773.9 हेक्टेयर जमीन मलबे में दबी, और बहाली का पैमाना कंक्रीट से कहीं बड़ा
23 सितंबर 2025 की बाढ़ में 19 लोगों की मौत और पांच लोगों के लापता होने के एक साल बाद, ताइवान के गुआंगफू टाउनशिप में मटाईआन क्रीक के किनारे बसे आदिवासी समुदाय एक और उथल-पुथल का सामना कर रहे हैं: बाढ़ से बचाव की परियोजनाएं उनके रहने की जगह, उनकी जमीन के मालिकाना हक और दोबारा खेती कर पाने की संभावना को स्थायी रूप से बदल सकती हैं।
विषय-सूची
- 773.9 हेक्टेयर जमीन मलबे में दबी, और बहाली का पैमाना कंक्रीट से कहीं बड़ा
- पहाड़ी झील का बांध टूटने पर क्या हुआ?
- नए तटबंध बाढ़ के हर रास्ते का समाधान नहीं
- कुछ निवासी पुनर्वास चाहते हैं, जबकि दूसरों को जबरन हटाए जाने का डर
- जमीन अधिग्रहण का असर पीढ़ियों की खेती पर
- खेती दोबारा शुरू होना, आय बहाल होने के बराबर नहीं
- क्षतिग्रस्त खेतों के लिए जंगल की एक अलग योजना
- नई कृषि भूमि के लिए निवेश और सुरक्षित पहुंच जरूरी
- शोधकर्ता लगातार बदलती नदी पर नजर रख रहे हैं
- भागीदारी और सरकारी जिम्मेदारियों पर अब भी सहमति नहीं
- मुख्य बातें
कार्यकारी युआन के मुताबिक, 773.9 हेक्टेयर कृषि भूमि तलछट में दब गई। इनमें से करीब एक-तिहाई पर ही दोबारा खेती शुरू हो पाई है, और पैदावार अब भी कम है। ऊपरी इलाके में करीब 230 करोड़ घन मीटर अस्थिर मलबा मौजूद है। जल संसाधन एजेंसी ने नदी गलियारे की व्यापक योजना के तहत अस्थायी तौर पर तलछट जमा करने के लिए 340 हेक्टेयर जमीन लेने की योजना बनाई है, जबकि अलग प्रस्तावों में दक्षिणी तट की बुरी तरह क्षतिग्रस्त कृषि भूमि को जंगल में बदलने की बात है।
ये कदम एक वास्तविक खतरे से निपटने के लिए हैं। भारी बारिश तलछट को बहाकर नीचे ला सकती है, नदी तल को ऊंचा कर सकती है और बाढ़ के पानी के लिए उपलब्ध जगह घटा सकती है। फिर भी, स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य जल निकासी, पुनर्वास, मुआवजे और आदिवासी समुदायों की भागीदारी से जुड़े सवालों के जवाब मिलने से पहले ही आगे बढ़ गया है।
21 सितंबर 2026 को छह समुदायों के निवासी आपदा क्षेत्र की तलछट लेकर कार्यकारी युआन पहुंचे। उनका कहना था कि नदी के पुनर्निर्माण को लोगों की जिंदगी दोबारा बसाने से अलग नहीं किया जा सकता। कुछ परिवार पास की सुरक्षित जगह पर जाने में मदद चाहते हैं। वहीं, दूसरों को डर है कि नए सुरक्षा तटबंधों के रास्ते में आने के कारण उन घरों को खोना पड़ सकता है जो मूल बाढ़ में बच गए थे।
पहाड़ी झील का बांध टूटने पर क्या हुआ?
