दो रैलियों में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति के सामने रखी गईं परस्पर विरोधी मांगें
शनिवार, 7 नवंबर 2026 को जकार्ता में सैकड़ों श्रमिकों ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के समर्थन में रैली की, जबकि सैकड़ों महिलाओं ने उनकी नीतियों के खिलाफ मार्च निकाला। इससे राजधानी की सड़कों पर मांगों के दो अलग-अलग समूह सामने आए। श्रमिकों ने उनके संचार की कथित अवैध निगरानी की जांच के बीच राष्ट्रपति के समर्थन की अपील की। महिलाओं के मार्च में जंगल की आग, सार्वजनिक खर्च और महिलाओं के अधिकारों से निपटने के उनके तरीके को चुनौती दी गई।
विषय-सूची
- दो रैलियों में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति के सामने रखी गईं परस्पर विरोधी मांगें
- श्रमिक नेता ने कारखानों और कस्बों में समर्थन का वादा किया
- पुलिस के चार संदिग्ध और राष्ट्रपति कार्यालय में बदलाव
- तनावपूर्ण संबंध और घटनाओं का तेज सिलसिला
- महिलाओं ने जकार्ता की सड़कों पर रखीं नौ मांगें
- शेरिना और अन्य सार्वजनिक हस्तियां मार्च में शामिल हुईं
- महीनों से जारी आग ने हालिया मार्च को पहले के प्रदर्शनों से जोड़ा
- खर्च के फैसलों और प्रदर्शन से निपटने वाली पुलिस की भूमिका पर सवाल
- मुख्य बिंदु
लेबर पार्टी के अध्यक्ष और प्रबोवो के विशेष सलाहकार सईद इकबाल ने श्रमिकों के प्रदर्शन का नेतृत्व किया और राष्ट्रपति पद के सामने आने वाले खतरों के खिलाफ यूनियन सदस्यों को लामबंद करने का वादा किया। पुलिस ने निगरानी जांच में चार वरिष्ठ अधिकारियों को संदिग्ध बताया है। इनमें पूर्व राष्ट्रपति जोको विडोडो से जुड़े पूर्व राष्ट्रीय पुलिस प्रमुख भी शामिल हैं, जिन्हें व्यापक रूप से जोकोवी के नाम से जाना जाता है।
विमेन्स मार्च जकार्ता में नागरिक समाज समूहों, श्रमिकों और सार्वजनिक हस्तियों ने हिस्सा लिया। मार्च की नौ मांगें आर्थिक, सामाजिक, पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं से जुड़ी थीं। गायिका और अभिनेत्री शेरिना मुनाफ भी उन प्रतिभागियों के साथ शामिल हुईं, जिनके पोस्टरों में जंगल और जमीन की आग का मुद्दा उठाया गया था। ये आग महीनों से जल रही हैं।
ये सभाएं जकार्ता और अन्य शहरों में आग से निपटने के सरकारी प्रयासों और खर्च की प्राथमिकताओं के खिलाफ हुए छात्र प्रदर्शनों के बाद आयोजित हुईं। इनसे पता चला कि प्रबोवो पर कई दिशाओं से दबाव है: वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक पहुंचती जांच, राष्ट्रपति पद की रक्षा का वादा करने वाले संगठित समर्थक और रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने वाली नीतियों में बदलाव की मांग कर रहे प्रदर्शनकारी।
श्रमिक नेता ने कारखानों और कस्बों में समर्थन का वादा किया
सईद ने प्रबोवो के समर्थन में एकजुट होने की अपील की और राजधानी से कहीं आगे तक लोगों को लामबंद करने में सक्षम यूनियन नेटवर्क का जिक्र किया। लेबर पार्टी अध्यक्ष और राष्ट्रपति के सलाहकार, दोनों भूमिकाओं में उनकी मौजूदगी ने रैली के नेतृत्व को सीधे उस प्रशासन से जोड़ दिया, जिसका वह समर्थन कर रही थी।
