एक वफादार सहयोगी का अकल्पनीय पतन
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सांस्कृतिक क्रांति के बाद सेना के नेतृत्व में सबसे व्यापक शुद्धि अभियान चलाया है और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के शीर्ष से अपने सबसे करीबी विश्वासपात्र को हटा दिया है। आंतरिक उथल-पुथल की दुर्लभ सार्वजनिक स्वीकारोक्ति में शी ने फरवरी में सशस्त्र बलों से कहा कि बीता साल "असामान्य और असाधारण" रहा। उन्होंने सेना की सराहना करते हुए कहा कि वह "भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में क्रांतिकारी तपस्या" से गुजरी है। 2022 के बाद यह पहला मौका था जब चीन के नेता ने सैनिकों को दिए अपने वार्षिक चीनी नववर्ष संबोधन में भ्रष्टाचार-विरोधी प्रयासों का स्पष्ट उल्लेख किया।
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केंद्रीय सैन्य आयोग के उपाध्यक्ष और शी के सबसे भरोसेमंद सैन्य सहयोगी माने जाने वाले जनरल झांग यौशिया को हटाए जाने से बीजिंग की सत्ता-संरचना में हलचल मच गई है। 75 वर्ष की उम्र में झांग को अनिवार्य सेवानिवृत्ति की आयु पार करने के बाद भी पद पर बनाए रखा गया था। यह विशेषाधिकार शी के करीबी दायरे में उनकी अनूठी हैसियत का संकेत था। लेकिन 24 जनवरी को रक्षा मंत्रालय ने घोषणा की कि झांग और संयुक्त स्टाफ विभाग के प्रमुख जनरल लियू झेनली, दोनों के खिलाफ "अनुशासन और कानून के गंभीर उल्लंघनों" की जांच चल रही है। चीन में यह भ्रष्टाचार और राजनीतिक अपराधों के लिए इस्तेमाल होने वाला प्रचलित परोक्ष शब्द है।
क्रांतिकारी विरासत को देखते हुए झांग का पतन खास तौर पर चौंकाने वाला है। "प्रिंसलिंग" यानी कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ क्रांतिकारी नेताओं की संतान होने के नाते, झांग संस्थापक जनवादी गणराज्य के नायक जनरल झांग ज़ोंगशुन के बेटे हैं। उनके पिता ने कम्युनिस्ट क्रांति के अभियानों में शी के पिता के साथ लड़ाई लड़ी थी। इस तरह झांग यौशिया पार्टी की सैन्य विरासत से एक अटूट कड़ी थे। बताया जाता है कि झांग और शी के बचपन के संबंध बीजिंग के संभ्रांत क्रांतिकारी हलकों से जुड़े थे। दोनों का संबंध उत्तर-पश्चिमी चीन के शान्शी प्रांत से है। पीएलए के अधिकांश आधुनिक कमांडरों के विपरीत, जिन्होंने कभी युद्ध नहीं देखा, झांग ने 1979 के खूनी चीन-वियतनाम युद्ध और 1984 में हुई सीमा झड़पों में विशिष्ट योगदान दिया था। इससे उन्हें सामरिक दक्षता और युद्धक्षेत्र में साहस की प्रतिष्ठा मिली।
नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर में चीन मामलों के विशेषज्ञ प्रोफेसर चोंग जा इयान ने कहा कि आधिकारिक बयान शुद्धि अभियान की वास्तविक प्रकृति से जुड़े अहम सवालों के जवाब नहीं देते।
शुद्धि अभियान के बारे में आधिकारिक भाषा से यह स्पष्ट नहीं होता कि अंदरूनी तौर पर वास्तव में क्या हो रहा है। क्या यह सचमुच भ्रष्टाचार है, राजनीतिक संघर्ष हैं, खुला शुद्धि अभियान है या कुछ और। इन अभियानों का प्रचार संभवतः किसी और से अधिक घरेलू दर्शकों और सीसीपी के भीतर के लोगों को संकेत देने के लिए है।
खोखला हो चुका सैन्य नेतृत्व
