वियतनामी प्रशिक्षु जर्मनी के व्यावसायिक स्कूलों से क्यों गायब हो रहे हैं

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वियतनामी प्रशिक्षु जर्मनी के व्यावसायिक स्कूलों से क्यों गायब हो रहे हैं

बर्लिन की एक कक्षा से अचानक पलायन

बर्लिन के एक आतिथ्य-सेवा व्यावसायिक स्कूल में दाखिला लेने वाले 200 से अधिक वियतनामी छात्र हाल के महीनों में कक्षाओं और कार्यस्थल प्रशिक्षण से गायब हो गए हैं। यह सिलसिला पिछले दो वर्षों में जर्मनी भर के संस्थानों से आई खबरों जैसा है। बर्लिन के वाइसेनज़े जिले स्थित ब्रिया सावरिन स्कूल में यह संख्या वियतनामी छात्रों के कुल समूह का करीब एक तिहाई है। इस भारी गिरावट से वे शिक्षक और नियोक्ता परेशान हैं, जो रसोई, भोजन कक्ष और होटल सेवाएं चलाने के लिए प्रशिक्षुओं पर निर्भर हैं।

विषय-सूची
  1. बर्लिन की एक कक्षा से अचानक पलायन
  2. जर्मनी की प्रशिक्षण व्यवस्था कैसे काम करती है और वियतनाम के युवाओं को क्यों आकर्षित करती है
  3. द्वैध प्रणाली क्या अवसर देती है
  4. कर्ज, बिचौलिए और संदिग्ध भाषा प्रमाणपत्र
  5. लापता प्रशिक्षु कहां नजर आते हैं
  6. वेतन की हकीकत, रहने का खर्च और संस्कृति का झटका
  7. अवसर बंद किए बिना प्रशिक्षण व्यवस्था में सुधार
  8. प्रशिक्षुओं और नियोक्ताओं के लिए कानूनी जोखिम
  9. बर्लिन और हनोई कैसे सहयोग कर सकते हैं
  10. जर्मनी से बाहर तुलनात्मक तस्वीर
  11. मुख्य बिंदु

पढ़ाई छोड़ने के बाद ये प्रशिक्षु कहां जाते हैं, यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। जर्मन सीमा शुल्क अधिकारियों और पुलिस ने बर्लिन तथा अन्य शहरों में नेल सैलून और रेस्तरां में जांच और छापेमारी की है। जांचकर्ताओं को संदेह है कि पढ़ाई छोड़कर जाने वाले कई लोग इन जगहों पर अनियमित काम करते हैं और ऐसे कामों में लग जाते हैं जहां नकद भुगतान होता है और प्रशिक्षण की बाध्यताओं से बचा जा सकता है। यूनियनों और अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस रुझान के पीछे कर्ज, अवास्तविक उम्मीदें और अपारदर्शी भर्ती प्रक्रियाओं का मेल है, जो युवाओं को जल्दी पैसा कमाने की राह पर धकेलता है।

बर्लिन-ब्रांडेनबर्ग क्षेत्र में खाद्य, पेय और खानपान यूनियन के प्रबंध निदेशक सेबास्टियन रीसनर ने कहा कि अधिकारियों और स्कूलों के पास अब भी समस्या के पैमाने या कार्यक्रम छोड़ चुके कई लोगों के ठिकाने की पूरी जानकारी नहीं है।

'हमें वास्तव में नहीं पता कि वे कहां गए हैं,' रीसनर ने कहा।

अचानक पढ़ाई छोड़ने की ये घटनाएं जर्मन श्रम बाजार में व्यापक तनाव को उजागर करती हैं। आतिथ्य और देखभाल के क्षेत्रों में नियोक्ता लंबे समय से कर्मचारियों की कमी का सामना कर रहे हैं। व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रतिभाओं को तैयार करने का एक अहम माध्यम बन गया है और जर्मन कंपनियां रिक्त पद भरने के लिए यूरोपीय संघ से बाहर के देशों का रुख कर रही हैं। इस कोशिश में वियतनाम एक अहम साझेदार बन गया है। वहां से हजारों युवा वेतन के साथ प्रशिक्षण, जर्मन योग्यता और स्थिर रोजगार की राह के वादे पर जर्मनी आ रहे हैं।

