नवंबर की वार्ता में सहायता और निवेश एजेंडे में
भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री 4 और 5 नवंबर को नेपाल का दौरा करेंगे। इस यात्रा का उद्देश्य प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के प्रस्तावित भारत दौरे की तैयारी करना है। काठमांडू बाढ़ के बाद पुनर्निर्माण के लिए धन, जलविद्युत में नए निवेश और विलंबित बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में प्रगति चाहता है। शाह की यात्रा के लिए 22 से 24 नवंबर के बीच की तारीखों पर विचार हो रहा है, जिनमें 22 नवंबर सबसे संभावित तारीख है।
विषय-सूची
- नवंबर की वार्ता में सहायता और निवेश एजेंडे में
- काठमांडू में मिस्री किनसे मिलेंगे
- वार्ता से पहले नए राजदूत का आगमन
- तनाव से फिर संपर्क तक संबंधों का सफर
- सीमा विवाद अब भी संवेदनशील
- बाढ़ से उबरने की जरूरत ने दौरे को तात्कालिकता दी
- नेपाल की ऊर्जा महत्वाकांक्षा के लिए निवेश और कनेक्शन जरूरी
- व्यापार वार्ता सीमा पर वस्तुओं से आगे तक
- प्रस्तावित दौरे से क्या हासिल हो सकता है
- मुख्य बातें
शाह की प्रेस सलाहकार दीपा दाहाल ने कहा कि उनके 22 या 23 नवंबर को जाने की संभावना है, हालांकि यात्रा की अवधि की पुष्टि नहीं हुई है। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने भारत को कोई विशेष तारीख प्रस्तावित नहीं की थी।
इन तैयारियों के तहत व्यावहारिक आर्थिक जरूरतें ऐसे संबंधों के केंद्र में आ रही हैं, जिनमें सीमा को लेकर मतभेद और नेपाल के नए नेतृत्व के साथ बैठकें तय करने में मुश्किलें रही हैं। आम तौर पर बालेन के नाम से पहचाने जाने वाले शाह, पद संभालने के बाद विदेश में अपनी पहली आधिकारिक द्विपक्षीय यात्रा भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर करेंगे।
नेपाल इन वार्ताओं से ठोस वित्तीय प्रतिबद्धताएं चाहता है। दोनों देश उन परियोजनाओं पर भी विचार कर रहे हैं जिनका उद्घाटन या शुभारंभ इस दौरे के दौरान हो सकता है। साथ ही, 26 अगस्त की विनाशकारी अचानक आई बाढ़ के बाद पुनर्निर्माण के लिए भारत की संभावित सहायता पर भी चर्चा हो सकती है।
भारत के विदेश मंत्रालय ने 2 नवंबर को मिस्री की यात्रा की घोषणा करते हुए कहा कि बातचीत में आपसी हित के द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दे शामिल होंगे। मंत्रालय ने एक बयान में संबंधों का वर्णन इस तरह किया:
भारत और नेपाल के बीच मजबूत और मैत्रीपूर्ण संबंध हैं, जिनमें सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।
तत्काल काम इस कूटनीतिक भाषा को सहमत एजेंडे में बदलना है। सड़कें, रेलवे, हवाई संपर्क, बिजली पारेषण और व्यापार व्यवस्थाओं में बदलाव सभी प्राथमिकताएं हैं, जबकि बाढ़ से उबरने का काम बातचीत को तत्काल मानवीय उद्देश्य देता है। काठमांडू के लिए प्रस्तावित दौरा संसाधन जुटाने और परियोजनाएं फिर शुरू करने का अवसर है; नई दिल्ली के लिए यह शाह सरकार के साथ नियमित संपर्क बहाल करने का रास्ता है।
काठमांडू में मिस्री किनसे मिलेंगे
