चीन की स्वच्छ विकास मुहिम के भीतर
दो दशकों के क्षेत्रीय अध्ययन और नीतिगत बदलावों के दौरान चीन संकट प्रबंधन से आगे बढ़कर पर्यावरण की व्यापक बहाली तक पहुंचा है। 2006 में बीजिंग स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एंड एनवायरनमेंटल अफेयर्स के संस्थापक मा जून ने दर्ज किया था कि निगरानी में शामिल जल स्रोतों में करीब 28 प्रतिशत गंभीर रूप से प्रदूषित थे, जिससे लगभग 30 करोड़ लोगों को पर्याप्त सुरक्षित पेयजल नहीं मिल पा रहा था। आज राष्ट्रीय नियंत्रण खंडों की रिपोर्ट के मुताबिक, निगरानी वाले 90 प्रतिशत से अधिक जल स्रोतों की गुणवत्ता उत्कृष्ट, अच्छी या संतोषजनक है। जल गुणवत्ता में सुधार के साथ वायु गुणवत्ता भी बेहतर हुई है। 2015 से 2022 के बीच देशभर में PM2.5 का वार्षिक औसत स्तर करीब 35.6 प्रतिशत गिरा। यह गिरावट लगभग उतनी ही है जितना सुधार अमेरिका ने क्लीन एयर एक्ट के तहत करीब तीन दशकों में हासिल किया। PM2.5 उन सूक्ष्म कणों को कहते हैं जो फेफड़ों में गहराई तक पहुंच सकते हैं और रक्तप्रवाह में प्रवेश कर हृदय तथा श्वसन रोगों का जोखिम बढ़ाते हैं। PM2.5 में लगातार गिरावट का मतलब है अस्पताल में कम भर्ती, अधिक जीवन प्रत्याशा और उत्पादकता में मापे जा सकने वाले लाभ।
विषय-सूची
- चीन की स्वच्छ विकास मुहिम के भीतर
- बदलाव की वजह: नीतियां, तकनीक और उद्योग का तालमेल
- वास्तविक समय की निगरानी और पारदर्शिता
- मानक, कर और प्रदर्शन लक्ष्य
- समाधान का हिस्सा बनते कारखाने
- स्वच्छ बिजली की बुनियाद
- बैटरियां, परिवहन और नए औद्योगिक मॉडल
- एक साथ प्रदूषण और कार्बन घटाने के बारे में शोध क्या बताता है
- तेजी से आगे बढ़े क्षेत्र और इसकी वजह
- जल की सफाई और नियमों के प्रवर्तन की लंबी प्रक्रिया
- अब भी क्या चुनौतियां हैं
- विदेशों के लिए इसके मायने
- मुख्य बिंदु
यह स्वच्छ हवा बड़े पैमाने पर कारखाने बंद करने से नहीं आई। इसके पीछे औद्योगिक विस्तार को कड़े नियमों, वास्तविक समय की निगरानी और स्वच्छ तकनीकों के तेजी से इस्तेमाल के साथ जोड़ने की सुनियोजित मुहिम थी। अकादमिक अध्ययनों और जमीनी प्रगति से औद्योगीकरण के जरिए उत्सर्जन घटाने का एक मॉडल सामने आता है। नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक परिवहन और डिजिटल नियंत्रण प्रणालियों में बड़े निवेश से कई क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ा है, जबकि उत्सर्जन और प्रदूषकों का स्तर घटा है।
चीनी शहरों और प्रांतों के शोध से पता चलता है कि यह दिशा क्यों बदली। सख्त पर्यावरणीय नियमों ने धन को अनुसंधान और विकास की ओर मोड़ा, सार्वजनिक डेटाबेस ने नियमों के पालन का दबाव बढ़ाया और नए उपकरणों ने प्रति इकाई उत्पादन उत्सर्जन घटाना सस्ता कर दिया। विनिर्माण क्षेत्र खुद हवा और पानी को स्वच्छ बनाने का माध्यम बना, क्योंकि कंपनियों ने सौर पैनल, पवन टर्बाइन, बैटरी, उन्नत मोटर और अपशिष्ट उपचार प्रणालियों का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया। नतीजा यह है कि उद्योग को सिकोड़ने के बजाय आंकड़ों के आधार पर स्वच्छ विकास को बढ़ावा मिला है।
