सरवाक में कैंसर का लगातार बना बोझ
1996 से 2015 के बीच सरवाक में दर्ज नासोफैरिंजियल कैंसर के 3,643 मामलों के अध्ययन में पाया गया कि बिदायूह पुरुषों में इसकी दर प्रति 100,000 लोगों पर 27.8 थी, जबकि पूरे राज्य में यह 13.2 थी। बिदायूह महिलाओं में यह दर प्रति 100,000 पर 11.6 थी, जबकि राज्य का औसत 5.3 था। दोनों आंकड़ों के अनुसार यह समुदाय दुनिया में दर्ज सबसे ऊंची दरों वाले समूहों में शामिल है।
विषय-सूची
- सरवाक में कैंसर का लगातार बना बोझ
- बिदायूह समुदाय की दरें कितनी असाधारण हैं?
- बदलते आंकड़े वास्तव में क्या दिखाते हैं
- दर में गिरावट, लेकिन प्रगति असमान
- दर कम होने के बावजूद मलेशिया में मामलों की संख्या बढ़ी
- इसके कारणों के बारे में क्या पता है?
- देर से निदान अब भी बड़ी चिंता
- किसे जांच से लाभ हो सकता है?
- जल्दी पता चलने से इलाज की संभावनाएं बेहतर होती हैं
- मुख्य बिंदु
निष्कर्ष बताते हैं कि मामलों की दर में गिरावट का मतलब यह नहीं कि खतरा टल गया है। अध्ययन की अवधि में बिदायूह समुदाय की दर सरवाक के औसत से दोगुने से अधिक बनी रही। वहीं, मलेशिया के आंकड़ों से पता चलता है कि इस कैंसर के लगभग तीन-चौथाई मरीजों में निदान तीसरे या चौथे चरण में होता है।
नासोफैरिंजियल कैंसर, यानी NPC, नाक के पीछे गले के ऊपरी हिस्से में विकसित होता है। इसकी जगह के कारण छोटे ट्यूमर का पता लगाना मुश्किल होता है और शुरुआती लक्षण हल्के हो सकते हैं। गर्दन में गांठ, सुनने में बदलाव या नाक से खून आना ऐसे पहले संकेत हो सकते हैं जिन पर चिकित्सा सहायता ली जाती है।
अगस्त 2023 में Asian Pacific Journal of Cancer Prevention में प्रकाशित सरवाक रजिस्ट्री अध्ययन में कई समूहों में दरें घटती मिलीं, लेकिन बिदायूह लोगों में जोखिम लगातार अधिक बना रहा। इसके लेखकों ने शुरुआती जांच और रोकथाम पर अधिक ध्यान देने की अपील की।
बिदायूह समुदाय की दरें कितनी असाधारण हैं?
सबसे सटीक तुलना के लिए एक ही अवधि के आंकड़ों का उपयोग और आबादी की उम्र के अंतर का हिसाब रखना जरूरी है। आयु-समायोजित दर यह अनुमान देती है कि यदि हर आबादी में उम्र का वितरण समान होता, तो बीमारी की दर कैसी दिखती। इससे शोधकर्ता इस भ्रम से बचते हुए समुदायों की तुलना कर सकते हैं कि अधिक उम्र वाली आबादी में कैंसर का अंतर्निहित जोखिम भी अधिक है।
2008 से 2012 के लिए सरवाक के शोधकर्ताओं ने बिदायूह पुरुषों में प्रति 100,000 पर 23.8 और महिलाओं में 9.0 की दर की गणना की। सरवाक की सामान्य आबादी के लिए संबंधित आंकड़े 11.8 और 4.5 थे। पुरुषों की दर राज्य के औसत से दोगुने से कुछ अधिक थी; महिलाओं की दर ठीक दोगुनी थी।
अध्ययन ने इन आंकड़ों की तुलना अंतरराष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री के डेटा से की और पाया कि बिदायूह समुदाय में दर दक्षिणी चीन के झोंगशान और झुहाई क्षेत्रों के करीब थी, जहां NPC की दर असामान्य रूप से ऊंची है।
