घुटने की चोट और शुरुआती संकट से उबरकर पाकिस्तान ने जीता खिताब
दाहिने घुटने पर चोट के बावजूद फखर ज़मान ने 99 गेंदों में 127 रन बनाए और पाकिस्तान ने 31 अक्टूबर, 2026 को लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय त्रिकोणीय सीरीज़ के फाइनल में श्रीलंका को तीन विकेट से हराया। 31,265 दर्शकों के सामने पाकिस्तान ने 48.3 ओवर में सात विकेट पर 331 रन बनाकर 326 रन का लक्ष्य नौ गेंद शेष रहते हासिल कर लिया।
विषय-सूची
- घुटने की चोट और शुरुआती संकट से उबरकर पाकिस्तान ने जीता खिताब
- श्रीलंका ने बड़ी पारी की नींव कैसे रखी
- कमिंदु का पहला शतक और पाकिस्तान का आखिरी ओवरों में पलटवार
- 14 रन पर दो विकेट गिरने के बाद फखर और बैग ने संभाली पारी
- तेजी से रन बनाने और छूटे मौकों से बना शतक
- मिन्हास ने बाउंड्री का सूखा खत्म किया
- अफरीदी के विजयी छक्के से पहले लगातार दो विकेट
- पाकिस्तान की जीत के पीछे के रिकॉर्ड
- खिताब के बाद पुरस्कार और बधाइयां
- मुख्य बातें
इस सफल लक्ष्य का पीछा करना वनडे फाइनल में लक्ष्य हासिल करने के सर्वोच्च रिकॉर्ड की बराबरी थी। इससे पहले भारत ने 2002 में लॉर्ड्स में नेटवेस्ट फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ 326 रन का लक्ष्य हासिल किया था। दोनों टीमों के कुल 656 रन भी वनडे फाइनल का रिकॉर्ड बने और 2002 के उस मैच के 651 रनों से आगे निकल गए।
पाकिस्तान की जीत तीन बिल्कुल अलग पारियों पर निर्भर रही। फखर ने शतक जड़ा, 19 वर्षीय साद बैग ने 75 गेंदों में 74 रन बनाकर लक्ष्य का पीछा संभाला और अराफात मिन्हास ने महज 31 गेंदों में 61 रन बनाकर आखिरी चरण में तेजी दिखाई। अंत में श्रीलंका ने लगातार गेंदों पर दो विकेट लिए, लेकिन शाहीन शाह अफरीदी ने विजयी छक्का जड़ दिया।
इससे पहले कमिंदु मेंडिस ने अपना पहला वनडे शतक जड़ते हुए 128 गेंदों में 131 रन बनाए और श्रीलंका को आठ विकेट पर 325 रन तक पहुंचाया। पवन रथनायके के साथ उनकी साझेदारी ने मेहमान टीम को इससे भी बड़े स्कोर की स्थिति में पहुंचा दिया था, लेकिन पाकिस्तान के गेंदबाजों ने आखिरी ओवरों में लगातार विकेट लिए।
इस जीत के साथ पाकिस्तान ने घरेलू मैदान पर तीन पिछली हार के बाद पहली बार वनडे फाइनल जीता। साथ ही, 2008 में बांग्लादेश में किटप्लाई कप के बाद पहली बार वनडे त्रिकोणीय सीरीज़ का खिताब अपने नाम किया। उस फाइनल में उसने भारत को हराया था।
श्रीलंका ने बड़ी पारी की नींव कैसे रखी
टॉस जीतकर पाकिस्तान ने पहले गेंदबाजी चुनी और टूर्नामेंट में पहली बार श्रीलंका को पहले बल्लेबाजी के लिए बुलाया। अविष्का फर्नांडो और कमिंदु ने शुरुआती ओवर संभाले और फिर रन गति बढ़ाई। 10 ओवर के बाद श्रीलंका का स्कोर बिना विकेट खोए 51 रन था।
