अमेरिकी शुल्कों से नौकरियों और आर्थिक स्थिरता पर खतरा, कंबोडिया के परिधान श्रमिकों में अनिश्चितता

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अमेरिकी शुल्कों से नौकरियों और आर्थिक स्थिरता पर खतरा, कंबोडिया के परिधान श्रमिकों में अनिश्चितता

मंडराता खतरा: अमेरिकी शुल्कों से कंबोडिया का परिधान उद्योग संकट में

कंबोडिया का परिधान उद्योग उसकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ और करीब दस लाख श्रमिकों की आजीविका का सहारा है। अब यह अभूतपूर्व संकट का सामना कर रहा है। अमेरिका ने भारी शुल्क लगाए हैं—पहले 49%, फिर बातचीत के बाद 36% और आखिर में 19%। इससे कंबोडिया के सबसे बड़े निर्यात क्षेत्र का भविष्य अधर में लटक गया है। इन शुल्कों का असर सिर्फ अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं है; यह गहराई से लोगों के जीवन को प्रभावित कर रहा है। लाखों परिवारों की आजीविका दांव पर है, जिनमें अधिकतर महिलाएं और ग्रामीण इलाकों से आए प्रवासी श्रमिक हैं। नए शुल्कों की 1 अगस्त की समयसीमा लागू होने के साथ ही देश एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है और नौकरियों के नुकसान, बढ़ते कर्ज तथा सामाजिक अस्थिरता के खतरे से जूझ रहा है।

विषय-सूची
  1. मंडराता खतरा: अमेरिकी शुल्कों से कंबोडिया का परिधान उद्योग संकट में
  2. अमेरिकी शुल्कों का निशाना कंबोडिया क्यों है?
  3. शुल्कों से नौकरियों और फैक्ट्रियों को खतरा
  4. क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा और आपूर्ति शृंखलाओं में बदलाव
  5. इंसानी कीमत: महिला श्रमिक और असुरक्षित परिवार
  6. अनौपचारिक श्रमिक और काम की शर्तों में गिरावट
  7. भू-राजनीति और अमेरिका-चीन व्यापार प्रतिद्वंद्विता
  8. सरकार की प्रतिक्रिया और उद्योग का अनुकूलन
  9. श्रमिक अधिकार और आगे की राह
  10. व्यापक असर: कंबोडिया और वैश्विक परिधान उद्योग के लिए इसका क्या मतलब है?
  11. संक्षेप में

अमेरिकी शुल्कों का निशाना कंबोडिया क्यों है?

शुल्क वे कर हैं जो एक देश दूसरे देश से आयात होने वाले सामान पर लगाता है। सिद्धांततः इनका मकसद घरेलू उद्योगों की रक्षा करना या कथित अनुचित व्यापार व्यवहार के लिए व्यापारिक साझेदारों को दंडित करना होता है। व्यवहार में, ये अक्सर जवाबी कार्रवाई का सिलसिला शुरू कर देते हैं और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं को बाधित करते हैं। कंबोडिया पर ट्रंप प्रशासन के शुल्क उस व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं, जिसके तहत उन देशों को निशाना बनाया जा रहा है जिन्हें व्यापार असंतुलन से लाभ उठाने वाला या चीनी सामान को दूसरे देशों के रास्ते भेजने का केंद्र माना जाता है। अमेरिकी अधिकारियों ने चीनी कंपनियों पर आरोप लगाया है—जिनके पास कथित तौर पर कंबोडिया की 90% तक परिधान फैक्ट्रियों का स्वामित्व है—कि वे चीनी निर्यात पर मौजूदा शुल्कों से बचने के लिए कंबोडिया का इस्तेमाल कर रही हैं।

