हजारों शिकायतें, हटाई गईं कुछ ही पोस्ट और विदेशों से आंकड़े गायब
दक्षिण कोरिया के संशोधित सूचना एवं संचार नेटवर्क अधिनियम के तहत पांच घरेलू प्लेटफॉर्मों पर गलत सूचना से जुड़ी 2,732 शिकायतें दर्ज हुईं, लेकिन सामग्री हटाने या उसकी पहुंच घटाने के केवल 27 मामले सामने आए। नियामक ने Google, Meta, X और TikTok से शिकायतों और उन पर की गई कार्रवाई के आंकड़े मांगे थे, लेकिन इन कंपनियों ने कोई आंकड़ा नहीं दिया। इससे कानून के कामकाज की पहली समीक्षा में बड़ी कमी रह गई है।
विषय-सूची
- हजारों शिकायतें, हटाई गईं कुछ ही पोस्ट और विदेशों से आंकड़े गायब
- क्या बदला और कब?
- किन प्लेटफॉर्मों और संदेशों पर नियम लागू होते हैं?
- हेरफेर कर बनाई गई झूठी जानकारी किसे माना जाएगा?
- शिकायत और अपील की प्रक्रिया
- किसे नुकसान के पांच गुना तक हर्जाना देना पड़ सकता है?
- एक अरब वॉन के अतिरिक्त शुल्क की अलग कसौटी
- प्लेटफॉर्म के शुरुआती आंकड़े वास्तव में क्या दिखाते हैं?
- पारदर्शिता की कसौटी अब भी बाकी
- मुख्य बातें
घरेलू आंकड़े 7 जुलाई को कानून लागू होने के बाद की अलग-अलग अवधियों को कवर करते हैं। Naver पर 31 अगस्त तक 900 शिकायतें आईं, Kakao पर 28 सितंबर तक 895 और DC Inside पर 30 सितंबर तक 829। Nate Communications पर 30 सितंबर तक 66 और Daum पर 42 शिकायतें दर्ज हुईं। Naver और Kakao ने शिकायतों पर सामग्री के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। DC Inside ने 26 पोस्ट हटाईं, जबकि Nate ने एक मामले में सामग्री की पहुंच सीमित की।
इन नतीजों ने कानून के व्यावहारिक अमल को बहस के केंद्र में ला दिया है। सरकार इसे प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी तय करने और पीड़ितों को मुआवजा दिलाने का ढांचा बताती है, न कि ऐसा तंत्र जिसके तहत अधिकारी पोस्ट को झूठा घोषित कर उसे हटाने का आदेश दे सकें। आलोचकों को अत्यधिक सामग्री नियंत्रण और ऐसे ढांचे, दोनों की चिंता है जिसे लागू करना मुश्किल हो सकता है।
यह अंतर अहम है: शिकायत इस बात का सबूत नहीं कि जानकारी झूठी है, और प्लेटफॉर्म का फैसला अदालत का निर्णय नहीं है। शुरुआती आंकड़े बताते हैं कि कंपनियों ने शिकायतों पर कैसे प्रतिक्रिया दी, न कि कितनी पोस्ट कानूनी रूप से गलत सूचना के दायरे में आती थीं या कितने पीड़ितों को ऐसा नुकसान हुआ जिसकी भरपाई की जा सकती है।
क्या बदला और कब?
