सुबह तेज गिरावट के बाद नीतिगत हस्तक्षेप
6 नवंबर 2026 को दोपहर के कारोबारी विराम तक ताइवान डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले उबरकर NT$32.925 पर आ गया। इससे पहले सुबह विदेशी पूंजी की भारी निकासी और शेयर बाजार में तेज गिरावट के बीच यह NT$33.04 तक फिसल गया था। केंद्रीय बैंक के हस्तक्षेप और निर्यातकों की डॉलर बिक्री से मुद्रा को वापस NT$33 के अहम स्तर से नीचे लाने में मदद मिली।
विषय-सूची
- सुबह तेज गिरावट के बाद नीतिगत हस्तक्षेप
- विनिमय दर के आंकड़ों का अर्थ
- सुबह कारोबार कैसे आगे बढ़ा
- शेयरों में गिरावट से मुद्रा पर दबाव क्यों पड़ा
- डॉलर की आपूर्ति का अहम स्रोत बने निर्यातक
- मुद्रा बदलने की सीमा में अलग ढील
- एआई को लेकर अनिश्चितता से बाजारों के उतार-चढ़ाव जुड़े
- दोपहर की वापसी से क्या बदला
- मुख्य बातें
ताइवान डॉलर की शुरुआत NT$32.92 पर हुई। यह NT$33 से कमजोर हुआ, फिर सुबह 10 बजे के बाद संभला। सुबह के सत्र में ताइपे फॉरेक्स इंक. में कारोबार का कुल मूल्य US$1.196 अरब रहा। इस दौरान ताइवान से पैसा निकाल रहे निवेशकों का मुकाबला डॉलर में हुई कमाई को देश वापस ला रहे निर्यातकों से था।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि केंद्रीय बैंक ने मुद्रा की गिरावट धीमी करने के लिए हस्तक्षेप किया और निर्यातकों के साथ तालमेल कर अमेरिकी डॉलर बिकवाए। इन बिक्री से डॉलर की आपूर्ति और ताइवान डॉलर की मांग बढ़ी, जिससे धन बाहर ले जा रहे विदेशी निवेशकों के दबाव का मुकाबला करने में मदद मिली।
यह सुधार ऐसे समय आया जब ताइवान का शेयर बाजार असाधारण रूप से भारी गिरावट झेल रहा था। शुरुआती कारोबार में शेयर 3,737.67 अंक तक गिरे और 40,000 के साथ-साथ करीब 38,827 के सालाना मूविंग एवरेज से भी नीचे चले गए। सुबह का सबसे कमजोर स्तर डेढ़ साल से अधिक समय में मुद्रा का निचला स्तर था।
NT$32.925 दोपहर के समय का भाव था, दिन का अंतिम विनिमय दर नहीं। दोपहर में मुद्रा NT$33 से नीचे टिक पाएगी या नहीं, यह स्पष्ट नहीं था। कारोबारियों ने कहा कि विदेशी पूंजी की लगातार निकासी दबाव का मुख्य स्रोत बनी हुई है।
विनिमय दर के आंकड़ों का अर्थ
ताइवान की विनिमय दर बताती है कि एक अमेरिकी डॉलर खरीदने के लिए कितने ताइवान डॉलर चाहिए। इसलिए NT$32.92 से बढ़कर NT$33.04 होने का मतलब है कि ताइवान डॉलर कमजोर हुआ: उसी अमेरिकी डॉलर को खरीदने के लिए अधिक स्थानीय मुद्रा देनी पड़ती है।
शुरुआती दर NT$32.92, पिछले बंद भाव से NT$0.044 कम थी। इससे पिछला बंद भाव NT$32.876 निकलता है। सुबह के सबसे कमजोर स्तर NT$33.04 पर ताइवान डॉलर पिछले बंद भाव के मुकाबले NT$0.164 गिर चुका था। उद्धृत विनिमय दर में यह करीब 0.5% का बदलाव था।
दोपहर तक दर अपने सबसे कमजोर स्तर से NT$0.115 सुधरकर NT$32.925 पर आ गई। फिर भी यह पिछले बंद भाव से NT$0.049 कमजोर थी। यानी हस्तक्षेप और निर्यातकों की बिक्री ने सुबह की गिरावट का बड़ा हिस्सा पलट दिया, लेकिन सत्र के दौरान मुद्रा अब भी थोड़ी नीचे रही।
