काबुल और हेरात में हिरासत की पुष्टि
संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन अफगानिस्तान (यूएनएएमए) ने 8 अक्टूबर को कहा कि तालिबान अधिकारियों ने जुलाई से सितंबर 2026 के बीच काबुल और हेरात में कम से कम 52 महिलाओं और एक लड़की को कथित उल्लंघनों के आरोप में गिरफ्तार या हिरासत में लिया। इनमें रंगीन स्कार्फ या मेकअप पहनना, बाल दिखना, या पुरुष अभिभावक के बिना सार्वजनिक जगह पर जाना शामिल था।
विषय-सूची
- काबुल और हेरात में हिरासत की पुष्टि
- हिरासत की वजह क्या थी?
- कम अवधि की हिरासत के दूरगामी असर
- जून की गिरफ्तारियों के बाद जानलेवा प्रदर्शन
- नियम और पुलिस बल के इस्तेमाल की सीमाएं
- मानवाधिकार दायित्व और वारंट की परस्पर विरोधी खबरें
- करीब 65 लाख लौटने वालों के सामने फिर से बसने की चुनौती
- रोजगार, आश्रय और दस्तावेजों की कमी
- क्या स्थापित नहीं हुआ है
- मुख्य बिंदु
मिशन के अनुसार, महिलाओं को कई घंटों बाद रिहा कर दिया गया। अन्य महिलाओं को गिरफ्तारी की धमकियां मिलीं। यूएनएएमए ने चेताया कि उसकी पुष्टि की गई संख्या, कार्रवाई के पूरे दायरे को कम करके दिखा सकती है, क्योंकि सुरक्षा संबंधी चिंताओं और सामाजिक कलंक के चलते कुछ घटनाओं की रिपोर्ट नहीं की जाती।
अपने 8 अक्टूबर के बयान में यूएनएएमए ने अफगानिस्तान के कई इलाकों में महिलाओं और लड़कियों को निशाना बनाकर की गई गिरफ्तारियों, हिरासतों और धमकियों पर "गहरी चिंता" जताई। मिशन ने महिलाओं, जिनमें महिला दुकानदार भी शामिल हैं, के साथ गाली-गलौज, मारपीट और धमकियों की घटनाएं भी बताईं।
ये निष्कर्ष जून में हेरात में हुई गिरफ्तारियों और उस प्रदर्शन के बाद आए हैं, जिसमें अधिकारियों ने कथित तौर पर गोलीबारी की थी। इस बीच, अफगानिस्तान 2023 से ईरान और पाकिस्तान से लौटे करीब 65 लाख लोगों को अपने यहां समायोजित कर रहा है। इनमें से कई बेरोजगारी, अपर्याप्त आश्रय और दस्तावेजों की कमी का सामना कर रहे हैं।
यूएनएएमए के ताजा बयान पर तालिबान ने तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। मिशन ने अधिकारियों से भेदभावपूर्ण कार्रवाई रोकने और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून के तहत अफगानिस्तान के दायित्वों का सम्मान करने की अपील की।
हिरासत की वजह क्या थी?
