चार मामले समीक्षा के फैसले की ओर बढ़े
थाईलैंड के न्याय मंत्रालय को पूर्व प्रधानमंत्री थाकसिन शिनावात्रा से जुड़े चार मामलों में माफी का अनुरोध मिला है। न्याय मंत्री पोल लेफ्टिनेंट जनरल रुत्थाफोन नाओवरत ने 4 नवंबर, 2026 को कहा कि प्रारंभिक समीक्षा के बाद सिफारिशें राष्ट्रीय सुलह समिति को भेजी जाएंगी।
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इन मामलों में थाईलैंड के निर्यात-आयात बैंक से 4 अरब बाट का ऋण, सरकारी लॉटरी योजना, थाइकॉम से जुड़े दूरसंचार और उपग्रह रियायतों में बदलाव तथा 46 अरब बाट की संपत्ति जब्त किया जाना शामिल है। थाकसिन देनदारी से राहत और उन मामलों से जुड़े रिकॉर्ड साफ कराने चाहते हैं, जिन्हें उनकी कानूनी टीम राजनीतिक बताती है।
समीक्षा उपसमिति की अध्यक्षता कर रहे न्याय मंत्रालय के स्थायी सचिव पियासिरी वत्तानावरांगकुल अनुरोध को दूसरी बैठक के एजेंडे में रखने की तैयारी कर रहे थे। उपप्रधानमंत्री पाकॉर्न निलप्रफान की अध्यक्षता वाली पूर्ण शांति-समाज प्रोत्साहन समिति के पास फैसला लेने का अधिकार है।
रुत्थाफोन ने कहा कि पूरी हो चुकी सिफारिशें सभी याचिकाओं की जांच खत्म होने तक रोकने के बजाय समूहों में आगे भेजी जा सकती हैं। इससे अन्य मामलों पर काम जारी रहते हुए कुछ आवेदकों के मामलों में फैसला हो सकेगा।
थाकसिन की अर्जी समिति के सामने पात्रता से जुड़ा एक अहम विवाद रखती है: उनके वकील 2006 के तख्तापलट के बाद शुरू हुई जांचों की राजनीतिक पृष्ठभूमि का हवाला देते हैं, जबकि इन मामलों में भ्रष्टाचार के आरोप भी हैं, जिसे माफी के दायरे से बाहर बताया गया है। समिति को तय करना होगा कि पात्रता संबंधी प्रावधान और अपवाद उनकी अर्जी पर कैसे लागू होते हैं।
थाकसिन ने क्या मांगा
थाकसिन ने अपने निजी वकील विन्यात चातमोंत्री को 8 अक्टूबर, 2026 को याचिका दायर करने का अधिकार दिया। विन्यात ने 12 अक्टूबर को अर्जी दिए जाने की जानकारी दी और कहा कि इसे प्रधानमंत्री कार्यालय के स्थायी सचिव कार्यालय के साझा सेवा केंद्र के माध्यम से सुलह समिति के अध्यक्ष तक पहुंचाया गया।
विन्यात ने बताया कि अर्जी में कानून के तहत थाकसिन के माफी पाने के अधिकार को मान्यता देने और उन्हें सभी देनदारियों से मुक्त करने की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि आवेदन में सभी संबंधित मामलों को एक साथ शामिल किया गया है, न कि हर मामले के लिए अलग याचिका दी गई है। अधिकारियों ने बाद में अनुरोध पर चार मामलों के संदर्भ में चर्चा की।
विन्यात ने कहा कि उनके मुवक्किल अपने खिलाफ आरोपों से मुक्ति चाहते हैं, निजी कारोबार करना चाहते हैं और राजनीति में लौटे बिना शांतिपूर्वक जीवन बिताने की उम्मीद रखते हैं। उन्होंने समिति से कानून की व्यापक व्याख्या करने, परिस्थितियों की पूरी जांच करने और भेदभाव से बचने का अनुरोध किया।
नवंबर के बयानों में कानून का नाम शांति-समाज प्रोत्साहन अधिनियम, बी.ई. 2569 बताया गया है, जो 2026 के बराबर है। विन्यात ने अक्टूबर में अपने बयान में इसके बजाय बी.ई. 2568 यानी 2025 का उल्लेख किया था। इन बयानों में विधायी वर्ष का यह अंतर अब तक स्पष्ट नहीं हुआ है।
अर्जी की जांच कौन करेगा?
