उलानबटार में नाराज़गी के बाद अक्टूबर के लिए ईंधन समझौता
मंगोलिया ने अक्टूबर के लिए रूस से 78,000 टन ईंधन खरीदने का करार किया है। इससे पहले दो महीनों तक पेट्रोल का आयात सामान्य खपत से काफी कम रहा। उद्योग एवं खनिज संसाधन मंत्री दमदिनन्याम गोंगोर ने 5 अक्टूबर, 2026 को इस समझौते की घोषणा की। इससे पहले सुखबातर चौक पर प्रदर्शन हुआ था, जहां सैकड़ों लोगों ने कमी, बढ़ती कीमतों और घरेलू बजट पर बढ़ते दबाव के खिलाफ विरोध जताया।
विषय-सूची
- उलानबटार में नाराज़गी के बाद अक्टूबर के लिए ईंधन समझौता
- खाली पंप से घरेलू बजट पर दबाव तक
- राशनिंग से पहुंच की गारंटी नहीं
- अक्टूबर का आयात कितनी राहत दे सकता है?
- रूस पर निर्भरता से विकल्प सीमित
- कीमतों और वितरण पर अलग से सवाल
- पर्यटन क्षेत्र की छूट से निष्पक्षता पर सवाल
- ग्रामीण जल आपूर्ति और माल ढुलाई पर भी खतरा
- मुख्य बातें
आंकड़े बताते हैं कि पेट्रोल पंपों पर मुश्किल क्यों हुई। मंगोलिया में हर महीने करीब 75,000 टन एआई-92 पेट्रोल की खपत होती है, लेकिन अगस्त में लगभग 54,000 टन और सितंबर में 62,000 टन आयात किया गया। इन दोनों महीनों में कुल आयात अनुमानित खपत से 34,000 टन कम रहा, जो एक महीने की सामान्य मांग का करीब 45% है। एआई-92 पेट्रोल का एक ग्रेड है; इसमें संख्या ऑक्टेन रेटिंग बताती है।
रूस के साथ नया करार राहत दे सकता है, लेकिन खरीद समझौते का मतलब यह नहीं कि ईंधन पंप तक पहुंच गया है। इसकी आपूर्ति का समय, वितरण और घटे हुए भंडार को फिर से भरना तय करेगा कि वाहन चालकों की कतारें छोटी होंगी या नहीं। घोषित 78,000 टन मात्रा सामान्य मासिक एआई-92 खपत से सिर्फ 3,000 टन अधिक है, बशर्ते करार की पूरी मात्रा इसी ग्रेड की हो।
1 अक्टूबर के प्रदर्शन में जीवनयापन की लागत और निष्पक्षता को लेकर व्यापक असंतोष भी सामने आया। उलानबटार के सुखबातर चौक के पूर्वी और पश्चिमी, दोनों ओर वाहन चालकों ने अपनी गाड़ियां खड़ी कीं, बाहर निकले और विरोध में खड़े हुए। कुछ लोगों ने बार-बार हॉर्न बजाए। छात्र, बुजुर्ग और अन्य निवासी भी उनके साथ शामिल हुए और उन्होंने ईंधन ढूंढने की तत्काल मुश्किल से आगे की शिकायतें उठाईं।
खाली पंप से घरेलू बजट पर दबाव तक
प्रदर्शनकारियों ने करों, खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों, बिजली, हीटिंग और पानी के शुल्क में बढ़ोतरी, घरेलू आय में गिरावट और सरकार के अत्यधिक खर्च की शिकायत की। कुछ लोगों ने माना कि अंतरराष्ट्रीय घटनाएं कमी की आंशिक वजह हो सकती हैं, लेकिन उनका कहना था कि बाहरी दबाव इस संकट की पूरी वजह नहीं है।
वाहन चालकों के लिए ईंधन की कमी बार-बार समय और पैसे का नुकसान बन गई है। कुछ लोगों ने पेट्रोल पंपों पर लंबी कतार में इंतजार करते हुए अपनी गाड़ियों में रातें बिताईं। अन्य लोगों ने कहा कि उन्हें ऊंची कीमत पर पुनर्विक्रेताओं से ईंधन खरीदना पड़ा। सरकार के इस आश्वासन के बावजूद कि वह सभी जरूरी कदम उठा रही है, रोजमर्रा की बढ़ती लागत का दबाव कम नहीं हुआ।
