रक्त-संबंधी भाइयों से रणनीतिक साझेदारों तक: दक्षिण कोरिया-तुर्किये रक्षा सहयोग का विकास

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रक्त-संबंधी भाइयों से रणनीतिक साझेदारों तक: दक्षिण कोरिया-तुर्किये रक्षा सहयोग का विकास

युद्धभूमि की भाईचारा भावना से रणनीतिक साझेदारी तक

दक्षिण कोरिया और तुर्किये के बीच संबंध लंबे समय से सामान्य राजनयिक रिश्तों की सीमाओं से आगे रहे हैं। सात दशकों से अधिक समय से दोनों देश एक-दूसरे को "रक्त-संबंधी भाई" कहते आए हैं। यह संबोधन कोरियाई युद्ध से जुड़ा है, जब तुर्की सैनिकों ने कोरियाई सैनिकों के साथ मिलकर लड़ाई लड़ी और अपनी जान दी। कोरियाई प्रायद्वीप पर स्वतंत्रता की रक्षा करते हुए शहीद हुए 721 तुर्की सैनिकों ने इस भावनात्मक जुड़ाव को और पुख्ता किया। इसने लगातार बिखरती अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में भरोसे की एक दुर्लभ नींव दी है।

विषय-सूची
  1. युद्धभूमि की भाईचारा भावना से रणनीतिक साझेदारी तक
  2. युद्ध की कसौटी पर बना रिश्ता
  3. एक-दूसरे की पूरक रक्षा क्षमताएं
  4. राष्ट्रपति की यात्रा से रिश्तों को नई गति
  5. महत्वपूर्ण सहयोग परियोजनाएं
  6. बदलती विश्व व्यवस्था में मध्यम शक्तियां
  7. रिश्तों को आधार देते आर्थिक संबंध
  8. सहयोग का अगला पड़ाव
  9. मुख्य बातें

ऐसे दौर में, जब बड़ी शक्तियों की प्रतिस्पर्धा और तकनीकी अलगाव के कारण पारंपरिक गठबंधनों पर दबाव है, भरोसेमंद साझेदारों की तलाश पहले से अधिक जरूरी हो गई है। सियोल के लिए अंकारा यूरोप और एशिया के बीच एक सेतु है; वह मध्य पूर्व और अफ्रीका में व्यापक व्यापारिक नेटवर्क वाला मुस्लिम-बहुल लोकतंत्र है। तुर्किये के लिए दक्षिण कोरिया तीव्र औद्योगीकरण का एक उदाहरण और उन्नत सैन्य तकनीक का स्रोत है, जहां पश्चिमी आपूर्तिकर्ताओं जैसी राजनीतिक शर्तें नहीं हैं। हितों का यह मेल बताता है कि अतीत का रक्त-बंधुत्व उस रणनीतिक स्वायत्तता का खाका बन सकता है, जिसकी दोनों देश लगातार बहुध्रुवीय होती दुनिया में तलाश कर रहे हैं।

हालांकि, केवल इतिहास रणनीतिक प्रासंगिकता की गारंटी नहीं देता। नवंबर 2025 में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग 13 वर्षों में किसी कोरियाई नेता की पहली राजकीय यात्रा पर अंकारा पहुंचे। यह भावनात्मक एकजुटता को व्यवस्थित और भविष्य-केंद्रित सहयोग में बदलने की सुनियोजित कोशिश का संकेत था। इस यात्रा ने साझा समझ को रेखांकित किया कि महाशक्तियों की तेज होती प्रतिस्पर्धा, राजनीतिक रंग लेती आपूर्ति शृंखलाओं और तकनीक तक सीमित पहुंच के दौर में मध्यम शक्तियों को रणनीतिक लचीलापन बनाए रखने के लिए साझेदारियों में विविधता लानी होगी। सियोल और अंकारा के सामने अब सवाल यह नहीं है कि उनमें ऐतिहासिक आत्मीयता है या नहीं, बल्कि यह है कि क्या यह भरोसा एक व्यापक रक्षा और औद्योगिक गठबंधन में बदल सकता है, जो इक्कीसवीं सदी की सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर सके।

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युद्ध की कसौटी पर बना रिश्ता