अमेरिका के साथ कंबोडिया का व्यापार अधिशेष काफी बड़ा है। 2024 में कंबोडिया ने अमेरिका को करीब 10 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया, जो उसके कुल निर्यात का लगभग 40% था। इस निर्यात का आधे से अधिक हिस्सा परिधान, जूते और यात्रा-संबंधी सामान है। इस क्षेत्र में अमेरिका, कंबोडिया का सबसे बड़ा एकल-देशीय खरीदार है।

शुल्कों से नौकरियों और फैक्ट्रियों को खतरा

परिधान, जूते और यात्रा-संबंधी सामान (GFT) क्षेत्र में 9 लाख से अधिक कंबोडियाई काम करते हैं। इनमें 75% से ज्यादा महिलाएं हैं। यह क्षेत्र रोजगार का बड़ा स्रोत होने के साथ देश की औपचारिक अर्थव्यवस्था का अहम स्तंभ भी है। भारी शुल्कों से यह नाजुक ढांचा बिखरने का खतरा है।

परिधान क्षेत्र के सलाहकार और यूरोकैम कंबोडिया के सदस्य मासिमिलियानो ट्रोपियानो ने चेताया,

अमेरिकी ब्रांडों को सामान देने वाली फैक्ट्रियां बुरी तरह प्रभावित होंगी। 36% की अतिरिक्त लागत को सहने की गुंजाइश बहुत कम है।
उनका अनुमान है कि शुल्क लागू रहे तो 1.5 लाख तक नौकरियां जा सकती हैं।

उद्योग पर नजर रखने वालों का कहना है कि फैक्ट्री के कामकाज पर दबाव साफ दिखने लगा है। बड़ी फैक्ट्रियों ने काम के घंटे घटाने और ओवरटाइम खत्म करने शुरू कर दिए हैं, जबकि छोटी, ठेके पर काम करने वाली फैक्ट्रियां—जहां अक्सर श्रमिकों को कम सुरक्षा मिलती है—अब भी भर्ती कर रही हैं, हालांकि वहां काम की परिस्थितियां ज्यादा अस्थिर हैं। बेटर फैक्ट्रीज कंबोडिया के हालिया सर्वेक्षण में पाया गया कि 203 फैक्ट्रियों में से करीब आधी को अगले तीन महीनों के बाद के ऑर्डरों को लेकर अनिश्चितता थी। 15% ने बताया कि उनके पास कोई भी ऑर्डर पक्का नहीं है।

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चिंता सिर्फ फैक्ट्री श्रमिकों तक सीमित नहीं है। पहले बेहतर वेतन की तलाश में थाईलैंड गए प्रवासी श्रमिक अब सीमा पर तनाव और हिंसा के चलते घर लौट रहे हैं, लेकिन उन्हें सिकुड़ता हुआ रोजगार बाजार मिल रहा है। 25 वर्षीय थाट सोप्रिंग जैसे कई लोग कर्ज लेकर लौटते हैं और उन्हें रोजगार की उम्मीद भी कम है।

अब काम नहीं है, सिर्फ कर्ज है,
सोप्रिंग कहते हैं। उनकी यह बात हजारों लोगों की चिंता को बयान करती है।

क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा और आपूर्ति शृंखलाओं में बदलाव

क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा से स्थिति और जटिल हो गई है। वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे पड़ोसी देशों ने अमेरिका के साथ क्रमशः 20% और 19% के कम शुल्क पर समझौता किया है। इससे वे निर्माताओं के लिए ज्यादा आकर्षक ठिकाने बन गए हैं। कंबोडिया के विपरीत, इन देशों ने अपने घरेलू कपड़ा मिल उद्योग विकसित किए हैं। इससे आयातित चीनी कपड़ों पर उनकी निर्भरता कम हुई है और उन्हें प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिली है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बुनियादी परिधानों का उत्पादन आसानी से एक देश से दूसरे देश में स्थानांतरित हो सकता है और कम लागत या बेहतर व्यापार शर्तों वाले देशों में तेजी से जा सकता है। आईएलआर के ग्लोबल लेबर इंस्टीट्यूट के कार्यकारी निदेशक जेसन जड बताते हैं,