जर्मनी में वियतनाम के करीब 16,000 व्यावसायिक प्रशिक्षु हैं, जिनमें से लगभग 4,000 केवल 2024 में पहुंचे। इससे वियतनाम यूरोपीय संघ से बाहर प्रशिक्षु भेजने वाले सबसे बड़े देशों में शामिल हो गया है। अब इस आवागमन के बड़े पैमाने और लोगों के गायब होने की घटनाओं ने यूनियनों, शिक्षकों और प्रवासी सहायता समूहों का ध्यान खींचा है। वे चाहते हैं कि अवसर बंद किए बिना सुरक्षा उपाय मजबूत किए जाएं।

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जर्मनी की प्रशिक्षण व्यवस्था कैसे काम करती है और वियतनाम के युवाओं को क्यों आकर्षित करती है

जर्मनी की द्वैध व्यावसायिक शिक्षा प्रणाली में कक्षा का सैद्धांतिक ज्ञान और वेतन के साथ कार्यस्थल पर सीखना शामिल है। प्रशिक्षु आम तौर पर सप्ताह में चार दिन किसी कंपनी में और एक दिन व्यावसायिक स्कूल में बिताते हैं। पहले दिन से ही उन्हें वेतन मिलता है। आतिथ्य क्षेत्र में पहले साल का वेतन अक्सर कटौतियों से पहले औसतन लगभग 1,000 यूरो प्रति माह होता है, जो बाद के वर्षों में बढ़ता है। प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने वाले प्रशिक्षुओं को ऐसी योग्यता मिलती है जिसे देश भर के नियोक्ता व्यापक रूप से मान्यता देते हैं।

द्वैध प्रणाली क्या अवसर देती है

यह मॉडल उन कई वियतनामी युवाओं को आकर्षित करता है जो अनुभव और आय, दोनों चाहते हैं। इसमें वास्तविक कार्यस्थल कौशल, मान्य प्रमाणपत्र और यूरोपीय रोजगार बाजार में प्रवेश का रास्ता मिलने का वादा है। जर्मन नियोक्ताओं के लिए यह प्रेरित प्रशिक्षुओं की नियमित उपलब्धता का जरिया है, जिन्हें कंपनी के मानकों के अनुसार प्रशिक्षित करते हुए रोजमर्रा के कामकाज में भी लगाया जा सकता है। प्रशिक्षुओं के लिए व्यवस्थित माहौल में काम और पढ़ाई का मेल पूरी तरह अकादमिक शिक्षा से अधिक आकर्षक हो सकता है।

हालांकि, कुछ चुनौतियां भर्ती के प्रचार-पत्रों में आसानी से नहीं समातीं। जर्मन भाषा की तकनीकी शब्दावली कठिन लग सकती है। रसोई और होटल के काम में शारीरिक सहनशक्ति और अनियमित समय की जरूरत होती है। प्रशिक्षुओं को कक्षाओं में जाना, काम की शिफ्ट संभालना और असाइनमेंट पूरे करना पड़ता है। सीखने की प्रक्रिया कठिन है और कार्यस्थल पर मिलने वाली सहायता नियोक्ता के अनुसार अलग-अलग होती है। ये बाधाएं केवल विदेशी प्रशिक्षुओं के सामने नहीं आतीं, लेकिन भाषा और नए समाज में ढलने का दबाव शुरुआती महीनों में बदलाव को कठिन बना सकता है।

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कर्ज, बिचौलिए और संदिग्ध भाषा प्रमाणपत्र

कई लोगों के गायब होने के पीछे कठिन आर्थिक हकीकत है। वियतनाम में कई प्रशिक्षुओं ने बिचौलियों को भर्ती शुल्क के रूप में बड़ी रकम दी, जो कभी-कभी 20,000 यूरो तक पहुंच जाती है। परिवार अक्सर इस उम्मीद में कर्ज लेते हैं कि छात्र जल्द ही घर पैसे भेजने लगेगा। यह कर्ज जल्द से जल्द अधिक वेतन वाला काम ढूंढने का बड़ा दबाव बन जाता है, भले ही इसके लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम छोड़ना पड़े।

