बड़े दांव ने जापानी राजनीति की तस्वीर बदली
जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री बनने के महज 110 दिन बाद जब साने ताकाइची ने मध्यावधि चुनाव का आह्वान किया, तो राजनीतिक विश्लेषकों ने इतनी जल्दी अपनी नवोदित नेतृत्व क्षमता को दांव पर लगाने के फैसले पर सवाल उठाए। हालांकि, यह दांव आधुनिक जापानी इतिहास की सबसे नाटकीय राजनीतिक जीतों में से एक साबित हुआ। रविवार को ताकाइची की लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी ने संसद के निचले सदन में ऐतिहासिक दो-तिहाई बहुमत हासिल किया। भारी जीत में 465 में से 316 सीटें जीतकर पार्टी ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद किसी एक पार्टी का सबसे मजबूत बहुमत और एलडीपी के सात दशक के इतिहास में सबसे बड़ी जीत दर्ज की।
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इन नतीजों ने पूर्व प्रधानमंत्री यासुहिरो नाकासोने के कार्यकाल में 1986 में बनी 300 सीटों की पिछली मिसाल तोड़ दी। इससे ताकाइची को जापान की अर्थव्यवस्था, रक्षा नीति और सामाजिक नीतियों को नए सिरे से आकार देने की अभूतपूर्व विधायी शक्ति मिली है। गठबंधन सहयोगी जापान इनोवेशन पार्टी की जीती 36 सीटों को मिलाकर सत्तारूढ़ गठबंधन के पास अब 352 सांसद हैं। इससे वह ऊपरी सदन के फैसलों को पलट सकता है, निचले सदन की सभी समितियों की अध्यक्षता कर सकता है और संभावित रूप से संविधान संशोधन की पहल कर सकता है। अनुभवी विश्लेषकों को भी जीत का यह पैमाना चौंका गया। उन्हें सीटें बढ़ने की उम्मीद थी, लेकिन संसदीय परिदृश्य के पूरी तरह बदल जाने की नहीं।
जीत के बाद सरकारी प्रसारक एनएचके से ताकाइची ने कहा:
मैं चाहती थी कि मतदाता मुझे जनादेश दें, क्योंकि मैंने जिम्मेदार और सक्रिय राजकोषीय नीति की वकालत की है, जिससे आर्थिक और राजकोषीय नीति में बड़ा बदलाव आएगा।
64 वर्षीय नेता ने वादा किया था कि अगर उनका गठबंधन साधारण बहुमत हासिल करने में नाकाम रहा तो वह इस्तीफा दे देंगी। इसलिए रविवार का नतीजा महज राजनीतिक जीत नहीं, बल्कि उनकी व्यक्तिगत पुष्टि भी है, जो 2028 में अगले अनिवार्य चुनाव तक उनके अधिकार को मजबूत करती है। मतदान 55.6 प्रतिशत रहा, जो पिछले चुनाव के 53.8 प्रतिशत से अधिक है। देश के बड़े हिस्से में भारी बर्फबारी से यातायात बाधित होने के बावजूद 2.7 करोड़ से अधिक लोगों ने अग्रिम मतदान किया।
स्थिर नेतृत्व की उम्मीद में बाजारों के स्वागत के बाद सोमवार को जापानी शेयरों में तेज उछाल आया। शुरुआती कारोबार में प्रमुख निक्केई 225 सूचकांक 5 प्रतिशत चढ़ गया। कारोबार जगत ने भी नतीजों का तेजी से स्वागत किया। जापान बिजनेस फेडरेशन के प्रमुख योशिनोबु त्सुत्सुई ने टिकाऊ विकास के लिए अहम मोड़ पर राजनीतिक स्थिरता लौटने का स्वागत किया। हालांकि, निवेशक खाद्य पदार्थों पर उपभोग कर स्थगित करने के ताकाइची के वादे को लेकर सतर्क हैं। इससे सालाना राजस्व में करीब 5 लाख करोड़ येन की कमी आएगी, जबकि जीडीपी के अनुपात में जापान पर दुनिया का सबसे बड़ा कर्ज पहले से ही है।
रूढ़ियों से परे: जापान की नई, असामान्य नेता