US$1 मिलियन खरीदने वाली कंपनी के लिए NT$33.04 और NT$32.925 के बीच का अंतर NT$115,000 है। यह साधारण गणना दिखाती है कि मुद्रा स्क्रीन पर छोटा दिखने वाला उतार-चढ़ाव भी आयात का भुगतान करने या निर्यात से मिली बड़ी रकम बदलने वाली कंपनियों के लिए क्यों मायने रखता है।
सुबह कारोबार कैसे आगे बढ़ा
6 नवंबर का कारोबारी सत्र केंद्रीय बैंक के विदेशी मुद्रा विभाग के महानिदेशक त्साई च्युङ-मिन की निर्यातकों से सार्वजनिक अपील के बाद आया। 5 नवंबर को उन्होंने विदेशी मुद्रा बदलने की जरूरत वाली कंपनियों से बेहतर दर का लंबे समय तक इंतजार करने के बजाय अपनी विदेशी मुद्रा आय बेचने का आग्रह किया था।
घटनाक्रम दिखाता है कि अमेरिकी डॉलर की मांग और स्थानीय मुद्रा को मिल रहे समर्थन के बीच संतुलन कितनी तेजी से बदला:
- 5 नवंबर: त्साई ने निर्यातकों से जरूरत पड़ने पर विदेशी मुद्रा बदलने का आग्रह किया और चेताया कि बाजार की दिशा पलटने पर कई विक्रेता एक साथ बाजार में आ सकते हैं।
- 6 नवंबर, शुरुआती कारोबार: ताइवान डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले NT$32.92 पर खुला, जो पिछले बंद भाव से NT$0.044 कम था।
- शुरुआती कारोबार: विदेशी पूंजी की निकासी जारी रहने और ताइवानी शेयरों में भारी गिरावट के बीच मुद्रा कमजोर होकर NT$33.04 पर आ गई।
- सुबह 10 बजे के बाद: केंद्रीय बैंक के हस्तक्षेप और निर्यातकों की डॉलर बिक्री से दर को वापस NT$33 से नीचे लाने में मदद मिली।
- दोपहर का विराम: मुद्रा NT$32.925 पर थी और ताइपे फॉरेक्स इंक. में सुबह का कारोबार US$1.196 अरब रहा।
NT$33 सत्र का सबसे प्रमुख संदर्भ स्तर था। कारोबारियों की नजर इस पर थी कि निवेशकों के विदेश भेजने के लिए डॉलर खरीदते रहने के बीच खरीद समर्थन विनिमय दर को इस स्तर से नीचे रख पाएगा या नहीं।
शेयरों में गिरावट से मुद्रा पर दबाव क्यों पड़ा
ताइवानी शेयर बेचने वाले विदेशी निवेशक लगातार दो बाजारों पर दबाव डाल सकते हैं। उनकी शेयर बिक्री से शेयर कीमतें गिरती हैं। जब वे विदेश भेजने के लिए ताइवान डॉलर में मिली रकम को अमेरिकी डॉलर में बदलते हैं, तो अमेरिकी मुद्रा की मांग भी बढ़ती है।
शुरुआती कारोबार में ताइवान का शेयर बाजार 3,737.67 अंक तक गिरा, जिसे अब तक का सबसे बड़ा इंट्राडे अंक-आधारित नुकसान बताया गया। इस गिरावट में शेयर 40,000 और करीब 38,827 के सालाना मूविंग एवरेज से नीचे चले गए। मूविंग एवरेज एक अवधि के दौरान कीमतों के उतार-चढ़ाव को समतल करता है और कारोबारियों को मौजूदा बाजार की हालिया स्थिति से तुलना करने का संदर्भ देता है।
अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद कृत्रिम बुद्धिमत्ता डेटा केंद्रों को लेकर अमेरिकी नीति की अनिश्चितता भी इस पृष्ठभूमि का हिस्सा थी। अमेरिका के चार प्रमुख शेयर सूचकांक तेज गिरावट के साथ बंद हुए थे, जिसके बाद ताइवान में बिकवाली हुई। निवेशक ऐसे क्षेत्र को लेकर अनिश्चितता का सामना कर रहे थे, जिसका ताइवानी तकनीकी उत्पादों की मांग से गहरा संबंध है।
