निजी स्कूलों में यौन दुराचार की पृष्ठभूमि जांच लागू करने में जापान की मुश्किलें: एक विस्तृत पड़ताल

पढ़ने में 9 मिनट
How to protect students from sexual misconduct - The Japan Times

स्कूलों में यौन दुराचार रोकने की जापान की कोशिशें: क्या निजी संस्थान पीछे छूट रहे हैं?

हाल के वर्षों में जापान ने शिक्षाकर्मियों द्वारा बच्चों के यौन शोषण से उनकी सुरक्षा के लिए कानून बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। हालांकि, एक नए सर्वेक्षण से निजी स्कूलों में नियमों के पालन की चिंताजनक कमी सामने आई है, जिससे इन उपायों की प्रभावशीलता और देशभर के विद्यार्थियों की सुरक्षा पर सवाल उठते हैं।

विषय-सूची
  1. स्कूलों में यौन दुराचार रोकने की जापान की कोशिशें: क्या निजी संस्थान पीछे छूट रहे हैं?
  2. कानून में क्या प्रावधान हैं?
  3. डेटाबेस कैसे काम करता है?
  4. सर्वेक्षण से निजी स्कूलों में बड़े पैमाने पर नियमों के उल्लंघन का खुलासा
  5. नियमों का पालन इतना कम क्यों है?
  6. सरकारी बनाम निजी स्कूल: दो व्यवस्थाओं की कहानी
  7. जापान में निजी स्कूल क्यों महत्वपूर्ण हैं?
  8. हाल की घटनाएं जोखिम को उजागर करती हैं
  9. जापान का तरीका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कैसा है?
  10. इसके व्यापक निहितार्थ क्या हैं?
  11. क्या बदलाव जरूरी हैं?
  12. संक्षेप में

कानून में क्या प्रावधान हैं?

मई 2021 में जापान ने शिक्षाकर्मियों द्वारा बच्चों के खिलाफ यौन हिंसा की रोकथाम संबंधी कानून बनाया। इसके तहत सभी स्कूलों—सरकारी और निजी—को शिक्षकों की नियुक्ति से पहले राष्ट्रीय डेटाबेस की जांच करनी होगी, ताकि अश्लील कृत्यों के लिए पहले अनुशासित किए गए या जिनके शिक्षण लाइसेंस रद्द किए गए हों, ऐसे लोगों को दोबारा नियुक्त न किया जाए। वित्त वर्ष 2023 से चालू इस डेटाबेस का उद्देश्य ऐसे लोगों को दोबारा कक्षा में लौटने से रोकने के लिए एक अहम सुरक्षा उपाय के रूप में काम करना है।

कानून ने यौन दुराचार के लिए पहले अनुशासित किए गए लोगों को शिक्षण लाइसेंस दोबारा जारी करने की प्रक्रिया भी कड़ी की है। लक्ष्य स्पष्ट है: यौन अपराधों का इतिहास रखने वाले लोगों को फिर से बच्चों के साथ काम करने से रोकना।

डेटाबेस कैसे काम करता है?

इस डेटाबेस में उन पूर्व शिक्षकों के नाम दर्ज हैं जिन्हें अश्लील कृत्यों के कारण अनुशासित किया गया है या जिनके लाइसेंस रद्द हुए हैं। सरकारी स्कूलों के लिए शिक्षा बोर्ड पंजीकरण करते हैं, जबकि निजी स्कूल चलाने वाले निगमों की जिम्मेदारी है कि वे पंजीकरण करें और नियुक्ति प्रक्रिया के हिस्से के रूप में डेटाबेस का उपयोग करें। यह व्यवस्था यूनाइटेड किंगडम की Disclosure and Barring Service (DBS) पर आधारित है। इसके जरिए संगठन बच्चों या कमजोर समूहों के साथ काम करने वाले लोगों की आपराधिक पृष्ठभूमि की जांच कर सकते हैं।