टाइफून रगासा के बाहरी परिसंचरण से हुई बारिश के कारण मटाईआन क्रीक के ऊपरी हिस्से में बना प्राकृतिक बांध टूट गया। भूस्खलन से बना बांध तब बनता है जब गिरे हुए पत्थर और मिट्टी नदी को रोक देते हैं और झील बन जाती है। पानी जब इस अवरोध के ऊपर से बहने लगता है, तो वह तेजी से कट सकता है।
शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, बांध में दरार 23 सितंबर को करीब दोपहर 3:50 बजे शुरू हुई। अनुमान था कि करीब 1.54 करोड़ घन मीटर पानी बाहर निकला, जिसका अधिकांश हिस्सा लगभग 30 मिनट में बह गया। इससे बना नदी मार्ग संभवतः 80 मीटर गहरा हो गया। शुरुआती रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि पानी का अधिकतम बहाव अनुमान से करीब चार गुना था, हालांकि इसे पक्का माप नहीं बताया गया था।
जानकारी सामने आने के साथ ही हताहतों के आंकड़े बदलते गए। एक शुरुआती रिपोर्ट में आंतरिक मंत्री ल्यू श्ये-फांग के हवाले से 15 मौतों और 17 लोगों के लापता होने की बात कही गई, जबकि कुछ अन्य शुरुआती रिपोर्टों में लापता लोगों की संख्या 31 तक बताई गई। वर्षगांठ के मौके पर जारी विवरण में 19 मौतों और पांच लोगों के लापता होने की बात है। ये आंकड़े रिपोर्टिंग के अलग-अलग चरणों के हैं, न कि एक ही अपरिवर्तित संख्या के।
इन अहम तारीखों से पता चलता है कि आपात स्थिति कैसे लंबी पुनर्निर्माण बहस में बदल गई:
- 23 सितंबर 2025: बांध टूट गया और बाढ़ का पानी व मलबा गुआंगफू तथा आसपास के समुदायों में पहुंच गया।
- 2 अक्टूबर 2025: आदिवासी प्रतिनिधियों ने पुनर्वास योजना में भागीदारी, स्वयंसेवकों के लिए सुरक्षित स्थितियों और उचित आश्रय की मांग की।
- 15 मई 2026: तेज बारिश के कारण मदाना क्रीक का पानी निर्माण स्थल के खुले हिस्से से घरों में घुस गया।
- जुलाई 2026: टाइफून बावी के करीब आने पर कलोतोंगन के निवासियों को पूर्व डोंगफू प्राथमिक विद्यालय में पहुंचाया गया।
- अगस्त 2026: कार्यकारी युआन ने भूस्खलन से बनी झीलों को कानून के तहत आपदा की एक श्रेणी मानने वाले संशोधन के मसौदे को मंजूरी दी।
- 21 सितंबर 2026: छह समुदायों ने जमीन, आवास, आजीविका और पुनर्निर्माण से जुड़े फैसलों पर कार्यकारी युआन को याचिका दी।
नए तटबंध बाढ़ के हर रास्ते का समाधान नहीं
अतोमो, मटाईआन क्रीक और हुलिएन नदी के संगम के पास है। स्थानीय लोग अपने जोखिम की एक वजह 1990 के दशक में बने उत्तरी तटबंध को बताते हैं। उनके मुताबिक, इससे नदी का गलियारा संकरा हो गया और उनका समुदाय सीधे बाढ़ के पानी के रास्ते में आ गया।
2025 की आपदा के दौरान नदी के पास के घर घने कीचड़ में डूब गए। कुछ निवासियों ने मरम्मत का काम छोड़ दिया। दूसरे दिन में अपने घर ठीक करते और रात में अस्थायी ठिकानों पर सोते थे। घर लौटने वाले लोग भी बारिश तेज होने पर हर बार वहां से निकलने के लिए तैयार रहते थे।
