नियोक्ता के अंशदान पर अधिक नियंत्रण
हांगकांग में करीब 10 लाख कर्मचारियों को 21 दिसंबर, 2026 से अपने मौजूदा नियोक्ता के अनिवार्य अंशदान से बनी सेवानिवृत्ति बचत को अपनी पसंद की एमपीएफ योजना में स्थानांतरित करने का अधिकार मिलने वाला है। अनिवार्य भविष्य निधि की पूर्ण पोर्टेबिलिटी का पहला चरण उन कर्मचारियों पर लागू होगा, जिन्होंने 1 मई, 2025 को या उसके बाद नौकरी शुरू की अथवा बदली।
विषय-सूची
अनिवार्य भविष्य निधि योजना प्राधिकरण की अध्यक्ष आयशा मैकफर्सन लाउ ने एक ब्लॉग में इसकी शुरुआत की तारीख की घोषणा करते हुए कहा कि सरकार ने इसे राजपत्र में प्रकाशित कर दिया है। प्राधिकरण की पूर्ण पोर्टेबिलिटी मार्गदर्शिका में भी 21 दिसंबर, 2026 की तारीख दी गई है, हालांकि इसमें यह शर्त बरकरार है कि सटीक तारीख संबंधित कानूनी अधिसूचनाओं की विधायी परिषद द्वारा जांच पूरी होने पर निर्भर करेगी।
पात्र कर्मचारी हर कैलेंडर वर्ष में एक बार अपने मौजूदा नियोक्ता के अनिवार्य अंशदान से बनी पूरी बचत स्थानांतरित कर सकेंगे। यह राशि नियोक्ता की चुनी हुई एमपीएफ योजना के अंशदान खाते से कर्मचारी की चुनी हुई योजना के व्यक्तिगत खाते में जाएगी।
कर्मचारियों के लिए व्यावहारिक बदलाव यह है कि उन्हें अपनी सेवानिवृत्ति बचत के अधिक हिस्से का प्रबंधन किसके हाथ में हो, इस पर ज्यादा विकल्प मिलेगा। मौजूदा नौकरी के दौरान अपने अनिवार्य अंशदान से बनी बचत को कर्मचारी पहले से ही साल में एक बार स्थानांतरित कर सकते हैं। इस सुधार के तहत पात्र कर्मचारियों को नियोक्ता के अंशदान वाले हिस्से के लिए भी यह विकल्प मिलेगा।
नियोक्ता मौजूदा व्यवस्था के तहत अंशदान करना जारी रखेंगे। नया अधिकार जमा हुई सेवानिवृत्ति बचत को अलग-अलग एमपीएफ खातों के बीच स्थानांतरित करने से जुड़ा है, जबकि नियोक्ता अपनी सहभागी योजना में भुगतान करते रहेंगे। इसलिए कर्मचारी नियमित अंशदान के लिए नियोक्ता की योजना बदले बिना जमा बचत को किसी दूसरी योजना में रखने का विकल्प चुन सकते हैं।
पहले चरण के लिए कौन पात्र है?
