21 महीने तक स्थिर रहने के बाद चीन का कार्बन उत्सर्जन समय से पहले निर्णायक मोड़ पर

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21 महीने तक स्थिर रहने के बाद चीन का कार्बन उत्सर्जन समय से पहले निर्णायक मोड़ पर

वैश्विक जलवायु पैटर्न में ऐतिहासिक बदलाव

चीन का कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन लगातार 21 महीनों से स्थिर है या उसमें गिरावट आई है। यह अब तक की सबसे लंबी स्थिरता अवधि है, जिसका कारण आर्थिक संकट नहीं है। कार्बन ब्रीफ के लिए सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर के विश्लेषण के अनुसार, 2025 की अंतिम तिमाही में उत्सर्जन 1% घटा और पूरे वर्ष में इसमें 0.3% की गिरावट आने की संभावना है। दुनिया के सबसे बड़े ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जक देश में यह ठहराव इस संभावना को मजबूत करता है कि चीन अपने 2030 के आधिकारिक लक्ष्य से कई वर्ष पहले उत्सर्जन के चरम पर पहुंच सकता है। यह घटनाक्रम तापमान वृद्धि सीमित करने के वैश्विक प्रयासों में निर्णायक मोड़ का संकेत हो सकता है।

विषय-सूची
  1. वैश्विक जलवायु पैटर्न में ऐतिहासिक बदलाव
  2. स्वच्छ ऊर्जा का इंजन
  3. औद्योगिक विरोधाभास और कोयले की कायम छाया
  4. नीतिगत दोराहा: 15वीं पंचवर्षीय योजना
  5. वैश्विक नतीजे और भू-राजनीतिक अंतर
  6. मुख्य बातें

इस रुझान का महत्व राष्ट्रीय सीमाओं से कहीं आगे तक जाता है। वैश्विक CO2 उत्सर्जन में एक-तिहाई से अधिक हिस्सेदारी वाले देश के रूप में, चीन के उत्सर्जन का रुख काफी हद तक तय करता है कि पेरिस समझौते के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए दुनिया भर में प्रदूषण का स्तर समय रहते स्थिर होगा या नहीं। मौजूदा गिरावट 2009, 2012, 2015 और 2022 की पिछली गिरावटों से बुनियादी रूप से अलग है, जो वित्तीय संकटों, महामारी प्रतिबंधों या निर्माण क्षेत्र में मंदी के कारण आई थीं। इस बार आर्थिक गतिविधियां बढ़ने के बावजूद स्वच्छ ऊर्जा का विस्तार उत्सर्जन में कमी ला रहा है।

बिजली की मांग में 520 टेरावाट घंटे की वृद्धि के बावजूद 2025 में बिजली क्षेत्र का उत्सर्जन 1.5% घटा। सौर बिजली उत्पादन साल-दर-साल 43%, पवन ऊर्जा 14% और परमाणु ऊर्जा 8% बढ़ी। इन स्रोतों ने मिलकर लगभग 530 टेरावाट घंटे नई स्वच्छ बिजली दी, जिससे मांग में हुई पूरी वृद्धि की भरपाई हो गई। ऊर्जा भंडारण क्षमता में रिकॉर्ड 75 गीगावाट की वृद्धि हुई, जो बिजली की अधिकतम मांग में 55 गीगावाट की बढ़ोतरी से ज्यादा है। इससे अधिक खपत के समय ग्रिड प्रबंधकों को जीवाश्म ईंधन से चलने वाले बैकअप के विकल्प मिले।

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स्वच्छ ऊर्जा का इंजन

चीन के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र ने इस दशक की शुरुआत में लगाए गए सबसे आशावादी अनुमानों से भी अधिक तेजी से क्षमता स्थापित की है। देश ने 2025 के पहले नौ महीनों में ही 240 गीगावाट सौर क्षमता जोड़ी। यह 2024 में स्थापित रिकॉर्ड 333 गीगावाट के अतिरिक्त थी, जो दुनिया के बाकी देशों की कुल क्षमता से भी अधिक थी। इसी अवधि में पवन ऊर्जा क्षमता में 61 गीगावाट की वृद्धि हुई। उद्योग संघों का अनुमान है कि 2026 तक हर साल 105 से 120 गीगावाट क्षमता स्थापित की जाएगी।