इस असाधारण रिश्ते की शुरुआत 1950 में हुई, जब तुर्किये ने संयुक्त राष्ट्र बलों के हिस्से के रूप में कोरिया में 21 हजार से अधिक सैनिक भेजे। सैनिकों की संख्या के लिहाज से यह अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा के बाद चौथा सबसे बड़ा योगदान था। तुर्की बलों ने भीषण लड़ाइयों में अपनी क्षमता साबित की और दृढ़ता तथा साहस की ऐसी छवि बनाई, जो कोरियाई सैन्य इतिहास में आज भी किंवदंती बनी हुई है।

संघर्ष के दौरान मारे गए 721 तुर्की सैनिकों में से 462 बुसान स्थित संयुक्त राष्ट्र स्मारक कब्रिस्तान में दफन हैं। यह पवित्र स्थल आज भी दोनों देशों के पूर्व सैनिकों और अधिकारियों की मौजूदगी में हर साल आयोजित स्मरण समारोहों का केंद्र है। तुर्किये 1949 में कोरिया गणराज्य की सरकार को मान्यता देने वाला दसवां देश था और अमेरिका तथा चीन गणराज्य के बाद सियोल में स्थायी दूतावास स्थापित करने वाला तीसरा देश। इस शुरुआती राजनयिक प्रतिबद्धता ने ऐसे संस्थागत ढांचे बनाए, जो दोनों देशों में दशकों के राजनीतिक बदलाव के बावजूद कायम रहे।

कोरियाई युद्ध की विरासत स्मारकों और स्मृति दिवसों तक सीमित नहीं है। इसने वह आधार बनाया, जिसे दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्युन ने हाल ही में दोनों देशों के बीच गहरे भरोसे और दोस्ती की नींव बताया। सद्भावना के इस भंडार ने रिश्ते को उन भू-राजनीतिक बदलावों के बीच टिकाए रखा है, जिनसे दूसरे गठबंधनों पर दबाव पड़ा। इससे ऐसा अनूठा माहौल बना है, जहां विदेशी सैन्य साझेदारियों के साथ अक्सर जुड़ा संदेह रक्षा सहयोग की राह में बाधा नहीं बनता।

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एक-दूसरे की पूरक रक्षा क्षमताएं

आज की रक्षा साझेदारी इस समझ पर टिकी है कि दक्षिण कोरिया और तुर्किये की औद्योगिक क्षमताएं एक-दूसरे की पूरक हैं। पिछले दो दशकों में सियोल दुनिया के सबसे सक्रिय रक्षा निर्यातकों में उभरा है। विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता से आगे बढ़कर उसने बख्तरबंद वाहन, स्वचालित तोपखाना, नौसैनिक मंच, लड़ाकू विमान और एकीकृत युद्ध प्रणालियां बनाने वाला तकनीकी रूप से उन्नत उत्पादक बनने का सफर तय किया है। कोरियाई कंपनियों ने प्रणालियों के एकीकरण में खास दक्षता दिखाई है। वे रडार नेटवर्क, मिसाइल ढांचे, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमताओं तथा कमान और नियंत्रण प्रणालियों को एकसाथ जोड़कर सुसंगत परिचालन ढांचे तैयार करती हैं।

इस बीच, अंकारा ने रणनीतिक स्वायत्तता की दिशा में दृढ़ता से काम किया है और मानवरहित हवाई प्रणालियों, मिसाइल विकास तथा टीएफएक्स अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रम में उल्लेखनीय प्रगति की है। ड्रोन युद्ध और सटीक प्रणालियों में तुर्किये की उपलब्धियों ने क्षेत्रीय सैन्य समीकरणों को पहले ही बदल दिया है। बहुउद्देशीय उभयचर हमलावर पोत के रूप में टीसीजी अनादोलु का सेवा में शामिल होना उसकी बढ़ती समुद्री महत्वाकांक्षाओं का संकेत है।

