बढ़ता समुद्री तापमान, घटती मछलियाँ: दक्षिण कोरिया के तटों पर जलवायु परिवर्तन और जोखिम का संगम

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बढ़ता समुद्री तापमान, घटती मछलियाँ: दक्षिण कोरिया के तटों पर जलवायु परिवर्तन और जोखिम का संगम

समुद्र में जानलेवा मौसम

सूर्योदय से पहले जेजू द्वीप पर यह खबर पहुंची। तेज लहर ने नाव को दो दिशाओं से आ घेरा और भंवर बनाकर उसे पलट दिया। उफनते समुद्र में मछली पकड़ने वाली नाव पलट गई। नीचे डेक पर सो रहे चालक दल के दस सदस्यों में से पांच बाहर नहीं निकल पाए। नाव के मालिक और जेजू फिशिंग बोट ओनर्स एसोसिएशन के प्रमुख होंग सुक हुई जल्द ही तट पर पहुंचे। वहां उन्हें पता चला कि लंबी समुद्री यात्रा की उनकी उम्मीद त्रासदी में बदल गई थी।

विषय-सूची
  1. समुद्र में जानलेवा मौसम
  2. क्या समुद्र के गर्म होने से तूफान ज्यादा जानलेवा हो रहे हैं?
  3. मछलियां कहां चली गईं?
  4. बढ़ती उम्र के चालक दल, प्रवासी मजदूर और सुरक्षा की कमी
  5. कोरिया के मत्स्य क्षेत्र पर विज्ञान क्या कहता है
  6. स्थान बदलती प्रजातियां
  7. अपतटीय बेड़ों को ज्यादा खतरा
  8. दांव पर अर्थव्यवस्था
  9. सुरक्षा सुधार और अनुकूलन के उपाय
  10. वैश्विक संबंध: जेजू से अंटार्कटिका तक
  11. मुख्य बातें
जब मैंने खबर सुनी, तो लगा जैसे आसमान टूट पड़ा हो।

पिछले साल समुद्र में मौतों की संख्या तेजी से बढ़ी। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, दक्षिण कोरिया के जलक्षेत्र में 164 लोगों की मौत हुई या वे लापता हो गए। यह इससे पिछले साल के मुकाबले करीब 75 प्रतिशत की वृद्धि थी। मरने वालों में ज्यादातर उन नावों पर सवार मछुआरे थे जो डूब गईं या पलट गईं। कई नाविकों का कहना है कि मौसम का मिजाज ही बदल गया है: हवाएं तेजी से दिशा बदलती हैं और समुद्र बिना किसी चेतावनी के अशांत हो सकता है।

"मौसम बदल गया है, हर साल हवाएं तेज हो रही हैं। अचानक बवंडर उठने लगते हैं। हम मछुआरों को यकीन है कि इसकी वजह जलवायु परिवर्तन है," होंग ने कहा।

जेजू के मुख्य बंदरगाह पर रोजमर्रा की हलचल के साथ चिंता का माहौल भी है। चालक दल के सदस्य ईंधन और उपकरण लेकर घाट और डेक के बीच तेजी से आते-जाते हैं, जबकि मालिक टहलते हुए रेडियो, नक्शे और मौसम के पूर्वानुमान जांचते हैं। चांदी जैसी चमक वाली हेयरटेल मछली कभी यहां की आमदनी का मुख्य आधार थी, लेकिन अब इसे ढूंढना मुश्किल हो गया है। नावें इसे पकड़ने के लिए तट से और दूर जाती हैं, कभी-कभी दक्षिण में ताइवान तक। इस अतिरिक्त दूरी के कारण चेतावनी जारी होने पर तुरंत लौटना संभव नहीं रह जाता।

"मुझे हमेशा डर रहता है कि नाव के साथ कुछ हो न जाए। जोखिम बहुत बढ़ गए हैं। हवाएं पहले से कहीं ज्यादा अनिश्चित और बेहद खतरनाक हो गई हैं," 54 वर्षीय नाव मालिक किम सेउंग ह्वान ने कहा।

क्या समुद्र के गर्म होने से तूफान ज्यादा जानलेवा हो रहे हैं?