ताकाइची का उदय जापान के पारंपरिक रूप से शांत राजनीतिक परिदृश्य से बड़ा बदलाव है। दशकों से इस पर स्थापित राजनीतिक परिवारों के बुजुर्ग पुरुषों का दबदबा रहा है। कई पूर्ववर्तियों के परिवारों ने राजनीतिक साम्राज्य खड़े किए, जबकि ताकाइची मध्यमवर्गीय पृष्ठभूमि से आती हैं: उनके पिता एक कार कंपनी में काम करते थे और मां पुलिस अधिकारी थीं। देश की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में उनकी निजी छवि भी अलग है। वह मोटरसाइकिल चलाती हैं, ड्रम बजाती हैं और भारी धातु संगीत पसंद करती हैं, जबकि पूर्व नेता गोल्फ और पारंपरिक शौक पसंद करते थे।
इस असामान्य छवि ने आम तौर पर राजनीति से दूर रहने वाले युवा मतदाताओं को आकर्षित करने में मदद की है। जापान में युवाओं की राजनीतिक भागीदारी ऐतिहासिक रूप से कम रही है। सर्वेक्षणों के मुताबिक, 18 से 19 वर्ष के मतदाताओं में उन्हें 90 प्रतिशत से अधिक समर्थन हासिल है। जापानी मीडिया ने इस लहर को "साना-मेनिया" नाम दिया है और ताकाइची राजनीतिक नेता के साथ-साथ सांस्कृतिक हस्ती भी बन गई हैं। प्रशंसक प्यार से उन्हें "साना-चान" कहते हैं। यह प्रत्यय आम तौर पर करीबी दोस्तों के लिए इस्तेमाल होता है। वे उनके बैग से लेकर पेन तक, हर चीज की नकल करने को उत्सुक रहते हैं। उनके गृहनगर नारा में स्मृति चिह्नों की दुकानें उनके नारों वाले तौलिये, की-चेन, स्टेशनरी और यहां तक कि उनकी तथा उनकी राजनीतिक आदर्श, ब्रिटेन की पूर्व प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर की तस्वीर वाले बिस्कुट बेचती हैं।
सोशल मीडिया की उनकी रणनीति भी पारंपरिक माध्यमों से बाहर के मतदाताओं तक पहुंचने में कारगर साबित हुई है। ताकाइची छोटे, नारे जैसे संदेश देती हैं और वायरल वीडियो साझा करती हैं। इनमें एक वीडियो भी है, जिसमें वह दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग के साथ कोरियाई पॉप संगीत पर थिरकती दिखती हैं। यह तरीका जापानी नेताओं की औपचारिक और अक्सर आम लोगों की पहुंच से दूर रहने वाली संवाद शैली से बिल्कुल अलग है। पिछले सप्ताह टोक्यो में एक रैली के दौरान हजारों समर्थक जमा देने वाली ठंड में डटे रहे। जापानी नेता के लिए जनता का ऐसा उत्साह सालों से नहीं देखा गया। निगाता प्रांत के 54 वर्षीय मतदाता काजुशिगे चो ने कहा, "लगता है कि वह दिशा का एहसास पैदा कर रही हैं, जैसे पूरा देश साथ मिलकर आगे बढ़ रहा हो।" चुनाव के दिन इस प्रांत में बर्फ की गहराई दो मीटर से अधिक थी।
आर्थिक और संवैधानिक बदलाव का रूढ़िवादी एजेंडा
ताकाइची की शानदार जीत उनकी निजी लोकप्रियता ही नहीं, बल्कि जापानी राजनीति में दक्षिणपंथ की ओर बड़े झुकाव को भी दर्शाती है। हाल के वर्षों में एलडीपी के पुराने समर्थकों ने पार्टी छोड़कर नए दक्षिणपंथी विकल्पों का साथ दिया है। उनके एजेंडे में सामाजिक रूप से रूढ़िवादी रुख शामिल हैं, जो उन्हें जापान के पिछले नेताओं और पश्चिमी रूढ़िवादियों, दोनों से अलग करता है। वह समलैंगिक विवाह का विरोध करती हैं, स्कूलों में देशभक्ति की शिक्षा का समर्थन करती हैं और विवाहित जोड़ों के लिए जापान की एकल उपनाम व्यवस्था बनाए रखना चाहती हैं। 19वीं सदी के इस कानूनी प्रावधान के चलते अधिकतर महिलाओं को अपना मायके का उपनाम छोड़ना पड़ता है। उनका तर्क है कि अलग-अलग उपनामों की अनुमति देने से "परिवार की इकाइयों पर आधारित सामाजिक ढांचा नष्ट हो सकता है।"