यह रुझान इससे पहले Beena C. R. Devi, Paola Pisani, Tieng Swee Tang और D. Maxwell Parkin के 2004 के घटना-दर अध्ययन में भी सामने आया था। 1996 से 1998 के निदानों की जांच करते हुए उन्होंने बिदायूह पुरुषों में प्रति 100,000 पर 31.5 और महिलाओं में 11.8 की दर निकाली, जो सरवाक के औसत से क्रमशः 2.3 और 1.9 गुना थी। ये दरें इसी अवधि के हांगकांग के आंकड़ों से लगभग 50 प्रतिशत अधिक थीं।
बदलते आंकड़े वास्तव में क्या दिखाते हैं
अलग-अलग अनुमान अलग-अलग अवधियों के हैं, ये किसी एक मौजूदा दर को नहीं दर्शाते। 1996 से 1998 के अध्ययन में ऊतक की जांच से पुष्टि किए गए 392 मामले दर्ज हुए और मृत्यु प्रमाणपत्रों से ही पहचाने गए 42 मामले भी जोड़े गए। इन अतिरिक्त मामलों को हटाने पर बिदायूह पुरुषों की दर घटकर प्रति 100,000 पर 29.4 और महिलाओं की 10.6 रह गई, जो फिर भी असाधारण रूप से ऊंची थी।
2007 से 2011 के एक अन्य अनुमान में बिदायूह पुरुषों में दर प्रति 100,000 पर 24.6 और महिलाओं में 9.3 थी। ये आंकड़े प्रकाशित अध्ययन के 2008 से 2012 के अनुमानों के करीब हैं, लेकिन उनसे मेल नहीं खाते। दोनों अवधियां एक-दूसरे से आंशिक रूप से जुड़ी हैं, पर अलग हैं; इसलिए इन आंकड़ों को एक ही वर्षों के परस्पर विरोधी माप नहीं मानना चाहिए।
सरवाक स्वास्थ्य विभाग के अप्रकाशित आंकड़े भी 1996 से 2000 के बीच प्रति 100,000 पर 39 से घटकर 2011 से 2015 में 22 होने का संकेत देते हैं। लिंग और गणना के तरीकों का वैसा ही विस्तृत ब्योरा उपलब्ध न होने के कारण इस श्रृंखला की प्रकाशित अनुमानों से सीधी तुलना नहीं की जा सकती।
शोध और रिपोर्टिंग के प्रमुख पड़ाव कई दशकों में फैले हैं:
- 1996: सरवाक कैंसर रजिस्ट्री ने काम शुरू किया।
- 1996 से 1998: इन निदानों के आधार पर मार्च 2004 में अध्ययन प्रकाशित हुआ।
- 1996 से 2015: रजिस्ट्री में बाद के विश्लेषण में जांचे गए 3,643 मामले दर्ज हुए।
- अगस्त 2023: इन 20 वर्षों के आंकड़ों का विश्लेषण प्रकाशित हुआ।
- 19 जुलाई 2024: मलेशिया ने 2017 से 2021 की राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री का सार प्रकाशित करने की घोषणा की।
दर में गिरावट, लेकिन प्रगति असमान
2023 के विश्लेषण में 1996 से 2003 के बीच सरवाक में NPC की दर में सालाना 3.9 प्रतिशत की सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण कमी पाई गई। 2003 से 2015 के दौरान अनुमानित सालाना बदलाव 0.17 प्रतिशत की गिरावट थी, जो सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण नहीं थी। इसलिए शुरुआती सुधार उसी मापनीय गति से आगे जारी नहीं रहा।
जातीय समूहों में रुझान मोटे तौर पर गिरावट का था। एक अपवाद 2009 से 2015 के बीच इबान पुरुषों में सालाना 5.48 प्रतिशत की अनुमानित वृद्धि थी। यह वृद्धि सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण नहीं थी, यानी विश्लेषण इसे संयोगवश आए उतार-चढ़ाव से भरोसे के साथ अलग नहीं कर सका।