बर्लिन में यूनियन अधिकारियों और स्कूल कर्मचारियों का कहना है कि कुछ नए लोगों ने ऐसे भाषा प्रमाणपत्र जमा कराए जो बाद में जाली या धोखाधड़ी से हासिल किए हुए प्रतीत हुए। भाषा का कमजोर ज्ञान सिर्फ कक्षा में सीखने को प्रभावित नहीं करता। इससे सुरक्षा संबंधी निर्देश समझने, ग्राहकों से बात करने और कार्यस्थल को सुचारु रूप से चलाने के लिए जरूरी बुनियादी संवाद में भी बाधा आती है। जब प्रशिक्षण आगे नहीं बढ़ पाता, तो तुरंत नकद कमाई का वादा करने वाली नौकरी का आकर्षण बढ़ सकता है।

बर्लिन के अधिकार कार्यकर्ता वियतनाम में सोशल मीडिया पर आक्रामक और कभी-कभी भ्रामक प्रचार की ओर इशारा करते हैं, जिसमें कमाई को बढ़ा-चढ़ाकर बताया जाता है। प्रवासी सहायता समूहों के अनुसार, टिकटॉक जैसे तेजी से लोकप्रिय होते मंचों पर भर्ती करने वाले अक्सर जर्मनी के ऊंचे सकल वेतन को प्रमुखता देते हैं और कर तथा सामाजिक बीमा की कटौतियों का जिक्र कम करते हैं। प्रचार में दिखाई गई चमक-दमक और बैंक खाते में वास्तव में आने वाले वेतन के बीच का अंतर नए लोगों को चौंका सकता है। वे किराया, भोजन और परिवहन का खर्च पूरा करने के साथ घर पैसे भेजने में भी मुश्किल झेल सकते हैं।

प्रवासी अधिकार समूहों का कहना है कि समाधान वीजा जारी होने से बहुत पहले शुरू होता है। रवाना होने से पहले स्पष्ट सलाह, शुद्ध वेतन और रहने के खर्च की सच्ची जानकारी तथा सत्यापित भाषा परीक्षा सफल प्रशिक्षुता और जल्दबाजी में पढ़ाई छोड़ने के बीच फर्क पैदा कर सकती है। उनका कहना है कि इन युवाओं में से कई का नियम तोड़ने का इरादा कभी नहीं था। वे सीखने, कमाने और अपने परिवारों की मदद करने निकले थे। गलत जानकारी, कर्ज और उम्मीदों तथा हकीकत के बीच अंतर उन्हें राह से भटका सकता है।

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लापता प्रशिक्षु कहां नजर आते हैं

जर्मन सीमा शुल्क अधिकारियों ने अक्सर स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर ऐसे क्षेत्रों में निरीक्षण किए हैं, जहां अनियमित रोजगार आम है। हाल की खबरों में नेल सैलून और छोटे रेस्तरां खास तौर पर सामने आए हैं। ये कारोबार जल्दी श्रमिक रख सकते हैं। वे व्यक्तिगत संपर्कों और नकद भुगतान पर निर्भर रहते हैं और कभी-कभी अनुबंध तथा नियमों के पालन के बजाय तेजी को प्राथमिकता देते हैं। इस मेल के कारण ये जगहें तत्काल आय चाहने और आधिकारिक निगरानी से बचने वालों के लिए आकर्षण का केंद्र बन जाती हैं।

अधिकारियों का कहना है कि इन जांचों का उद्देश्य केवल नियमों के उल्लंघन पकड़ना नहीं, बल्कि शोषण के जोखिम वाले लोगों की पहचान करना भी है। जब प्रशिक्षु कार्यक्रम छोड़ते हैं, तो उन्हें स्कूल कर्मचारियों और कार्यस्थल के मार्गदर्शकों का संरक्षण भी नहीं मिलता। बड़ा कर्ज चुकाने की जरूरत और सीमित भाषा कौशल के कारण कोई युवा शोषणकारी हालात का आसान शिकार बन सकता है, जैसे बिना भुगतान अतिरिक्त काम या कानूनी न्यूनतम से कम वेतन।

