से तुलना करने का रास्ता मिलता है।

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तीन स्थान राष्ट्रीय खोज में कैसे शामिल हैं

ऊर्जा एवं खनिज संसाधन मंत्रालय और PLN देशभर में 28 संभावित स्थान तैयार कर रहे हैं। राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के पहले के आकलनों में 28 स्थल पहचाने गए थे, जिनके कार्य अब BRIN में शामिल हैं। इन स्थलों की अनुमानित संयुक्त विकास क्षमता करीब 70.5 गीगावाट बताई गई थी।

BRIN की नीति निदेशक रतिह दामायंती ने 27 संभावित स्थानों का नक्शा बताया है, जबकि राष्ट्रीय ऊर्जा परिषद के सदस्य अगुस पुजी प्रासेत्यो ने 29 स्थानों की घोषणा की। संस्थाओं ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि उनकी सूचियां एक-दूसरे से कैसे मेल खाती हैं।

राष्ट्रीय खोज पूर्वी कालीमंतान से आगे रियाउ द्वीपसमूह, बांका बेलितुंग, पश्चिमी कालीमंतान, जावा, सुलावेसी और पापुआ तक फैली है। सरकार की व्यापक चर्चाओं में हलमाहेरा भी शामिल है। 70.5 गीगावाट का ऐतिहासिक अनुमान संभावित स्थलों की कुल विकास क्षमता बताता है; हर स्थान का अपना तकनीकी आकलन होना अभी बाकी है।

मंत्रालय की नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा तथा ऊर्जा संरक्षण महानिदेशक एनिया लिस्तियानी देवी ने कहा कि पहले के अध्ययनों की तकनीकी परिस्थितियों, समुदाय की स्वीकार्यता और क्षेत्रीय बिजली मांग के आधार पर समीक्षा जरूरी है। कुछ स्थानों का आकलन पूरा हो चुका है, जबकि अन्य शुरुआती सर्वेक्षण या छंटाई के चरण में हैं।

अगुस ने कहा कि संभावित स्थान सुनामी के जोखिम से मुक्त और ज्वालामुखियों तथा भ्रंशों से कम से कम पांच किलोमीटर दूर होने चाहिए। BRIN का भूवैज्ञानिक कार्य स्थानीय खतरों, तटीय क्षेत्रों के खतरों सहित, की जांच के लिए जरूरी विस्तृत अध्ययन तय करता है।

तैयारियों पर दबाव डालने वाली समय-सीमाएं

इंडोनेशिया की योजनाओं में शुरुआती संचालन लक्ष्य भी है और ऐसी तैयारियां भी जो अभी विकसित हो रही हैं। कानून संख्या 59/2024 के तहत निर्धारित 2025–2045 की राष्ट्रीय दीर्घकालिक विकास योजना में 2032 से परमाणु संयंत्रों का संचालन शुरू करने का लक्ष्य है।

कई तारीखें दिखाती हैं कि कार्यक्रम किस तरह आगे बढ़ा है और अधिकारी आगे क्या करना चाहते हैं:

  • 19 दिसंबर, 2023: BRIN की एक चर्चा में परमाणु ईंधन विकास के लिए खनिज संसाधनों की जांच की गई। ऊर्जा मंत्रालय के एक अधिकारी ने 2025–2029 के दौरान परमाणु संयंत्र का निर्माण शुरू करने की योजना का उल्लेख किया।
  • 20–24 अक्टूबर, 2025: BRIN ने वियना में IAEA सम्मेलन में तटीय स्थल सुरक्षा पर शोध प्रस्तुत किया।
  • 22 अक्टूबर, 2026: उप ऊर्जा एवं खनिज संसाधन मंत्री यूलियोट तंजुंग ने कहा कि स्थल की तैयारी शुरू करनी होगी, क्योंकि निर्माण में करीब सात से 10 साल लगते हैं।
  • नवंबर 2026: PLN ने महीने के दूसरे या तीसरे सप्ताह में शुरुआती स्थल अध्ययन पूरे करने का लक्ष्य रखा।
  • 2027: PLN निविदा शुरू करने या विकास साझेदार चुनने का लक्ष्य रखता है; साथ ही पहली या दूसरी तिमाही में IAEA से बुनियादी ढांचे की तैयारी का आकलन कराने की मांग है।
  • 2032–2034: बिजली आपूर्ति योजना में पहली 500 मेगावाट क्षमता को ग्रिड से जोड़ने का लक्ष्य है।