किम जोंग-चोल की अध्यक्षता वाले प्रसारण, मीडिया एवं संचार आयोग ने 30 दिसंबर 2025 को संशोधनों को मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलने की घोषणा की। उसने तीन मुख्य बदलाव बताए: पात्र प्रकाशकों के लिए नागरिक हर्जाने में वृद्धि, बड़े प्लेटफॉर्मों की ओर से सामग्री नियंत्रण संबंधी नीतियां और स्वतंत्र तथ्य-जांच के काम में सहायता के लिए एक पारदर्शिता केंद्र। यह जानकारी आयोग के मंत्रिमंडलीय मंजूरी संबंधी बयान में दी गई।
आधिकारिक दस्तावेज कानून लागू होने की तारीख पर एकमत नहीं हैं। 30 दिसंबर के बयान में 5 जुलाई को प्रस्तावित प्रभावी तारीख बताया गया था, जबकि सरकार के 30 जुलाई 2026 के दिशानिर्देश के अनुसार कानून 7 जुलाई को लागू हुआ। प्लेटफॉर्मों की बाद की शिकायत रिपोर्टों में भी 7 जुलाई को शुरुआती तारीख माना गया है। दोनों तारीखों में अंतर का कारण नहीं बताया गया है।
घोषणाओं और रिपोर्टिंग अवधियों का क्रम इस प्रकार है:
- 30 दिसंबर 2025: मंत्रिमंडलीय मंजूरी की घोषणा हुई; पात्रता के विस्तृत नियम अधीनस्थ कानून के जरिए तय किए जाने बाकी थे।
- 7 जुलाई 2026: सरकार के बाद के दिशानिर्देश और शिकायत रिपोर्टिंग में बताई गई लागू होने की तारीख।
- 30 जुलाई 2026: सरकार के दिशानिर्देश में प्लेटफॉर्मों के वर्गीकरण, प्रकाशकों के मानदंड और शिकायत प्रक्रियाओं का विवरण दिया गया।
- 31 अगस्त: Naver की 900 शिकायतों के आंकड़ों की अंतिम तारीख।
- 28 सितंबर: Kakao की 895 शिकायतों के आंकड़ों की अंतिम तारीख।
- 30 सितंबर: Daum, Nate Communications और DC Inside के आंकड़ों की अंतिम तारीख।
अलग-अलग अंतिम तारीखें सीधी तुलना को सीमित करती हैं। Naver के आंकड़े कई अन्य सेवाओं की तुलना में कम अवधि को कवर करते हैं, इसलिए कुल संख्याओं को समान समयावधि में शिकायतों की दर की रैंकिंग नहीं मानना चाहिए।
किन प्लेटफॉर्मों और संदेशों पर नियम लागू होते हैं?
सरकार के जुलाई के नीतिगत दिशानिर्देश में बड़े प्लेटफॉर्म की सीमा औसतन कम से कम 10 लाख दैनिक उपयोगकर्ता तय की गई है। इसमें नौ नामित सेवा प्रदाता शामिल हैं: Naver, Kakao, Nate, DC Inside, AXZ, Google, Meta, X और TikTok। इन कंपनियों को अपनी नीतियां बनानी और लागू करनी होंगी तथा अवैध या हेरफेर कर बनाई गई झूठी जानकारी से निपटने पर रिपोर्ट प्रकाशित करनी होगी।
नामित प्लेटफॉर्मों की सूची और शिकायतों का ब्योरा अलग-अलग नामों का इस्तेमाल करता है। पहली सूची में AXZ का नाम है, जबकि दूसरी में पांच घरेलू सेवाओं में Daum को अलग से शामिल किया गया है। पाठकों को Daum को नौ सेवा प्रदाताओं की सूची में इस तरह नहीं जोड़ना चाहिए, मानो दोनों सूचियों में एक जैसी श्रेणियां हों।
सरकार के अनुसार, निजी KakaoTalk बातचीत, डायरेक्ट मैसेज और अन्य निजी संवाद गलत सूचना के प्रसार संबंधी नियमों के दायरे से बाहर हैं। कानून अधिकारियों को इन बातचीत तक पहुंच या उनकी निगरानी का अधिकार नहीं देता।
यह तय करने में ऐप का नाम नहीं, बल्कि जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रसारित होती है या नहीं, अहम है। KakaoTalk का ओपन चैट नियमों के दायरे में आ सकता है, अगर उसमें अनिर्दिष्ट लोग शामिल हो सकते हैं और जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रसारित होती है। इसलिए एक ही सेवा पर निजी बातचीत और सार्वजनिक चर्चा के साथ अलग-अलग व्यवहार किया जा सकता है।
सरकार का यह भी कहना है कि राजनीतिक आलोचना और निजी राय को सिर्फ इसलिए नियंत्रित नहीं किया जाता कि वे अधिकारियों को चुनौती देती हैं या किसी को ठेस पहुंचाती हैं। इसका यह मतलब नहीं कि सार्वजनिक रूप से पोस्ट किया गया हर संदेश नियमों से बाहर है: कानूनी आकलन उसकी सामग्री, उद्देश्य और उससे हुए नुकसान पर निर्भर करता है।
हेरफेर कर बनाई गई झूठी जानकारी किसे माना जाएगा?