कारोबारियों ने कहा कि स्थानीय शेयर स्थिर नहीं हुए तो ताइवान डॉलर पर दबाव बना रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि निर्यातकों की डॉलर बिक्री, विदेशी पूंजी की निकासी के पैमाने से कम थी। इस असंतुलन से समझ आता है कि सुबह मुद्रा में उछाल के बावजूद आगे और गिरावट की चिंता क्यों बनी रही।
डॉलर की आपूर्ति का अहम स्रोत बने निर्यातक
ताइवानी निर्यातकों को अक्सर भुगतान अमेरिकी डॉलर में मिलता है, जबकि घरेलू खर्चों के लिए उन्हें ताइवान डॉलर चाहिए होते हैं। डॉलर में मिली रकम बेचने से स्थानीय मुद्रा की मांग पैदा होती है। पूंजी के बाहर जाने के दौर में ये लेनदेन, पैसा विदेश ले जाने के लिए डॉलर खरीद रहे निवेशकों के दबाव को संतुलित कर सकते हैं।
ताइवान डॉलर कमजोर होने पर निर्यातक डॉलर बदलने का इंतजार कर सकते हैं। विनिमय दर बढ़ने पर हर अमेरिकी डॉलर के बदले अधिक स्थानीय मुद्रा मिलती है। इसलिए आगे और गिरावट की उम्मीद रखने वाली कंपनी बेहतर भाव पाने की आशा में डॉलर बदलना टाल सकती है।
त्साई की अपील इसी समय-निर्धारण के फैसले से जुड़ी थी। उन्होंने रकम बदलने की जरूरत वाले निर्यातकों से कार्रवाई करने का आग्रह किया और चेताया कि बाजार की दिशा अचानक बदलने पर कई कंपनियां एक साथ डॉलर बेचने की कोशिश कर सकती हैं। कारोबारियों ने कहा कि कुछ निर्यातक अब भी अधिक अनुकूल दर का इंतजार कर रहे थे।
6 नवंबर को निर्यातकों के साथ केंद्रीय बैंक के तालमेल ने गिरावट धीमी करने की कोशिश में व्यावसायिक मुद्रा प्रवाह को शामिल किया। निर्यातक अपनी विदेशी मुद्रा में हुई कमाई बेच रहे थे और बैंक भी बाजार में हस्तक्षेप कर रहा था। केंद्रीय बैंक ने कितनी खरीद की और निर्यातकों ने कितनी रकम बेची, इसका खुलासा नहीं किया गया।
मुद्रा बदलने की सीमा में अलग ढील
एक अलग कारोबारी घटनाक्रम में विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि केंद्रीय बैंक ने कुछ ऋणदाताओं से कहा कि निर्यातकों की अमेरिकी डॉलर बिक्री पर अब दैनिक सीमा लागू नहीं होगी। पहले की सामान्य सीमा के तहत निर्यातक रोजाना US$10 मिलियन तक बेच सकते थे, हालांकि अलग-अलग मामलों में सीमा भिन्न थी।
कारोबारियों ने कहा कि बैंक ने उस सुबह कम से कम चार बैंकों से संपर्क किया। उस सत्र की तारीख और ढील कितने समय तक लागू रही, यह स्पष्ट नहीं किया गया। उस सत्र में ताइवान डॉलर पिछले साल अप्रैल के बाद के अपने सबसे कमजोर स्तर से उबर गया, लेकिन फिर भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.35% गिरकर NT$32.592 पर बंद हुआ।
विदेशी शेयरों में लगातार निकासी के बीच पिछले महीने मुद्रा करीब 2% गिर चुकी थी। रोजाना मुद्रा बदलने की सीमा हटने से निर्यातकों को डॉलर बेचने की अधिक गुंजाइश मिली और बाहर जा रहे निवेशकों की मांग पूरी करने के लिए विदेशी मुद्रा की उपलब्ध आपूर्ति बढ़ सकती थी।