लेबर पार्टी के अध्यक्ष और राष्ट्रपति के विशेष सलाहकार सईद इकबाल ने अपने संगठन की पहुंच का जिक्र करते हुए कहा:
हम हर कस्बे, हर कारखाने में अपने संगठन के सदस्यों को लामबंद कर सकते हैं।
सईद ने यह भी कहा कि अशांति फैलने पर सदस्य जवाब देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने इस तैयारी को कानून-व्यवस्था बनाए रखने और प्रबोवो के राष्ट्रपति पद की रक्षा करने का तरीका बताया।
अगर कोई अशांति पैदा होती है, चाहे उसके पीछे विदेशी हित हों या परेशानी खड़ी करने वाले लोग, तो कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए हम किसी भी समय जवाब देने को तैयार हैं।
उनकी टिप्पणियों ने प्रदर्शन को किसी सरकारी कार्यक्रम के समर्थन से कहीं व्यापक उद्देश्य दिया। सईद एक संवेदनशील जांच और बार-बार हो रहे सड़क प्रदर्शनों के दौर में राष्ट्रपति को संगठित समर्थन देने का वादा कर रहे थे। विदेशी हितों का उनका जिक्र इसी चेतावनी का हिस्सा था; उद्धृत टिप्पणियों में उन्होंने किसी विदेशी पक्ष का नाम नहीं लिया।
पुलिस के चार संदिग्ध और राष्ट्रपति कार्यालय में बदलाव
पुलिस ने चार वरिष्ठ अधिकारियों पर प्रबोवो के संचार को बीच में रोककर हासिल करने की कोशिश का आरोप लगाया है। संचार अवरोधन का अर्थ है संदेशों को उनके प्रसारण के दौरान हासिल करना। जांच इस बात से जुड़ी है कि क्या पुलिस निगरानी उपकरणों का इस्तेमाल कानूनी जांच प्रक्रियाओं से बाहर किया गया था। इसमें इलेक्ट्रॉनिक जानकारी तक कथित अनधिकृत पहुंच और रिकॉर्ड नष्ट करने के आरोप भी शामिल हैं।
5 नवंबर को जांचकर्ताओं ने इंस्पेक्टर जनरल स्लामेत उलियांडी को चौथा संदिग्ध घोषित किया, जिससे मामला और विस्तृत हो गया। पूर्व राष्ट्रीय पुलिस प्रमुख लिस्त्यो सिगित प्रबोवो समेत तीन अन्य अधिकारियों को पश्चिम जावा के डेपोक स्थित मोबाइल ब्रिगेड मुख्यालय में रखा गया था। पुलिस ने कहा कि स्लामेत को हिरासत में नहीं लिया गया, क्योंकि वह स्ट्रोक से उबर रहे थे।
हिरासत में लिए गए अन्य दो संदिग्ध इंस्पेक्टर जनरल आहरी सोंता और इंस्पेक्टर जनरल एको हादी थे। 5 नवंबर 2026 को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस के साइबर अपराध निदेशक ब्रिगेडियर जनरल सुहेरमांतो ने कहा कि जांचकर्ताओं को स्लामेत की कार्रवाइयों में गैरकानूनी आचरण के तत्व मिले हैं। पुलिस का आरोप है कि अक्टूबर 2026 की शुरुआत में स्लामेत ने आहरी को अवरोधित संचार वाली फाइलें मिटाने की अनुमति दी थी। उस समय स्लामेत पुलिस की आपराधिक जांच एजेंसी के निगरानी केंद्र के पर्यवेक्षी बोर्ड में थे।
पुलिस के आपराधिक जांच प्रमुख कमिश्नर जनरल असेप सफरुदीन ने कहा कि कथित अवरोधन की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी ने 30 अक्टूबर 2026 को पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जांचकर्ताओं ने 10 गवाहों और तीन विशेषज्ञ गवाहों से पूछताछ की और 11 मोबाइल फोन, एक आईपैड तथा चार फ्लैश ड्राइव जब्त किए। पुलिस ने कहा कि नंबरों को सत्यापन के बिना कानूनी अवरोधन प्रबंधन प्रणाली में दर्ज किया गया और कथित तौर पर कानून प्रवर्तन जांच के बाहर उनकी निगरानी की गई, जो राष्ट्रीय पुलिस प्रमुख के 2010 के विनियम संख्या 5 के विपरीत है।