1 मई, 2025 निर्णायक तारीख है। पहले चरण में वे कर्मचारी शामिल हैं जिन्होंने उस तारीख को या उसके बाद काम शुरू किया, साथ ही वे लोग भी जिन्होंने उस तारीख को या उसके बाद नौकरी बदली। लाउ ने कहा कि शुरुआत में करीब 10 लाख कर्मचारी इस समूह में आएंगे।
जून 2025 में पहली नौकरी शुरू करने वाला कर्मचारी इस समय-सीमा की शर्त पूरी करेगा। कई साल से काम कर रहा कोई व्यक्ति भी अगर जून 2025 में नए नियोक्ता के पास गया, तो वह प्राधिकरण द्वारा बताए गए समूह में आएगा। अहम बात यह है कि मौजूदा नौकरी कब शुरू हुई, न कि किसी व्यक्ति ने कुल कितने साल काम किया है।
जिन कर्मचारियों ने अपनी मौजूदा नौकरी 1 मई, 2025 से पहले शुरू की थी, वे दूसरे चरण में आएंगे। उनकी व्यवस्था के लिए आगे विधायी काम जरूरी है, क्योंकि रोजगार समाप्त होने पर देय भुगतानों की गणना में नियोक्ता के कुछ अंशदान अब भी इस्तेमाल हो सकते हैं।
लाउ को उम्मीद है कि स्नातकों के नौकरी में आने और अन्य कर्मचारियों के नौकरी बदलने के साथ पहले चरण में शामिल लोगों की संख्या बढ़ेगी। इस तरह रोजगार शुरू करने की तारीख की शर्त पूरी करने वाले नए लोगों के साथ कवरेज शुरुआती समूह से आगे भी विस्तृत होगा।
वार्षिक हस्तांतरण कैसे होगा
पात्र कर्मचारी अपनी मौजूदा नौकरी के दौरान नियोक्ता के अनिवार्य अंशदान से बनी पूरी एमपीएफ बचत हर कैलेंडर वर्ष में एक बार स्थानांतरित कर सकेंगे। यहां बचत का अर्थ उन अंशदानों से बनी जमा सेवानिवृत्ति निधि है।
राशि कर्मचारी की चुनी हुई एमपीएफ योजना के व्यक्तिगत खाते में जाएगी। यह उस अंशदान खाते से अलग है जिसका इस्तेमाल नियोक्ता नियमित भुगतान करने के लिए करता है। इस व्यवस्था से कर्मचारियों को नियोक्ता के अंशदान से बनी जमा राशि रखने की योजना चुनने का विकल्प मिलेगा, साथ ही उन्हें अपने अंशदान की बचत के लिए मौजूदा विकल्प भी मिलता रहेगा।
लाउ ने कहा कि कर्मचारी 2026 कैलेंडर वर्ष के लिए 21 से 31 दिसंबर के बीच हस्तांतरण शुरू कर सकेंगे। 2027 कैलेंडर वर्ष का विकल्प 1 जनवरी, 2027 से उपलब्ध होगा। ये तारीखें सालाना हस्तांतरण के अवसर को दर्शाती हैं, न कि इस आश्वासन को कि हस्तांतरण इतनी छोटी अवधि में पूरा हो जाएगा।
इस कैलेंडर के तहत 2026 में शुरुआती अवसर केवल 11 दिनों का होगा, जिसके तुरंत बाद नए साल का वार्षिक विकल्प खुल जाएगा। जनवरी तक इंतजार करने वाला कर्मचारी 2027 के अवसर का इस्तेमाल करेगा। फिर भी लाउ ने सदस्यों से कहा कि वे सिर्फ वार्षिक अवसर उपलब्ध होने के कारण हस्तांतरण करने के बजाय अपनी सेवानिवृत्ति निवेश जरूरतों के हिसाब से फैसला लें।
मई 2025 क्यों अहम है
हांगकांग ने 1 मई, 2025 से एमपीएफ की ऑफसेटिंग व्यवस्था समाप्त कर दी। इस व्यवस्था के तहत नियोक्ता अपने अंशदान से बनी संबंधित सेवानिवृत्ति बचत का इस्तेमाल छंटनी मुआवजे या लंबी सेवा भुगतान की देनदारियों को पूरा करने के लिए कर सकते थे। छंटनी मुआवजा पात्र नौकरी गंवाने की स्थितियों में मिलता है, जबकि लंबी सेवा भुगतान रोजगार की निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद कुछ परिस्थितियों में लागू होता है।