क्रेडिट एग्रीकोल CIB की हांगकांग शाखा के वरिष्ठ उभरते बाजार रणनीतिकार एडी च्युंग ने नीतिगत संकेत के बारे में कहा:
ताइवान डॉलर के कमजोर प्रदर्शन को देखते हुए, यह संदेश संकेत देता है कि अधिकारी अब ताइवान डॉलर की गिरावट को लेकर पहले से कम सहनशील हो सकते हैं,
ये दैनिक सीमाएं उस समय लगाई गई थीं जब 1980 के दशक के बाद ताइवान डॉलर में सबसे बड़ी तेजी आई थी। उस वक्त केंद्रीय बैंक निर्यातकों की डॉलर बिक्री की ऐसी होड़ को धीमा करना चाहता था, जो स्थानीय मुद्रा को और तेजी से ऊपर ले जा सकती थी। सीमा में ढील देने का उद्देश्य इसके उलट बाजार की जरूरत पूरी करना था: ताइवान डॉलर कमजोर होने पर डॉलर की अधिक आपूर्ति की अनुमति देना।
एआई को लेकर अनिश्चितता से बाजारों के उतार-चढ़ाव जुड़े
एआई निवेश में ताइवान की हिस्सेदारी समझाती है कि अमेरिकी डेटा सेंटर नीति को लेकर अनिश्चितता वहां के बाजारों के लिए क्यों मायने रखती थी। सर्वर, चिप और अन्य उपकरणों की मांग ताइवानी निर्यातकों को बड़ी तकनीकी कंपनियों के खर्च संबंधी फैसलों से जोड़ती है।
केंद्रीय बैंक ने 27 अक्टूबर को विधायकों को भेजी गई सामग्री में इस निवेश उछाल से जुड़े जोखिमों की समीक्षा की थी। उसकी एआई वित्तपोषण को लेकर चेतावनी में बताया गया कि निर्माण में देरी से राजस्व टल सकता है, परिसंपत्तियों का मूल्य घट सकता है और ऋणदाता आगे विस्तार के लिए धन देने से हिचक सकते हैं।
ये लिखित सामग्री केंद्रीय बैंक के गवर्नर यांग चिन-लॉन्ग की 28 अक्टूबर को विधायिका की वित्त समिति के समक्ष कारोबारी रिपोर्ट से पहले जमा की गई थी। इसमें एआई निवेश से मिलने वाले रिटर्न की अनिश्चितता और बढ़ते वित्तपोषण जोखिमों को वैश्विक आर्थिक परिदृश्य के प्रमुख खतरों में गिनाया गया। बैंक ने 17 सितंबर को बोर्ड बैठक के बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस के संदर्भ दस्तावेजों में भी लगभग यही विश्लेषण दिया था।
बैंक ने डेटा केंद्रों के सामने चार अड़चनों की पहचान की: बिजली, उपकरणों की आपूर्ति, स्थानीय निवासियों का विरोध और स्थानीय सरकारों की समीक्षा। इनके कारण सुविधाएं शुरू होने में देरी हो सकती है, भले ही प्रमुख अमेरिकी क्लाउड सेवा प्रदाता पूंजीगत खर्च बढ़ाते रहें। उभरते क्लाउड प्रदाता और डेटा सेंटर डेवलपर निजी ऋण, परिसंपत्ति-आधारित वित्तपोषण और विशेष प्रयोजन इकाइयों (SPVs) पर अधिक निर्भर हो रहे थे। इससे कर्ज का बोझ और वित्तपोषण संरचनाओं की जटिलता, दोनों बढ़ रही थीं।
इन सामग्रियों में 2026 से 2028 के बीच वैश्विक डेटा केंद्रों की वित्तपोषण जरूरत US$3.2 ट्रिलियन आंकी गई। इनमें Alphabet, Amazon, Microsoft और Meta का संयुक्त पूंजीगत खर्च 2026 में US$715.5 अरब और 2027 में बढ़कर US$991.6 अरब रहने का अनुमान भी दिया गया।
