दो रॉकेट, तीन अंतरिक्ष यात्री और 2030 से पहले लैंडिंग
चीन अपने मेंगझोउ अंतरिक्ष यान और लान्यू चंद्र लैंडर को बिना अंतरिक्ष यात्रियों के उड़ाने की योजना बना रहा है। इसके बाद वह अपनी पहली चालक दल वाली चंद्रमा लैंडिंग का प्रयास करेगा। इससे उस मिशन में परीक्षण का एक अहम चरण जुड़ जाएगा, जिसमें दो लॉन्ग मार्च-10 रॉकेट इस्तेमाल होंगे और तीन लोगों को चंद्र कक्षा तक ले जाया जाएगा। इसके बाद दो अंतरिक्ष यात्री सतह पर जाएंगे, जबकि मेंगझोउ पृथ्वी और चंद्रमा के बीच उनके परिवहन का काम करेगा।
विषय-सूची
- दो रॉकेट, तीन अंतरिक्ष यात्री और 2030 से पहले लैंडिंग
- यात्रा कैसे पूरी होगी
- अब तक के परीक्षण और आगे की तैयारी
- प्रोटोटाइप से अब एकीकृत प्रणाली के परीक्षण की ओर
- लान्यू को उतरने के बाद फिर उड़ान भरनी होगी
- उतरने के लिए सुरक्षित जगह तलाशना
- मेंगझोउ के आपातकालीन वापसी मार्ग
- पृथ्वी पर वापसी और चालक दल की सुरक्षित निकासी
- चंद्र कार्यक्रम के साथ अंतरिक्ष स्टेशन का संचालन जारी
- मुख्य बिंदु
इन योजनाओं का ब्योरा 31 अक्टूबर को बीजिंग में मानव अंतरिक्ष उड़ान पर आयोजित सातवें अकादमिक सम्मेलन के अपडेट में दिया गया। इसमें 800 से अधिक विशेषज्ञों और विद्वानों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन के विवरण में 2030 से पहले चीनी अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर पहुंचाने, वैज्ञानिक जांच और तकनीकी प्रयोग करने तथा चालक दल को सुरक्षित वापस लाने का लक्ष्य रखा गया।
चाइना मैन्ड स्पेस एजेंसी के प्रवक्ता झांग जिंगबो ने पांच प्रमुख उपकरणों के विकास की प्रगति का भी ब्योरा दिया: लॉन्ग मार्च-10 रॉकेट, मेंगझोउ अंतरिक्ष यान, लान्यू लैंडर, वांग्यू चंद्र अंतरिक्ष सूट और तानसुओ रोवर। चाइना एयरोस्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी कॉरपोरेशन द्वारा प्रकाशित आधिकारिक कार्यक्रम अपडेट के अनुसार, इन उपकरणों के प्रारंभिक प्रोटोटाइप तैयार किए जा चुके हैं। इसमें लैंडिंग का लक्ष्य 2030 तक बताया गया है, जबकि सम्मेलन के विवरण में 2030 से पहले का लक्ष्य दिया गया है।
व्यावहारिक चुनौती इन यानों को एक साथ काम करने लायक बनाना है: पृथ्वी से अलग-अलग प्रक्षेपण से लेकर चंद्रमा के पास डॉकिंग, लैंडिंग, फिर उड़ान भरने और सुरक्षित वापसी तक। इसलिए परीक्षण अभियान में अंतरिक्ष यात्रियों के सतह पर कदम रखने के पल से कहीं अधिक चीजें शामिल हैं।
चालक दल के लिए हर चरण इस बात पर निर्भर करता है कि अगला यान तैयार हो: मेंगझोउ को लैंडर तक पहुंचना होगा, लान्यू को सतह से वापस आना होगा और फिर मेंगझोउ को सभी को पृथ्वी पर वापस लाना होगा। प्रस्तावित बिना चालक दल वाली उड़ानों में नए अंतरिक्ष यानों को उड़ान में परखा जाएगा, इससे पहले कि लोग उन पर निर्भर हों।
यात्रा कैसे पूरी होगी
