पांच लीटर तेल, लेकिन बिल ज्यादा
सोयाबीन तेल की पांच लीटर की बोतल पर छपी कीमत 1,000 टका है, फिर भी रमज़ान से पहले आपूर्ति अनियमित रहने के कारण ढाका के कुछ इलाकों में खरीदार 1,005 से 1,020 टका तक दे रहे हैं। उत्पादक 14 टका प्रति लीटर की एक और बढ़ोतरी मांग रहे हैं, जबकि वाणिज्य मंत्री खांडकार अब्दुल मुक्तादिर ने कहा है कि सरकार का रोज़े के महीने से पहले खाद्य तेल की कीमतें बढ़ाने का इरादा नहीं है।
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बड्डा, रामपुरा, मालिबाग और शांतिनगर की दुकानों में कुछ बोतलें उनकी छपी कीमत से अधिक पर बेची जा रही हैं। खुदरा विक्रेताओं का कहना है कि पांच लीटर की बोतलों की आपूर्ति सीमित है और उनके पास ज्यादातर एक या दो लीटर वाली बोतलें आ रही हैं। सस्ता बड़ा पैक खरीदने की कोशिश कर रहे परिवारों को या तो कई दुकानों पर तलाश करनी पड़ रही है या अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।
यह विवाद 2 सितंबर को हुई 5 टका की बढ़ोतरी के बाद सामने आया, जिससे बोतलबंद सोयाबीन तेल की कीमत 204 टका प्रति लीटर हो गई थी। इसके बाद बांग्लादेश वेजिटेबल ऑयल रिफाइनर्स एंड वनस्पति मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ने अंतरराष्ट्रीय कच्चे माल की बढ़ी कीमतों और परिवहन लागत का हवाला देते हुए फिर बढ़ोतरी की मांग की।
बांग्लादेश ट्रेड एंड टैरिफ कमीशन के अनुसार, बांग्लादेश अपनी खाद्य तेल जरूरतों का लगभग 90 प्रतिशत आयात से पूरा करता है। इसलिए घरों का खाद्य खर्च विदेशों में कीमतों, जहाजों के आवागमन और विदेशी मुद्रा में सामान खरीदने की लागत से सीधे जुड़ा है। हालांकि, तात्कालिक समस्या यह भी है कि आयातकों और रिफाइनरियों से तेल पड़ोस की दुकानों तक कैसे पहुंच रहा है।
बड़ी बोतल क्यों अहम है
1,000 टका अंकित कीमत वाली पांच लीटर की बोतल में तेल 200 टका प्रति लीटर पड़ता है। 204 टका प्रति लीटर की दर से पांच अलग-अलग लीटर खरीदने पर 1,020 टका खर्च होते हैं। इस तरह बड़ी बोतल से 20 टका की बचत होती है। कई बढ़ते खाद्य खर्च संभाल रहे परिवारों के लिए यह छोटी, मगर काम की राहत है।
उपभोक्ताओं का कहना है कि कुछ दुकानें बड़ी बोतल बेचते समय भी हर लीटर के 204 टका लेती हैं। इससे कुल बिल 1,020 टका हो जाता है और बड़े पैक पर छपी कीमत से मिलने वाली पूरी बचत खत्म हो जाती है।