2026 के खर्च का अनुमान 2025 के मुकाबले 90.3% अधिक था और 2027 में इसमें 38.6% की और बढ़ोतरी का अनुमान था। बैंक ने कहा कि परिचालन नकदी प्रवाह, पूंजीगत खर्च के मुकाबले काफी धीमी गति से बढ़ रहा था। इससे मुक्त नकदी प्रवाह में भारी कमी आ रही थी या वह नकारात्मक हो रहा था, जिससे बाहरी वित्तपोषण से भरने वाली कमी पैदा हो रही थी। वैश्विक डेटा केंद्रों की US$3.2 ट्रिलियन की वित्तपोषण जरूरत में से करीब US$1.46 ट्रिलियन इक्विटी, US$700 अरब निजी ऋण और US$650 अरब निवेश-ग्रेड बॉन्ड से आने की उम्मीद थी। निजी ऋण और निवेश-ग्रेड बॉन्ड मिलकर कुल जरूरत के 42% से अधिक थे।
चारों प्रमुख क्लाउड प्रदाताओं की बैलेंस शीट पर दीर्घकालिक उधारी और मौजूदा लीज देनदारियां मिलाकर US$604 अरब थीं। वित्तीय विवरणों के नोट में बैलेंस शीट से बाहर बताई गई प्रतिबद्धताओं और देनदारियों का कुल मूल्य करीब US$2.424 ट्रिलियन था, जो इस रकम का लगभग चार गुना है। इसमें चिप आपूर्तिकर्ताओं को दीर्घकालिक खरीद प्रतिबद्धताओं के तहत US$1.52 ट्रिलियन से अधिक और निर्माणाधीन डेटा केंद्र पूरे होने पर शुरू होने वाली करीब US$904 अरब की लीज शामिल थीं। बैंक ने चेताया कि सिर्फ बैलेंस शीट पर दर्ज कर्ज देखने से कंपनियों की भुगतान देनदारियां कम आंकी जाएंगी।
SPVs एआई बुनियादी ढांचा बना या खरीद सकती थीं और गैर-बैंक संस्थानों से धन जुटा सकती थीं, जबकि उनका कर्ज मूल कंपनियों की बैलेंस शीट पर दिखाई नहीं देता। बैंक ने परिपक्वता अवधियों के मेल न खाने की ओर भी ध्यान दिलाया: ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (GPU) के लिए लेखांकन में मूल्यह्रास की अवधि करीब चार से छह साल थी, लेकिन चिप का जीवनचक्र घटकर दो से तीन साल रह गया था। वहीं SPV की लीज और कर्ज आमतौर पर पांच से 15 साल के लिए होते थे। इस तरह गिरवी रखे चिप उनसे जुड़े कर्ज की परिपक्वता से पहले ही अपना आर्थिक उपयोगी जीवन पूरा कर सकते थे।
अगर एआई से मुनाफा और निवेश पर रिटर्न उम्मीद से कम रहा, तो परिसंपत्तियों के पुनर्मूल्यांकन और ऋण जोखिम एक-दूसरे को बढ़ा सकते हैं। इससे वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है और आगे एआई निवेश सीमित हो सकता है। प्रमुख या उभरते क्लाउड प्रदाताओं का राजस्व घटने पर पूंजीगत खर्च में कटौती या कर्ज चुकाने में चूक हो सकती है, जिससे जोखिम एआई आपूर्ति श्रृंखला से फैलकर निजी ऋण और अन्य गैर-बैंक संस्थानों तक पहुंच सकता है। अगर इन संस्थानों ने बैंकों से भी कर्ज लिया हो, तो जोखिम बैंकिंग प्रणाली तक बढ़ सकते हैं।
बैंक की सामग्री ने यह भी दिखाया कि ताइवान की वृद्धि इस निवेश चक्र पर कितनी निर्भर थी। 2026 की पहली छमाही में अर्थव्यवस्था 14.15% बढ़ी और बैंक के सितंबर के अनुमान में पूरे साल की वृद्धि 11.48% रखी गई। शुद्ध बाहरी मांग और पूंजी निर्माण से क्रमशः 4.28 और 4.40 प्रतिशत अंक योगदान की उम्मीद थी। दोनों मिलाकर 8.68 प्रतिशत अंक, यानी सालाना वृद्धि का 75.6% बनते हैं। बैंक ने कहा कि अमेरिकी क्लाउड प्रदाताओं के पूंजीगत खर्च में बदलाव से ताइवान की एआई हार्डवेयर आपूर्ति श्रृंखला में निर्यात वृद्धि प्रभावित होगी।
