300 नागरिकों की सीमा से आपराधिक कार्रवाई की जांच के दायरे पर सवाल
दक्षिण कोरिया की नेशनल असेंबली रिसर्च सर्विस ने चेतावनी दी है कि कम से कम 300 नागरिकों के समूहों को निष्पक्ष व्यापार अधिनियम के उल्लंघन के संदेह वाली कंपनियों के खिलाफ सीधे आपराधिक शिकायत दर्ज करने की अनुमति देने से, अपराध हुआ है या नहीं, इस पर विशेषज्ञ आकलन के बिना ही कारोबारों को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब सरकार 1980 में स्थापित शिकायत प्रणाली में व्यापक बदलाव की तैयारी कर रही है।
विषय-सूची
- 300 नागरिकों की सीमा से आपराधिक कार्रवाई की जांच के दायरे पर सवाल
- आयोग के विशेष अधिकार का वास्तविक अर्थ
- शिकायत दर्ज करने की व्यापक पहुंच के दो रास्ते
- राष्ट्रपति व्यापक पहुंच क्यों चाहते हैं
- चेतावनी सिर्फ संख्या नहीं, सबूतों को लेकर है
- छोटी कंपनियों को संरक्षण के साथ दबाव का भी सामना हो सकता है
- 46 साल पुरानी प्रणाली में पहले भी बदलाव हुए हैं
- एक सीमित विकल्प में कार्टेल पर ध्यान
- विदेशी तुलना और अन्य नीतिगत चेतावनियां
- मुख्य बातें
नेशनल असेंबली की राजनीतिक मामलों की समिति के सदस्य चोई उन-सोक को सौंपी गई एक रिपोर्ट में रिसर्च सर्विस ने निष्पक्ष व्यापार आयोग के विशेष शिकायत-अधिकार की अधिक सावधानी से समीक्षा करने का आग्रह किया। उसने कहा कि गंभीर उल्लंघनों के मामलों में आपराधिक दंड अंतिम उपाय होना चाहिए और पात्र मामलों का दायरा तथा शिकायत दर्ज करने की शर्तें स्पष्ट रूप से तय होनी चाहिए।
31 मार्च, 2026 की कैबिनेट बैठक में पेश प्रस्ताव नागरिकों की शिकायतों से आगे जाता है। इसके तहत कम से कम 30 कंपनियों के समूहों को भी सीधे शिकायत दर्ज करने की अनुमति मिलेगी। साथ ही, आयोग से शिकायत दर्ज करने का अनुरोध करने का अधिकार 50 केंद्रीय प्रशासनिक एजेंसियों, 17 महानगर सरकारों और 226 बुनियादी स्थानीय सरकारों तक बढ़ाया जाएगा।
राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने इससे भी व्यापक बदलाव पर जोर दिया है। उन्होंने पूछा है कि क्या स्थानीय सरकारों को सीधे शिकायत दर्ज करने में सक्षम होना चाहिए और क्या संख्यात्मक सीमाओं की बिल्कुल जरूरत है। सरकार की मंशा इसी साल नेशनल असेंबली में विधेयक पेश करने की है, लेकिन अंतिम सीमाएं, पात्र अपराध और सुरक्षा उपाय अभी तय नहीं हुए हैं।
आयोग के विशेष अधिकार का वास्तविक अर्थ
मौजूदा प्रणाली के तहत, दायरे में आने वाले प्रतिस्पर्धा-संबंधी अपराधों में अभियोजन पक्ष द्वारा आरोप दायर करने से पहले निष्पक्ष व्यापार आयोग की शिकायत कानूनी रूप से अनिवार्य है। कोई उपभोक्ता या कारोबारी संदिग्ध गलत काम की सूचना आयोग को दे सकता है, लेकिन केवल उस सूचना से अभियोजन के लिए जरूरी आयोग की शिकायत की जगह नहीं ली जा सकती।