यूएनएएमए ने हिरासत के कई कथित आधार बताए: चादर न पहनना, बाल दिखाई देना, रंगीन स्कार्फ या मेकअप पहनना और महरम के बिना बाहर जाना। चादर शरीर को ढकने वाला परिधान है, जबकि महरम पुरुष अभिभावक या साथ चलने वाला संरक्षक होता है।
यह सूची दिखाती है कि कार्रवाई सिर्फ कपड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बात तक फैली है कि महिलाएं सार्वजनिक जगहों पर स्वतंत्र रूप से आ-जा सकती हैं या नहीं। यूएनएएमए ने यह विवरण नहीं दिया कि हर कथित उल्लंघन के लिए कितनी महिलाओं को हिरासत में लिया गया, या पुष्टि किए गए 53 मामलों में काबुल और हेरात के मामले कितने-कितने थे।
मिशन ने घटनाओं को गिरफ्तारी या हिरासत के रूप में बताया, लेकिन अपनी संख्या में इन दोनों श्रेणियों के बीच अंतर नहीं किया। बयान में औपचारिक आरोपों, अदालत की कार्यवाही या हर रिहाई की सटीक परिस्थितियों का विवरण नहीं है। इसलिए यह पुष्ट संख्या कार्रवाई का सामना करने वाले लोगों को दर्ज करती है, न कि मुकदमों या दोषसिद्धियों की प्रकाशित कुल संख्या को।
कई घंटों बाद रिहाई से हिरासत की अवधि के बारे में सीमित जानकारी मिलती है। लेकिन इससे हिरासत के आधार या महिलाओं को जाने देने से पहले उनके साथ हुए व्यवहार को लेकर चिंताएं खत्म नहीं होतीं।
कम अवधि की हिरासत के दूरगामी असर
यूएनएएमए ने कहा कि ये तौर-तरीके महिलाओं और लड़कियों के आवागमन, अभिव्यक्ति और स्वायत्तता के अधिकारों का उल्लंघन करते हैं। इन अधिकारों में बिना अनुचित हस्तक्षेप के यात्रा करने, अपनी पसंद जाहिर करने और अपने जीवन के बारे में फैसले लेने की स्वतंत्रता शामिल है।
मिशन ने यह भी चेताया कि गिरफ्तारी और हिरासत से महिलाओं और लड़कियों को गंभीर सामाजिक कलंक और आगे बहिष्कार का सामना करना पड़ सकता है। यह चिंता बताती है कि पुष्ट न्यूनतम संख्या, कार्रवाई के पूरे पैमाने का विश्वसनीय आकलन क्यों नहीं है: घटना की रिपोर्ट करने के नतीजों से डरने वाली महिलाएं दर्ज संख्या में कभी शामिल ही नहीं हो सकतीं।
गिरफ्तारी की धमकियां, वास्तविक हिरासत से अलग चिंता का विषय हैं। किसी महिला को रोके जाने का डर हो तो वह दुकान, कार्यस्थल या यात्रा से बच सकती है, भले ही अधिकारी उसे हिरासत में न लें। यूएनएएमए ने धमकियां दर्ज कीं, लेकिन उनसे प्रभावित महिलाओं की कुल संख्या प्रकाशित नहीं की।
महिला दुकानदारों का जिक्र, बताई गई ज्यादती को महिलाओं की आजीविका कमाने की क्षमता से जोड़ता है। मिशन ने यह नहीं बताया कि कितनी दुकानदारों को धमकी दी गई या पीटा गया, और न ही कारोबार के नुकसान का आकलन किया। फिर भी उसके बयान में सामान्य कारोबारी गतिविधियों में लगी महिलाओं को डराने-धमकाने का सामना करने वालों में शामिल बताया गया है।
जून की गिरफ्तारियों के बाद जानलेवा प्रदर्शन
ताजा निष्कर्ष हेरात में पहले हुए टकराव के बाद आए हैं। संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने कहा कि 6 और 7 जून 2026 को महिलाओं के पहनावे से जुड़े आदेश के कथित उल्लंघन के लिए दर्जनों महिलाओं को हिरासत में लिया गया था। बताई गई शर्तों में बुर्का या चेहरे के नकाब के साथ चादर पहनना और इत्र पर पाबंदी शामिल थी।