तटीय पर्वतमाला से आने वाली चार सहायक नदियों के हुलिएन नदी में मिलने वाली जगह पर भी तलछट जमा हो गई है। जल संसाधन एजेंसी निचली सहायक नदियों में ड्रेजिंग और तटबंध बनाने का काम कर रही है, ताकि मुख्य नदी का पानी उलटा ऊपर की ओर न धकेले। लेकिन 15 मई की बाढ़ ने दिखाया कि निर्माण के दौरान घर कितने असुरक्षित रहते हैं: पानी एक खुले हिस्से से भीतर आया और हाल ही में मरम्मत किए गए घरों तथा नए फर्नीचर को भिगो गया।
कलोतोंगन की समस्या इससे जुड़ी जरूर है, लेकिन अलग भी है। सितंबर 2025 में समुदाय के कुछ हिस्सों में लगभग एक मंजिल की ऊंचाई तक पानी भर गया था। निवासियों का कहना है कि हुलिएन नदी का तल अब पास की लुओमो क्रीक से ऊंचा है। कोई अवरोध नदी का पानी बाहर रख सकता है, लेकिन इससे बस्ती के भीतर जमा बारिश का पानी निकलना भी मुश्किल हो सकता है।
जल संसाधन एजेंसी का कहना है कि तटबंध पूरा होने के बाद जरूरी पंपिंग स्टेशन या जल-संग्रह बेसिन की योजना काउंटी सरकार को बनानी होगी। जिम्मेदारी का यह बंटवारा एक व्यावहारिक सवाल अनसुलझा छोड़ता है: अगर समुदाय के भीतर जमा पानी के निकलने का भरोसेमंद रास्ता नहीं है, तो बाहर के पानी से बचाव अधूरा है।
निवासियों को यह भी डर है कि बाढ़ से काउंटी रोड 193 कट सकती है और लोगों का निकलना रुक सकता है। नदी के नीचे की ओर जियानयिंग पुल और इसी सड़क के आसपास के लोग जानना चाहते हैं कि ऊपर की ओर मजबूत किए जा रहे सुरक्षा तटबंध उनके अपने जोखिम को कैसे प्रभावित कर सकते हैं।
कुछ निवासी पुनर्वास चाहते हैं, जबकि दूसरों को जबरन हटाए जाने का डर
कलोतोंगन की निवासी डोंगी, जिन्हें ली यू-लान के नाम से भी जाना जाता है, कहती हैं कि समुदाय ने 20 साल से भी पहले पुनर्वास के बारे में पूछना शुरू किया था। अब तक कोई स्पष्ट योजना नहीं है। निवासियों ने अपने मौजूदा ठिकाने से 500 मीटर से भी कम दूर, पूर्व डोंगफू प्राथमिक विद्यालय के पास ताइवान शुगर कॉरपोरेशन की खाली जमीन को संभावित पुनर्वास स्थल के तौर पर सुझाया है।
इस प्रस्ताव से परिवार खतरे से दूर जा सकते हैं, लेकिन अपने समुदाय से बहुत दूर बिखरेंगे नहीं। हुलिएन काउंटी ने इस मामले को गुआंगफू टाउनशिप प्रशासन के पास भेज दिया। किसी सहमत पुनर्वास स्थल या समय-सारणी का उल्लेख नहीं है।
दूसरी जगहों पर पुनर्वास ऐसी चीज है जिसे निवासी खुद मांगने के बजाय उन पर थोपा जा सकता है। शियांगछाओचांग इलाके के निवासी ली लान-शियांग और मेंग यिंग-हुआ का कहना है कि सितंबर 2025 में बाढ़ से बचे कुछ घर प्रस्तावित दूसरे दक्षिणी सुरक्षा तटबंध के लिए गिराए जा सकते हैं। वे सरकार से मार्ग, दूसरे विकल्प और, अगर स्थानांतरण टालना संभव न हो, तो रहने के लिए किसी निश्चित जगह की जानकारी चाहते हैं।
समुदायों को एकजुट रखने की चिंता आपदा के कुछ ही दिन बाद उठाई गई थी। फाताआन स्व-सहायता समूह के प्रतिनिधि कुलास उमो ने कहा कि पुनर्वास की योजना बनाने में आदिवासी निवासियों को शामिल किया जाना चाहिए, न कि उनके सामने तैयार योजना रख दी जाए।