दो लॉन्ग मार्च-10 रॉकेट अलग-अलग प्रक्षेपित होंगे। एक लान्यू और दूसरा मेंगझोउ को लेकर जाएगा। दोनों यान चंद्र कक्षा में मिलेंगे और डॉकिंग करेंगे। डॉकिंग का अर्थ है दो अंतरिक्ष यानों को जोड़ना, ताकि लोग और उपकरण एक से दूसरे में जा सकें।
मेंगझोउ को तीन अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी और चंद्र कक्षा के बीच ले जाने के लिए बनाया गया है। उनमें से दो चंद्रमा पर उतरने और बाद में कक्षा में मौजूद अंतरिक्ष यान तक लौटने के लिए लान्यू में जाएंगे। इससे यात्रा का बंटवारा एक ऐसे यान के बीच होता है जिसे पृथ्वी तक आने-जाने के लिए बनाया गया है और दूसरे ऐसे यान के बीच, जिसे चंद्रमा के पास और उसकी सतह पर काम करने के लिए तैयार किया गया है।
सतह पर जाने के बाद लान्यू फिर से मेंगझोउ से जुड़ेगा, जिससे लैंडिंग दल उस अंतरिक्ष यान में लौट सकेगा जो उन्हें घर ले जाएगा। इसलिए मिशन में लैंडिंग से पहले और बाद, दोनों बार चंद्रमा के पास सफल डॉकिंग जरूरी है।
सम्मेलन के विवरण में प्रस्तावित कामों में लैंडिंग, सतह पर यात्रा, नमूने इकट्ठा करना, अनुसंधान करना और वापसी शामिल हैं। बताए गए तकनीकी लक्ष्यों में पृथ्वी और चंद्रमा के बीच यात्रा, चंद्र सतह पर थोड़े समय के लिए ठहरना और अंतरिक्ष यात्रियों व रोबोटिक उपकरणों को साथ लेकर अन्वेषण करना शामिल है।
अब तक के परीक्षण और आगे की तैयारी
सम्मेलन के अपडेट के मुताबिक, उसमें बताए गए वर्ष की शुरुआत में लॉन्ग मार्च-10 का कम ऊंचाई पर प्रदर्शन परीक्षण और अधिकतम गतिशील दबाव के दौरान मेंगझोउ का आपातकालीन पलायन परीक्षण सफल रहा था। अधिकतम गतिशील दबाव चढ़ाई के दौरान वह बिंदु होता है, जब गति और हवा के घनत्व का मेल यान पर सबसे ज्यादा वायुगतिकीय भार डालता है।
झांग की जानकारी में पूरे किए गए अन्य काम भी शामिल हैं: लॉन्ग मार्च-10 के दूसरे चरण की प्रणोदन प्रणाली का परीक्षण, रॉकेट को स्थिर रखकर किया गया स्थिर अग्नि परीक्षण, जमीन से मेंगझोउ का पलायन परीक्षण और लान्यू के लैंडिंग तथा उड़ान भरने की पुष्टि का परीक्षण। इन सबमें प्रणोदन, आपातकालीन पलायन और कक्षा तथा सतह के बीच आवाजाही की जांच की गई।
ये उपलब्धियां कई चरणों में फैली हैं, हालांकि 31 अक्टूबर को हुए सम्मेलन का कैलेंडर वर्ष उसके विवरण में निर्दिष्ट नहीं है:
- सम्मेलन के विवरण में बताए गए वर्ष की शुरुआत: लॉन्ग मार्च-10 का कम ऊंचाई पर प्रदर्शन परीक्षण और अधिकतम गतिशील दबाव के दौरान मेंगझोउ का पलायन परीक्षण सफल रहा।
- 31 अक्टूबर: बीजिंग में जारी अपडेट में चालक दल वाली लैंडिंग से पहले मेंगझोउ और लान्यू की बिना चालक दल वाली उड़ानों की योजना का ब्योरा दिया गया।
- मार्च 2026: तकनीकी कवरेज में एक विशेष जर्नल अंक का ब्योरा दिया गया, जिसमें अंतरिक्ष यान की प्रणालियों और आपातकालीन प्रक्रियाओं की जानकारी है।
- चालक दल वाली लैंडिंग से पहले: लॉन्ग मार्च-10 की और सत्यापन उड़ानों तथा मेंगझोउ और लान्यू की पहली उड़ानों की योजना है।