बदलाव की वजह: नीतियां, तकनीक और उद्योग का तालमेल
यह प्रगति तीन पहलुओं के तालमेल पर टिकी है। पहला, नियामकों ने मानक सख्त किए और प्रदूषण के लिए आर्थिक दंड तय किए। दूसरा, निगरानी और जानकारी सार्वजनिक करने की व्यापक व्यवस्था ने उत्सर्जन को अधिकारियों, कंपनियों और आम जनता के सामने उजागर किया। तीसरा, घरेलू नवाचार और आपूर्ति शृंखला के विस्तार से मिली ताकत के सहारे उद्योग ने स्वच्छ उत्पादन और उत्पादों में निवेश किया।
वास्तविक समय की निगरानी और पारदर्शिता
चीन ने बिजलीघरों और चिमनी-आधारित उद्योगों में निरंतर उत्सर्जन निगरानी के घने नेटवर्क बनाए। इन्हें शहरों में वायु गुणवत्ता केंद्रों और राष्ट्रीय जल निगरानी बिंदुओं से जोड़ा गया। सार्वजनिक प्रदूषण मानचित्र और जानकारी देने वाले मंच नागरिकों, निवेशकों और आगे की आपूर्ति शृंखला के खरीदारों को कारखानों के प्रदर्शन की जानकारी देते हैं। उपग्रहों से मिले अवलोकनों और ऑडिट से मजबूत हुई यह डेटा व्यवस्था उल्लंघन छिपाना कठिन और नियमों का पालन करने वाली कंपनियों को पुरस्कृत करना आसान बनाती है। अब कई कंपनियों के लिए देश और विदेश के खरीदारों की शर्तें पूरी करना दस्तावेजों से साबित पर्यावरणीय प्रदर्शन पर निर्भर है।
पारदर्शिता और नियमों का प्रवर्तन साथ-साथ चलते हैं। आंकड़ों पर आधारित निरीक्षणों से नियमों का उल्लंघन करने वाली इकाइयों की जल्दी पहचान होती है। स्वचालित नियंत्रण प्रणालियां अवैध अपशिष्ट निकासी रोक देती हैं। प्रांत स्पष्ट मानकों पर प्रदर्शन की तुलना करते हैं, जैसे अच्छी वायु गुणवत्ता वाले दिनों की संख्या और अपशिष्ट जल नियमों के पालन की दर। इस व्यवस्था में स्वच्छ तकनीक बोझ के बजाय लागत घटाने वाला अनुपालन साधन बन जाती है।
मानक, कर और प्रदर्शन लक्ष्य
आर्थिक प्रोत्साहनों ने निगरानी मुहिम को और मजबूत किया। 2018 में देशव्यापी पर्यावरण संरक्षण कर ने प्रदूषण शुल्क की जगह ली। 287 शहरों के आंकड़ों पर अंतर-अंतर पद्धति से किए गए हालिया अध्ययन में पाया गया कि इस कर से क्षेत्रीय कार्बन उत्सर्जन में 5.63 प्रतिशत की कमी आई। इसके पीछे हरित अनुसंधान और विकास में बढ़ा निवेश, बेहतर ऊर्जा दक्षता और औद्योगिक उन्नयन रहे। नीति से पारंपरिक वायु प्रदूषक भी घटे। इसका सबसे स्पष्ट लाभ पूर्वी क्षेत्रों और ऊर्जा-गहन इलाकों में दिखा, जहां नियमों का प्रवर्तन और राजकोषीय क्षमता अधिक मजबूत है।
शहरों के प्रदर्शन लक्ष्य और प्रदर्शन कार्यक्रमों ने नवाचार पर ध्यान केंद्रित किया। ऊर्जा बचत और उत्सर्जन कटौती वाले प्रदर्शन शहर कार्यक्रम को अर्ध-प्राकृतिक प्रयोग मानकर किए गए मूल्यांकन में शोधकर्ताओं ने पाया कि इसने 2006 से 2019 के बीच शहरी हरित तकनीकी नवाचार को उल्लेखनीय रूप से बढ़ावा दिया। इसका असर उन शहरों में सबसे मजबूत था जहां पर्यावरणीय लक्ष्य ज्यादा सख्त थे और विज्ञान तथा तकनीक के लिए राजकोषीय सहायता बढ़ाई गई थी। नवाचार ने स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देकर और औद्योगिक संरचना का उन्नयन करके कार्बन उत्सर्जन घटाया तथा वायु गुणवत्ता सुधारी।
