दो मार्गों के बंद होने से अफ़ग़ानिस्तान का भूख संकट गहराया
अफ़ग़ानिस्तान में आपूर्ति संकट अब फँसे हुए कंटेनरों से आगे बढ़कर खाली पोषण क्लीनिकों तक पहुँच गया है। 4 जून, 2026 को विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) के कार्यकारी निदेशक कार्ल स्काउ ने कहा कि बढ़ती कीमतों, बाधित आपूर्ति और वित्तपोषण में कटौती के कारण अफ़ग़ानिस्तान में 23 लाख और लोग गंभीर भूख की चपेट में आ गए हैं।
विषय-सूची
- दो मार्गों के बंद होने से अफ़ग़ानिस्तान का भूख संकट गहराया
- पाकिस्तान की बंदियों से ईरान पर निर्भरता कैसे बढ़ी
- आपूर्ति टूटने की समयरेखा
- पोषण की रिकॉर्ड ज़रूरत के बीच खाली क्लीनिक
- कई देशों से होकर बिस्कुट की खेप का सफ़र
- व्यापारियों के मालभाड़े के बिल कई गुना बढ़े
- मध्य एशिया से व्यापार जारी, लेकिन असमान रूप से
- वित्तपोषण में कटौती और लौटते परिवारों से बढ़ता दबाव
- युद्धविराम के बावजूद आपूर्ति भरोसेमंद नहीं हुई
- मुख्य बातें
इस स्थलरुद्ध देश ने एक के बाद एक दो प्रमुख वाणिज्यिक गलियारों तक भरोसेमंद पहुँच खो दी है। पाकिस्तान के साथ सीमा पर लड़ाई के कारण अक्टूबर 2025 में सीमा चौकियाँ बंद हो गईं। इससे अफ़ग़ानिस्तान के लिए रवाना हजारों कंटेनर पाकिस्तान में फँस गए और कराची बंदरगाह तक पहुँच सीमित हो गई। व्यापारियों और सहायता एजेंसियों ने खेपों का रुख ईरान के बंदर अब्बास बंदरगाह की ओर किया, लेकिन युद्ध और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में पाबंदियों ने इस विकल्प को भी बाधित कर दिया।
संयुक्त राष्ट्र की 4 जून की ब्रीफिंग में लगातार अनिश्चितता के बीच सैकड़ों जहाजों और दसियों हजार नाविकों के फँसे होने की बात कही गई। अमेरिका और ईरान के बीच नाज़ुक युद्धविराम से तत्काल सैन्य तनाव बढ़ने की आशंका कम हुई है, लेकिन छिटपुट शत्रुता और परिवहन में व्यवधान खाड़ी से बहुत दूर तक आपूर्ति को प्रभावित कर रहे हैं।
अफ़ग़ानिस्तान के लिए इसके नतीजे खास तौर पर गंभीर हैं, क्योंकि यह व्यवधान पहले से ही धन की कमी झेल रहे सहायता अभियान पर पड़ा है। डब्ल्यूएफपी का कहना है कि वह फिलहाल हर महीने 20 लाख लोगों की मदद कर सकता है, जबकि पिछली सर्दियों में यह संख्या 40 लाख थी। परिवहन महँगा होने का मतलब है कि उसी बजट से कम सहायता खरीदी जा सकती है, जबकि देरी से पहुँचने वाले माल के कारण क्लीनिकों में उन पौष्टिक खाद्य पदार्थों की कमी हो जाती है जिनकी ज़रूरत कमज़ोर माताओं और बच्चों को है।
इसलिए यह संकट केवल जहाजरानी क्षमता की कमी का मामला नहीं है। वाणिज्यिक सामान, खाद्य सहायता और विशेष पोषण सामग्री को एक साथ कई बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। एक मार्ग फिर से खुल जाने भर से वित्तपोषण की वह कमी दूर नहीं होगी जो नए युद्ध से पहले ही सहायता सीमित कर रही थी।
पाकिस्तान की बंदियों से ईरान पर निर्भरता कैसे बढ़ी
पहले पाकिस्तान के रास्ते डब्ल्यूएफपी की ज़्यादातर खेपें अफ़ग़ानिस्तान पहुँचती थीं। उसके बंदरगाहों से अफ़ग़ान कारोबारियों को समुद्र के रास्ते आने वाले सामान तक भी पहुँच मिलती थी। अक्टूबर 2025 में लड़ाई के कारण अहम सीमा चौकियाँ बंद होने पर मानवीय सहायता एजेंसियों और व्यापारियों, दोनों को इस स्थापित मार्ग के विकल्प तलाशने पड़े।