सरकार इसे ऐसी कसौटी बताती है जिसके सभी तत्वों का एक साथ पूरा होना जरूरी है। प्रकाशक को पता होना चाहिए कि जानकारी पूरी तरह या आंशिक रूप से झूठी है, या उसमें इस तरह बदलाव किया गया है कि उसे तथ्य समझा जा सकता है। साथ ही, नुकसान पहुंचाने या अनुचित लाभ हासिल करने का इरादा होना चाहिए और किसी कानूनी रूप से संरक्षित हित का उल्लंघन हुआ होना चाहिए, जैसे किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा, संपत्ति के अधिकार या जनहित।
यह हर तथ्यात्मक गलती को प्रतिबंधित गलत सूचना मानने से कहीं संकीर्ण कसौटी है। केवल गलत बयान से पूरी कसौटी पूरी नहीं होती। जानकारी होने, उद्देश्य और नुकसान भी मायने रखते हैं, जिसमें वह स्थिति भी शामिल है जहां प्रकाशक विज्ञापन या व्यू से पैसा कमाता है।
सरकार के उदाहरणों में ऐसा वीडियो शामिल है जो बिना पुष्टि की गई किसी चर्चित हस्ती से जुड़ी अफवाह को सनसनीखेज संपादन के जरिए तथ्य जैसा बना देता है। दूसरा उदाहरण ऐसा साक्षात्कार है जिसके बयानों का क्रम बदला गया हो, कुछ हिस्से हटाए गए हों या संदर्भ से काटकर ऐसा अर्थ दिया गया हो जो मूल बात से अलग हो। इन उदाहरणों में भी नुकसान पहुंचाने का जरूरी इरादा या अनुचित वित्तीय उद्देश्य साबित करना होगा।
व्यंग्य और पैरोडी को अपवाद बताया गया है, लेकिन दिशानिर्देश में एक शर्त भी है। व्यंग्य जैसा दिखने वाला कंटेंट भी नियमों के दायरे में आ सकता है, अगर वह नुकसान पहुंचाने के इरादे या अनुचित लाभ और संरक्षित हितों के उल्लंघन से जुड़ी कसौटियों पर खरा उतरता है। किसी पोस्ट को पैरोडी कह देने से उसकी कानूनी स्थिति अपने आप तय नहीं हो जाती।
घृणा और भेदभावपूर्ण अभिव्यक्ति को झूठी जानकारी से अलग रखा गया है। दिशानिर्देशों में नस्ल, राष्ट्रीयता, क्षेत्र, लिंग, विकलांगता, उम्र या सामाजिक और आर्थिक स्थिति जैसे गुणों के आधार पर हिंसा या भेदभाव के सीधे उकसावे, अथवा ऐसी घृणा को गंभीर रूप से बढ़ावा देने को शामिल किया गया है जिससे मानवीय गरिमा को काफी नुकसान पहुंचे। केवल राजनीतिक आलोचना, व्यंग्य या किसी बात का बुरा लगना पर्याप्त नहीं है; संदर्भ और सामाजिक प्रभावों का भी आकलन करना होगा।
शिकायत और अपील की प्रक्रिया
कोई भी व्यक्ति संदिग्ध अवैध या हेरफेर कर बनाई गई झूठी जानकारी की रिपोर्ट संबंधित प्लेटफॉर्म को कर सकता है। रिपोर्ट में सामग्री का स्थान, जैसे उसका URL, शिकायत का कारण और सहायक सबूत देने होंगे। प्रक्रिया में शिकायतकर्ता की पहचान और संपर्क विवरण भी मांगे जाते हैं; बिना स्पष्टीकरण के लगाए गए आरोप को पूरी शिकायत नहीं माना जाता।
शिकायत दर्ज करने से पोस्ट अपने आप नहीं हटती। प्लेटफॉर्म अपनी नीतियों के तहत रिपोर्ट की समीक्षा करते हैं और सामग्री हटा या ब्लॉक कर सकते हैं, उसकी पहुंच घटा सकते हैं, खाता निलंबित कर सकते हैं या कोई कार्रवाई नहीं कर सकते। सरकार का कहना है कि कंपनियों को स्वतंत्र रूप से समीक्षा करनी चाहिए, न कि केवल शिकायत करने वालों की संख्या गिननी चाहिए।
