रद्द करने के दावे से नए ऋण पर अनिश्चितता
वित्त विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बांग्लादेश को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के उस ऋण कार्यक्रम के तहत पांच किस्तों में 3.64 अरब डॉलर मिले हैं, जिसे बढ़ाकर 5.5 अरब डॉलर किया गया था। अब वित्त मंत्री आमिर खोसरो महमूद चौधरी का कहना है कि उन्होंने यह कार्यक्रम रद्द कर दिया है। वहीं अधिकारी तीन साल में करीब 4 अरब से 4.5 अरब डॉलर के नए कार्यक्रम के लिए आगे की बातचीत की तैयारी कर रहे हैं।
विषय-सूची
- रद्द करने के दावे से नए ऋण पर अनिश्चितता
- IMF ने वास्तव में किस बात की प्रतिबद्धता जताई है
- सरकार यहां तक कैसे पहुंची
- आंकड़ों और कार्यक्रम की स्थिति में पूरा मेल नहीं
- बातचीत के केंद्र में सुधार
- ऊर्जा लागत और कमजोर कर व्यवस्था सीमित करते हैं विकल्प
- बैंकिंग सुधारों का असर IMF ऋण से आगे तक
- मंत्री का विकल्प हैं बाजार
- निवेशकों का भरोसा और अगले फैसले
- मुख्य बातें
मंत्री ने 4 अक्टूबर को ढाका के कृषिबिद इंस्टीट्यूशन सभागार में विश्व निवेशक सप्ताह 2026 के उद्घाटन समारोह में यह घोषणा की। इस आयोजन का संयुक्त रूप से बांग्लादेश प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (BSEC) और अंतरराष्ट्रीय प्रतिभूति आयोग संगठन (IOSCO) ने आयोजन किया था।
खोसरो ने कहा कि सरकार ऐसी शर्तें स्वीकार करने के बजाय पूंजी बाजारों का रुख करेगी जिन्हें वह अनुपयुक्त मानती है। उन्होंने इस फैसले को 2034 तक बांग्लादेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य से जोड़ा।
"मैंने IMF कार्यक्रम रद्द कर दिया है। आप जानते हैं, आप इसे देख रहे हैं। उनकी शर्तें हमें स्वीकार्य नहीं हैं। मैं बाजार से धन जुटाना चाहता हूं," उन्होंने कहा।
हालांकि, वित्त विभाग के अधिकारियों का कहना है कि IMF के साथ बातचीत जारी है। उनका स्पष्टीकरण है कि मंत्री का आशय पुराने समझौते से अलग होने का था, नए समझौते के लिए आवेदन छोड़ने का नहीं। कुछ अन्य अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था भी सक्रिय है और रुकी हुई छठी किस्त की अब भी समीक्षा हो सकती है।
यह अंतर महत्वपूर्ण है: किसी मौजूदा कार्यक्रम को अस्वीकार करने का राजनीतिक फैसला उस व्यवस्था की औपचारिक समाप्ति, नए कार्यक्रम के अनुरोध की वापसी या नए ऋण की मंजूरी के समान नहीं है। मंत्री की हालिया टिप्पणियों से इन अलग-अलग कदमों में से किसी की भी निर्णायक पुष्टि नहीं होती।
IMF ने वास्तव में किस बात की प्रतिबद्धता जताई है
IMF ने 3 जून को पुष्टि की कि बांग्लादेश ने नए कार्यक्रम का अनुरोध किया है। उसके बयान में न तो ऋण की राशि बताई गई और न ही किसी वित्तीय पैकेज की मंजूरी की घोषणा की गई। बयान में आर्थिक परिस्थितियों, नीतिगत प्राथमिकताओं और सुधारों पर आगे बातचीत का उल्लेख था।