अक्टूबर में सीमा बंद होने से तोरखम और चमन के साथ खारलाची, अंगूर अड्डा और गुलाम ख़ान की छोटी सीमा चौकियाँ भी प्रभावित हुईं। यह व्यवधान सीमा पर जानलेवा झड़पों के बाद आया। इन झड़पों में हुई मौतों और ज़िम्मेदारी को लेकर पाकिस्तानी सेना और तालिबान अधिकारियों के दावे अलग-अलग थे।
काबुल पर हवाई हमलों से तनाव और बढ़ा, जिनका ज़िक्र 1 मार्च, 2026 को प्रकाशित खबरों में किया गया था। पाकिस्तान ने कंधार और पक्तिया में भी ठिकानों पर हमले किए, जबकि तालिबान अधिकारियों ने पाकिस्तान के भीतर जवाबी ड्रोन हमलों का दावा किया। इस तनाव ने वाणिज्यिक गलियारे को फिर से खोलने को परिवहन की समस्या के साथ-साथ राजनीतिक और सुरक्षा का मुद्दा भी बना दिया।
शुरुआत में ईरान ने विकल्प दिया। खेपें दुबई और बंदर अब्बास से होकर अफ़ग़ानिस्तान की ओर जा सकती थीं। लेकिन बंदर अब्बास होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर स्थित है, इसलिए 28 फरवरी को तेज़ हुए क्षेत्रीय संघर्ष ने इस वैकल्पिक मार्ग को भी प्रभावित किया।
इस क्रम के चलते सामान अपनी यात्रा के अलग-अलग पड़ावों पर फँस गया: पाकिस्तान से आगे जाने की प्रतीक्षा करते कंटेनर, होर्मुज़ पार न कर पाने वाले जहाजों में लदा माल और दूसरे देशों से बार-बार मोड़ी जा रही सहायता की खेपें। मध्य एशिया से होकर जाने वाले उत्तरी मार्ग अब भी इस्तेमाल में हैं, लेकिन वे बाधित गलियारों जैसी रफ्तार या कम लागत नहीं दे पाए हैं।
आपूर्ति टूटने की समयरेखा
कमी की शुरुआत हालिया जहाजरानी संकट से नहीं हुई थी। वित्तपोषण में कटौती से पोषण सहायता पहले ही घट चुकी थी और बाद में सीमा तथा समुद्री मार्गों में आए व्यवधानों ने क्षमता को और कम कर दिया।
- मई 2025: अपर्याप्त वित्तपोषण के कारण कुपोषण रोकने के लिए इस्तेमाल होने वाले विशेष खाद्य पदार्थों का वितरण डब्ल्यूएफपी ने पूरी तरह रोक दिया।
- अक्टूबर 2025: पाकिस्तान के साथ सीमा चौकियाँ बंद होने से स्थापित व्यापार और मानवीय आपूर्ति मार्ग बाधित हुए।
- 28 फरवरी, 2026: क्षेत्रीय संघर्ष तेज़ हुआ, जिसके बाद होर्मुज़ जलडमरूमध्य के आसपास गंभीर व्यवधान पैदा हुए।
- अप्रैल 2026 का मध्य: अफ़ग़ानिस्तान में डब्ल्यूएफपी के अभियानों के लिए पोषण की ज़रूरी सामग्री खत्म हो चुकी थी।
- 15 मई, 2026: डब्ल्यूएफपी का अनुमान था कि परिवहन में देरी और बढ़ी लागत के कारण कुपोषण के जोखिम वाले करीब 10 लाख और बच्चों तक सहायता नहीं पहुँच सकी।
- 4 जून, 2026: स्काउ ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में 23 लाख और लोग गंभीर भूख की चपेट में आ गए हैं।
ये आँकड़े अलग-अलग समस्याओं को मापते हैं। जिन बच्चों तक डब्ल्यूएफपी अन्यथा पहुँच सकता था, वे उन लोगों की श्रेणी में नहीं आते जो अब गंभीर भूख का सामना कर रहे हैं। आकलन की अवधि और समूहों के बीच संभावित दोहराव जाने बिना इनमें से किसी आँकड़े को पहले के राष्ट्रीय खाद्य असुरक्षा अनुमान में सीधे जोड़ना उचित नहीं होगा।
पोषण की रिकॉर्ड ज़रूरत के बीच खाली क्लीनिक