यह अंतर महत्वपूर्ण है: प्रस्तावित सुधार से यह बदलेगा कि अभियोजन का कानूनी रास्ता कौन खोल सकता है, न कि नागरिकों को किसी कंपनी पर आरोप तय करने या उसे दोषी ठहराने का अधिकार मिलेगा। आरोप दायर करने का फैसला अभियोजक ही करेंगे और दोष का निर्धारण अदालतें करेंगी।
विशेष शिकायत व्यवस्था आयोग के अधिकार क्षेत्र के छह कानूनों पर लागू होती है, जिनमें एकाधिकार नियमन और निष्पक्ष व्यापार अधिनियम तथा उपठेकेदारी संबंधी कानून शामिल हैं। इसे इसलिए लागू किया गया था ताकि कारोबार के गैरकानूनी आचरण के आरोपों और आपराधिक अभियोजन के बीच आर्थिक मामलों के विशेषज्ञों का आकलन हो सके।
कुछ प्रतिस्पर्धा-संबंधी मामलों में बाजारों, कारोबारी व्यवहार और प्रतिस्पर्धा पर पड़ने वाले प्रभावों का विस्तृत विश्लेषण जरूरी होता है। किसी प्रतिस्पर्धी को नुकसान पहुंचाने वाला दिखने वाला आचरण अपने आप में आपराधिक प्रतिस्पर्धा अपराध नहीं बन जाता। रिसर्च सर्विस की चिंता है कि पर्याप्त हस्ताक्षर जुटा लेना अपने आप यह साबित नहीं करेगा कि अभियोजन के लिए कानूनी और आर्थिक शर्तें पूरी हुई हैं।
इस प्रणाली की एक ऐसी कमजोरी भी है जिसे इसके आलोचक दूर करना चाहते हैं: जब आयोग शिकायत दर्ज करने से इनकार करता है, तो यह फैसला अभियोजन को रोक सकता है, भले ही प्रभावित उपभोक्ताओं या कारोबारों को लगे कि अधिक कड़ी कार्रवाई उचित है।
शिकायत दर्ज करने की व्यापक पहुंच के दो रास्ते
निष्पक्ष व्यापार आयोग के अध्यक्ष जू ब्युंग-गी ने 31 मार्च की कैबिनेट बैठक में दो अलग-अलग बदलाव पेश किए। एक बदलाव के तहत तय सीमा पूरी करने वाले समूह, जिनकी संख्या फिलहाल 300 नागरिक या 30 कंपनियां प्रस्तावित है, आयोग की शिकायत लिए बिना सीधे जांच एजेंसियों के पास शिकायत दर्ज कर सकेंगे।
दूसरा बदलाव सार्वजनिक निकायों के आयोग से शिकायत का अनुरोध करने के अधिकार का विस्तार करेगा। यह सीधे शिकायत दर्ज करने से अलग है: अनुरोध व्यवस्था के तहत, अधिकृत निकाय के अनुरोध पर आयोग को शिकायत दर्ज करनी होगी, भले ही जांच के बाद उसने पहले ऐसा न करने का फैसला किया हो।
फिलहाल चार पदाधिकारियों के पास यह अनुरोध-अधिकार है: अभियोजन महानिदेशक, लेखा और निरीक्षण बोर्ड के अध्यक्ष, सार्वजनिक खरीद सेवा के प्रमुख और लघु एवं मध्यम उद्यम तथा स्टार्टअप मंत्री।
प्रस्तावित विस्तार में 293 केंद्रीय और स्थानीय निकाय शामिल हैं: 50 केंद्रीय एजेंसियां, 17 महानगर सरकारें और 226 बुनियादी स्थानीय सरकारें। केवल स्थानीय सरकारों की इन दो श्रेणियों में 243 निकाय हैं। ये आंकड़े दिखाते हैं कि अनुरोध व्यवस्था मौजूदा अधिकारधारियों से कितनी आगे तक फैल सकती है, हालांकि इनसे यह पता नहीं चलता कि अतिरिक्त मामलों की संख्या कितनी होगी।
सरकार ने कुछ आर्थिक अपराधों के लिए आपराधिक दंड की जगह जुर्माने जैसे प्रशासनिक दंड लागू करने पर भी चर्चा की है। इससे सुधार का दायरा बदल सकता है: शिकायत दर्ज करने की व्यापक पहुंच के नतीजे इस बात पर निर्भर करेंगे कि किन अपराधों पर आपराधिक अभियोजन लागू रहेगा।
राष्ट्रपति व्यापक पहुंच क्यों चाहते हैं