बांग्लादेश के लिए IMF मिशन प्रमुख इवो क्र्ज़नार ने बयान में बताया कि नई व्यवस्था देश की बाहरी वित्तपोषण जरूरतों और सुधारों के प्रति उसकी प्रतिबद्धताओं पर निर्भर करेगी।
"किसी भी नई व्यवस्था का आधार बांग्लादेश की भुगतान-संतुलन संबंधी जरूरतें और विश्वसनीय सुधार एजेंडे से जुड़ी मजबूत नीतिगत प्रतिबद्धताएं होनी चाहिए। साथ ही, यह IMF की नीतियों और कार्यकारी बोर्ड की मंजूरी के अधीन होगी," क्र्ज़नार ने कहा।
भुगतान-संतुलन से आशय किसी देश के शेष विश्व के साथ लेन-देन से है, जिसमें व्यापार, निवेश और उधारी शामिल हैं। IMF कार्यक्रम इन लेन-देन से पैदा होने वाले वित्तपोषण दबावों से निपटता है। इसलिए यह केवल बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं के एक समूह के लिए धन जुटाने से अलग है।
क्र्ज़नार ने कहा कि IMF का शुरुआती स्टाफ दौरा हालिया घटनाक्रम और सुधार संबंधी चुनौतियों का आकलन करेगा। संभावित कार्यक्रम के आकार और उससे जुड़ी प्रतिबद्धताओं पर बातचीत के लिए अलग मिशन आएगा। नए कार्यक्रम पर चर्चा की सहमति का अर्थ कार्यकारी बोर्ड की मंजूरी नहीं है।
सरकार की प्रस्तावित राशि भी अलग-अलग खबरों में बदलती रही है। शुरुआती खबरों में तीन से चार साल के दौरान 5 अरब से 6 अरब डॉलर का उल्लेख था, जबकि एक अन्य खबर में तीन साल के लिए 5 अरब डॉलर का अनुरोध बताया गया। बाद की खबरों में 4 अरब से 4.5 अरब डॉलर की बात आई। हाल की शुरुआती चर्चाओं का केंद्र तीन साल में 4.5 अरब डॉलर रहा है। ये बातचीत के प्रस्ताव हैं, IMF की घोषित प्रतिबद्धता नहीं।
सरकार यहां तक कैसे पहुंची
नई व्यवस्था की ओर बढ़ने की प्रक्रिया अक्टूबर के भाषण से पहले ही शुरू हो गई थी। विदेशी मुद्रा की कमी के दौरान बांग्लादेश ने मूल वित्तपोषण मांगा था और फरवरी 2026 में सत्ता संभालने के बाद मौजूदा प्रशासन ने इसकी शर्तों पर दोबारा विचार शुरू किया।
पिछले कुछ महीनों के प्रमुख घटनाक्रम:
- जुलाई 2022: बाहरी वित्तपोषण का दबाव बढ़ने पर सरकार ने IMF से सहायता मांगी।
- 30 जनवरी 2023: IMF ने मूल कार्यक्रम को मंजूरी दी, जिसकी राशि आम तौर पर 4.7 अरब डॉलर बताई गई।
- फरवरी 2023: बांग्लादेश को 476.3 मिलियन डॉलर की पहली किस्त मिली।
- 2025: अंतरिम प्रशासन ने 800 मिलियन डॉलर की बताई गई वृद्धि हासिल की, जिससे कार्यक्रम 5.5 अरब डॉलर का हो गया।
- अप्रैल 2026: नई सरकार ने IMF और विश्व बैंक की वसंत बैठकों के दौरान मौजूदा व्यवस्था छोड़ने पर चर्चा की।
- 21 मई: खोसरो ने नई व्यवस्था की रूपरेखा पर IMF के उप प्रबंध निदेशक निगेल क्लार्क से ऑनलाइन बैठक की।
- 3 जून: IMF ने पुष्टि की कि बांग्लादेश ने नए कार्यक्रम का अनुरोध किया है।
- जुलाई: IMF मिशन ने ढाका में शुरुआती बातचीत की। एक खबर के अनुसार, उसका काम 17 जुलाई को पूरा हुआ।