उसी 2023 के अध्ययन के एक अन्य संस्करण में उपलब्ध पूरे रजिस्ट्री विश्लेषण से यह भी पता चलता है कि सबसे ऊंची दर और मामलों की सबसे बड़ी संख्या अलग-अलग माप हैं। बिदायूह मरीजों के 629 मामले थे, जो कुल का 17.3 प्रतिशत थे। इबान मरीजों के 1,169 और चीनी मरीजों के 1,022 मामले थे, जो बड़ी आबादी में बीमारी के बोझ को दर्शाते हैं।
अधिकांश मरीज 40 से 59 वर्ष के थे। इस आयु वर्ग में 1,908 मामले, यानी कुल का 52.4 प्रतिशत, दर्ज हुए। सामाराहान में दरें सबसे अधिक थीं: पुरुषों में प्रति 100,000 पर 21.1 और महिलाओं में 8.0। कुचिंग में मामलों की संख्या सबसे अधिक, 877 थी, लेकिन वहां दर सबसे ऊंची नहीं थी।
दर कम होने के बावजूद मलेशिया में मामलों की संख्या बढ़ी
राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री के आंकड़ों में 2017 से 2021 के दौरान NPC के 5,186 मामले दर्ज हुए, जबकि 2012 से 2016 के दौरान 4,597 मामले थे। यानी 589 मामले, या लगभग 12.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इन्हीं अवधियों में रिपोर्ट की गई बीमारी की दर प्रति 100,000 लोगों पर 4.0 से घटकर 3.1 हो गई, यानी 22.5 प्रतिशत की कमी आई।
मामलों की संख्या बढ़ना और दर घटना जरूरी नहीं कि एक-दूसरे के विरोधाभासी हों। संख्या बताती है कि कितने लोगों में निदान हुआ, जबकि दर निदानों को आबादी के आकार के संदर्भ में मापती है और उसमें उम्र के लिए समायोजन भी हो सकता है। आबादी में बदलाव और रिपोर्टिंग का तरीका, दोनों के बीच संबंध को प्रभावित कर सकते हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने Malaysia National Cancer Registry Report 2017 to 2021 के सार की घोषणा करते हुए कहा कि 2018 में ऑनलाइन रिपोर्टिंग शुरू हुई और 2020 में एक परिपत्र के जरिए ऑनलाइन सूचनाएं देना अनिवार्य किया गया। इन बदलावों से रिपोर्ट किए गए कैंसर मामलों में वृद्धि हुई। हालांकि, इससे यह तय नहीं होता कि NPC के मामलों में हुई वृद्धि का कितना हिस्सा बेहतर रिपोर्टिंग और कितना अन्य बदलावों के कारण था।
2017 से 2021 के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर निदान किए गए कैंसरों में NPC आठवें और पुरुषों में छठे स्थान पर था। रजिस्ट्री की पिछली रिपोर्टों में यह सभी मलेशियाइयों में पांचवें स्थान पर था। ये रैंकिंग अलग-अलग अवधियों या आबादी के समूहों पर आधारित हैं और इन्हें एक-दूसरे के समान नहीं मानना चाहिए।
सरवाक में NPC की रिपोर्ट की गई दर अब भी देश में सबसे अधिक है: पुरुषों में प्रति 100,000 पर 10.6 और महिलाओं में 3.9। ये आंकड़े 1996 से 2015 के शोध औसत से अलग रिपोर्टिंग अवधि के हैं।
इसके कारणों के बारे में क्या पता है?
