दिल्ली में प्रदूषण संकट के बीच भारत के सुप्रीम कोर्ट ने ग्रीन पटाखों की अनुमति दी

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दिल्ली में प्रदूषण संकट के बीच भारत के सुप्रीम कोर्ट ने ग्रीन पटाखों की अनुमति दी

ज़हरीली हवा के बीच कड़े नियमों वाली दिवाली

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली के दौरान दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में ग्रीन पटाखों की बिक्री और सीमित इस्तेमाल की अनुमति दी है। साथ ही, इनके इस्तेमाल की जगह, समय और तरीके पर कड़ी शर्तें लगाई हैं। यह आदेश ऐसे सप्ताह में आया है जब राजधानी की हवा बहुत खराब से लेकर खतरनाक श्रेणियों में रही है और कई इलाकों में PM2.5 का स्तर स्वास्थ्य संबंधी दिशानिर्देशों से काफी ऊपर दर्ज किया गया है। अदालत ने इस छूट को अस्थायी और प्रयोग के तौर पर बताया है। इसका मकसद यह परखना है कि क्या कड़े नियमन से अवैध पटाखों के कारोबार पर रोक लगाई जा सकती है और जनस्वास्थ्य की रक्षा भी की जा सकती है।

विषय-सूची
  1. ज़हरीली हवा के बीच कड़े नियमों वाली दिवाली
  2. ग्रीन पटाखा आखिर है क्या
  3. इस दिवाली के लिए अदालत के नियम
  4. स्वास्थ्य पर असर और सर्दियों की शुरुआत में प्रदूषण क्यों बढ़ता है
  5. न्यायाधीशों और अधिकारियों ने क्या कहा
  6. क्या सीमित छूट अवैध आतिशबाज़ी पर रोक लगा सकती है
  7. निवासियों को क्या उम्मीद करनी चाहिए और सुरक्षित कैसे रहें
  8. मुख्य बातें

ग्रीन पटाखों को पारंपरिक आतिशबाज़ी की तुलना में कम प्रदूषक छोड़ने के लिए तैयार किया जाता है। इनमें रासायनिक मिश्रण बदले जाते हैं, कुछ ज़हरीले यौगिकों से परहेज़ किया जाता है और कणीय उत्सर्जन में करीब एक-तिहाई कमी लाने का लक्ष्य होता है। डॉक्टरों और वैज्ञानिकों का कहना है कि कम प्रदूषण वाले मिश्रणों से भी महीन और अति-महीन कण निकलते हैं, जो फेफड़ों में गहराई तक पहुंचते हैं। दिल्ली की हवा में सर्दियों के मौसम और प्रदूषण के कई स्रोतों के कारण दिवाली से पहले ही प्रदूषण का स्तर अक्सर ऊंचा रहता है। ऐसे में प्रदूषण का कोई भी अतिरिक्त भार शहर की वायु गुणवत्ता को गंभीर या उससे भी बदतर श्रेणी में पहुंचा सकता है।

अदालत के तय नियमों के तहत, केवल प्रमाणित ग्रीन पटाखे ही लाइसेंसधारी विक्रेताओं के ज़रिए तय स्थानों पर बेचे जा सकते हैं। त्योहार से ठीक पहले कुछ दिनों तक ही बिक्री की अनुमति है। पटाखे केवल दिवाली की पूर्व संध्या और दिवाली के दिन, दो सीमित समयावधियों में, तय जगहों पर फोड़े जा सकते हैं। पटाखे फोड़ने की कुल अनुमत अवधि तीन घंटे है, जो सुबह और शाम के समय में बंटी है। बेरियम वाले पटाखों पर प्रतिबंध है, ऑनलाइन बिक्री की अनुमति नहीं है और पटाखों की लड़ियां नहीं चलाई जा सकतीं। उत्पादों पर सत्यापन के लिए राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (NEERI) का QR कोड होना ज़रूरी है।