साधारण परिधानों का उत्पादन कुछ ही हफ्तों में कंबोडिया से फिलीपींस जा सकता है, लेकिन जूता उत्पादन कुछ ही हफ्तों में वियतनाम से भारत नहीं जा सकता।
इस आवाजाही से कंबोडिया में मजदूरी और रोजगार की सुरक्षा पर दबाव और बढ़ रहा है।

इंसानी कीमत: महिला श्रमिक और असुरक्षित परिवार

इस संकट का सबसे भारी बोझ महिलाओं पर पड़ रहा है। कंबोडिया के परिधान क्षेत्र के 75-80% श्रमिक महिलाएं हैं। कम वेतन और अक्सर अस्थिर होने के बावजूद ये नौकरियां बच्चों, बुजुर्ग माता-पिता और पूरे परिवार का गुजारा चलाने के लिए बेहद अहम हैं। फैक्ट्रियां बंद होने या काम के घंटे घटने से होने वाली आय की कमी का असर दूर तक पड़ता है। इससे बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और परिवारों की बुनियादी स्थिरता खतरे में पड़ जाती है।

कंबोडियन एलायंस ऑफ ट्रेड यूनियंस (CATU) की अध्यक्ष यांग सोफोर्न ने लैंगिक असर पर कहा:

जब लागत बढ़ती है या बिक्री घटती है, तो अपनी असुरक्षित स्थिति के कारण महिलाओं की नौकरियां अक्सर सबसे पहले जाती हैं। कम वेतन के चलते उनके लिए आय में अचानक आई कमी झेलना भी मुश्किल होता है। उनकी नौकरी जाने का असर परिवारों और समुदायों तक पहुंचता है।

कई महिला श्रमिकों ने अपने परिवारों का खर्च उठाने के लिए कर्ज लिया है, जिससे वे आर्थिक झटकों के प्रति खास तौर पर असुरक्षित हैं। कंबोडिया इस क्षेत्र के उन देशों में है जहां कर्ज लेने वालों का अनुपात सबसे अधिक है। आधे से ज्यादा परिवार औपचारिक ऋणदाताओं के कर्जदार हैं। देश के प्रधानमंत्री हुन मानेत ने बैंकों और सूक्ष्म वित्त संस्थानों से लौट रहे प्रवासी श्रमिकों की ऋण किस्तें आसान करने की अपील की है, लेकिन कर्ज का दुष्चक्र लगातार खतरा बना हुआ है।

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अनौपचारिक श्रमिक और काम की शर्तों में गिरावट

शुल्कों का असर औपचारिक फैक्ट्री श्रमिकों से आगे तक जाता है। अनौपचारिक श्रमिक—जिनके पास अनुबंध या कानूनी सुरक्षा नहीं होती—और भी ज्यादा असुरक्षित हैं। कोविड-19 महामारी या 2020 में यूरोपीय संघ की व्यापार प्राथमिकताओं में आंशिक कटौती जैसे पिछले व्यापारिक झटकों के दौरान फैक्ट्रियों ने लाभ घटाए, स्थायी कर्मचारियों को अस्थायी दर्जे पर भेजा और वास्तविक मजदूरी में कटौती की। "सामाजिक अवनयन" के नाम से जानी जाने वाली यह स्थिति, नए शुल्कों का बोझ सहने की कोशिश में फैक्ट्रियों द्वारा फिर दोहराए जाने की आशंका है।

एक यूनियन नेता ने कहा,

अगर फैक्ट्री मालिकों को लाभ नहीं मिलेगा और हम उनके लिए ज्यादा उत्पादन नहीं कर पाएंगे, तो वे इसकी कीमत हमसे वसूलेंगे।