मध्यम अवधि का हो या दीर्घकालिक, पुनर्वास से जुड़ी चर्चाओं में आदिवासी समुदायों की आवाज शामिल होनी चाहिए। अगर हमारी भागीदारी के बिना योजनाओं को अंतिम रूप दिया जाता है, तो हमारे पास चुपचाप उन्हें स्वीकार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।
टाइफून मोराकोट के अनुभव का हवाला देते हुए कुलास उमो ने यह भी चेतावनी दी कि आदिवासी समुदायों को बिखेरने से उनकी सांस्कृतिक एकजुटता कमजोर होती है और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है। इसलिए विवाद सिर्फ नए भवन देने का नहीं, बल्कि समुदायों के स्थान और निरंतरता का भी है।
जमीन अधिग्रहण का असर पीढ़ियों की खेती पर
जल संसाधन एजेंसी ने उत्तरी प्रबंधन गलियारे को भीतर की ओर 740 मीटर तक बढ़ाने और अस्थायी तलछट भंडारण के लिए 340 हेक्टेयर जमीन लेने का प्रस्ताव रखा है। दक्षिणी हिस्से में 200 मीटर बढ़ाए गए गलियारे के भीतर दूसरा तटबंध बनाने की योजना है।
निवासियों का कहना है कि उत्तरी तट पर आदिवासी आरक्षित भूमि का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा प्रस्तावित अधिग्रहण क्षेत्र में आता है। ये खेत कभी बाढ़ के मैदान का हिस्सा थे और पीढ़ियों से जोते जा रहे थे। 1990 के दशक में तटबंध बनने के बाद निवासियों ने इन्हें आदिवासी आरक्षित भूमि का दर्जा दिलाने के लिए संघर्ष किया।
एजेंसी का कहना है कि निजी जमीन का अधिग्रहण बाजार दरों पर किया जाएगा। हालांकि, आरक्षित भूमि पर खेती करने वाले कुछ लोगों को मालिकाना हक नहीं मिला है, क्योंकि सरकारी आवेदन प्रक्रियाओं में देरी हो रही है। इससे यह अनिश्चितता है कि अधिग्रहण के दौरान उनके हितों को कैसे मान्यता दी जाएगी।
जमीन के मालिकों ने सिर्फ नकद मुआवजा पाने के बजाय प्रभावित भूखंडों के बदले दूसरी जमीन देने का प्रस्ताव रखा है। जल संसाधन एजेंसी का कहना है कि ऐसा जमीन विनिमय उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर है। निवासियों का यह भी आरोप है कि मालिकों की सहमति मिलने या प्रक्रिया की पूरी जानकारी दिए जाने से पहले निजी संपत्ति पर निर्माण और तलछट भंडारण शुरू कर दिया गया।
तलछट प्रबंधन का पैमाना जगह की जरूरत का कारण समझाता है, लेकिन इन विवादों का समाधान नहीं करता। एजेंसी के मुताबिक, आपदा के बाद 2.295 करोड़ घन मीटर तलछट निकाली गई है। अभी सालाना करीब 1 करोड़ घन मीटर ड्रेजिंग हो रही है, जबकि लगभग 30 लाख घन मीटर सामग्री ही कहीं और पहुंचाई जा पा रही है। इन आंकड़ों के आधार पर, करीब 70 लाख घन मीटर सामग्री हर साल जमा करनी होगी या उसके लिए कोई दूसरी जगह तलाशनी होगी।
एक अलग विवरण में बची हुई मात्रा 70 लाख टन बताई गई है। टन भार मापने की इकाई है, जबकि घन मीटर आयतन की; तलछट का घनत्व जाने बिना इन आंकड़ों को बराबर नहीं माना जा सकता। धूल, शोर और भारी निर्माण वाहनों की आवाजाही का असर पहले से ही आसपास के घरों पर पड़ रहा है।
खेती दोबारा शुरू होना, आय बहाल होने के बराबर नहीं