जापान के दीर्घकालीन भविष्य के लिहाज से शायद सबसे अहम बात यह है कि ताकाइची ने युद्धोत्तर शांतिवादी संविधान, खासकर अनुच्छेद 9 में संशोधन का इरादा साफ कर दिया है। यह अनुच्छेद युद्ध को संप्रभु अधिकार के रूप में त्यागता है और तकनीकी रूप से जापान को थल, नौ और वायु सेना रखने से रोकता है। 2 फरवरी को समर्थकों को संबोधित करते हुए उन्होंने पूछा:
हम आत्मरक्षा बलों को संविधान में क्यों नहीं लिख सकते? मैं चाहती हूं कि आप हमें संविधान में संशोधन करने दें, ताकि उन्हें एक प्रभावी संगठन के रूप में स्थापित किया जा सके।
एलडीपी के पास अब निचले सदन में दो-तिहाई बहुमत है, लेकिन संविधान संशोधन के लिए ऊपरी सदन में भी इसी तरह के समर्थन और उसके बाद राष्ट्रीय जनमत संग्रह की जरूरत होगी। इसलिए रविवार के नतीजों के बावजूद यह मुश्किल लक्ष्य है और इसकी सफलता निश्चित नहीं है।
अर्थव्यवस्था के मामले में ताकाइची सरकार के आक्रामक हस्तक्षेप की हिमायती हैं और अब तक रिकॉर्ड खर्च वाला बजट पारित कर चुकी हैं। उनके चुनाव प्रचार का मुख्य आधार 21 लाख करोड़ येन का प्रोत्साहन पैकेज और महंगाई से जूझ रहे परिवारों की मदद के लिए दो साल तक खाद्य पदार्थों पर 8 प्रतिशत उपभोग कर स्थगित करने का वादा था। उन्होंने बच्चों की देखभाल के खर्च पर आंशिक कर कटौती और कार्यालय में बच्चों की देखभाल की सुविधा देने वाली कंपनियों के लिए प्रोत्साहन का भी वादा किया है। इससे लैंगिक मुद्दों पर उनके पारंपरिक रुख के बावजूद परिवारों के अनुकूल नीतियों की ओर संभावित बदलाव के संकेत मिलते हैं। चुनाव के बाद पत्रकारों से उन्होंने कहा, "हम राजकोषीय नीति की स्थिरता को प्राथमिकता देंगे। जरूरी निवेश सुनिश्चित करेंगे। सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों को निवेश करना होगा। हम एक मजबूत और लचीली अर्थव्यवस्था बनाएंगे।"
विदेश नीति: चीन का सामना और अमेरिका से करीबी
ताकाइची की जीत जापान की भावी विदेश नीति, खासकर देश के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार और क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी चीन के साथ उसके रिश्तों के बारे में स्पष्ट संकेत देती है। पद संभालने के कुछ समय बाद ही उन्होंने ताइवान के मामले में रणनीतिक अस्पष्टता की जापान की पुरानी परंपरा तोड़ी। नवंबर में उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक द्वीप पर चीन का हमला, जो जापानी क्षेत्र से महज 60 मील दूर है, "अस्तित्व के लिए खतरा पैदा करने वाली स्थिति" हो सकता है। ऐसी स्थिति में सामूहिक आत्मरक्षा के सिद्धांतों के तहत टोक्यो सैन्य जवाब दे सकता है। इस बयान से दोनों देशों के बीच एक दशक से अधिक समय का सबसे गंभीर कूटनीतिक विवाद छिड़ गया।