क्षेत्रीय तालमेल भी नतीजों को आकार दे रहा है। यांग्त्ज़ी नदी आर्थिक क्षेत्र में प्रांतों के बीच मानकों का तालमेल बैठाने और तकनीक तथा जानकारी साझा करने वाली नीतियों ने प्रदूषण नियंत्रण और कार्बन कटौती में साझा प्रगति तेज की है। इसके तीन माध्यम हैं: स्थानीय उद्योग को स्वच्छ क्षेत्रों की ओर मोड़ना, स्वच्छ ऊर्जा की ओर बदलाव तेज करना और शहरों तथा कंपनियों के नेटवर्क में कम कार्बन वाली तकनीकों का प्रसार करना।
समाधान का हिस्सा बनते कारखाने
चीन की औद्योगिक क्षमता वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा विस्तार का एक शक्तिशाली इंजन बन गई है। वैश्विक बाजार के हालिया विश्लेषणों के मुताबिक, दुनिया के इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी बाजार में चीन की हिस्सेदारी करीब 60 प्रतिशत थी। 2023 में उसने जितनी सौर क्षमता चालू की, वह उससे पिछले वर्ष पूरी दुनिया में स्थापित क्षमता के बराबर थी। उसी वर्ष दुनिया के पवन ऊर्जा फार्मों की कुल स्थापना में चीन का योगदान करीब तीन-चौथाई था। इस बड़े पैमाने के उत्पादन से हरित तकनीकों की लागत घटी है और वे एशिया से अफ्रीका और अमेरिका तक अधिक सुलभ हुई हैं। इसका असर न्यूजीलैंड तक की आपूर्ति शृंखलाओं में दिखता है, जिसने 2023 में अपने करीब 89 प्रतिशत सौर फोटोवोल्टिक उपकरण चीन से मंगाए। अफ्रीकी गांवों में भी कम लागत वाले पैनल बिजली ग्रिड से बाहर स्थित क्लीनिकों और स्कूलों को बिजली देते हैं।
स्वच्छ बिजली की बुनियाद
पवन और सौर ऊर्जा क्षमता में तेज बढ़ोतरी से बिजली उत्पादन का मिश्रण स्वच्छ स्रोतों की ओर जा रहा है। हाल के वर्षों में जितनी गतिविधि हुई है, उसकी कोई मिसाल नहीं है। रेगिस्तानों और छतों पर नए सौर पार्क फैल रहे हैं और तट के पास समुद्र में पवन टर्बाइन लगाए जा रहे हैं। लागत घटी है, निर्माण का समय कम हुआ है और स्थानीय सामग्री के नियमों ने हर प्रमुख पुर्जे के लिए घरेलू आपूर्तिकर्ता तैयार किए हैं। हालांकि, बिजली ग्रिड में इन स्रोतों को जोड़ना अब भी चुनौती है। उत्पादन के चरम घंटों में स्वच्छ बिजली बर्बाद हो सकती है, क्योंकि बिजली उत्पादन घटाने का जोखिम, कोयले पर निर्भर क्षेत्रों में सीमित लचीलापन और पारेषण की अड़चनें मौजूद हैं। लंबी दूरी के पारेषण, पंप्ड हाइड्रो और बैटरी भंडारण तथा अधिक स्मार्ट बिजली वितरण में निवेश से इन बाधाओं को धीरे-धीरे कम किया जा रहा है।
बैटरियां, परिवहन और नए औद्योगिक मॉडल
बैटरी क्षमता परिवहन और इमारतों को बदल रही है। चीन के शहरों में इलेक्ट्रिक बसों और टैक्सियों के बड़े बेड़े चलते हैं। चीनी कंपनियां दक्षिण-पूर्व एशिया से लेकर लैटिन अमेरिका तक के बाजारों में छोटी इलेक्ट्रिक कारें, ट्रक और बसें निर्यात करती हैं। औद्योगिक संयंत्रों ने कम उत्सर्जन के हिसाब से अपने संचालन को नए सिरे से ढालना शुरू किया है। सिचुआन में एक प्रदर्शनकारी शून्य-कार्बन कारखाना ऊर्जा इस्तेमाल को बेहतर बनाने के लिए सेंसर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करता है, जिससे हर साल लाखों टन उत्सर्जन घटता है। हाइड्रोजन परियोजनाओं का भी विस्तार हो रहा है। देश में दुनिया की सबसे बड़ी हरित हाइड्रोजन सुविधाओं में से एक और वैश्विक ईंधन भरने वाले स्टेशनों का बड़ा हिस्सा मौजूद है। ये व्यवस्थाएं न केवल घरेलू जरूरतें पूरी करती हैं, बल्कि उन निर्यात उद्योगों को भी आपूर्ति करती हैं जो दुनियाभर में स्वच्छ उपकरण पहुंचाते हैं।