सुहेरमांतो ने कहा कि स्लामेत पर आपराधिक संहिता की धारा 332(1) और/या (2) के तहत आरोप हैं, जो अवैध पहुंच से संबंधित हैं और जिनमें अधिकतम छह साल की जेल हो सकती है; कानून संख्या 1, 2023 की धारा 258(1), जिसमें 10 साल तक की सजा हो सकती है; और इलेक्ट्रॉनिक सूचना एवं लेन-देन कानून की धारा 32(1), जिसमें आठ साल तक की सजा हो सकती है। ये आरोप आपराधिक संहिता की धारा 20(j) के साथ लगाए गए हैं।
कानून, मानवाधिकार, आव्रजन और सुधार मामलों के समन्वय मंत्री युस्रिल इह्जा महेंद्रा ने 4 नवंबर को कहा कि जांचकर्ता आपराधिक संहिता की धारा 191–193 के तहत संभावित कथित देशद्रोह की भी जांच कर रहे हैं। इसमें यह भी देखा जा रहा है कि क्या अवरोधन का मकसद प्रबोवो को सरकारी शक्ति का इस्तेमाल करने से रोकना था। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस मामले की जांच जारी है और यह कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं है।
बढ़ती निगरानी जांच में राष्ट्रपति के अलावा अन्य संभावित लक्ष्यों के आरोप भी शामिल हैं। इनमें सरकारी अधिकारी, राजनेता, पत्रकार, नागरिक समाज से जुड़े लोग और कारोबारी शामिल हैं। जांच का यह दायरा उन लोगों के लिए भी अहम है, जिनका काम निजी बातचीत और गोपनीय जानकारी पर निर्भर करता है।
प्रबोवो ने लिस्त्यो को राष्ट्रपति स्टाफ कार्यालय के प्रमुख पद से हटा दिया। 4 नवंबर को उन्होंने लेफ्टिनेंट जनरल आरियो विंडुतोमो को अस्थायी रूप से यह पद संभालने के लिए नियुक्त किया। राष्ट्रपति सचिवालय के प्रमुख आरियो विंडुतोमो की नियुक्ति से जांच जारी रहने के दौरान कार्यालय का कामकाज चलता रहा।
जोकोवी ने कहा है कि वह कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करते हैं। एक संदिग्ध के वकील ने कहा कि उनका मुवक्किल जांचकर्ताओं के साथ सहयोग करेगा। मामला अभी जांच के चरण में है; 7 नवंबर की रैलियों की खबरों में मुकदमे या अंतिम फैसले की कोई तारीख घोषित नहीं की गई।
तनावपूर्ण संबंध और घटनाओं का तेज सिलसिला
जोकोवी की नियुक्ति के बाद 2021 में लिस्त्यो राष्ट्रीय पुलिस प्रमुख बने थे। 2024 में राष्ट्रपति बनने के बाद प्रबोवो ने उन्हें पद पर बनाए रखा और अक्टूबर 2026 में लिस्त्यो राष्ट्रपति स्टाफ कार्यालय में चले गए। कुछ ही हफ्तों बाद उन्हें हटाए जाने से निगरानी के आरोप प्रशासन के केंद्र में आ गए।
जोकोवी प्रबोवो के पूर्ववर्ती और राजनीतिक समर्थक थे। जांच ने उनके राजनीतिक खेमों के बीच तनाव उजागर किया है, खासकर इसलिए क्योंकि एक संदिग्ध ने दोनों राष्ट्रपतियों के कार्यकाल में वरिष्ठ पद संभाले थे। जांचकर्ताओं के सामने तत्काल कानूनी काम यह तय करना है कि कथित निगरानी की अनुमति किसने दी और जुटाई गई जानकारी का क्या हुआ।
मुख्य घटनाएं इस क्रम में हुईं:
- 2025 की शुरुआत: पुलिस के अनुसार, कथित अनधिकृत निगरानी शुरू हुई और 2026 तक जारी रही।
- अक्टूबर 2026 का आखिरी हिस्सा: जांचकर्ताओं का आरोप है कि अवरोधित संचार वाली फाइलें मिटाने का आदेश दिया गया।
- 28 अक्टूबर: जकार्ता और कई अन्य शहरों में छात्रों और नागरिक समाज समूहों ने आग, खर्च और अन्य शिकायतों को लेकर प्रदर्शन किया।