चीन ने कड़ी नाराजगी जताई और आर्थिक दबाव के कदम उठाए। उसने उड़ानें रद्द कीं, जापानी समुद्री खाद्य उत्पादों के आयात पर पाबंदी लगाई, महत्वपूर्ण खनिजों और दोहरे उपयोग वाली प्रौद्योगिकियों तक पहुंच सीमित की और अनिर्दिष्ट "सुरक्षा चिंताओं" का हवाला देकर पर्यटकों को जापान जाने से बचने की चेतावनी दी। बीजिंग ने ताकाइची से बयान वापस लेने की मांग की। विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने सोमवार को चेतावनी दी, "अगर जापान की अति-दक्षिणपंथी ताकतें स्थिति का गलत आकलन कर लापरवाही से कदम उठाती हैं, तो उन्हें जापानी जनता के प्रतिरोध और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के कड़े विरोध का सामना करना ही पड़ेगा।" दबाव अभियान के बावजूद ताकाइची पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि उनका रुख जापान की सुरक्षा नीति और अमेरिका-जापान गठबंधन के अनुरूप है।
अमेरिका ने ताकाइची के नेतृत्व का उत्साह से स्वागत किया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चुनाव से पहले उन्हें "पूरा और बिना शर्त समर्थन" दिया और असामान्य कदम उठाते हुए, मतदान से पहले ही 19 मार्च को उनकी व्हाइट हाउस यात्रा की घोषणा कर दी। ट्रंप ने उनकी "भारी जीत" पर बधाई दी और उनके "ताकत के जरिए शांति के एजेंडे" की तारीफ की। ताकाइची ने ट्रंप के "गर्मजोशी भरे शब्दों" के लिए उनका आभार जताया और गठबंधन की संभावनाओं को "असीमित" बताया। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी "गहरे विश्वास और करीबी, मजबूत सहयोग पर बनी है।" इस तालमेल से जापान रक्षा खर्च बढ़ा सकता है और क्षेत्रीय सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभा सकता है। हालांकि, जापान के युद्धकालीन कोरियाई प्रायद्वीप पर कब्जे की ऐतिहासिक यादों के कारण संवैधानिक संशोधन या सैन्यीकरण को लेकर सियोल सतर्क है।
ढांचागत चुनौतियां और नतीजे देने की अपेक्षाएं
मजबूत जनादेश के बावजूद ताकाइची के सामने अपने चुनावी वादों के पैमाने के अनुरूप ठोस नतीजे देने की बड़ी चुनौतियां हैं। जापान का सार्वजनिक कर्ज उसके सकल घरेलू उत्पाद के दोगुने से भी अधिक है, जो किसी भी विकसित अर्थव्यवस्था के मुकाबले सबसे बड़ा बोझ है। उनके कर कटौती प्रस्तावों और भारी खर्च की योजनाओं ने बॉन्ड बाजारों को चिंतित किया है। विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि अगर राजकोषीय अनुशासन डगमगाता दिखा तो मुद्रा में उतार-चढ़ाव और ब्याज दरों पर दबाव बढ़ सकता है। खाद्य कर स्थगित करने की प्रस्तावित अस्थायी अवधि से कुछ आश्वासन मिलता है, लेकिन यह सवाल बना हुआ है कि वह उपभोक्ताओं को राहत देने और 2027 तक रक्षा खर्च को जीडीपी के 2 प्रतिशत तक पहुंचाने, दोनों के लिए धन कैसे जुटाएंगी।