- 2030 से पहले: सम्मेलन के विवरण में चीन के पहले अंतरिक्ष यात्री की लैंडिंग का लक्ष्य।
बिना चालक दल वाली उड़ानों या पहली चालक दल वाली लैंडिंग की कोई सटीक प्रक्षेपण तारीख नहीं बताई गई। आगामी मिशनों की सूची में रोबोटिक चांग'ए-7 मिशन भी शामिल है। साथ ही, अंतरिक्ष यात्रियों को ले जाने वाले यानों पर भी काम जारी है।
प्रोटोटाइप से अब एकीकृत प्रणाली के परीक्षण की ओर
झांग ने कहा कि कार्यक्रम में प्रमुख उड़ान उपकरणों के प्रारंभिक प्रोटोटाइप पूरे कर लिए गए हैं। सरल शब्दों में, यह वह चरण है जिसमें उपकरणों के शुरुआती संस्करण तैयार किए जाते हैं, ताकि इंजीनियर उनके डिजाइन और कामकाज की जांच कर सकें। इसके बाद उड़ान परीक्षण में देखा जाता है कि वास्तविक मिशन की परिस्थितियों में यान कैसा प्रदर्शन करते हैं।
आधिकारिक अपडेट में लान्यू के एकीकृत परीक्षण, मेंगझोउ के तापीय और पलायन परीक्षण तथा लॉन्ग मार्च-10 की प्रदर्शन और तकनीक सत्यापन उड़ानें शामिल हैं। एकीकृत परीक्षण में कई जुड़े हुए तंत्रों को एक साथ जांचा जाता है, न कि हर हिस्से को अलग-अलग। तापीय परीक्षण यह जांचते हैं कि उपकरण तापमान की परिस्थितियों को कैसे संभालते हैं।
झांग ने यह भी कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान और अनुप्रयोग पेलोड के डिजाइन अंतिम कर दिए गए हैं। पेलोड वह उपकरण है जिसे मिशन का काम करने के लिए ले जाया जाता है, जैसे वैज्ञानिक माप के लिए इस्तेमाल होने वाले यंत्र। इसी दौरान प्रक्षेपण स्थल, ट्रैकिंग नेटवर्क और पृथ्वी पर लैंडिंग स्थल का निर्माण आगे बढ़ रहा है।
ये सुविधाएं उड़ान उपकरणों को उनका संचालन करने वाले लोगों से जोड़ती हैं। ट्रैकिंग स्टेशन यह पता लगाने में मदद करते हैं कि अंतरिक्ष यान कहां हैं और उनसे संपर्क बनाए रखते हैं। लैंडिंग और रिकवरी सुविधाएं यात्रा के अंतिम चरण में सहायक होती हैं। झांग ने कहा कि काम का दबाव काफी है और सीमित उड़ान परीक्षण कार्यक्रम के भीतर कई नई तकनीकों का सत्यापन अभी बाकी है।
लान्यू को उतरने के बाद फिर उड़ान भरनी होगी
2026 में चाइनीज स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी के दूसरे विशेष अंक में चालक दल वाले चंद्र मिशन पर 150 पृष्ठों में 14 शोधपत्र प्रकाशित हुए हैं। मार्च में इन शोधपत्रों की तकनीकी कवरेज में दिए गए विवरण से पता चलता है कि लान्यू को चंद्रमा पर उतरने, खतरों से बचने और अपने यात्रियों को वापस कक्षा में पहुंचाने के लिए कैसे तैयार किया जा रहा है।
इस डिजाइन में एक प्रणोदन मॉड्यूल है, जो वाईएफ-58-1 इंजन से चलता है, और एक चंद्र मॉड्यूल है, जिसे चार वाईएफ-36 इंजन चलाते हैं। चंद्र मॉड्यूल के उतरने से पहले प्रणोदन मॉड्यूल मुख्य कक्षीय चालों को संभालता है। बताए गए अंतरिक्ष यान का द्रव्यमान करीब 26,000 किलोग्राम है, जबकि चंद्र मॉड्यूल की प्रणोदन प्रणाली के लिए लगभग 6,000 किलोग्राम ईंधन है।