फर्नांडो ने छठे ओवर में नसीम शाह पर दो चौके और एक छक्का जड़ा, जबकि कमिंदु ने 10वें ओवर में अफरीदी को छक्का लगाया। कमिंदु शुरुआती समय में एक मुश्किल स्थिति से भी बचे, जब मिन्हास की गेंद पर कैच-बिहाइंड का फैसला रिव्यू के बाद पलट दिया गया। इस प्रक्रिया में खिलाड़ी अंपायर के फैसले की जांच के लिए टीवी अधिकारियों से अपील करते हैं।
पाकिस्तान ने सटीक गेंदबाजी से रन गति धीमी की। हारिस रऊफ ने 17वें ओवर में फर्नांडो के खिलाफ मेडन ओवर किया, यानी उस ओवर में कोई रन नहीं बना। अगले ही ओवर में सलमान अली आगा ने इस सलामी बल्लेबाज को 38 रन पर आउट कर दिया।
आगा ने अपनी ही गेंद पर लौटता हुआ कैच लेकर कुसल मेंडिस को भी आउट किया। 22वें ओवर में श्रीलंका का स्कोर दो विकेट पर 109 रन था। कमिंदु और रथनायके ने 119 गेंदों में 146 रन की साझेदारी से जवाब दिया। इससे मेहमान टीम की मजबूत शुरुआत संभावित रूप से बड़े स्कोर की ओर बढ़ने लगी।
कमिंदु का पहला शतक और पाकिस्तान का आखिरी ओवरों में पलटवार
कमिंदु के 131 रन में 12 चौके और दो छक्के शामिल थे। रथनायके ने 65 गेंदों में 77 रन बनाए और सीरीज़ में चौथी बार कम से कम 50 रन का स्कोर दर्ज किया। दोनों ने मिलकर 41 ओवर के बाद श्रीलंका को दो विकेट पर 255 रन तक पहुंचाया। पारी में नौ ओवर बाकी थे और इस नींव पर बड़ा स्कोर खड़ा करने का मौका था।
अफरीदी ने स्वीप खेलने की कोशिश के बाद कमिंदु को पगबाधा आउट कर साझेदारी तोड़ी। उन्होंने दासुन शनाका को भी आउट किया, जिन्होंने नौ गेंदों में 17 रन बनाकर कुछ देर के लिए रन गति फिर बढ़ाने का खतरा पैदा किया था। पाकिस्तान ने आखिरी चरण में पांच विकेट लेकर रथनायके को रऊफ के हाथों आउट कराया।
श्रीलंका ने आखिरी नौ ओवर में 70 रन जोड़े, लेकिन इस दौरान छह विकेट गंवा दिए। इससे पाकिस्तान के सामने लक्ष्य की तस्वीर बदल गई: मेजबान टीम को अब भी बड़ा लक्ष्य हासिल करना था, लेकिन श्रीलंका को मजबूत स्थिति को 350 के करीब के स्कोर में बदलने से रोक दिया गया।
अफरीदी ने अपने 10 ओवर में 50 रन देकर दो विकेट लिए। नसीम, रऊफ और आगा ने भी दो-दो विकेट हासिल किए। कमिंदु की पारी वनडे फाइनल में श्रीलंका की तीसरी सबसे बड़ी व्यक्तिगत पारी रही। उनसे आगे 2000 में भारत के खिलाफ सनथ जयसूर्या के 189 और 1998 में इंग्लैंड के खिलाफ मार्वन अटापट्टू के नाबाद 132 रन हैं।
14 रन पर दो विकेट गिरने के बाद फखर और बैग ने संभाली पारी
दिलशान मदुशंका ने माज़ सदाकत को पांच रन पर और बाबर आज़म को बिना खाता खोले आउट कर श्रीलंका को तुरंत सफलता दिलाई। बाबर ने सिर्फ पांच गेंदों का सामना किया और छह रन प्रति ओवर से अधिक की दर से रन बनाने की जरूरत वाले लक्ष्य का पीछा करते हुए पाकिस्तान का स्कोर दो विकेट पर 14 रन हो गया।