दक्षिण कोरिया के आसपास के समुद्र वैश्विक औसत से ज्यादा तेजी से गर्म हुए हैं। 1968 से 2024 के बीच समुद्र की सतह का औसत तापमान करीब 1.58C बढ़ा, जो वैश्विक वृद्धि लगभग 0.74C से दोगुने से भी ज्यादा है। गर्म पानी वायुमंडल और समुद्र में ऊर्जा बढ़ाता है। इससे टाइफून जैसी उष्णकटिबंधीय प्रणालियां अधिक तीव्र हो सकती हैं और अचानक तेज झोंकों तथा खतरनाक लहरों के लिए स्थितियां बन सकती हैं, जो छोटी नावों को संभलने का मौका नहीं देतीं।

हाल की दुर्घटनाओं की जांच करने वाले सरकारी अधिकारियों ने पाया कि कोरियाई प्रायद्वीप के आसपास का समुद्री पर्यावरण मछली पकड़ने के लिए अधिक जोखिम भरा हो गया है। तेज हवाओं, तूफानी ज्वार और टाइफून को लेकर जारी समुद्री मौसम चेतावनियों की संख्या 2020 और 2024 के बीच करीब 65 प्रतिशत बढ़ी। जांचकर्ताओं ने कहा कि मछलियों के दूर जाने के कारण अब ज्यादा दूर तक जाने वाली छोटी मछली पकड़ने की नावों को लंबी और उफनती यात्राओं में सबसे अधिक खतरा है।

दुर्घटना समीक्षा का नेतृत्व करने वाले प्रोफेसर गुग सेउंग गी ने कहा: "अनिश्चित मौसम के कारण नावें ज्यादा पलट रही हैं। खासकर छोटी मछली पकड़ने वाली नावें, जो अब दूर तक जाती हैं और इतनी लंबी, उफनती यात्राओं के लिए बनी ही नहीं हैं।"

वैज्ञानिक आगाह करते हैं कि अभी हर रुझान पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। इस बात के बढ़ते प्रमाण हैं कि जलवायु परिवर्तन अचानक तेज हवाओं और समुद्री हीटवेव के अनुकूल परिस्थितियां बना रहा है, लेकिन कुछ पैटर्न की पुष्टि के लिए अभी लंबे समय तक निगरानी की जरूरत है।

पुक्योंग नेशनल यूनिवर्सिटी की जलवायु वैज्ञानिक प्रोफेसर किम बेक मिन ने कहा: "जलवायु परिवर्तन से अचानक तेज हवाओं के झोंकों की आशंका बढ़ रही है, लेकिन स्पष्ट रुझान की पुष्टि के लिए और शोध तथा लंबे समय के आंकड़ों की जरूरत है।"
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मछलियां कहां चली गईं?

गर्म होते समुद्र समुद्री जीवन का नक्शा बदल रहे हैं। कई प्रजातियां ठंडे पानी या गहरे इलाकों की ओर जा रही हैं। दक्षिणी तट के मछुआरों का कहना है कि हेयरटेल और दूसरी आम मछलियां तट से दूर और दक्षिण की ओर चली गई हैं। इससे यात्राएं लंबी हो जाती हैं और तूफान आने पर सुरक्षित जगह तलाशने का समय घट जाता है।

जेजू के पास हेयरटेल मछलियां कम होती देखने के बाद किम ने कहा: "हम अब ज्यादा दूर जाकर मछली पकड़ते हैं, इसलिए तूफान की चेतावनी मिलने पर जल्दी लौटना हमेशा संभव नहीं होता। तट के करीब रहें तो सुरक्षा ज्यादा होगी, लेकिन रोजी-रोटी के लिए हमें दूर जाना पड़ता है।"

