टोक्यो के अंतरराष्ट्रीय प्रवेशद्वार का नया केंद्र
जापान का नारिता हवाई अड्डा 2030 के दशक में अपने तीनों टर्मिनलों को मिलाकर एक टर्मिनल बनाने की योजना बना रहा है। इसके साथ ही रनवे पर काम से सालाना उड़ानों की क्षमता 3,40,000 से बढ़कर 5,00,000 मूवमेंट होने की उम्मीद है। प्रस्तावित टर्मिनल मौजूदा टर्मिनल 1 और 2 के बीच बनेगा। इसमें नए बोर्डिंग गेट और गलियारे होंगे, जो इसे पहले से इस्तेमाल हो रही सुविधाओं से जोड़ेंगे।
विषय-सूची
नारिता इंटरनेशनल एयरपोर्ट कॉर्पोरेशन, भूमि, अवसंरचना, परिवहन और पर्यटन मंत्रालय तथा अन्य प्रतिभागियों ने जुलाई में हवाई अड्डे की सुविधाएं मजबूत करने पर हुई बैठक में योजनाओं की रूपरेखा पेश की। इसका उद्देश्य नारिता से होकर यात्रा करना आसान बनाना और पूर्वोत्तर एशिया में एक अंतरराष्ट्रीय केंद्र के रूप में उसकी स्थिति मजबूत करना है, जबकि टोक्यो का हानेदा हवाई अड्डा अपनी क्षमता के करीब काम कर रहा है।
विमान बदलने वाले यात्रियों के लिए इस परियोजना की सबसे तात्कालिक समस्या टर्मिनलों के बीच आवाजाही है। फिलहाल कुछ उड़ानों के बीच संपर्क के लिए बस से जाना पड़ता है। टर्मिनल की सुविधाओं को एक जगह लाने से यात्रियों के अगली उड़ान तक पहुंचने का तरीका बदलेगा, हालांकि हवाई अड्डे ने निर्माण का विस्तृत कार्यक्रम या एकीकरण पूरा होने की निश्चित तारीख नहीं बताई है।
नारिता इंटरनेशनल एयरपोर्ट कॉर्पोरेशन के एक अधिकारी ने यात्री सुविधा को परियोजना का प्रमुख कारण बताया:
हम विमान बदलने वाले यात्रियों समेत सभी यात्रियों की सुविधा बेहतर करना चाहते हैं।
इस योजना में दो आपस में जुड़ी चुनौतियों पर काम किया जाएगा: अधिक विमानों के लिए जगह बनाना और हवाई अड्डे से यात्रियों की आवाजाही को सुगम बनाना। रनवे तय करते हैं कि हवाई अड्डा कितनी उड़ानों को संभाल सकता है, जबकि टर्मिनल यात्रियों के इस्तेमाल के लिए गेट, जांच क्षेत्र और उड़ानों से पहले व बाद के रास्ते उपलब्ध कराते हैं।
तीन टर्मिनल एक कैसे बनेंगे
नारिता की योजना टर्मिनल 1 और 2 के बीच बोर्डिंग गेटों से सुसज्जित एक नया टर्मिनल भवन बनाने से शुरू होती है। गलियारे नए भवन को मौजूदा सुविधाओं से जोड़ेंगे, ताकि हवाई अड्डा अपने मौजूदा बुनियादी ढांचे के कुछ हिस्सों का इस्तेमाल करते हुए निर्माण कर सके।
इसके बाद नए टर्मिनल का चरणों में विस्तार किया जाएगा। सीमा शुल्क और अन्य सुविधाओं को समय के साथ एकीकृत किया जाएगा और अंततः हवाई अड्डे को एकल टर्मिनल वाला बनाया जाएगा। सीमा शुल्क के तहत यात्रियों द्वारा देश की सीमा पार लाए जाने वाले सामान की जांच होती है। इसलिए यह उन महत्वपूर्ण सेवाओं में से एक है, जिसे नई व्यवस्था में जगह देनी होगी।
इस परियोजना में पुराने भवनों के पास एक नया भवन खड़ा करना भर शामिल नहीं है। इसका लक्ष्य पूरे हवाई अड्डे में सुविधाओं को एकीकृत करते हुए आपस में जुड़े टर्मिनल बनाना है, जो मौजूदा तीन अलग-अलग टर्मिनलों की व्यवस्था की जगह लेगा।
यात्रियों को इसका व्यावहारिक लाभ हवाई अड्डे से होकर गुजरने के अधिक सहज रास्ते के रूप में मिलेगा। टर्मिनल के एक हिस्से में पहुंचने और दूसरे हिस्से से उड़ान पकड़ने वाले यात्रियों को नियोजित परिसर के भीतर ही संपर्क सुविधा मिलेगी, जिससे उन्हें इमारतों के बीच वही दूरी तय करने से राहत मिलेगी जिसके लिए अभी बस की जरूरत पड़ सकती है।