खुदरा विक्रेताओं का कहना है कि उनकी कमाई भी घट गई है। कुछ के मुताबिक, पांच लीटर की हर बोतल पर उनका मार्जिन घटकर 5 टका रह गया है, जो पहले 20 से 25 टका था। वे कम डीलर भत्तों के साथ-साथ कमी का भी हवाला देते हैं। कम मार्जिन पर एक बोतल से पहले जितनी कमाई होती थी, उतनी कमाने के लिए दुकान को चार या पांच बोतलें बेचनी पड़ती हैं।
घरों को इस समस्या का सामना कीमत और उपलब्धता, दोनों के रूप में करना पड़ रहा है। बोतल पर सरकार द्वारा मंजूर या छपी कीमत हो सकती है, लेकिन जब आसपास की दुकानों में उत्पाद ही न मिले तो उस कीमत से खास राहत नहीं मिलती। छोटी बोतलें खरीदने से रसोई की जरूरत पूरी हो सकती है, लेकिन उतनी ही कुल मात्रा के लिए खर्च बढ़ जाता है।
उत्पादक 218 टका प्रति लीटर चाहते हैं
रिफाइनर्स एसोसिएशन ने ट्रेड एंड टैरिफ कमीशन से 14 टका की बढ़ोतरी की सिफारिश करने का अनुरोध किया। कमीशन को उसका पत्र 13 अक्टूबर को मिला। मंजूरी मिलने पर एक लीटर की बोतल की कीमत 204 से बढ़कर 218 टका हो जाएगी, यानी लगभग 6.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी।
कंपनियों के विपणन अधिकारियों का कहना है कि उत्पादन लागत 230 टका प्रति लीटर से अधिक है, जबकि बिक्री कीमत 204 टका है। उनके आंकड़ों के अनुसार, मांगी गई बढ़ोतरी के बाद भी खुदरा कीमत बताई गई उत्पादन लागत से 12 टका से अधिक कम रहेगी। लागत के ये आंकड़े कंपनियों के अनुमान हैं; मंत्रालय ने न तो इन्हें स्वीकार करने और न ही मांगी गई बढ़ोतरी को मंजूरी देने का फैसला घोषित किया है।
व्यापारियों का कहना है कि उन्होंने सितंबर की 5 टका की बढ़ोतरी इस समझ के साथ स्वीकार की थी कि इसके बाद एक और बदलाव होगा। कंपनियों ने अक्टूबर के अंत में फिर बढ़ोतरी मांगी। 28 अक्टूबर को मुक्तादिर ने कहा कि सरकार उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए रमज़ान से पहले खाद्य तेल की कीमतें बढ़ाने की योजना नहीं बना रही है।
कीमतों को लेकर ताजा विवाद कई चरणों में आगे बढ़ा है:
- 2 सितंबर: ट्रेड एंड टैरिफ कमीशन की सिफारिश के बाद बोतलबंद सोयाबीन तेल की कीमत 5 टका बढ़कर 204 टका प्रति लीटर हुई।
- 13 अक्टूबर: कमीशन को एसोसिएशन की ओर से 14 टका और बढ़ोतरी का अनुरोध मिला।
- अक्टूबर का अंत: कंपनियों ने कीमतें बढ़ाने की मांग फिर उठाई।
- 28 अक्टूबर: वाणिज्य मंत्री ने कहा कि सरकार रमज़ान से पहले बढ़ोतरी की योजना नहीं बना रही है।
रमज़ान के आयात, आपूर्ति शृंखला और बाजार की स्थिति पर सोमवार को हुई एक अलग बैठक में मुक्तादिर ने तेल की कीमतें बढ़ाने का प्रस्ताव भी सुना। मंत्रालय ने इस अनुरोध पर कोई फैसला नहीं किया था।
आपूर्ति कौन रोक रहा है?
