क्योटो की भीड़ से जापानी स्कूलों को शैक्षणिक यात्राओं पर फिर से सोचने की जरूरत

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क्योटो की भीड़ से जापानी स्कूलों को शैक्षणिक यात्राओं पर फिर से सोचने की जरूरत

एक प्रिय परंपरा क्यों बदल रही है

पीढ़ियों से क्योटो वह जगह रहा है, जिसे जापान के अधिकतर विद्यार्थी अपने स्कूल के दिनों से याद रखते हैं। अब इस परंपरा पर दबाव है। पर्यटकों की भारी भीड़, खचाखच भरी बसें और लंबी कतारें शैक्षणिक यात्राओं के महत्व को कम कर रही हैं। इसके चलते अधिक स्कूल दूसरे विकल्प तलाश रहे हैं। यह बदलाव अभी छोटा है, लेकिन बढ़ रहा है। इससे पता चलता है कि पर्यटकों की बढ़ती संख्या, केवल घूमने-फिरने से कहीं आगे के फैसलों को भी प्रभावित कर रही है।

विषय-सूची
  1. एक प्रिय परंपरा क्यों बदल रही है
  2. क्योटो में जमीनी स्तर पर क्या हुआ
  3. समस्या का पैमाना, देश में और विदेश में
  4. स्कूल अब कहां जा रहे हैं
  5. खर्च का दबाव और कमजोर येन
  6. क्योटो भीड़ को संभालने की कोशिश कैसे कर रहा है
  7. क्या क्योटो विद्यार्थियों के लिए अब भी काम का गंतव्य हो सकता है
  8. शिक्षकों और परिवारों की राय
  9. स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं के लिए इसका क्या मतलब है
  10. मुख्य बातें

क्योटो में अब भी बड़ी संख्या में लोग आते हैं। नगर निगम के एक सर्वेक्षण के मुताबिक, 2024 में यहां 5.606 करोड़ पर्यटक आए, जो 2015 के बाद दर्ज दूसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है। लेकिन विद्यार्थियों के दौरे की तस्वीर अलग है। 2024 में करीब 7.5 लाख विद्यार्थी स्कूल यात्राओं पर आए, जो 2023 के 8.1 लाख के मुकाबले 7.4 प्रतिशत कम है। शहर के अधिकारियों का कहना है कि महामारी के बाद स्कूलों की विदेश यात्राओं में बढ़ोतरी इसकी एक वजह है। वे शिक्षकों और अभिभावकों की इस बात को भी स्वीकार करते हैं कि कई समूह शहर में इसलिए नहीं आ रहे, क्योंकि कम समय में घूमने-फिरने के लिए वहां बहुत भीड़ है।

जापान की स्कूल यात्राएं सुविचारित योजना और समूह में सीखने के लिए जानी जाती हैं। इनका मकसद केवल दर्शनीय स्थल दिखाना नहीं, बल्कि और भी बहुत कुछ सिखाना है। शिक्षक इन यात्राओं के जरिए विद्यार्थियों में टीमवर्क, समय प्रबंधन और स्थानीय संस्कृति के प्रति सम्मान विकसित करते हैं। जब बसें जाम में फंस जाती हैं और विद्यार्थी कतारों में घंटों बिताते हैं, तो ये सीख प्रभावित होती है। शिक्षक और अभिभावक विचार कर रहे हैं कि क्या क्योटो के मंदिरों वाला पारंपरिक यात्रा मार्ग अब भी स्कूलों की अपेक्षाओं के मुताबिक नतीजे दे सकता है।