इस शुद्धि अभियान ने चीन के 20 लाख सैनिकों वाले सशस्त्र बलों की कमान संभालने वाली सर्वोच्च संस्था केंद्रीय सैन्य आयोग को लगभग पंगु बना दिया है। 2022 में जब शी ने अपना तीसरा कार्यकाल शुरू किया था, तब आयोग में सात सदस्य थे। आज सिर्फ दो सदस्य बचे हैं: अध्यक्ष के रूप में स्वयं शी और आयोग के अनुशासन निरीक्षण प्रमुख जनरल झांग शेंगमिन। दोनों उपाध्यक्षों और रक्षा मंत्री समेत बाकी पांच पद अब खाली हैं या उन पर जांच के दायरे में आए अधिकारी हैं।
माओ के बाद के दौर में इस स्तर की छंटनी अभूतपूर्व है। भ्रष्टाचार-विरोधी पिछले अभियानों के दौरान भी केंद्रीय सैन्य आयोग ने सामूहिक नेतृत्व का दिखावा बनाए रखा था। अब यह विचार-विमर्श करने वाली परिषद से बदलकर ऐसी संस्था बन गई है जिसे विश्लेषक शी की निजी इच्छा का विस्तार बताते हैं। आयोग के एकमात्र अन्य सदस्य झांग शेंगमिन अपनी मौजूदा हैसियत के लिए सीधे तौर पर इन शुद्धि अभियानों के ऋणी हैं। अक्टूबर 2025 में जनरल हे वेइदोंग को हटाए जाने के बाद उन्हें उपाध्यक्ष पद पर पदोन्नत किया गया था।
इसका समय इससे अधिक अहम नहीं हो सकता था। बताया जाता है कि शी ने पीएलए को 2035 तक पूर्ण आधुनिकीकरण हासिल करने और 2027 तक ताइवान पर हमला करने में सक्षम होने का आदेश दिया है। यह समयसीमा पीएलए की शताब्दी के साथ मेल खाती है। लेकिन पूरे शीर्ष सैन्य नेतृत्व को हटाए जाने से इन लक्ष्यों पर सवाल खड़े हो गए हैं। झांग के साथ हटाए गए जनरल लियू झेनली सैन्य अभ्यासों और संयुक्त प्रशिक्षण के प्रमुख संचालन समन्वयक थे। उनके हटने से चीनी और पश्चिमी सेनाओं के बीच जोखिम प्रबंधन के लिए सबसे अनुभवी संपर्क अधिकारी चला गया है। इससे तनावपूर्ण क्षेत्रीय टकराव वाले बिंदुओं पर गलत आकलन का खतरा बढ़ सकता है।
परमाणु रहस्य और विश्वासघात के आरोप
चीन के आधिकारिक बयानों में भ्रष्टाचार और राजनीतिक बेवफाई पर जोर दिया गया है, जबकि पश्चिमी मीडिया की खबरें कहीं अधिक विस्फोटक आरोपों की ओर इशारा करती हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अंदरूनी बैठकों की जानकारी रखने वाले लोगों का हवाला देते हुए खबर दी कि झांग पर चीन के परमाणु हथियार कार्यक्रम की गोपनीय जानकारी अमेरिका को लीक करने का आरोप था। इन विवरणों के मुताबिक, झांग ने 2024 में बीजिंग में पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन से कथित तौर पर मुलाकात की थी और चीन के परमाणु आधुनिकीकरण प्रयासों की संवेदनशील जानकारी साझा की थी।
सरकार समर्थित लिबरेशन आर्मी डेली में उद्धृत चीनी सैन्य सूत्रों ने अलग पहलू पर जोर दिया। उन्होंने झांग और लियू पर "केंद्रीय सैन्य आयोग की अध्यक्ष-जिम्मेदारी प्रणाली को गंभीर रूप से रौंदने और कमजोर करने" का आरोप लगाया। इस भाषा से संकेत मिलता है कि उनके अपराध मुख्य रूप से राजनीतिक थे, खासकर सैन्य फैसलों पर शी के पूर्ण अधिकार को चुनौती देना। अखबार के संपादकीय में दावा किया गया कि दोनों ने राजनीतिक और भ्रष्टाचार-संबंधी समस्याओं को गंभीर रूप से बढ़ावा दिया, जिससे सेना पर पार्टी का पूर्ण नेतृत्व कमजोर हुआ और चीन की युद्ध-तैयारी को "भारी नुकसान" पहुंचा।