डब्ल्यूएफपी के अफ़ग़ानिस्तान आपातकालीन आकलन के मुताबिक 1.38 करोड़ लोगों, यानी आबादी के लगभग एक-तिहाई हिस्से, को गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना करना पड़ेगा। इसका मतलब है कि पर्याप्त भोजन तक उनकी पहुँच इतनी बुरी तरह खतरे में है कि तत्काल कार्रवाई की ज़रूरत है।
एजेंसी का अनुमान है कि 2026 में 49 लाख महिलाओं और बच्चों को कुपोषण के इलाज की ज़रूरत होगी। इनमें 37 लाख बच्चे और 12 लाख गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाएँ शामिल हैं। बाल कुपोषण का गंभीर स्तर 12 प्रांतों में है, जो डब्ल्यूएफपी के दर्ज किए गए आँकड़ों में सबसे अधिक है।
डब्ल्यूएफपी, यूनिसेफ के साथ साझेदारी में क्लीनिकों में पाँच साल से कम उम्र के कुपोषित बच्चों और गर्भवती तथा स्तनपान कराने वाली माताओं का इलाज करता है। निवारक खाद्य वितरण का मकसद अलग है: कमज़ोर परिवारों को इलाज की नौबत आने से पहले कुपोषण और अवरुद्ध विकास से बचने में मदद देना। इसलिए मई 2025 में निवारक वितरण रोकने और अप्रैल 2026 में पोषण की ज़रूरी सामग्री खत्म होने की खबर को अलग-अलग समझना चाहिए।
अफ़ग़ानिस्तान में डब्ल्यूएफपी के निदेशक जॉन आयलीफ़ ने बताया कि इस कमी का क्लीनिक आने वाले लोगों के लिए क्या मतलब था:
ऐसे समय में, जब कुपोषण पहले ही रिकॉर्ड के करीब है, कमज़ोर और हताश माताओं और बच्चों को स्वास्थ्य क्लीनिकों से लौटाया जा रहा है, क्योंकि हमारे पास उन्हें देने के लिए भोजन नहीं है,
जलालाबाद के पास एक ग्रामीण क्लीनिक का दौरा करने के बाद स्काउ ने बताया कि पोषण सामग्री खत्म हो जाने के कारण सैकड़ों माताएँ साफ़ तौर पर कुपोषित बच्चों को लेकर वापस जा रही थीं। 4 जून की ब्रीफिंग में डब्ल्यूएफपी के कार्यकारी निदेशक की हैसियत से उन्होंने कहा:
मैंने ऐसा पहले कभी नहीं देखा। उस क्लीनिक में लोगों की हताशा का वर्णन करना मुश्किल है।
डब्ल्यूएफपी ने चेताया है कि हजारों माताओं और बच्चों को उपचार तथा पोषण केंद्रों से लौटाया जा रहा है। जोखिम का कारण न केवल संसाधनों की कमी है, बल्कि उन जगहों तक आपूर्ति न पहुँचा पाना भी है जहाँ इसकी ज़रूरत है।
कई देशों से होकर बिस्कुट की खेप का सफ़र
पोषक तत्वों से समृद्ध बिस्कुट की एक खेप दिखाती है कि बार-बार मार्ग बदलने से किसी डिलीवरी को पहुँचने में महीनों लग सकते हैं। यह खेप इंडोनेशिया से रवाना हुई और पहले पाकिस्तान पहुँची। सीमा बंद होने के बाद इसे दुबई के रास्ते भेजा गया; इसके बाद ईरान से होते हुए अफ़ग़ानिस्तान पहुँचने की योजना थी।
फिर संघर्ष के कारण मार्ग एक बार और बदलना पड़ा। इस खेप की बताई गई लंबी यात्रा सऊदी अरब, जॉर्डन, सीरिया, तुर्की, जॉर्जिया और अज़रबैजान से होकर गुज़री और फिर कैस्पियन सागर पार कर तुर्कमेनिस्तान पहुँची। यह तीन महीने से रास्ते में थी।
इसी खेप के संक्षिप्त विवरण में तुर्की और कैस्पियन सागर से होकर उसके बाद के सफ़र पर ध्यान दिया गया है; विस्तृत विवरण में इंडोनेशिया में शुरुआत और पाकिस्तान पहुँचने के शुरुआती पड़ाव भी बताए गए हैं। दोनों विवरण मिलकर दिखाते हैं कि देरी किसी एक बंदरगाह पर अलग-थलग रुकावट से नहीं, बल्कि लगातार बदलते मार्गों से हुई।