इस बदलाव से कर्मचारियों के हस्तांतरण अधिकारों का विस्तार संभव हुआ, लेकिन 1 मई, 2025 से पहले के रोजगार काल के लिए अब भी विशेष व्यवस्था जरूरी है। उस तारीख से पहले शुरू हुई नौकरी में बने कर्मचारियों के मामले में नियोक्ता के अनिवार्य अंशदान से बनी बचत का इस्तेमाल पहले के रोजगार काल से जुड़े छंटनी मुआवजे या लंबी सेवा भुगतान के हिस्से की भरपाई के लिए जारी रह सकता है।
यही जारी संबंध दो चरणों की वजह समझाता है। निर्णायक तारीख के बाद मौजूदा नौकरी शुरू करने वाले कर्मचारी की नियोक्ता-अंशदान बचत को स्थानांतरित करना अपेक्षाकृत सरल है। लेकिन उस तारीख से पहले शुरू हुई नौकरी में बने कर्मचारी की बचत स्थानांतरित करने के लिए ऐसी व्यवस्था चाहिए जो रोजगार अध्यादेश के तहत संबंधित भुगतान नियमों को भी लागू रखे।
इसलिए दूसरे समूह के कर्मचारियों के लिए अलग खाते की संरचना और सहायक कानून की जरूरत है। प्राधिकरण ने दूसरे चरण की शुरुआत की तारीख घोषित नहीं की है।
अन्य कर्मचारियों के लिए विशेष खाते का प्रस्ताव
एमपीएफए ने पुराने रोजगार संबंधों वाले कर्मचारियों के लिए संभावित समाधान अपने मार्च 2025 के परामर्श में प्रस्तुत किया। इसमें नामित नियोक्ता अनिवार्य अंशदान खाता, यानी नामित ईआरएमसी खाता, बनाने का प्रस्ताव था।
इस प्रस्ताव के तहत, 1 मई, 2025 से पहले मौजूदा नौकरी शुरू करने वाला कर्मचारी उस नौकरी के लिए नियोक्ता के अनिवार्य अंशदान की पूरी बचत साल में एक बार अपनी पसंद की योजना के नामित खाते में स्थानांतरित कर सकता था।
इस खाते से कर्मचारियों को एमपीएफ योजना चुनने का विकल्प मिलता, जबकि मई 2025 से पहले के रोजगार से जुड़े किसी भी ऑफसेट के लिए जरूरी व्यवस्था भी कायम रहती। इसे कर्मचारी को अधिक नियंत्रण देने और रोजगार अध्यादेश की मौजूदा जरूरतों को पूरा करने का तरीका बताया गया था।
प्राधिकरण ने कहा कि दोनों कर्मचारी समूहों के प्रस्तावों के लिए कानून में संशोधन और प्रणालीगत सहयोग के अलग-अलग स्तर के काम की जरूरत थी। निर्णायक तारीख से पहले ही नौकरी में लगे कर्मचारियों की व्यवस्था तैयार होने में अधिक समय लग सकता था। मौजूदा शुरुआत इसी चरणबद्ध तरीके के अनुरूप है; शेष कर्मचारियों तक कवरेज बढ़ाने के लिए आगे और कानून की जरूरत होगी।
मौजूदा हस्तांतरण व्यवस्था से क्या पता चलता है
हांगकांग ने नवंबर 2012 में कर्मचारी विकल्प व्यवस्था शुरू की, जिसे आम तौर पर आंशिक पोर्टेबिलिटी कहा जाता है। इसके तहत कर्मचारी मौजूदा नौकरी के दौरान अपने अनिवार्य अंशदान से बनी पूरी बचत हर कैलेंडर वर्ष में एक बार अपनी चुनी हुई योजना के व्यक्तिगत खाते में स्थानांतरित कर सकते हैं।