8 सितंबर को प्रकाशित एक रिपोर्ट में पेंशनभोगी नासंजर्गल का जिक्र था, जो बगाखांगई के एक पेट्रोल पंप पर पांच घंटे से इंतजार कर रहे थे और फिर भी पंप से 10 वाहन दूर थे। उन्होंने उलानबटार से करीब डेढ़ घंटे गाड़ी चलाई थी, इस उम्मीद में कि राजधानी के बाहर ईंधन आसानी से मिल जाएगा।
एक ही नाम का इस्तेमाल करने वाले पूर्व पुलिस अधिकारी नासंजर्गल ने विकल्पों की कमी के बारे में कहा:
ईंधन उपलब्ध नहीं है, हर जगह लंबी कतारें हैं।
सितंबर की यह रिपोर्ट गंभीर कतारों का दस्तावेजीकरण करती है, जबकि एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार ये कतारें सितंबर के आखिर में लगनी शुरू हुई थीं। इसलिए उपलब्ध जानकारी बताती है कि महीने के पहले हिस्से में ही चालकों को कमी का सामना करना पड़ रहा था और अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले हालात और बिगड़े। संकट सिर्फ सितंबर के आखिरी दिनों में शुरू नहीं हुआ था।
राशनिंग से पहुंच की गारंटी नहीं
4 अगस्त को आपातकालीन मुख्यालय ने उलानबटार में ईंधन खरीद पर पाबंदियां लागू कीं। इनके तहत वाहन की नंबर प्लेट के आधार पर ईंधन खरीदने के दिन तय किए गए और पोर्टेबल पेट्रोल कंटेनरों के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई। अन्य उपायों में रोजाना खरीद की सीमा और ईंधन का भंडारण करने पर पाबंदी शामिल थी।
कनाडा सरकार की मंगोलिया यात्रा संबंधी सलाह देशभर में कमी की पुष्टि करती है और कहती है कि ईंधन की उपलब्धता सीमित और अनिश्चित है। इसमें बताया गया है कि स्थानीय अधिकारियों ने नंबर प्लेट के आधार पर खरीद का कार्यक्रम और खरीदी जा सकने वाली मात्रा पर सीमाएं लागू की हैं। सलाह में चेतावनी दी गई है कि बहुत कम सूचना पर आपूर्ति बाधित हो सकती है।
राशनिंग से सीमित आपूर्ति अधिक ग्राहकों तक बांटी जा सकती है, लेकिन इससे आयात की कमी पूरी नहीं होती। तय दिन पर पेट्रोल पंप पहुंचने वाले चालक को भी खाली पंप या लंबा इंतजार मिल सकता है। कनाडा सरकार ने चेतावनी दी है कि कमी से सड़क और हवाई परिवहन, दोनों बाधित हो सकते हैं। उसने प्रदर्शनों और बड़ी भीड़ से दूर रहने, यात्रा से पहले उड़ानों की पुष्टि करने की सलाह दी है।
मुख्य घटनाक्रम कई महीनों में फैले हैं:
- 4 अगस्त: अधिकारियों ने उलानबटार में नंबर प्लेट के आधार पर ईंधन खरीद पर पाबंदियां लगाईं और पोर्टेबल पेट्रोल कंटेनरों पर रोक लगाई।
- 7 अगस्त: उद्योग एवं खनिज संसाधन मंत्रालय ने राजधानी से बाहर जाने वाले पर्यटन व्यवसायों को छूट देने की घोषणा की।
- अगस्त और सितंबर: एआई-92 का कुल आयात करीब 116,000 टन रहा, जबकि अनुमानित खपत 150,000 टन थी।
- 1 अक्टूबर: कमी और जीवनयापन की बढ़ती लागत के खिलाफ सुखबातर चौक पर सैकड़ों लोग जुटे।
- 5 अक्टूबर, 2026: मंत्री दमदिनन्याम ने सरकारी महल में हुई प्रेस वार्ता में रूस के साथ ईंधन समझौते की घोषणा की।
अक्टूबर का आयात कितनी राहत दे सकता है?