क्षतिग्रस्त 773.9 हेक्टेयर जमीन में से कार्यकारी युआन ने 555.3 हेक्टेयर को सामान्य रूप से प्रभावित और 218.6 हेक्टेयर को गंभीर रूप से प्रभावित श्रेणी में रखा। इन श्रेणियों के बीच अंतर तय करने के लिए तलछट की करीब 50 सेंटीमीटर गहराई को आधार बनाया गया। गंभीर श्रेणी कुल क्षेत्र का करीब 28 प्रतिशत है।
नदी प्रबंधन गलियारे की जमीन को अलग करने के बाद, सामान्य रूप से प्रभावित श्रेणी की करीब 380 हेक्टेयर जमीन पर खेती दोबारा शुरू करने में मदद की जरूरत है। कृषि बहाली कार्यक्रम में 20 सेंटीमीटर से कम तलछट वाले खेतों को हल्के और 20 से 50 सेंटीमीटर तलछट वाले खेतों को मध्यम प्रभावित श्रेणी में रखा गया है। किसान जैविक खाद के लिए सहायता या हुलिएन जिला कृषि अनुसंधान एवं विस्तार केंद्र से मदद मांग सकते हैं।
केंद्र के एसोसिएट रिसर्चर नी ली-फेंग ने बताया कि करीब 170 हेक्टेयर जमीन के लिए आवेदन मिले हैं। शुरुआती मानचित्रण के अनुसार, लगभग 150 हेक्टेयर जमीन हल्के और 50 हेक्टेयर मध्यम रूप से प्रभावित थी। इन अनुमानों का कुल क्षेत्रफल 200 हेक्टेयर बनता है, जो आवेदन वाले क्षेत्र से ज्यादा है, और अभी खेतों में जाकर जांच की जरूरत है। इसे अंतिम और पूरी तरह मेल खाता हिसाब नहीं माना जाना चाहिए।
केंद्र का लक्ष्य हल्के रूप से प्रभावित मिट्टी में सुधार का काम अक्टूबर 2026 तक पूरा करना है। मध्यम रूप से प्रभावित इलाकों के लिए यह काम 2027 के अंत तक चलने की उम्मीद है, क्योंकि वहां अधिक गहराई तक काम और खुदाई मशीनों की जरूरत है।
किसान लो जेन-मिंग के पहले के धान के खेत 20 से 40 सेंटीमीटर तलछट में दब गए थे और सिंचाई का ढांचा भी क्षतिग्रस्त हो गया था। मिट्टी में जैविक पदार्थ मिलाने के बाद उन्होंने मक्का उगाने की कोशिश की। पैदावार फिर भी निराशाजनक रही और परिवार चलाने के लिए उन्हें दिहाड़ी का काम करना पड़ा।
लो का अनुमान है कि मिट्टी को ठीक होने में कम से कम तीन साल लगेंगे और वे चाहते हैं कि खाद की सब्सिडी जारी रहे। उनका अनुभव दिखाता है कि किसी खेत को दोबारा खेती के तहत गिन लेने का मतलब यह नहीं कि उससे उसके मालिक का गुजारा चलने लगा है। पूरे इलाके में 200 हेक्टेयर से कुछ अधिक भूमि पर खेती लौटने की खबर है, जिसे क्षतिग्रस्त कृषि भूमि का करीब एक-तिहाई बताया गया है। लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि खेती की आय भी बहाल हो गई है।
क्षतिग्रस्त खेतों के लिए जंगल की एक अलग योजना
नदी प्रबंधन गलियारे के बाहर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त करीब 163 हेक्टेयर कृषि भूमि को दोबारा उपजाऊ बनाना मुश्किल माना जाता है। कुछ खेतों पर आठ मीटर तक तलछट जमा है, जिसमें लकड़ी और पत्थर भी मिले हैं। सब कुछ हटाना कठिन होगा और क्षारीय मिट्टी में तुरंत खेती करना भी मुश्किल है।