नियोक्ता के अंशदान उनकी योजना में ही रहते थे, क्योंकि उनका संबंध छंटनी मुआवजे और लंबी सेवा भुगतान की भरपाई से था। पूर्ण पोर्टेबिलिटी उस विकल्प का विस्तार करती है जिसका इस्तेमाल कर्मचारी 2012 से अपने अंशदान की बचत के लिए करते आए हैं।
लाउ द्वारा उद्धृत आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2026 तक आंशिक पोर्टेबिलिटी के तहत 11 लाख से अधिक लेनदेन हुए थे, जिनमें करीब 59 अरब हांगकांग डॉलर शामिल थे। लेनदेन की संख्या में व्यवस्था शुरू होने के बाद से हुए हस्तांतरण शामिल हैं, जिनमें वर्षों के दौरान एक से अधिक बार किए गए हस्तांतरण भी हैं।
कर्मचारियों ने 2021 से 2025 के दौरान आंशिक पोर्टेबिलिटी के जरिए सालाना औसतन 4.5 अरब हांगकांग डॉलर स्थानांतरित किए, जबकि 2016 से 2020 के दौरान यह राशि 4.2 अरब हांगकांग डॉलर थी। 30 करोड़ हांगकांग डॉलर की यह वृद्धि करीब 7% है। इससे पता चलता है कि नियोक्ता-अंशदान सुधार से पहले ही हर साल स्थानांतरित होने वाली राशि बढ़ रही थी।
नए चरण से पात्र कर्मचारियों द्वारा स्थानांतरित की जा सकने वाली बचत का दायरा बढ़ता है। शुरुआत में करीब 10 लाख कर्मचारियों का कवरेज नए अधिकार के पात्र लोगों को दर्शाता है, जबकि 11 लाख का आंकड़ा पुरानी व्यवस्था के तहत अब तक हुए लेनदेन की संख्या है।
अधिक विकल्प और शुल्कों पर प्रतिस्पर्धा
एमपीएफए का घोषित उद्देश्य कर्मचारियों को अपने सेवानिवृत्ति निवेश पर अधिक नियंत्रण देना और एमपीएफ प्रदाताओं के बीच प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना है। अगर अधिक बचत अलग-अलग योजनाओं के बीच स्थानांतरित की जा सकती है, तो प्रदाताओं के पास शुल्क, निवेश प्रदर्शन और सेवा के आधार पर कर्मचारियों का समर्थन हासिल करने के लिए प्रतिस्पर्धा करने की अधिक वजह होगी।
मार्च 2025 में परामर्श शुरू होने पर एमपीएफए के प्रबंध निदेशक चेंग यान-ची ने पूरे सुधार के अपेक्षित दायरे का वर्णन किया:
एमपीएफ की पूर्ण पोर्टेबिलिटी लागू होना एमपीएफ प्रणाली के विकास में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है। प्रस्तावित पूर्ण पोर्टेबिलिटी लागू होने के बाद योजना सदस्यों द्वारा अपनी इच्छा से स्थानांतरित किए जा सकने वाले निहित एमपीएफ लाभों का अनुपात मौजूदा 70% से अधिक से बढ़कर करीब 100% हो जाएगा।
निहित लाभ वह सेवानिवृत्ति बचत है जिस पर सदस्य का अधिकार होता है। चेंग की तुलना प्रस्तावित पूर्ण सुधार के अपेक्षित दायरे को दर्शाती है, जिसमें दोनों कर्मचारी समूहों के लिए जरूरी व्यवस्थाएं शामिल हैं।
प्राधिकरण हस्तांतरण में मदद के लिए ईएमपीएफ प्लेटफॉर्म का भी उल्लेख करता है। जून 2024 में शुरू हुआ यह प्लेटफॉर्म एमपीएफ व्यवस्थाओं के लिए एक साझा प्रशासनिक प्रणाली उपलब्ध कराता है। एमपीएफए का कहना है कि पूरी तरह चालू प्लेटफॉर्म की सुविधा और व्यापक हस्तांतरण अधिकार मिलकर सदस्यों को अपने निवेश का अधिक सक्रिय प्रबंधन करने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं और शुल्कों में कमी की गुंजाइश बना सकते हैं।