अक्टूबर में मंगोलिया 260,000 से 270,000 टन पेट्रोलियम उत्पाद आयात करने की योजना बना रहा है। इसमें एआई-92 पेट्रोल के 77,000 से 78,000 टन के पक्के ऑर्डर शामिल हैं। पेट्रोल और डीजल समेत सभी पेट्रोलियम उत्पादों की सामान्य मासिक खपत लगभग 230,000 टन है।
अगर पूरी योजना के मुताबिक आपूर्ति पहुंचती है, तो कुल आयात सामान्य महीने की खपत से 30,000 से 40,000 टन अधिक होगा, यानी करीब 13% से 17%। इससे भंडार फिर से भरने की गुंजाइश मिल सकती है। हालांकि, कुल मात्रा में अलग-अलग ईंधन शामिल हैं, इसलिए इसे आम वाहन चालकों के लिए उपलब्ध पेट्रोल नहीं माना जा सकता।
पेट्रोल के आंकड़े कम राहत का संकेत देते हैं। एआई-92 का नियोजित आयात सामान्य मासिक मांग से सिर्फ 2,000 से 3,000 टन अधिक है, जो अगस्त और सितंबर में आयात तथा अनुमानित खपत के बीच 34,000 टन के कुल अंतर से बहुत कम है। हालांकि, इस अंतर से मौजूदा कमी की सटीक मात्रा पता नहीं चलती, क्योंकि भंडार के स्तर और वास्तविक मांग में बदलाव के आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।
रूस के साथ समझौते की रिपोर्टों में भी विवरण अलग-अलग हैं। एक रिपोर्ट में 78,000 टन को पेट्रोल बताया गया है, जबकि दूसरी में इसे ईंधन कहा गया है। अक्टूबर की अलग आयात योजना में एआई-92 के 77,000 से 78,000 टन का जिक्र है। इन आंकड़ों को अलग-अलग खेप मानकर जोड़ना सही नहीं होगा।
अधिकारी सर्दियों के लिए डीजल की आपूर्ति का भी इंतजाम कर रहे हैं। अक्टूबर की प्रेस वार्ता के विवरणों में आपूर्ति का कोई विस्तृत समयबद्ध कार्यक्रम, मौजूदा राष्ट्रीय भंडार का आंकड़ा या राशनिंग खत्म करने की तारीख घोषित नहीं की गई। इसलिए करार से कमी दूर होने की उम्मीद आपूर्ति पहुंचने और उसके वितरण पर निर्भर है।
रूस पर निर्भरता से विकल्प सीमित
मंगोलिया ऐतिहासिक रूप से अपने पेट्रोल का 95% से अधिक रूस से आयात करता रहा है। हाल के महीनों में रूसी तेल प्रतिष्ठानों पर यूक्रेनी हमलों से आपूर्ति बाधित हुई है, वहीं घरेलू खपत पर रूस के बढ़ते ध्यान से मंगोलिया के लिए उपलब्ध मात्रा घट गई है। इन दबावों ने एक ही आपूर्तिकर्ता पर अत्यधिक निर्भरता के जोखिम उजागर किए हैं।
5 अक्टूबर की प्रेस वार्ता में उद्योग एवं खनिज संसाधन मंत्री दमदिनन्याम ने वैकल्पिक आपूर्ति खोजने की भौगोलिक बाधा का जिक्र करते हुए कहा:
हालांकि, दुनिया में हम इसे कहीं से भी खरीदें, इसे रूस या चीन से होकर ही लाना होगा।
अधिकारी चीन, दक्षिण कोरिया और अन्य देशों से आपूर्ति की संभावनाएं तलाश रहे हैं और बेलारूस से ईंधन तथा विमानन ईंधन के आयात पर बातचीत शुरू कर चुके हैं। स्वतंत्र ऊर्जा नीति विश्लेषक तेलमेन अल्तानशागाई ने कहा कि मंगोलिया ने कजाकिस्तान के साथ पेट्रोलियम व्यापार पर चर्चा की थी और संकट के दौरान दक्षिण कोरिया तथा चीन से ईंधन आयात भी किया था।