- 4 अक्टूबर: खोसरो ने सार्वजनिक रूप से कहा कि उन्होंने IMF कार्यक्रम रद्द कर दिया है और बाजारों से वित्तपोषण जुटाएंगे।
मंत्री के पहले के बयान आगे बातचीत जारी रहने के बारे में अधिक स्पष्ट थे। अप्रैल में उन्होंने कहा था कि IMF, विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक (ADB) के साथ चर्चा जारी है। जुलाई में सचिवालय में हुई प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा था कि बांग्लादेश जनहित की रक्षा करते हुए नए कार्यक्रम पर बातचीत करेगा।
आंकड़ों और कार्यक्रम की स्थिति में पूरा मेल नहीं
वितरित राशि और पुराने कार्यक्रम की स्थिति, दोनों को लेकर खबरों में अंतर है। कई खबरों में दोहराए गए वित्त विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, पांच किस्तों में 3.64 अरब डॉलर मिले। अन्य खबरों में यह राशि 3.8 अरब डॉलर बताई गई है, जबकि 19 मई की एक खबर में 3.595 अरब डॉलर का उल्लेख है।
मूल मंजूरी की राशि में भी अंतर है। ज्यादातर खबरों में यह 4.7 अरब डॉलर बताई गई है, जिसके बाद 800 मिलियन डॉलर की वृद्धि से कुल राशि 5.5 अरब डॉलर हुई। दो खबरों में मूल राशि 4.5 अरब डॉलर बताई गई, लेकिन साथ ही कहा गया कि 800 मिलियन डॉलर जोड़ने से यह 5.5 अरब डॉलर हो गई। ये दोनों आंकड़े गणित के हिसाब से मेल नहीं खाते। खबरों में इस वृद्धि का समय मई या जून 2025 बताया गया है।
बार-बार बताए गए 3.64 अरब डॉलर के वितरण आंकड़े के आधार पर, बांग्लादेश को बढ़ाए गए 5.5 अरब डॉलर के पैकेज का करीब 66% मिल चुका है। अंतर 1.86 अरब डॉलर है, हालांकि इस गणना से यह तय नहीं होता कि कानूनन कितनी राशि अभी उपलब्ध है या उसे कब जारी किया जा सकता है।
समय-सीमा को लेकर भी खबरों में अंतर है। कई खबरों में कहा गया है कि छठी किस्त नवंबर 2025 से लंबित है। एक अन्य खबर के अनुसार, जून 2025 से दो किस्तों में कुल 1.3 अरब डॉलर का भुगतान नहीं हुआ था। पुराने कार्यक्रम की समाप्ति की तारीख कहीं दिसंबर 2026 बताई गई है, तो कहीं इसका कार्यक्रम 2027 तक बताया गया है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कुछ अधिकारी व्यवस्था से बाहर निकलने के फैसले की बात करते हैं, जबकि अन्य का कहना है कि कार्यक्रम अब भी सक्रिय है और आने वाला मिशन छठी किस्त पर चर्चा कर सकता है। औपचारिक समाप्ति, शेष उपलब्ध राशि और नए कार्यक्रम के अनुरोध पर अभी स्पष्ट बयान की जरूरत है।
बातचीत के केंद्र में सुधार
सरकार की घोषित आपत्ति सुधारों की गति और स्वरूप को लेकर है, न कि आर्थिक सहयोग पूरी तरह समाप्त करने की किसी घोषणा को लेकर। मई में जारी वित्त मंत्रालय के एक बयान में कहा गया था कि पुराना कार्यक्रम अलग आर्थिक और नीतिगत परिस्थितियों में तैयार किया गया था। बयान में सुधार पूरी तरह छोड़ने के बजाय क्रमिक और व्यावहारिक सुधारों को प्राथमिकता देने की बात कही गई थी।