9 जून को पुरुष, महिलाएं और बच्चे इन पाबंदियों और हिरासतों के विरोध में जुटे। हेरात पर अपने बयान में विशेषज्ञों ने कहा कि अधिकारियों ने कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई और उन्हें पीटा।
हताहतों की संख्या के बारे में विवरण अलग-अलग हैं। यूएनएएमए के पहले के विवरण में हेरात के जिब्राइल इलाके में गोलीबारी में कम से कम एक लड़के की मौत और कई अन्य लोगों के घायल होने की बात थी। स्वतंत्र विशेषज्ञों ने कम से कम दो लोगों की मौत, जिनमें एक लड़का शामिल था, और 20 से अधिक लोगों के घायल होने की सूचना दी। इन अलग-अलग न्यूनतम संख्याओं को एक समान नहीं माना जा सकता और इनके बीच अंतर स्पष्ट करने वाला कोई विवरण जारी नहीं हुआ है।
यूएनएएमए के जून के निष्कर्षों पर आई खबरों में हेरात में गिरफ्तार महिलाओं की संख्या कम से कम 30 बताई गई थी, जबकि दर्जनों अन्य को मौखिक चेतावनी मिली थी। यह संख्या जुलाई से सितंबर के बीच दर्ज की गई 52 महिलाओं और एक लड़की से अलग अवधि की है। रिपोर्टिंग और पुष्टि के बारे में तुलनीय जानकारी के बिना इसका इस्तेमाल किसी रुझान का आकलन करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
दर्ज घटनाओं का क्रम इस प्रकार है:
- 6 और 7 जून 2026: पहनावे के कथित उल्लंघन को लेकर हेरात में दर्जनों महिलाओं को हिरासत में लिए जाने की खबरें आईं।
- 9 जून: प्रदर्शनकारियों ने पाबंदियों और हिरासतों के विरोध में प्रदर्शन किया; अधिकारियों ने कथित तौर पर गोलीबारी और मारपीट की।
- जुलाई से सितंबर: यूएनएएमए ने काबुल और हेरात में कम से कम 52 महिलाओं और एक लड़की की गिरफ्तारी या हिरासत की पुष्टि की।
- 8 अक्टूबर: यूएनएएमए ने अपने ताजा निष्कर्ष प्रकाशित किए और भेदभावपूर्ण कार्रवाई रोकने की अपील की।
नियम और पुलिस बल के इस्तेमाल की सीमाएं
सद्गुणों के प्रचार और दुर्गुणों की रोकथाम मंत्रालय, पहनावे और सार्वजनिक आचरण से जुड़े तालिबान के नियम लागू करता है। इस व्यवस्था का आधार सद्गुणों के प्रचार और दुर्गुणों की रोकथाम का कानून है, जिसके तहत नैतिकता अधिकारी व्यापक कार्रवाई कर सकते हैं।
2021 में सत्ता में लौटने के बाद से, जब अमेरिका के नेतृत्व वाली सेनाएं वापस जा रही थीं, तालिबान ने महिलाओं की शिक्षा, रोजगार और आवागमन पर व्यापक पाबंदियां लगाई हैं। लड़कियों और महिलाओं को प्राथमिक स्कूल से आगे की शिक्षा से वंचित किया गया है। सार्वजनिक जगहों पर पहनावे के नियमों में सिर ढकने वाला स्कार्फ, शरीर ढकने वाला लंबा परिधान और चेहरे का नकाब शामिल हैं।
तालिबान का कहना है कि उसके नियम इस्लामी कानून और अफगान संस्कृति की उसकी व्याख्या को दर्शाते हैं। संयुक्त राष्ट्र की आपत्ति इन पाबंदियों और उन्हें लागू करने के लिए बलपूर्वक अधिकारों के इस्तेमाल, दोनों पर है।
जून की हिंसा पर बात करने वाले स्वतंत्र विशेषज्ञों में अफगानिस्तान में मानवाधिकारों पर विशेष प्रतिवेदक रिचर्ड बेनेट और महिलाओं तथा लड़कियों के खिलाफ हिंसा पर विशेष प्रतिवेदक रीम अलसलेम शामिल थे। उन्होंने कानून लागू करने में बल के इस्तेमाल की कानूनी सीमाएं बताईं:
कानून लागू करने में बल का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सख्ती से सीमित है," विशेषज्ञों ने कहा। "इसकी अनुमति सिर्फ तभी है जब यह कानूनसम्मत हो, अधिकारियों या अन्य लोगों के सामने मौजूद खतरे के अनुपात में जरूरी हो, और एहतियात, भेदभाव न करने तथा जवाबदेही के सिद्धांतों का पालन करे।
विशेषज्ञों ने कुछ प्रदर्शनकारियों के पत्थर फेंकने की खबरों को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि ये कार्रवाइयां अपने आप में घातक बल इस्तेमाल करने की सख्त कसौटी पर खरी नहीं उतरतीं। उन्होंने स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की, जो यह तय कर सके कि जान बचाने के लिए घातक बल जरूरी था या नहीं, और कमान की श्रृंखला में जिम्मेदारी किसकी थी।
मानवाधिकार दायित्व और वारंट की परस्पर विरोधी खबरें
जून के विशेषज्ञों ने कहा कि पहनावे के उल्लंघन पर हिरासत मनमानी और गैरकानूनी हो सकती है, क्योंकि ऐसा लगता है कि यह महिलाओं की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लैंगिक भेदभाव से मुक्त रहने के अधिकार के इस्तेमाल को दंडित करती है। मनमानी हिरासत वह है जिसमें पर्याप्त कानूनी आधार न हो या मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो, भले ही अधिकारी किसी घरेलू नियम का हवाला दें।
उन्होंने नागरिक और राजनीतिक अधिकारों पर अंतरराष्ट्रीय प्रसंविदा, यातना के खिलाफ अभिसमय और महिलाओं के खिलाफ सभी प्रकार के भेदभाव के उन्मूलन पर अभिसमय के तहत अफगानिस्तान के दायित्वों का उल्लेख किया। उनका कहना था कि नियंत्रण रखने वाले अधिकारियों के रूप में तालिबान को उन संधियों का पालन करना चाहिए, जिनका अफगानिस्तान पक्षकार है।
अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय की ओर से तालिबान के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की अलग-अलग खबरें हैं, लेकिन वारंट के समय और संख्या को लेकर विवरण एक जैसे नहीं हैं। एक खबर कहती है कि 8 अक्टूबर वाले सप्ताह की शुरुआत में चार वारंट जारी हुए। दूसरी खबर के अनुसार, उसी सप्ताह दो अतिरिक्त वारंट सार्वजनिक किए गए, जो तालिबान नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा और सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख अब्दुलहकीम हक्कानी के खिलाफ पहले से मौजूद वारंट के अलावा थे।
इन विवरणों को इस दावे में नहीं मिलाना चाहिए कि उस सप्ताह चार नए वारंट जारी हुए। दोनों ही खबरें अदालत की कार्रवाई को महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों से वंचित करने के कथित मानवता-विरोधी अपराधों से जोड़ती हैं। उन विवरणों में दो अतिरिक्त अधिकारियों की पहचान नहीं बताई गई है।
गिरफ्तारी वारंट का अर्थ दोषसिद्धि नहीं है। तालिबान ने अदालत की कार्रवाई को राजनीतिक रूप से प्रेरित और अफगानिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन बताया। आईसीसी पर यह प्रतिक्रिया, यूएनएएमए के 8 अक्टूबर के बयान पर तत्काल प्रतिक्रिया न देने से अलग है।
करीब 65 लाख लौटने वालों के सामने फिर से बसने की चुनौती