नेपाल के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, मिस्री विदेश सचिव अमृत कुमार राय के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। उनका वरिष्ठ नेपाली अधिकारियों से शिष्टाचार भेंट करने का कार्यक्रम भी है। इससे दोनों सरकारों को प्रधानमंत्रियों की बैठक से पहले नेपाल की अपेक्षाओं पर चर्चा करने का अवसर मिलेगा।
4 और 5 नवंबर के घोषित कार्यक्रम से संकेत मिलता है कि मिस्री गुरुवार को रवाना होंगे, जबकि एक अन्य रिपोर्टेड कार्यक्रम के मुताबिक उनकी 6 नवंबर को नई दिल्ली वापसी होगी। किसी भी सरकार ने शाह की यात्रा की तारीखों की औपचारिक घोषणा नहीं की है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि तैयारी दौरे के दौरान मिस्री शाह से मिलेंगे या नहीं।
वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले ने सितंबर में भारत यात्रा के दौरान तत्काल तैयारियों का बड़ा हिस्सा शुरू किया था। उन्होंने भारतीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की और शाह के नई दिल्ली जाने की संभावना पर चर्चा की। मिस्री की वार्ता का उद्देश्य उन बातचीत को आगे बढ़ाना और संभावित समझौतों की सूची को सीमित करना है।
वार्ता से पहले नए राजदूत का आगमन
नेपाल में भारत के आने वाले राजदूत सुधाकर दलेला के 3 नवंबर को काठमांडू पहुंचने की उम्मीद है, यानी मिस्री से एक दिन पहले। दोनों सरकारों के संभावित अहम बैठक की तैयारी के बीच उनके आगमन से राजधानी में नया कूटनीतिक प्रतिनिधि तैनात होगा।
1993 बैच के भारतीय विदेश सेवा अधिकारी दलेला, नवीन श्रीवास्तव का स्थान लेंगे। भारत ने 16 अक्टूबर को उनकी नियुक्ति की घोषणा की थी। उनके अनुभव में नेपाल और भूटान से जुड़े मामले, भारतीय प्रधानमंत्री कार्यालय में काम और अंतरराष्ट्रीय व्यापार वार्ताएं, साथ ही कई देशों में राजनयिक नियुक्तियां शामिल हैं।
दूतावास में बदलाव महत्वपूर्ण है, क्योंकि एजेंडा एक दौरे तक सीमित नहीं है। निवेश प्रस्तावों, निर्माण कार्यक्रमों, बिजली कनेक्शनों और व्यापार वार्ताओं के लिए मंत्रालयों और कारोबारों के बीच लगातार संपर्क जरूरी है। काठमांडू भारत के साथ पहले से चर्चा की गई परियोजनाओं पर तेज प्रगति चाहता है और दलेला ऐसे समय अपना कार्यभार संभालेंगे।
तनाव से फिर संपर्क तक संबंधों का सफर
शाह की सरकार ऐसे चुनाव के बाद सत्ता में आई जिसने स्थापित राजनीतिक समीकरणों को उलट दिया। ओली पर उनकी चुनावी जीत में झापा-5 से पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली के 18,734 वोटों के मुकाबले 68,348 वोट मिले, यानी 49,614 वोटों का अंतर रहा। इस नतीजे से भारत के साथ ऐसे संबंधों में नया राजनीतिक नेतृत्व आया, जिन पर पहले से संवेदनशील क्षेत्रीय मतभेदों का असर था।
शुरुआती संपर्क मुश्किल साबित हुए। शाह ने राजदूत श्रीवास्तव से मिलने से इनकार कर दिया और मई में प्रस्तावित यात्रा के दौरान मिस्री से मिलने को लेकर भी अनिच्छा जताई। भारत ने 11 और 12 मई की तारीखों की पुष्टि मांगी थी। इससे पहले मॉरीशस में बातचीत के दौरान नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल और जयशंकर के बीच सहमति बनी थी।