दक्षिणी तट की गंभीर रूप से प्रभावित कृषि भूमि अधिग्रहित कर वहां जंगल लगाने की योजना है। ग्रामीण विकास और मृदा एवं जल संरक्षण एजेंसी एक वन स्मृति उद्यान की योजना बना रही है। इसमें स्मारक चौक, बाढ़ का पानी रोकने के लिए नीची घासदार जगह और साइकिल चलाने व मनोरंजन के रास्ते होंगे। इसके बाद वन और प्रकृति संरक्षण एजेंसी 141 हेक्टेयर में पौधे लगाएगी। यह आंकड़ा उसके पौधरोपण के जिम्मे आए क्षेत्र का है, न कि खेती के लिहाज से मुश्किल मानी गई पूरी 163 हेक्टेयर जमीन का।
डेढ़ हेक्टेयर में पेड़ों का परीक्षण मार्च 2026 में पूरा हुआ। करीब आधा हेक्टेयर में एक और परीक्षण मार्च 2027 में प्रस्तावित है। इसमें ऊंचे पेड़ों के साथ निचली वनस्पति और स्थानीय झाड़ियां लगाई जाएंगी। इसका मकसद बाढ़ के पानी के लिए अवरोध बनाना और उड़ती तलछट को कम करना है।
उत्तरी तट पर व्यापक अधिग्रहण के बजाय मुख्य रूप से सब्सिडी देकर पेड़ लगाने की योजना है। छह साल के लिए अधिकतम सहायता प्रति हेक्टेयर 6 लाख ताइवानी डॉलर बताई गई है। हालांकि, पहले साल 2.5 लाख और दूसरे से छठे साल तक हर साल 60 हजार डॉलर देने का बताया गया कार्यक्रम कुल 5.5 लाख डॉलर बनता है। इस अंतर की वजह नहीं बताई गई है।
किसान हुआंग चुन-लोंग उद्यान की योजना पर सलाह-मशविरे की मांग करते हैं और सवाल उठाते हैं कि क्या वानिकी से मिलने वाला पैसा धान की कमाई की जगह ले सकता है। उनके मुताबिक, धान से पहले प्रति हेक्टेयर सालाना करीब 3 लाख ताइवानी डॉलर की आय होती थी, जबकि पहले साल के बाद वानिकी सहायता सालाना 60 हजार डॉलर है। यह भुगतान बताई गई धान की आय का करीब पांचवां हिस्सा है, हालांकि आय और सब्सिडी मुनाफे के बराबर माप नहीं हैं।
नई कृषि भूमि के लिए निवेश और सुरक्षित पहुंच जरूरी
कृषि मंत्रालय ने विस्थापित किसानों के लिए सार्वजनिक और सरकारी संचालन वाली जमीन की पहचान की है, साथ ही किराये और खेती के लिए सहायता दी है। किराये की मदद अधिकतम 40 हजार ताइवानी डॉलर प्रति हेक्टेयर सालाना है और यह दिसंबर 2030 तक जारी रहने वाली है।
किसान यांग चिन-वेन ने मक्का उगाने के लिए दानॉन्ग दाफू के पास ताइवान शुगर की 6.8 हेक्टेयर जमीन पट्टे पर ली। चार महीने तक पत्थर हटाने के बाद भी वे जमीन का करीब एक-तिहाई हिस्सा ही तैयार कर पाए। उनका अनुमान है कि पूरा इलाका तैयार करने में एक साल लगेगा। उन्हें चिंता है कि भविष्य में जमीन तक पहुंच को लेकर अनिश्चितता उनके लगाए पैसे और मेहनत को बेकार कर सकती है।
पांगकाह फार्म की संचालक सु शिउ-लियेन ने मूल 4.7 हेक्टेयर में से दो हेक्टेयर से कम जमीन पर खेती फिर शुरू की है। करीब 1.2 हेक्टेयर जमीन इतनी गहराई तक दब गई थी कि उसे बहाल करना संभव नहीं था। उन्होंने जैविक खाद, मिट्टी सुधार, जैविक सोयाबीन और औद्योगिक प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान की मदद से लगाई गई ड्रिप सिंचाई का सहारा लिया।
वे मैरिज बीन्स नाम की स्थानीय फसल भी उगा रही हैं, जो उनके मुताबिक क्षतिग्रस्त जमीन में अच्छी तरह उगती है। यह काम कृषि बहाली को सांस्कृतिक परंपरा के हस्तांतरण से जोड़ता है। सिर्फ वैकल्पिक जमीन मिलने से यह सवाल हल नहीं होता कि किसान अपनी परिचित फसलें, तौर-तरीके और आय जारी रख पाएंगे या नहीं।