दमदिनन्याम ने यह भी कहा कि अमेरिका ने डीजल के निर्यात पर रोक लगा दी है और चीन ने 1 अक्टूबर, 2026 को सभी पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया। ये अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति दबावों को लेकर मंत्री की व्याख्या थी, न कि स्वतंत्र रूप से सत्यापित नीतिगत विवरण। चीन पर लगाई गई कथित पाबंदी से यह भी स्पष्ट नहीं है कि वहां से ईंधन जुटाने की मंगोलिया की कोशिशें कैसे आगे बढ़ेंगी।
अधिक देशों से खरीदने पर किसी एक विक्रेता पर निर्भरता घट सकती है। लेकिन इससे अपने दोनों पड़ोसी देशों से होकर गुजरने वाले परिवहन मार्गों पर मंगोलिया की निर्भरता खत्म नहीं होगी। तेलमेन ने भी नए आपूर्तिकर्ता ढूंढने और विदेशी ईंधन पर निर्भरता खत्म करने के बीच अंतर बताया।
कीमतों और वितरण पर अलग से सवाल
सरकार यह जांच कर रही है कि क्या वितरण के तरीके कमी को और बढ़ा रहे हैं। आपातकालीन कार्यबल ने एजेंसियों को पेट्रोल पंपों पर नजर रखने और यह जांचने का निर्देश दिया कि क्या अनुबंधित संस्थाओं के नाम पर आवंटित बड़ी मात्रा में ईंधन को दोबारा बेचा जा रहा है।
यह निर्देश जांच का प्रमाण है, किसी खास संस्था द्वारा ईंधन की हेराफेरी का सबूत नहीं। यह उस चिंता से जुड़ा है जिसे वाहन चालकों ने भी जाहिर किया: उनका कहना था कि उन्हें बढ़ी हुई कीमतों पर पुनर्विक्रय बाजार से ईंधन खरीदने को मजबूर होना पड़ा। दमदिनन्याम ने कहा कि रात में ईंधन देने से इनकार करने वाली कंपनियों पर जुर्माना लगाया जा रहा है।
कीमतों के बारे में मंत्री ने कहा कि मंगोलिया घरेलू कीमतें तय करने के लिए पिछले 14 से 25 दिनों के दौरान किसी पेट्रोलियम उत्पाद की औसत वैश्विक बाजार कीमत का इस्तेमाल करता है। उन्होंने इसकी तुलना रूस की तेल रिफाइनरियों को दी जाने वाली सब्सिडी से की। यह स्पष्टीकरण कीमत तय करने का तरीका बताता है, लेकिन हालिया बढ़ोतरी में अंतरराष्ट्रीय कीमतों, कमी या पुनर्विक्रय का कितना योगदान रहा, इसका आंकड़ा नहीं देता।
25 वर्षीय ट्रक चालक एनखबयार म्यांगनबयार ने माल ढुलाई करने वालों पर पड़ रहे बोझ का ठोस उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि सिर्फ 15 दिनों में डीजल की कीमत बढ़ गई:
पहले इसकी कीमत करीब 4,000 से 4,200 तुगरिक ($1.11-$1.17 प्रति लीटर) थी, लेकिन अब यह 4,600 से ऊपर है और 4,700 तुगरिक के करीब पहुंच रही है।
