चार दशकों की वृद्धि के बाद शोध के सामने नई चुनौती
बीजिंग में 20 अक्टूबर 2026 को जारी चाइना फंडामेंटल रिसर्च रिपोर्ट (2026) के अनुसार, 2024 में दुनिया के बुनियादी शोध पत्रों में चीन की हिस्सेदारी 32.6% रही, जो 1985 में 0.9% थी। बुनियादी शोध पर उसका खर्च 2018 और 2023 के बीच लगभग दोगुना होकर 16.5 अरब डॉलर से 31.9 अरब डॉलर हो गया।
विषय-सूची
- चार दशकों की वृद्धि के बाद शोध के सामने नई चुनौती
- शोध आकलन का दायरा
- वैज्ञानिक प्रकाशन का भौगोलिक वितरण कैसे बदला
- उद्धरण एक अलग तस्वीर क्यों दिखाते हैं
- अधिक वित्तपोषण और बड़ा शोध कार्यबल
- युवा शोधकर्ताओं को अधिक समर्थन
- अंतरराष्ट्रीय सहयोग अब भी अहम
- तत्काल लाभ न देने वाले शोध की रक्षा
- शोध पत्र गिनने से उनके मूल्य को समझने तक
- मुख्य बिंदु
रिपोर्ट चीन के प्रकाशनों में हिस्से और अंतरराष्ट्रीय उद्धरणों के जरिए उसकी पहुंच के बीच अंतर भी बताती है। 2024 में घरेलू उद्धरणों को शामिल करने पर चीन को दुनिया भर के 20.8% उद्धरण मिले। एक ही देश के भीतर से आए उद्धरण हटाने पर उसकी हिस्सेदारी 9.5% रही। अमेरिका के लिए ये आंकड़े क्रमशः 24.4% और 24.9% थे।
रिपोर्ट के अनुसार, चीन की अगली प्राथमिकता अपनी बढ़ती शोध क्षमता को मौलिक खोजें करने की अधिक मजबूत क्षमता में बदलना है। इसमें ऐसे शोध को अधिक समर्थन देने की अपील की गई है जिसमें कई साल लगते हैं और अनिश्चित विचारों की पड़ताल होती है। साथ ही, लोगों और साझा वैज्ञानिक संसाधनों में निवेश जारी रखने की बात कही गई है।
बुनियादी शोध, जिसे फंडामेंटल रिसर्च भी कहा जाता है, यह समझने की कोशिश करता है कि चीजें कैसे काम करती हैं। इसका तात्कालिक लक्ष्य ज्ञान हासिल करना होता है, जैसे किसी पदार्थ के गुणों की व्याख्या करना, न कि कोई तैयार उपकरण बनाना। इसके व्यावहारिक उपयोग बहुत बाद में सामने आ सकते हैं, इसलिए वित्तपोषण और मूल्यांकन से जुड़े फैसले खास तौर पर महत्वपूर्ण होते हैं।
शोध आकलन का दायरा
यह आकलन 24 प्रमुख देशों और यूरोपीय संघ में करीब 40 वर्षों के बदलावों की पड़ताल करता है। इसमें देशों और क्षेत्रों की कुल 25 प्रविष्टियां हैं। 20 से अधिक डेटा स्रोतों के आधार पर यह निवेश क्षमता, शोधकर्ताओं के विकास, वैज्ञानिक आउटपुट के प्रभाव और शोध को संचालित करने वाली संस्थाओं का विश्लेषण करता है।
एनएसएफसी-वुहान यूनिवर्सिटी ऑब्जर्वेटरी फॉर ग्लोबल फंडामेंटल रिसर्च ने चीन के नौ विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों के साथ मिलकर यह काम किया। चीन के राष्ट्रीय प्राकृतिक विज्ञान फाउंडेशन (एनएसएफसी) के मार्गदर्शन में वुहान विश्वविद्यालय ने रिपोर्ट का लोकार्पण किया। रिपोर्ट की समीक्षा 13 अंतरराष्ट्रीय और 39 घरेलू विशेषज्ञों ने की, यानी कुल 52 समीक्षकों ने।
वुहान विश्वविद्यालय के अध्यक्ष झांग पिंगवेन ने कहा कि इस परियोजना में दो सिद्धांत अपनाए गए: शोध प्रणालियों को समझने के लिए साधारण रैंकिंग से आगे देखना, और डेटा, तरीकों तथा सीमाओं को पारदर्शी बनाना। उन्होंने कहा कि देशों का शोध इतिहास, संस्थाएं और विकास के रास्ते अलग-अलग हैं और विज्ञान में उनका योगदान भी अलग-अलग तरीकों से आता है।