यात्रा स्थगित होने पर भारत ने शुरुआत में मिस्री की अन्य व्यस्तताओं का हवाला दिया था। देरी की वजहों के तौर पर शाह का उनसे मिलने से इनकार, प्रोटोकॉल से जुड़े मतभेद और लिपुलेख को लेकर तनाव भी बताए गए। बाद के संपर्कों से धीरे-धीरे कूटनीतिक संवाद फिर शुरू हुआ:
- मई: बैठक तय करने में मुश्किलों और सीमा संबंधी मतभेदों के बीच मिस्री का प्रस्तावित दौरा नहीं हुआ।
- जून: सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के नेता रवि लामिछाने ने नई दिल्ली का दौरा किया और मोदी तथा भारत के गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की।
- 26 अगस्त: विनाशकारी अचानक आई बाढ़ के कारण बचाव, राहत और पुनर्निर्माण की तत्काल जरूरत पैदा हुई।
- सितंबर: शाह ने सहायता के लिए भारत का आभार जताया, जबकि वाग्ले ने वरिष्ठ भारतीय मंत्रियों के साथ बातचीत की।
- 3 से 5 नवंबर: दलेला के संभावित आगमन और मिस्री की घोषित यात्रा का उद्देश्य महीने के आखिर में शाह के प्रस्तावित दौरे की तैयारी करना है।
लामिछाने की जून में हुई बैठकों से पता चलता है कि संबंध सुधारने की कोशिश बाढ़ से पहले ही शुरू हो गई थी। फिर इस आपदा ने दोनों सरकारों को सहयोग करने का एक और तत्काल कारण दिया।
सीमा विवाद अब भी संवेदनशील
सीमा विवाद सुलझाने में चीन और ब्रिटेन को शामिल करने की मांग करते हुए शाह की मई की टिप्पणियों से नई दिल्ली में बेचैनी हुई। भारत ने बाहरी पक्षों की भागीदारी को खारिज करते हुए कहा कि इस मुद्दे पर स्थापित द्विपक्षीय तंत्र के जरिए, यानी दोनों सरकारों के बीच सीधे बातचीत से, काम होना चाहिए।
नेपाल, भारत और चीन के मिलन-बिंदु के पास स्थित लिपुलेख तनाव का खास कारण रहा है। शाह प्रशासन ने विवादित क्षेत्र से होकर तिब्बत में कैलाश पर्वत और मानसरोवर तक हिंदू तीर्थयात्रियों की यात्रा फिर शुरू करने के भारत और चीन के फैसलों पर आपत्ति जताई।
इस असहमति का असर राजनीतिक विश्वास फिर से कायम करने की कोशिश पर पड़ता है। नेपाल ने अपने क्षेत्रीय दावों पर जोर दिया है, जबकि भारत ने सीधे संवाद की बात कही है। शाह की यात्रा की तैयारियों में यह अनसुलझा मुद्दा बड़े आर्थिक एजेंडे के साथ शामिल है। ऐसे में अधिकारियों को संपर्क बनाए रखना होगा, भले ही दोनों पक्षों के रुख अलग हों।
बाढ़ से उबरने की जरूरत ने दौरे को तात्कालिकता दी
26 अगस्त की अचानक आई बाढ़ के बाद कम से कम 270 भारतीयों के अब भी लापता होने की खबर थी। प्रस्तावित प्रधानमंत्री स्तरीय दौरे से सरकारों को बचाव और राहत प्रयासों की जानकारी साझा करने और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लंबे काम पर चर्चा करने का अवसर मिलेगा।
आपदा के बाद भारत ने मानवीय सहायता, आपदा राहत सामग्री, आपात बिजली सहायता और बेली पुल भेजे। बेली पुल पहले से बने हिस्सों को जोड़कर तैयार किए जाते हैं और स्थायी पुल के क्षतिग्रस्त या नष्ट होने पर रास्ता फिर खोल सकते हैं।
शाह ने सितंबर की शुरुआत में समय पर सहायता के लिए भारत का आभार जताया था। अब नेपाल भोटेकोशी बाढ़ के बाद पुनर्निर्माण के लिए वित्तीय मदद मांगना चाहता है। इस तरह बातचीत तत्काल राहत से आगे बढ़कर उन बुनियादी ढांचों की मरम्मत पर केंद्रित होगी जिनकी लोगों को यात्रा, आपूर्ति और आर्थिक गतिविधियों के लिए जरूरत है।