फखर पिछले चार मैचों में सिर्फ 31 रन बनाकर फाइनल में उतरे थे। श्रीलंका की पारी के दौरान दाहिने घुटने में चोट लगने के बाद उन्होंने काफी समय ड्रेसिंग रूम में बिताया था। पाकिस्तान को उनसे हालिया खराब फॉर्म और लड़खड़ाते लक्ष्य के पीछा, दोनों को पलटने की उम्मीद थी।
बैग ने ऐसा साथ दिया जिससे वापसी संभव हुई। इस किशोर बल्लेबाज ने अपनी 74 रन की पारी में 11 चौके लगाए और वनडे में अपना पहला अर्धशतक पूरा किया। उन्होंने पाकिस्तान को 10 ओवर के बाद दो विकेट पर 50 रन तक पहुंचाने में मदद की और शुरुआती विकेटों के बाद रन गति थमने नहीं दी।
दोनों ने तीसरे विकेट के लिए 149 रन जोड़े। उनकी साझेदारी से पाकिस्तान की जरूरत के 326 रनों में से लगभग 46 प्रतिशत रन बने। इसने कमजोर शुरुआत को ऐसी नींव में बदल दिया जहां से मध्य और निचले क्रम के बल्लेबाज आक्रमण कर सकते थे। आखिरकार महीश थीक्षाना ने अपनी ही गेंद पर कैच लेकर बैग की पारी समाप्त की।
तेजी से रन बनाने और छूटे मौकों से बना शतक
फखर ने अर्धशतक तक पहुंचने के लिए 52 गेंदें लीं, फिर 84 गेंदों में शतक पूरा किया। इस तरह उनका दूसरा अर्धशतक सिर्फ 32 गेंदों में आया। रन गति में इस तेज बदलाव ने पाकिस्तान को जरूरी रन दर के करीब बनाए रखा।
उनकी पूरी पारी में 11 चौके और छह छक्के शामिल थे। इन बाउंड्री शॉट से उनके 127 में से 80 रन आए। वह खास तौर पर लेग साइड पर प्रभावी रहे। यह मैदान का वह हिस्सा है जो बल्लेबाज के गार्ड लेते समय उसके पैरों के पीछे होता है। वहां उन्होंने स्वीप और पुल सहित शॉट्स से 72 रन बनाए।
सीरीज़ का अपना पहला मैच खेल रहे थीक्षाना ने 69 और 106 रन पर फखर को आउट करने के मौके गंवाए। इनमें अपनी गेंद पर लौटता हुआ कैच और बाउंड्री के पास कैच का मौका शामिल था। इससे पाकिस्तान के सबसे खतरनाक बल्लेबाज को अपनी पारी आगे बढ़ाने का मौका मिला।
आखिरकार मदुशंका ने 34वें ओवर में फखर को बोल्ड किया। उस समय पाकिस्तान को 106 रन और चाहिए थे। फखर ने आगा के साथ 57 रन की तेज साझेदारी भी की थी, लेकिन लक्ष्य पूरा करने के लिए बाकी बल्लेबाजों से अब भी बड़े योगदान की जरूरत थी। इसके बाद आगा 17 रन बनाकर आउट हुए और पाकिस्तान का स्कोर पांच विकेट पर 230 रन हो गया।
मिन्हास ने बाउंड्री का सूखा खत्म किया
पाकिस्तान को आखिरी 13 ओवर में 96 और अंतिम 10 ओवर में 82 रन चाहिए थे। 10 ओवर तक कोई बाउंड्री न लगने से मिन्हास और हसन नवाज़ पर दबाव बढ़ गया, हालांकि दोनों ने विकेट बचाए रखे और छोटी-छोटी बढ़त हासिल करते रहे।
मिन्हास ने 43वें ओवर में शनाका की गेंद पर चौका लगाकर यह सूखा खत्म किया। 45वें ओवर में असिथा फर्नांडो के खिलाफ एक और बाउंड्री आई और आखिरी पांच ओवर में पाकिस्तान को 46 रन चाहिए थे। इसके बाद मिन्हास ने शनाका और मदुशंका पर छक्के लगाकर लक्ष्य तेजी से घटाया।