शोधकर्ता लगातार बदलती नदी पर नजर रख रहे हैं
जुलाई 2026 तक की निगरानी के मुताबिक, भूस्खलन के मूल इलाके में करीब 13 करोड़ घन मीटर तलछट और शेष बांध तथा नदी मार्ग में 10 करोड़ घन मीटर तलछट मौजूद थी। नेशनल ताइवान यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के एसोसिएट प्रोफेसर यांग चे-मिंग के अनुसार, शेष बांध का इलाका सबसे कम स्थिर है।
नेशनल यांग मिंग चियाओ तुंग यूनिवर्सिटी के शोध में दो मुख्य जोखिम बताए गए हैं: नए भूस्खलन से एक और झील बन सकती है, जिसमें 80 लाख घन मीटर तक पानी जमा हो सकता है; या बहती तलछट नदी तल को ऊंचा कर बाढ़ का पानी ले जाने की उसकी क्षमता घटा सकती है। सितंबर में ली गई हवाई तस्वीरों में पुरानी झील की जगह पर फिर नदी मार्ग दिखा, लेकिन इससे ये खतरे खत्म नहीं हुए।
नेशनल चेंग कुंग यूनिवर्सिटी ने गुआंगफू में एक विज्ञान केंद्र बनाया है। शोधकर्ताओं ने 100 से अधिक जगहों से 1,000 किलोग्राम से ज्यादा तलछट जुटाई और एक अस्थायी इस्पात पुल पर तलछट की सघनता नापने वाले स्वचालित उपकरण लगाए। इन मापों का मकसद कंप्यूटर मॉडल बेहतर करना और गांवों के जोखिम के नक्शे तैयार करना है।
नेशनल चुंग शिंग यूनिवर्सिटी में मूल आकार के पचासवें हिस्से के एक मॉडल से संकेत मिला कि 2025 में बांध टूटने के दौरान ऊपर की ओर पानी के बहाव ने बांध को नीचे की ओर काटा, जबकि नीचे से कटाव ऊपर की ओर बढ़ा। इस तरह लंबा प्राकृतिक बांध दोनों दिशाओं से होने वाले कटाव के कारण तेजी से टूट सकता है।
21 जून 2026 को वानली क्रीक पर भूस्खलन से बनी झील ने निगरानी की सीमाएं फिर उजागर कीं। 28 जून को वहां लगाए गए उपकरण ने दिखाया कि झील 60 प्रतिशत से कम भरी थी, जबकि लाल चेतावनी के बाद लोगों को पहले ही सुरक्षित जगह पहुंचाया जा चुका था। ताइवान ने 8 जुलाई को दूसरी पोर्टेबल जलमापी खरीदने से पहले, पहले उपकरण की मरम्मत के दौरान उसकी जगह लेने के लिए कोई दूसरा उपकरण उपलब्ध नहीं था।
शोधकर्ता बांध पर पड़ने वाले दबाव और जलस्तर में बदलाव पकड़ने के लिए ऑप्टिकल फाइबर का परीक्षण कर रहे हैं। ये तरीके अभी विकसित किए जा रहे हैं। बेहतर माप अनिश्चितता कम कर सकते हैं, लेकिन वे किसी एक अनुमानित नतीजे की गारंटी नहीं दे सकते और न ही एहतियातन लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचाने की जरूरत खत्म कर सकते हैं।
भागीदारी और सरकारी जिम्मेदारियों पर अब भी सहमति नहीं
21 सितंबर की याचिका फाताआन, ताफालोंग, अतोमो, कलोतोंगन, सिराकायान और सिहाफायान की ओर से दी गई थी। उनके युवा गठबंधन ने आदिवासी समुदायों की शुरुआती भागीदारी, आसानी से समझ आने वाली भाषा में स्पष्ट जानकारी, सार्वजनिक और ताइवान शुगर की जमीन का सर्वे, अधिग्रहण के विकल्प, विभागों के बीच जिम्मेदारियों का तालमेल और आवास सहायता जारी रखने की मांग की।