राजधानी क्षेत्र में आतिथ्य क्षेत्र के प्रशिक्षुओं और नियोक्ताओं के साथ करीब से काम करने वाले रीसनर का कहना है कि यूनियनों के पास उन छात्रों की पूछताछ बढ़ रही है, जिन्हें घर के कर्ज और काम की मांगों के बीच फंसा हुआ महसूस होता है। उनके मुताबिक, समस्या की पूरी तस्वीर अब भी सामने नहीं आई है।

'हमें वास्तव में नहीं पता कि वे कहां गए हैं,' रीसनर ने कहा।

प्रशिक्षु जितने लंबे समय तक व्यवस्था से बाहर रहता है, औपचारिक शिक्षा में लौटने की संभावना उतनी ही कम होती जाती है। हर छूटा हुआ सप्ताह सैद्धांतिक और व्यावहारिक, दोनों तरह की पढ़ाई में अंतर बढ़ाता है। इसके बाद जोखिम यह होता है कि व्यक्ति अनियमित काम के चक्र में फंस जाए, जहां प्रशिक्षण और करियर बनाने के बजाय ध्यान गुजारा करने और कर्ज चुकाने पर केंद्रित हो जाता है।

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वेतन की हकीकत, रहने का खर्च और संस्कृति का झटका

जर्मनी में प्रशिक्षुओं के लिए विज्ञापित वेतन सकल राशि होती है। वेतन से कर और अनिवार्य सामाजिक बीमा की कटौतियों के बाद हाथ में आने वाला पैसा काफी कम होता है। आतिथ्य क्षेत्र में पहले साल का वेतन मामूली होता है और कई नए लोग रहने के खर्च देखकर चौंक जाते हैं। बर्लिन और दूसरे बड़े शहरों में किराए बढ़ गए हैं। मकान लेते समय अक्सर जमानत राशि देनी पड़ती है और बुनियादी फर्नीचर का इंतजाम करना होता है। परिवहन पास, बीमा में शामिल न होने वाले स्वास्थ्य खर्च और रोजमर्रा की जरूरतें मिलकर बड़ी रकम बन जाती हैं। अगर प्रशिक्षु घर पैसे भी भेजता है, तो बचत के लिए बहुत कम गुंजाइश रहती है।

इन दबावों के साथ रोजमर्रा की एक थकाऊ दिनचर्या भी जुड़ी होती है। रसोई या होटल में सप्ताह के चार कामकाजी दिनों में सुबह जल्दी, देर रात और सप्ताहांत की शिफ्ट शामिल हो सकती हैं। इसके अलावा व्यावसायिक सिद्धांत और भाषा की पढ़ाई के लिए स्कूल का एक दिन होता है। कुछ प्रशिक्षु कार्यस्थल से दूर साझा कमरों में रहते हैं, जिससे लंबा सफर करना पड़ता है। तनाव बढ़ने पर तुरंत नकद वेतन वाली पूर्णकालिक नौकरी समस्याओं का फौरन हल लग सकती है, भले ही इससे नए कानूनी जोखिम पैदा हों।

अवसर बंद किए बिना प्रशिक्षण व्यवस्था में सुधार

यूनियन, स्कूल और प्रवासी अधिकार कार्यकर्ता ऐसे व्यावहारिक कदमों को बढ़ावा दे रहे हैं जिनसे प्रशिक्षु व्यवस्था में बने रहें और उनके अधिकार सुरक्षित रहें। नियोक्ता कार्यस्थल की अपेक्षाओं और वेतन के बारे में अधिक स्पष्ट शुरुआती जानकारी दे सकते हैं। स्कूल खासकर तकनीकी शब्दावली के लिए लक्षित भाषा सहायता बढ़ा सकते हैं। वियतनाम में भर्ती करने वाले और साझेदार स्कूल रहने के खर्च तथा आतिथ्य और देखभाल के क्षेत्रों में काम की वास्तविकताओं के बारे में ईमानदार जानकारी दे सकते हैं। भाषा प्रमाणपत्रों की सत्यापन योग्य प्रक्रिया धोखाधड़ी का जोखिम घटा सकती है।