लान्यू के चार इंजनों को नियंत्रित लैंडिंग और बाद में फिर से ऊपर चढ़ने, दोनों में मदद करनी होगी। तकनीकी विवरण के अनुसार, सतह पर कुछ दिनों तक रुकने के बाद यान चंद्र कक्षा में लौटेगा और कुछ घंटों के भीतर मेंगझोउ से मिलेगा।
इंजन में खराबी आने पर यह क्रम बदल जाएगा। अगर उतरने से पहले प्रणोदन मॉड्यूल का इंजन खराब हो जाए, तो लान्यू कक्षा में ही रहेगा और लैंडिंग का प्रयास छोड़ देगा। अगर एक वाईएफ-36 इंजन खराब हो जाए, तो थ्रस्ट संतुलित रखने के लिए विपरीत दिशा वाला इंजन भी बंद कर दिया जाएगा। उड़ान के चरण के अनुसार, प्रतिक्रिया में कक्षा में लौटना, लैंडिंग टालना या वापस ऊपर चढ़ने में अधिक समय लेना शामिल हो सकता है।
गर्मी भी डिजाइन के लिए एक चिंता है। ईंधन टैंक चालक दल के हिस्से के नीचे और लैंडिंग इंजनों के पास है। तकनीकी विवरण में तापीय सुरक्षा और शीतलन के उपायों के साथ-साथ संचालन के दौरान इंजन का थ्रस्ट कम करने की क्षमता भी शामिल है।
उतरने के लिए सुरक्षित जगह तलाशना
लान्यू की नेविगेशन प्रणाली में कई तरह के सेंसर शामिल हैं। स्टार ट्रैकर दिशा का पता लगाने में मदद करते हैं, इनर्शियल मेजरमेंट यूनिट गति पर नजर रखती है और रडार दूरी तथा रफ्तार मापता है। सतह के पास पहुंचते समय ऑप्टिकल नेविगेशन और लेजर सेंसर यान को खतरों की पहचान करने में मदद करते हैं।
तकनीकी शोधपत्रों में पहले के चांग'ए चंद्र मिशनों और तियानवेन-1 मंगल लैंडर के उपकरणों के आधार पर अधिक स्वायत्त नियंत्रण और बैकअप क्षमता का ब्योरा दिया गया है। स्वायत्त नियंत्रण से यान खुद कुछ फैसले ले सकता है, जो उस समय उपयोगी होता है जब लैंडिंग के दौरान तेजी से बदलाव करने पड़ें।
तकनीकी विवरण में बताए गए मार्गदर्शन सिमुलेशन में सुरक्षित लक्ष्य के पास पहुंचने पर 100 मीटर के भीतर की सटीकता हासिल हुई। हुआलाई काउंटी की एक सुविधा में 50 मीटर x 35 मीटर x 42 मीटर के परीक्षण क्षेत्र का उपयोग किया गया, जहां उपकरणों की स्थिति निर्धारण संबंधी त्रुटि एक मीटर से कम रही। पहला आंकड़ा लक्ष्य की ओर उड़ान मार्गदर्शन के सिमुलेशन से जुड़ा है; दूसरा परीक्षण सुविधा के भीतर उपकरणों की स्थिति निर्धारण से।
अंतरिक्ष यात्री लान्यू सिम्युलेटर में भी प्रशिक्षण ले रहे हैं। इस काम से लैंडिंग सॉफ्टवेयर में सुधार और यान के व्यवहार के पूर्वानुमान में मदद मिलती है। लैंडर के भीतर अतिरिक्त ऑप्टिकल कनेक्शन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई कनेक्शन खराब होने पर भी कंप्यूटर और अन्य प्रणालियों के बीच जानकारी का आदान-प्रदान जारी रहे।
मेंगझोउ के आपातकालीन वापसी मार्ग
मेंगझोउ की सुरक्षा व्यवस्था प्रक्षेपण स्थल से लेकर चंद्र कक्षा तक की आपात स्थितियों को ध्यान में रखती है। अंतरिक्ष यान में एक एस्केप टावर है, जिसे चढ़ाई से पहले या उसके दौरान आपात स्थिति आने पर चालक दल के कैप्सूल को खतरे से दूर खींचने के लिए बनाया गया है।