राष्ट्रपति ली का तर्क है कि शिकायत-अधिकार एक ही संस्था में केंद्रित होने से यह तय करने की उस संस्था को जरूरत से ज्यादा शक्ति मिल सकती है कि मामले आगे बढ़ें या नहीं। कैबिनेट बैठक में उन्होंने समस्या को इस तरह बयान किया:
चूंकि निष्पक्ष व्यापार आयोग इस अधिकार पर एकाधिकार रखता है, इसलिए उसके पास मामलों को दबाने की शक्ति भी प्रभावी रूप से है,
उनकी दखलअंदाजी इस लंबे समय से चली आ रही आलोचना को दर्शाती है कि आयोग ने आपराधिक शिकायत दर्ज करने की अपनी शक्ति का हमेशा पर्याप्त सक्रियता से इस्तेमाल नहीं किया है। आयोग के पूर्व अधिकारियों के बड़ी लॉ फर्मों में जाने को लेकर चिंताओं ने भी यह धारणा बढ़ाई है कि बड़े कॉरपोरेट समूहों के साथ अनुकूल व्यवहार होता है। ये चिंताएं सुधार के राजनीतिक तर्क का हिस्सा हैं, किसी खास शिकायत-संबंधी फैसले के अनुचित होने का प्रमाण नहीं।
ली ने प्रस्तावित संख्यात्मक पाबंदियों पर भी सवाल उठाया और अधिकारियों से कहा कि वे स्थानीय सरकारों को केवल आयोग से शिकायत का अनुरोध करने का अधिकार देने के बजाय, सीधे शिकायत दर्ज करने का अधिकार देने पर विचार करें।
इससे आयोग के शुरुआती प्रस्ताव और राष्ट्रपति की पसंदीदा दिशा के बीच एक अहम अंतर सामने आता है। पहले प्रस्ताव में तय प्रवेश शर्तें और सार्वजनिक निकायों के अनुरोधों में आयोग की भूमिका बनी रहती है। दूसरी दिशा में इनमें से और अधिक नियंत्रण हट सकते हैं। दोनों में से किसी को भी अभी कानून का रूप नहीं दिया गया है।
चेतावनी सिर्फ संख्या नहीं, सबूतों को लेकर है
नेशनल असेंबली रिसर्च सर्विस की मुख्य आपत्ति यह है कि केवल शिकायतकर्ताओं की संख्या पर आधारित सीमा से आरोप की वास्तविकता की जरूरी जांच नहीं होती। कोई बड़ा समूह वास्तविक शिकायत साझा कर सकता है, लेकिन समूह का आकार बाजार की शक्ति, गैरकानूनी मिलीभगत या प्रतिस्पर्धा अपराध के किसी अन्य तत्व को साबित नहीं करता।
इसीलिए रिसर्च सर्विस ने शिकायतों के दायरे और उन्हें दर्ज करने की शर्तों, दोनों को परिभाषित करने वाले स्पष्ट नियमों की मांग की। उसका कहना है कि गंभीर उल्लंघनों पर आपराधिक दंड होना चाहिए, जबकि आपराधिक कार्यवाही अंतिम उपाय बनी रहनी चाहिए।
कैबिनेट में हुई चर्चाओं से सरकार के भीतर की चिंताएं भी सामने आईं। व्यापार, उद्योग और ऊर्जा मंत्री किम जियोंग-ग्वान ने दोहरी जांच और कंपनियों पर बोझ को लेकर आगाह किया। न्याय मंत्री जंग सुंग-हो ने अभियोजन और शिकायत-अधिकारों के संभावित दुरुपयोग पर चिंता जताई। लघु एवं मध्यम उद्यम तथा स्टार्टअप मंत्री हान सुंग-सुक ने भी कारोबारों पर पड़ने वाले बोझ को लेकर चिंता व्यक्त की।
बैठक में उठाई गई चिंताओं के जवाब में आयोग के अध्यक्ष जू ब्युंग-गी ने कहा:
मैं इस पर और समीक्षा करूंगा।