क्योटो में जमीनी स्तर पर क्या हुआ

टोक्यो के एक जूनियर हाई स्कूल के लिए बदलाव की शुरुआत पिछले सितंबर की यात्रा के बाद हुई। तीसरे दिन विद्यार्थियों ने ऐतिहासिक स्थलों की सूची के साथ बस और ट्रेन से छोटे समूहों में क्योटो घूमने की योजना बनाई थी। यातायात जाम ने उनका कार्यक्रम बिगाड़ दिया। किंकाकुजी के पास एक पड़ाव पर इतनी भीड़ थी कि एक समूह ने बस छोड़ दी। आखिरी मिलन स्थल पर समय से पहुंचने की चिंता में उन्होंने कितानो तेनमांगू और दूसरे स्थलों को छोड़ दिया और लगभग 13 किलोमीटर पैदल चलकर फुशिमी इनारी ताइशा पहुंचे। दूसरे समूह दिनभर शिक्षकों को फोन कर बताते रहे कि समय कम पड़ने के कारण वे कुछ जगहों पर नहीं जा पाएंगे। शाम तक साथ गए एक शिक्षक बुरी तरह थक चुके थे।

टोक्यो लौटने पर स्कूल के नेतृत्व ने एक ट्रैवल एजेंसी से सलाह ली। अगली शैक्षणिक यात्रा के लिए उन्होंने क्योटो और पास के नारा की जगह शिकोकू को चुना। मकसद संस्कृति से दूर जाना नहीं, बल्कि उसे ऐसे तरीके से जानना था जिसका विद्यार्थी वास्तव में अनुभव कर सकें। शिकोकू में कोच्चि में कत्सुओ नो ताताकी पकाने, कागावा में उडोन बनाने और देर एदो काल के इतिहास के बारे में सीखने के अवसर थे। स्कूल ने अप्रैल में अभिभावकों को इस बदलाव की जानकारी दी और किसी ने आपत्ति नहीं की।

दूसरी कक्षा के एक विद्यार्थी की मां ने ऐसी चिंताएं जाहिर कीं जो गर्म होते मौसम में यात्रा की योजना बना रहे कई परिवारों की चिंता से मेल खाती हैं। क्योटो में अत्यधिक पर्यटन की लगातार खबरें सुनने के बाद उन्हें गर्मी में बसों के लिए या किसी स्थल में प्रवेश के लिए लंबा इंतजार करने की चिंता हुई। उन्हें यह भी अच्छा लगा कि शिकोकू माता-पिता और बच्चे, दोनों के लिए नया होगा और वहां व्यावहारिक अनुभव मिलेंगे।

अब क्योटो की यात्रा को लेकर मुझे उसकी सेहत की चिंता होती है। गर्मी में अगर उसे बस में चढ़ने या किसी जगह में दाखिल होने के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़े तो मुश्किल होगी। मैंने सुना है कि शिकोकू में अनुभव पर आधारित कई कार्यक्रम हैं। मुझे लगता है कि वह वहां अच्छा समय बिता सकेगी।

विद्यार्थियों ने व्यावहारिक नजरिया अपनाया। एक ने कहा कि दोस्तों के साथ होना, जगह से ज्यादा मायने रखता है। एक अन्य विद्यार्थी शिकोकू जाने को लेकर उत्साहित था, क्योंकि वह पहले कभी वहां नहीं गया था। उनकी बातें शिक्षा में आ रहे व्यापक बदलाव से मेल खाती हैं, जहां स्कूल प्रसिद्ध स्थलों के बीच लंबी यात्राओं के बजाय ऐसी गतिविधियों को तरजीह दे रहे हैं जिनमें विद्यार्थी सीधे हिस्सा ले सकें।

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समस्या का पैमाना, देश में और विदेश में

क्योटो में भीड़ की वजह केवल विदेशी पर्यटक नहीं हैं। घरेलू पर्यटन भी इसका प्रमुख कारण है। महामारी से पहले के अनुमानों के मुताबिक, शहर में हर साल करीब 8.8 करोड़ लोग आते थे। इनमें बहुत से जापानी यात्री भी शामिल थे, जिनमें स्कूल समूह भी थे। शहर के ऐतिहासिक केंद्र में संकरी सड़कें हैं और बसों पर निर्भरता है, जिससे लोग कुछ ही प्रसिद्ध इलाकों में केंद्रित हो जाते हैं। सोशल मीडिया यात्रियों को सबसे ज्यादा तस्वीरें खिंचवाने लायक जगहों की ओर ले जाता है, जिससे दबाव और बढ़ता है।