एक साथ प्रदूषण और कार्बन घटाने के बारे में शोध क्या बताता है
सहकर्मी-समीक्षित अध्ययनों की बढ़ती संख्या बताती है कि नीतियों और तकनीक से स्वच्छ हवा और ग्रीनहाउस गैसों में कमी कैसे आती है। 2008 से 2021 के पैनल आंकड़ों पर आधारित एक अध्ययन में पाया गया कि उद्योग में हरित तकनीकी नवाचार औद्योगिक संरचना के उन्नयन को बढ़ावा देकर स्वच्छ विकास को आगे बढ़ाता है। हरित प्रक्रिया और उत्पादों से जुड़े नवाचार इसके सबसे मजबूत कारक हैं। कंपनियों के काम करने के तरीकों और उनके उत्पादन में बदलाव लाकर ये पारंपरिक प्रदूषण और कार्बन तीव्रता, दोनों घटाते हैं। हालांकि, इनका असर क्षेत्रों के अनुसार अलग-अलग होता है।
शहरों पर किए गए अध्ययनों में भी इसी तरह के रुझान दिखते हैं। 2022 तक 272 शहरों के आंकड़ों का उपयोग करके शोधकर्ताओं ने पाया कि हरित तकनीकी नवाचार शहरी कार्बन उत्सर्जन को उल्लेखनीय रूप से घटाता है। इसका असर पर्यावरणीय नियमों और ऊर्जा खपत की संरचना के जरिए सामने आता है। कड़े नियम और स्वच्छ ऊर्जा की ओर बदलाव, दोनों इस संबंध को मजबूत करने वाले माध्यम हैं और क्रमिक रूप से भी काम करते हैं। इसका असर पूर्वी, बड़े और प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित न होने वाले शहरों में सबसे स्पष्ट है, जहां जटिल नीतियां लागू करने की क्षमता आम तौर पर अधिक होती है।
वायु प्रदूषण के अलग-अलग प्रदूषकों और क्षेत्रों पर असर भी अलग होता है। यांग्त्ज़ी और पीली नदी बेसिनों के हालिया विश्लेषण में नवाचार की मात्रा और गुणवत्ता को अलग-अलग देखा गया। इसमें पाया गया कि हरित पेटेंट की संख्या और उच्च मूल्य वाले पेटेंट का हिस्सा, दोनों PM2.5 और PM10 पर अलग असर डालते हैं और इनके संबंध रैखिक नहीं हैं। नवाचार बढ़ने पर PM10 अक्सर पहले घटता है। PM2.5 में सुधार धीमा होता है और उसे सबसे ज्यादा लाभ तब मिलता है जब पेटेंट में उच्च मूल्य वाले पेटेंट का हिस्सा अधिक हो। इससे पता चलता है कि बहुत सारे विचारों से बेहतर विचारों की ओर बढ़ना उन सबसे सूक्ष्म कणों को घटाने के लिए अहम है जो स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा जोखिम पैदा करते हैं।
शोध की एक अन्य धारा प्रांतीय स्तर पर कार्बन घटाने की व्यापक क्षमता पर नजर रखती है। 2006 से 2021 के बीच चीनी प्रांतों की कार्बन कटौती क्षमता बढ़ी। पूर्वी प्रांत आगे रहे, मध्य क्षेत्रों का प्रदर्शन सुधरा और पश्चिमी क्षेत्रों ने बढ़त की ओर कदम बढ़ाए। हरित नवाचार का सीधा असर भी दिखा और पड़ोसी प्रांतों तक सकारात्मक लाभ भी पहुंचे। एक निश्चित स्तर से आगे ये लाभ और मजबूत हुए। यह निष्कर्ष वायु प्रदूषण पर पहले के उस शोध से मेल खाता है जिसमें पर्यावरणीय नियमों की सख्ती से जुड़े क्षेत्रीय प्रभाव और सीमा-स्तरीय बदलाव पाए गए थे। सीधे शब्दों में, स्पष्ट और सख्त नियमों के साथ-साथ शहरों के नेटवर्क में पर्याप्त क्षमता होने पर हरित नवाचार के लाभ व्यापक होते हैं।