औद्योगिक क्षमताओं की यह पूरकता स्वाभाविक तालमेल पैदा करती है। दक्षिण कोरिया उन्नत जहाज निर्माण, वायु-स्वतंत्र प्रणोदन प्रणाली वाली पनडुब्बियों और भारी जमीनी सैन्य मंचों में विश्वस्तरीय क्षमताएं लाता है। कोरिया की प्रमुख रक्षा ठेकेदार कंपनी हुंडई रोटेम ने अल्ताय मुख्य युद्धक टैंक कार्यक्रम पर तुर्की उद्योग के साथ पहले ही साझेदारी की है। कंपनी की तकनीकी सहायता और सहयोग दिखाते हैं कि साझेदारी घरेलू उत्पादन क्षमता को कमजोर करने के बजाय उसे मजबूत कर सकती है। टीसीजी अनादोलु को समुद्री टास्क फोर्स के केंद्र के रूप में प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए तुर्किये को आधुनिक वायु रक्षा विध्वंसक पोत, एकीकृत युद्ध प्रणालियों वाले उन्नत फ्रिगेट और कम दृश्यता वाली पनडुब्बियों की जरूरत है। ये ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें कोरियाई जहाज निर्माण कंपनियों के पास व्यापक अनुभव है, जिसमें एजिस प्रणाली से लैस विध्वंसक पोत और उन्नत उभयचर मंच शामिल हैं।

अंकारा पहुंचने से पहले राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने एक विशेष साक्षात्कार में इस साझेदारी के पीछे की रणनीतिक सोच बताते हुए कहा कि रिश्ता केवल आर्थिक सुविधा तक सीमित नहीं है।

तुर्किये कोरिया का रणनीतिक साझेदार और यूरेशियाई क्षेत्र का एक अहम केंद्र है। कोरिया के लिए तुर्किये केवल उत्पादन का ठिकाना नहीं है। वह ऐसा रणनीतिक साझेदार है, जिसके साथ हम नवाचार, निवेश और वैश्विक प्रतिस्पर्धा करना चाहते हैं।

इस साझेदारी की संभावनाएं हथियारों और उपकरणों से आगे सह-उत्पादन मॉडल तक जाती हैं। कोरिया के रक्षा सहयोग का दर्शन केवल निर्यात सौदों के बजाय तकनीकी सहयोग और दीर्घकालिक औद्योगिक एकीकरण पर जोर देता है। यह दृष्टिकोण, चुनिंदा साझेदारियों के जरिए घरेलू क्षमताएं बढ़ाते हुए संरचनात्मक निर्भरता पैदा किए बिना तुर्किये की टिकाऊ स्वायत्तता के लक्ष्य से मेल खाता है। पारंपरिक आपूर्तिकर्ताओं पर अत्यधिक निर्भरता घटाने की कोशिश कर रहे दोनों देशों का सहयोग यह उदाहरण पेश करता है कि मध्यम शक्तियां स्वतंत्र रक्षा ढांचे कायम रखते हुए मजबूत आपूर्ति शृंखलाएं कैसे बना सकती हैं।

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राष्ट्रपति की यात्रा से रिश्तों को नई गति

नवंबर 2025 में राष्ट्रपति ली जे म्युंग की अंकारा यात्रा इन रणनीतिक संभावनाओं को अमल में लाने का निर्णायक पड़ाव बनी। तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन के साथ बैठक में नेताओं ने "भाईचारे की विरासत, भविष्य की दृष्टि" शीर्षक से संयुक्त वक्तव्य अपनाया और 2027 में राजनयिक संबंधों की 70वीं वर्षगांठ से पहले रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने का संकल्प लिया। शिखर बैठक में रक्षा, परमाणु ऊर्जा, बुनियादी ढांचे और पूर्व सैनिकों से जुड़े ठोस समझौते हुए। इस तरह औपचारिक प्रतीकों से आगे बढ़कर सहयोग के संस्थागत तंत्र बनाए गए।