बाजार अर्थशास्त्री और जहांगीरनगर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति अब्दुल बायेस ने सरकार से उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करने और तेल कारोबारियों के दबाव का विरोध करने की अपील की है। बाजार विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि कंपनियां कीमतें बढ़ाने की मांग को मजबूत करने के लिए आपूर्ति सीमित कर रही हों।
फरवरी 2025 में रमज़ान से पहले हुई किल्लत के दौरान भी ऐसे ही आरोप लगे थे। बांग्लादेश कंज्यूमर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष एस. एम. नाजेर हुसैन ने सरकार पर दबाव बनाने के लिए आपूर्तिकर्ताओं पर डिलीवरी नियंत्रित करने का आरोप लगाया था। उन्होंने इसे बार-बार दोहराया जाने वाला तरीका बताते हुए कहा:
हमने पहले भी यही तरीका देखा है। कीमतें बढ़ाने से पहले वे बाजार से तेल हटा लेते हैं। पिछले साल रमज़ान से पहले भी ऐसा हुआ था। वे कुछ चुनिंदा वितरकों को तेल देते हैं ताकि लगे कि आपूर्ति हो रही है, लेकिन वास्तविक मात्रा का खुलासा नहीं करते। इससे वे आपूर्ति शृंखला को नियंत्रित कर पाते हैं,
उद्योग संघ ने 16 फरवरी को एक बयान में अलग वजह बताई थी। उसने कहा कि उसके सदस्य रमज़ान के लिए सामान्य से अधिक तेल की आपूर्ति कर रहे हैं और वितरण की समस्याओं के लिए कारोबारियों द्वारा भंडारण को जिम्मेदार ठहराया। बयान में सिटी ग्रुप, मेघना ग्रुप, टीके ग्रुप और बांग्लादेश एडिबल ऑयल लिमिटेड को उन उत्पादकों में गिनाया गया था जिन्होंने जरूरत से अधिक तेल आयात किया था।
ताजा किल्लत की जिम्मेदारी सार्वजनिक रूप से तय नहीं हुई है। अलग-अलग दावे एक ही आपूर्ति शृंखला के अलग हिस्सों पर ध्यान दिलाते हैं: आयात, रिफाइनरी का उत्पादन, डीलरों का भंडार और अलग-अलग दुकानों तक डिलीवरी।
2025 में रमज़ान से पहले क्या हुआ था?
7 फरवरी 2025 को मोगबाजार, कारवां बाजार, कल्याणपुर और शाहजादपुर की दुकानों में बोतलबंद सोयाबीन तेल सीमित मात्रा में था। कुछ बड़ी दुकानों में केवल कुछ बोतलें बची थीं, जबकि छोटे खुदरा विक्रेताओं ने कहा कि डिलीवरी बहुत घट गई थी या रुक गई थी।
इस किल्लत से पहले नवंबर 2024 में बोतलबंद तेल बाजार से गायब हो गया था और 9 दिसंबर को कीमत 8 टका बढ़ाई गई थी। दिसंबर के बदलाव के बाद बोतलबंद सोयाबीन तेल 175 टका प्रति लीटर और खुला सोयाबीन तेल तथा सुपर पाम तेल 157 टका प्रति लीटर हो गया था। इसके बाद मंत्रालय के अधिकारियों और उद्योग जगत के नेताओं ने कीमतों की मासिक समीक्षा पर सहमति जताई थी।
इसके बाद व्यापारियों ने 15 टका प्रति लीटर की एक और बढ़ोतरी मांगी और 23 जनवरी 2025 को कारोबारी सलाहकार शेख बशीर उद्दीन से मुलाकात की। प्रस्ताव ट्रेड एंड टैरिफ कमीशन को भेजा गया। फरवरी तक, पहले की बढ़ोतरी के बावजूद, खरीदारों को फिर बोतलें ढूंढ़ने में परेशानी हो रही थी।
उस पिछली किल्लत के दौरान भी कीमतों में अंतर था। 7 फरवरी को पांच लीटर की बोतलें 840 से 850 टका में बिक रही थीं; फरवरी में बाद में बाजार की जांच में 852 टका की तय कीमत बताई गई। ये कीमतें पिछली किल्लत की थीं, जब एक लीटर की कीमत 175 टका थी, न कि मौजूदा 204 टका वाली कीमत के विवाद की।