मछली पकड़ने के आंकड़े एक गंभीर तस्वीर पेश करते हैं। पिछले दशक में दक्षिण कोरियाई जलक्षेत्र में स्क्विड की पकड़ करीब 92 प्रतिशत घट गई। एंकोवी की पकड़ में लगभग 46 प्रतिशत की गिरावट आई। हाल की एक यात्रा में एंकोवी पकड़ने वाले नाविक पार्क ह्योंग इल के जाल मछलियों के बजाय जेलीफिश से भरकर निकले। एंकोवी की जो दो पेटियां वे अलग कर पाए, उनसे ईंधन का खर्च भी नहीं निकलता, मजदूरी तो दूर की बात है।

"पहले हम एक ही दिन में ऐसी 50 से 100 टोकरियां भर लेते थे। इस साल एंकोवी गायब हो गई हैं और मछलियों से ज्यादा जेलीफिश मिल रही हैं," कैप्टन पार्क ने कहा।
यह पकड़ लगभग बेकार है। समुद्र का हाल बिगड़ गया है, अब कुछ भी समझ में नहीं आता।

हालिया शोध मछुआरों के अनुभवों की पुष्टि करता है। तटीय और अपतटीय मछली पकड़ने के लंबे समय के आंकड़े दिखाते हैं कि समुद्र का तापमान बढ़ने के साथ पोलक जैसी ठंडे पानी की प्रजातियों की जगह गर्म पानी की प्रजातियां ले रही हैं। पानी के भीतर चलने वाले ड्रोन से किए गए कई वर्षों के पर्यावरणीय डीएनए सर्वेक्षण में कोरिया के पूरे तट पर मछलियों की 167 प्रजातियां दर्ज की गईं। इसमें उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय मछलियों की बढ़ती मौजूदगी, खासकर जेजू के आसपास, सामने आई। इसी निगरानी में दक्षिण कोरिया के जलक्षेत्र में पहले दर्ज न की गई 13 प्रजातियां भी मिलीं। यह शुरुआती संकेत है कि गर्म पानी नई प्रजातियों को आकर्षित कर रहा है।

बदलाव मछलियों के झुंडों से लेकर समुद्र तल तक फैले हैं। जेजू के आसपास वैज्ञानिकों ने समुद्र तल पर स्थिर रहने वाले जीवों के समुदायों में बदलाव दर्ज किया है। अल्वियोपोरा जापोनिका जैसी मूंगा प्रजातियां फैल रही हैं, जबकि कुछ समशीतोष्ण क्षेत्रों के बड़े शैवाल घट रहे हैं। इन आधारभूत प्रजातियों का फैलाव सर्दियों के समुद्री सतह तापमान, पानी की पारदर्शिता, पोषक तत्वों और स्थानीय जल प्रवाह से काफी प्रभावित होता है। नतीजतन, मछलियों और अकशेरुकी जीवों का आवास एक पीढ़ी पहले की तुलना में अलग-अलग तरह के क्षेत्रों में बंट गया है।

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बढ़ती उम्र के चालक दल, प्रवासी मजदूर और सुरक्षा की कमी

मछली पकड़ने का काम तेजी से बुजुर्गों का पेशा बन रहा है। 2023 में दक्षिण कोरिया के करीब आधे मछुआरे 65 साल से अधिक उम्र के थे, जबकि एक दशक पहले यह अनुपात एक-तिहाई से कम था। युवा कामगारों को लंबे घंटे, अनिश्चित आमदनी और बहुत ज्यादा खतरा इस पेशे से दूर रखता है। नावें चलती रहें, इसके लिए कई नाविक वियतनाम और इंडोनेशिया से डेक पर काम करने वाले मजदूर रखते हैं। चालक दल के कुछ सदस्यों को सीमित सुरक्षा प्रशिक्षण मिलता है और भाषा की बाधा के कारण खराब मौसम में तुरंत दिए गए आदेश समझना मुश्किल हो सकता है।

अधिकारियों का कहना है कि ये दबाव अब एक-दूसरे पर जुड़ते जा रहे हैं, जिससे हादसे की आशंका बढ़ती है।