इस विस्तार ने आर्थिक विकास और उत्सर्जन के बीच के संबंध को बुनियादी रूप से बदल दिया है। 2025 में स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों ने चीन की आर्थिक वृद्धि में एक-तिहाई से अधिक योगदान दिया। तथाकथित नए तीन क्षेत्र-इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरियां और सौर ऊर्जा-ने 1.1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का अतिरिक्त मूल्य पैदा किया। चीन अब दुनिया के 80% से अधिक सौर पैनल, 60% पवन टर्बाइन और 75% इलेक्ट्रिक वाहन तथा उनकी बैटरियां बनाता है। इस तरह अपनी अर्थव्यवस्था को कार्बन-मुक्त करते हुए भी देश जलवायु समाधान का प्रमुख आपूर्तिकर्ता बन गया है।

परिवहन क्षेत्र इस बदलाव को साफ तौर पर दिखाता है। 2025 में परिवहन से होने वाला उत्सर्जन 3% घटा, जबकि नई गाड़ियों की बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 40% से अधिक हो गई। घरेलू स्तर पर 1.2 करोड़ से ज्यादा नई ऊर्जा वाले वाहन बनाए और बेचे गए। बैटरी से चलने वाले इलेक्ट्रिक वाहन और प्लग-इन हाइब्रिड अब चीन की सड़कों पर मौजूद सभी वाहनों का 8.9% हैं। इनकी वजह से तेल की मांग में कमी आई है, जो पहले उत्सर्जन बढ़ने का कारण बनती थी। इन प्रौद्योगिकियों को तेजी से अपनाने से पता चलता है कि बुनियादी ढांचे में निवेश एक ही बाजार चक्र के भीतर किसी क्षेत्र को कार्बन-मुक्त करने की प्रक्रिया तेज कर सकता है।

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औद्योगिक विरोधाभास और कोयले की कायम छाया

बिजली और परिवहन क्षेत्रों में प्रगति के बावजूद, चीन के औद्योगिक परिदृश्य में उत्सर्जन के रुझान अधिक जटिल तस्वीर पेश करते हैं। रियल एस्टेट निर्माण में लगातार कमजोरी के चलते सीमेंट उत्पादन से उत्सर्जन 7% और धातु उद्योग से उत्सर्जन 3% घटा। वहीं, रसायन क्षेत्र इसका बड़ा अपवाद बनकर उभरा। प्लास्टिक और कृत्रिम सामग्री की उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए उद्योग के विस्तार के बीच 2025 में रासायनिक विनिर्माण से उत्सर्जन 12% बढ़ा। इस दौरान कोयले का इस्तेमाल 15% और तेल की खपत 10% बढ़ी।

कोयले से रसायन बनाने का यह विस्तार ऊर्जा सुरक्षा संबंधी चिंताओं और व्यापारिक तनावों के जवाब में उठाया गया रणनीतिक कदम है। आयातित तेल और गैस पर निर्भरता घटाने की कोशिश में, खासकर अमेरिका के साथ शुल्क विवादों के बीच, चीन इस क्षेत्र में तेजी से ऐसे संयंत्र बना रहा है जो कोयले को सीधे रासायनिक कच्चे माल और कृत्रिम ईंधन में बदलते हैं। यदि विस्तार की मौजूदा योजनाएं पूरी तरह लागू हुईं, तो इस क्षेत्र में कई वर्षों तक अतिरिक्त उत्सर्जन जारी रह सकता है। यह क्षेत्र पहले ही राष्ट्रीय CO2 उत्सर्जन का करीब 13% हिस्सा है। रसायन उद्योग में वृद्धि न होती तो चीन का कुल उत्सर्जन 0.3% के बजाय अनुमानित 2% घटा होता।

दीर्घकालिक कार्बन-मुक्ति की संभावनाओं के लिए शायद इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि कुल कोयला-आधारित बिजली उत्पादन घटने के बावजूद चीन ने 2025 में कोयले से चलने वाली 78 गीगावाट नई बिजली क्षमता शुरू की। यह एक दशक में किसी वर्ष का सबसे ऊंचा स्तर है। इसके अलावा 291 गीगावाट क्षमता की परियोजनाएं विकास के विभिन्न चरणों में हैं; उन्हें अनुमति मिल चुकी है या निर्माण चल रहा है। इससे इन परिसंपत्तियों के बेकार हो जाने का जोखिम पैदा होता है और अगर संयंत्र अपनी पूरी नियोजित अवधि तक चलते हैं तो स्वच्छ ऊर्जा बदलाव धीमा पड़ सकता है। चाइना कोल एसोसिएशन को उम्मीद है कि इस्पात और निर्माण सामग्री में कोयले का इस्तेमाल घटेगा, लेकिन उसके अनुसार बिजली क्षेत्र और रसायन उद्योग में कोयले की खपत कम-से-कम 2027 तक बढ़ती रहेगी।