अंत में, करों और संस्थागत सुधारों पर अध्ययन व्यावहारिक सबक देते हैं। पर्यावरण संरक्षण कर ने वायु गुणवत्ता और जनकल्याण में सुधार के साथ कार्बन उत्सर्जन घटाया। संस्थागत खुलेपन के संकेतक मुक्त व्यापार पायलट क्षेत्रों ने औद्योगिक उन्नयन, ऊर्जा दक्षता और नवाचार को बढ़ावा देकर अपने क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता और कार्बन कटौती की साझा प्रगति बेहतर की। वहीं, कुछ पड़ोसी शहरों पर नकारात्मक प्रभाव भी पड़ा। इससे स्पष्ट होता है कि स्थानीय सीमाओं के पार विकास का केंद्र बदलने पर तालमेल जरूरी है।
तेजी से आगे बढ़े क्षेत्र और इसकी वजह
प्रगति हर जगह एक जैसी नहीं रही और इसके कारण उपयोगी सबक देते हैं। पूर्वी शहर आम तौर पर तेजी से आगे बढ़े, क्योंकि वहां नियमों का प्रवर्तन अधिक मजबूत था, विज्ञान और इंजीनियरिंग के विशेषज्ञों की संख्या ज्यादा थी और वित्त तक पहुंच बेहतर थी। संस्थागत खुलापन इन फायदों को और मजबूत करता है। मुक्त व्यापार पायलट क्षेत्र घोषित शहरों ने वायु गुणवत्ता और कार्बन उत्सर्जन के संयुक्त लक्ष्यों में अधिक सुधार किया। इसमें औद्योगिक संरचना का उन्नयन, ऊर्जा का अधिक कुशल इस्तेमाल और हरित नवाचार को बढ़ावा देने की भूमिका रही। प्रशासनिक दक्षता और पर्यावरण के प्रति जन-जागरूकता ने इस असर को और बढ़ाया।
जब कंपनियां या निवेश स्थानीय सीमाओं के पार चले गए, तो प्रदूषण के पास के इलाकों में स्थानांतरित होने से कुछ लाभ कम हो गए। यही वजह है कि सीमापार तालमेल अहम है। यांग्त्ज़ी नदी आर्थिक क्षेत्र में साझा मानकों और संयुक्त कार्यक्रमों से समय के साथ नतीजे बेहतर हुए हैं। इस तरीके में स्वच्छ उद्योग को अलग-अलग हासिल की जाने वाली प्रतिस्पर्धी बढ़त नहीं, बल्कि साझा परियोजना माना जाता है।
जल की सफाई और नियमों के प्रवर्तन की लंबी प्रक्रिया
जल गुणवत्ता में सुधार वर्षों के निवेश और नियमों के प्रवर्तन का नतीजा है। शहरों ने अपशिष्ट जल उपचार का विस्तार किया, नाइट्रोजन और फॉस्फोरस हटाने की व्यवस्थाएं जोड़ीं और कीचड़ प्रबंधन को बेहतर बनाया। औद्योगिक समूहों को केंद्रीकृत उपचार और अधिक सख्त निगरानी वाले औद्योगिक पार्कों में एकीकृत किया गया। छोटे और अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले संयंत्र बंद हुए या उन्होंने अपनी तकनीक बदली। अब निगरानी नदी बेसिनों में, नदी के उद्गम से लेकर प्रमुख नियंत्रण खंडों तक फैली है। राष्ट्रीय स्तर की श्रेणीकरण व्यवस्था स्थानीय प्रदर्शन मूल्यांकनों में शामिल होती है। नतीजतन, निगरानी में शामिल दस में से नौ से अधिक जल खंड अब कम से कम संतोषजनक मानक पर खरे उतरते हैं। यह 2000 के दशक के मध्य से बड़ा बदलाव है, जब गंभीर प्रदूषण व्यापक था।