एनवायरनमेंटल जस्टिस फाउंडेशन में दक्षिण कोरिया के प्रतिनिधि वूजिन चुंग ने कहा: "जब आप ज्यादा भीषण मौसम, और दूर तक जाने के दबाव, इससे बढ़ते ईंधन खर्च और सस्ते, अप्रशिक्षित विदेशी मजदूरों पर निर्भरता को एक साथ देखते हैं, तो आपदा का खतरा बढ़ जाता है।"

परिवार समुद्र में ही नहीं, जमीन पर भी जोखिम को लेकर बेहतर फैसले करने की मांग कर रहे हैं। फरवरी में येओसु के तट से दूर एक बड़ा ट्रॉलर डूब गया। इसमें चालक दल के 10 सदस्य मारे गए। उस दिन इतनी ठंड थी कि पानी में गिरने का मतलब संभवतः हाइपोथर्मिया था। छोटी नावों को समुद्र में जाने से रोक दिया गया था, लेकिन ट्रॉलर रवाना हुआ। हादसे का कारण अब भी स्पष्ट नहीं है। 63 वर्षीय पिता यंग मुक को खोने वाली ईआन का मानना है कि नाव मालिकों की जिम्मेदारी है कि वे जोखिम का आकलन करें और पुरानी नावों का रखरखाव करें।

उन्होंने कहा, "आखिरकार समुद्र में जाने का फैसला उन्हीं का होता है। कंपनियों के पास बीमा होता है, इसलिए नाव डूबने के बाद उन्हें मुआवजा मिल जाता है, लेकिन हमारे प्रियजनों की जगह कोई नहीं ले सकता।"
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कोरिया के मत्स्य क्षेत्र पर विज्ञान क्या कहता है

पिछले कई दशकों के दक्षिण कोरियाई मत्स्य क्षेत्रों पर हुए अध्ययनों में जलवायु संबंधी कारकों और उत्पादन के रुझानों के बीच गहरा संबंध सामने आया है। 1993 से 2023 के आंकड़ों पर आधारित एक राष्ट्रीय विश्लेषण में पाया गया कि समुद्र की सतह का बढ़ता तापमान, कार्बन डाइऑक्साइड का बढ़ता स्तर और वर्षा में उतार-चढ़ाव तटीय और अपतटीय मछली पकड़ में लंबे समय की गिरावट से जुड़े हैं। निकट अवधि में पिछला उत्पादन मौजूदा उत्पादन का अनुमान लगाने में मदद करता है, जबकि तापमान के झटकों का असर भंडार पर देर से पड़ सकता है। इसके पीछे मछलियों के आवास में बदलाव, प्रजनन और शुरुआती जीवन चरणों में विफलता तथा खाद्य जाल में ऐसे व्यवधान शामिल हैं जो कुछ प्रजातियों को लाभ और दूसरों को नुकसान पहुंचाते हैं।

एक अलग संवेदनशीलता आकलन में 36 प्रजातियों और 24 मत्स्य क्षेत्रों का अध्ययन किया गया। इसमें मुख्य मापदंड भविष्य में तापमान बढ़ने के प्रति संवेदनशीलता और जोखिम थे। जोखिम का आकलन 2100 तक के उच्च उत्सर्जन परिदृश्य के आधार पर किया गया। अपतटीय बेड़े तटीय बेड़ों की तुलना में अधिक संवेदनशील पाए गए। समुद्र गर्म होने के साथ उन मत्स्य क्षेत्रों को सबसे बड़ा खतरा है जो कम उत्पादकता वाली, सीमित रूप से चलायमान या सीमित आवास वाली प्रजातियों पर बहुत अधिक निर्भर हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि प्रबंधन में इन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और कोटा, मौसम तथा जाल संबंधी नियमों में जलवायु के दबाव को शामिल करना चाहिए।