भीड़ और व्यवहार को लेकर चिंताएं पूरे देश में हैं। विदेशी पर्यटकों के एक हालिया सर्वेक्षण में पाया गया कि 2024 में यात्रा के दौरान करीब हर तीन में से एक व्यक्ति को भीड़ से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ा। कूड़ा फैलाना, प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश करना और लंबी कतारें सबसे बड़ी शिकायतें थीं। कई उत्तरदाताओं ने कहा कि अगर अधिक शुल्क से हालात बेहतर हों और सांस्कृतिक स्थलों की रक्षा हो, तो वे इसे देने को तैयार हैं। यह सोच पर्यटन प्रबंधन के तरीकों को प्रभावित कर रही है। इनमें आवास कर और पर्यटकों के लिए विशेष परिवहन सेवाएं भी शामिल हैं।

येन की कमजोरी ने अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की रिकॉर्ड संख्या को जापान आने में मदद की है, लेकिन इससे स्कूल यात्राएं महामारी से पहले के विदेशी यात्रा स्तर पर नहीं लौटी हैं। येन के मुकाबले ईंधन और विदेश में होने वाले खर्च महंगे पड़ने के कारण कई स्कूल देश के भीतर ही यात्रा कर रहे हैं। वहीं क्योटो की भीड़ आम यात्रा मार्ग को कम आकर्षक बना रही है। कुल मिलाकर, जापान के भीतर ही गंतव्यों में विविधता आ रही है और स्कूल ऐसे क्षेत्रों में जा रहे हैं जहां समूहों के लिए घूमना अधिक सुविधाजनक है।

स्कूल अब कहां जा रहे हैं

वैकल्पिक गंतव्यों में संस्कृति, पहुंच और समूह यात्रा के अनुकूल व्यवस्थाओं का मेल है। अनुभव पर आधारित गतिविधियों के कारण शिकोकू की ओर ध्यान बढ़ा है। कोच्चि में विद्यार्थी समुराई शासन के अंत से जुड़े स्थानीय इतिहास के बारे में सीखते हुए कत्सुओ नो ताताकी बना सकते हैं। कागावा में वे उडोन गूंथते और काटते हैं, फिर उसे खाते हैं। ये कार्यक्रम शिक्षा के मौजूदा लक्ष्यों के अनुरूप हैं, जिनमें खोज और करके सीखने को प्राथमिकता दी जाती है।

टोक्यो क्षेत्र के स्कूलों के लिए इशिकावा प्रांत का कनाज़ावा एक और पसंदीदा जगह है। होकुरिकू शिंकानसेन से टोक्यो से कनाज़ावा पहुंचने में लगभग उतना ही समय लगता है जितना क्योटो जाने वाली ट्रेन से लगता है। शहर का केनरोकुएन उद्यान एक प्राकृतिक कक्षा है और वहां के स्थानीय हाई स्कूल के विद्यार्थी आने वाले छात्रों को भ्रमण कराते हैं। होक्काइदो का छोटा और सघन हाकोदाते ट्राम नेटवर्क और पैदल घूमे जा सकने वाले ऐतिहासिक इलाकों के कारण समूहों को आकर्षित करता है, जिससे समूह में आवाजाही आसान होती है।

स्कूल यात्रा कार्यक्रम काफी पहले बनाते हैं, अक्सर 18 से 24 महीने पहले। इतने लंबे समय के कारण आज लिए जा रहे फैसलों का असर कई वर्षों तक दिखेगा। इससे यह भी समझ आता है कि क्योटो से दूर जाने का छोटा-सा रुझान पर्यटकों की संख्या में फिर बदलाव आने पर भी जारी रह सकता है।

स्कूल यात्राओं के लिए एक राष्ट्रीय संघ के प्रमुख शुइची ताकेउची ने क्योटो की भूमिका को अनूठा बताया, लेकिन साथ ही आगाह किया कि मौजूदा भीड़ के स्तर पर पुराना तरीका हमेशा कारगर नहीं होता। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी पहले की तरह गतिविधियों में हिस्सा नहीं ले पा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि गंतव्यों को काफी पहले तय करने की जरूरत के कारण अधिक स्कूल क्योटो से दूरी बना सकते हैं।