भू-राजनीति और अमेरिका-चीन व्यापार प्रतिद्वंद्विता

कंबोडिया की मुश्किल सिर्फ अर्थव्यवस्था से जुड़ी नहीं है; यह वैश्विक भू-राजनीति का भी शिकार है। अमेरिका और चीन के बीच जारी व्यापार प्रतिद्वंद्विता ने आपूर्ति शृंखलाओं का रुख बदला है। कुछ निर्माता शुल्कों से बचने के लिए कंबोडिया समेत दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में जा बसे हैं। लेकिन इससे अमेरिका की जांच-पड़ताल बढ़ी है, क्योंकि उसे दूसरे देशों के रास्ते सामान भेजे जाने और वस्तुओं के वास्तविक मूल को लेकर चिंता है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों का पालन सुनिश्चित करते हुए कंबोडिया को अब अमेरिका और चीन, दोनों के साथ अपने आर्थिक संबंधों में संतुलन साधना होगा।

कंबोडिया के परिधान क्षेत्र में चीनी निवेश की अहम भूमिका है और कुल विदेशी निवेश में इसकी हिस्सेदारी करीब आधी है। सिहानोकविल विशेष आर्थिक क्षेत्र जैसी परियोजनाएं और बुनियादी ढांचे का उन्नयन देश के आर्थिक परिदृश्य को बदल रहे हैं। लेकिन चीनी पूंजी और आपूर्ति शृंखलाओं पर भारी निर्भरता कंबोडिया को बाहरी झटकों और चीनी सामान के लिए माध्यम होने के आरोपों के प्रति असुरक्षित बनाती है।

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सरकार की प्रतिक्रिया और उद्योग का अनुकूलन

कंबोडिया सरकार ने बातचीत और रणनीतिक अनुकूलन, दोनों के जरिए संकट से निपटने की कोशिश की है। अमेरिकी शुल्कों में 49% से 19% तक की कमी को बड़ी सफलता बताया गया। इससे परिधान क्षेत्र के तत्काल पतन का खतरा टल गया। उप प्रधानमंत्री सन चन्थोल ने कहा कि कम शुल्क से कंबोडिया क्षेत्र के अन्य देशों के साथ प्रतिस्पर्धा में बना रह सकता है और फैक्ट्रियों का कामकाज जारी रह सकता है।

हालांकि, विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि यह राहत अस्थायी हो सकती है। अर्थशास्त्री डॉ. पेंगहुई ङोव ने आसियान और यूरोपीय संघ के बाजारों में विविधता लाने की जरूरत पर जोर दिया। इसके लिए कंबोडिया की क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (RCEP) की सदस्यता और चीन के साथ मुक्त व्यापार समझौते का लाभ उठाया जा सकता है। इन समझौतों से बड़े बाजारों तक तरजीही पहुंच मिलती है, लेकिन इसके लिए लॉजिस्टिक्स, प्रौद्योगिकी और श्रम मानकों के अनुपालन में निवेश करना होगा।

उद्योग जगत के नेता प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए स्वचालन और डिजिटल आपूर्ति शृंखला प्रबंधन को अधिक अपनाने की मांग भी कर रहे हैं। विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार पर चीन-कंबोडिया संयुक्त समिति जैसी पहलें डिजिटल बुनियादी ढांचे के विकास को गति दे रही हैं, जबकि बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) परिवहन की बड़ी परियोजनाओं के लिए धन मुहैया करा रही है।

श्रमिक अधिकार और आगे की राह

श्रमिक अधिकार अब भी विवाद का विषय हैं। कुछ वैश्विक ब्रांडों के सामूहिक सौदेबाजी समझौतों पर हस्ताक्षर से इनकार करने के कारण श्रमिक मनमानी छंटनी और लाभों में कटौती के जोखिम में हैं। कंबोडिया समझौते, यानी सामूहिक सौदेबाजी के मानकीकृत नियमों की कानूनी रूप से बाध्यकारी व्यवस्था, टिकाऊ श्रम व्यवहार का संभावित मॉडल पेश करते हैं। लेकिन इसके लिए पूरे उद्योग को इसे अपनाना होगा।