वैश्विक संदर्भ भी इन निष्कर्षों की पुष्टि करता है। पिछले तीन दशकों में समुद्री हीटवेव ज्यादा आम हुई हैं और गर्मी से व्यावसायिक मछली भंडार के आवास क्षेत्र बदल रहे हैं। कुछ मछलियां राष्ट्रीय सीमाएं पार कर जाती हैं, जिससे पकड़ के बंटवारे पर विवाद हो सकता है। उत्तर-पूर्व अटलांटिक मैकेरल के मामले में ऐसा देखा गया है। बदलती परिस्थितियों को ध्यान में रखकर योजना बनाने वाले, मछली भंडार की आवाजाही पर बारीकी से नजर रखने वाले और पड़ोसियों के साथ तालमेल रखने वाले मत्स्य क्षेत्र पकड़ को टिकाऊ स्तर पर बनाए रखने में बेहतर स्थिति में होते हैं।

स्थान बदलती प्रजातियां

पोलक जैसी ठंडे पानी की प्रजातियां दक्षिण कोरिया के प्रमुख मछली पकड़ क्षेत्रों से घट गई हैं या गायब हो गई हैं, जबकि गर्म पानी की प्रजातियों का दायरा बढ़ रहा है। कई बंदरगाहों के लिए आर्थिक आधार रही स्क्विड को समुद्री परिस्थितियों में बदलाव के कारण मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। सार्डिन और एंकोवी की मात्रा तापमान और समुद्री धाराओं के साथ बदलती है। हाल में एंकोवी की घटती संख्या ने छोटे ट्रॉलर को बुरी तरह प्रभावित किया है। जेजू के आसपास गर्म पानी के साथ उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय प्रजातियों की संख्या बढ़ी है, जिससे स्थानीय जीव समुदायों की संरचना और पकड़ में बदलाव आया है।

अपतटीय बेड़ों को ज्यादा खतरा

बंदरगाह से दूर काम करने पर तेजी से बदलते तूफानों, लौटने में ज्यादा समय लगने और समुद्र में उपकरण खराब होने का खतरा बढ़ जाता है, जहां मरम्मत करना मुश्किल होता है। संवेदनशीलता अध्ययन में पाया गया कि दूरी, लक्षित प्रजातियों और वैकल्पिक विकल्पों की कमी के कारण अपतटीय बेड़े जलवायु के संकेतों के प्रति ज्यादा जोखिम में हैं। यह तस्वीर समुद्र में काम करने वाले कई कप्तानों के मौजूदा अनुभवों से मेल खाती है।

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दांव पर अर्थव्यवस्था

समुद्र में जलवायु का दबाव बाजार में भी दिख रहा है। बार-बार आने वाली हीटवेव से जलीय कृषि के पिंजरों में मछलियों की मौत बढ़ती है, खासकर साशिमी के लिए इस्तेमाल होने वाली फ्लैटफिश और रॉकफिश की, जिससे आपूर्ति घट सकती है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मछली और शेलफिश का मूल्य सूचकांक एक साल पहले की तुलना में जुलाई में 7.6 प्रतिशत बढ़ा। येलो क्रोकर की कीमत 13 प्रतिशत से ज्यादा उछली, जबकि मैकेरल और सीप के दाम 12 प्रतिशत से अधिक बढ़े। इसी अवधि में थोक फ्लैटफिश की कीमत करीब 21 प्रतिशत बढ़ी। कुल महंगाई दर इससे काफी कम थी, यानी समुद्री भोजन के दाम कई अन्य खाद्य पदार्थों के मुकाबले घरेलू बजट पर तेजी से असर डाल रहे हैं।

कुछ समुद्री खाद्य पदार्थों का आयात बढ़ा है, क्योंकि कुछ प्रजातियों का घरेलू उत्पादन कमजोर हुआ है। यह बदलाव मछली पकड़ के रुझान से मेल खाता है। समुद्र में बने रहने वाले मछुआरों के लिए लंबी यात्राओं का मतलब ईंधन का ज्यादा खर्च और यह जोखिम भी है कि मछली उतारने से पहले मौसम के कारण बंदरगाह बंद हो जाएं। उपभोक्ताओं के लिए कीमतों में उतार-चढ़ाव से भोजन की योजना बनाना मुश्किल होता है और भीषण गर्मी के मौसम में पसंदीदा पकवान खरीदना महंगा पड़ता है।