उनके बताए 4,700 तुगरिक के ऊपरी आंकड़े के आधार पर, पहले की कीमतों से बढ़ोतरी करीब 12% से 18% है। यह एक चालक का अनुभव है, राष्ट्रीय मूल्य सूचकांक नहीं। फिर भी इससे पता चलता है कि ईंधन के बढ़े बिल परिवहन कारोबार पर कितनी जल्दी दबाव डाल सकते हैं और सामान पहुंचाने की लागत बढ़ा सकते हैं।
पर्यटन क्षेत्र की छूट से निष्पक्षता पर सवाल
7 अगस्त की पर्यटन छूट के तहत उलानबटार से बाहर जाने वाले कारोबार उद्योग संबंधी पहचान-पत्र दिखाकर सामान्य सीमाओं के बिना ईंधन खरीद सकते थे। इससे सीमित ईंधन के आवंटन पर सवाल उठे, खासकर ख्यारगास झील के किनारे स्थित ख्यारगास ऑरम रिसॉर्ट में आलीशान मनोरंजन गतिविधियां जारी रहने की खबरों के साथ।
रिसॉर्ट ने 9 जुलाई, 2026 को खुलने की घोषणा की थी। जुलाई और अगस्त में सोशल मीडिया पर डाले गए पोस्ट में यॉट, जेट स्की, मनोरंजन वाहन और हेलीकॉप्टर से यात्रा दिखाई गई। 9 अगस्त को पोस्ट की गई तस्वीरों में, राशनिंग शुरू होने के पांच दिन बाद, छत के बाहर एक हेलीकॉप्टर और बांधी जा रही एक यॉट दिखी। इस जमीन का उपयोग पर्यटन शिविर के लिए पंजीकृत है।
तस्वीरों से संकेत मिलता है कि ईंधन की खपत वाली गतिविधियां उस समय जारी थीं, जब आम वाहन चालकों पर पाबंदियां थीं। लेकिन इनसे यह पता नहीं चलता कि रिसॉर्ट ने कितना ईंधन इस्तेमाल किया, आपूर्ति कहां से ली या पर्यटन छूट का लाभ उठाया था या नहीं। दरों और बुकिंग के बारे में जिन सवालों का सार्वजनिक रूप से जवाब नहीं मिला, उनसे यह भी स्पष्ट नहीं है कि रिसॉर्ट आम लोगों के लिए खुले पारंपरिक रिसॉर्ट की तरह चल रहा था या नहीं।
पारिवारिक और कारोबारी संबंधों के जरिए इस संपत्ति को ईंधन आयातक जोनोनबयार एर्देनेसुरेन और कथित 1.1 अरब डॉलर के लेक्स ऑयल ईंधन धोखाधड़ी मामले से जुड़ी कंपनियों से जोड़ा गया है। बताया गया है कि 2025 और 2026 में जारी 34 ईंधन आयात लाइसेंसों में से सात उनके कारोबारी नेटवर्क से जुड़ी कंपनियों को मिले, यानी करीब पांचवां हिस्सा। इससे आयातित ईंधन में उन कंपनियों की हिस्सेदारी का पता नहीं चलता।
बताया जाता है कि गुड फ्यूचर एलएलसी ने 2021 में करीब 30 घंटे की आवेदन अवधि के बाद हुई परियोजना चयन प्रक्रिया के जरिए रिसॉर्ट की जमीन पर अधिकार हासिल किए थे। ये अधिकार 2041 तक हैं और सालाना भुगतान 110 डॉलर बताया गया है। बाद में अलग जमीन आवंटन मामले में शामिल अधिकारियों पर आरोप लगाए गए। उन आरोपों से रिसॉर्ट के जमीन आवंटन में गड़बड़ी साबित नहीं होती। कथित कारोबारी संबंध भी यह साबित नहीं करते कि रिसॉर्ट या उसके मालिक ईंधन की कमी के लिए जिम्मेदार थे।
ग्रामीण जल आपूर्ति और माल ढुलाई पर भी खतरा