सामग्री में कहा गया कि एआई पूंजीगत खर्च से मिलने वाले रिटर्न को लेकर संदेह जुलाई के बाद उभरा था। इससे तकनीकी शेयरों में तेज गिरावट आई। अक्टूबर में ये चिंताएं फिर सामने आईं और वैश्विक सेमीकंडक्टर शेयरों पर दबाव पड़ा। तकनीकी शेयरों का बाजार में बड़ा हिस्सा होने के कारण ताइवान और दक्षिण कोरिया प्रभावित हुए। बैंक ने अनुमान लगाया कि 2026 के ऊंचे तुलनात्मक आधार के कारण ताइवान की वृद्धि 2027 में धीमी होकर 5.82% रह जाएगी, जबकि उभरती तकनीकों की निरंतर मांग से निर्यात और निजी निवेश को समर्थन मिलेगा। बैंक ने कहा कि वह एआई अनुप्रयोगों और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय स्थितियों पर नजर रखेगा तथा मूल्य और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए जरूरत के मुताबिक मौद्रिक नीति समायोजित करेगा।
ताइवान के लिए यह कड़ी निवेश की उम्मीदों से कंपनी की कमाई, शेयर कीमतों और मुद्रा लेनदेन तक जाती है। उम्मीदों में बदलाव निवेशकों को अपनी हिस्सेदारी घटाने के लिए प्रेरित कर सकता है। फिर रकम विदेश भेजने पर अमेरिकी डॉलर की मांग बढ़ जाती है। 6 नवंबर को शेयरों में तेज गिरावट के साथ मुद्रा पर यह दबाव साफ दिखाई दिया।
दोपहर की वापसी से क्या बदला
NT$32.925 तक की वापसी से अमेरिकी डॉलर खरीदने की तत्काल लागत सुबह के NT$33.04 के चरम स्तर के मुकाबले घट गई। डॉलर में भुगतान करने वाले आयातकों को बेहतर दर मिली, जबकि डॉलर में मिली रकम बदलने वाले निर्यातकों को सबसे कमजोर स्तर के मुकाबले कम ताइवान डॉलर मिले।
केंद्रीय बैंक और निर्यातकों ने मांग का इतना हिस्सा सोख लिया था कि दोपहर तक दर NT$33 से नीचे आ गई। कारोबारियों के अनुसार, शेयरों की लगातार विदेशी बिक्री और उनसे मिली रकम को डॉलर में बदलना दबाव का मुख्य कारण बना रहा।
अगली परीक्षा दोपहर के सत्र में होनी थी। सुबह के कारोबार ने डॉलर की मांग की मजबूती के साथ यह भी दिखाया कि हस्तक्षेप और निर्यातकों की बिक्री कुछ ही घंटों में उतार-चढ़ाव का एक हिस्सा पलट सकती है।
मुख्य बातें
- 6 नवंबर को ताइवान डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर NT$33.04 पर आ गया, फिर दोपहर तक सुधरकर NT$32.925 पर पहुंचा।
- कारोबारियों ने कहा कि केंद्रीय बैंक के हस्तक्षेप और निर्यातकों की डॉलर बिक्री से सुबह 10 बजे के बाद दर NT$33 से नीचे लाने में मदद मिली।
- ताइपे फॉरेक्स इंक. में सुबह का कारोबार US$1.196 अरब रहा।
- विदेशी पूंजी की निकासी से मुद्रा पर दबाव के बीच शुरुआती कारोबार में ताइवानी शेयर 3,737.67 अंक तक गिरे।
- केंद्रीय बैंक ने निर्यातकों से जरूरत पड़ने पर विदेशी मुद्रा में मिली रकम बदलने का आग्रह किया था; कारोबारियों ने डॉलर बिक्री की दैनिक सीमा में अलग से ढील दिए जाने की बात भी कही।
- दोपहर की वापसी के बावजूद मुद्रा पिछले बंद भाव से थोड़ी कमजोर रही और दोपहर का कारोबार बाकी था।