डब्ल्यूएफपी ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान भेजे जाने वाले खाद्य पदार्थों की परिवहन लागत तीन गुना तक बढ़ गई। आयलीफ़ के मुताबिक कुछ डिलीवरी में अब तीन अतिरिक्त सप्ताह तक लग रहे हैं। कुछ खेपों की इस अतिरिक्त देरी को बिस्कुट वाली खेप की कुल तीन महीने की यात्रा से अलग समझना चाहिए।
अमेरिका, इज़राइल और ईरान से जुड़े युद्ध की शुरुआत के बाद से स्कूली बच्चों के खाद्य पैकेटों समेत हजारों टन खाद्य सहायता कई महीनों की देरी का सामना कर रही है। परिवहन में देरी और बढ़ी लागत न होती तो डब्ल्यूएफपी करीब 10 लाख और बच्चों की मदद कर सकता था, स्काउ का यह अनुमान अभियान की घटती पहुँच को दर्शाता है, न कि केवल अटके हुए माल की मात्रा को।
व्यापारियों के मालभाड़े के बिल कई गुना बढ़े
अफ़ग़ान कारोबारियों का कहना है कि वाणिज्यिक आयात में भी ऐसा ही संकट है। काबुल के आयातक लुत्फ़ुल्लाह अकबरी ने बताया कि चीन से खरीदा गया सामान उन जहाजों में फँसा है जो होर्मुज़ जलडमरूमध्य से नहीं गुजर पा रहे। परिवहन लागत बढ़ने के बीच उन्होंने कहा कि व्यवधान जारी रहा तो वे अपना माल छोड़ भी सकते हैं।
माल ढुलाई कंपनी के निदेशक गुल मीर अमीनी ने बताया कि कंटेनर किराये की कीमतें लगभग 3,000 से 3,600 डॉलर से बढ़कर 7,000 डॉलर से अधिक हो गई हैं। कुछ कीमतें 11,000 डॉलर से भी ऊपर चली गईं। पहले की सीमा के ऊपरी सिरे 3,600 डॉलर की तुलना में 7,000 डॉलर लगभग दोगुना है, जबकि 11,000 डॉलर तीन गुने से अधिक है।
काबुल के इलेक्ट्रॉनिक्स व्यापारी मोहम्मद मुर्तज़ा इशाकज़ई ने ईरान के रास्ते चीन से सामान मँगाने की लागत में इससे भी बड़ी बढ़ोतरी बताई: पहले लगभग 1,100 से 1,500 डॉलर, जो अब 15,000 डॉलर से अधिक हो गई है। नई कीमत उनकी पहले की सीमा के ऊपरी सिरे से दस गुने से भी अधिक है।
ये उदाहरण अलग-अलग शुल्कों और खेपों से जुड़े हैं। कंटेनर किराये की कीमतों की तुलना किसी इलेक्ट्रॉनिक्स आयातक की बताई पूरी डिलीवरी लागत से नहीं की जा सकती। इसी तरह, कुछ व्यक्तिगत बिलों के आधार पर पूरे अफ़ग़ान व्यापार में औसत बढ़ोतरी तय नहीं होती। फिर भी ये दिखाते हैं कि स्थापित मार्ग उपलब्ध न रहने पर खर्च कितनी तेज़ी से बढ़ सकता है।
अपने आयात-निर्यात कारोबार के बारे में बात करते हुए इशाकज़ई ने तालिबान अधिकारियों से पाकिस्तान के साथ तनाव सुलझाने और सीमा पर व्यापार बहाल करने की अपील की:
हम न निर्यात कर पा रहे हैं, न आयात,
उनकी अपील एक व्यावहारिक अड़चन की ओर इशारा करती है: वैकल्पिक मार्गों से कुछ सामान आगे बढ़ सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर व्यापारी उनका खर्च उठा सकता है या दूसरी जगह फँसे माल को वापस पा सकता है।
मध्य एशिया से व्यापार जारी, लेकिन असमान रूप से
व्यापार जगत के नेताओं का अनुमान है कि अब अफ़ग़ानिस्तान का 60% से अधिक व्यापार मध्य एशिया के रास्ते होता है। तालिबान अधिकारियों का कहना है कि मध्य एशिया, रूस और चीन के साथ जारी व्यापार के कारण महँगाई करीब 3% पर रही है और इन संपर्कों ने व्यापक आर्थिक झटके को सीमित करने में मदद की है।