गिरफ्तारी के निष्कर्षों के साथ-साथ, अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (आईओएम) ने ईरान और पाकिस्तान से लौटे अफगानों पर अपने निष्कर्ष प्रकाशित किए। संयुक्त राष्ट्र की अक्टूबर की ब्रीफिंग में पेश किए गए आईओएम के रिटर्नी रेजिलिएंस ओवरव्यू के अनुसार, 2023 से करीब 65 लाख लोग लौटे हैं।
इस ओवरव्यू में बिना दस्तावेजों वाले लौटने वाले परिवारों और ऐसे व्यक्तिगत लौटने वालों का अध्ययन किया गया, जो पहुंचने के बाद कम से कम आठ महीने तक अफगानिस्तान में रहे थे। इसलिए ये निष्कर्ष सिर्फ सीमा पर तत्काल जरूरतों के बजाय, शुरुआती वापसी के बाद लोगों के फिर से जीवन बसाने की क्षमता के आकलन के लिए प्रासंगिक हैं।
अफगानिस्तान में आईओएम की मिशन प्रमुख मिहयुंग पार्क ने चुनौती के पैमाने का वर्णन किया:
"अफगानिस्तान में लौटने वाले लोग जिस पैमाने और रफ्तार से आ रहे हैं, उसके लिए आगमन के बाद भी लगातार सहायता की जरूरत है," मिहयुंग पार्क ने कहा।
आकलन में शामिल आबादी में 82 प्रतिशत लोग परिवारों के रूप में लौटे थे और परिवार का औसत आकार 6.1 लोगों का था। 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की हिस्सेदारी 58 प्रतिशत थी। ये निष्कर्ष परिवारों के लिए आश्रय, स्कूली शिक्षा और जरूरी सेवाओं की बड़ी जरूरत की ओर इशारा करते हैं।
लौटने वालों के आंकड़े यूएनएएमए की हिरासत संख्या से अलग हैं। इनसे यह पता नहीं चलता कि कपड़ों के नियमों को लेकर कितने लौटने वालों को रोका गया, या हिरासत में ली गई महिलाओं में से कोई हाल ही में ईरान या पाकिस्तान से लौटी थी या नहीं।
रोजगार, आश्रय और दस्तावेजों की कमी
आकलन में शामिल 14 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लौटने वालों में 53 प्रतिशत ने कोई शिक्षा पूरी नहीं की थी, आधे के पास विशेष कौशल का अनुभव नहीं था और 69 प्रतिशत अपने साक्षात्कार से पहले के 30 दिनों में रोजगार में नहीं थे। रोजगार का यह आंकड़ा हाल के काम को मापता है, रोजगार से स्थायी रूप से बाहर होने को नहीं; फिर भी यह दिखाता है कि कितने लोग हाल की कमाई के बिना फिर से जीवन बसाने की कोशिश कर रहे थे।
आवास की स्थिति भी कठिन थी। आकलन में शामिल लोगों में से 77 प्रतिशत संक्रमणकालीन आश्रयों में रह रहे थे, जबकि 51 प्रतिशत के पास रहने की पर्याप्त जगह नहीं थी। ये अलग-अलग माप हैं: रहने की जगह का प्रकार अपने आप यह नहीं बताता कि परिवार के पास पर्याप्त जगह है या नहीं।
केवल 21 प्रतिशत परिवारों के उत्तरदाताओं ने कहा कि परिवार के हर सदस्य के पास दस्तावेज थे। अलग से, 43 प्रतिशत लोगों के पास संबंधित सेवाओं तक पहुंच के लिए जरूरी दस्तावेज नहीं थे। इन प्रतिशतों को एक-दूसरे का उलट नहीं मानना चाहिए, क्योंकि परिवार के सभी सदस्यों के दस्तावेज होना और किसी खास सेवा के लिए जरूरी कागजात होना अलग-अलग कसौटियां हैं।
पार्क ने बताया कि आईओएम के अनुसार लंबे समय तक सुधार के लिए क्या जरूरी है:
निष्कर्ष दिखाते हैं कि लौटने वालों में से कई रुककर फिर से जीवन बसाना चाहते हैं, लेकिन ऐसा कर पाने की उनकी क्षमता, आजीविका, सुरक्षित आश्रय, दस्तावेजों और जरूरी सेवाओं तक पहुंच पर निर्भर करती है; साथ ही उन्हें अपनाने वाले समुदायों को भी सहायता की जरूरत है।