जेसन जड कहते हैं,

आपूर्ति शृंखलाओं में जोखिम और लागत का बोझ निवेशकों और खरीदारों से निर्माताओं तक, फिर श्रमिकों तक पहुंचा दिया जाता है। जिन देशों में श्रमिकों को संगठित होने से रोका जाता है या वे बुनियादी मानकों को लागू कराने के लिए संघर्ष करते हैं, वहां नियोक्ताओं के मुनाफे और नौकरियों की रक्षा के लिए उन मानकों में ढील दी जाएगी।

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व्यापक असर: कंबोडिया और वैश्विक परिधान उद्योग के लिए इसका क्या मतलब है?

कंबोडिया के परिधान क्षेत्र का संकट वैश्विक व्यापार के व्यापक रुझानों की एक छोटी तस्वीर है। बुनियादी परिधानों का उत्पादन तेजी से एक देश से दूसरे देश जा सकता है। इससे देशों के बीच लागत कम रखने की कड़ी प्रतिस्पर्धा होती है, जिसमें अक्सर श्रमिक अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा की कीमत चुकानी पड़ती है। घरेलू उद्योगों की रक्षा के मकसद से लगाए गए शुल्कों से अक्सर निर्यातक देशों के सबसे असुरक्षित श्रमिकों को नुकसान पहुंचता है।

कंबोडिया के लिए दांव ऊंचे हैं। परिधान क्षेत्र देश की औपचारिक अर्थव्यवस्था को सहारा देता है, लाखों आश्रितों का भरण-पोषण करता है और गरीबी घटाने तथा महिलाओं को सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाता है। लेकिन एक ही निर्यात बाजार—अमेरिका—पर इसकी भारी निर्भरता इसे नीतिगत बदलावों और बाहरी झटकों के प्रति बेहद असुरक्षित बनाती है।

अंतरराष्ट्रीय संगठन और श्रमिक अधिकारों के पैरोकार व्यापार के अधिक न्यायसंगत तरीके की मांग कर रहे हैं, जिसमें शुल्कों की मानवीय कीमत को समझा जाए और रोजगार की गुणवत्ता, लैंगिक समानता तथा आर्थिक न्याय को प्राथमिकता दी जाए। ऐसे कदमों के बिना गरीबी, कर्ज और अस्थिर रोजगार का दुष्चक्र जारी रहने की आशंका है।

संक्षेप में

  • अमेरिका ने कंबोडिया के परिधान निर्यात पर भारी शुल्क लगाए हैं। इससे लाखों नौकरियों को खतरा है और देश का सबसे बड़ा निर्यात क्षेत्र अस्थिर हो रहा है।
  • परिधान क्षेत्र के अधिकांश श्रमिक महिलाएं हैं। उन्हें नौकरी जाने और आय में अचानक कमी का खास खतरा है।
  • कम शुल्क वाले वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे देशों से क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा बढ़ने के कारण कंबोडियाई फैक्ट्रियों और श्रमिकों पर दबाव तेज हो रहा है।
  • घरेलू कर्ज का ऊंचा स्तर, कमजोर श्रमिक सुरक्षा और थाईलैंड से प्रवासी श्रमिकों की वापसी संकट को और गंभीर बना रही है।
  • सरकार की बातचीत के बाद शुल्क दर घटकर 19% हुई है, जिससे अस्थायी राहत मिली है। लेकिन दीर्घकालिक समाधान के लिए विविधीकरण, प्रौद्योगिकी में निवेश और श्रमिक अधिकारों को मजबूत करना जरूरी है।
  • यह स्थिति वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं की व्यापक चुनौतियों को उजागर करती है, जहां व्यापार विवादों की कीमत अक्सर दुनिया के सबसे गरीब श्रमिक चुकाते हैं।
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