ईंधन की कमी का असर रोजाना आने-जाने तक सीमित नहीं है। खनन, कोयला परिवहन, कृषि, निर्माण, सार्वजनिक परिवहन और सामान का वितरण, सभी भरोसेमंद आपूर्ति पर निर्भर हैं। ग्रामीण इलाकों में पेट्रोल की उपलब्धता यह भी तय कर सकती है कि पशुपालक पानी के पंप चला पाएंगे या नहीं।
दुंडगोवी प्रांत के गवर्नर मुंखचुलुन सामदन्न्याम ने कहा कि पर्यटक और पशुपालक उनकी स्थानीय सरकार की पहली प्राथमिकता हैं। उन्होंने पशुपालकों को ईंधन की उपलब्धता सुरक्षित रखने का व्यावहारिक कारण बताया:
गोबी (रेगिस्तानी) इलाकों में पशुपालक कुओं से हाथ से पानी नहीं निकालते। वे ज्यादातर मोटर और पंप इस्तेमाल करते हैं।
वाहन चालकों के लिए ईंधन की उपलब्धता, कीमतों और इंतजार के समय की जानकारी जुटाने वाला सार्वजनिक ऑनलाइन मंच आपूर्ति ढूंढने का एक तरीका है। बंद पेट्रोल पंप या खत्म हो चुके भंडार की भरपाई वह नहीं कर सकता। कुछ पंपों ने सेवा सिर्फ आपातकालीन वाहनों तक सीमित कर दी है, जो दिखाता है कि कमी के कारण अलग-अलग जरूरतों में से चुनना पड़ता है।
मंगोलिया की पहली घरेलू तेल रिफाइनरी 2028 में चालू करने का लक्ष्य है। इससे भविष्य में घरेलू आपूर्ति का एक स्रोत मिल सकता है, लेकिन अक्टूबर की तत्काल कमी दूर नहीं होगी। तेलमेन ने परिवहन को बिजली से चलाने की भी वकालत की, लेकिन उलानबटार और दूर-दूर तक फैले कम आबादी वाले ग्रामीण इलाकों में चार्जिंग ढांचे की कमी की ओर ध्यान दिलाया।
फिलहाल ठोस कसौटी यह है कि करार किया गया ईंधन पहुंचेगा या नहीं, पेट्रोल पंप उसे भरोसेमंद तरीके से देंगे या नहीं और पाबंदियों में ढील दी जा सकेगी या नहीं। अक्टूबर की खरीद आयात की मात्रा से जुड़ी समस्या का समाधान करती है। प्रदर्शन से पता चला कि लोगों का भरोसा बहाल करने के लिए कीमतों, पहुंच और अलग-अलग उपभोक्ताओं के साथ व्यवहार पर भी जवाब देने होंगे।
मुख्य बातें
- ईंधन की कमी और जीवनयापन की बढ़ती लागत के खिलाफ 1 अक्टूबर को सुखबातर चौक पर सैकड़ों लोगों ने प्रदर्शन किया।
- अगस्त और सितंबर में एआई-92 का आयात अनुमानित खपत से करीब 34,000 टन कम रहा।
- सरकार ने 5 अक्टूबर, 2026 को रूस से 78,000 टन ईंधन खरीदने के करार की घोषणा की।
- अक्टूबर में 260,000 से 270,000 टन पेट्रोलियम उत्पाद आयात करने की योजना है, लेकिन आपूर्ति का समय और मौजूदा भंडार का स्तर स्पष्ट नहीं है।
- अधिकारियों ने राशनिंग लागू की है और संभावित पुनर्विक्रय तथा पेट्रोल पंपों के कामकाज की जांच के आदेश दिए हैं।
- पर्यटन क्षेत्र को दी गई छूट और आलीशान रिसॉर्ट की गतिविधियों की खबरों से ईंधन आवंटन में निष्पक्षता पर ध्यान गया है, हालांकि अवैध गतिविधि साबित नहीं हुई है।
- पहली घरेलू तेल रिफाइनरी 2028 में चालू करने का लक्ष्य है, इसलिए तत्काल राहत के लिए आयात अहम रहेगा।