दोहरी कार्यवाही का जोखिम इस बात से अलग है कि शिकायत अंततः सफल होगी या नहीं। गलत काम पर किसी अंतिम फैसले से पहले ही किसी कारोबार को एक से अधिक संस्थाओं की पूछताछ का जवाब देना, कानूनी सलाह लेना और दस्तावेज उपलब्ध कराना पड़ सकता है। प्रस्ताव के विवरण से यह स्पष्ट नहीं होता कि एक-दूसरे से जुड़े मामलों के समन्वय के लिए कोई अंतिम व्यवस्था तय हुई है या नहीं।
छोटी कंपनियों को संरक्षण के साथ दबाव का भी सामना हो सकता है
शिकायत दर्ज करने की पहुंच खोलने से उन छोटे कारोबारों को मदद मिल सकती है जिन्हें लगता है कि उन्हें गैरकानूनी आचरण से नुकसान हुआ है और वे आयोग को अभियोजन की मांग करने के लिए राजी नहीं कर पा रहे हैं। प्रस्तावित सीमा के तहत 30 कंपनियों का समूह कोई आरोप सीधे जांच एजेंसियों के सामने रख सकता है।
यही रास्ता प्रतिस्पर्धियों के आरोपों का सामना कर रहे कारोबारों पर दबाव भी बना सकता है। बहस के दौरान उठाई गई चिंताओं में यह संभावना शामिल है कि शिकायतों का इस्तेमाल किसी प्रमाणित अपराध के लिए दंड मांगने के बजाय सौदेबाजी की रणनीति या प्रतिस्पर्धियों को धमकाने के साधन के रूप में किया जा सकता है।
कहा जाता है कि आयोग की कार्टेल जांचों में छोटी कंपनियों की पहले से ही बड़ी हिस्सेदारी है, हालांकि कोई प्रतिशत या मामलों की संख्या नहीं दी गई है। इसलिए उनके जोखिम का सटीक आकलन करना या यह मान लेना संभव नहीं है कि शिकायत व्यवस्था के विस्तार का मुख्य निशाना बड़े समूह होंगे।
बहस में सख्त शिकायत शर्तें और पहुंच का चरणबद्ध विस्तार जैसे सुझाव दिए गए हैं। ये प्रस्तावित सुरक्षा उपाय हैं, सरकार के अंतिम विधेयक की पुष्ट विशेषताएं नहीं। उनकी व्यावहारिक उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे विश्वसनीय आरोपों और व्यावसायिक दबाव बनाने के लिए आपराधिक कार्यवाही का इस्तेमाल करने की कोशिशों में फर्क कर पाते हैं या नहीं।
46 साल पुरानी प्रणाली में पहले भी बदलाव हुए हैं
1980 से आयोग का अधिकार जस का तस नहीं रहा है। समय के साथ सार्वजनिक निकायों को शिकायत अनिवार्य कराने के अधिकार मिले हैं, जिससे अंतिम फैसला अकेले करने की आयोग की क्षमता कम हुई है। मौजूदा बहस इस बात पर है कि इस व्यवस्था को और कितना खोलना चाहिए।
- 1980: एकाधिकार नियमन और निष्पक्ष व्यापार अधिनियम के तहत विशेष शिकायत व्यवस्था स्थापित हुई।
- 1995: संवैधानिक अदालत ने इस व्यवस्था की वैधता को मान्यता दी, जिसमें आपराधिक दंड के अत्यधिक जोखिम को सीमित करने की इसकी भूमिका भी शामिल थी।
- 1996: अभियोजन महानिदेशक को आयोग से शिकायत का अनुरोध करने का अधिकार मिला।
- 2013 या 2014: विवरणों में ऑडिट निकाय, खरीद एजेंसी और लघु व्यवसाय प्रशासन तक अनुरोध-अधिकार के विस्तार की अलग-अलग तारीखें दी गई हैं।
- 31 मार्च, 2026: आयोग ने कैबिनेट बैठक में सुधार का प्रस्ताव पेश किया और राष्ट्रपति ली ने व्यापक पहुंच की मांग की।
- 2026 के भीतर: सरकार ने नेशनल असेंबली में संशोधन विधेयक पेश करने की मंशा जताई है।