2013 से वायु और जल कार्यक्रम साथ-साथ आगे बढ़े हैं। उसी साल नीतियों की नई लहर ने बाध्यकारी लक्ष्य तय किए और स्वच्छ ऊर्जा तथा प्रदूषण नियंत्रण के लिए धन मुहैया कराया। यांग्त्ज़ी नदी की तुलना में लंबे समय तक अधिक प्रदूषित रही पीली नदी बेसिन में सूक्ष्म कणों का स्तर घटा है और अपशिष्ट जल उपचार का दायरा बढ़ा है। हालांकि, औद्योगिक संरचना और सर्दियों में हीटिंग अब भी चुनौतियां हैं। इन उपलब्धियों को बनाए रखने के लिए लगातार निवेश, पारदर्शी रिपोर्टिंग और अपशिष्ट जल निकासी तथा उत्सर्जन के लिए सख्त परमिट अहम बने हुए हैं।
अब भी क्या चुनौतियां हैं
चीन की ऊर्जा व्यवस्था अब भी भरोसेमंद आपूर्ति के लिए कोयले पर निर्भर है, खासकर मांग के चरम समय और शुष्क मौसम में। पवन और सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए अधिक लचीली बिजली उत्पादन क्षमता, लंबे समय तक ऊर्जा भंडारण, बेहतर क्षेत्रीय बिजली वितरण और उद्योगों तथा इमारतों में मांग प्रबंधन की जरूरत है। इन कदमों से स्वच्छ बिजली उत्पादन में कटौती कम होगी और आपूर्ति की विश्वसनीयता से समझौता किए बिना जीवाश्म ईंधन से बनने वाली बिजली की जगह स्वच्छ बिजली ले सकेगी।
भारी उद्योग एक और चुनौती है। इस्पात, सीमेंट और रसायन उद्योगों में कार्बन उत्सर्जन घटाना कठिन है, क्योंकि उनकी प्रक्रियाएं उच्च ताप वाली ऊर्जा और कार्बन उत्सर्जित करने वाली रासायनिक प्रतिक्रियाओं पर निर्भर हैं। प्रायोगिक परियोजनाओं में इस्पात निर्माण के लिए हरित हाइड्रोजन, इलेक्ट्रिक भट्टियां, सीमेंट संयंत्रों में कार्बन पकड़ने की तकनीक और उच्च दक्षता वाले विद्युतीकृत उपकरणों का परीक्षण हो रहा है। लागत घटाने के लिए बड़े पैमाने पर प्रदर्शन परियोजनाएं, मानकीकृत डिजाइन और नए उपकरण चलाने के लिए भरोसेमंद स्वच्छ बिजली जरूरी होगी।
स्वच्छ ऊर्जा उपकरणों के विनिर्माण का भी पर्यावरण पर असर पड़ता है। जीवन चक्र अध्ययनों से पता चलता है कि पैनलों, बैटरियों और पवन ऊर्जा के पुर्जों के खनन तथा विनिर्माण में अब भी उत्सर्जन होता है और संसाधनों का इस्तेमाल होता है। कारखानों में स्वच्छ बिजली अपनाने, अधिक सामग्री के पुनर्चक्रण और दक्षता में सुधार के साथ रुझान सही दिशा में है, लेकिन लगातार प्रगति जरूरी है। नीतिगत जरूरतों में प्रदूषण के सुरक्षित ठिकाने बनने से रोकने के लिए सख्त प्रवर्तन, शहरों की सीमाओं के पार नकारात्मक प्रभावों से निपटने की व्यवस्था और डेटा की गुणवत्ता बनाए रखने के उपाय शामिल हैं। निगरानी के आंकड़ों पर भरोसा बाजारों और समुदायों के लिए यह मानने की बुनियाद है कि दर्ज किए गए सुधार वास्तविक हैं।
विदेशों के लिए इसके मायने
चीन के बड़े पैमाने पर उत्पादन ने स्वच्छ ऊर्जा की वैश्विक लागत घटाई है और दुनिया भर में इसके इस्तेमाल को तेज किया है। चीनी सौर पैनल जिम्बाब्वे के ग्रामीण स्कूलों को रोशन करते हैं, जबकि किफायती इलेक्ट्रिक वाहन बैंकॉक से मेक्सिको सिटी तक की सड़कों पर नजर आते हैं। चीन से सौर उपकरणों के आयात ने न्यूजीलैंड जैसे देशों को तेजी से स्वच्छ बिजली का विस्तार करने में मदद की। साझेदार देशों के लिए अवसर यह है कि किफायती कीमतों के साथ मजबूत मानक, सत्यापन और पारदर्शिता को जोड़ा जाए। खरीद के स्पष्ट नियम और कारखानों के उत्सर्जन की जानकारी सार्वजनिक करने से भरोसा बढ़ सकता है और यह सुनिश्चित हो सकता है कि आयातित स्वच्छ तकनीकें जलवायु तथा वायु गुणवत्ता के लक्ष्यों के अनुरूप हों।