प्लेटफॉर्मों को शिकायतकर्ता और प्रकाशक, दोनों को अपने फैसले और उसके कारण बताने होंगे और अपील प्रक्रिया की जानकारी देनी होगी। सूचना मिलने के छह महीने के भीतर दोनों पक्ष अपील कर सकते हैं। जिन विवादों का समाधान नहीं होता, उन्हें प्रसारण, मीडिया एवं संचार समीक्षा आयोग की विवाद मध्यस्थता प्रक्रिया में भेजा जा सकता है। अदालत में कार्यवाही का रास्ता भी खुला है।
कानूनी भूमिकाएं अलग-अलग हैं। प्लेटफॉर्म अपनी सेवा के नियमों के तहत तय करता है कि क्या कार्रवाई करनी है। नागरिक हर्जाने का फैसला अदालत करती है। बार-बार प्रसार के लिए अतिरिक्त शुल्क लगाया जाए या नहीं, इसका फैसला नियामक अलग से करता है, लेकिन केवल अंतिम अदालती फैसले के आधार पर। सरकार का कहना है कि इस ढांचे के तहत उसे किसी पोस्ट को सीधे झूठा घोषित करने और उसे हटाने का आदेश देने का अधिकार नहीं है।
दिसंबर के बयान में यह भी कहा गया है कि हेरफेर कर बनाई गई झूठी जानकारी समीक्षा आयोग के विचार-विमर्श के अधिकार क्षेत्र से बाहर है, जबकि अवैध जानकारी उसके दायरे में आती है। इस अंतर को विवाद मध्यस्थता के लिए उपलब्ध अलग रास्ते से नहीं जोड़ना चाहिए।
किसे नुकसान के पांच गुना तक हर्जाना देना पड़ सकता है?
बढ़े हुए हर्जाने के प्रावधान उन लोगों पर लागू होते हैं जो जनता तक तथ्य या राय पहुंचाने का व्यवसाय करते हैं और तय राजस्व तथा दर्शक संख्या की सीमाएं पूरी करते हैं। जुलाई के दिशानिर्देश के तहत, प्रकाशक ने इससे पहले के तीन महीनों में कम से कम तीन पोस्ट से, विज्ञापन आय सहित, राजस्व कमाया होना चाहिए।
प्रकाशक के कम से कम एक लाख सब्सक्राइबर होने चाहिए या उस तीन महीने की अवधि में पोस्ट की गई सामग्री को औसतन कम से कम एक लाख मासिक व्यू मिले होने चाहिए। दर्शक संख्या की ये दोनों कसौटियां विकल्प हैं, दोनों को पूरा करना जरूरी नहीं। इसलिए सब्सक्राइबर सीमा से नीचे का कमाई करने वाला चैनल भी व्यू के आंकड़ों के आधार पर दायरे में आ सकता है।
अनुच्छेद 44-10 के तहत, लागू शर्तें पूरी होने पर अदालत वास्तविक नुकसान के पांच गुना तक हर्जाना दे सकती है। यह अधिकतम सीमा है, हर झूठी पोस्ट या सफल शिकायत पर मिलने वाला तय हर्जाना नहीं। जिम्मेदारी और रकम का फैसला न्यायिक निष्कर्षों पर निर्भर करेगा, जिनमें जरूरी इरादा, उद्देश्य और संरक्षित हितों का उल्लंघन शामिल है।
YouTube चैनल, समाचार वेबसाइट और मीडिया संगठनों के सोशल मीडिया खाते नियमों के दायरे में आ सकते हैं, अगर वे कानूनी शर्तें पूरी करते हों। हालांकि, जनहित से जुड़ी जानकारी पर बढ़ा हुआ हर्जाना लागू नहीं होगा। दिसंबर के बयान में विशेष रूप से लोकहित व्हिसलब्लोअर संरक्षण अधिनियम के तहत आने वाले कृत्यों, अनुचित आग्रह और भ्रष्टाचार-विरोधी अधिनियम के तहत प्रतिबंधित आचरण और जनचिंता के ऐसे ही अन्य मामलों की जानकारी का जिक्र है।
अनुच्छेद 44-11 में सार्वजनिक हस्तियों, जिनमें सार्वजनिक पद के उम्मीदवार और सार्वजनिक संस्थानों के प्रमुख शामिल हैं, के दुरुपयोग से बचाव के प्रावधान हैं। बयान में अदालत के मध्यवर्ती फैसले की प्रक्रिया, उस फैसले का खुलासा करने की सार्वजनिक हस्तियों की बाध्यता और विपरीत दिशा में मुआवजे की व्यवस्था का जिक्र है। इन सुरक्षा उपायों का मकसद हर्जाने के दावों को जनहित में काम आने वाली जानकारी के खिलाफ हथियार बनने से रोकना है।