तारीखों में यह अंतर मौजूदा प्रस्ताव का नहीं, पहले हुए विस्तार का है। 2018 के एक अकादमिक लेख में इस सुधार की तारीख 2013 दी गई है, जबकि एक अन्य विवरण इसे 2014 का बताता है। उपलब्ध जानकारी से यह स्पष्ट नहीं होता कि यह अंतर विधेयक पारित होने और लागू होने की तारीखों के कारण है या नहीं।
31 मार्च की बैठक के स्थान को लेकर भी विवरण अलग-अलग हैं: एक के अनुसार बैठक सरकारी परिसर सियोल में हुई, जबकि दूसरे के अनुसार राष्ट्रपति भवन ब्लू हाउस में। तारीख, प्रस्तावित शिकायत सीमाओं और स्थानीय सरकारों को सीधे शिकायत दर्ज करने का अधिकार देने की राष्ट्रपति की मांग पर दोनों सहमत हैं।
एक सीमित विकल्प में कार्टेल पर ध्यान
सोन योंग-ह्वा का 2018 का बिजनेस लॉ रिव्यू का लेख विशेष शिकायत की शर्त बनाए रखने, पूरी तरह खत्म करने या आंशिक रूप से हटाने के विकल्पों की पड़ताल करता है। खंड 32, अंक 4, पृष्ठ 225 से 258 में प्रकाशित यह लेख मौजूदा बहस के लिए एक अहम फर्क बताता है: प्रतिस्पर्धा के सभी उल्लंघनों में एक ही तरह के आर्थिक आकलन की जरूरत नहीं होती।
लेख उस समय लागू अधिनियम की धारा 66 और 67 के तहत अभियोजन की शर्त पर चर्चा करता है। इसमें तर्क दिया गया है कि बाजार में प्रभुत्व के दुरुपयोग या कारोबारी एकीकरण के मामलों में यह तय करने के लिए आर्थिक विश्लेषण की जरूरत पड़ सकती है कि आचरण गैरकानूनी है या नहीं। इन प्रावधानों के संदर्भों को मौजूदा धारा-संख्या का विवरण नहीं समझना चाहिए।
सोन गंभीर कार्टेल मामलों को विशेष शिकायत-अधिकार से छूट देने का संभावित क्षेत्र बताते हैं। कार्टेल में कारोबार स्वतंत्र रूप से प्रतिस्पर्धा करने के बजाय आपसी तालमेल से काम करते हैं, उदाहरण के लिए कीमतों पर सहमति बनाकर। लेख का तर्क है कि इस श्रेणी को ऐसे आचरण से अलग तरह से देखा जा सकता है जिसकी वैधता बाजार पर पड़ने वाले प्रभावों के अधिक जटिल आकलन पर निर्भर करती है।
लेख में कार्टेल से संबंधित बिक्री पर लगभग 20% का जुर्माना लगाने और कार्टेल गतिविधि की स्वेच्छा से जानकारी देने वाले आवेदकों को आपराधिक शिकायतों से संरक्षण देने का सुझाव भी है। ये विद्वानों के प्रस्ताव हैं, 2026 के सुधार के पुष्ट प्रावधान नहीं।
यह संरक्षण महत्वपूर्ण है, क्योंकि गुप्त कार्टेल में शामिल कोई कंपनी ऐसा सबूत दे सकती है जिसे हासिल करने में अधिकारियों को अन्यथा कठिनाई हो सकती है। सोन रिपोर्टिंग के चरण से ही अभियोजकों और आयोग के बीच करीबी सहयोग का समर्थन करते हैं। सीधे शिकायत दर्ज करने के व्यापक अधिकारों पर इन प्रोत्साहनों के साथ विचार करना होगा, न कि उन्हें अलग-थलग प्रक्रियागत बदलाव के रूप में।
विदेशी तुलना और अन्य नीतिगत चेतावनियां
नेशनल असेंबली रिसर्च सर्विस अन्य देशों में विशेषज्ञ संस्थाओं की भूमिकाओं का उल्लेख करती है। जापान में दक्षिण कोरिया जैसी शिकायत प्रणाली है। अमेरिका में न्याय विभाग आपराधिक प्रतिस्पर्धा मामलों की जांच और अभियोजन करता है। ब्रिटेन में कार्टेल में शामिल व्यक्तियों के अभियोजन के लिए प्रतिस्पर्धा प्राधिकरण या किसी अन्य संबंधित निकाय की सहमति जरूरी है।