इतिहास और संस्कृति के कारण स्कूल यात्राओं में क्योटो की अहमियत असाधारण है। अभी विद्यार्थी पहले की तरह गतिविधियों में हिस्सा नहीं ले पा रहे हैं, इसलिए अधिक स्कूल दूसरे क्षेत्रों को चुन सकते हैं।
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खर्च का दबाव और कमजोर येन

इस बदलाव के पीछे खर्च भी एक वजह है। परिवहन और ठहरने का खर्च आम तौर पर यात्रा के कुल बजट का करीब 70 प्रतिशत होता है। सरकारी स्कूलों की घरेलू शैक्षणिक यात्रा का औसत खर्च 2018 के शैक्षणिक वर्ष में 61,206 येन था, जो 2024 में बढ़कर 67,844 येन हो गया। नगर निकायों के शिक्षा बोर्डों ने यात्रा खर्च की अधिकतम सीमा तय करके या बाहर बिताई जाने वाली रातों की संख्या घटाकर इसका जवाब दिया है। इन दिशानिर्देशों के कारण कुछ यात्रा कार्यक्रम संभव नहीं रह जाते हैं, खासकर तब जब व्यस्त पर्यटन शहरों में होटल और बसें प्रीमियम दरों पर मिलती हैं।

मुद्रा विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव ने विकल्प बदल दिए हैं। कमजोर येन जापान को विदेशी पर्यटकों के लिए आकर्षक बनाता है, जिससे व्यस्त मौसम में प्रसिद्ध इलाकों में भीड़ बढ़ती है। इससे जापानी स्कूलों के लिए विदेश यात्राएं भी महंगी हो जाती हैं। कुछ जिलों ने वर्षों से विद्यार्थियों को विदेश भेजने के बाद उन कार्यक्रमों पर रोक लगा दी है और धन को देश के भीतर ऐसी यात्राओं के लिए लगाया है जिनका शैक्षणिक उद्देश्य स्पष्ट हो, जैसे नागासाकी में शांति पर अध्ययन या तोहोकू में आपदा से निपटने की तैयारी का अध्ययन।

जापान भर की स्थानीय सरकारें पर्यटन प्रबंधन और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए आवास कर लगा रही हैं। कई प्रांतों और शहरों की योजना 2025 से आवास कर लागू करने या बढ़ाने की है। कुछ क्षेत्रों में स्कूल समूहों को छूट मिलती है। नीतियां जगह के अनुसार अलग-अलग हैं, इसलिए स्कूलों के योजनाकार इस पर नजर रख रहे हैं कि नए कर नियम शैक्षणिक यात्राओं पर कैसे लागू होंगे और क्या इस धन से सार्वजनिक परिवहन और भीड़ प्रबंधन को सहयोग मिलेगा, जिससे समूहों का घूमना आसान हो।

क्योटो भीड़ को संभालने की कोशिश कैसे कर रहा है

क्योटो के नेताओं ने स्थानीय लोगों के दैनिक जीवन पर दबाव कम करने और पर्यटकों के लिए शहर को सुहावना बनाए रखने के उद्देश्य से कई कदम उठाए हैं। 2024 के मध्य में शुरू हुई साइटसीइंग लिमिटेड एक्सप्रेस बस पर्यटकों को कियोमिजुदेरा जैसे प्रमुख आकर्षणों तक सीधे पहुंचाती है। इसका मकसद नियमित शहर बसों को स्थानीय लोगों के लिए खाली रखना है। शरद ऋतु तक इस सेवा के यात्रियों की संख्या एक लाख से अधिक हो गई थी। इससे संकेत मिलता है कि अगर विशेष बस मार्ग आसानी से मिलें और भरोसेमंद हों, तो पर्यटक उनका इस्तेमाल करते हैं।

