समुद्र के गर्म होने और भोजन दक्षिण की ओर खिसकने के बीच ज़ावोदॉव्स्की पेंगुइन कॉलोनी में चिनस्ट्रैप के घोंसले 63% घटे

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Zavodovski Penguin Colony Loses 63% of Chinstrap Nests as Warming Seas Shift Food South

पूर्व पेंगुइन गढ़ ने अपना शीर्ष स्थान गंवाया

ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वे (BAS) के नेतृत्व में हुए शोध के अनुसार, ज़ावोदॉव्स्की द्वीप पर बसे हुए चिनस्ट्रैप पेंगुइन घोंसलों की संख्या 2011 और 2025 के बीच 63% घट गई। साउथ सैंडविच द्वीपसमूह का यह दूरस्थ ज्वालामुखीय द्वीप कभी दुनिया की सबसे बड़ी पेंगुइन कॉलोनी माना जाता था। यहां लगातार गिरावट आई है, जिसे शोधकर्ता सबसे अधिक समुद्र के गर्म होने और पक्षियों के मुख्य भोजन क्रिल की उपलब्धता में बदलाव से जोड़ते हैं।

विषय-सूची
  1. पूर्व पेंगुइन गढ़ ने अपना शीर्ष स्थान गंवाया
  2. आबादी के आंकड़े असल में क्या मापते हैं
  3. वैज्ञानिकों ने दुर्गम द्वीप का सर्वेक्षण कैसे किया
  4. स्थिरता के आभास से तेज गिरावट तक का क्रम
  5. क्रिल के खिसकने से चिनस्ट्रैप क्यों पीछे छूट रहे हैं
  6. ज्वालामुखी और स्थानीय मछली पकड़ना इस रुझान की वजह क्यों नहीं
  7. मैकरोनी की वृद्धि बदलते पेंगुइन समुदाय को दिखाती है
  8. संरक्षण के लिए चेतावनी, कारणों की जांच जारी
  9. मुख्य बातें

आबादी के एक विस्तृत अनुमान के मुताबिक, जनवरी 2011 में द्वीप पर प्रजनन करने वाले चिनस्ट्रैप पेंगुइन करीब 10.9 लाख थे, जो 2025 में घटकर 4.02 लाख रह गए। यानी लगभग 6.88 लाख पक्षियों की कमी आई। इसके उलट, मैकरोनी पेंगुइन की संख्या इसी अवधि में करीब 3.38 लाख से बढ़कर 4.33 लाख हो गई। अब द्वीप पर उनकी संख्या चिनस्ट्रैप से अधिक है।

करंट बायोलॉजी में प्रकाशित निष्कर्ष केवल कॉलोनी के सिकुड़ने की ओर इशारा नहीं करते। एक ही द्वीप पर रहने वाली दो प्रजातियां बदलते समुद्र के प्रति अलग-अलग प्रतिक्रिया दे रही हैं। चिनस्ट्रैप क्रिल और खास तरह की भोजन-स्थितियों पर बहुत निर्भर हैं, जबकि मैकरोनी पेंगुइन कई तरह के शिकार खा सकते हैं।

शोध का नेतृत्व करने वाले BAS के पेंगुइन पारिस्थितिकीविद् नॉर्मन रैटक्लिफ ने इस नुकसान के पैमाने का वर्णन किया:

आबादी में यह भारी गिरावट है, जो उस द्वीप से प्रजनन करने वाले पांच लाख पक्षियों के लुप्त होने के बराबर है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि अब अंटार्कटिका के रॉस सागर में केप एडारे में सबसे बड़ी कॉलोनी है। वहां 2018 तक दस लाख से अधिक प्रजनन करने वाले एडेली पेंगुइन गिने गए थे। कुछ विवरण इस बदलाव को अधिक सावधानी से संभावित बताते हैं। जो भी हो, ज़ावोदॉव्स्की की गिरावट इस पुरानी धारणा को चुनौती देती है कि यह अलग-थलग द्वीप चिनस्ट्रैप को अन्य जगहों पर हो रहे नुकसान से बचने का आश्रय देता था।

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आबादी के आंकड़े असल में क्या मापते हैं