जापान की योजना 2026 तक इस व्यवस्था का और विस्तार करने की है। इसके तहत "DBS का जापानी संस्करण" शुरू किया जाएगा, जिससे बाल एवं परिवार एजेंसी के माध्यम से न्याय मंत्रालय के डेटाबेस का संदर्भ लिया जा सकेगा। इससे केवल शिक्षकों ही नहीं, बल्कि बच्चों से जुड़े काम करने वाले लोगों के यौन अपराधों के इतिहास की व्यापक जांच संभव होगी।

सर्वेक्षण से निजी स्कूलों में बड़े पैमाने पर नियमों के उल्लंघन का खुलासा

कानूनी प्रावधान स्पष्ट होने के बावजूद, शिक्षा, संस्कृति, खेल, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MEXT) के हालिया सर्वेक्षण में पाया गया कि निजी स्कूल चलाने वाले 75% निगमों ने संभावित शिक्षकों की पृष्ठभूमि जांचने के लिए राष्ट्रीय डेटाबेस का कभी उपयोग नहीं किया। मई से अगस्त 2023 के बीच किए गए इस सर्वेक्षण में जापानभर के 8,164 निजी स्कूल संचालकों को शामिल किया गया और 7,258 संस्थाओं से जवाब मिले।

जवाब देने वालों में से 3,062 ने कहा कि उन्होंने डेटाबेस में पंजीकरण ही नहीं कराया था, जबकि 2,418 ने पंजीकरण तो कराया था, लेकिन उसका उपयोग नहीं किया। इसका अर्थ है कि 5,480 निजी स्कूल संचालकों—जवाब देने वालों के तीन-चौथाई—ने कानूनी बाध्यता के बावजूद डेटाबेस का उपयोग नहीं किया।

विज्ञापन

कई जवाबदाताओं ने कहा कि उन्हें इस अनिवार्यता की जानकारी नहीं थी या उन्होंने गलतफहमी में मान लिया था कि डेटाबेस का उपयोग केवल शिक्षण लाइसेंस की वैधता जांचने के लिए है, न कि यौन दुराचार के पुराने मामलों की जांच के लिए। इससे कानून के उद्देश्य और प्रावधानों के बारे में जानकारी और समझ में बड़ी कमी का पता चलता है।

नियमों का पालन इतना कम क्यों है?

विशेषज्ञों और अधिकारियों ने निजी स्कूलों में नियमों के पालन की कम दर के कई कारण बताए हैं:

  • जानकारी का अभाव: निजी स्कूल चलाने वाले कई संचालकों को पता नहीं था कि डेटाबेस का उपयोग करना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
  • डेटाबेस के उद्देश्य को लेकर गलतफहमी: कुछ लोगों का मानना था कि इसका इस्तेमाल केवल शिक्षण लाइसेंस की पुष्टि के लिए है, अनुशासनात्मक इतिहास जांचने के लिए नहीं।
  • पर्याप्त मार्गदर्शन का अभाव: निजी स्कूलों की निगरानी के लिए जिम्मेदार नगरपालिकाओं के पास नए नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए अक्सर पर्याप्त कर्मचारी और संसाधन नहीं होते।

स्कूल नियमों के पालन के विशेषज्ञ, शुकुतोकू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ताकाशी सकाता ने स्थिति पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा,

नगरपालिकाओं के पास निजी स्कूलों को कानूनों और नियमों के पालन के बारे में मार्गदर्शन देने के लिए पर्याप्त कर्मचारी नहीं हैं। राष्ट्रीय सरकार को स्कूलों को कदम उठाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए, जैसे कि डेटाबेस का उपयोग न करने वाले स्कूल निगमों के नाम सार्वजनिक करना।

सर्वेक्षण के नतीजे प्रकाशित होने के बाद शिक्षा मंत्रालय ने प्रांतों और निर्दिष्ट शहरों के माध्यम से नोटिस जारी कर निजी स्कूलों से डेटाबेस का पूरी तरह उपयोग सुनिश्चित करने का आग्रह किया। हालांकि, इन निर्देशों का कितना असर होगा, यह अभी देखना बाकी है।