दूसरे प्रयोगों को लोकप्रिय होने में अधिक समय लगा है। हैंड्स फ्री बस में यात्री अपना सामान बस में छोड़ सकते हैं, जो होटलों और दर्शनीय स्थलों का चक्कर लगाती है। विदेशी पर्यटक इसका इस्तेमाल कम कर रहे हैं और उनमें से कई अब भी सामान के साथ ट्रेन या टैक्सी से जाना पसंद करते हैं। गियोन के मध्य इलाके में सामुदायिक समूहों और शहर प्रशासन ने लोगों को निजी गलियों से दूर रहने के निर्देश देने वाले संकेत लगाए हैं और माइको तथा गेको की दखल देने वाली तस्वीरें लेने से मना किया है। संदेश यह है कि संस्कृति तक पहुंच के साथ सीमाओं और निजता का सम्मान करना भी जरूरी है।

2026 में एक बड़ा बदलाव होगा। क्योटो ने आवास कर में भारी बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। कर की नई श्रेणियों के तहत अधिकतर मूल्य वर्गों में शुल्क बढ़ेंगे और लग्जरी कमरों में प्रति व्यक्ति प्रति रात अधिकतम दर 10,000 येन होगी। शहर इस अतिरिक्त राजस्व को परिवहन क्षमता, बुनियादी ढांचे और पर्यटन तथा दैनिक जीवन के बीच संतुलन बनाने वाली सेवाओं पर खर्च करने की योजना बना रहा है। अधिकारियों ने कुछ मार्गों पर स्थानीय निवासियों को प्राथमिकता देने वाली किराया व्यवस्था पर भी चर्चा की है। साथ ही, कम भीड़ वाले समय में विद्यार्थी समूहों के लिए पारंपरिक कलाओं को जानने के मुफ्त अवसरों जैसी ऑफ-सीजन गतिविधियों को बढ़ावा देना जारी है।

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क्या क्योटो विद्यार्थियों के लिए अब भी काम का गंतव्य हो सकता है

क्योटो में हर समय और हर मौसम में एक जैसी भीड़ नहीं रहती। जो शिक्षक अब भी शहर को कक्षा के रूप में इस्तेमाल करना चाहते हैं, वे सही समय और मार्ग चुनकर अनुभव बेहतर बना सकते हैं। लोकप्रिय स्थलों पर सुबह-सुबह अक्सर भीड़ संभालने लायक होती है, खासकर चेरी ब्लॉसम और शरद ऋतु के पत्तों के चरम मौसम से बाहर। सप्ताह के बीच में जाना और छोटे समूहों में घूमना, आधा दिन बसों के इंतजार में बिताए बिना शैक्षणिक लक्ष्य पूरे करने में मदद कर सकता है।

कुछ व्यावहारिक कदम इसमें मददगार हैं। स्कूल शहर की पर्यटक बस सेवाओं के साथ तालमेल कर सकते हैं और जहां संभव हो, ट्रेन को प्राथमिकता दे सकते हैं, क्योंकि क्योटो की नियमित बसें भीड़ का मुख्य अड़चन बिंदु हैं। स्थलों के एक समूह के पास ठहरने से बार-बार वाहन बदलने की जरूरत कम होगी। समूहों को अलग-अलग मार्गों पर भेजकर बाद में एक जगह मिलाया जा सकता है, जिससे सभी एक ही समय पर एक ही प्रवेश द्वार पर नहीं जुटेंगे। कई मंदिर और संग्रहालय पहले से बुकिंग पर कार्यशालाएं देते हैं, जहां व्यस्त दिनों में भी शांत माहौल में करके सीखने का मौका मिलता है।

एक या दो प्रसिद्ध स्थलों के साथ कम चर्चित इलाकों को जोड़ने वाला मिला-जुला यात्रा कार्यक्रम भी कारगर है। गियोन और कियोमिजुदेरा के अलावा, पश्चिमी अराशियामा में बांस के उपवन से दूर शांत जगहें हैं। ओकाजाकी का संग्रहालय क्षेत्र चौड़े फुटपाथों और पैदल दूरी पर मौजूद कई स्थलों के लिए जाना जाता है। बसें धीमी चल रही हों तो छोटे समूहों के लिए जरूरत के मुताबिक टैक्सियों का इस्तेमाल समय बचा सकता है। बजट अनुमति दे तो निजी बसें अनिश्चितता कम करती हैं और शिक्षकों को सीखने के लक्ष्यों के अनुरूप तय कार्यक्रम पर चलने देती हैं।