बताया जाता है कि चर्चा की शर्तों में सब्सिडी घटाना, राजस्व बढ़ाना, बैंकों की कमजोरियां दूर करना और आर्थिक स्थिरता बहाल करना शामिल हैं। अधिक विशिष्ट प्रस्तावों में मूल्यवर्धित कर की एक समान 15% दर, कर छूट में कमी, बाजार-निर्धारित विनिमय दर, कर नीति को कर संग्रह से अलग करना और दिवालियापन कानून शामिल हैं।
अधिकारी बिजली और उर्वरक पर व्यापक सब्सिडी की जगह लक्षित नकद हस्तांतरण के प्रस्तावों का भी जिक्र करते हैं। व्यापक सब्सिडी से संबंधित उत्पाद पाने वाले सभी लोगों के लिए कीमत कम होती है। इसके बजाय लक्षित हस्तांतरण में चुनिंदा परिवारों या लाभार्थियों तक सहायता पहुंचाई जाती है, जिसके लिए उनकी पहचान करने और भुगतान करने की विश्वसनीय व्यवस्था चाहिए।
अर्थशास्त्री और नॉलेज हब इंस्टीट्यूट के अध्यक्ष खांडकर गोलाम मोज्जेम का कहना है कि बांग्लादेश अब भी करीब 4.5 अरब डॉलर का नया वित्तपोषण चाहता है, लेकिन इससे जुड़ी शर्तें स्वीकार करने को लेकर अनिच्छुक है। उनका अनुमान है कि बातचीत में कम से कम दो साल लग सकते हैं, जो एक अन्य खबर में बताए गए दिसंबर के समझौते से कहीं अधिक समय है।
विश्व बैंक के ढाका कार्यालय के पूर्व प्रमुख अर्थशास्त्री जाहिद हुसैन का कहना है कि नए कार्यक्रम में भी इसी तरह के सुधारों की जरूरत होगी, क्योंकि बुनियादी कमजोरियां दूर नहीं हुई हैं। समझौते में बदलाव से अधिक समय मिल सकता है, लेकिन इससे राजस्व, बैंकिंग और सब्सिडी की समस्याएं दूर करने की जरूरत अपने आप खत्म नहीं होगी।
ऊर्जा लागत और कमजोर कर व्यवस्था सीमित करते हैं विकल्प
सरकारी खर्च का पैमाना बताता है कि अधिकारी क्यों मानते हैं कि बांग्लादेश विकास वित्तपोषण से जल्दी छुटकारा नहीं पा सकता। इस वित्त वर्ष के बजट में बिजली सब्सिडी के लिए 370 अरब टका और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) सब्सिडी के लिए 60 अरब टका आवंटित हैं। दोनों को मिलाकर यह राशि 430 अरब टका होती है।
अलग से, बताया गया है कि वित्त विभाग ने ढाई महीने में LNG आयात के लिए करीब 238 अरब टका जारी किए। इस राशि को सब्सिडी आवंटन में अपने आप नहीं जोड़ा जाना चाहिए, क्योंकि आयात के लिए वित्तपोषण और बजट में निर्धारित सब्सिडी लागत जरूरी नहीं कि खर्च की अलग-अलग श्रेणियां हों।
सरकार का कहना है कि बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉरपोरेशन को मार्च से अगस्त के बीच करीब 228.76 अरब टका का नुकसान हुआ। इन खबरों में बताए गए अंतरराष्ट्रीय मूल्यों के अनुसार, डीजल पर नुकसान करीब 89 टका प्रति लीटर था और सालाना सब्सिडी की जरूरत करीब 400 अरब टका आंकी गई। ईंधन की कीमतों में 20 टका बढ़ोतरी से डीजल का सालाना अंतर करीब 100 अरब टका घटने की उम्मीद थी, फिर भी यह करीब 300 अरब टका रह जाता।