परामर्श से दिसंबर के अवसर तक
यह सुधार नीतिगत घोषणा, सार्वजनिक परामर्श और कानून व प्रशासन की तैयारियों के जरिए आगे बढ़ा। मुख्य तारीखें बताती हैं कि दिसंबर में शुरुआत पहले एक समूह के लिए क्यों हो रही है:
- नवंबर 2012: कर्मचारी विकल्प व्यवस्था शुरू हुई। इसके तहत मौजूदा नौकरी के दौरान कर्मचारियों के अनिवार्य अंशदान से बनी बचत को सालाना स्थानांतरित करने की अनुमति मिली।
- जून 2024: ईएमपीएफ प्लेटफॉर्म शुरू हुआ।
- 2024 का नीतिगत संबोधन: मुख्य कार्यकारी ने एमपीएफ की पूर्ण पोर्टेबिलिटी लागू करने की घोषणा की और एमपीएफए को प्रस्ताव तैयार करने का जिम्मा दिया।
- 28 मार्च से 28 अप्रैल, 2025: एमपीएफए ने प्रस्तावित हस्तांतरण व्यवस्था पर सार्वजनिक परामर्श किया।
- 1 मई, 2025: एमपीएफ ऑफसेटिंग समाप्त हुई। इससे चरणबद्ध सुधार के लिए रोजगार संबंधी निर्णायक तारीख तय हुई।
- 21 से 31 दिसंबर, 2026: पात्र कर्मचारी 2026 कैलेंडर वर्ष के अवसर का इस्तेमाल करते हुए हस्तांतरण शुरू कर सकेंगे।
- 1 जनवरी, 2027: अगले कैलेंडर वर्ष के लिए हस्तांतरण का अवसर उपलब्ध होगा।
लाउ ने आगाह किया कि एमपीएफ सेवानिवृत्ति के लिए निवेश है और बार-बार हस्तांतरण करने या सिर्फ हस्तांतरण के लिए धनराशि ले जाने से बचने को कहा। पात्र कर्मचारी के लिए व्यावहारिक फैसला यह है कि क्या कोई दूसरी योजना उसकी जरूरतों के अधिक अनुकूल है; इसके लिए शुल्क, निवेश विकल्प और सेवा पर ध्यान देना चाहिए।
नियोक्ताओं के लिए अंशदान की प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं होगा। पात्र कर्मचारियों के लिए दिसंबर में नई शुरुआत से नियोक्ता के अंशदान की जमा बचत के बारे में नया विकल्प खुलेगा। मई 2025 से पहले शुरू हुई नौकरी में बने कर्मचारियों के लिए अगला कदम दूसरे चरण की खातिर जरूरी कानून और संचालन संबंधी तैयारियां हैं।
मुख्य बातें
- पहला चरण 21 दिसंबर, 2026 से शुरू होने वाला है। इसमें करीब 10 लाख वे कर्मचारी शामिल होंगे जिन्होंने 1 मई, 2025 को या उसके बाद काम शुरू किया अथवा नौकरी बदली।
- पात्र कर्मचारी मौजूदा नौकरी के दौरान नियोक्ता के अनिवार्य अंशदान से बनी पूरी बचत साल में एक बार स्थानांतरित कर सकते हैं।
- 2026 में शुरुआती हस्तांतरण अवधि 21 से 31 दिसंबर तक होगी और 2027 का अवसर 1 जनवरी से खुलेगा।
- नियोक्ता मौजूदा व्यवस्था के तहत अंशदान करते रहेंगे।
- जिन कर्मचारियों ने मौजूदा नौकरी 1 मई, 2025 से पहले शुरू की थी, वे बाद के चरण में आएंगे, जिसके लिए आगे विधायी काम जरूरी है।
- एमपीएफए का उद्देश्य कर्मचारियों को अधिक विकल्प देना और प्रतिस्पर्धा बढ़ाना है। साथ ही वह सदस्यों से अपनी सेवानिवृत्ति निवेश जरूरतों के हिसाब से हस्तांतरण करने का आग्रह करता है।