तकनीकी विवरण में बताया गया है कि इंजीनियरों ने एकीकृत पलायन प्रणाली के बजाय टावर चुना, क्योंकि दबाव और कंपन के दौरान दूसरे विकल्प से सर्विस मॉड्यूल के ढांचे पर ज्यादा भार पड़ता। टावर वाला विन्यास सर्विस मॉड्यूल को वायुगतिकीय फेयरिंग के भीतर रखने की सुविधा भी देता है। फेयरिंग प्रक्षेपण के दौरान इस्तेमाल किया जाने वाला सुरक्षात्मक बाहरी आवरण है।
आठ विस्फोटक बोल्ट कैप्सूल को उसके सर्विस मॉड्यूल से जोड़ते हैं और छह एस्केप टावर को कैप्सूल से जोड़ते हैं। निर्देश मिलने पर ये हिस्सों को तेजी से अलग करने के लिए बनाए गए हैं, ताकि पलायन की प्रक्रिया आगे बढ़ सके।
अंतरिक्ष यान के चंद्रमा की ओर रवाना होने के बाद आपातकालीन योजनाएं बदल जाती हैं। पृथ्वी की कक्षा छोड़ने के बाद कुछ गंभीर समस्याओं की स्थिति में मेंगझोउ अपने मुख्य इंजन चालू किए बिना चंद्रमा के चारों ओर से गुजरकर पृथ्वी की ओर लौट सकता है। चंद्र कक्षा में खराबी आने पर वह घर की यात्रा शुरू करने के लिए चार या दो इंजनों का इस्तेमाल कर सकता है।
समस्या और प्रक्षेप पथ के आधार पर चंद्र कक्षा से वापसी में दो से पांच दिन लगने की बात कही गई है। छोटी यात्रा में भी आपात स्थिति शुरू होने के बाद कई दिनों तक पर्याप्त आपूर्ति और काम करने वाले उपकरण जरूरी हैं। उतरने से पहले लान्यू में होने वाली कुछ खराबियों के कारण चंद्र कक्षा में मिशन को लंबा खींचना पड़ सकता है और इसके लिए उन आपूर्तियों का इस्तेमाल करना पड़ सकता है जो मूल रूप से सतह पर खोज के लिए रखी गई थीं।
पृथ्वी पर वापसी और चालक दल की सुरक्षित निकासी
मेंगझोउ का वापसी कैप्सूल करीब 6,000 किलोग्राम का बताया गया है। हीट शील्ड अलग होने के बाद जमीन पर उतरते समय झटके कम करने के लिए इसमें छह एयरबैग का इस्तेमाल होगा। बताए गए लैंडिंग लक्ष्य के अनुसार, जमीन से टकराते समय ऊर्ध्वाधर गति आठ मीटर प्रति सेकंड से कम और क्षैतिज गति 15 मीटर प्रति सेकंड से कम होनी चाहिए।
कैप्सूल सीधा या करवट लेकर उतर सकता है। नियंत्रित तरीके से एयरबैग की हवा निकालने से क्षैतिज गति पर्याप्त कम होने पर उसे सीधा रखने में मदद मिलने की उम्मीद है। इससे वापसी प्रणाली में रिकवरी की योजना भी हीट सुरक्षा और उड़ान नियंत्रण जितनी ही अहम हो जाती है।
चालक दल वाले अंतरिक्ष यान के वापसी कैप्सूल के लिए समुद्र में खोज और रिकवरी अभियान पूरा किए जाने का भी विकास उपलब्धियों में उल्लेख है। संक्षिप्त विवरण में इसके संचालन से जुड़ी और जानकारी नहीं दी गई। रिकवरी का काम इसलिए अहम है, क्योंकि आपातकालीन वापसी मार्गों के कारण कैप्सूल निर्धारित लैंडिंग क्षेत्र से दूर उतर सकता है।
मेंगझोउ को मुख्य रूप से चंद्र मिशनों के लिए विकसित किया जा रहा है, लेकिन इसे पृथ्वी की निचली कक्षा में अंतरिक्ष स्टेशन मिशनों के लिए भी तैयार किया गया है। झांग ने कहा कि मेंगझोउ-1 मिशन को अंतरिक्ष स्टेशन उड़ानों के साथ सार्वजनिक मिशन लोगो आमंत्रण अभियान में शामिल किया जाएगा।