नीति निर्माता अनुकूलन के लिए ज्यादा धन दे रहे हैं। इसमें स्मार्ट जलीय कृषि मॉडल विकसित करने, मौजूदा मछली फार्मों में स्वचालन का समर्थन करने और नावों की संख्या घटाकर मत्स्य क्षेत्र के पुनर्गठन के लिए वित्त उपलब्ध कराने वाले कार्यक्रम शामिल हैं। मकसद आपूर्ति स्थिर रखना, सुरक्षा बढ़ाना और पारिस्थितिकी तंत्र को बदलाव के अनुकूल होने के लिए समय देना है।

सुरक्षा सुधार और अनुकूलन के उपाय

अधिकारी जोखिम घटाने की दिशा में काम कर रहे हैं, साथ ही यह भी मान रहे हैं कि समुद्र में बदलाव जारी रहेगा। एक सरकारी कार्यबल ने नाव मालिकों से सुरक्षा सीढ़ियां लगाने, डेक पर हर समय लाइफ जैकेट पहनना अनिवार्य करने और सभी विदेशी चालक दल के सदस्यों के लिए सुरक्षा प्रशिक्षण सुनिश्चित करने की सिफारिश की है। यह समूह चाहता है कि समुद्र में नाविकों तक ज्यादा तेज और स्थानीय स्तर पर सटीक मौसम अपडेट पहुंचें तथा खोज और बचाव सेवाओं में सुधार हो। निरीक्षकों ने कामकाजी नावों पर सुरक्षा उपकरणों की बिना सूचना जांच तेज कर दी है।

स्थानीय सरकारें भी प्रयोग कर रही हैं। कुछ जगह पकड़ी गई जेलीफिश के लिए थोड़ी रकम दी जाती है, ताकि जाल साफ हों और तटीय पानी को जाम करने वाला जैव पदार्थ हटाया जा सके। कम पकड़ वाले मौसम में दिवालिया होने से बचाने के लिए स्क्विड पकड़ने वाले नाविकों को कर्ज और सेवानिवृत्ति पैकेज दिए जा रहे हैं। जहां मछली भंडार पर दबाव बना हुआ है, वहां पकड़ कम करने के कार्यक्रमों का मकसद मछली पकड़ने की गतिविधि घटाना है।

अनुकूलन का मतलब यह भी हो सकता है कि क्या और कहां उगाया जाए, इसे बदला जाए। दक्षिण कोरिया समुद्री शैवाल, खासकर जिम, के उत्पादन में पहले से ही दुनिया में अग्रणी है। समुद्री शैवाल की खेती में पशु आहार की जरूरत नहीं होती, इससे पानी की गुणवत्ता सुधर सकती है और ऐसी स्थिर आमदनी मिल सकती है जिस पर चलायमान मछली पकड़ के मुकाबले तूफानों का कम असर पड़ता है। बीज की गुणवत्ता, फार्म के डिजाइन और नए बाजारों में निवेश जारी रखने से तट के किनारे अतिरिक्त रोजगार पैदा हो सकते हैं और जंगली मछली भंडार पर दबाव घट सकता है।

बेहतर आंकड़े मददगार होंगे। पानी के भीतर चलने वाले ड्रोन से पर्यावरणीय डीएनए के नमूने लेना यह पता लगाने का तेज तरीका बन रहा है कि कौन-सी प्रजातियां कहां मौजूद हैं। मछली भंडार के आकलन में इन उपकरणों का इस्तेमाल करने से गर्म पानी की नई प्रजातियों के पहुंचने या प्रजातियों के जीवन के अहम चरणों पर खतरा आने की चेतावनी जल्दी दी जा सकती है। नीति निर्माता जलवायु को ध्यान में रखने वाले पकड़ नियमों, प्रजनन और शुरुआती विकास के क्षेत्रों में अधिक समुद्री संरक्षित क्षेत्रों और भविष्य की परिस्थितियों के अनुकूल मजबूत प्रजातियों के भंडार बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं।