पूंजी बाजार इस बदलाव के अनुरूप ढल रहे हैं। विश्लेषकों का अनुमान है कि 2030 तक पर्यावरण, सामाजिक और सुशासन मानकों के अनुरूप निवेश रणनीतियों का दायरा कई दसियों खरब डॉलर तक पहुंच जाएगा। शेयर बाजार नियामक सूचीबद्धता के नियमों को अपडेट कर रहे हैं और बैटरी, सौर सामग्री तथा अन्य सहायक तकनीकों के निर्माताओं से निवेशकों को जोड़ने के लिए हरित वित्त उत्पादों का विस्तार कर रहे हैं। कमोडिटी बाजार स्वच्छ ऊर्जा के लिए जरूरी धातुओं की जिम्मेदार आपूर्ति से जुड़े नियम अपडेट कर रहे हैं। विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के नीति निर्माता स्पष्ट मानकों के साथ निगरानी में निवेश, स्थानीय नवाचार को समर्थन और प्रदूषण के दूसरे क्षेत्रों में स्थानांतरित होने से रोकने के लिए क्षेत्रीय तालमेल जोड़कर चीन के अनुभव से सीख सकते हैं।
मुख्य बिंदु
- राष्ट्रीय जल निगरानी के अनुसार, अब 90 प्रतिशत से अधिक नियंत्रण खंड कम से कम संतोषजनक मानक पर खरे उतरते हैं। यह 2006 में व्यापक गंभीर प्रदूषण की स्थिति से बड़ा बदलाव है।
- 2015 से 2022 के बीच PM2.5 का वार्षिक औसत स्तर करीब 35.6 प्रतिशत गिरा। यह गिरावट क्लीन एयर एक्ट के तहत अमेरिका में तीन दशकों में हुए सुधार के लगभग बराबर है।
- वास्तविक समय की निगरानी और सार्वजनिक जानकारी से नियमों का पालन बढ़ा, जबकि स्वच्छ तकनीकों ने पर्यावरणीय नियमों को उद्योग के लिए लागत घटाने वाले साधनों में बदल दिया।
- पर्यावरण संरक्षण कर ने अनुसंधान और विकास, दक्षता तथा औद्योगिक उन्नयन को बढ़ावा देकर क्षेत्रीय कार्बन उत्सर्जन करीब 5.6 प्रतिशत घटाया और वायु गुणवत्ता सुधारी।
- प्रदर्शन शहर कार्यक्रमों ने शहरी हरित तकनीकी नवाचार मजबूत किया, खासकर उन शहरों में जहां पर्यावरणीय लक्ष्य सख्त थे और सार्वजनिक विज्ञान वित्तपोषण बढ़ा।
- यांग्त्ज़ी नदी आर्थिक क्षेत्र में समन्वित नीतियों ने स्वच्छ उद्योग, स्वच्छ ऊर्जा और तकनीक के व्यापक प्रसार के जरिए प्रदूषण नियंत्रण तथा कार्बन कटौती में साझा प्रगति तेज की।
- चीन के कारखानों ने वैश्विक स्तर पर स्वच्छ तकनीक का उत्पादन बढ़ाया, देश में रिकॉर्ड सौर और पवन ऊर्जा क्षमता स्थापित की, बैटरी क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाई और इन उत्पादों का आयात करने वाले देशों के लिए लागत घटाई।
- शोध से पता चलता है कि PM2.5 के लिए हरित नवाचार की गुणवत्ता मायने रखती है और सख्त नियमों तथा नवाचार के अहम स्तर पार करने पर इसके लाभ पड़ोसी क्षेत्रों तक पहुंचते हैं।
- पूर्वी और अधिक खुले शहर तेजी से आगे बढ़े, लेकिन कुछ पड़ोसी क्षेत्रों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा। इससे सीमापार तालमेल की जरूरत उजागर होती है।
- मुख्य चुनौतियों में बिजली व्यवस्था की कोयले पर निर्भरता घटाना, भारी उद्योग का कार्बन उत्सर्जन कम करना और स्वच्छ तकनीक के विनिर्माण का पर्यावरणीय असर घटाना शामिल है। साथ ही डेटा की गुणवत्ता और नियमों का सख्त प्रवर्तन बनाए रखना भी जरूरी है।