प्रधानमंत्री कार्यालय के स्थायी सचिव और सुलह समिति के सचिव चातचाई बांगचुआद ने अक्टूबर में बताया था कि अर्जी पहले न्याय मंत्रालय के स्थायी सचिव की अध्यक्षता वाली समीक्षा उपसमिति के पास जाएगी। उपसमिति यह जांचेगी कि अनुरोध पात्रता के दायरे में आता है या नहीं, फिर उसे पूर्ण समिति के पास भेजेगी।
चातचाई ने कहा कि जांच में राजनीतिक मंशा भी देखी जाएगी। उन्होंने बताया कि राजनीतिक संबंध न रखने वाला सामान्य मामला इस ढांचे के दायरे से बाहर होगा और कुछ अर्जियों के लिए कथित राजनीतिक मंशा के समर्थन में सबूत देने पड़ सकते हैं।
सुखोथाई थम्माथिरात मुक्त विश्वविद्यालय के राजनीतिक वैज्ञानिक और समीक्षा उपसमिति के सदस्य एसोसिएट प्रोफेसर युथापोर्न इसराचाई ने 2 नवंबर को कहा कि पहली समीक्षा बैठक में थाकसिन के चार मामलों पर विचार नहीं हुआ था। सचिवालय कानूनी दलीलें और सबूत जुटा रहा था। उन्होंने यह संभावना भी जताई कि पूर्ण समिति में सीधे जमा की गई अर्जी किसी अलग प्रक्रिया से आगे बढ़ सकती है।
रुत्थाफोन ने 4 नवंबर को अगले कदम के तौर पर समीक्षा पैनल की राय पूर्ण समिति को भेजे जाने की बात कही। युथापोर्न ने कहा कि समीक्षा पैनल के पास याचिका को अंतिम रूप से खारिज करने का अधिकार नहीं है; यह अधिकार पूर्ण समिति के पास है। दूसरी समीक्षा बैठक या थाकसिन की अर्जी पर फैसले की कोई तारीख घोषित नहीं की गई।
समीक्षा की समय-सीमा
यह प्रक्रिया समीक्षा पैनल के गठन, थाकसिन की अर्जी और पैनल की पहली बैठक तक फैली है। थाईलैंड आधिकारिक तारीखों में बौद्ध संवत का इस्तेमाल करता है; संबंधित ग्रेगोरियन वर्ष पाने के लिए 543 घटाए जाते हैं।
- 24 अगस्त, 2026: युथापोर्न के अनुसार, धारा 8 के तहत पात्र राजनीतिक आपराधिक रिकॉर्ड पर प्रावधान इसी तारीख से लागू हुआ।
- 24 सितंबर, 2026: पाकॉर्न ने समीक्षा उपसमिति नियुक्त की।
- 8 अक्टूबर, 2026: विन्यात ने थाकसिन की ओर से अधिकृत होकर उनकी अर्जी जमा की।
- 12 अक्टूबर, 2026: विन्यात ने अनुरोध की सार्वजनिक जानकारी दी और चातचाई ने समीक्षा प्रक्रिया समझाई।
- 2 नवंबर, 2026: समीक्षा उपसमिति की पहली औपचारिक बैठक हुई। उसके एजेंडे में थाकसिन के चार मामले शामिल नहीं थे।
- 4 नवंबर, 2026: रुत्थाफोन ने बताया कि सिफारिशें समूहों में पूर्ण समिति को कैसे भेजी जा सकती हैं।
- जनवरी 2027: समिति चाहती है कि आवेदक जांच के लिए समय देने के उद्देश्य से इसी महीने तक अनुरोध जमा करें।
- 20 मार्च, 2027: समिति की शुरुआती 180 दिन की प्रक्रिया पूरी करने की घोषित समय-सीमा।
युथापोर्न ने बताया कि 180 दिन की अवधि पूर्ण समिति की पहली बैठक से गिनी जाएगी। 2 नवंबर की बैठक समीक्षा उपसमिति का पहला सत्र था, जो अलग निकाय है और उसकी भूमिका प्रारंभिक समीक्षा तक सीमित है।
चार मामलों में पात्रता की जांच क्यों
थाकसिन की याचिका से जुड़े चार मामले सरकारी फैसलों और कानूनी नतीजों के लिहाज से अलग-अलग हैं। एक्जिम बैंक का मामला 4 अरब बाट के ऋण से संबंधित है। लॉटरी का मामला दो और तीन अंकों वाली संख्याओं पर आधारित टिकट बेचने की सरकारी योजना से जुड़ा है। एक अन्य मामले में थाइकॉम समेत दूरसंचार और उपग्रह रियायतों के भुगतान में बदलाव शामिल हैं। चौथा मामला 46 अरब बाट की संपत्ति जब्त किए जाने से संबंधित है।