मिन्हास और नवाज़ ने छठे विकेट के लिए 65 गेंदों में 94 रन जोड़े। नवाज़ 37 रन बनाकर नाबाद रहे, जबकि मिन्हास ने अपनी आखिरी 17 गेंदों में 48 रन बनाए। इस तरह उन्होंने धीमी शुरुआत को अंतिम चरण की निर्णायक आक्रामक पारी में बदल दिया।
जब मिन्हास ने फर्नांडो पर दो छक्के और एक चौका लगाया, तब पाकिस्तान को 18 गेंदों में 18 रन चाहिए थे। उन्होंने 28 गेंदों में अर्धशतक पूरा किया और अपनी 61 रन की पारी में चार छक्के तथा तीन चौके लगाए। उनकी आखिरी ओवरों की तेजी ने पाकिस्तान को जीत से सिर्फ दो रन दूर पहुंचा दिया।
अफरीदी के विजयी छक्के से पहले लगातार दो विकेट
फर्नांडो ने लगातार गेंदों पर मिन्हास और फहीम अशरफ को आउट कर श्रीलंका की उम्मीदें कुछ देर के लिए फिर जगा दीं। पाकिस्तान के सात विकेट गिर चुके थे, लेकिन नवाज़ क्रीज़ पर थे और लक्ष्य लगभग सामने था।
अगले ही ओवर में अफरीदी ने मदुशंका की गेंद को डीप मिडविकेट के ऊपर से छह रन के लिए भेजकर मुकाबला खत्म कर दिया। विजयी शॉट के पूरे छह रन जुड़ने के कारण पाकिस्तान का स्कोर 326 नहीं, बल्कि 331 रहा। 48.3 ओवर का मतलब है 48 पूरे ओवर और तीन गेंदें; निर्धारित 300 गेंदों में से नौ गेंदें बाकी थीं।
मदुशंका ने 63 रन देकर तीन विकेट लिए। उनके शिकार माज़, बाबर और फखर थे। फर्नांडो ने 72 रन देकर दो विकेट लिए। श्रीलंका के गेंदबाजों को शाम की ओस से भी जूझना पड़ा, जिससे गेंद गीली हो गई और उसे पकड़ना तथा नियंत्रित करना कठिन हो गया।
इस तरह पाकिस्तान की वापसी के लिए अलग-अलग दबाव में दो साझेदारियों की जरूरत पड़ी। शुरुआती विकेटों के बाद फखर और बैग ने पारी को फिर खड़ा किया, जबकि शतक बनाने वाले बल्लेबाज के आउट होने के बाद बढ़ती रन दर को मिन्हास और नवाज़ ने संभाला। इनमें से कोई भी साझेदारी अकेले लक्ष्य पूरा नहीं कर सकती थी।
पाकिस्तान की जीत के पीछे के रिकॉर्ड
पाकिस्तान ने 326 रन का लक्ष्य हासिल कर पुरुषों के वनडे नॉकआउट मुकाबले में सफलतापूर्वक हासिल किए गए सबसे बड़े लक्ष्य की भी बराबरी की। वनडे में श्रीलंका के खिलाफ यह दूसरा सबसे बड़ा सफल लक्ष्य था। इससे आगे 2023 विश्व कप के दौरान हैदराबाद में पाकिस्तान का 345 रन का लक्ष्य हासिल करना है।
फखर ने वनडे में अपना 12वां शतक और तीन वनडे फाइनल में दूसरा शतक लगाया। उनका पहला शतक 2017 चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में भारत के खिलाफ आया था। वह सईद अनवर के साथ वनडे फाइनल में दो शतक लगाने वाले पाकिस्तान के इकलौते बल्लेबाज बने। अनवर ने 1993 की विल्स ट्रॉफी और 1998 के सिल्वर जुबली इंडिपेंडेंस कप में शतक बनाए थे।