सबसे सुसंगत निष्कर्ष बसे हुए चिनस्ट्रैप घोंसलों में 63% की कमी है। घोंसलों में मौजूदगी प्रजनन गतिविधि को मापती है, हर उम्र के सभी पक्षियों की गिनती नहीं। इसलिए प्रजनन करने वाले पक्षियों और बसे हुए घोंसलों के अनुमानों को एक-दूसरे के बराबर नहीं मानना चाहिए।

रिपोर्टों में शुरुआती आबादी और पक्षियों की संख्या में आई कमी के आंकड़े अलग-अलग हैं। कई रिपोर्टों में 2011 में 6 लाख चिनस्ट्रैप और 90,000 मैकरोनी पेंगुइन का अनुमान दिया गया है, जबकि एक अन्य रिपोर्ट में प्रजनन करने वाले चिनस्ट्रैप की संख्या करीब 10.9 लाख और मैकरोनी की 3.38 लाख बताई गई है। नुकसान को अलग-अलग तरह से पांच लाख से अधिक पक्षियों, करीब पांच लाख प्रजनन करने वाले पक्षियों या 6.8 लाख से अधिक चिनस्ट्रैप की कमी बताया गया है। एक उद्धृत विवरण में इसके बजाय पांच लाख से अधिक घोंसलों का उल्लेख है।

हर रिपोर्ट के आंकड़े पर 63% की गिरावट लागू कर देने भर से इन अंतरों का समाधान नहीं होता। घोंसलों और पक्षियों के बीच का अंतर कुछ संभावित भिन्नता समझाता है, लेकिन रिपोर्टें सभी अनुमानों के लिए एक समान आधार स्थापित नहीं करतीं। इसलिए घोंसलों में आई गिरावट ही सबसे स्पष्ट मुख्य आंकड़ा है।

प्रजनन करने वाली आबादी के विस्तृत आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि चिनस्ट्रैप के नुकसान को द्वीप के सभी पेंगुइनों का करीब एक चौथाई बताना कुल बदलाव को कम करके आंकता है। 2011 में 10.9 लाख चिनस्ट्रैप और 3.38 लाख मैकरोनी को जोड़ने पर प्रजनन करने वाले पक्षियों की कुल संख्या करीब 14.28 लाख होती है। 2025 के बताए गए आंकड़ों का योग 8.35 लाख है। मैकरोनी की वृद्धि शामिल करने के बाद भी करीब 5.93 लाख, यानी 42%, की गिरावट आती है।

एक अलग अनुमान में मौजूदा कुल संख्या करीब 8.38 लाख प्रजनन करने वाले पेंगुइन बताई गई है और इसमें भी 40% से अधिक गिरावट दर्ज है। इसके मुताबिक मैकरोनी की संख्या करीब 4.3 लाख है। हाल के ये कुल आंकड़े एक-दूसरे के करीब हैं, हालांकि ऐतिहासिक आबादी के आंकड़ों में कहीं अधिक अंतर है।

वैज्ञानिकों ने दुर्गम द्वीप का सर्वेक्षण कैसे किया

ज़ावोदॉव्स्की साउथ सैंडविच द्वीपसमूह के उत्तरी छोर पर, अर्जेंटीना से करीब 2,500 किलोमीटर पूर्व में स्थित है। इसका खड़ा तट, उबड़-खाबड़ समुद्र और सक्रिय ज्वालामुखी बार-बार सर्वेक्षण करना मुश्किल बनाते हैं। BAS का अभियान दिसंबर 2023 में करीब 15 दिन समुद्र में बिताने के बाद द्वीप पहुंचा। अभियान फॉकलैंड द्वीपसमूह से रवाना हुआ था।

दल ने ड्रोन सर्वेक्षण, हवाई फोटोग्राफी, उपग्रह तस्वीरों और ट्रैकिंग उपकरणों को मिलाकर काम किया। रॉयल एयर फ़ोर्स के एक मालवाहक विमान से तस्वीरें लेने में मदद मिली, जबकि उपग्रह तस्वीरों से शोधकर्ताओं को अभियान के वर्षों के अलावा अन्य समय में हुए बदलावों का अनुमान लगाने का मौका मिला। इन तरीकों से एक बार की यात्रा के मुकाबले अधिक लंबा आबादी रिकॉर्ड तैयार हुआ।