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नीतिगत दोराहा: 15वीं पंचवर्षीय योजना

अगले पांच वर्षों में चीन के उत्सर्जन का रुख काफी हद तक 15वीं पंचवर्षीय योजना तय करेगी, जिसे मार्च 2026 में जारी किया जाना है। यह दस्तावेज 2030 तक ऊर्जा तीव्रता, नवीकरणीय क्षमता और औद्योगिक पुनर्गठन के बाध्यकारी लक्ष्य तय करेगा। जलवायु विश्लेषकों का कहना है कि चीन 2030 के लिए पेरिस समझौते की कई प्रतिबद्धताएं पहले ही तय समय से पहले पूरी कर चुका है। इनमें 1,200 गीगावाट पवन और सौर क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य भी शामिल है, जिसे 2024 में ही पार कर लिया गया था, जब दोनों स्रोतों की संयुक्त क्षमता 1,400 गीगावाट तक पहुंच गई।

हालांकि, देश कार्बन तीव्रता के लक्ष्यों से पीछे है। 14वीं पंचवर्षीय योजना में 2020 से 2025 के बीच GDP की प्रति इकाई CO2 उत्सर्जन में 18% कमी का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन वास्तविक कमी केवल 12% रही। 2005 के स्तर से 2030 तक 65% कमी का लक्ष्य पूरा करने के लिए अब अगले पांच वर्षों में कार्बन तीव्रता को करीब 23% घटाना होगा। इसके लिए कार्बन-मुक्ति के प्रयासों में तेज बढ़ोतरी जरूरी होगी। सरकार की 2025 की कार्ययोजना में कार्बन तीव्रता का लक्ष्य नहीं रखा गया था, जिससे संकेत मिलता है कि फिलहाल इस लक्ष्य को प्राथमिकता नहीं माना जा रहा।

नवंबर 2025 में चीन ने 2035 के लिए अपना राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान पेश किया। इसमें अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों से होने वाले शुद्ध ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को चरम स्तर से 7 से 10% तक घटाने की प्रतिबद्धता जताई गई। विश्लेषकों ने इस लक्ष्य को सीमित महत्वाकांक्षा वाला बताया है। उनके अनुसार, आशावादी परिदृश्यों में मौजूदा नीतियां ही 10 से 16% तक की कमी ला सकती हैं। फिर भी, यह पहली बार है जब बीजिंग ने तीव्रता-आधारित लक्ष्यों के बजाय उत्सर्जन में पूर्ण कमी का लक्ष्य अपनाया है। दस्तावेज में 2035 तक गैर-जीवाश्म ईंधन की हिस्सेदारी 30% से अधिक और पवन तथा सौर क्षमता 3,600 गीगावाट तक पहुंचाने के लक्ष्य भी बढ़ाए गए हैं।

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इन लक्ष्यों के साथ, चीनी अधिकारियों ने हाल में प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में शून्य-कार्बन कारखाने विकसित करने की पहल शुरू की है। 2027 तक ऑटोमोबाइल, लिथियम बैटरियों, फोटोवोल्टाइक और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्रों में पायलट कार्यक्रम चलेंगे। 2030 तक इनका विस्तार इस्पात, पेट्रोकेमिकल और कपड़ा उद्योगों तक किया जाएगा। इस नीतिगत ढांचे में औद्योगिक कार्बन-मुक्ति को बढ़ावा देने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा के माइक्रोग्रिड, कार्बन लेखांकन प्रणालियों और बुद्धिमान प्रबंधन प्रौद्योगिकियों पर जोर है। 2025 के अंत तक चीन में 6,430 राष्ट्रीय स्तर के हरित कारखाने विकसित किए जा चुके थे। विनिर्माण उद्योग के कुल उत्पादन मूल्य में इनका हिस्सा 20% तक पहुंच गया।

वैश्विक नतीजे और भू-राजनीतिक अंतर

चीन के उत्सर्जन में ठहराव का समय अंतरराष्ट्रीय जलवायु प्रयासों के लिए गहरे मायने रखता है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार, 2024 में ऊर्जा से जुड़े वैश्विक CO2 उत्सर्जन रिकॉर्ड 37.8 गीगाटन तक पहुंच गए। ऐसे में चीन के उत्सर्जन का संभावित रूप से समय से पहले चरम पर पहुंचना उम्मीद जगाता है कि इस दशक में दुनिया भर का उत्सर्जन घटने लग सकता है। जलवायु वैज्ञानिकों का कहना है कि अब दस में से सात विशेषज्ञों को उम्मीद है कि चीन का उत्सर्जन 2030 तक चरम पर पहुंच जाएगा। CREA और इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर एनर्जी ट्रांजिशन स्टडीज के हालिया सर्वेक्षणों में 2028 को इसकी सबसे संभावित तारीख माना गया है।