फखर 300 से अधिक के लक्ष्य का पीछा करते हुए पाकिस्तान के लिए सबसे ज्यादा शतक लगाने वाले बल्लेबाज भी बन गए। उनके नाम चार शतक हैं। बाबर और यूनुस खान के नाम तीन-तीन शतक हैं। इस पारी के दौरान फखर ने अपनी 96वीं पारी में वनडे के 4,000 रन पूरे किए। पाकिस्तान के लिए उनसे तेज यह मुकाम बाबर ने हासिल किया था, जिन्होंने 82 पारियों में यह किया।
पाकिस्तान का सात विकेट पर 331 रन वनडे नॉकआउट मुकाबले में उसका दूसरा सबसे बड़ा स्कोर था। इससे आगे 2017 चैंपियंस ट्रॉफी फाइनल में बनाए गए चार विकेट पर 338 रन हैं। श्रीलंका का आठ विकेट पर 325 रन भी उसका नॉकआउट मुकाबलों में दूसरा सबसे बड़ा स्कोर था। इससे आगे 1997 इंडिपेंडेंस कप के पहले फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ चार विकेट पर 339 रन हैं।
खिताब के बाद पुरस्कार और बधाइयां
फखर को प्लेयर ऑफ द मैच और मिन्हास को प्लेयर ऑफ द सीरीज़ चुना गया। मिन्हास का यह योगदान उनके अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत में आया। आठ वनडे के बाद उनके नाम कम से कम 50 रन के दो स्कोर और एक पारी में पांच विकेट लेने के दो प्रदर्शन थे।
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष मोहसिन नकवी ने बोर्ड की ओर से जारी बयान में लक्ष्य का पीछा करने वाले तीन प्रमुख खिलाड़ियों को जीत का श्रेय दिया।
फखर ज़मान, अराफात मिन्हास और साद बैग की आक्रामक बल्लेबाजी ने जीत में अहम भूमिका निभाई। क्रिकेटरों ने बेहतरीन टीमवर्क दिखाया और शानदार प्रदर्शन किया।
राष्ट्रपति आसिफ अली ज़रदारी ने भी खिलाड़ियों और प्रबंधन को बधाई दी और उनके प्रदर्शन, मेहनत तथा टीमवर्क की सराहना की। उन्होंने टूर्नामेंट के आयोजन और पाकिस्तान की जीत के लिए नकवी को भी बधाई दी।
2017 चैंपियंस ट्रॉफी के बाद किसी बहुराष्ट्रीय वनडे प्रतियोगिता में पाकिस्तान का यह पहला खिताब था। इससे पहले 2025 में घरेलू मैदान पर हुई त्रिकोणीय सीरीज़ के फाइनल में उसे न्यूज़ीलैंड से हार मिली थी। लाहौर टूर्नामेंट की तीसरी टीम इंग्लैंड अपने चार में से तीन मैच हारकर बाहर हो गई थी।
मुख्य बातें
- पाकिस्तान ने लाहौर में श्रीलंका को तीन विकेट से हराया और नौ गेंद शेष रहते सात विकेट पर 331 रन बनाकर जीत दर्ज की।
- दाहिने घुटने पर चोट और हालिया खराब फॉर्म के बावजूद फखर ज़मान ने 99 गेंदों में 127 रन बनाए।
- साद बैग ने 74, अराफात मिन्हास ने 31 गेंदों में 61 रन बनाए और हसन नवाज़ 37 रन पर नाबाद रहे।
- कमिंदु मेंडिस ने अपना पहला वनडे शतक लगाया और श्रीलंका के आठ विकेट पर 325 रन में 131 रन का योगदान दिया।
- 326 रन का सफल लक्ष्य वनडे फाइनल के रिकॉर्ड की बराबरी था, जबकि दोनों टीमों के कुल 656 रन फाइनल का नया रिकॉर्ड बने।
- फखर प्लेयर ऑफ द मैच और मिन्हास प्लेयर ऑफ द सीरीज़ बने। पाकिस्तान ने घरेलू मैदान पर पहली बार वनडे फाइनल जीता।