इन नियमों को लागू करने के लिए कई एजेंसियां मिलकर काम करेंगी। पुलिस, स्थानीय प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी संयुक्त गश्त करेंगे, बिक्री केंद्रों पर QR कोड की जांच करेंगे, बेतरतीब नमूने लेंगे और नियमों का पालन न करने वाला माल ज़ब्त करेंगे। उल्लंघन करने वालों के लाइसेंस रद्द किए जा सकते हैं और उन पर जुर्माना लगाया जा सकता है। पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन औचक जांच करेगा। असर का आकलन करने के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य बोर्ड त्योहार के दौरान हवा की गुणवत्ता पर नज़र रखेंगे और अदालत को रिपोर्ट सौंपेंगे।

सर्दियों की शुरुआत के साथ दिल्ली के अधिकारियों ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान भी लागू कर दिया है। निर्माण स्थलों की धूल पर नियंत्रण, गैर-आपातकालीन सेवाओं के लिए डीज़ल जनरेटर के इस्तेमाल पर पाबंदियां और व्यावसायिक खाना पकाने में कोयले तथा लकड़ी के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लागू हैं। इन उपायों का लक्ष्य शहर की सर्दियों की धुंध के पीछे मौजूद प्रदूषण के व्यापक स्रोतों पर काबू पाना है। इनमें वाहनों का धुआं, निर्माण स्थलों की धूल और पड़ोसी राज्यों में फसल अवशेष जलाने से उठने वाला धुआं शामिल है। पटाखों पर सीमित छूट, त्योहार के सप्ताह में प्रदूषण को बेकाबू होने से रोकने की इसी व्यापक कोशिश का हिस्सा है।

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ग्रीन पटाखा आखिर है क्या

पहले के अदालती आदेशों के बाद पारंपरिक आतिशबाज़ी के विकल्प के तौर पर ग्रीन पटाखे विकसित किए गए। वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद और NEERI से जुड़े शोधकर्ताओं ने प्रमुख प्रदूषकों और शोर को घटाने के लिए पारंपरिक मिश्रणों में बदलाव किया। एक लक्ष्य बेरियम के लवणों को हटाना था। ये प्रभावी ऑक्सीकारक तो हैं, लेकिन ज़हरीले अवशेष छोड़ते हैं। ग्रीन पटाखों के कई मिश्रणों में बेरियम का इस्तेमाल नहीं होता। उनमें वैकल्पिक ऑक्सीकारक और ऐसे योजक होते हैं जो धूल को दबाते हैं और जलने के दौरान कुछ जलवाष्प छोड़ते हैं। इससे कणीय प्रदूषण घटता है और वह घना, देर तक बना रहने वाला धुआं कम होता है जिसे कई लोग दिवाली की रातों से जोड़ते हैं।

ग्रीन पटाखों की आम श्रेणियों में फ्लावर पॉट, पेंसिल, फुलझड़ी, ज़मीन पर घूमने वाला चक्कर और कम उत्सर्जन वाले एकल हवाई पटाखे शामिल हैं। निर्माता दावा करते हैं कि इनसे कणीय पदार्थ और सल्फर डाइऑक्साइड का उत्सर्जन 30 से 40 प्रतिशत कम होता है और शोर भी कम होता है। उद्योग का यह भी कहना है कि नए मिश्रणों में एल्युमिनियम की मात्रा घटाई गई है और चमक तथा आवाज़ पैदा करने वाली थर्माइट अभिक्रिया में बदलाव किया गया है। लक्ष्य सबसे ज़्यादा प्रदूषणकारी धुएं को घटाते हुए आतिशबाज़ी के दृश्य प्रभाव बनाए रखना है।

प्रयोगशाला में मिले नतीजे हमेशा सड़क पर वैसा ही असर नहीं दिखाते। असल में लोग अक्सर समूहों में और कम हवा की स्थिति में पटाखे चलाते हैं, जब धुआं ज़मीन के पास जमा हो जाता है। अध्ययनों में पाया गया है कि ग्रीन आतिशबाज़ी से भी बड़ी मात्रा में अति-महीन कण निकलते हैं। ये सबसे ज़्यादा नुकसानदेह होते हैं, क्योंकि श्वसन तंत्र में गहराई तक पहुंच जाते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि धुएं का कोई भी अतिरिक्त गुबार घरघराहट, सीने में जकड़न या दमे का दौरा शुरू कर सकता है, खासकर बच्चों, बुज़ुर्गों और हृदय या श्वसन रोग से पीड़ित लोगों में।