- 3 नवंबर: पुलिस ने निगरानी मामले में पहले तीन संदिग्धों की घोषणा की।
- 4 नवंबर: लिस्त्यो को हटाने के बाद प्रबोवो ने आरियो को राष्ट्रपति स्टाफ कार्यालय का कार्यवाहक प्रमुख नियुक्त किया।
- 5 नवंबर: जांचकर्ताओं ने स्लामेत को चौथा संदिग्ध घोषित किया।
- 7 नवंबर: श्रमिकों ने प्रबोवो के समर्थन में रैली की, जबकि महिलाओं के मार्च में उनकी नीतियों को चुनौती दी गई।
महिलाओं ने जकार्ता की सड़कों पर रखीं नौ मांगें
महिलाओं के मार्च में लैंगिक समानता को पर्यावरण संरक्षण, आर्थिक चिंताओं और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच से जोड़ा गया। इसकी नौ मांगों में सहिष्णुता और विविधता, पर्यावरण संरक्षण तथा महिला श्रमिकों की सुरक्षा की मांगें शामिल थीं।
प्रतिभागियों ने सरकार की महंगी मुफ्त भोजन योजना और महिलाओं के सैनिटरी उत्पादों पर कर का भी विरोध किया। उनकी आपत्तियों में राष्ट्रीय खर्च के फैसलों और रोजमर्रा की जरूरी चीजों की कीमत, दोनों मुद्दों को एक ही प्रदर्शन में उठाया गया।
महिला श्रमिकों की सुरक्षा की मांग ने मार्च को रोजगार संबंधी मुद्दों से जोड़ा, जबकि एक अन्य श्रमिक रैली में राष्ट्रपति का समर्थन किया जा रहा था। इस तरह कामकाज और आजीविका को लेकर चिंतित लोगों के बीच दोनों प्रदर्शनों ने अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं पेश कीं: एक रैली में प्रबोवो के राष्ट्रपति पद का समर्थन और दूसरी में नीतिगत बदलाव की मांग।
महिलाओं का एजेंडा सरकार के किसी एक फैसले तक सीमित नहीं था। प्रतिभागियों ने सामाजिक न्याय, महिलाओं के अधिकार और पर्यावरणीय न्याय के मुद्दे उठाए। पर्यावरणीय न्याय का मतलब है प्रदूषण और प्राकृतिक दुनिया को हुए नुकसान से प्रभावित लोगों के साथ निष्पक्ष व्यवहार। इस मार्च में ये चिंताएं आग, खर्च और महिलाओं के साथ होने वाले व्यवहार से जुड़ी ठोस शिकायतों के रूप में सामने आईं।
शेरिना और अन्य सार्वजनिक हस्तियां मार्च में शामिल हुईं
शेरिना मुनाफ ने जंगल और जमीन में जारी आग की ओर ध्यान खींचने वाला पोस्टर थामा। उन्होंने पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण का मुद्दा भी उठाया, जिससे उनकी भागीदारी प्रशासन के खिलाफ सबसे लगातार उठ रही शिकायतों में से एक से जुड़ गई।
अभिनेत्री तारा बसरो सामाजिक न्याय और महिलाओं के अधिकारों की मांग कर रहे अन्य प्रतिभागियों के साथ शामिल हुईं। बताया गया कि उन्होंने मार्च कर रहे लोगों के चारों ओर मानव श्रृंखला बनाने में भी मदद की। संगीतकार और अभिनेता ईवा सेलिया ने लैंगिक समानता के समर्थन में पारंपरिक गुलाबी कबाया पहनकर हिस्सा लिया।
अन्य प्रतिभागियों में क्रिस्टो इमैनुएल, लुतेशा, डेला डार्टयान, योशी सुदार्सो और शाहनाज सुहार्तोनो शामिल थे। डेला ने इंडोनेशिया के पर्यावरण को लेकर चिंता जताने वाला पोस्टर उठाया, जबकि योशी के पोस्टर में लैंगिक समानता और महिलाओं की सुरक्षा पर ध्यान दिया गया।
सार्वजनिक हस्तियां ऐसे मार्च में शामिल हुईं, जिसकी मांगें पहले से ही व्यापक थीं। उनकी भागीदारी ने नागरिक समाज समूहों और अन्य प्रदर्शनकारियों की साझा चिंताओं को जाना-पहचाना चेहरा दिया। इन चिंताओं में कार्यस्थल पर सुरक्षा से लेकर आग से हुए नुकसान तक के मुद्दे शामिल थे।