बड़ा टर्मिनल, लंबी दूरी
नया टर्मिनल पूरा होने के बाद नारिता के टर्मिनल का फर्श क्षेत्रफल करीब 9,70,000 वर्ग मीटर से बढ़कर लगभग 11 लाख वर्ग मीटर हो जाएगा। यह लगभग 1,30,000 वर्ग मीटर या करीब 13% की वृद्धि है।
इतने बड़े एकल टर्मिनल में भी हवाई अड्डे के भीतर काफी दूरी तय करनी होगी। नारिता पूर्व से पश्चिम तक करीब दो किलोमीटर तक की यात्रा के लिए एक पीपल मूवर पर विचार कर रहा है। पीपल मूवर ऐसी परिवहन व्यवस्था है जो किसी बड़े परिसर में यात्रियों को तय मार्ग पर ले जाती है।
प्रस्तावित व्यवस्था की तुलना कतर के हमद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की व्यवस्था से की गई है। नारिता में इससे बड़े क्षेत्र में सुविधाओं को जोड़ने का व्यावहारिक असर कम होगा: यात्रियों को आपस में जुड़े भवन तो मिलेंगे, लेकिन परिसर के दूर-दराज हिस्सों के बीच आने-जाने के लिए कुछ यात्रियों को अब भी परिवहन की जरूरत होगी।
गलियारे और प्रस्तावित पीपल मूवर एक-दूसरे से जुड़े उद्देश्यों को पूरा करेंगे। गलियारे सुविधाओं को भौतिक रूप से जोड़ेंगे, जबकि परिवहन व्यवस्था यात्रियों को जुड़े हुए हवाई अड्डे के भीतर लंबी दूरी तय करने में मदद करेगी।
5,00,000 उड़ान मूवमेंट का क्या मतलब है
नए और विस्तारित रनवे से नारिता की सालाना उड़ान क्षमता 1,60,000 मूवमेंट बढ़कर 3,40,000 से 5,00,000 होने की उम्मीद है। यह करीब 47% की वृद्धि है। एक उड़ान मूवमेंट का मतलब एक टेकऑफ या एक लैंडिंग है। इसलिए किसी विमान का उतरना और बाद में उड़ान भरना कुल दो मूवमेंट माने जाते हैं।
सालाना यात्रियों की संख्या 5.7 करोड़ से बढ़कर 7.5 करोड़ होने का अनुमान है। यह 1.8 करोड़ या करीब 32% की वृद्धि है। ये आंकड़े बताते हैं कि विस्तारित हवाई अड्डे को कितनी यात्री गतिविधि संभालने के लिए तैयार किया जा रहा है।
रनवे और यात्रियों की संख्या में वृद्धि अलग-अलग है: उड़ान क्षमता में नियोजित वृद्धि करीब 47% है, जबकि यात्रियों की संख्या में यह करीब 32% है। उड़ानें और यात्री हवाई अड्डे के काम के अलग-अलग पहलुओं को मापते हैं। विमानों का आकार और उनमें भरी हुई सीटों की संख्या जैसे कारक यात्रियों की संख्या तय करते हैं।
टर्मिनल के फर्श क्षेत्रफल में करीब 13% की नियोजित वृद्धि इन दोनों बढ़ोतरी से कम है। इससे जगह बढ़ाने के साथ-साथ उसके पुनर्गठन पर भी ध्यान जाता है। नारिता की योजना अतिरिक्त क्षेत्रफल को जुड़ी हुई सुविधाओं और एकीकृत सेवाओं के साथ जोड़ती है, जिससे टर्मिनल परिसर के संचालन का तरीका बदलेगा।
नारिता की क्षेत्रीय भूमिका के लिए उड़ान संपर्क क्यों अहम हैं
नारिता को मजबूत करने की जरूरत के पीछे हानेदा का अपनी क्षमता के करीब काम करना एक अहम वजह है। दोनों हवाई अड्डे टोक्यो क्षेत्र की सेवा करते हैं। नारिता की परियोजना का लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय यातायात संभालने की उसकी क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ पूर्वोत्तर एशिया के केंद्रों के बीच उसकी प्रतिस्पर्धा को मजबूत करना है।