प्रमाणन का मकसद खरीदारों और नियम लागू करने वालों को कम प्रदूषण वाले उत्पाद पहचानने में मदद करना है। असली ग्रीन पटाखों पर NEERI का QR कोड और लोगो होना चाहिए। कोड स्कैन करने पर निर्माता का नाम, लाइसेंस का विवरण और उस उत्पाद से जुड़ी उत्सर्जन जांच रिपोर्ट देखी जा सकती है। अदालत ने प्रवर्तन दलों से बिक्री केंद्रों पर कोड की जांच करने और सही लेबल न होने वाले उत्पाद ज़ब्त करने को कहा है।

नकली या गलत लेबल वाला माल लगातार चुनौती बना हुआ है। पैकेजिंग बाज़ार में पहुंचने के बाद अधिकारी असली मिश्रणों की पहचान करने में मुश्किल का सामना करते रहे हैं। कम समय में हर खेप की जांच करना व्यावहारिक नहीं है, इसलिए अदालत ने बेतरतीब नमूने लेने और मौके पर जांच करने को कहा है। PESO और स्थानीय फॉरेंसिक प्रयोगशालाएं इस काम में मदद करती हैं, हालांकि अधिकारियों ने सीमित क्षमता और रासायनिक विश्लेषण में देरी की बात कही है। इस परीक्षण की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि मौके पर ये जांच कितनी तेज़ी और नियमितता से हो पाती हैं।

इस दिवाली के लिए अदालत के नियम

कहां और कब: ग्रीन पटाखे केवल तय खुले स्थानों पर फोड़े जा सकते हैं। आम तौर पर ये वे सामुदायिक मैदान होते हैं जिन्हें स्थानीय अधिकारी चिह्नित करते हैं। पटाखे चलाने की कुल अनुमत अवधि तीन घंटे है, जो दो समयावधियों में बंटी है: सुबह 6 बजे से 7 बजे तक और रात 8 बजे से 10 बजे तक। ये समय दिवाली के दिन और कुछ अधिकार क्षेत्रों में त्योहार की पूर्व संध्या पर लागू होंगे। इन समयावधियों के बाहर या भीड़भाड़ वाली रिहायशी गलियों में पटाखे फोड़ने की अनुमति नहीं है।

कौन बेच सकता है: केवल NEERI में पंजीकृत लाइसेंसधारी विक्रेता, जिनके पास PESO की वैध अनुमति हो, प्रमाणित ग्रीन पटाखे बेच सकते हैं। बिक्री ऑफलाइन, अस्थायी कियोस्क या जिला प्रशासन की मंज़ूरी वाले तय स्टॉलों पर पुलिस की सलाह से की जाएगी। विक्रेताओं को सीमित अवधि के लाइसेंस मिलेंगे और त्योहार के बाद बचा हुआ माल लौटाना या सुरक्षित तरीके से नष्ट करना होगा।

क्या प्रतिबंधित है: बेरियम वाले पटाखे, जुड़ी हुई पटाखों की लड़ियां और पारंपरिक, अधिक उत्सर्जन वाले उत्पाद प्रतिबंधित रहेंगे। ऑनलाइन खरीदी गई आतिशबाज़ी की अनुमति नहीं है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के बाहर से लाया गया माल NCR में बेचना या इस्तेमाल करना प्रतिबंधित है। अधिकारियों ने चेताया है कि नियमों के उल्लंघन पर माल ज़ब्त किया जा सकता है, जुर्माना लगाया जा सकता है और लाइसेंस रद्द किए जा सकते हैं।

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स्वास्थ्य पर असर और सर्दियों की शुरुआत में प्रदूषण क्यों बढ़ता है