महीनों से जारी आग ने हालिया मार्च को पहले के प्रदर्शनों से जोड़ा
जंगल की आग ने महिलाओं के मार्च और अक्टूबर के आखिर में हुए छात्र प्रदर्शनों के बीच सीधा संबंध बनाया। वनों की कटाई पर नजर रखने वाले संगठन नुसंतारा एटलस ने कहा कि सितंबर तक के नौ महीनों में 19 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र जल चुका था। 100 हेक्टेयर को एक वर्ग किलोमीटर मानें तो यह 19,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक होता है।
यह अनुमान नुसंतारा एटलस के स्वतंत्र आकलन से आया है, जो 21 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित हुआ था। इसमें सेंटिनल-2 उपग्रह की तस्वीरों और PLOS ONE में प्रकाशित पद्धति का इस्तेमाल किया गया। आकलन के मुताबिक, जनवरी से सितंबर तक आग से प्रभावित क्षेत्र कुल मिलाकर करीब 19 लाख हेक्टेयर था, जिसमें आधे से अधिक क्षेत्र का पता सितंबर में चला। यह आग से प्रभावित जमीन का माप है, न कि नष्ट हुई वनस्पति के बराबर क्षेत्र का: नक्शे में दर्ज कुछ इलाकों की वनस्पति आग से अछूती रह सकती है, बच सकती है या फिर से उग सकती है।
इस आकलन में जले हुए इलाकों के निशान नक्शे पर दर्ज किए गए और संभावित जले क्षेत्रों की जांच नासा फिर्म्स के पांच उपग्रहों से मिले सक्रिय आग के हॉटस्पॉट के आधार पर की गई। डेटा को गूगल अर्थ इंजन में संसाधित किया गया। 6.25 हेक्टेयर से छोटे जले हुए हिस्सों को शामिल नहीं किया गया और गलत पहचान कम करने के लिए सावधानीपूर्वक तरीका अपनाया गया। लगातार बादल और धुआं आग का पता लगाने में देरी कर सकते हैं। अधिक तस्वीरें उपलब्ध होने पर आंकड़ों में संशोधन हो सकता है।
वन मंत्रालय के वर्गीकरण के अनुसार, आग से प्रभावित प्राकृतिक जंगल करीब 88,000 हेक्टेयर था; नुसंतारा एटलस के अपने वन क्षेत्र के आधार पर यह 85,000 हेक्टेयर था। नक्शे में दर्ज प्रभावित क्षेत्र जनवरी-सितंबर 2019 के मुकाबले 38% अधिक था। अलग से, 18 अक्टूबर तक हॉटस्पॉट का कुल पता लगना 2019 की इसी अवधि से 67% अधिक था, लेकिन 2015 की समान अवधि से 33% कम था। दोनों तुलनाओं के लिए उपग्रहों के एकसमान समूहों का इस्तेमाल किया गया। हॉटस्पॉट सक्रिय आग की पहचान को मापते हैं, प्रभावित क्षेत्र को नहीं। नुसंतारा एटलस के पास 2015 के लिए जले हुए क्षेत्र का तुलनीय अनुमान नहीं है।
अक्टूबर में जंगल की आग के खिलाफ हुए प्रदर्शनों में जकार्ता, बांडुंग, मलंग, योग्याकार्ता और मकासर में हजारों लोग सड़कों पर उतरे थे। छात्रों ने राष्ट्रीय आपदा घोषित करने और सुमात्रा तथा कालीमंतान में आग से निपटने के लिए अधिक संसाधन देने की मांग की। कालीमंतान इंडोनेशिया के बोर्नियो द्वीप वाले हिस्से को कहा जाता है।
धुएं के कारण सांस संबंधी बीमारियां बढ़ी थीं और धुआं पड़ोसी मलेशिया और सिंगापुर तक फैल गया था। अल नीनो नाम का जलवायु पैटर्न, जो इंडोनेशिया में अधिक शुष्क स्थितियां ला सकता है, संकट को और गंभीर बना रहा था। सूखी पीटलैंड एक खास समस्या थी: पीट में आंशिक रूप से सड़ा हुआ वनस्पति पदार्थ होता है, जो सतह के नीचे जल सकता है और ऐसा धुआं पैदा करता है जिसे रोकना मुश्किल होता है।