राजकोषीय चिंताओं के अलावा जापान तेजी से बूढ़ी और घटती आबादी, जीवन-यापन की बढ़ती लागत और आयात खर्च बढ़ाने वाले कमजोर येन जैसी गहरी ढांचागत चुनौतियों का सामना कर रहा है। क्षेत्रीय विकास भी अहम मुद्दा है, क्योंकि युवा शहरों की ओर जा रहे हैं और ग्रामीण इलाकों की आबादी घट रही है। ताकाइची ने आर्थिक सुरक्षा और क्षेत्रीय विकास के मॉडल के तौर पर हाल के सेमीकंडक्टर निवेशों का जिक्र किया है। इनमें कुमामोतो में टीएसएमसी का 3 नैनोमीटर की उन्नत चिप बनाने के लिए प्रस्तावित 17 अरब डॉलर का विस्तार शामिल है। हालांकि, ऊर्जा की सीमाएं इन योजनाओं को जटिल बनाती हैं। फुकुशिमा के बाद परमाणु ऊर्जा से दूर जाने के चलते जापान की जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता बढ़ी है, जबकि एआई युग के डेटा केंद्रों और उन्नत विनिर्माण की मेजबानी करने की क्षमता सीमित हुई है।
विश्लेषकों का कहना है कि ताकाइची का भारी बहुमत ठोस नतीजे देने का दबाव और बढ़ाता है, क्योंकि अब वह नीतियों की विफलता के लिए विपक्ष की बाधा को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकतीं। रणनीतिक सलाहकार फर्म एशिया ग्रुप के रिंटारो निशिमुरा कहते हैं, "पिछले कुछ वर्षों जैसा कोई बहाना नहीं चलेगा, जब नेता गतिरोध के लिए विपक्षी दलों को दोष दे सकते थे।" रविवार के मतदान में विपक्ष बुरी तरह कमजोर हुआ है। नया सेंटरिस्ट रिफॉर्म अलायंस 167 से घटकर 49 सीटों पर सिमट गया है और बहुत कम प्रतिरोध कर सकता है। फिर भी, एलडीपी के भीतर गुटबाजी और जापान की आर्थिक तथा सामाजिक चुनौतियों का व्यापक पैमाना अपनी सीमाएं पेश करते हैं। 2028 तक कोई चुनाव जरूरी नहीं है, इसलिए ताकाइची के पास अपना एजेंडा लागू करने का समय है। लेकिन निर्णायक जीत दिलाने वाले मतदाता वेतन, कीमतों और राष्ट्रीय सुरक्षा में ठोस सुधार की उम्मीद करेंगे।
निष्कर्ष
- साने ताकाइची युद्ध के बाद निचले सदन में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने वाली जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। उनकी एलडीपी ने 316 सीटें जीतीं।
- यह 1955 के बाद किसी एक पार्टी का सबसे बड़ा बहुमत है और पूर्व प्रधानमंत्री यासुहिरो नाकासोने के 1986 में बनाए 300 सीटों के रिकॉर्ड से अधिक है।
- जापान इनोवेशन पार्टी के साथ ताकाइची के गठबंधन के पास 352 सीटें हैं, जो ऊपरी सदन के फैसले पलटने और निचले सदन की सभी समितियों की अध्यक्षता करने के लिए पर्याप्त हैं।
- ताकाइची ने खाद्य करों में कटौती समेत आक्रामक राजकोषीय प्रोत्साहन, सैन्य बलों को मान्यता देने के लिए संविधान संशोधन और ताइवान के मामले में चीन के प्रति कड़े रुख का वादा किया।
- उनकी "साना-मेनिया" लोकप्रियता ने युवा मतदाताओं को लामबंद किया है। 18 से 19 वर्ष के मतदाताओं में उन्हें 90 प्रतिशत से अधिक समर्थन हासिल है।
- राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ताकाइची का समर्थन किया और उन्हें व्हाइट हाउस आने का न्योता दिया, जबकि चीन ने जवाबी कार्रवाई की धमकी दी और ताइवान पर उनकी टिप्पणी वापस लेने की मांग की।
- जापान का बढ़ता सार्वजनिक कर्ज, बूढ़ी होती आबादी और ऊर्जा की सीमाएं उनकी महत्वाकांक्षी खर्च और रक्षा योजनाओं के सामने तात्कालिक चुनौतियां हैं।
- इस जीत के बाद विधायी गतिरोध का बहाना नहीं चलेगा। 2028 के अगले चुनाव तक आर्थिक और सुरक्षा नतीजों की पूरी जिम्मेदारी ताकाइची सरकार पर होगी।