हब ऐसा हवाई अड्डा होता है जहां यात्री उतरने वाले शहर से आगे के गंतव्यों तक पहुंचने के लिए दूसरी उड़ान पकड़ सकते हैं। उड़ान बदलने वाले यात्रियों के लिए उस हवाई अड्डे से होकर गुजरना भी यात्रा का हिस्सा है। टर्मिनलों के बीच जाने से एक विमान से उतरने और अगला विमान पकड़ने के बीच परिवहन का एक और चरण जुड़ जाता है।
नारिता की योजना गलियारों और प्रस्तावित पीपल मूवर के जरिए इस चरण को सीधे संबोधित करती है। हवाई अड्डे के अधिकारी का उड़ान बदलने वाले यात्रियों पर जोर इस निर्माण परियोजना को व्यापक लक्ष्य से जोड़ता है: अधिक उड़ानें संभालने का फायदा तभी ज्यादा होगा, जब यात्री उनके बीच आसानी से आ-जा सकें।
नारिता से यात्रा शुरू या समाप्त करने वाले यात्री भी पुनर्गठित सुविधाओं का इस्तेमाल करेंगे। इस योजना में बोर्डिंग गेट, मौजूदा इमारतों से संपर्क, सीमा शुल्क और अन्य सुविधाओं को एक साथ लाया जाएगा, जिससे हवाई अड्डे के विस्तार में टर्मिनल की बनावट अहम होगी।
1978 से विस्तार के बाद चरणबद्ध पुनर्निर्माण
नारिता मई 1978 में खुला था और बाद में नए टर्मिनलों समेत कई विस्तार हुए। नवीनतम प्रस्ताव का मकसद इन अलग-अलग सुविधाओं को अधिक जुड़ी हुई व्यवस्था में लाना और भविष्य के यातायात के लिए जगह बढ़ाना है।
हवाई अड्डे और उसके साझेदारों की योजना में एक नई केंद्रीय इमारत से शुरुआत कर धीरे-धीरे सुविधाओं को एकीकृत करने की बात कही गई है:
- मई 1978: नारिता हवाई अड्डा खुला।
- जुलाई की योजना बैठक: हवाई अड्डा कंपनी, परिवहन मंत्रालय और अन्य प्रतिभागियों ने नारिता की सुविधाएं मजबूत करने की योजनाओं की रूपरेखा पेश की।
- 2030 का दशक: टर्मिनल 1 और 2 के बीच बोर्डिंग गेटों वाला नया टर्मिनल बनाने की योजना है, जिसे गलियारों से मौजूदा सुविधाओं से जोड़ा जाएगा।
- बाद के चरण: टर्मिनल का विस्तार होगा और एकल टर्मिनल वाला हवाई अड्डा बनाने के लिए सीमा शुल्क तथा अन्य सुविधाओं को एकीकृत किया जाएगा।
चरणबद्ध तरीका इस प्रस्ताव की अहम विशेषता है। योजना में ऐसा एक उद्घाटन नहीं बताया गया है, जिसके बाद तीनों टर्मिनल तुरंत बदल दिए जाएं। इसके बजाय, इसमें नए निर्माण से संपर्क सुविधाएं बनाने और फिर आगे एकीकरण तक के चरण शामिल हैं। इन चरणों के पूरा होने के साथ यात्रियों को हवाई अड्डे में बदलाव दिखाई देगा।
मुख्य बातें
- नारिता 2030 के दशक में निर्माण और विस्तार शुरू कर अपने तीन टर्मिनलों को एक में बदलने की योजना बना रहा है।
- टर्मिनल 1 और 2 के बीच बनने वाला नया भवन गलियारों से मौजूदा सुविधाओं से जुड़ेगा।
- टर्मिनल का फर्श क्षेत्रफल करीब 9,70,000 से बढ़कर 11 लाख वर्ग मीटर होगा, यानी लगभग 13% की वृद्धि।
- प्रस्तावित पीपल मूवर पूर्व से पश्चिम तक करीब दो किलोमीटर की दूरी के यात्रियों के सफर में मदद करेगा।
- नए और विस्तारित रनवे से सालाना क्षमता 3,40,000 से बढ़कर 5,00,000 उड़ान मूवमेंट होने की उम्मीद है।
- सालाना यात्रियों की संख्या 5.7 करोड़ से बढ़कर 7.5 करोड़ होने का अनुमान है।
- इस परियोजना का लक्ष्य हानेदा के अपनी क्षमता के करीब काम करने के बीच यात्रियों के टर्मिनल बदलने को आसान बनाना और अंतरराष्ट्रीय केंद्र के रूप में नारिता की भूमिका मजबूत करना है।