वैश्विक संबंध: जेजू से अंटार्कटिका तक

दक्षिण कोरिया के बेड़े अपने देश से बहुत दूर भी काम करते हैं। 2024 में नॉर्वे, चीन और दक्षिण कोरिया की नावों ने अंटार्कटिका के जलक्षेत्र से करीब पांच लाख टन क्रिल पकड़ी। क्रिल व्हेल, सील, पेंगुइन और समुद्री पक्षियों का भोजन है। गहरे समुद्र तक कार्बन पहुंचाकर यह कार्बन भंडारण में भी भूमिका निभाती है। क्रिल ऑयल और सैल्मन के चारे के बाजार बढ़ने से इस मछली पकड़ उद्योग का मुनाफा बढ़ा है, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि जरूरत से ज्यादा पकड़ और गर्म होते समुद्र दक्षिणी महासागर की एक अहम प्रजाति को नुकसान पहुंचा सकते हैं। संरक्षण उपायों को अद्यतन करने के लिए हाल के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय वार्ताएं मुश्किलों में रही हैं। इससे संवेदनशील क्षेत्रों में पकड़ केंद्रित होने का खतरा बढ़ता है।

दक्षिण कोरिया के समुद्री खाद्य उद्योग का भविष्य इन व्यापक फैसलों से जुड़ा है। मछली भंडार सीमाएं पार कर जाते हैं, नए बाजार मांग को बदलते हैं और जलवायु परिवर्तन ठंडे समुद्र के लिए बनाए गए नियमों की परीक्षा लेता है। मछलियों का उचित बंटवारा करने और वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित सीमाओं के भीतर पकड़ बनाए रखने वाले समझौते, मजबूत घरेलू सुरक्षा और प्रशिक्षण मानकों के साथ, तटीय लोगों की आजीविका की रक्षा करने में काफी मदद करेंगे।

मुख्य बातें

  • दक्षिण कोरिया में पिछले साल समुद्र में मौतों की संख्या बढ़कर 164 हो गई, जो इससे पिछले साल के मुकाबले करीब 75 प्रतिशत अधिक थी। इनमें ज्यादातर मौतें मछली पकड़ने वाली नावों पर हुईं।
  • कोरिया के आसपास समुद्र की सतह का तापमान 1968 से करीब 1.58C बढ़ा है, जो वैश्विक औसत वृद्धि से दोगुने से भी अधिक है।
  • 2020 से 2024 के बीच समुद्री मौसम चेतावनियां करीब 65 प्रतिशत बढ़ीं, जिससे तट से दूर काम करने वाली छोटी नावों का जोखिम बढ़ा।
  • पिछले दशक में स्क्विड की पकड़ करीब 92 प्रतिशत घटी, जबकि एंकोवी की पकड़ लगभग 46 प्रतिशत कम हुई।
  • शोध में बढ़ते तापमान, कार्बन डाइऑक्साइड के ऊंचे स्तर, बदलती बारिश और मत्स्य उत्पादन में गिरावट के बीच लंबे समय का संबंध सामने आया है।
  • लक्षित प्रजातियों और सुरक्षित बंदरगाहों से अधिक दूरी के कारण अपतटीय बेड़े तटीय बेड़ों से ज्यादा जोखिम में हैं।
  • चालक दल की बढ़ती उम्र और प्रवासी मजदूरों पर निर्भरता के साथ प्रशिक्षण की कमी और भाषा की बाधाएं सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाती हैं।
  • सुधारों में लाइफ जैकेट अनिवार्य करना, सुरक्षा सीढ़ियां लगाना, विदेशी चालक दल को प्रशिक्षण देना, बेहतर मौसम आंकड़े और खोज तथा बचाव सेवाओं में सुधार शामिल हैं।
  • हीटवेव और जलीय कृषि को हुए नुकसान से समुद्री भोजन महंगा हो रहा है। येलो क्रोकर, मैकेरल और सीप के दाम दो अंकों के प्रतिशत में बढ़े हैं।
  • समुद्री शैवाल की खेती का विस्तार, स्मार्ट जलीय कृषि और जलवायु को ध्यान में रखने वाला प्रबंधन तटीय समुदायों के रोजगार को बनाए रखने के व्यावहारिक तरीके हैं।
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