आईओएम ने लौटने वालों और उन्हें अपनाने वाले समुदायों को लगातार सहायता देने की अपील की, जिसमें रोजगार के अवसर, आश्रय, दस्तावेजों में मदद और बुनियादी सेवाएं शामिल हैं। उसका तरीका उन जगहों पर ध्यान देता है जहां लोग बसते हैं, न कि सहायता को उनके पहुंचने के समय तक सीमित रखता है।
क्या स्थापित नहीं हुआ है
संयुक्त राष्ट्र के दोनों निष्कर्ष एक व्यावहारिक तनाव दिखाते हैं। लौटने वालों को काम और सेवाओं तक पहुंच चाहिए, जबकि महिलाओं के आवागमन और सार्वजनिक मौजूदगी पर पाबंदियां उनकी इन्हीं जरूरतों को पूरा करने की क्षमता सीमित करती हैं। आंकड़े लौटने वाले परिवारों पर पहनावे के नियमों को लागू करने के सीधे असर को नहीं मापते, इसलिए इस संबंध को वित्तीय नुकसान या छूटी हुई सेवाओं की संख्या के रूप में नहीं बताया जा सकता।
यूएनएएमए ने धमकियों की पूरी संख्या, हाल की हिरासतों का शहरवार ब्योरा या अलग-अलग मामलों का विवरण प्रकाशित नहीं किया है। जून में हताहतों की संख्या भी अलग-अलग विवरणों में अलग बनी हुई है। मानवाधिकार विशेषज्ञों की मांग पर शुरू की गई स्वतंत्र जांच के निष्कर्षों का कोई उल्लेख नहीं है।
विशेषज्ञों ने हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई, दुर्व्यवहार से सुरक्षा, घायलों के लिए चिकित्सा देखभाल और लोगों के घरों की तलाशी बंद करने की अपील की। यूएनएएमए के अक्टूबर के बयान में भेदभावपूर्ण कार्रवाई रोकने की मांग की गई है। किसी भी बयान में अनुपालन की समयसीमा तय नहीं की गई या सुनवाई की तारीख घोषित नहीं हुई।
तत्काल फर्क रिहाई और कार्रवाई के तौर-तरीकों में बदलाव का है। यूएनएएमए का कहना है कि महिलाओं को कई घंटों बाद छोड़ दिया गया, लेकिन वह धमकियों और दुर्व्यवहार की घटनाएं भी दर्ज करता है। इसलिए उसकी मांग सिर्फ लोगों को अलग-अलग अवधि की हिरासत से छोड़ने से व्यापक है: वह उन तौर-तरीकों को खत्म करने की मांग करता है, जिनमें महिलाओं और लड़कियों को पहनावे के चुनाव और सार्वजनिक आवाजाही के लिए दंडित किया जाता है।
मुख्य बिंदु
- यूएनएएमए ने जुलाई से सितंबर 2026 के बीच काबुल और हेरात में कम से कम 52 महिलाओं और एक लड़की की गिरफ्तारी या हिरासत की पुष्टि की।
- कथित उल्लंघनों में बाल दिखाई देना, रंगीन स्कार्फ, मेकअप, चादर न पहनना और पुरुष अभिभावक के बिना बाहर जाना शामिल था।
- महिलाओं को कई घंटों बाद रिहा कर दिया गया; यूएनएएमए ने चेताया कि डर और सामाजिक कलंक के कारण और मामले सामने नहीं आ सकते।
- हेरात में जून के प्रदर्शनों से पहले गिरफ्तारियां हुई थीं। अलग-अलग विवरणों में कम से कम एक और कम से कम दो मौतों की बात है।
- संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों और स्वतंत्र विशेषज्ञों ने भेदभावपूर्ण कार्रवाई रोकने और कथित ज्यादतियों के लिए जवाबदेही की मांग की।
- खबरों में इस बात पर मतभेद है कि आईसीसी के चार वारंट नए जारी हुए थे या दो पहले से मौजूद वारंट के साथ दो वारंट सार्वजनिक किए गए थे।
- 2023 से करीब 65 लाख अफगान ईरान और पाकिस्तान से लौटे हैं। आईओएम ने रोजगार, आश्रय और सेवाओं के लिए जरूरी दस्तावेजों की बड़ी कमी दर्ज की है।