एक अरब वॉन के अतिरिक्त शुल्क की अलग कसौटी
अधिकतम एक अरब वॉन का प्रशासनिक अतिरिक्त शुल्क केवल विवादित जानकारी पोस्ट करने से नहीं लगता। सरकार का कहना है कि यह उन पात्र व्यावसायिक प्रकाशकों पर लागू होता है जो अंतिम अदालती फैसले में गलत सूचना माने जाने के बाद भी ऐसी जानकारी कम से कम दो बार प्रसारित करते हैं।
प्रकाशक ने प्रसार से पहले के तीन महीनों में कम से कम तीन पोस्ट से राजस्व भी कमाया होना चाहिए। इस अतिरिक्त शुल्क के बारे में आधिकारिक स्पष्टीकरण में बढ़े हुए नागरिक हर्जाने के लिए इस्तेमाल की गई एक लाख सब्सक्राइबर या व्यू की सीमा दोहराई नहीं गई है। इसलिए दोनों व्यवस्थाओं की पात्रता कसौटियों को एक जैसा नहीं मानना चाहिए।
अंतिम अदालती फैसले की शर्त इस अतिरिक्त शुल्क को शुरुआती शिकायत या प्लेटफॉर्म के सामग्री नियंत्रण संबंधी फैसले से अलग करती है। प्लेटफॉर्म किसी पोस्ट को हटा सकता है, लेकिन उस हटाने से अधिकतम वित्तीय दंड लगाने का आधार अपने आप नहीं बनता।
कार्यान्वयन की शुरुआती रिपोर्टों के समय तक संबंधित मुकदमे या अतिरिक्त शुल्क के मामले सामने नहीं आए थे। यह उस रिपोर्टिंग अवधि का ब्यौरा है, इस बात का सबूत नहीं कि बाद में कोई मामला नहीं आया या प्रावधानों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
प्लेटफॉर्म के शुरुआती आंकड़े वास्तव में क्या दिखाते हैं?
Naver, Kakao और Daum की बताई 1,837 शिकायतें, पांचों घरेलू सेवाओं पर दर्ज कुल 2,732 शिकायतों का हिस्सा हैं; दोनों संख्याओं में विरोधाभास नहीं है। Naver ने 900 शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं की, Kakao ने 895 को खारिज किया और Daum ने अपनी 42 शिकायतों में से 41 पर कार्रवाई नहीं की। Daum का बाकी एक मामला कोरिया इंटरनेट सेल्फ-गवर्नेंस ऑर्गनाइजेशन, जिसे KISO के नाम से जाना जाता है, के पास समीक्षा के लिए था।
DC Inside ने 829 शिकायतों में से 26 पोस्ट हटाईं और 803 खारिज कीं। Nate Communications ने 66 में से एक मामले में सामग्री की पहुंच सीमित की। पांचों सेवाओं में ये 27 कार्रवाइयां कुल 2,732 शिकायतों का करीब 1% हैं। DC Inside में पोस्ट हटाए जाने का अनुपात करीब 3.1% था, जबकि Nate में पहुंच सीमित करने का अनुपात करीब 1.5% रहा।
ये गणनाएं शिकायतों पर दर्ज प्रतिक्रियाओं को मापती हैं, गलत सूचना के प्रसार को नहीं। आंकड़े यह नहीं बताते कि कितनी रिपोर्टें एक ही सामग्री से जुड़ी थीं, अलग-अलग शिकायतें क्यों खारिज हुईं, कितनी अपीलें की गईं या शिकायतकर्ताओं को आखिरकार मुआवजा मिला या नहीं।
इनसे यह भी साबित नहीं होता कि प्लेटफॉर्मों ने वैध दावों को नजरअंदाज किया। कार्रवाई की कम दर की वजह ऐसी शिकायतें हो सकती हैं जो कानून या सेवा की नीतियों की कसौटी पर खरी नहीं उतरीं, कंपनियों की सीमित व्याख्या या अन्य कारक। फैसलों के कारण और अपील के नतीजे प्रकाशित न होने से केवल कुल आंकड़ों के आधार पर इन संभावनाओं में अंतर नहीं किया जा सकता।
पारदर्शिता की कसौटी अब भी बाकी