विज्ञापन

सरकारी बनाम निजी स्कूल: दो व्यवस्थाओं की कहानी

सभी सरकारी शिक्षा बोर्डों ने डेटाबेस में पंजीकरण कराया है, लेकिन मंत्रालय ने यह पुष्टि नहीं की है कि नियुक्ति प्रक्रिया में सभी आवेदकों के लिए इसका नियमित उपयोग होता है या नहीं। निगरानी की यह कमी सरकारी क्षेत्र में भी पृष्ठभूमि जांच की एकरूपता पर सवाल खड़े करती है।

इसके विपरीत, निजी क्षेत्र में नियमों का पालन और भी चिंताजनक है। जापान के निजी स्कूल काफी हद तक स्वायत्तता के साथ काम करते हैं। उनका प्रबंधन अक्सर ऐसे स्कूल निगम करते हैं जिनके पास सरकारी संस्थानों जैसी निगरानी या संसाधन नहीं होते। कुछ मामलों में यह स्वायत्तता फायदेमंद होती है, लेकिन इससे महत्वपूर्ण सुरक्षा उपायों को लागू करने में खामियां रह सकती हैं।

जापान में निजी स्कूल क्यों महत्वपूर्ण हैं?

जापान की शिक्षा व्यवस्था में निजी स्कूलों की अहम भूमिका है। वे वैकल्पिक पाठ्यक्रम, धार्मिक शिक्षा या विशेष कार्यक्रम उपलब्ध कराते हैं। उन्हें अक्सर प्रतिष्ठित माना जाता है और वे विविध पृष्ठभूमियों के विद्यार्थियों को आकर्षित करते हैं। हालांकि, उनकी स्वायत्तता का मतलब यह भी है कि सरकारी निगरानी कम प्रत्यक्ष होती है, जिससे नए नियमों को लागू करना अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

हाल की घटनाएं जोखिम को उजागर करती हैं

पृष्ठभूमि जांच लागू करने की तात्कालिकता उन हालिया घटनाओं से रेखांकित होती है जिनमें शिक्षकों पर यौन दुराचार के आरोप लगे। जून में आइची प्रांत की पुलिस ने नागोया और योकोहामा में शहर द्वारा संचालित प्राथमिक स्कूलों के दो शिक्षकों को लड़कियों की अश्लील तस्वीरें लेने और उन्हें सोशल मीडिया पर शिक्षकों के बीच साझा करने के संदेह में गिरफ्तार किया। ऐसे मामले अपवाद नहीं हैं। हाल के वर्षों में सरकारी और निजी, दोनों तरह के स्कूलों में इसी तरह के घोटाले सामने आए हैं।

इन घटनाओं से जनता की चिंता बढ़ी है और अधिकारियों पर यह सुनिश्चित करने का दबाव भी बढ़ा है कि सभी स्कूल, चाहे उनका दर्जा कुछ भी हो, विद्यार्थियों को नुकसान से बचाने के लिए हर संभव कदम उठाएं।

विज्ञापन

जापान का तरीका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कैसा है?

पृष्ठभूमि जांच के लिए राष्ट्रीय डेटाबेस बनाने की जापान की पहल यूनाइटेड किंगडम की Disclosure and Barring Service (DBS) पर आधारित है। बच्चों और कमजोर वयस्कों की सुरक्षा के लिए ब्रिटेन की DBS व्यवस्था को व्यापक रूप से एक आदर्श मानक माना जाता है। इसके जरिए नियोक्ता यह जांच सकते हैं कि किसी व्यक्ति का आपराधिक रिकॉर्ड है या उसे बच्चों के साथ काम करने से प्रतिबंधित किया गया है।

अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे अन्य देशों में भी शिक्षा क्षेत्र में पृष्ठभूमि जांच की मजबूत व्यवस्थाएं हैं। उदाहरण के लिए, अमेरिका के अधिकांश राज्यों में शिक्षकों की फिंगरप्रिंट-आधारित पृष्ठभूमि जांच अनिवार्य है और कुछ राज्यों के पास अनुशासित शिक्षकों के अपने डेटाबेस भी हैं। ऑस्ट्रेलिया में "Working with Children Check" बच्चों के साथ काम करने वाले सभी लोगों, जिनमें शिक्षक, कोच और स्वयंसेवक शामिल हैं, के लिए अनिवार्य है।

इसी तरह की व्यवस्था लागू करने के जापान के प्रयास सकारात्मक कदम हैं, लेकिन निजी स्कूलों में नियमों के मौजूदा स्तर के पालन की कमी बताती है कि अन्य विकसित देशों जैसी सुरक्षा हासिल करने के लिए अभी और काम करना होगा।

इसके व्यापक निहितार्थ क्या हैं?