कुछ खुदरा विक्रेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि आपूर्तिकर्ता तेल लेने के लिए उनसे चावल, हल्दी या मिर्च पाउडर खरीदने की शर्त रखते थे। कारवां बाजार स्थित अनवर ट्रेडर्स के विक्रेता मोहम्मद जसीम उद्दीन ने कहा कि यह शर्त खरीदारों तक भी पहुंच रही थी:
नतीजतन, कुछ दुकानें तेल खरीदने वाले ग्राहकों को भी अतिरिक्त सामान खरीदने के लिए मजबूर कर रही हैं,
ऐसी स्थिति का सामना कर रहे परिवार को तेल के साथ अनचाहा सामान खरीदने के लिए भी पर्याप्त पैसे चाहिए। अतिरिक्त खर्च उतना ही भारी पड़ सकता है जितनी तेल की सूचीबद्ध कीमत में बढ़ोतरी।
आयात ज्यादा, फिर भी दुकानों की अलमारियां खाली
2025 की शुरुआत के ट्रेड एंड टैरिफ कमीशन के आंकड़े बताते हैं कि राष्ट्रीय आयात और स्थानीय दुकानों में आपूर्ति, दोनों को साथ देखकर समझना क्यों जरूरी है। जनवरी में बांग्लादेश ने 117,000 टन सोयाबीन तेल आयात किया, जो छह साल में जनवरी का सबसे बड़ा आंकड़ा था। आम तौर पर महीने की मांग लगभग 87,000 टन रहती है। रमज़ान में मांग इस सामान्य स्तर से अधिक हो जाती है।
जनवरी में 300,000 टन और सोयाबीन भी आया, जिससे प्रसंस्करण के बाद लगभग 45,000 टन तेल मिल सकता है। आयातित सोयाबीन से तेल निकालने के लिए उसकी पेराई और आगे की प्रक्रिया जरूरी है, तभी वह उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है।
फरवरी में डिलीवरी अनियमित रही। शुरुआती तीन हफ्तों में केवल 25,000 टन सोयाबीन तेल आया। 26 फरवरी तक आयात 57,000 टन पहुंचा, जिससे जनवरी और फरवरी का कुल आयात 174,000 टन हो गया। एक साल पहले इसी अवधि में यह कुल मात्रा 120,000 टन थी। यानी आयात 54,000 टन या 45 प्रतिशत बढ़ा था।
टीके ग्रुप के निदेशक मुस्तफा हैदर ने खेप में देरी के लिए अर्जेंटीना के बंदरगाहों की समस्याओं को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि फरवरी की शुरुआत में आने वाले टैंकर महीने के आखिरी हफ्ते में पहुंचने लगे और तेल उतारकर बाजार में भेजा जा रहा था। 130,000 टन और आने की उम्मीद थी।
किल्लत के दौरान खुदरा दुकानों तक डिलीवरी सीमित रही। चट्टोग्राम के बहद्दरहाट बाजार के खुदरा विक्रेता फरीदुल हक ने कहा कि 20 कार्टन के ऑर्डर के मुकाबले उनकी दुकान को दो कार्टन मिले, यानी मांगी गई मात्रा का सिर्फ दसवां हिस्सा। इसलिए आयात बढ़ने के बावजूद दुकानों में किल्लत रह सकती है, जबकि माल देर से पहुंचे या तेल प्रसंस्करण और वितरण का इंतजार कर रहा हो।
खुले तेल की कीमत भी बढ़ी
फरवरी के अंत की किल्लत के दौरान ट्रेडिंग कॉरपोरेशन ऑफ बांग्लादेश के आंकड़ों में खुले सोयाबीन तेल की कीमत एक महीने में 15 से 17 टका प्रति लीटर बढ़कर 185 से 190 टका तक पहुंच गई। यह 157 टका की तय कीमत से 28 से 33 टका अधिक थी।
इस तरह खुला तेल एक लीटर की बोतल के लिए तय 175 टका की कीमत से भी अधिक पर बिक रहा था। बोतलबंद तेल न मिलने पर उपभोक्ताओं को इससे महंगा विकल्प चुनना पड़ा, दुकानों में उपलब्ध बोतलों पर लगने वाले किसी अतिरिक्त शुल्क से पहले ही।