PM2.5 का मतलब है 2.5 माइक्रोमीटर से छोटे कण। ये कण शरीर की कई सुरक्षा परतों को पार कर फेफड़ों के सबसे गहरे हिस्सों तक पहुंचते हैं और रक्तप्रवाह में भी जा सकते हैं। इनसे दिल का दौरा, स्ट्रोक, दमे का बढ़ना और गर्भावस्था पर प्रतिकूल असर जुड़ा है। जनस्वास्थ्य शोधकर्ताओं का अनुमान है कि साफ हवा के दिशानिर्देशों को पूरा करने वाली स्थिति की तुलना में, प्रदूषित हवा में लंबे समय तक रहने से दिल्ली के निवासियों की उम्र करीब 12 साल घट जाती है। हाल के एक वैश्विक अध्ययन ने पिछले चार दशकों में वायु प्रदूषण के कारण करीब 13.5 करोड़ समयपूर्व मौतों का अनुमान लगाया। इस बोझ का बड़ा हिस्सा भारत और चीन पर पड़ा है।

हर साल देर से शुरू होने वाली शरद ऋतु और सर्दियों की शुरुआत में दिल्ली की हवा कई कारणों से खराब होती है, जिनका आतिशबाज़ी से लेना-देना नहीं है। ठंडी रातों में तापमान का उलटाव प्रदूषकों को सतह के पास रोक लेता है। हवा की रफ्तार कम होने से प्रदूषक फैल नहीं पाते। यातायात भारी रहता है और निर्माण स्थलों तथा कच्ची सड़कों से धूल उड़ती है। अक्टूबर और नवंबर में पंजाब और हरियाणा में फसल अवशेष जलाने से उठा धुआं राजधानी क्षेत्र तक पहुंचता है। ऐसे में आतिशबाज़ी पहले से प्रदूषण से भरी हवा पर एक और बोझ डालती है।

पिछली दिवाली के आंकड़ों में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है। हाल के एक साल में दिवाली के दौरान दिल्ली में 24 घंटे का PM2.5 स्तर करीब 380 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पहुंच गया था, जो शहर के मौसमी औसत से भी काफी ज़्यादा था। पिछले साल शहर के कुछ हिस्सों में AQI सुरक्षित सीमा से दस गुने से भी अधिक हो गया था। ग्रीन आतिशबाज़ी, पटाखे चलाने के कम समय और तय जगहों से प्रदूषण का उछाल घट सकता है। फिर भी कुल असर मौसम, पहले से मौजूद प्रदूषण के स्रोतों और ज़मीनी स्तर पर नियमों के पालन पर निर्भर करेगा।

श्वसन या हृदय रोग से लंबे समय से जूझ रहे लोगों में प्रदूषण का छोटा-सा उछाल भी लक्षण शुरू कर सकता है। दिवाली की रात के आसपास अस्पतालों में सांस की तकलीफ के कारण आपातकालीन विभाग में आने वाले मरीज़ों की संख्या आम तौर पर बढ़ जाती है। इसीलिए अदालत के आदेश में सीमित समय, धुआं फैलने के लिए खुले स्थान और हवा पर अनावश्यक बोझ डालने वाले नियम-विरुद्ध पटाखों पर कार्रवाई पर ज़ोर दिया गया है।

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न्यायाधीशों और अधिकारियों ने क्या कहा

पीठ ने कहा कि उसे इस हकीकत पर विचार करना पड़ा कि पूर्ण प्रतिबंध से आतिशबाज़ी नहीं रुकी और तस्करी से उद्देश्य कमजोर पड़ा। उसका कहना था कि करीबी निगरानी में सीमित समय के लिए केवल प्रमाणित उत्पादों की अनुमति देना, ऐसे व्यापक प्रतिबंध से कम नुकसानदेह हो सकता है जिसे आसानी से धता बताकर अधिक उत्सर्जन वाले पटाखों को बाज़ार में पहुंचने दिया जाए।

पटाखों पर कई याचिकाओं की सुनवाई कर चुके मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई ने विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग प्रतिबंधों पर पिछली सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य सामने रखा था।

अगर पटाखों पर प्रतिबंध लगाना है, तो पूरे देश में लगना चाहिए। केवल दिल्ली के लिए नीति नहीं हो सकती।

पिछली सर्दियों में पीठ की एक अन्य टिप्पणी में आस्था और जनस्वास्थ्य पर अदालत का रुख झलका था।

कोई भी धर्म ऐसी गतिविधि को बढ़ावा नहीं देता जो प्रदूषण फैलाए या लोगों के स्वास्थ्य से समझौता करे।