NPC का जोखिम कई कारकों से जुड़ा है, जिनमें आनुवंशिक संवेदनशीलता, परिवार में बीमारी का इतिहास, EBV संक्रमण, तंबाकू का धूम्रपान और पर्यावरण या खान-पान से जुड़े संपर्क शामिल हैं। स्थानिक NPC के 95 प्रतिशत से अधिक मामलों का संबंध EBV से है। स्थानिक से आशय ऐसे मामलों से है जो उन जगहों पर होते हैं जहां बीमारी लंबे समय से ऊंची दर पर बनी रहती है। केवल संक्रमण से यह नहीं समझाया जा सकता कि कुछ समुदायों में बीमारी की दर दूसरों के मुकाबले बहुत अधिक क्यों है।
2004 के अध्ययन में EBV, तंबाकू का धूम्रपान और चीनी शैली में नमक डालकर तैयार की गई मछली को स्थापित कारण बताया गया था। अध्ययन ने एक अहम फर्क भी स्पष्ट किया: मलेशियाई चीनी लोगों में नमकीन मछली और NPC के बीच संबंध के प्रमाण यह साबित नहीं करते कि बिदायूह लोगों की खान-पान संबंधी खास परंपराएं उनके समुदाय में अधिक जोखिम का कारण हैं।
संरक्षित मछली, मांस और सब्जियों में कैंसरकारी नाइट्रोसामाइन्स हो सकते हैं। लकड़ी के सॉल्वेंट से जुड़े संपर्क समेत खतरनाक रसायनों को भी संभावित योगदानकर्ता माना गया है। रजिस्ट्री अध्ययनों में व्यक्तिगत संपर्कों को इतनी बारीकी से नहीं मापा गया कि बिदायूह समुदाय के मामलों में किसी एक कारक का हिस्सा तय किया जा सके।
2004 के अध्ययन के लेखक Devi, Pisani, Tang और Parkin ने अपने महामारी-विज्ञान शोधपत्र में बताया कि किन सवालों पर आगे जांच की जरूरत है:
इस आबादी में स्थानीय खान-पान की आदतों, पर्यावरणीय संपर्कों और आनुवंशिक संवेदनशीलता की जांच की जानी चाहिए।
बाद के सरवाक अध्ययन ने भी आनुवंशिकी, खान-पान, धूम्रपान और पर्यावरणीय संपर्कों की अधिक जांच का सुझाव दिया। जातीयता ऐसे समूह की पहचान करती है जिसमें देखा गया जोखिम अधिक है; यह अपने-आप में किसी जैविक कारण की पहचान नहीं करती और न ही समुदाय की परंपराओं को दोष देने का आधार देती है।
देर से निदान अब भी बड़ी चिंता
1996 से 1998 के सरवाक अध्ययन में पाया गया कि 88 प्रतिशत मरीज तीसरे या चौथे चरण में अस्पताल पहुंचे। राष्ट्रीय NPC आंकड़ों में पुरुषों के लिए यह अनुपात 76.2 प्रतिशत और महिलाओं के लिए 72.6 प्रतिशत था। ये अलग-अलग आबादियों और अवधियों के आंकड़े हैं, इसलिए इनकी तुलना से यह तय नहीं किया जा सकता कि बिदायूह लोगों में निदान की स्थिति कितनी बेहतर हुई है।
राष्ट्रीय स्तर की समस्या सिर्फ NPC तक सीमित नहीं है। राष्ट्रीय रजिस्ट्री के सार के अनुसार, सभी कैंसरों में तीसरे और चौथे चरण में पकड़े गए मामलों का हिस्सा 2012 से 2016 के 63.7 प्रतिशत से बढ़कर 2017 से 2021 में 65.1 प्रतिशत हो गया। यह 1.4 प्रतिशत अंक की वृद्धि है।
NPC के चेतावनी संकेतों में बिना दर्द की गर्दन की गांठ, नाक से खून आना, नथुनों का बंद होना, अत्यधिक बलगम या लार में खून शामिल हैं। कान से जुड़े लक्षणों में एक तरफ कान बंद होना, सुनने की क्षमता कम होना या टिनिटस यानी कानों में घंटी या भनभनाहट की आवाज शामिल हो सकती है। सिरदर्द, चेहरे का सुन्न होना और सिर के कार्यों को नियंत्रित करने वाली नसों से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं।
इन लक्षणों के कारण कैंसर के अलावा भी हो सकते हैं। फिर भी, बने रहने वाले या बिना स्पष्ट कारण के होने वाले लक्षणों की चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए, खासकर अगर किसी के परिवार में इस बीमारी का इतिहास हो या वह ऐसे समुदाय से हो जहां इसकी दर अधिक है। गंभीर लक्षणों का इंतजार करने से नाक के पीछे छिपे ट्यूमर का निदान देर से हो सकता है।
किसे जांच से लाभ हो सकता है?