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शिक्षकों और परिवारों की राय

शिक्षकों का कहना है कि स्कूल यात्राओं का मकसद दर्शनीय स्थलों की सूची पर निशान लगाने से कहीं बढ़कर है। टोक्यो के निशि इकेबुकुरो जूनियर हाई स्कूल के प्रधानाचार्य ने शैक्षणिक यात्राओं को अनिवार्य शिक्षा का अहम हिस्सा बताया। उन्होंने योजना बनाने, सहपाठियों के साथ सहयोग करने और यात्रा के दौरान अपने फैसलों पर विचार करने के महत्व पर जोर दिया।

अनिवार्य शिक्षा में विद्यार्थियों के लिए अपने काम की योजना बनाने और सहयोग करने का कौशल विकसित करना जरूरी है। मैं स्कूल यात्राओं को अंतिम लक्ष्य के रूप में देखता हूं।

अभिभावक क्योटो से जुड़ी पुरानी यादों और व्यावहारिक चिंताओं के बीच संतुलन बना रहे हैं। अपने स्कूल के शिकोकू जाने के फैसले का समर्थन करने वाली एक मां ने लंबी कतारों में स्वास्थ्य और गर्मी को लेकर चिंता जताई। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें खुशी है कि उनका बच्चा नए क्षेत्र में स्थानीय शिल्प और खाना बनाने का अनुभव ले सकेगा।

न तो मैं और न ही मेरी बेटी कभी शिकोकू गए हैं। मैंने सुना है कि वहां अनुभव पर आधारित कई कार्यक्रम हैं। मुझे लगता है कि वह वहां अच्छा समय बिता सकेगी।

विद्यार्थी अक्सर इस बदलाव को अलग नजरिए से देखते हैं। उनके लिए दोस्ती और साथ मिलकर कुछ नया जानना सबसे ज्यादा मायने रखता है। एक विद्यार्थी के शब्दों में, समूह साथ हो तो कोई भी जगह चलेगी। एक अन्य विद्यार्थी के लिए आकर्षण सीधा था। जिस जगह वह कभी नहीं गया था, वहां जाना रोमांचक लग रहा था।

स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं के लिए इसका क्या मतलब है

क्योटो की अर्थव्यवस्था कुछ हद तक पर्यटकों के खर्च पर निर्भर है। पर्यटन से परिवहन, आतिथ्य क्षेत्र, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और छोटे कारोबारों को सहारा मिलता है। जब स्कूल समूह व्यस्त इलाकों से बचते हैं या शहर ही छोड़ देते हैं, तो इसका असर राजस्व पर पड़ता है। परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने और पर्यटकों को अलग-अलग समय तथा क्षेत्रों में फैलाने के लिए बनाई गई शहर की नीतियों का मकसद स्थानीय लोगों के दैनिक जीवन में परेशानी घटाते हुए आजीविका की रक्षा करना है। अगर इन उपायों से हालात सुधरते हैं, तो स्कूल सीखने की जरूरतों के अनुरूप यात्रा कार्यक्रमों के साथ लौटने के लिए अधिक इच्छुक हो सकते हैं।

स्कूल यात्राएं पाने वाले क्षेत्रों को भी अलग-अलग तरह से लाभ हो सकता है। शैक्षणिक यात्राओं से पहले से तय बुकिंग मिलती है, अक्सर उन महीनों में जब होटल और आकर्षण स्थल शांत रहते हैं। इससे बार-बार आने वाले पर्यटक भी बनते हैं, क्योंकि विद्यार्थी अक्सर बाद में परिवार के साथ लौटते हैं। शिकोकू, कनाज़ावा, हाकोदाते और दूसरे शहरों ने विद्यार्थियों की सीख के अनुरूप कार्यक्रमों में निवेश किया है। इनमें स्थानीय किशोरों के निर्देशित उद्यान भ्रमण, संग्रहालय कार्यशालाएं और स्थानीय परिवारों के साथ ठहरना शामिल हैं। ऐसे अनुभव सांस्कृतिक आदान-प्रदान को गहरा करते हैं और आम पर्यटन केंद्रों से बाहर के समुदायों में धन का प्रवाह बनाए रखते हैं।