यह फर्क अहम है। अगर झांग को केवल भ्रष्टाचार के कारण हटाया गया, तो उनका शुद्धि अभियान चीन की राजनीति के एक जाने-पहचाने ढर्रे में फिट बैठता है। लेकिन "विश्वासघात" और "अधिकार को कमजोर करने" की भाषा शी की रणनीतिक प्राथमिकताओं की खुली अवज्ञा का संकेत देती है। जेम्सटाउन फाउंडेशन के विश्लेषण के अनुसार, झांग और लियू ने सेना को ताइवान पर हमले के लिए तैयार करने की शी की आक्रामक समयसीमा का विरोध किया हो सकता है। वे 2027 की समयसीमा के बजाय 2035 पर केंद्रित अधिक व्यवस्थित तरीके के पक्ष में थे। सैन्य आधुनिकीकरण की प्राथमिकताओं पर यह मतभेद 2025 के विधायी सत्रों के दौरान खुली असहमति में बदलता दिखा। बताया जाता है कि झांग ने "केंद्रीय सैन्य आयोग के अध्यक्ष की जिम्मेदारी प्रणाली" का समर्थन करने से परहेज किया था। यह शी के प्रति वफादारी जताने वाला अनिवार्य वाक्यांश है।
ताइवान के लिए रणनीतिक नतीजे
यह शुद्धि अभियान ताइवान को लेकर शी की महत्वाकांक्षाओं के सामने एक विरोधाभास पेश करता है। सैन्य तैयारी के बारे में सावधानी बरतने या यथार्थवादी आकलन देने वाले अधिकारियों को हटाकर शी ने पीएलए पर अपना पूर्ण नियंत्रण मजबूत किया है। लेकिन साथ ही उन्होंने संभावित आक्रमण को अंजाम देने के लिए जिम्मेदार कमान-संरचना का सिर काट दिया है। स्वशासित द्वीप को लेकर तनाव बढ़ने के ठीक इस समय सेना संचालन के लिहाज से लगभग ठहराव की स्थिति में है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस उथल-पुथल से ताइवान के खिलाफ निकट भविष्य की कोई भी सैन्य कार्रवाई टल सकती है। सुरक्षा विश्लेषकों के मुताबिक, अनुभवी जनरलों की कमी और लगातार चल रही जांचों के कारण पीएलए के लिए संचालन प्रशिक्षण पर ध्यान देना मुश्किल होगा। ताइवान पर किसी भी हमले का नेतृत्व करने वाली पूर्वी थिएटर कमान और राष्ट्रीय स्तर के संसाधनों का समन्वय करने वाले संयुक्त स्टाफ विभाग, दोनों ने अपने अनुभवी नेतृत्व को खो दिया है। नए अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां समझने और कमान-संबंध स्थापित करने में समय लगेगा।
हालांकि, सत्ता के केंद्रीकरण से शी की आक्रामक प्रवृत्तियों पर लगी आखिरी अंदरूनी रोक भी हट सकती है। लंदन के एसओएएस विश्वविद्यालय में चाइना इंस्टीट्यूट के निदेशक स्टीव त्सांग ने चेतावनी दी कि झांग के हटने के बाद ऐसा कोई जनरल नहीं बचेगा जो समय आने पर शी को सैन्य दुस्साहस के खिलाफ सलाह देने की हिम्मत करे। इससे खतरनाक स्थिति बनती है, जिसमें शी को जोखिम भरे अभियानों के लिए केवल सहमति मिल सकती है और रणनीतिक गलत आकलन की आशंका बढ़ सकती है।
सीआईए की नजर असंतुष्ट अधिकारियों पर
इस उथल-पुथल ने अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का ध्यान खींचा है। झांग को हटाए जाने के कुछ ही सप्ताह बाद केंद्रीय खुफिया एजेंसी ने "भविष्य बचाएं" शीर्षक से चीनी भाषा में भर्ती वीडियो जारी किया, जिसमें स्पष्ट रूप से असंतुष्ट पीएलए अधिकारियों को निशाना बनाया गया। वीडियो में एक काल्पनिक अधिकारी अफसोस जताते हुए कहता है कि "हमारे पार्टी नेताओं को सिर्फ अपनी जेब की रक्षा करने में दिलचस्पी है।"
सीआईए ने इस वीडियो को हालिया शुद्धि अभियानों से औपचारिक रूप से नहीं जोड़ा है, लेकिन इसके जारी होने का समय चीन के सैन्य प्रतिष्ठान के भीतर बढ़ती दरारों का फायदा उठाने की कोशिश का संकेत देता है। सीआईए निदेशक जॉन रैटक्लिफ ने कहा कि एजेंसी "चीनी सरकारी अधिकारियों और नागरिकों को एक उज्जवल भविष्य के लिए मिलकर काम करने का अवसर देती रहेगी।" भर्ती अभियान से यह विश्वास झलकता है कि शी की तेज होती कार्रवाई ने पीएलए के भीतर असंतुष्ट अधिकारियों से खुफिया जानकारी जुटाने के अवसर पैदा किए हैं।