फिर भी, काफी अनिश्चितताएं बनी हुई हैं। अगर आर्थिक प्रोत्साहन उपाय स्वच्छ प्रौद्योगिकी के बजाय अधिक कार्बन उत्सर्जित करने वाले निर्माण को प्राथमिकता दें, या रसायन उद्योग का विस्तार बिना रुकावट जारी रहे, तो उत्सर्जन फिर बढ़ सकता है। जलवायु की भौतिक परिस्थितियां भी जोखिम पैदा करती हैं। 2024 में भीषण गर्मी की लहरों के दौरान चीन को ठंडक की बढ़ी हुई मांग पूरी करने के लिए कोयला बिजली उत्पादन बढ़ाना पड़ा, जिससे करीब 100 मेगाटन अतिरिक्त CO2 उत्सर्जन हुआ। CREA के प्रमुख विश्लेषक लॉरी मिल्लीविर्ता ने मौजूदा ठहराव की अनिश्चित प्रकृति पर जोर दिया।

उत्सर्जन में 1% या उससे कम की वृद्धि या कमी का वस्तुनिष्ठ रूप से बहुत बड़ा असर शायद न हो, लेकिन इसका प्रतीकात्मक महत्व बढ़ गया है। चीन के नीति-निर्माताओं ने कई और वर्षों तक उत्सर्जन बढ़ने की गुंजाइश छोड़ी है, इसलिए उत्सर्जन के चरम पर पहुंचने का समय अभी खुला हुआ है।

अमेरिका की जलवायु नीति के साथ अंतर और स्पष्ट हो गया है। चीन स्वच्छ ऊर्जा की ओर अपना बदलाव आगे बढ़ा रहा है, वहीं ट्रंप प्रशासन 2009 के उस खतरे संबंधी निष्कर्ष को रद्द करने की दिशा में बढ़ा है, जो ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को नियंत्रित करने का कानूनी आधार देता है। प्रशासन ने रक्षा विभाग को कोयले से बनी बिजली की खरीद बढ़ाने का आदेश भी दिया है। यह अंतर वैश्विक जलवायु नेतृत्व के बदलते परिदृश्य को दिखाता है: चीन अब सबसे बड़ा उत्सर्जक होने के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा बदलाव की प्रौद्योगिकियों में सबसे बड़ा निवेशक भी है।

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मुख्य बातें

  • चीन का CO2 उत्सर्जन 21 महीनों से स्थिर है या घट रहा है। आर्थिक संकट के कारण न होने वाली यह अब तक की सबसे लंबी ऐसी अवधि है। 2025 के पूरे वर्ष में उत्सर्जन 0.3% घटने की संभावना है।
  • सौर बिजली उत्पादन में 43% और पवन ऊर्जा में 14% वृद्धि समेत स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार ने 2025 में बिजली की मांग में हुई पूरी नई वृद्धि को पूरा किया। ऊर्जा भंडारण क्षमता में बढ़ोतरी अधिकतम मांग की वृद्धि से आगे रही।
  • रसायन उद्योग उत्सर्जन वृद्धि का मुख्य स्रोत बनकर उभरा। इसका उत्सर्जन 12% बढ़ा, जबकि परिवहन, बिजली और निर्माण सामग्री क्षेत्रों में कमी आई।
  • उत्सर्जन में ठहराव के बावजूद चीन ने 2025 में कोयले से चलने वाली 78 गीगावाट नई बिजली क्षमता शुरू की। 291 गीगावाट क्षमता की परियोजनाएं विकास के विभिन्न चरणों में हैं।
  • मार्च 2026 में आने वाली 15वीं पंचवर्षीय योजना तय करेगी कि उत्सर्जन का चरम स्थायी रूप से आ चुका है या 2030 की आधिकारिक लक्ष्य-तिथि से पहले फिर बढ़ेगा।
  • चीन ने 2035 तक शुद्ध ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को चरम स्तर से 7 से 10% तक घटाने की प्रतिबद्धता जताई है। यह उसकी राष्ट्रीय जलवायु रणनीति में उत्सर्जन घटाने का पहला पूर्ण लक्ष्य है।
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