राजस्व पुराने कार्यक्रम के लक्ष्यों के उलट दिशा में गया है। समझौते पर हस्ताक्षर के समय सकल घरेलू उत्पाद में कर राजस्व का अनुपात 7.4% था, जो घटकर 6.8% रह गया। यह 0.6 प्रतिशत अंक की गिरावट है। कार्यक्रम में पहले दो वर्षों में हर साल 0.5 प्रतिशत अंक और तीसरे वर्ष में 0.7 अंक की वृद्धि का लक्ष्य था।
सरकार ने पिछले वर्ष के वास्तविक संग्रह से करीब 45% अधिक राजस्व लक्ष्य तय किया, साथ ही कर रियायतें भी दीं। अधिकारियों का कहना है कि IMF जानना चाहता है कि हर सुधार से कितना राजस्व आएगा और राष्ट्रीय राजस्व बोर्ड की संग्रह योजना ऋणदाता को आश्वस्त नहीं कर पाई है।
कुछ संस्थागत प्रतिबद्धताएं भी अधूरी हैं। राष्ट्रीय राजस्व बोर्ड (NBR) के नीति और संग्रह कार्यों को अलग करने की समय-सीमा दिसंबर 2025 थी। एक अध्यादेश जारी हुआ, लेकिन बताया जाता है कि वह कानून नहीं बना है। इस्माइल जबीउल्लाह की अध्यक्षता वाली समीक्षा समिति ने अब तक अपनी रिपोर्ट नहीं दी है। कर छूट को तर्कसंगत बनाने की समय-सीमा जुलाई 2027 थी।
बैंकिंग सुधारों का असर IMF ऋण से आगे तक
बैंक सुधार एक अन्य विवादित क्षेत्र है। बैंक समाधान अधिनियम 2026 ने बैंक समाधान अध्यादेश 2025 में संशोधन किया था। इसी अध्यादेश के तहत संकटग्रस्त पांच इस्लामी बैंकों के विलय के कदम उठाए गए। समाधान की रूपरेखा बताती है कि अधिकारी उन बैंकों का पुनर्गठन कैसे करें या उनसे कैसे निपटें जो सुरक्षित रूप से काम नहीं कर सकते।
बताया जाता है कि विकास साझेदारों ने एक ऐसे प्रावधान पर आपत्ति जताई, जिसके तहत पूर्व मालिक अनुकूल शर्तों पर सरकारी धन लौटाने के बाद फिर से नियंत्रण पा सकते हैं। खबरों के अनुसार, विश्व बैंक ने अलग से 500 मिलियन डॉलर के बजट समर्थन ऋण की शर्त के तौर पर धारा 18(A) को निरस्त करने की मांग की। यह बातचीत में बताई गई स्थिति है, इस बात की पुष्टि नहीं कि ऋण अस्वीकार कर दिया गया है।
IMF के जनवरी के अनुच्छेद IV आकलन में, जो सदस्य देश की अर्थव्यवस्था की नियमित समीक्षा है, कमजोर राजस्व, बैंकिंग क्षेत्र की कमजोरियां, विनिमय दर व्यवस्था का अधूरा कार्यान्वयन और ऊंची महंगाई दर्ज की गई। इसमें यह भी कहा गया कि राजस्व लक्ष्य बड़े अंतर से पूरा नहीं हुआ और बैंकिंग स्थिरता की घोषित रणनीति नहीं अपनाई गई।
अधिकारियों का अनुमान है कि सक्रिय IMF कार्यक्रम से विश्व बैंक और ADB से सालाना 3 अरब से 4 अरब डॉलर की बजट सहायता हासिल करने में मदद मिल सकती है। कुछ अन्य खबरों में इस राशि को बांग्लादेश की सालाना बजट सहायता की जरूरत बताया गया है। दोनों ही स्थितियों में IMF के साथ बातचीत का असर एक ऋण स्रोत से आगे तक जाता है, क्योंकि अन्य वित्तदाता सहायता देने का फैसला करते समय उसके आकलन का इस्तेमाल कर सकते हैं।
मंत्री का विकल्प हैं बाजार