कई निजी स्कूलों द्वारा राष्ट्रीय डेटाबेस का उपयोग न करने का बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा व्यवस्था पर जनता के भरोसे पर गंभीर असर पड़ता है। यदि यौन दुराचार का इतिहास रखने वाले लोग जांच की खामियों का फायदा उठाकर फिर से शिक्षक बन सकते हैं, तो विद्यार्थियों के लिए जोखिम अस्वीकार्य रूप से ऊंचा बना रहेगा।

इसके अलावा, यह स्थिति निजी शिक्षा के नियमन के जापानी तरीके से जुड़ी व्यापक चुनौतियों को उजागर करती है। स्वायत्तता और जवाबदेही के बीच संतुलन नाजुक है और मौजूदा व्यवस्था शायद यह सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त निगरानी नहीं देती कि सभी स्कूल अपने कानूनी और नैतिक दायित्व पूरे कर रहे हैं।

विज्ञापन

क्या बदलाव जरूरी हैं?

नियमों का पालन बेहतर करने और विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए विशेषज्ञों और अधिकारों के पैरोकारों ने कई उपायों की मांग की है:

  • जागरूकता और प्रशिक्षण बढ़ाना: स्कूल संचालकों को उनके कानूनी दायित्वों और डेटाबेस के उद्देश्य के बारे में स्पष्ट मार्गदर्शन और प्रशिक्षण देना जरूरी है।
  • कड़ी निगरानी: नगरपालिकाओं और राष्ट्रीय सरकार को निगरानी और नियमों के प्रवर्तन में तेजी लानी चाहिए। इसमें नियमों का पालन न करने वाले स्कूलों के नाम सार्वजनिक करना भी शामिल हो सकता है।
  • प्रक्रियाओं को सरल बनाना: डेटाबेस को अधिक आसानी से उपलब्ध और उपयोगी बनाने से ज्यादा स्कूलों को नियमों का पालन करने के लिए प्रोत्साहन मिल सकता है।
  • दायरा बढ़ाना: 2026 के लिए नियोजित व्यवस्था के विस्तार से बच्चों से जुड़े सभी काम शामिल होंगे और मौजूदा खामियों को दूर करने में मदद मिलेगी।

अंततः, स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकारी एजेंसियों, स्कूल संचालकों और व्यापक समुदाय के समन्वित प्रयास की जरूरत है। जरूरी साधन मौजूद हैं, लेकिन अपने उद्देश्य को पूरा करने के लिए उनका प्रभावी ढंग से उपयोग करना होगा।

संक्षेप में

  • जापान के 2021 के कानून के तहत सभी स्कूलों को नियुक्ति से पहले यौन दुराचार के लिए अनुशासित शिक्षकों के राष्ट्रीय डेटाबेस की जांच करनी होगी।
  • हालिया सर्वेक्षण में पाया गया कि कानूनी बाध्यता के बावजूद 75% निजी स्कूल संचालकों ने डेटाबेस का कभी उपयोग नहीं किया।
  • कई निजी स्कूलों ने नियमों का पालन न करने की वजह जानकारी का अभाव या कानून को लेकर गलतफहमी बताई।
  • शिक्षकों के दुराचार की हालिया घटनाएं प्रभावी पृष्ठभूमि जांच की तत्काल जरूरत को रेखांकित करती हैं।
  • विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए विशेषज्ञों ने कड़ी निगरानी, बेहतर प्रशिक्षण और नियमों का पालन न करने वाले स्कूलों के नाम सार्वजनिक करने की मांग की है।
  • जापान 2026 तक अपनी पृष्ठभूमि जांच व्यवस्था का विस्तार करने की योजना बना रहा है, ताकि इसका दायरा बढ़े और सुरक्षा उपाय मजबूत हों।
यह लेख शेयर करें

आपको यह भी पसंद आ सकता है