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शोधकर्ताओं ने 20 पेंगुइनों पर ट्रैकिंग उपकरण लगाए: 12 चिनस्ट्रैप और आठ मैकरोनी। इन रिकॉर्ड से यह पता लगाने में मदद मिली कि दोनों प्रजातियां कहां भोजन करती हैं और क्या वे एक ही पानी का इस्तेमाल करती हैं। यह महत्वपूर्ण था, क्योंकि गिरावट की वजह का संबंध समुद्र में स्थितियों से था, न कि केवल इस बात से कि द्वीप पर कितने पक्षी समा सकते हैं।

क्षेत्र में काम की परिस्थितियां यह भी दिखाती हैं कि कॉलोनी की गिरावट पर ध्यान क्यों नहीं गया होगा। तूफानों ने तट पर काम सीमित किया, तेज हवाओं से तंबू क्षतिग्रस्त हुए और ज्वालामुखी की गैसें खतरनाक हो सकती थीं, इसलिए दल अपने साथ गैस मॉनिटर और मास्क ले गया। स्थिरता की पुरानी धारणाओं को ऐसी जगह पर परखा जा रहा था जहां नए सबूत जुटाने के लिए बड़ा अभियान करना पड़ता है।

स्थिरता के आभास से तेज गिरावट तक का क्रम

इस शोध में एक दशक से अधिक समय के अवलोकनों को जोड़ा गया है। इसका कालक्रम इस निष्कर्ष के लिए अहम है कि गिरावट लगातार जारी रही, न कि किसी एक आपदा का नतीजा थी।

  • 1997: शुरुआती दृश्य सर्वेक्षण में ज़ावोदॉव्स्की पर करीब 20 लाख चिनस्ट्रैप पेंगुइन होने का अनुमान लगाया गया। उपग्रह तस्वीरों पर आधारित बाद के सर्वेक्षण में इस अनुमान को संशोधित कर 12 लाख किया गया।
  • 2011: सर्वेक्षणों ने दुनिया की सबसे बड़ी पेंगुइन कॉलोनी के रूप में ज़ावोदॉव्स्की की पहचान और साउथ सैंडविच द्वीपसमूह में चिनस्ट्रैप आबादी स्थिर होने की धारणा को समर्थन दिया।
  • 2011 से 2016: बसे हुए मैकरोनी पेंगुइन घोंसलों की संख्या करीब 28% बढ़ी, जबकि चिनस्ट्रैप की संख्या में गिरावट आई।
  • 2016: माउंट करी में विस्फोट हुआ, जिससे द्वीप के पेंगुइनों को नुकसान पहुंचने की चिंता बढ़ी।
  • दिसंबर 2023: BAS के शोधकर्ताओं ने क्षेत्रीय सर्वेक्षण किए और दोनों प्रजातियों की भोजन की तलाश में आवाजाही को ट्रैक किया।
  • 2025: दोबारा तैयार किए गए आबादी रिकॉर्ड में 2011 के मुकाबले बसे हुए चिनस्ट्रैप घोंसले 63% कम पाए गए। पहले की वृद्धि के बाद मैकरोनी की संख्या मोटे तौर पर स्थिर रही थी।

शुरुआती अनुमान में चिनस्ट्रैप की संख्या 20 लाख से घटाकर 12 लाख करना अपने आप में आबादी में मापी गई गिरावट नहीं माना जाना चाहिए। यह सर्वेक्षण के अलग-अलग तरीकों से मिले संशोधित अनुमान का नतीजा था। नए अध्ययन की मुख्य तुलना 2011 और 2025 के बीच बसे हुए घोंसलों में बदलाव की है।

शोधकर्ताओं का अनुमान है कि ज़ावोदॉव्स्की में चिनस्ट्रैप की संख्या सालाना करीब 7% की दर से घट रही है, जो अन्य जगहों पर दर्ज दर से लगभग दो से तीन गुना है। उनके मुताबिक, चिनस्ट्रैप आबादी में यह अब तक की सबसे तेज दर्ज गिरावट है। इसलिए यह पूर्व गढ़ संरक्षण के लिहाज से खास चिंता का विषय बन गया है।

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क्रिल के खिसकने से चिनस्ट्रैप क्यों पीछे छूट रहे हैं

चिनस्ट्रैप पेंगुइन भोजन के मामले में विशेषज्ञ हैं। वे अंटार्कटिक क्रिल पर बहुत निर्भर हैं। ये छोटे क्रस्टेशियन समुद्री पौधों और पेंगुइन तथा व्हेल जैसे बड़े जीवों के बीच एक अहम कड़ी हैं। अपने जीवनचक्र के महत्वपूर्ण हिस्सों में भोजन और आश्रय के लिए क्रिल समुद्री बर्फ पर निर्भर रहते हैं।