थाकसिन की कानूनी दलील सितंबर 2006 के तख्तापलट के बाद शुरू हुई जांचों पर केंद्रित है। सैन्य अधिकारियों के तहत गठित संपत्ति जांच समिति ने उन मामलों की जांच की, जो बाद में भ्रष्टाचार विरोधी जांचकर्ताओं, अभियोजकों और अदालतों के पास पहुंचे।
अर्जी में कानून की अनुसूची का हवाला दिया गया है, जिसमें मद 31 भी शामिल है। यह मद उन कुछ लोगों पर लागू होती है जिन पर तख्तापलट के लिए जिम्मेदार सैन्य निकायों की घोषणाओं और आदेशों के तहत आरोप लगाए गए, मुकदमे चलाए गए या वे अन्य रूप में प्रभावित हुए। थाकसिन की टीम का तर्क है कि कार्यवाही की पृष्ठभूमि इस प्रावधान के तहत विचार का रास्ता देती है।
इस ढांचे में भ्रष्टाचार के मामले भी अपवाद के तौर पर बाहर रखे गए हैं। इससे हर मामले का कानूनी वर्गीकरण फैसले के लिए अहम हो जाता है: समिति को सैन्य आदेशों से बताए गए संबंध और राहत के पात्र अपराधों पर लगी पाबंदियों, दोनों की जांच करनी होगी।
रेड शर्ट आंदोलन के पूर्व नेता नत्तावुत सैकुआर ने 2 नवंबर को फेसबुक पर दिए बयान में थाकसिन के आवेदन देने के अधिकार का समर्थन किया। उन्होंने दलील दी कि मामले तख्तापलट के नेतृत्व के अधिकार के जरिए शुरू हुए थे और कहा कि फैसला समिति के हाथ में है।
पहली बैठक में किन बातों पर विचार हुआ
2 नवंबर की समीक्षा बैठक के एजेंडे में कुल 23 मदें थीं। इनमें राजनीतिक प्रदर्शनों से जुड़े पांच मामले सात लोगों के थे। बड़ी संख्या पूरे बैठक-एजेंडे को दर्शाती है, जबकि छोटी संख्याएं प्रदर्शन से जुड़े मामलों और उनमें शामिल लोगों की हैं।
इन सात लोगों में पूर्व प्रधानमंत्री अभिसित वेज्जाजीवा और पूर्व उपप्रधानमंत्री सुथेप थौगसुबान शामिल थे। पैनल ने पीपुल्स डेमोक्रेटिक रिफॉर्म कमेटी के प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में माफी का समर्थन किया और संबंधित विशेष जांच विभाग की जांचें समाप्त करने का समर्थन किया।
समीक्षा पैनल ने माना कि उनका आचरण राजनीतिक प्रदर्शनों से जुड़े मामलों के मानदंडों पर खरा उतरता है। उसकी सिफारिशें बताती हैं कि अब अन्य आवेदकों के मामलों की किस तरह जांच होगी: संबंधित आचरण की पहचान, उसके राजनीतिक संबंध की जांच और यह तय करना कि वह कानून में तय श्रेणियों के अंतर्गत आता है या नहीं।
युथापोर्न ने कहा कि चर्चा में करीब दो दशकों के दौरान अलग-अलग राजनीतिक खेमों के लोगों और मामलों की कई व्यापक श्रेणियां शामिल थीं। उन्होंने यह भी कहा कि 2 नवंबर तक पूर्व प्रधानमंत्री यिंगलक शिनावात्रा ने माफी की याचिका दायर नहीं की थी।
आवेदकों के लिए राहत का क्या मतलब हो सकता है
बताया गया कि कानून 1 जनवरी, 2005 से 16 जुलाई, 2025 के बीच हुए राजनीतिक प्रदर्शनों से जुड़े पात्र मामलों पर लागू होता है। इसके अपवादों में राजशाही से संबंधित धारा 112 के अपराध, भ्रष्टाचार, धारा 297 के तहत गंभीर शारीरिक चोट और निजी पक्षों से जुड़े कुछ अपराध शामिल हैं।
पात्र आवेदकों के लिए राहत में जांच खत्म करना, अदालत की कार्यवाही से मामला हटाना, हिरासत में बंद लोगों को रिहा करना या आपराधिक रिकॉर्ड साफ करना शामिल हो सकता है। कौन-सा कदम लागू होगा, यह इस पर निर्भर करता है कि किसी व्यक्ति के मामले की जांच अभी चल रही है, मामला अदालत में है या उसका निपटारा हो चुका है।
युथापोर्न ने कहा कि धारा 8 के तहत पात्र राजनीतिक आपराधिक रिकॉर्ड 24 अगस्त, 2026 से समाप्त किए जाने थे। उन्होंने कहा कि रॉयल थाई पुलिस जैसी एजेंसियां समिति के अलग-अलग फैसले का इंतजार किए बिना अपने अधिकार क्षेत्र में कार्रवाई कर सकती हैं।