नेपाल के विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि काठमांडू कम शर्तों वाला बड़े पैमाने का भारतीय सहायता पैकेज मांग रहा है, हालांकि कोई राशि नहीं बताई। वाग्ले ने क्षतिग्रस्त पुलों, सड़कों और जलविद्युत ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए रियायती ऋण और अनुदान का अनुरोध किया है।
शाह के दौरे के दौरान भारत की संभावित घोषणाओं में आर्थिक सहायता और पुनर्निर्माण समर्थन शामिल हो सकते हैं। काठमांडू ठोस प्रतिबद्धताएं चाहता है ताकि आपदा प्रभावित लोगों के बारे में जानकारी साझा करने के साथ-साथ उबरने का काम भी आगे बढ़े।
नेपाल की ऊर्जा महत्वाकांक्षा के लिए निवेश और कनेक्शन जरूरी
नेपाल अगले नौ वर्षों में नदी प्रवाह आधारित और जल भंडारण परियोजनाओं के मेल से 35,000 मेगावाट बिजली क्षमता का लक्ष्य हासिल करना चाहता है। यह लक्ष्य 35 गीगावाट के बराबर है और इससे उस निवेश के पैमाने का अंदाजा मिलता है जिसे काठमांडू आकर्षित करना चाहता है।
नदी प्रवाह आधारित जलविद्युत में बिजली बनाने के लिए नदी के बहाव का इस्तेमाल होता है। आम तौर पर इसमें बाद के उपयोग के लिए पानी रोककर रखने की क्षमता कम होती है। जल भंडारण परियोजनाओं में जलाशयों में पानी रखा जाता है, जिससे बिजली उत्पादन को मांग के समय के अनुरूप तय करना आसान होता है। दोनों तरह की परियोजनाओं में बड़े निर्माण कार्य और बिजली नेटवर्क से जोड़ने की जरूरत होती है।
इसलिए बिजली पारेषण का ढांचा वार्ता का अहम हिस्सा है। बिजलीघर बिजली पैदा करते हैं, लेकिन पारेषण लाइनें उसे घरों, कारखानों और सीमा पार के खरीदारों तक पहुंचाती हैं। नए भारतीय जलविद्युत निवेश के लिए नेपाल का अनुरोध उस बिजली को पहुंचाने के लिए जरूरी कनेक्शन हासिल करने की उसकी कोशिश से जुड़ा है।
काठमांडू उन बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को तेजी से पूरा करना भी चाहता है जो पिछले समझौतों के बावजूद लंबित हैं। अधिकारी विचार कर रहे हैं कि शाह के दौरे के दौरान किन परियोजनाओं का उद्घाटन और किनका औपचारिक शुभारंभ किया जा सकता है। इससे लंबी अवधि के निवेश संबंधी बातचीत के साथ बैठक के कुछ प्रत्यक्ष नतीजे भी सामने आएंगे।
दोनों सरकारें उद्घाटन के लिए संभावित परियोजनाओं की सूचियों का आदान-प्रदान कर रही हैं। अधिकारियों ने बताया कि इनमें भारत की सहायता से बना पनौती स्थित नेपाल पुलिस अकादमी, भैरहवा का एकीकृत जांच चौकी परिसर और महाकाली नदी पर मोटर वाहन योग्य पुल शामिल हैं। दोनों प्रधानमंत्रियों से दोधारा चांदनी के एकीकृत जांच चौकी परिसर, लोअर अरुण जलविद्युत परियोजना और भारत के सिलीगुड़ी से नेपाल के झापा तक पेट्रोलियम पाइपलाइन का निर्माण शुरू होने के मौके पर भी शामिल होने की उम्मीद है।
व्यापार वार्ता सीमा पर वस्तुओं से आगे तक
नेपाल की आर्थिक प्राथमिकताओं में डिजिटलीकरण, अधिक मूल्य वाली वस्तुओं का कृषि उत्पादन, स्वच्छ ऊर्जा इस्तेमाल करने वाला विनिर्माण, पर्यटन और उत्पादन में हिस्सेदारी शामिल हैं। उत्पादन में हिस्सेदारी का मतलब है कि अलग-अलग देशों के कारोबार एक ही उत्पाद के निर्माण के अलग-अलग चरण पूरे करते हैं और अंतिम असेंबली से पहले पुर्जों को कारखानों के बीच भेजते हैं।