जर्मनी में वियतनामी प्रवासी समुदाय ने भी अधिक पारदर्शी संपर्क व्यवस्था बनानी शुरू की है। इसका एक उदाहरण अल्मा रिक्रूटिंग है, जिसकी स्थापना 2024 की शुरुआत में उन प्रवासियों ने की थी जिन्होंने जर्मनी में सफलतापूर्वक प्रशिक्षण लिया और काम किया। एजेंसी का कहना है कि वह कंपनियों और उम्मीदवारों, दोनों की जांच करती है, शुरुआती करियर सलाह और विषय-विशेष भाषा प्रशिक्षण देती है तथा प्रशिक्षुओं को व्यवस्थित कॉर्पोरेट साझेदारियों से जोड़ती है। इसका उद्देश्य अनुबंध पर हस्ताक्षर होने से पहले उम्मीदों को कार्यस्थल की वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप बनाकर पढ़ाई छोड़ने की घटनाएं कम करना है।

बर्लिन स्थित वियतनाम इंटरनेशनल सेफ लेबर अलायंस जैसे गैर-लाभकारी संगठन वियतनाम में भ्रामक प्रचार और अत्यधिक शुल्क पर दंड लगाने वाले उद्योग मानकों की मांग कर रहे हैं। वे सरकारों और प्रतिष्ठित एजेंसियों से वैध खर्चों की स्पष्ट सूची प्रकाशित करने, गलत जानकारी का मुकाबला करने वाले सोशल मीडिया अभियान चलाने और ऐसी हेल्पलाइन बनाने का आग्रह करते हैं जहां स्कूल छोड़कर अवैध काम करने के दबाव का सामना कर रहे प्रशिक्षु सहायता मांग सकें।

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प्रशिक्षुओं और नियोक्ताओं के लिए कानूनी जोखिम

जर्मनी में प्रशिक्षुओं के पास आम तौर पर उनके प्रशिक्षण अनुबंध से जुड़ा निवास परमिट होता है। अगर कोई प्रशिक्षु किसी अन्य मान्य प्रशिक्षण स्थान की व्यवस्था किए बिना कार्यक्रम छोड़ता है, तो उसका यह दर्जा जोखिम में पड़ सकता है। वैध आधार के बिना देश में रहने पर प्रवर्तन कार्रवाई हो सकती है और शोषण का खतरा बढ़ जाता है। दुर्व्यवहार का सामना करने वाले या किसी खास नियोक्ता के साथ प्रशिक्षण जारी न रख पाने वाले प्रशिक्षुओं के पास अक्सर कानूनी तौर पर प्रशिक्षण कंपनी बदलने के विकल्प होते हैं, लेकिन समय कम होता है और सही मार्गदर्शन जरूरी है।

अवैध काम के खिलाफ कार्रवाई लेन-देन के दोनों पक्षों पर केंद्रित होती है। सीमा शुल्क प्राधिकरण ऐसे नियोक्ताओं की जांच करता है जो कर्मचारियों को कम वेतन देते हैं, बिना अनुबंध काम पर रखते हैं या प्रशिक्षु परमिट का दुरुपयोग करते हैं। उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर जुर्माना लगाया जा सकता है और बकाया वेतन तथा सामाजिक अंशदान चुकाने पड़ सकते हैं। बिना अनुमति काम करने पर श्रमिकों को भी परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। सलाहकार मुश्किल में फंसे प्रशिक्षुओं से आग्रह करते हैं कि वे जल्द यूनियनों, कानूनी सहायता सेवाओं या आधिकारिक सलाह केंद्रों से संपर्क करें, ताकि कानूनी प्रशिक्षण व्यवस्था के भीतर रहते हुए समाधान तलाशे जा सकें।

बर्लिन और हनोई कैसे सहयोग कर सकते हैं

लोगों के गायब होने की घटनाएं रोकने के लिए संभवतः समन्वित कार्रवाई की जरूरत होगी। जर्मन और वियतनामी अधिकारी स्कूलों तथा प्रतिष्ठित एजेंसियों के साथ मिलकर भाषा प्रमाणपत्रों की पुष्टि कर सकते हैं, निजता की सीमाओं के भीतर उपस्थिति पर नजर रख सकते हैं और परेशानी का संकेत देने वाले किसी भी प्रशिक्षु को तुरंत सहायता दे सकते हैं। वाणिज्य दूतावासों की पहुंच, वियतनामी भाषा में जानकारी सत्र और व्यवस्था के भीतर नियोक्ता बदलने के स्पष्ट निर्देश छात्रों को छाया अर्थव्यवस्था की नौकरियों की ओर भटकने के बजाय प्रशिक्षण से जुड़े रहने में मदद कर सकते हैं।