Google, Meta, X और TikTok ने शिकायतों और उन पर की गई कार्रवाई के आंकड़े देने के नियामक के अनुरोध का जवाब नहीं दिया। इन आंकड़ों की कमी से घरेलू और विदेशी सेवाओं की तुलना संभव नहीं है और सभी नौ नामित सेवा प्रदाताओं पर शिकायतों की कुल संख्या भी अज्ञात है।
राष्ट्रीय असेंबली की विज्ञान, प्रौद्योगिकी, प्रसारण और संचार संबंधी समिति में डेमोक्रेटिक पार्टी की सांसद ली जू-ही ने कानून के अमल की और बारीकी से जांच करने की मांग की। कोरियाई भाषा से अनूदित बयान में उन्होंने कहा कि विदेशी प्लेटफॉर्मों के आंकड़े न होना कानून के आकलन में बाधा है:
देश में बड़ी संख्या में उपयोगकर्ताओं वाले प्रमुख विदेशी प्लेटफॉर्मों की स्थिति जाने बिना हम कानून का उद्देश्य पूरा नहीं कर सकते।
कानून लागू करने की कुछ सीमाएं जानबूझकर रखी गई थीं। दिसंबर के सरकारी बयान के अनुसार, प्लेटफॉर्मों की सामग्री नियंत्रण संबंधी नीतियों से जुड़े दंड के प्रावधान हटाए गए, ताकि कंपनियों की स्वायत्तता बनी रहे और उन पर जरूरत से ज्यादा बोझ न पड़े। बाद की रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि जरूरी रिपोर्ट प्रकाशित न करने पर दंड न होने से नियमों का पालन सुनिश्चित करना मुश्किल हो सकता है।
प्रस्तावित सूचना एवं संचार सेवा पारदर्शिता केंद्र सहायता देने वाली संस्था है, सत्य तय करने वाला एकमात्र प्राधिकरण नहीं। इसके कामों में स्वतंत्र तथ्य-जांच, शोध, शिक्षा, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और डेटाबेस विकास में मदद शामिल है। प्लेटफॉर्मों के लिए स्वतंत्र तथ्य-जांच समूहों के निष्कर्ष मानना अनिवार्य नहीं है।
अब कुछ ठोस सवाल बाकी हैं: क्या सामग्री नियंत्रित करने के कारण सार्वजनिक होंगे, क्या अपीलों से गलतियां सुधरेंगी, एक साथ की गई शिकायतों से कैसे निपटा जाएगा और क्या विदेशी सेवा प्रदाता तुलनीय आंकड़े देंगे। शुरुआती आंकड़े इन सवालों का जवाब नहीं देते और अगली सुनवाई, अदालत की समय-सीमा या प्रकाशन की तारीख भी तय नहीं की गई है।
मुख्य बातें
- पांच घरेलू सेवाओं पर 2,732 शिकायतें दर्ज हुईं; 26 पोस्ट हटाई गईं और एक मामले में सामग्री की पहुंच सीमित की गई।
- Google, Meta, X और TikTok ने मांगे गए शिकायत और कार्रवाई के आंकड़े नहीं दिए।
- सरकार के दिशानिर्देशों में 7 जुलाई को कानून लागू होने की तारीख बताया गया है; पहले के मंत्रिमंडलीय बयान में 5 जुलाई दर्ज था।
- निजी संदेश दायरे से बाहर हैं, लेकिन सार्वजनिक रूप से उपलब्ध ओपन चैट पर नियम लागू हो सकते हैं।
- गलत सूचना के लिए झूठ या हेरफेर की जानकारी, नुकसान पहुंचाने का इरादा या अनुचित लाभ और संरक्षित हितों का उल्लंघन जरूरी है।
- पात्र व्यावसायिक प्रकाशकों को अदालत वास्तविक नुकसान के पांच गुना तक हर्जाना दे सकती है; जनहित की जानकारी को इससे सुरक्षा मिली है।
- एक अरब वॉन तक का अतिरिक्त शुल्क लगाने के लिए अंतिम अदालती फैसले में गलत मानी गई जानकारी का बार-बार प्रसार जरूरी है।
- शिकायतकर्ता और प्रकाशक सूचना मिलने के छह महीने के भीतर प्लेटफॉर्म के फैसले के खिलाफ अपील कर सकते हैं।