PLN के प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और सततता निदेशक एडविन नुग्राहा पुत्रा ने भी लगभग 15 साल चलने वाली विकास प्रक्रिया का उल्लेख किया है और 2037 में बड़े परमाणु संयंत्र के संचालन पर चर्चा की है। उनका कार्यक्रम व्यापक तैयारी प्रक्रिया और बड़े संयंत्र से जुड़ा है, जबकि शुरुआती क्षमता का लक्ष्य इससे पहले का है।

CORE Indonesia के अर्थशास्त्री युसुफ रेंडी मनीलेट ने कहा कि 2027 में निविदा शुरू होने पर 2032 तक लाइसेंस, इंजीनियरिंग, वित्तपोषण और निर्माण के लिए करीब पांच साल ही बचेंगे। इंडोनेशियाई परमाणु सोसायटी के अध्यक्ष प्रो. दजारोट सुलिस्तियो विस्नुब्रोटो ने स्पष्ट चरणों, मजबूत संस्थानों और यथार्थवादी समय-निर्धारण की मांग की है।

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रिएक्टर चुनना और ग्रिड तैयार करना

PLN के शुरुआती 500 मेगावाट कार्यक्रम में छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) इस्तेमाल किए जाने की उम्मीद है। इन रिएक्टरों की प्रत्येक इकाई की बिजली उत्पादन क्षमता पारंपरिक बड़े परमाणु रिएक्टरों से कम होती है और इनके डिजाइन में निर्माण को अधिक मानकीकृत बनाने की कोशिश की जाती है। इंडोनेशिया बड़े रिएक्टरों पर भी विचार कर रहा है।

राष्ट्रीय ऊर्जा परिषद की पहले की चर्चाओं में संभावित तकनीकी तरीकों के तौर पर उच्च तापमान पर गैस से ठंडे किए जाने वाले रिएक्टरों और थोरियम का उल्लेख हुआ था। थोरियम संभावित परमाणु ईंधन सामग्री है, पूरा रिएक्टर डिजाइन नहीं। ऊर्जा संक्रमण मंत्री बाहलिल लाहादालिया ने रूस, अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान के साथ तकनीकी साझेदारियों की संभावनाएं तलाशने की बात कही है।

PLN छोटे और बड़े दोनों संयंत्रों के लिए शुरुआती व्यवहार्यता अध्ययन, डेवलपर की योग्यता संबंधी शर्तें, प्रस्ताव आमंत्रण और बिजली खरीद व्यवस्थाएं तैयार कर रहा है। इन दस्तावेजों से यह तय करने में मदद मिलेगी कि डेवलपरों को क्या देना होगा और PLN बिजली किस तरह खरीदेगा।

राष्ट्रीय बिजली योजना में 2032 तक 500 मेगावाट, 2040 तक सात गीगावाट, 2050 तक 21 गीगावाट और 2060 तक 35 गीगावाट के लक्ष्य हैं। एक गीगावाट में 1,000 मेगावाट होते हैं, इसलिए सात गीगावाट तक पहुंचने के लिए शुरुआती 500 मेगावाट के अलावा 6,500 मेगावाट जोड़ने होंगे।

व्यापक अनुमानों के अनुसार 2060 तक परमाणु क्षमता 35–42 गीगावाट हो सकती है और प्राथमिक ऊर्जा मिश्रण में इसका हिस्सा 12.1 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। प्राथमिक ऊर्जा से आशय बिजली या अन्य उपयोगी रूपों में बदलने से पहले की ऊर्जा से है, इसलिए यह माप बिजली उत्पादन से आगे की चीजों को भी शामिल करता है।

PLN ने पारेषण बुनियादी ढांचे की जरूरत करीब Rp434 ट्रिलियन, यानी लगभग US$24.7 अरब आंकी है। उसने अनुमानित आठ प्रतिशत वित्तपोषण लागत के मुकाबले 2–4 प्रतिशत प्रतिफल का उल्लेख किया। यह वित्तपोषण का अंतर केवल रिएक्टरों का खर्च चुकाने से अलग चुनौती है: बिजली को उपभोक्ताओं तक पहुंचाने में सक्षम नेटवर्क भी चाहिए।

खर्च कौन उठाएगा और जोखिम किस पर होगा?