दोनों पक्षों के बुनियादी हित एक जैसे हैं। जर्मन नियोक्ताओं को प्रशिक्षित कर्मचारी चाहिए और वियतनाम के युवाओं में कौशल हासिल करने तथा अंतरराष्ट्रीय अनुभव पाने की उत्सुकता है। पारदर्शी भर्ती, वेतन और खर्च की यथार्थवादी जानकारी तथा शुरुआती महीनों में मजबूत सहायता के साथ प्रशिक्षुता का रास्ता अनियमित काम की ओर भटकाव बनने के बजाय वास्तविक अवसर बना रह सकता है।

जर्मनी से बाहर तुलनात्मक तस्वीर

अन्य देश शिक्षा से जुड़े प्रवासन के रास्तों में बदलाव कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया ने हाल ही में छात्र वीजा शुल्क दोगुने से भी अधिक कर दिया और स्नातकों के देश में रहने की अवधि घटा दी। उसका कहना है कि वह प्रवासन कम करना और कार्यक्रम की अखंडता बनाए रखना चाहता है। ये नीतियां जर्मनी के व्यावसायिक प्रशिक्षण परमिट से अलग हैं, लेकिन दिशा मिलती-जुलती है। सरकारें श्रमिकों की जरूरतों को सख्त नियंत्रण और भर्ती प्रक्रियाओं की करीबी जांच के साथ संतुलित करने की कोशिश कर रही हैं।

यह वैश्विक संदर्भ इसलिए अहम है क्योंकि गलत जानकारी तुलनाओं के सहारे फैलती है। विदेश में ऊंचे वेतन या आसानी से स्थायी निवास पाने की राह के बारे में सुर्खियां बारीक शर्तों को छिपा सकती हैं। नीतियों में बदलाव होने पर जिम्मेदार एजेंसियों को अपनी जानकारी तेजी से अपडेट करनी चाहिए, वरना युवा खाली जगहों को अफवाहों और जोखिम भरे फैसलों से भर देंगे।

मुख्य बिंदु

  • हाल के महीनों में बर्लिन के एक आतिथ्य-सेवा स्कूल से 200 से अधिक वियतनामी प्रशिक्षु गायब हो गए हैं। यह जर्मनी भर में दो साल से जारी रुझान का हिस्सा है।
  • बर्लिन के ब्रिया सावरिन स्कूल में वियतनामी छात्रों के समूह का करीब एक तिहाई अब कक्षाओं या प्रशिक्षण की शिफ्ट में नहीं आ रहा है।
  • नेल सैलून और रेस्तरां पर जर्मन सीमा शुल्क अधिकारियों तथा पुलिस की छापेमारी से संकेत मिलता है कि पढ़ाई छोड़कर जाने वाले कुछ लोग इन क्षेत्रों में अवैध रूप से काम कर रहे हैं।
  • पूरे जर्मनी में वियतनामी प्रशिक्षुओं की संख्या करीब 16,000 है। 2024 में लगभग 4,000 नए प्रशिक्षु पहुंचे।
  • वियतनाम में नियुक्ति शुल्क 20,000 यूरो तक पहुंच सकता है, जिससे जल्दी कमाई करने और परिवार का कर्ज चुकाने का दबाव बनता है।
  • यूनियनों के अनुसार, कुछ भाषा प्रमाणपत्र जाली या धोखाधड़ी से हासिल किए गए हैं और सोशल मीडिया पर भ्रामक प्रचार वेतन को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाता है।
  • पहले साल में प्रशिक्षु का करीब 1,000 यूरो सकल वेतन कटौतियों के बाद कम रह जाता है, जबकि जर्मन शहरों में रहने का खर्च ऊंचा है।
  • अधिकार कार्यकर्ता भाषा परीक्षण सत्यापित करने, रवाना होने से पहले सही सलाह देने और नैतिक भर्ती पर जोर देते हैं। प्रवासी समुदाय के नेतृत्व वाली नई एजेंसियां जांचे-परखे प्रशिक्षण स्थान उपलब्ध करा रही हैं।
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