दोनों सरकारों के बीच सेवाओं, निवेश संरक्षण, निवेशकों को मुनाफा वापस भेजने और पुर्जों तथा घटकों की आवाजाही को शामिल करने के लिए व्यापार संधि को अद्यतन करने पर चर्चा होने की उम्मीद है। ये मुद्दे तय करते हैं कि कंपनियां सीमा पार उत्पादन कैसे व्यवस्थित कर सकती हैं और अपने निवेश से कमाए गए धन का प्रबंधन कैसे कर सकती हैं।
मुनाफे की स्वदेश वापसी का मतलब है निवेश वाले देश से कमाई को निवेशक के गृह देश में भेजना। निवेश संरक्षण उन नियमों से जुड़ा है जो तय करते हैं कि निवेश के साथ कैसा व्यवहार होगा। कारखाना या ऊर्जा परियोजना लगाने पर विचार कर रही कंपनियों के लिए ये व्यवस्थाएं उतनी ही प्रासंगिक हो सकती हैं जितनी वस्तुओं को ढोने की लागत।
सड़क, रेल और हवाई संपर्क इस एजेंडे से करीब से जुड़े हैं। नेपाल स्थलरुद्ध देश है और पारगमन तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच के लिए भारत पर काफी निर्भर है। उसके आयात का बड़ा हिस्सा भारत से आता है या भारतीय क्षेत्र से होकर गुजरता है। इसलिए भरोसेमंद परिवहन संपर्क केवल कूटनीतिक लक्ष्य नहीं, बल्कि रोजमर्रा की आर्थिक जरूरत है।
प्रस्तावित दौरे से क्या हासिल हो सकता है
काठमांडू की प्राथमिकताएं प्रस्तावित बैठक के नतीजे परखने का ठोस आधार देती हैं: बाढ़ से उबरने के लिए वित्तीय प्रतिबद्धताएं, जलविद्युत में नया निवेश और विलंबित परियोजनाओं में तेजी। इन प्रतिबद्धताओं के साथ परियोजनाओं का उद्घाटन और निर्माण कार्य का शुभारंभ हो सकता है, जबकि व्यापार वार्ताओं से उन बदलावों की पहचान हो सकती है जिन पर आगे बातचीत की जरूरत होगी।
शाह सरकार के शुरुआती महीनों की मुश्किलों के बाद नई दिल्ली अधिक स्थिर राजनीतिक संपर्क चाहती है। राय के साथ मिस्री की बातचीत और फिर दूतावास के जरिए जारी कामकाज, उन घोषणाओं पर सहमति बनाने के तत्काल कदम हैं जिन्हें दोनों प्रधानमंत्री कर सकते हैं।
नवंबर की तैयारियां क्षेत्रीय मतभेद, आपदा से उबरने और आर्थिक सहयोग को एक ही कूटनीतिक प्रक्रिया में ला रही हैं। नेपाल के लोगों और कारोबारों के लिए सबसे ठोस नतीजे होंगे: संपर्क मार्गों की मरम्मत, अधिक भरोसेमंद बुनियादी ढांचा और ऐसा निवेश जो बातचीत से आगे बढ़कर निर्माण तक पहुंचे।
मुख्य बातें
- मिस्री की नेपाल यात्रा 4 और 5 नवंबर को होगी। उनकी विदेश सचिव अमृत कुमार राय के साथ वार्ता तय है।
- शाह के प्रस्तावित भारत दौरे के लिए 22 से 24 नवंबर की तारीखों पर विचार हो रहा है। 22 नवंबर सबसे संभावित तारीख है।
- नेपाल बाढ़ के बाद पुनर्निर्माण सहायता, जलविद्युत निवेश और विलंबित बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने की मांग कर रहा है।
- नेपाल का ऊर्जा लक्ष्य नौ वर्षों में 35,000 मेगावाट क्षमता हासिल करना है, जिसके लिए बिजली उत्पादन परियोजनाओं और पारेषण कनेक्शन की जरूरत होगी।
- व्यापार संधि पर चर्चा में सेवाएं, निवेश संरक्षण, मुनाफे का हस्तांतरण और उत्पादन के पुर्जे शामिल होने की उम्मीद है।
- नियमित संपर्क फिर से कायम करने की कोशिश के बीच लिपुलेख पर मतभेद राजनीतिक पृष्ठभूमि का हिस्सा बने हुए हैं।