चंद्र कार्यक्रम के साथ अंतरिक्ष स्टेशन का संचालन जारी
सम्मेलन के विवरण के अनुसार, चीन का अंतरिक्ष स्टेशन नियमित संचालन के चरण में पहुंच गया है। कक्षा में 200 से अधिक वैज्ञानिक और अनुप्रयोग परियोजनाएं शुरू की गई हैं या लागू की जा रही हैं। इनमें अंतरिक्ष जीवन विज्ञान, सामग्री अनुसंधान, मूलभूत भौतिकी, तरल पदार्थों का व्यवहार और सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण की स्थितियों में दहन शामिल हैं।
सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण से आशय कक्षा में घूम रहे अंतरिक्ष यान पर महसूस होने वाली लगभग भारहीनता से है। वहां सामग्री, तरल पदार्थों और लपटों का अध्ययन करने से शोधकर्ता ऐसे व्यवहार देख सकते हैं जिन्हें पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण छिपा या बदल सकता है। सम्मेलन में अंतरिक्ष स्टेशन का संचालन, चंद्र विज्ञान और डिजिटल तकनीक को मानव अंतरिक्ष उड़ान के विकास पर एक ही चर्चा के हिस्से के तौर पर रखा गया।
विवरण में स्टेशन पर आने वाले पहले विदेशी अंतरिक्ष यात्री और लागत कम करने के लिए तैयार की जा रही कार्गो परिवहन प्रणाली का भी उल्लेख है। ये उस कार्यक्रम की अतिरिक्त जिम्मेदारियां हैं, जो एक कक्षीय प्रयोगशाला का संचालन करते हुए उससे कहीं दूर के गंतव्य की तैयारी कर रहा है।
चंद्र योजना अब तीन तरह के कामों को जोड़ती है: अंतरिक्ष यान बनाना, सामान्य और आपात स्थितियों में उनके व्यवहार का परीक्षण करना तथा उन्हें प्रक्षेपित करने, ट्रैक करने और वापस लाने वाली सुविधाएं तैयार करना। अगले बड़े पड़ाव सत्यापन उड़ानें और बिना चालक दल वाले अंतरिक्ष यान मिशन हैं, जिनसे यह योजना व्यापक उड़ान परीक्षण अभियान के अगले चरण में पहुंचेगी।
मुख्य बिंदु
- चीन अपनी पहली चालक दल वाली चंद्र लैंडिंग से पहले मेंगझोउ और लान्यू की बिना चालक दल वाली उड़ानों की योजना बना रहा है।
- दो लॉन्ग मार्च-10 रॉकेट दोनों अंतरिक्ष यानों को अलग-अलग प्रक्षेपित करेंगे, ताकि वे चंद्र कक्षा में डॉकिंग कर सकें।
- मेंगझोउ तीन अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्र कक्षा तक ले जाएगा। उनमें से दो लान्यू से सतह तक जाएंगे।
- सम्मेलन के विवरण में लैंडिंग का लक्ष्य 2030 से पहले रखा गया है; आधिकारिक प्रकाशित अपडेट में लक्ष्य 2030 तक बताया गया है।
- आधिकारिक अपडेट के अनुसार, रॉकेट, अंतरिक्ष यान, लैंडर, चंद्र सूट और रोवर के प्रारंभिक प्रोटोटाइप पूरे हो चुके हैं।
- आगे की उड़ान जांच, लैंडर के एकीकृत परीक्षण और अंतरिक्ष यान की सुरक्षा जांच कार्यक्रम के प्रमुख हिस्से बने हुए हैं।
- तकनीकी शोधपत्रों में इंजन खराब होने पर बैकअप प्रक्रियाओं, आपातकालीन वापसी यात्राओं और पृथ्वी पर मेंगझोउ की लैंडिंग के लिए एयरबैग का ब्योरा दिया गया है।