नत्तावुत ने बताया कि थाकसिन का तत्काल उद्देश्य आपराधिक रिकॉर्ड साफ कराना है। उन्होंने कहा कि रिहाई के बाद पहले ही निपटाए जा चुके मामलों में थाकसिन की जेल की कोई सजा बाकी नहीं है।
नत्तावुत ने यह भी कहा कि थाकसिन का धारा 112 वाला मामला अपील अदालत में है और अदालतों में आगे बढ़ेगा, क्योंकि इस अपराध को कानून में स्पष्ट रूप से अपवाद रखा गया है। इसलिए माफी की अर्जी उस आरोप से जुड़ी अलग अदालती प्रक्रिया के साथ-साथ चल रही है।
समय-सीमा, अदालती चुनौती और राजनीतिक दावे
समिति का लक्ष्य 180 दिनों के भीतर काम पूरा करना है और 20 मार्च, 2027 को अंतिम तारीख बताया गया है। युथापोर्न ने कहा कि समिति चाहती है कि आवेदन जनवरी तक जमा हो जाएं, ताकि अधिकारियों को तथ्य जुटाने और कानूनी मुद्दों की जांच के लिए समय मिले।
यदि काम अधूरा रहे तो ढांचे के तहत 90-90 दिनों तक के दो विस्तार दिए जा सकते हैं। दोनों विस्तार मिलाकर शुरुआती अवधि जितने यानी 180 दिन और जुड़ सकते हैं। फिर भी अधिकारियों ने कहा कि उनका लक्ष्य शुरुआती 180 दिनों में काम पूरा करना है।
रुत्थाफोन ने कहा कि पाकॉर्न चाहते हैं कि पूर्ण समिति जल्द से जल्द बैठक करे। उन्होंने उम्मीद जताई कि पूरी हुई सिफारिश बैठक में पहुंचने पर फैसला हो जाएगा, जबकि समीक्षा पैनल समानांतर रूप से अन्य याचिकाओं की जांच जारी रख सकता है।
युथापोर्न ने कहा कि पूर्ण समिति से याचिका खारिज होने पर आवेदक प्रशासनिक अदालत में फैसले को चुनौती दे सकता है। प्रशासनिक फैसला सरकारी अधिकार के इस्तेमाल का ऐसा निर्णय है जो किसी व्यक्ति के अधिकारों को प्रभावित करता है; न्यायिक समीक्षा के तहत अदालत उस फैसले को चुनौती दिए जाने की जांच कर सकती है।
युथापोर्न ने यह दावा भी खारिज किया कि अविश्वास बहस में फेउ थाई पार्टी के वोटों के बदले माफी पर बातचीत हो रही थी। उन्होंने थाकसिन को अयोग्य ठहराने के लिए पहले से प्रयास किए जाने के आरोप नकारे और कहा कि समीक्षा पैनल पर कोई दबाव या लॉबिंग नहीं हुई। नत्तावुत ने भी वोटों के बदले माफी के कथित सौदे को खारिज किया।
थाकसिन के मामले में अगला प्रक्रियागत कदम समीक्षा पैनल की जांच और उसकी राय पाकॉर्न की समिति को सौंपना है। अन्य आवेदकों के लिए पूरी हुई सिफारिशें समूहों में आगे भेजने के फैसले का अर्थ है कि उनके मामले सभी याचिकाओं का निपटारा होने का इंतजार किए बिना आगे बढ़ सकते हैं।
मुख्य बातें
- थाकसिन के वकील ने 8 अक्टूबर, 2026 को माफी की अर्जी दायर की; अधिकारियों के अनुसार इसके दायरे में चार मामले हैं।
- 2 नवंबर के एजेंडे में जगह न मिलने के बाद न्याय मंत्रालय अनुरोध को दूसरी समीक्षा बैठक में रखने की तैयारी कर रहा था।
- उपप्रधानमंत्री पाकॉर्न निलप्रफान की अध्यक्षता वाली पूर्ण सुलह समिति के पास फैसला लेने का अधिकार है।
- थाकसिन की टीम 2006 के तख्तापलट के बाद शुरू हुई जांचों की पृष्ठभूमि का हवाला देती है; इस ढांचे में भ्रष्टाचार के मामले भी अपवाद हैं।
- समिति की घोषित शुरुआती समय-सीमा 20 मार्च, 2027 है; इसमें 90-90 दिनों तक के दो संभावित विस्तार हो सकते हैं।
- युथापोर्न ने कहा कि जिन आवेदकों की याचिका खारिज होगी, वे प्रशासनिक अदालत में समिति के फैसले को चुनौती दे सकते हैं।