खोसरो का कहना है कि 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य हासिल करने के लिए बांग्लादेश को हर साल करीब 50 अरब डॉलर के निवेश की जरूरत है। उनका प्रस्ताव है कि बहुपक्षीय ऋणदाताओं पर निर्भर रहने के बजाय घरेलू बॉन्ड, अंतरराष्ट्रीय उधारी और इक्विटी निवेश का सहारा लिया जाए।
अक्टूबर के कार्यक्रम में वित्त मंत्री ने बांग्लादेश को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्रों से जोड़ने की जरूरत बताई।
"हम अंतरराष्ट्रीय बाजार से धन जुटाने के अवसर बनाना चाहते हैं। हमें खुद को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्रों से जोड़ना होगा," उन्होंने कहा।
चर्चा में न्यूयॉर्क में डॉलर बॉन्ड, हांगकांग में बांग्लादेश निवेश कोष, स्थानीय मुद्रा बॉन्ड, समुराई बॉन्ड और पांडा बॉन्ड जारी करने की योजनाएं शामिल हैं। समुराई बॉन्ड विदेशी उधारकर्ताओं द्वारा जापान में जारी किए गए येन-मूल्यवर्ग वाले बॉन्ड होते हैं। पांडा बॉन्ड विदेशी उधारकर्ताओं द्वारा चीन के घरेलू बाजार में जारी किए गए रेनमिन्बी-मूल्यवर्ग वाले बॉन्ड होते हैं।
उन्होंने प्रतिभूतिकरण का भी समर्थन किया। इसमें परिसंपत्तियों से आने वाले नकदी प्रवाह को ऐसी प्रतिभूतियों में बदला जाता है जिन्हें निवेशक खरीद सकते हैं। उन्होंने कहा कि एयरलाइंस जैसे वाणिज्यिक कारोबारों को करदाताओं के धन के बजाय बाजार से वित्तपोषण जुटाना चाहिए। पद्मा और जमुना पुलों को पूंजी बाजार में लाने की प्रक्रिया पर भी विचार हो रहा है, हालांकि लेन-देन की संरचना या समय-सीमा घोषित नहीं की गई है।
प्रस्तावित 4.5 अरब डॉलर के नए IMF कार्यक्रम का तीन वर्षों में औसत सालाना वित्तपोषण 1.5 अरब डॉलर होगा, जो मंत्री के 50 अरब डॉलर के सालाना निवेश आंकड़े का 3% है। यह तुलना दोनों के पैमाने का अंतर दिखाती है, लेकिन दोनों राशियों का उद्देश्य अलग है। व्यापक निवेश वित्तपोषण, विदेशी मुद्रा जरूरतों और सरकारी बजट के दबाव से निपटने वाली सहायता का सीधा विकल्प नहीं है।
बाजार से उधारी की भी अदायगी करनी होती है और इसके साथ निवेशकों की शर्तें तथा कीमतों से जुड़े जोखिम होते हैं। विदेशी मुद्रा में जारी बॉन्ड की अदायगी उसी मुद्रा में करनी पड़ती है जिसमें उधार लिया गया हो। जारी करने की शर्तें घोषित नहीं हुई हैं, इसलिए बाजार सस्ता वित्तपोषण देगा या नहीं, इसकी तुलना वास्तविक उधारी लागत से अभी नहीं की जा सकती।
निवेशकों का भरोसा और अगले फैसले
पूंजी बाजार की रणनीति ऐसे बाजार में भरोसा बहाल करने पर निर्भर है जिसे अधिकारी खुद सीमित गहराई वाला मानते हैं। खोसरो ने बांग्लादेश बैंक, NBR, बीमा कंपनियों, एक्सचेंजों और ब्रोकरों के बीच तालमेल के साथ बेहतर प्रशासन और मजबूत कंपनियों को बाजार में लाने का आह्वान किया।