इस यात्रा का समय सोच-समझकर तय की गई कूटनीतिक रणनीति को दर्शाता था। ली ने अभी-अभी दक्षिण अफ्रीका में जी20 शिखर सम्मेलन में भाग लिया था और संयुक्त अरब अमीरात तथा मिस्र का दौरा किया था। इससे मध्य पूर्व और अफ्रीका में सियोल का प्रभाव बढ़ाने की उसकी ठोस कोशिश जाहिर हुई। इस दौरे का अंतिम पड़ाव तुर्किये को चुनना व्यापक कूटनीतिक पहुंच में उसकी रणनीतिक अहमियत को रेखांकित करता है। यह यात्रा उसी सप्ताह ली और एर्दोआन की दूसरी मुलाकात के साथ भी हुई। इससे पहले दोनों की मुलाकात मिक्ता की बैठक में हुई थी। मिक्ता मेक्सिको, इंडोनेशिया, दक्षिण कोरिया, तुर्किये और ऑस्ट्रेलिया सहित पांच मध्यम शक्ति वाले देशों का परामर्श मंच है।

अंकारा शिखर बैठक में दोनों नेताओं ने एशिया, यूरोप और उससे आगे शांति, स्थिरता और समृद्धि के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कोरियाई प्रायद्वीप को पूरी तरह परमाणु हथियारों से मुक्त करने के समर्थन की फिर पुष्टि की और संयुक्त राष्ट्र, जी20 तथा आर्थिक सहयोग और विकास संगठन सहित बहुपक्षीय मंचों के जरिए सहयोग बढ़ाने का संकल्प लिया। चर्चा में रक्षा सहयोग को केवल उपकरणों के हस्तांतरण से आगे ले जाकर संयुक्त उत्पादन, तकनीकी आदान-प्रदान और प्रशिक्षण कार्यक्रमों तक पहुंचाने पर खास तौर से बात हुई।

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महत्वपूर्ण सहयोग परियोजनाएं

कई ठोस पहलें गहरे होते रिश्तों के व्यावहारिक दायरे को दर्शाती हैं। रक्षा क्षेत्र में अल्ताय मुख्य युद्धक टैंक कार्यक्रम औद्योगिक एकीकरण का सबसे स्पष्ट उदाहरण है। हुंडई रोटेम की भागीदारी ने तुर्की टैंक उत्पादन को तकनीकी आधार दिया है, जबकि यह परियोजना जटिल सैन्य मंचों पर भविष्य के सहयोग का मॉडल पेश करती है। दक्षिण कोरिया ने तुर्किये और मिस्र को के9 स्वचालित हॉवित्जर तोपें भी निर्यात की हैं, जिससे क्षेत्र में भारी हथियारों की विश्वसनीय आपूर्ति का उसका रिकॉर्ड बना है।

ली की यात्रा के दौरान परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई। कोरिया इलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन और तुर्किये की न्यूक्लियर एनर्जी कॉरपोरेशन के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए। यह समझौता तकनीक, स्थल मूल्यांकन, लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं और वित्तीय पैकेजों में सहयोग का ढांचा तैयार करता है। इसका खास लक्ष्य काला सागर तट पर सिनोप में प्रस्तावित दूसरा परमाणु ऊर्जा संयंत्र है। सियोल को उम्मीद है कि यह समझौता निर्माण ठेका हासिल करने की दिशा में शुरुआती कदम बनेगा और कोरियाई कंपनियों को विश्वस्तरीय परमाणु तकनीक तथा परिचालन सुरक्षा विशेषज्ञता देने का अवसर मिलेगा।

कोरिया एक्सप्रेसवे कॉरपोरेशन और तुर्किये के राजमार्ग महानिदेशालय के बीच हुए समझौतों से बुनियादी ढांचे में सहयोग भी आगे बढ़ा। इससे मध्य पूर्व और यूरेशिया के तीसरे देशों में संयुक्त परियोजनाओं के अवसर खुलेंगे। नागरिक क्षेत्र की ये साझेदारियां हुंडई मोटर ग्रुप, पोस्को, सैमसंग और एलजी जैसी प्रमुख कोरियाई कंपनियों के बड़े निवेश पर आधारित हैं। ये कंपनियां वर्षों से तुर्किये में विनिर्माण संयंत्र और बुनियादी ढांचा परियोजनाएं चला रही हैं। 200 से अधिक कंपनियों के जरिए उनका प्रत्यक्ष निवेश करीब 4.6 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है।