तालिबान के वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल सलाम जवाद ने ईरान के रास्ते जाने वाले माल पर पाबंदियों को सबसे बड़ी बची हुई चुनौती बताया। उनके बयान से संकेत मिलता है कि उत्तरी विकल्प व्यापार को सहारा तो दे रहे हैं, लेकिन ईरानी गलियारे के सभी कामों की जगह नहीं ले पाए हैं।
महँगाई का आँकड़ा और माल ढुलाई के बिल अलग-अलग चीज़ें बताते हैं। महँगाई कीमतों के व्यापक समूह में बदलाव मापती है, जबकि व्यापारियों के उदाहरण खास परिवहन शुल्कों से जुड़े हैं। इसलिए राष्ट्रीय महँगाई दर करीब 3% होने के साथ कुछ खेपों को भेजने की लागत में बड़ी बढ़ोतरी हो सकती है।
यह अनुमान कि मध्य एशिया से 60% से अधिक व्यापार होता है, यह नहीं बताता कि इन मार्गों से कितनी मानवीय सहायता कितनी कीमत पर और कितने समय में पहुँच सकती है। डब्ल्यूएफपी की बार-बार मार्ग बदलने की कवायद दिखाती है कि वैकल्पिक गलियारा होना और किफ़ायती तथा समय पर पहुँचने वाला विकल्प मिलना एक बात नहीं है।
वित्तपोषण में कटौती और लौटते परिवारों से बढ़ता दबाव
डब्ल्यूएफपी ने बताया है कि उसे साल के लिए ज़रूरी धनराशि का केवल 8% मिला है। ज़रूरतें बढ़ने के बावजूद अब वह हर महीने 20 लाख लोगों तक पहुँच सकता है, जो पिछली सर्दियों में उसकी मदद पाने वाले 40 लाख लोगों की आधी संख्या है।
एजेंसी के आपातकालीन सहायता पृष्ठ पर जनवरी 2027 तक अभियान जारी रखने के लिए 54 करोड़ डॉलर की अपील की गई है। मई में की गई एक अलग अपील में अगले छह महीनों के लिए 35 करोड़ डॉलर माँगे गए थे। ये अपीलें अलग-अलग बताई गई अवधियों के लिए हैं; इन्हें जोड़ना या एक ही बजट के परस्पर विरोधी अनुमान मानना सही नहीं होगा।
वित्तपोषण में कटौती का असर केवल भोजन की खरीद पर नहीं पड़ता। डब्ल्यूएफपी का कहना है कि धन की कमी के चलते संयुक्त राष्ट्र मानवीय हवाई सेवा को अफ़ग़ानिस्तान में नियमित उड़ान वाले गंतव्य घटाने पड़े हैं और दो विमानों तथा देश में संयुक्त राष्ट्र के एकमात्र हेलीकॉप्टर के अनुबंध खत्म करने पड़े हैं। असुरक्षा, दुर्गम इलाका और खराब बुनियादी ढाँचा पहले से ही सड़क यात्रा को सीमित करते हैं।
पड़ोसी देशों से बड़ी संख्या में लोगों के लौटने से सहायता की माँग भी बढ़ी है। मई में बताए गए आँकड़ों के मुताबिक 2025 में पाकिस्तान और ईरान से करीब 28 लाख लोग लौटे और 2026 में अब तक 5 लाख और लौट चुके थे। जून में संयुक्त राष्ट्र के विवरण में पिछले वर्ष के दौरान निर्वासित या स्वदेश लौटाए गए लगभग 28 लाख लोगों की बात कही गई थी, लेकिन उसकी रिपोर्टिंग अवधि अलग थी।
तारीखों का मिलान किए बिना इन वापसी के आँकड़ों को जोड़कर नया कुल आँकड़ा नहीं निकालना चाहिए। फिर भी ये एक बड़ी आबादी को दर्शाते हैं जो ऐसे देश में प्रवेश कर रही है जहाँ कई परिवार पहले से ही आश्रय और रोज़ के भोजन का इंतज़ाम करने में संघर्ष कर रहे हैं। संघर्ष और सहायता में कटौती के साथ जलवायु संबंधी घटनाओं और भूकंपों ने दबाव और बढ़ा दिया है।
युद्धविराम के बावजूद आपूर्ति भरोसेमंद नहीं हुई