शोधकर्ताओं को आशंका है कि गर्म पानी और समुद्री बर्फ में कमी ने क्रिल की उपलब्धता की जगह बदल दी है और उनका वितरण दक्षिण में वेडेल सागर की ओर खिसक रहा है। ट्रैकिंग से पता चला कि चिनस्ट्रैप ज़ावोदॉव्स्की के उत्तर-पश्चिम में ठंडे पानी में भोजन कर रहे थे, जबकि मैकरोनी द्वीप के उत्तर-पूर्व में गर्म पानी का इस्तेमाल कर रहे थे।

रैटक्लिफ ने बताया कि चिनस्ट्रैप भोजन के पीछे दक्षिण के पानी में क्यों नहीं जा सकते:

"दक्षिण की ओर समुद्री बर्फ और घोंसले बनाने के लिए उपयुक्त द्वीपों की कमी चिनस्ट्रैप को भोजन के पीछे जाने से रोकती है," उन्होंने कहा।

यह भोजन की समस्या के साथ-साथ भौगोलिक बाधा भी है। प्रजनन करने वाले पेंगुइन को घोंसला बनाने के लिए उपयुक्त जगह और उस कॉलोनी से भोजन तक पहुंच, दोनों चाहिए। दक्षिण की ओर ठंडा पानी होना अपने आप में इन दोनों जरूरतों को पूरा नहीं करता। समुद्री बर्फ की स्थितियां पहुंच सीमित कर सकती हैं, जबकि उपयुक्त घोंसले वाले द्वीप न होने से नई कॉलोनी बनने की जगह सीमित रहती है।

दूरसंवेदी तकनीक के विशेषज्ञ और अध्ययन के सह-लेखक BAS के शोधकर्ता पीटर फ्रेटवेल ने भी प्रजनन स्थलों से पक्षियों के लगाव की ओर ध्यान दिलाया:

"बहुत से लोग सोचते हैं कि जानवर दक्षिण की ओर चले जाते हैं, लेकिन आम तौर पर पेंगुइन अपने ठिकाने से जुड़े रहते हैं और वहीं रहते हैं," फ्रेटवेल ने कहा।

इसलिए प्रस्तावित व्याख्या यह नहीं है कि गर्मी ने सीधे तौर पर लापता हुए हर पक्षी को मार दिया। बात यह है कि समुद्र की बदलती स्थितियों ने शिकार तक पहुंच घटाई और सीमित भोजन तथा प्रजनन के कम विकल्पों वाली प्रजाति के लिए अपनी आबादी को बनाए रखना मुश्किल कर दिया।

ज्वालामुखी और स्थानीय मछली पकड़ना इस रुझान की वजह क्यों नहीं

2016 में माउंट करी का विस्फोट इसका स्पष्ट संदिग्ध था। पेंगुइन एक सक्रिय ज्वालामुखी के आसपास घोंसले बनाते हैं और राख, लावा तथा गैसें वन्यजीवों के लिए खतरा हो सकती हैं। हालांकि, आबादी रिकॉर्ड से पता चला कि चिनस्ट्रैप की संख्या में कमी विस्फोट से पहले शुरू हो गई थी और उसके बाद भी लगातार जारी रही।

शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि राख मुख्य रूप से जिन जगहों पर गिरी, वे चिनस्ट्रैप के मुख्य पर्यावास से मेल नहीं खाती थीं। विस्फोट के प्रभावों का समय और उनका फैलाव लगातार जारी गिरावट से मेल नहीं खाता। इसका मतलब यह मानना नहीं है कि किसी पक्षी को नुकसान नहीं हुआ; इसका अर्थ है कि विस्फोट से आबादी का रुझान नहीं समझाया जा सकता।

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बढ़ती मैकरोनी आबादी के साथ प्रतिस्पर्धा भी एक संभावना थी। द्वीप पर घोंसले बनाने के लिए पर्याप्त जगह थी और ट्रैकिंग आंकड़ों से पता चला कि दोनों प्रजातियां बड़े पैमाने पर अलग-अलग जगहों पर भोजन करती थीं। इन अवलोकनों से यह तर्क कमजोर पड़ा कि मैकरोनी चिनस्ट्रैप को घोंसलों से हटा रहे थे या सीधे उनका भोजन ले रहे थे।