दोनों सरकारों ने 1950-53 के संघर्ष में दक्षिण कोरिया का साथ देने वाले तुर्की पूर्व सैनिकों के सम्मान और पूर्व सैनिक संगठनों तथा उनके वंशजों के बीच आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए भी समझौतों पर हस्ताक्षर किए। ली ने अंकारा के कोरियाई पार्क का दौरा किया। हुंडई मोटर द्वारा वित्तपोषित इस स्मारक पर उन्होंने चार तुर्की पूर्व सैनिकों और शहीद सैनिकों के 13 परिजनों के साथ पुष्पांजलि अर्पित की। इससे रणनीतिक रिश्ते का मानवीय पक्ष भी मजबूत हुआ।

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बदलती विश्व व्यवस्था में मध्यम शक्तियां

ठोस परियोजनाओं से परे, कोरिया और तुर्किये की साझेदारी एक व्यापक संरचनात्मक बदलाव को दर्शाती है: महाशक्तियों की प्रतिद्वंद्विता के दौर में मध्यम शक्ति वाले देशों के गठबंधन उभर रहे हैं। न तो सियोल और न ही अंकारा महाशक्ति है, लेकिन दोनों के पास उन्नत औद्योगिक क्षमताएं, विविध राजनयिक नेटवर्क और ऐसी रणनीतिक भौगोलिक स्थिति है, जो उन्हें स्वतंत्र रूप से महत्वपूर्ण कदम उठाने में सक्षम बनाती है। दोनों ने स्वायत्त हितों को आगे बढ़ाते हुए गठबंधन बनाए रखने की क्षमता दिखाई है और टकराव के बजाय विविधता के जरिए लचीलापन तलाशा है।

मिक्ता समूह मध्यम शक्तियों की इस एकजुटता का एक संस्थागत रूप है। सुरक्षा-केंद्रित गुटों के विपरीत, मिक्ता वैश्विक शासन, आर्थिक स्थिरता और विकास पर परामर्श आधारित सहयोग को बढ़ावा देता है। दक्षिण कोरिया और तुर्किये इस मंच का इस्तेमाल द्विपक्षीय माध्यमों के साथ करते हुए आपूर्ति शृंखला की मजबूती से लेकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता के नियमन तक के मुद्दों पर अपने रुख में तालमेल बिठाते हैं। विदेश मंत्री चो ने जोर देकर कहा है कि सियोल अमेरिका और चीन के बीच केवल संतुलन साधने की कोशिश नहीं करता। वह राष्ट्रीय हितों का समग्र और बहुआयामी नजरिए से आकलन करता है: उन्नत तकनीकों पर वॉशिंगटन के साथ सहयोग करते हुए बीजिंग के साथ व्यावहारिक संबंध बनाए रखता है।

यह दृष्टिकोण यूरोप, मध्य पूर्व और यूरेशिया के चौराहे पर स्थित अंकारा की रणनीतिक भूमिका से मेल खाता है। वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में विविधता लाने और क्षेत्रीय उत्पादन केंद्र स्थापित करने में तुर्किये की भूमिका लगातार अहम हो रही है, खासकर तब जब कोरियाई कंपनियां विनिर्माण के केंद्रों में एकाग्रता के विकल्प तलाश रही हैं। कोरियाई और तुर्की रक्षा उद्योगों की पूरक क्षमताएं, सियोल के भारी सैन्य मंच और नौसैनिक प्रणालियां तथा अंकारा के ड्रोन और मिसाइलें, मध्य पूर्व, अफ्रीका और मध्य एशिया के तीसरे बाजारों के लिए संयुक्त उत्पादन की संभावना खोलती हैं।

इस साझेदारी का भू-राजनीतिक संदेश भी है। ऐसे समय में जब गठबंधनों की परीक्षा हो रही है और समुद्री प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है, सक्षम मध्यम शक्तियों के बीच सहयोग दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था केवल सबसे बड़ी शक्तियां ही तय नहीं करेंगी। तकनीकी क्षमता और रणनीतिक दृष्टि वाले देश शून्य-योग वाले गुटीय राजनीति में शामिल हुए बिना क्षेत्रीय स्थिरता और सामूहिक सुरक्षा ढांचों में योगदान दे सकते हैं।