कमीशन के नवीनतम आंकड़े में सालाना खाद्य तेल की मांग 2.4 मिलियन टन बताई गई है, जिसमें से करीब 90 प्रतिशत आयात से आता है; फरवरी 2025 की किल्लत के दौरान बताए गए आंकड़ों में मांग 2.2 मिलियन टन और स्थानीय उत्पादन 250,000 टन था। दोनों अनुमानों से पता चलता है कि घरेलू उत्पादन बाजार की जरूरत का केवल छोटा हिस्सा पूरा करता है।
2.4 मिलियन टन की मांग और 250,000 टन उत्पादन के अनुमान के आधार पर स्थानीय उत्पादन सालाना जरूरत का लगभग 10.4 प्रतिशत पूरा करता है। इसलिए आयात की लागत या खेप पहुंचने के समय में बदलाव का असर बांग्लादेश में खपत होने वाले अधिकांश तेल पर पड़ता है।
रमज़ान की तैयारियों में तेल से आगे की चिंता
सोमवार की बैठक में खजूर के आयातकों ने भी खरीद को वहनीय बनाने से जुड़ी चिंता रखी। उन्होंने आयातित खजूर पर करीब 55 प्रतिशत कर बोझ बताया और ऊंचे सीमा शुल्क मूल्यांकन, वैकल्पिक समुद्री मार्गों से माल ढुलाई की लागत और साख-पत्र खोलने में दिक्कतों का भी जिक्र किया।
साख-पत्र बैंक का ऐसा वादा होता है, जिसके तहत तय शर्तें पूरी होने पर विदेशी विक्रेता को भुगतान किया जाता है। इसे हासिल करने में परेशानी होने पर आयातकों के लिए खरीद की व्यवस्था करना मुश्किल हो सकता है, भले ही विदेश में सामान उपलब्ध हो।
आयातकों ने खजूर की अलग-अलग किस्मों की गुणवत्ता और वास्तविक बाजार मूल्य के अनुरूप शुल्क लगाने की मांग की। मुक्तादिर ने कहा कि बांग्लादेश मिस्र, सऊदी अरब, इराक और अल्जीरिया समेत करीब एक दर्जन देशों से अलग-अलग गुणवत्ता के खजूर आयात करता है, इसलिए सभी पर एक जैसा सीमा शुल्क मूल्यांकन व्यावहारिक नहीं है। वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि वह संभावित कर राहत पर राष्ट्रीय राजस्व बोर्ड से परामर्श करेगा।
खाद्य तेल पर पहले ही कर में छूट दी जा चुकी है। पिछली किल्लत के दौरान अक्टूबर 2024 से वैट दो चरणों में 15 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किया गया था। करों में कमी से आयात बिल का एक हिस्सा घटता है, लेकिन खरीदारों की कीमत पर माल ढुलाई, मुद्रा की लागत और वितरण का असर बना रहता है।
वाणिज्य मंत्रालय का कहना है कि जमाखोरी और बाजार में गड़बड़ी रोकने के लिए उपभोक्ता अधिकार संरक्षण निदेशालय रोजाना निरीक्षण कर रहा है। उसने उपभोक्ताओं से अधिक कीमत वसूलने समेत अनियमितताओं की शिकायत निदेशालय की हॉटलाइन पर करने को कहा है। खरीदारों के लिए फिलहाल सबसे अहम बात यही है कि दुकान की अलमारी में तेल मिले और उनसे बोतल पर छपी कीमत ही ली जाए।
मुख्य बातें
- ढाका की कुछ दुकानों में 1,000 टका अंकित कीमत वाली पांच लीटर सोयाबीन तेल की बोतल 1,005 से 1,020 टका में बेची जा रही है।
- उत्पादक 14 टका की बढ़ोतरी चाहते हैं, जिससे एक लीटर की कीमत 204 से बढ़कर 218 टका हो जाएगी।
- वाणिज्य मंत्री ने कहा है कि सरकार रमज़ान से पहले खाद्य तेल की कीमतें बढ़ाने की योजना नहीं बना रही है।
- फरवरी 2025 की किल्लत अधिक आयात के बावजूद बनी रही; खेप में देरी हुई और खुदरा दुकानों तक डिलीवरी सीमित रही।
- बांग्लादेश अपनी खाद्य तेल जरूरतों का लगभग 90 प्रतिशत आयात से पूरा करता है।
- उपभोक्ता संरक्षण अधिकारियों का कहना है कि रोजाना निरीक्षण जारी है, जबकि खजूर आयातकों ने अलग से कर राहत मांगी है।