वायु प्रदूषण के मामलों में अदालत की सहायता कर रहीं वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने पीठ से यह विचार करने का आग्रह किया कि खराब हवा का सबसे भारी बोझ किस पर पड़ता है।

प्रदूषण से अमीरों को नहीं, गरीबों को अधिक तकलीफ होती है।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सरकार अदालत की योजना का समर्थन करेगी और नियमों के दायरे में सुरक्षित उत्सव सुनिश्चित करने के लिए काम करेगी।

यह फैसला स्वास्थ्य की रक्षा करते हुए लोगों की भावनाओं का सम्मान करता है। हम नियमों को सख्ती से लागू करेंगे और सभी निर्देशों का पूरा पालन करेंगे।

क्या सीमित छूट अवैध आतिशबाज़ी पर रोक लगा सकती है

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के राज्यों ने दलील दी कि तय समयावधियों में ग्रीन पटाखों की अनुमति देने से तस्करी और कालाबाज़ारी घट सकती है। निर्माताओं का कहना है कि प्रमाणित उत्पादों के लिए स्पष्ट रास्ता मिलने से ऐसे कारोबार को औपचारिक रूप दिया जा सकता है, जो अन्यथा भूमिगत हो जाता है और जहां सुरक्षा तथा गुणवत्ता नियंत्रण खत्म हो जाते हैं। कुछ विक्रेताओं का यह भी तर्क है कि आतिशबाज़ी का अनुभव चाहने वाले ग्राहक जो उपलब्ध होगा, वही खरीदेंगे। इसलिए निगरानी में कम प्रदूषण वाले विकल्प देने से नुकसान घट सकता है।

आलोचकों का जवाब है कि दिल्ली और उसके आसपास नियम लागू करने में वर्षों से मुश्किलें रही हैं। नकली लेबल और बदली हुई पैकेजिंग जारी हैं। प्रयोगशाला जांच के बिना मौके पर तैनात दलों के लिए रासायनिक मिश्रण पहचानना मुश्किल है। दिल्ली की कई राज्यों की सीमाओं से नज़दीकी के कारण अवैध माल रोकना और जटिल हो जाता है। इन चिंताओं से निपटने के लिए अदालत ने बिक्री को NCR के तय स्थानों तक सीमित किया, क्षेत्र के बाहर से माल लाने पर रोक लगाई और PESO तथा फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं की मदद से बेतरतीब नमूने लेने को कहा। अधिकारियों ने माना है कि जांच की क्षमता सीमित है, इसलिए तुरंत मौके पर जांच और QR कोड का सत्यापन बेहद ज़रूरी है।

जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ भीड़ के असर की ओर ध्यान दिलाते हैं। जब लोग कम प्रदूषण वाले पटाखे भी एक ही सीमित समय में चलाते हैं, तो उत्सर्जन कुछ जगहों और समय में केंद्रित हो सकता है। इसीलिए अदालत खुले स्थानों का इस्तेमाल और प्रदूषण के हॉटस्पॉट की निगरानी अनिवार्य करती है। यह परीक्षण सफल होगा या नहीं, यह नियमों के पालन, मौसम और वाहनों, उद्योगों तथा आग से होने वाले पहले से मौजूद प्रदूषण पर निर्भर करेगा। दिवाली के बाद बोर्डों की ओर से सौंपी जाने वाली वायु गुणवत्ता रिपोर्ट से अदालत को यह तय करने के लिए आंकड़े मिलेंगे कि सीमित छूट के साथ प्रदूषण-मुक्त त्योहार सप्ताह संभव है या नहीं।

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निवासियों को क्या उम्मीद करनी चाहिए और सुरक्षित कैसे रहें

नए नियमों के बावजूद निवासियों को धुएं और शोर की छोटी लेकिन तीव्र अवधि के लिए तैयार रहना चाहिए। अदालत की योजना का लक्ष्य बिना रोक-टोक वाली रात की तुलना में उत्सर्जन कम रखना और उसे बड़े क्षेत्र में फैलाना है। फिर भी कम हवा और तापमान का उलटाव जैसी स्थितियों में धुआं ज़मीन के पास जमा हो सकता है। छोटे बच्चों, बुज़ुर्गों, दमे या COPD से पीड़ित लोगों वाले परिवार हवादार इनडोर जगहों पर उत्सव मनाने या तय खुले स्थानों में होने वाले सामुदायिक कार्यक्रमों में शामिल होने पर विचार कर सकते हैं।