निरंकुश सत्ता का अकेलापन
अपने ही समर्थन नेटवर्क को नष्ट करने की शी की तत्परता बताती है कि नियंत्रण को लेकर उनका जुनून कितना गहरा है। झांग यौशिया महज अधीनस्थ नहीं, बल्कि दशकों पुराने पारिवारिक संबंधों के साथ उनके "मुंहबोले भाई" थे। उनके पिता ने क्रांतिकारी युद्धों में साथ लड़ाई की थी और दोनों ने कम्युनिस्ट पार्टी के बुजुर्ग नेताओं द्वारा तय किए गए प्रतिबंधित "प्रिंसलिंग" करियर मार्ग पर आगे बढ़ने की कोशिश की थी। झांग को हटाकर शी ने दिखा दिया है कि कोई भी रिश्ता, चाहे कितना ही पुराना या आत्मीय हो, उनकी पूर्ण आज्ञाकारिता की मांग से ऊपर नहीं है।
यह विनाशकारी सिलसिला झांग तक सीमित नहीं है। 2023 से अब तक अधिकारियों ने 20 से अधिक वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को निष्कासित किया है या उनके खिलाफ जांच शुरू की है। इनमें दो रक्षा मंत्री और पीएलए रॉकेट फोर्स का पूरा नेतृत्व शामिल है, जो चीन के परमाणु शस्त्रागार को नियंत्रित करती है। अंदरूनी संघर्ष के इस स्तर की एकमात्र मिसाल सांस्कृतिक क्रांति है, जब अध्यक्ष माओ ज़ेदोंग ने संभावित प्रतिद्वंद्वियों को खत्म करने के लिए व्यवस्थित रूप से सेना के शीर्ष नेतृत्व को तोड़ दिया था।
फिर भी, सत्ता का यह संकेंद्रण जोखिम लेकर आता है। न तो शी और न ही केंद्रीय सैन्य आयोग के बचे हुए सदस्य झांग शेंगमिन के पास सैन्य कमान का उल्लेखनीय अनुभव है। शी ने कभी सशस्त्र बलों में सेवा नहीं की, जबकि झांग शेंगमिन का करियर युद्ध संचालन के बजाय अनुशासन पर केंद्रित राजनीतिक कमिसार की भूमिकाओं में बीता है। सैन्य योग्यता के बजाय भ्रष्टाचार-विरोधी तंत्र के जरिए आगे बढ़े वफादारों से खुद को घेरकर शी ने ऐसा शीर्ष नेतृत्व बना दिया हो सकता है जो ईमानदार आकलन देने या जटिल संयुक्त अभियानों का प्रबंधन करने में असमर्थ हो।
मुख्य बातें
- शी जिनपिंग ने 2022 में केंद्रीय सैन्य आयोग के लिए नियुक्त किए गए छह जनरलों में से पांच को हटा दिया है। सात सदस्यीय आयोग में अब केवल दो सदस्य बचे हैं: स्वयं शी और भ्रष्टाचार-विरोधी प्रमुख झांग शेंगमिन।
- शी के सबसे करीबी सैन्य सहयोगी और 1979 के चीन-वियतनाम युद्ध के अनुभवी जनरल झांग यौशिया को जनवरी 2026 में स्टाफ प्रमुख जनरल लियू झेनली के साथ हटाया गया।
- आरोपों में भ्रष्टाचार, शी के अधिकार को कमजोर करना और कथित तौर पर अमेरिका को परमाणु रहस्य लीक करना शामिल है। हालांकि, चीन के आधिकारिक बयानों में राजनीतिक अपराधों और केंद्रीय सैन्य आयोग की अध्यक्ष-जिम्मेदारी प्रणाली को "रौंदने" पर जोर दिया गया है।
- इस शुद्धि अभियान ने एक अहम समय पर पीएलए के शीर्ष नेतृत्व को खोखला कर दिया है। इससे ताइवान पर हमला करने की क्षमता हासिल करने की शी की 2027 की समयसीमा में देरी हो सकती है। वहीं, सावधानी बरतने की सलाह देने वाले जनरलों को हटाने से गलत आकलन का जोखिम बढ़ सकता है।
- सीआईए ने असंतुष्ट चीनी सैन्य अधिकारियों को निशाना बनाते हुए भर्ती अभियान शुरू किया है और पीएलए के भीतर खुफिया स्रोत तलाशने के लिए चीनी भाषा के वीडियो जारी किए हैं।
- अनुभवी युद्ध कमांडरों को हटाए जाने के बाद चीन के सैन्य नेतृत्व में अब वास्तविक युद्धक्षेत्र का अनुभव रखने वाले अधिकारी नहीं बचे हैं। इससे भविष्य के किसी भी संघर्ष में संचालन क्षमता पर सवाल उठते हैं।