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रिश्तों को आधार देते आर्थिक संबंध

रक्षा और रणनीतिक सहयोग की नींव चार दशकों में विकसित हुए मजबूत नागरिक आर्थिक रिश्तों पर टिकी है। 2013 में मुक्त व्यापार समझौता लागू होने के बाद से द्विपक्षीय व्यापार डेढ़ गुने से अधिक बढ़ा है और 2023 में 10.4 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इस वाणिज्यिक आदान-प्रदान में वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स, निर्माण और सामग्री शामिल हैं। कोरियाई कंपनियों ने 1980 के दशक के मध्य से तुर्किये में उल्लेखनीय विनिर्माण उपस्थिति बनाई है।

हुंडई मोटर कंपनी ने 1990 में तुर्किये को वाहन निर्यात करना शुरू किया और 1995 में इज़मित में एक वाहन कारखाना बनाया। सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स ने स्थानीय साझेदारों के साथ मिलकर रंगीन टेलीविजन और वीडियो उपकरण बनाए, जबकि पोस्को और एलजी ने देशभर में औद्योगिक इकाइयां स्थापित कीं। इन निवेशों ने संस्थागत परिचय, आपूर्ति शृंखला के एकीकरण और कारोबारी भरोसे को बढ़ाया है, जिससे रणनीतिक क्षेत्रों में विस्तार आसान हुआ। जब कंपनियां और इंजीनियर नागरिक उद्योगों में सफलतापूर्वक साथ काम कर चुके हों, तो रक्षा और परमाणु ऊर्जा में सहयोग बढ़ाना काफी अधिक व्यावहारिक हो जाता है।

दोनों सरकारें व्यापार में बने असंतुलन को दूर करने की जरूरत समझती हैं, क्योंकि निर्यात के मूल्य के लिहाज से पलड़ा सियोल के पक्ष में है। हालांकि, राष्ट्रपति ली ने अपनी यात्रा के दौरान कहा कि कोरिया के निर्यात में हुई बढ़ोतरी का बड़ा हिस्सा पूंजीगत वस्तुओं और मध्यवर्ती उत्पादों का है, जो तुर्की विनिर्माण और औद्योगिक विकास में सहायक हैं। तुर्किये की उत्पादन और निर्यात क्षमता बढ़ने के साथ इन घटकों की मांग स्वाभाविक रूप से बढ़ी है। यह संरचनात्मक नुकसान के बजाय जारी औद्योगीकरण की वास्तविकता को दर्शाता है।

सांस्कृतिक और लोगों के बीच आदान-प्रदान इन आर्थिक संबंधों को पूरक बनाता है। दक्षिण कोरिया ने तुर्की नागरिकों के लिए समूह आवेदन की सुविधा देकर वीजा प्रक्रिया सरल की है, तुर्की भाषा में सहायता बढ़ाई है और अनुमति की वैधता तीन साल तक कर दी है। 17 वर्ष से कम उम्र के यात्रा करने वाले नाबालिगों और 65 वर्ष से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों को इलेक्ट्रॉनिक यात्रा अनुमति की आवश्यकता से छूट है। तुर्किये में कोरियाई संस्कृति में दिलचस्पी बढ़ रही है, जबकि दक्षिण कोरिया में तुर्की व्यंजन और कला लोकप्रिय हो रहे हैं। इससे दोनों समाजों में ऐसे समूह बन रहे हैं, जो करीबी द्विपक्षीय संबंधों का समर्थन करते हैं।

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सहयोग का अगला पड़ाव

2027 में राजनयिक संबंधों की 70वीं वर्षगांठ की ओर देखते हुए सियोल और अंकारा ने सहयोग बढ़ाने के कई नए क्षेत्र पहचाने हैं। रक्षा क्षेत्र में दोनों पक्ष मौजूदा परियोजनाओं से आगे बढ़कर अगली पीढ़ी की प्रणालियों का संयुक्त विकास करने की उम्मीद कर रहे हैं। इसमें केएफ21 बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान, लंबी दूरी की जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणालियों और एकीकृत मानवरहित मंचों पर संभावित सहयोग शामिल है। नेताओं ने खास तौर पर मानवरहित प्रणालियों को पारंपरिक सैन्य मंचों के साथ एकीकृत करने और उभरती तकनीकों में संयुक्त नवाचार को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता जताई।