निवेश और पूंजी बाजारों के लिए प्रधानमंत्री के विशेष सहायक तनवीर शहरीयर गनी ने दो साल में बांग्लादेश के बाजार को क्षेत्र के अन्य बाजारों के समकक्ष लाने का लक्ष्य रखा। चर्चा में शामिल उत्पादों में परिवर्तनीय बॉन्ड, रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट, इक्विटी स्टॉक विकल्प और स्थानीय मुद्रा बॉन्ड हैं।
BSEC के अध्यक्ष मसूद खान ने कहा कि संशोधित प्रक्रिया के तहत IPO की मंजूरी तीन महीने में पूरी कर दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि ढाई साल से कोई नई कंपनी सूचीबद्ध नहीं हुई है और बेक्सिमको लिमिटेड के बोर्ड के पुनर्गठन जैसे उपायों का उल्लेख किया। ढाका स्टॉक एक्सचेंज के अध्यक्ष मोमिनुल इस्लाम ने निवेशकों का भरोसा बहाल करने को सबसे बड़ी तात्कालिक चुनौती बताया।
IMF के साथ अगली बातचीत 12 से 18 अक्टूबर तक बैंकॉक में होने वाली वार्षिक बैठकों के आसपास होने की उम्मीद है। इनमें खोसरो बांग्लादेश के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। अधिकारियों का कहना है कि सुधार प्रस्ताव पहले ही सौंपे जा चुके हैं। ढाका में अगले IMF मिशन के समय को लेकर खबरें अलग-अलग हैं: कुछ में अक्टूबर के आखिर और कुछ में नवंबर का उल्लेख है। एक खबर में दिसंबर में नए समझौते पर हस्ताक्षर होने की संभावना जताई गई है।
ये तारीखें केवल अनुमान हैं, मंजूरी की तय समय-सीमा नहीं। एक अन्य खबर में वार्षिक बैठकें बैंकॉक के बजाय वॉशिंगटन में बताई गई हैं। तत्काल जिन फैसलों की जरूरत है, वे हैं: क्या पुराना कार्यक्रम सक्रिय है, क्या कोई लंबित राशि जारी हो सकती है और नए कार्यक्रम के तहत बांग्लादेश किन सुधारों के लिए प्रतिबद्ध होगा। मंत्री की बाजार से वित्तपोषण जुटाने की योजनाएं अभी इनमें से किसी सवाल का जवाब नहीं देतीं।
मुख्य बातें
- खोसरो ने 4 अक्टूबर को कहा कि उन्होंने IMF कार्यक्रम रद्द कर दिया है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि नए ऋण पर बातचीत जारी है।
- IMF ने 3 जून को नए कार्यक्रम के अनुरोध की पुष्टि की। वित्तपोषण के लिए अब भी बातचीत और कार्यकारी बोर्ड की मंजूरी जरूरी है।
- हाल की चर्चाओं में तीन साल के दौरान करीब 4 अरब से 4.5 अरब डॉलर की राशि पर ध्यान है, हालांकि पहले के प्रस्ताव इससे बड़े थे।
- कुल वितरित राशि, पुराने कार्यक्रम की औपचारिक स्थिति और लंबित किस्तों के समय को लेकर खबरों में अंतर है।
- कर संग्रह, सब्सिडी, बैंक सुधार और विनिमय दर नीति बातचीत के प्रमुख मुद्दे हैं।
- सरकार बॉन्ड और इक्विटी बाजारों को बढ़ावा दे रही है, लेकिन वित्तपोषण की अंतिम शर्तें या जारी करने की तारीखें घोषित नहीं हुई हैं।
- आगे की बातचीत अक्टूबर और नवंबर में होने की उम्मीद है। दिसंबर में समझौता संभव है, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हुई है।