जापान की राष्ट्रीय पर्यटन रणनीति का लक्ष्य क्षेत्रीय इलाकों को बढ़ावा देना और पर्यटकों की आवाजाही में विविधता लाना है। स्कूल यात्राएं इस नीति का स्वाभाविक हिस्सा हैं। अगर अधिक स्कूल हर साल अलग-अलग गंतव्य चुनते हैं, तो क्योटो के सबसे व्यस्त मार्गों पर दबाव कम होगा और उन जगहों को भी लाभ मिलेगा जहां समूहों का स्वागत करने की क्षमता है। नीति निर्माताओं और शिक्षकों के सामने चुनौती यह है कि वे यात्रा कार्यक्रम, परिवहन और पाठ्यक्रम में तालमेल बिठाएं, ताकि यात्रा स्कूली जीवन का यादगार हिस्सा बनी रहे और जिन जगहों पर विद्यार्थी सीखने जाते हैं, वहां जरूरत से ज्यादा दबाव न पड़े।

मुख्य बातें

  • क्योटो में विद्यार्थियों की यात्राएं 2024 में घटकर करीब 7.5 लाख रह गईं, जो पिछले साल के 8.1 लाख के मुकाबले 7.4 प्रतिशत कम है। भीड़ से समूहों के यात्रा कार्यक्रम बनाना मुश्किल हो रहा है।
  • क्योटो में 2024 में 5.606 करोड़ पर्यटक आए, जो अब तक का दूसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है। भीड़ मुख्य रूप से लोकप्रिय इलाकों और बस मार्गों पर केंद्रित है।
  • क्योटो में देरी और लंबी पैदल यात्रा से जूझने वाले टोक्यो के एक जूनियर हाई स्कूल ने करके सीखने के लिए अगली यात्रा का गंतव्य बदलकर शिकोकू कर दिया है।
  • बढ़त हासिल कर रहे वैकल्पिक गंतव्यों में आसान रेल संपर्क और विद्यार्थियों द्वारा संचालित उद्यान भ्रमण वाला कनाज़ावा तथा सघन ट्राम नेटवर्क वाला हाकोदाते शामिल हैं।
  • 2024 के शैक्षणिक वर्ष में घरेलू स्कूल यात्रा का औसत खर्च बढ़कर 67,844 येन हो गया। कुल बजट का करीब 70 प्रतिशत परिवहन और ठहरने पर खर्च होता है।
  • जापान भर में नए आवास कर लागू किए जा रहे हैं या मौजूदा कर बढ़ाए जा रहे हैं। क्योटो 2026 में अपना आवास कर बढ़ाएगा और सबसे ऊंची दर 10,000 येन प्रति रात होगी।
  • क्योटो नियमित जीवन और सांस्कृतिक परंपराओं की रक्षा के लिए साइटसीइंग लिमिटेड एक्सप्रेस बस, सामान के अनुकूल सेवाओं और गियोन में पहुंच संबंधी नियमों जैसे उपाय आजमा रहा है।
  • स्कूल यात्राओं की योजना 18 से 24 महीने पहले बनाते हैं। इसलिए जब तक भीड़ कम नहीं होती और यात्रा व्यवस्था बेहतर नहीं होती, क्योटो से दूर जाने का रुझान कई साल तक जारी रह सकता है।
  • 2024 में करीब हर तीन में से एक विदेशी पर्यटक ने भीड़ से जुड़ी समस्याएं बताईं, जिससे भीड़ प्रबंधन और बेहतर बुनियादी ढांचे की जरूरत रेखांकित होती है।
  • स्कूल यात्राओं को अलग-अलग क्षेत्रों में फैलाने से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं को सहारा मिलता है और केंद्रित, अनुभव पर आधारित कार्यक्रमों के जरिए शैक्षणिक नतीजे बेहतर हो सकते हैं।
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