द्वीप के समुद्री संरक्षित क्षेत्र में स्थानीय क्रिल मछली पकड़ने पर प्रतिबंध है। शोधकर्ताओं को ऐसा कोई सबूत नहीं मिला कि क्षेत्रीय क्रिल मत्स्य उद्योग गिरावट की वजह था। आपस में जुड़े समुद्री प्रवाहों के जरिए दूर की जगहों पर होने वाली मछली पकड़ पर सवाल बना हुआ है, लेकिन उसे स्थापित कारण नहीं माना गया है। कॉलोनी के पास दोहन से सुरक्षा भी आसपास के समुद्र को गर्म होने से नहीं रोक सकती।

दल ने क्रिल खाने वाले अन्य जीवों पर भी विचार किया, जिनमें हंपबैक व्हेल शामिल हैं। व्हेल बड़ी मात्रा में भोजन करती हैं, लेकिन उनका मल पोषक तत्व भी पहुंचा सकता है, जो उन समुद्री पौधों को सहारा देते हैं जिन पर क्रिल निर्भर हैं। शोध में व्हेल के साथ प्रतिस्पर्धा को नुकसान की वजह स्थापित नहीं किया गया।

मैकरोनी की वृद्धि बदलते पेंगुइन समुदाय को दिखाती है

मैकरोनी पेंगुइन उपयोगी तुलना पेश करते हैं, क्योंकि उन्होंने चिनस्ट्रैप जैसी गिरावट का सामना किए बिना उसी द्वीप की ज्वालामुखीय गतिविधि और घोंसला बनाने की स्थितियों का अनुभव किया। 2011 से 2016 के बीच उनके बसे हुए घोंसलों की संख्या 28% बढ़ी, फिर मोटे तौर पर स्थिर रही। कुछ विवरण इस वृद्धि को गोल करके 30% बताते हैं।

आबादी के विस्तृत अनुमानों में प्रजनन करने वाले पक्षियों की संख्या करीब 3.38 लाख से बढ़कर 4.33 लाख बताई गई है, यानी करीब 95,000 की वृद्धि। यही बढ़ोतरी उसी अनुमान के तहत चिनस्ट्रैप की करीब 6.88 लाख की कमी का केवल लगभग 14% भरपाई करती है। इसलिए दूसरी प्रजाति की अच्छी स्थिति भी कॉलोनी की कुल प्रजनन आबादी में बड़ी गिरावट को नहीं रोक पाई।

मैकरोनी का भोजन अधिक विविध है। इसमें क्रिल के साथ मछली और अन्य क्रस्टेशियन भी शामिल हैं। ज़ावोदॉव्स्की के उत्तर-पूर्व में गर्म पानी का उनका इस्तेमाल अलग तरह के शिकार तक पहुंच के अनुरूप है। शोधकर्ताओं का मानना है कि इसी लचीलेपन के कारण उनका प्रदर्शन बेहतर रहा, हालांकि ट्रैकिंग के नतीजे यह नहीं बताते कि पक्षियों ने क्या-क्या खाया।

रैटक्लिफ ने दोनों प्रजातियों के बीच के अंतर का वर्णन किया:

"हमारे आंकड़े बताते हैं कि ठंडे वातावरण के अनुकूल अंटार्कटिक चिनस्ट्रैप प्रजाति अब अपने उप-अंटार्कटिक पड़ोसियों के साथ फल-फूल नहीं रही है," उन्होंने कहा।

यह बदलाव केवल संख्या में कमी से कहीं अधिक है। 2025 के विस्तृत अनुमान के मुताबिक, अब प्रजनन करने वाले पेंगुइनों में मैकरोनी की हिस्सेदारी आधे से थोड़ी अधिक है, जबकि 2011 में यह करीब एक चौथाई थी। द्वीप का पेंगुइन समुदाय अब ऐसी प्रजाति की ओर खिसक गया है जो गर्म पानी और वैकल्पिक भोजन का बेहतर इस्तेमाल कर सकती है।

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संरक्षण के लिए चेतावनी, कारणों की जांच जारी