रक्षा और परमाणु ऊर्जा से आगे यह साझेदारी जैव प्रौद्योगिकी, नवीकरणीय ऊर्जा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक विस्तार करने की योजना रखती है। दोनों देश यूएई स्टारगेट परियोजना और ऐसी ही पहलों में सहयोग की संभावनाएं तलाश रहे हैं, जिनमें कोरिया की बुनियादी ढांचा क्षमताओं के साथ तुर्किये की भौगोलिक स्थिति का लाभ लिया जा सके। क्षेत्रीय कूटनीति में सियोल कोरियाई प्रायद्वीप पर शांति और सह-अस्तित्व का समर्थन करने वाले देशों के साथ सहयोग को महत्व देता है। वहीं, यूक्रेन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर दक्षिण कोरिया के लगातार कायम रुख की अंकारा सराहना करता है।

रक्त-संबंधी भाइयों से रणनीतिक साझेदारों तक का सफर द्विपक्षीय रिश्ते की निरंतरता और बदलाव, दोनों को दर्शाता है। कोरियाई युद्ध के दौरान बना भावनात्मक बंधन भरोसे की ऐसी नींव देता है, जो अंतरराष्ट्रीय मामलों में दुर्लभ है, खासकर रक्षा सहयोग में, जहां अनुबंध दशकों तक चलते हैं और औद्योगिक तंत्र राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ जाते हैं। अब इस साझेदारी का भविष्य रणनीति तय करेगी। दोनों देश समझते हैं कि 1950 के दशक का साझा बलिदान 2030 के दशक की चुनौतियों के लिए साझा तकनीकी प्रगति और सुरक्षा सहयोग में बदलना चाहिए।

मुख्य बातें

  • कोरियाई युद्ध में 21 हजार से अधिक तुर्की सैनिकों ने लड़ाई लड़ी। 721 सैनिकों की मौत ने आधुनिक संबंधों के लिए "रक्त-संबंधी भाइयों" की नींव रखी।
  • 2013 के मुक्त व्यापार समझौते के तहत 2023 में द्विपक्षीय व्यापार रिकॉर्ड 10.4 अरब डॉलर पर पहुंचा। 200 से अधिक कोरियाई कंपनियों ने तुर्किये में 4.6 अरब डॉलर का निवेश किया है।
  • अल्ताय मुख्य युद्धक टैंक कार्यक्रम रक्षा उद्योग में सहयोग की प्रमुख मिसाल है। हुंडई रोटेम तुर्की उत्पादन के लिए तकनीकी सहायता दे रही है।
  • नवंबर 2025 में 13 वर्षों में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति की तुर्किये की पहली यात्रा हुई। इस दौरान रक्षा, परमाणु ऊर्जा और बुनियादी ढांचे पर समझौते हुए।
  • कोरिया इलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन और तुर्किये की न्यूक्लियर एनर्जी कॉरपोरेशन के बीच समझौता ज्ञापन सिनोप परमाणु ऊर्जा संयंत्र परियोजना में कोरियाई भागीदारी की संभावनाओं के लिए ढांचा तैयार करता है।
  • दोनों देश पांच मध्यम शक्ति वाले देशों के परामर्श मंच मिक्ता में शामिल हैं और वैश्विक शासन तथा आपूर्ति शृंखला की मजबूती पर अपने रुख में तालमेल बिठाते हैं।
  • राजनयिक संबंधों की 70वीं वर्षगांठ 2027 में होगी। दोनों सरकारें रक्षा, जैव प्रौद्योगिकी, नवीकरणीय ऊर्जा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता में सहयोग बढ़ाने की योजना बना रही हैं।
  • तुर्किये का रक्षा निर्यात 2024 में पहली बार 10 अरब डॉलर से अधिक हुआ। वहीं, दक्षिण कोरिया नौसैनिक और भारी जमीनी सैन्य मंचों में अपनी खास क्षमताओं के साथ भरोसेमंद वैश्विक रक्षा साझेदार के रूप में स्थापित होना चाहता है।
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