कुछ आसान कदम प्रदूषण के संपर्क को कम कर सकते हैं। बाहर उत्सव मनाने की योजना तय समयावधियों में बनाएं और उन जगहों पर देर तक न रुकें जहां पटाखे चल रहे हों। शाम के समय खिड़कियां बंद रखें और उपलब्ध हो तो HEPA फ़िल्टर वाला एयर प्यूरिफायर इस्तेमाल करने पर विचार करें। थोड़े समय के लिए बाहर निकलने पर N95 या इसी तरह के मास्क सुरक्षा दे सकते हैं। आधिकारिक ऐप या डिस्प्ले पर स्थानीय AQI देखें और स्तर बहुत अस्वस्थ श्रेणी में पहुंचने पर कठिन शारीरिक गतिविधि सीमित रखें। इनहेलर इस्तेमाल करने वाले लोग उसे पास रखें और उपचार योजना के बारे में डॉक्टर की सलाह मानें।

पटाखे खरीदने वाले निवासी NEERI QR कोड की जांच कर सकते हैं और छेड़छाड़ वाले या बिना लेबल के माल से बच सकते हैं। तय समय के बाहर या प्रतिबंधित जगहों पर पटाखे चलाने समेत नियमों के उल्लंघन की सूचना स्थानीय पुलिस या प्रदूषण नियंत्रण हेल्पलाइन को दी जा सकती है। अधिकारियों ने कहा है कि अदालत के निर्देश लागू करने के लिए दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के NCR जिलों में पैदल गश्त की जाएगी।

मुख्य बातें

  • सुप्रीम कोर्ट ने अस्थायी परीक्षण के तौर पर दिवाली पर दिल्ली NCR में केवल NEERI से प्रमाणित ग्रीन पटाखों की अनुमति दी है।
  • पटाखे दिवाली की पूर्व संध्या और दिवाली के दिन, सुबह 6 से 7 बजे और रात 8 से 10 बजे तक, दो समयावधियों में और केवल तय जगहों पर फोड़े जा सकते हैं।
  • बिक्री लाइसेंसधारी विक्रेताओं के ज़रिए तय स्थानों पर ऑफलाइन होगी। हर स्वीकृत उत्पाद पर QR कोड होना ज़रूरी है।
  • पारंपरिक आतिशबाज़ी, बेरियम वाले पटाखे, पटाखों की लड़ियां, ऑनलाइन खरीद और NCR के बाहर से लाया गया माल प्रतिबंधित है।
  • पुलिस और प्रदूषण नियंत्रण अधिकारियों की संयुक्त गश्त में QR कोड की जांच होगी, बेतरतीब नमूने लिए जाएंगे और अवैध माल ज़ब्त किया जाएगा।
  • CPCB और राज्य बोर्ड त्योहार के दौरान हवा की गुणवत्ता पर नज़र रखेंगे और अदालत को रिपोर्ट सौंपेंगे।
  • दिल्ली ने GRAP लागू कर दिया है। इसके तहत गैर-आपातकालीन इस्तेमाल के लिए डीज़ल जनरेटर सीमित किए गए हैं और व्यावसायिक खाना पकाने में कोयले तथा लकड़ी पर प्रतिबंध लगाया गया है।
  • डॉक्टरों का कहना है कि ग्रीन आतिशबाज़ी से भी महीन और अति-महीन कण निकलते हैं, जो श्वसन और हृदय रोगों को बढ़ा सकते हैं।
  • निर्माताओं और विक्रेताओं का कहना है कि नियमन के तहत पटाखों की अनुमति से तस्करी और कालाबाज़ारी घट सकती है, जबकि आलोचक नियम लागू करने की क्षमता पर सवाल उठाते हैं।
  • अदालत त्योहार के बाद के आंकड़ों की समीक्षा करेगी और तय करेगी कि सीमित छूट जारी रह सकती है या इसमें बदलाव की ज़रूरत है।
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