रिपोर्टों के मुताबिक, इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंज़र्वेशन ऑफ नेचर की रेड लिस्ट में चिनस्ट्रैप पेंगुइन को फिलहाल कम चिंता वाली प्रजाति के रूप में वर्गीकृत किया गया है। शोधकर्ताओं का सुझाव है कि ज़ावोदॉव्स्की की गिरावट और अन्य जगहों पर हुए नुकसान को देखते हुए फिर से आकलन होना चाहिए। इसमें संकटग्रस्त का दर्जा देने पर विचार भी शामिल हो सकता है। यह एक सिफारिश है, वर्गीकरण में पूरा हो चुका बदलाव नहीं।

कॉलोनी का महत्व इस नतीजे को किसी एक स्थानीय समस्या के रूप में खारिज करना मुश्किल बनाता है। एक अनुमान के मुताबिक, वैश्विक चिनस्ट्रैप आबादी का 38% साउथ सैंडविच द्वीपसमूह में है। अध्ययन में शामिल न रहे समुद्री पक्षियों के पारिस्थितिकीविद् लुकास क्रूगर गार्सिया ने कहा कि ज़ावोदॉव्स्की में अकेले वैश्विक आबादी का 30% हिस्सा था। एक अन्य विवरण में द्वीपसमूह का हिस्सा लगभग एक तिहाई बताया गया है। इन अनुमानों में भौगोलिक दायरा और संभवतः संदर्भ अवधि अलग-अलग है, इसलिए इन्हें एक ही आंकड़े में नहीं जोड़ना चाहिए।

इन अनुमानों से एक बात साफ है: इस क्षेत्र में प्रजाति का बड़ा हिस्सा रहता है। पहले के सर्वेक्षणों में यहां स्थिरता दिखने से राहत मिली थी, जबकि अन्य जगहों पर चिनस्ट्रैप कॉलोनियां घट रही थीं। नए सबूत इस भरोसे को कमजोर करते हैं, हालांकि ज़ावोदॉव्स्की के सर्वेक्षण से पूरे द्वीपसमूह के हर द्वीप पर मौजूदा आबादी का रुझान स्थापित नहीं होता।

प्रजातियों के अलग-अलग रुझान और कई अन्य संभावित कारणों के खारिज होने से जलवायु संबंधी व्याख्या को मजबूत समर्थन मिलता है, लेकिन अहम बातें अब भी अनिश्चित हैं। शोध में शामिल न रहे यूनिवर्सिटी ऑफ द रिपब्लिक के पारिस्थितिकीविद् अल्वारो साउतुल्लो ने आगाह किया:

गिरावट के कारणों को अभी ठीक से समझना बहुत दूर की बात है।

यह अध्ययन क्रिल के वितरण में बदलाव, प्रजनन की सफलता या वयस्क पक्षियों के जीवित रहने में बदलाव की सटीक भूमिका तय नहीं करता। रेड लिस्ट पर फैसले की कोई तय तारीख भी नहीं दी गई है। तात्कालिक नतीजा यह है कि एक बड़ी कॉलोनी में प्रजनन गतिविधि में दर्ज भारी गिरावट आई है। इसके साथ भोजन की उपलब्धता से जुड़ी एक संभावित व्याख्या है, जिसकी आगे जांच जरूरी है।

मुख्य बातें

  • ज़ावोदॉव्स्की द्वीप पर बसे हुए चिनस्ट्रैप पेंगुइन घोंसले 2011 और 2025 के बीच 63% घटे।
  • एक विस्तृत अनुमान में प्रजनन करने वाले चिनस्ट्रैप की संख्या करीब 10.9 लाख से घटकर 4.02 लाख रह गई, हालांकि ऐतिहासिक आंकड़े अलग-अलग हैं।
  • मैकरोनी पेंगुइन की संख्या पहले करीब 28% बढ़ी, फिर स्थिर हो गई। अब द्वीप पर उनकी संख्या चिनस्ट्रैप से अधिक है।
  • द्वीप पर प्रजनन करने वाले पेंगुइनों की कुल संख्या 40% से अधिक घटकर करीब 8.35 लाख से 8.38 लाख रह गई है।
  • शोधकर्ताओं के मुताबिक समुद्र का गर्म होना और क्रिल तक पहुंच घटना सबसे संभावित वजह है, न कि 2016 का ज्वालामुखी विस्फोट।
  • अब केप एडारे को सबसे बड़ी कॉलोनी माना जाता है, जबकि शोधकर्ताओं ने चिनस्ट्रैप के संरक्षण दर्जे का फिर से आकलन करने की सिफारिश की है।
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