रिपोर्ट के साथ उसके डेटासेट और विश्लेषण के उपकरण एक आधिकारिक मंच पर उपलब्ध कराए गए हैं। इससे शोधकर्ताओं और नीति-निर्माताओं को आकलन के पीछे की सामग्री तक पहुंच मिलती है और वे देख सकते हैं कि तुलना किस तरह की गई।
वैज्ञानिक प्रकाशन का भौगोलिक वितरण कैसे बदला
1985 से 2024 के बीच बुनियादी शोध प्रकाशनों में चीन की हिस्सेदारी 31.7 प्रतिशत अंक बढ़ी। इसी अवधि में अमेरिका की हिस्सेदारी 39.9% से घटकर 18.9% और यूरोपीय संघ की 25.8% से घटकर 22.3% रह गई। भारत की हिस्सेदारी 2.8% से बढ़कर 7.3% हुई।
ये आंकड़े दिखाते हैं कि वैज्ञानिक ज्ञान का उत्पादन पहले से कहीं अधिक व्यापक भौगोलिक क्षेत्र में फैल गया है। रिपोर्ट के माप के अनुसार, 1985 में चीन का हिस्सा हर 100 में एक से भी कम शोध पत्रों का था। 2024 तक यह करीब हर तीन में एक हो गया। इसी अवधि में भारत की हिस्सेदारी दोगुने से अधिक हुई।
प्रकाशनों में हिस्सेदारी से पता चलता है कि दुनिया के कुल आउटपुट में किसी देश का कितना भाग है। अगर अन्य जगहों पर शोध तेजी से बढ़ता है, तो किसी देश की हिस्सेदारी घट सकती है, भले ही वहां शोध पत्रों की संख्या बढ़ती रहे। इसलिए ये आंकड़े प्रकाशन गतिविधि के बदलते वितरण को दिखाते हैं; हर देश में शोध पत्रों की संख्या में वृद्धि की गणना के लिए कुल प्रकाशनों की वास्तविक संख्या चाहिए।
आकलन के अनुसार, सामग्री विज्ञान, इंजीनियरिंग, ऊर्जा और पर्यावरण चीन की खास ताकतों में शामिल हैं। इन क्षेत्रों में पदार्थ और भौतिक प्रणालियों के बुनियादी व्यवहार से जुड़े सवाल व्यावहारिक जरूरतों से जुड़ते हैं, जिनमें सामग्री विकसित करना और ऊर्जा का उपयोग शामिल है।
उद्धरण एक अलग तस्वीर क्यों दिखाते हैं
2024 में चीन की 32.6% प्रकाशन हिस्सेदारी के साथ उसे दुनिया भर के कुल उद्धरणों में 20.8% मिले। जब कोई शोध पत्र किसी दूसरे शोध पत्र का संदर्भ देता है, तो उसे उद्धरण कहते हैं। इससे पता चलता है कि प्रकाशित शोध का इस्तेमाल आगे की वैज्ञानिक चर्चा और जांच में किस तरह हो रहा है।
घरेलू संदर्भों को शामिल करने पर अमेरिका को दुनिया भर के 24.4% उद्धरण मिले, जबकि चीन को 20.8%। घरेलू उद्धरण हटाने पर अमेरिका की हिस्सेदारी 24.9% और चीन की 9.5% रही। इस दूसरे माप के तहत अमेरिका की हिस्सेदारी चीन से करीब 2.6 गुना थी।
ये दोनों गणनाएं अलग-अलग सवालों के जवाब देती हैं। पहली में एक ही राष्ट्रीय शोध समुदाय के शोधकर्ताओं के संदर्भ भी शामिल हैं। दूसरी उन संदर्भों पर केंद्रित है जो राष्ट्रीय सीमाएं पार करते हैं और अंतरराष्ट्रीय पहुंच की अधिक विशिष्ट तस्वीर देती है।
चीन के बड़े प्रकाशन समुदाय के कारण देश के भीतर शोधकर्ताओं के पास वहां किए गए काम का संदर्भ देने के कई अवसर हैं। अंतरराष्ट्रीय उद्धरण तस्वीर का दूसरा पहलू दिखाते हैं: विदेशों में शोध का कितनी बार उपयोग होता है। दोनों माप देने से यह समझने में मदद मिलती है कि कोई देश प्रकाशनों की संख्या में आगे हो सकता है, जबकि दूसरे देश को अन्य देशों से अधिक उद्धरण मिल सकते हैं।