उपलब्ध साक्ष्य परिवार में NPC का इतिहास रखने वाले लोगों और असामान्य रूप से ऊंची दर वाले समुदायों में जांच के प्रयासों को लक्षित करने का समर्थन करते हैं। मलेशिया में अनुमानित जीवनकाल जोखिम पुरुषों के लिए 167 में 1 है, जो चीनी और अन्य बुमिपुत्र पुरुषों में बढ़कर 100 में 1 हो जाता है। महिलाओं के लिए अनुमानित जोखिम 500 में 1 है, जो अन्य बुमिपुत्र महिलाओं में बढ़कर 250 में 1 हो जाता है।
अन्य बुमिपुत्र रजिस्ट्री की एक व्यापक श्रेणी है। इसमें मलय लोगों के अलावा अन्य मूल निवासी समूह शामिल हैं, जिनमें ओरंग अस्ली और साबाह व सरवाक के मूल निवासी समुदाय आते हैं। जीवनकाल के ये अनुमान बिदायूह समुदाय के लिए अलग से गणना किए गए जोखिम नहीं हैं।
NPC की जांच में इस्तेमाल होने वाले रक्त परीक्षणों में VCA IgA और EA IgA एंटीबॉडी परीक्षण शामिल हैं, जो EBV के प्रति प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया के कुछ पहलुओं को देखते हैं। EBV DNA परीक्षण वायरस की आनुवंशिक सामग्री का पता लगाते हैं। नासोएंडोस्कोपी में पतले देखने वाले उपकरण से चिकित्सक नासोफैरिंक्स की जांच कर सकते हैं। MRI और PET स्कैन से संदिग्ध बीमारी की जांच और उसके फैलाव का आकलन करने में मदद मिल सकती है।
ये तरीके अलग-अलग उद्देश्यों के लिए हैं और एक-दूसरे की जगह नहीं ले सकते। कुछ रक्त परीक्षणों के नतीजे विशिष्ट नहीं हो सकते, जबकि इमेजिंग महंगी हो सकती है। जांच का नतीजा अपने-आप में कैंसर की पुष्टि नहीं करता। शोध में जांच पर अधिक ध्यान देने की जरूरत बताई गई है, लेकिन किसी नए कार्यक्रम, सभी के लिए जांच की तय अवधि या शुरुआत की तारीख का उल्लेख नहीं है।
जल्दी पता चलने से इलाज की संभावनाएं बेहतर होती हैं
इलाज बीमारी के चरण और कैंसर के फैलाव पर निर्भर करता है। शुरुआती चरण की बीमारी का इलाज केवल रेडियोथेरेपी से हो सकता है, जबकि बाद के चरणों में आम तौर पर रेडियोथेरेपी के साथ कीमोथेरेपी की जरूरत होती है। रेडियोथेरेपी में ट्यूमर पर विकिरण डाला जाता है, जबकि कीमोथेरेपी में कैंसर कोशिकाओं पर असर करने वाली दवाओं का इस्तेमाल होता है।
इंटेंसिटी मॉड्यूलेटेड रेडियोथेरेपी में विकिरण की खुराक को इस तरह ढाला जाता है कि आसपास के महत्वपूर्ण अंगों पर उसका असर कम हो। सर्जरी आम तौर पर बीमारी दोबारा होने पर की जाती है, शुरुआती उपचार के तौर पर नहीं। दोबारा हुई बीमारी के विकल्पों में नासोफैरिंजेक्टॉमी यानी प्रभावित ऊतक हटाने की सर्जरी, या रेडियोथेरेपी का एक और कोर्स शामिल हो सकता है।