ये व्यवस्थाएं एक जैसी नहीं हैं, लेकिन इनसे रिसर्च सर्विस के इस तर्क को समर्थन मिलता है कि विदेशों में भी आपराधिक प्रतिस्पर्धा कानून लागू करने में विशेषज्ञों का निर्णय महत्वपूर्ण बना हुआ है। हालांकि, केवल इससे यह तय नहीं होता कि दक्षिण कोरिया को अपनी मौजूदा प्रणाली बनाए रखनी चाहिए या सीमित छूट अपनानी चाहिए।
रिसर्च सर्विस ने सरकार की दूसरी आर्थिक नीतियों पर भी सवाल उठाए हैं। उसने पूछा कि क्या मई में शुरू किए गए एकल शेयरों पर आधारित लीवरेज्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों से पहले पर्याप्त समीक्षा की गई थी और क्या निवेशकों को दो से तीन घंटे की शिक्षा देना प्रभावी होगा। ऐसे फंड किसी एक कंपनी के शेयरों से जुड़े बढ़े हुए रिटर्न का लक्ष्य रखते हैं, जिससे नुकसान भी बढ़ सकता है।
उसने अलग से कहा कि कोरिया ग्रोथ फंड के लक्ष्य रिटर्न और निवेश वसूली की शर्तें अब भी स्पष्ट नहीं हैं, जबकि उसका प्रस्तावित आकार 150 ट्रिलियन वॉन से बढ़ाकर 200 ट्रिलियन वॉन कर दिया गया। यह 50 ट्रिलियन वॉन, यानी पहले के आंकड़े से एक तिहाई की वृद्धि है।
सांसद चोई ने कहा कि संसदीय शोध निकाय की बार-बार उठाई गई चिंताओं से सरकार को इस पर फिर विचार करना चाहिए कि क्या उसने नीतियों के दुष्प्रभावों का पर्याप्त आकलन किया था। प्रतिस्पर्धा कानून लागू करने के मामले में उन्होंने अत्यधिक शिकायतों और कंपनियों पर आपराधिक कार्यवाही के बोझ को लेकर सावधानी बरतने का आग्रह किया।
अगला ठोस कदम सरकार का 2026 के भीतर विधेयक पेश करने का इरादा है। इसे पेश करने की कोई निश्चित तारीख, संसदीय सुनवाई की तारीख या मतदान की तारीख नहीं दी गई है। जिन निर्णायक विवरणों पर अभी फैसला होना बाकी है, उनमें यह शामिल है कि किन अपराधों में सीधे शिकायत दर्ज की जा सकेगी, संख्यात्मक सीमाएं कायम रहेंगी या नहीं, स्थानीय सरकारों को कौन-से अधिकार मिलेंगे और एक-दूसरे से जुड़ी कार्यवाहियों का प्रबंधन कैसे होगा।
मुख्य बातें
- नेशनल असेंबली रिसर्च सर्विस ने चेताया है कि केवल 300 शिकायतकर्ताओं से प्रतिस्पर्धा कानून के उल्लंघन की पुष्टि नहीं होगी।
- आयोग के प्रस्ताव के तहत कम से कम 300 नागरिक या 30 कंपनियां सीधे शिकायत दर्ज कर सकेंगी।
- शिकायत का अनुरोध करने का अधिकार 50 केंद्रीय एजेंसियों और 243 स्थानीय सरकारों तक बढ़ेगा।
- राष्ट्रपति ली स्थानीय सरकारों को सीधे शिकायत दर्ज करने का अधिकार देना चाहते हैं और संख्यात्मक सीमाओं पर सवाल उठा चुके हैं।
- सरकार के मंत्रियों ने दोहरी जांच, कारोबारों पर बोझ और शिकायत-अधिकारों के दुरुपयोग को लेकर चिंता जताई है।
- आयोग कुछ आपराधिक दंडों की जगह प्रशासनिक दंड लागू करने पर भी विचार कर रहा है।
- सरकार 2026 के भीतर कानून पेश करने की मंशा रखती है, लेकिन अंतिम नियम और सुरक्षा उपाय अभी तय नहीं हैं।