सरकार के संचार कार्यालय ने कहा कि अधिकारियों ने आग से जुड़ी कंपनियों पर मुकदमा चलाया है, प्रभावित प्रांतों तक सहायता पहुंचाई है और आग पर नजर रखना जारी रखेंगे। प्रदर्शनकारी इससे बड़े कदम चाहते थे। 7 नवंबर को शेरिना के पोस्टर ने उस आपात स्थिति पर ध्यान बनाए रखा, जिसे मार्च में शामिल लोग अब भी अनसुलझा मानते थे।
खर्च के फैसलों और प्रदर्शन से निपटने वाली पुलिस की भूमिका पर सवाल
महिलाओं के मार्च में प्रबोवो की मुफ्त भोजन योजना भी आलोचना का मुद्दा बनी। प्रदर्शनकारियों ने इसकी लागत के साथ आग से निपटने के सरकारी प्रयासों पर सवाल उठाए। इससे प्रशासन पर यह बताने का दबाव पड़ा कि पर्यावरणीय आपात स्थिति के बीच उसकी खर्च प्राथमिकताएं क्या हैं।
सैनिटरी उत्पादों पर कर के मुद्दे ने इस बहस को घरों में बार-बार होने वाली खरीदारी तक पहुंचा दिया। जरूरी उत्पाद पर कर से खरीदारों का खर्च बढ़ता है। यह मांग महिलाओं के नियमित खर्च से जुड़ी थी, जबकि व्यापक मार्च में कार्यस्थल पर सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच की मांगें भी शामिल थीं।
पहले के प्रदर्शनों में भी यह परखा जा चुका था कि अधिकारी असहमति से कैसे निपटते हैं। 28 अक्टूबर को जकार्ता के होटल इंडोनेशिया राउंडअबाउट की ओर जा रहे छात्रों को जालान सुदिरमान पर बैंक यूओबी इमारत के पास रोक दिया गया था। एचआई राउंडअबाउट के पास लगाए गए अवरोध उसी समय सामने आए, जब पुलिस ने अधिकारियों द्वारा पहने जाने वाले कैमरों का अधिक इस्तेमाल करने और प्रदर्शनों से निपटते समय संवाद को प्राथमिकता देने का वादा किया था।
पुलिस प्रमुख जनरल सुयुडी आरियो सेतो ने ऐसे एहतियाती तरीके की अपील की थी, जिससे लोग सुरक्षित रूप से अपनी राय रख सकें। प्रदर्शनकारियों के लिए व्यावहारिक सवालों में यह शामिल था कि क्या वे प्रदर्शन के तय स्थानों तक पहुंच सकते हैं और क्या अधिकारियों के साथ उनकी मुठभेड़ रिकॉर्ड की जाएगी।
7 नवंबर की सभाओं में प्रबोवो को समर्थन दिया गया, जबकि इस अवधि में उनके प्रशासन की आलोचना भी होती रही। दोनों की ठोस मांगें अलग थीं: सईद के नेतृत्व में श्रमिकों ने राष्ट्रपति पद के समर्थन में रैली की, जबकि महिलाओं के मार्च में अधिकारों, जरूरी चीजों की लागत और जारी आग पर कार्रवाई की मांग की गई।
मुख्य बिंदु
- 7 नवंबर 2026 को जकार्ता में सैकड़ों श्रमिकों ने प्रबोवो का समर्थन किया, जबकि सैकड़ों महिलाएं उनकी नीतियों के खिलाफ मार्च में शामिल हुईं।
- लेबर पार्टी अध्यक्ष और राष्ट्रपति के सलाहकार सईद इकबाल ने राष्ट्रपति पद के समर्थन में यूनियन सदस्यों को लामबंद करने का वादा किया।
- कथित अवैध निगरानी की जांच में पुलिस ने चार वरिष्ठ अधिकारियों को संदिग्ध बताया है।
- महिलाओं के मार्च में आर्थिक, सामाजिक, पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं से जुड़ी नौ मांगें रखी गईं।
- शेरिना मुनाफ और अन्य सार्वजनिक हस्तियां महिलाओं के अधिकारों और पर्यावरण संरक्षण की मांग करने वाले प्रतिभागियों के साथ शामिल हुईं।
- जंगल की आग, मुफ्त भोजन योजना की लागत और सैनिटरी उत्पादों पर कर मार्च में शामिल लोगों की शिकायतों में शामिल थे।