मलेशिया के जीवित रहने के आंकड़े बीमारी के चरण के अनुसार बड़ा अंतर दिखाते हैं। पांच साल की सापेक्ष जीवित रहने की दर पहले चरण में 63.7 प्रतिशत, दूसरे में 59.1 प्रतिशत, तीसरे में 50.2 प्रतिशत और चौथे में 26.9 प्रतिशत थी। पहले और चौथे चरण के बीच का अंतर 36.8 प्रतिशत अंक था।
सापेक्ष जीवित रहने की दर, कैंसर से पीड़ित लोगों के जीवित रहने की तुलना समान सामान्य आबादी में अपेक्षित जीवित रहने की दर से करती है। यह समूहों का ब्योरा देती है, किसी एक मरीज के लिए भविष्यवाणी नहीं। सभी चरणों को मिलाकर रिपोर्ट की गई दर महिलाओं के लिए 49.2 प्रतिशत और पुरुषों के लिए 44.8 प्रतिशत थी।
सरवाक रजिस्ट्री अध्ययन में लक्षणों, निदान तक लगने वाले समय, बीमारी के चरण, उपचार और जीवित रहने की पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं थी। इसलिए यह बिदायूह लोगों में मौजूदा जीवित रहने की दर तय नहीं कर सकता और न ही यह बता सकता है कि देरी ठीक किस जगह होती है। इसके आंकड़े 2015 पर समाप्त होते हैं, इसलिए समुदाय में बीमारी के बोझ का हालिया आकलन करने की जरूरत बनी हुई है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने राष्ट्रीय रजिस्ट्री रिपोर्ट अधिक बार प्रकाशित करने का इरादा जताया है। संभव है कि ये हर दो साल में और आगे चलकर सालाना प्रकाशित हों। हालांकि, प्रकाशन की कोई पक्की समय-सीमा नहीं दी गई। बीमारी की दर के बेहतर आंकड़े और चरण व उपचार के पूरे रिकॉर्ड यह पता लगाने में मदद करेंगे कि लक्षित जांच के प्रयास लोगों तक बीमारी के गंभीर होने से पहले पहुंच रहे हैं या नहीं।
मुख्य बिंदु
- 1996 से 2015 के अध्ययन में दोनों लिंगों के बिदायूह लोगों में NPC की दर सरवाक के औसत से दोगुने से अधिक थी।
- 2008 से 2012 की तुलना में बिदायूह समुदाय की दर दक्षिणी चीन के उन क्षेत्रों के बराबर थी जहां बीमारी की दर ऊंची है।
- सरवाक में 1996 से 2003 के बीच दर तेजी से घटी, लेकिन बाद की गिरावट सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण नहीं थी।
- मलेशिया में 2017 से 2021 के दौरान NPC के 5,186 मामले दर्ज हुए, जो इससे पहले के पांच वर्षों के 4,597 मामलों से अधिक थे।
- मलेशिया में NPC के लगभग तीन-चौथाई मरीजों का निदान तीसरे या चौथे चरण में हुआ।
- आनुवंशिक संवेदनशीलता, EBV, धूम्रपान और खान-पान या पर्यावरण से जुड़े संपर्कों पर ध्यान देने की जरूरत है, लेकिन यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि कोई एक कारण बिदायूह समुदाय के जोखिम को समझा देता है।
- अधिक जोखिम वाले समूहों की जांच और बने रहने वाले लक्षणों का समय पर आकलन प्राथमिकताएं हैं; जांच का कोई नया समय-निर्धारण घोषित नहीं किया गया।