व्यापक मानवीय परिवहन नेटवर्क भी दबाव में है। यूनिसेफ का कहना है कि केप ऑफ़ गुड होप के रास्ते जहाजों को मोड़ने से समुद्री यात्रा में दो से चार सप्ताह और लगते हैं, जबकि ज़रूरी मानवीय माल में चार से छह महीने तक की देरी हो सकती है। ये वैश्विक अनुमान हैं, अफ़ग़ानिस्तान के लिए विशेष डिलीवरी पूर्वानुमान नहीं।
यूनिसेफ के मुताबिक भारत से इथियोपिया, नाइजीरिया और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य भेजी जाने वाली कुछ वैक्सीन खेपों की हवाई माल ढुलाई लागत 70% तक बढ़ गई है। सोमालिया, दक्षिण सूडान और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य के लिए चिकित्सकीय खाद्य पदार्थों की ट्रक ढुलाई लागत एक-तिहाई बढ़ी है। ये उदाहरण बताते हैं कि होर्मुज़ से बहुत दूर स्थित गंतव्य के लिए काम कर रही सहायता एजेंसियों की खरीद क्षमता भी क्यों घट सकती है।
यूनिसेफ में वैश्विक परिवहन और लॉजिस्टिक्स प्रमुख जाँ-सेड्रिक म्यूस ने परिवहन लागत और सहायता के बीच संबंध बताया:
परिवहन लागत बढ़ने का मतलब है कि बच्चों को जीवनरक्षक सामग्री देने के लिए कम पैसा बचेगा,
28 फरवरी को संघर्ष तेज़ होने से पहले वैश्विक तेल खेपों का लगभग पाँचवाँ हिस्सा होर्मुज़ से होकर गुजरता था। यूएनसीटीएडी ने 75 संवेदनशील अर्थव्यवस्थाओं का अध्ययन किया है, जिनमें 65 तेल की शुद्ध आयातक हैं। उसका अनुमान है कि अगर रिफ़ाइंड तेल की कीमतें लंबे समय तक 50% बढ़ी रहीं, तो इन देशों का सामूहिक आयात बिल सालाना 20 अरब डॉलर से अधिक बढ़ जाएगा। यह एक शर्त पर आधारित अनुमान है, अफ़ग़ानिस्तान के दर्ज किए गए नुकसान का आँकड़ा नहीं।
डब्ल्यूएफपी ने यह चेतावनी भी दी है कि जुलाई तक तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रही, तो दुनिया भर में 4.5 करोड़ और लोग भूख की चपेट में आ सकते हैं। जुलाई इस चेतावनी में बताई गई समयसीमा है, अफ़ग़ानिस्तान की आपूर्ति बहाल करने की कोई अंतिम तारीख नहीं।
इन विवरणों में बाधित अफ़ग़ान व्यापार गलियारों को फिर से खोलने की कोई पक्की तारीख घोषित नहीं की गई है। तात्कालिक ज़रूरतें स्पष्ट हैं: फँसे हुए माल के लिए भरोसेमंद रास्ता, किफ़ायती वैकल्पिक मार्ग, क्लीनिकों के लिए पोषण सामग्री और डब्ल्यूएफपी की अपीलों में बताई अवधि तक सहायता जारी रखने के लिए धन।
मुख्य बातें
- अक्टूबर 2025 में पाकिस्तान की सीमा चौकियाँ बंद होने से अफ़ग़ानिस्तान का स्थापित आपूर्ति गलियारा बाधित हुआ; इसके बाद होर्मुज़ संकट ने ईरान वाले विकल्प में रुकावट पैदा की।
- डब्ल्यूएफपी का अनुमान है कि 2026 में 1.38 करोड़ लोगों को गंभीर खाद्य असुरक्षा और 49 लाख महिलाओं तथा बच्चों को कुपोषण के इलाज की ज़रूरत होगी।
- 4 जून को डब्ल्यूएफपी ने कहा कि 23 लाख और लोग गंभीर भूख की चपेट में आ गए हैं।
- डब्ल्यूएफपी की मासिक पहुँच पिछली सर्दियों के 40 लाख लोगों से घटकर 20 लाख रह गई है, जबकि खाद्य परिवहन लागत तीन गुना तक बढ़ी है।
- व्यापार जगत के नेताओं का अनुमान है कि अब अफ़ग़ानिस्तान का 60% से अधिक व्यापार मध्य एशिया से होता है, लेकिन व्यापारियों को अब भी भारी लागत और फँसे हुए माल का सामना करना पड़ रहा है।
- डब्ल्यूएफपी जनवरी 2027 तक अभियान चलाने के लिए 54 करोड़ डॉलर माँग रहा है; बाधित गलियारों को बहाल करने की कोई पक्की तारीख नहीं दी गई है।