राष्ट्रीय ऊर्जा परिषद के सदस्य सत्य विद्या युधा लगातार जारी कार्यक्रम के रूप में कई रिएक्टर इकाइयों की योजना का समर्थन करते हैं। उनका तर्क है कि पहली इकाई से मिला अनुभव बाद की इकाइयों की लागत घटाने और निर्माण अवधि कम करने में मदद कर सकता है।

युसुफ ने PLN और Danantara के नियंत्रण वाली संयुक्त उद्यम कंपनी का प्रस्ताव दिया है, जिसमें तकनीक आपूर्तिकर्ता रणनीतिक साझेदार होगा। उनके प्रस्ताव के तहत आपूर्तिकर्ता निर्माण का अनुभव और निर्यात ऋण एजेंसियों का समर्थन ला सकता है। ये एजेंसियां अपने देश से होने वाली खरीद के वित्तपोषण में मदद करती हैं।

युसुफ के प्रस्ताव में जिम्मेदारियों का बंटवारा सरकार पर नीतिगत जोखिम, परमाणु दायित्व और दीर्घकालीन कचरा प्रबंधन की जिम्मेदारी डालता है। तकनीक और निर्माण की जिम्मेदारी आपूर्तिकर्ता की होगी, जबकि PLN बिजली खरीद समझौते के तहत खरीद की प्रतिबद्धता दे सकता है। ऐसे समझौते में आम तौर पर सहमत मात्रा से कम बिजली लेने पर भी उसका भुगतान करना पड़ता है।

Energy Shift Institute के प्रबंध निदेशक पुत्रा आधिगुना ने PLN की पक्की खरीद प्रतिबद्धता, पारदर्शी बिजली खरीद समझौतों, स्थिर नियमों और स्पष्ट संस्थागत व्यवस्था की जरूरत पर जोर दिया है। निवेशकों के लिए PLN जिस कीमत पर बिजली खरीदने को सहमत होगा और उन भुगतानों की विश्वसनीयता से यह तय करने में मदद मिलेगी कि परियोजना को वित्तपोषण मिल सकता है या नहीं।

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लाइसेंस और स्थानीय भागीदारी अहम

इंडोनेशिया का परमाणु नियामक Bapeten ऐसी लाइसेंस प्रणाली चलाता है जिसमें स्थल मूल्यांकन, डिजाइन की मंजूरी, निर्माण और संचालन शामिल हैं। इसके अधिकारी नूर स्याम्सी स्याम के अनुसार राष्ट्रीय तैयारी IAEA के तीन चरणों पर आधारित है: विचार, तैयारी और कार्यान्वयन।

इस ढांचे में बुनियादी ढांचे के 19 क्षेत्र शामिल हैं, जिनमें नीति, संस्थाएं, स्थल, तकनीक, वित्तपोषण, कर्मचारी और आपातकालीन तैयारी शामिल हैं। नूर स्याम्सी ने संचालक की नियुक्ति, वित्तपोषण व्यवस्थाओं और परमाणु क्षति के दायित्व संबंधी नियमों को ऐसे क्षेत्र बताया जिन पर और ध्यान देना जरूरी है।

पूर्वी कालीमंतान के संभावित स्थलों के पास रहने वाले समुदायों के लिए इन अध्ययनों का संबंध व्यावहारिक मुद्दों से है: पर्यावरणीय परिस्थितियां, आबादी के केंद्रों से दूरी, आपातकालीन तैयारियां और विकास के प्रभाव। दजारोट ने लाभ, जोखिम और असर से जुड़ी जानकारी जनता के लिए उपलब्ध कराने की मांग की है।

अरिफ ने कहा कि BRIN स्थानों के मूल्यांकन और कार्यक्रम के लिए जरूरी लोगों को तैयार करने में स्थानीय विश्वविद्यालयों को शामिल करना चाहता है।

"हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि इस अध्ययन के सभी चरण पारदर्शी और सटीक तरीके से पूरे हों तथा स्थानीय विश्वविद्यालय इसमें शामिल हों, ताकि तकनीकी तैयारी और मानव संसाधन साथ-साथ आगे बढ़ सकें," उन्होंने कहा।

कर्मचारियों और ईंधन के लिए अलग योजनाएं जरूरी

BRIN 2032, 2040, 2050 और 2060 के पड़ावों के अनुरूप एकीकृत कार्यबल रोडमैप और मास्टर प्लान तैयार कर रहा है। सैफुल बाखरी के अनुसार कर्मचारियों की योजना में PLN के मौजूदा कर्मचारियों को आगे का प्रशिक्षण देने के साथ नए कर्मचारियों को शिक्षा और प्रशिक्षण देना भी शामिल होना चाहिए।

योजना में संचालन, रखरखाव, निर्माण, ईंधन प्रबंधन, रेडियोधर्मी कचरा और सहायक बुनियादी ढांचा शामिल हैं। इसमें सरकारी निकायों, नियामकों, विश्वविद्यालयों, उद्योग और संभावित तकनीक आपूर्तिकर्ताओं से प्रशिक्षण तैयार करने में मदद मांगी गई है। इसमें चालू प्रतिष्ठानों में सीखना और प्रशिक्षक तैयार करना भी शामिल है।

ईंधन अनुसंधान का अलग इतिहास है। 19 दिसंबर, 2023 की चर्चा पर BRIN के यूरेनियम अनुसंधान बयान में सैफुल की इंडोनेशिया के यूरेनियम संसाधनों के विस्तृत अध्ययन की मांग दर्ज है। उस बयान में 2060 तक 36 मेगावाट बिजली पैदा करने वाले रिएक्टर का जिक्र था, जबकि बाद की राष्ट्रीय योजनाओं में गीगावाट में मापा गया कहीं बड़ा कार्यक्रम रखा गया है।

ऊर्जा मंत्रालय के समन्वयक मोहामद अवालुदीन ने खनन लाइसेंस वाले क्षेत्रों की तैयारी और महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों के विकास की मांग की। गडजाह माडा विश्वविद्यालय के शोधकर्ता हिमावान त्रि बायु मुर्ति पेट्रुस ने समझाया कि क्षेत्रों के बीच खनिज अलग-अलग होते हैं, इसलिए प्रसंस्करण के तरीके वास्तविक कच्चे माल के अनुरूप होने चाहिए।

इस तरह पूर्वी कालीमंतान के स्थल अध्ययन कई परस्पर जुड़ी तैयारियों का हिस्सा हैं: स्थल की उपयुक्तता साबित करना, रिएक्टर चुनना, कार्यबल को प्रशिक्षित करना, ईंधन और कचरे के प्रबंधन की व्यवस्था करना और बिजली को ग्रिड तक पहुंचाने के लिए वित्तीय रूप से व्यावहारिक रास्ता बनाना।

मुख्य बिंदु

  • BRIN पूर्वी कालीमंतान में सांगट्टा, साम्बोजा और बाबुलु को संभावित परमाणु संयंत्र स्थलों के रूप में जांच रहा है।
  • अध्ययन में भूकंप, तटीय बाढ़, सुनामी, जमीन की स्थिति, समुद्रतट में बदलाव और पर्यावरणीय उपयुक्तता शामिल हैं।
  • मौजूदा बिजली आपूर्ति योजना में शुरुआती 500 मेगावाट को 2032–2034 में ग्रिड से जोड़ने का लक्ष्य है।
  • PLN 2027 में निविदा शुरू करने या विकास साझेदार चुनने और उसी साल की पहली छमाही में IAEA से तैयारी का आकलन कराने का लक्ष्य रखता है।
  • वित्तपोषण, संचालक का चयन, दायित्व संबंधी नियम, कार्यबल की तैयारी और ग्रिड में निवेश अहम काम बने हुए हैं।
  • राष्ट्रीय बिजली योजना में 2040 तक सात गीगावाट और 2060 तक 35 गीगावाट परमाणु क्षमता का लक्ष्य है।
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