उन्होंने यह भी कहा कि जल निकासी के जोखिम, तलछट के विश्लेषण, इंजीनियरिंग की जरूरत और दूसरे विकल्पों की जानकारी दिए जाने से पहले गैर-जरूरी अधिग्रहण और पुनर्वास आगे नहीं बढ़ना चाहिए। निवासी आपातकालीन सुरक्षा उपायों और भविष्य में जमीन के इस्तेमाल को तय करने वाली स्थायी परियोजनाओं में अंतर करते हैं।
नेशनल चेंगची यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर गुआन दा-वेई ने दूसरे सुरक्षा तटबंध और नीचे की ओर इसके संभावित असर की जानकारी देने की मांग की। विद्वान ली मिंग-चिह और लिन चुन-जू ने अधिग्रहण के विकल्पों और आदिवासी जन समुदाय मूल कानून की धारा 21 के तहत परामर्श और सहमति की प्रक्रियाएं लागू होने की संभावना पर सवाल उठाए।
लोक निर्माण आयोग के उप मंत्री ली यी-ते ने कहा कि व्यापक इंजीनियरिंग योजना बनाने का काम सिनोटेक इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स को दिया गया है और इसमें समुदायों तथा संबंधित एजेंसियों को शामिल किया जाएगा। आदिवासी जन परिषद के उप मंत्री लजाउकू ने कहा कि यह आकलन करने के लिए सिर्फ दो मामले जमा हुए हैं कि परामर्श और सहमति जरूरी है या नहीं। इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट होने तक स्थायी परियोजनाएं या अधिग्रहण रोकने पर कोई सहमति नहीं थी।
विशेषज्ञों ने प्रशासनिक सीमाओं के पार पूरे नदी बेसिन के लिए विशेष क्षेत्रीय योजना बनाने हेतु स्थानिक योजना कानून की धारा 8 का इस्तेमाल करने का प्रस्ताव भी दिया है। वर्षगांठ के मौके पर दिए गए विवरण के अनुसार, पहले साल के दौरान भूमि योजना प्रशासन में इस विकल्प पर कोई चर्चा शुरू नहीं हुई थी।
आपदा कानून में कार्यकारी युआन का अगस्त का संशोधन अभी मसौदा है, लागू हुआ कानून नहीं। इसमें कृषि मंत्रालय को भूस्खलन से बनी झीलों की आपदाओं के लिए जिम्मेदार बनाने का प्रस्ताव है। संसद में मतदान की कोई तारीख नहीं दी गई है। निवासियों को पुनर्वास, जमीन के बदले दूसरी जमीन, जल निकासी सुविधाओं और आजीविका के लिए दीर्घकालिक सहायता के समय को लेकर अब भी पक्के जवाब नहीं मिले हैं।
मुख्य बातें
- वर्षगांठ के विवरण के मुताबिक, 23 सितंबर 2025 की बाढ़ में 19 लोगों की मौत हुई और पांच लोग लापता हैं।
- ऊपरी इलाके में करीब 23 करोड़ घन मीटर तलछट मौजूद है, जिससे बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बना हुआ है।
- क्षतिग्रस्त 773.9 हेक्टेयर कृषि भूमि में से करीब एक-तिहाई पर दोबारा खेती शुरू हुई है, लेकिन आय और पैदावार पर अब भी असर है।
- उत्तर में प्रस्तावित तलछट भंडारण क्षेत्र के लिए 340 हेक्टेयर जमीन की जरूरत होगी; दक्षिण में अलग योजनाओं के तहत कृषि भूमि का अधिग्रहण कर जंगल लगाया जाएगा।
- निवासी जल निकासी और पुनर्वास की स्पष्ट योजनाएं, जमीन अधिग्रहण के विकल्प और आदिवासी समुदायों की सार्थक भागीदारी चाहते हैं।
- मिट्टी सुधार का काम 2027 तक चलेगा, जबकि वैकल्पिक कृषि भूमि के किराये की सहायता दिसंबर 2030 में खत्म होने वाली है।