अधिक वित्तपोषण और बड़ा शोध कार्यबल
चीन का बुनियादी शोध पर खर्च 2018 से 2023 के बीच 15.4 अरब डॉलर बढ़कर 16.5 अरब डॉलर से 31.9 अरब डॉलर हो गया। इन आंकड़ों से गणना करने पर वृद्धि करीब 93% बैठती है, जिससे खर्च पहले के स्तर के लगभग दोगुने तक पहुंच गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, चीन का शोध कार्यबल 2010 में 12.1 लाख पूर्णकालिक समकक्ष शोधकर्ताओं से बढ़कर 2023 में 30 लाख हो गया, यानी करीब 148% की वृद्धि। 13 वर्षों में पूर्णकालिक समकक्ष शोधकर्ताओं की संख्या 17.9 लाख बढ़ी।
पूर्णकालिक समकक्ष लोगों की गिनती के बजाय काम के समय को मापने का तरीका है। शोध में अपना आधा समय लगाने वाले दो शोधकर्ताओं को मिलाकर एक पूर्णकालिक समकक्ष माना जाता है। इससे उन जगहों की शोध क्षमता की तुलना करने में मदद मिलती है जहां लोग शोध, शिक्षण और अन्य कामों के बीच अपना समय बांटते हैं।
विस्तार के प्रमुख पड़ाव इस तरह रहे:
- 1985: वैश्विक बुनियादी शोध प्रकाशनों में चीन की हिस्सेदारी 0.9% थी।
- 2010: चीन के शोध कार्यबल में 12.1 लाख पूर्णकालिक समकक्ष शामिल थे।
- 2018: बुनियादी शोध पर खर्च 16.5 अरब डॉलर पहुंचा।
- 2023: खर्च 31.9 अरब डॉलर और शोध कार्यबल 30 लाख पूर्णकालिक समकक्ष तक पहुंचा।
- 2024: प्रकाशनों में चीन की हिस्सेदारी 32.6% हुई और 1,30,000 से अधिक शोध पत्रों में अंतरराष्ट्रीय सह-लेखक शामिल थे।
- 20 अक्टूबर 2026: बीजिंग में रिपोर्ट का लोकार्पण हुआ।
युवा शोधकर्ताओं को अधिक समर्थन
एनएसएफसी ने करियर की शुरुआत में शोधकर्ताओं के लिए समर्थन बढ़ाया है। जिन शोधकर्ताओं का अकादमिक करियर 2000 में शुरू हुआ, उनमें करीब 50% की कम से कम एक शुरुआती प्रभावशाली शोध पत्रिका को फाउंडेशन से वित्तपोषण मिला था। 2019 में करियर शुरू करने वाले समूह में यह अनुपात करीब 80% था।
दोनों करियर समूहों के बीच यह करीब 30 प्रतिशत अंक की वृद्धि है। यह माप एक खास नतीजे को देखता है, यानी क्या शोधकर्ता का कम से कम एक योग्य प्रकाशन था; यह हर शोधकर्ता को दी गई धनराशि नहीं मापता।
रिपोर्ट के अनुसार, चीन के अग्रणी वैज्ञानिकों के समुदाय की अकादमिक आयु प्रोफाइल जापान, अमेरिका और यूरोपीय संघ की तुलना में कम उम्र की है। अकादमिक आयु शोध करियर के चरण को दर्शाती है, न कि केवल किसी व्यक्ति की उम्र को।
रिपोर्ट युवा शोधकर्ताओं में निवेश को चीन में बुनियादी शोध की निरंतर वृद्धि का एक कारक बताती है। विश्वविद्यालयों और वित्तपोषण संस्थाओं के लिए मौलिक खोज को समर्थन देने की इसकी सिफारिश का ध्यान उन परिस्थितियों पर है जिनमें ये शोधकर्ता काम करते हैं: क्या उनके पास कठिन सवालों पर काम करने के लिए समय और संसाधन हैं, जिनके जवाब मिलने में लंबा समय लग सकता है।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग अब भी अहम
चीन के शोधकर्ताओं ने 2024 में अंतरराष्ट्रीय सह-लेखकों के साथ 1,30,000 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित किए। ये प्रकाशन राष्ट्रीय सीमाओं के पार शोधकर्ताओं के बीच बड़े पैमाने पर हुए काम को दिखाते हैं, जो चीन की बढ़ती घरेलू वैज्ञानिक गतिविधियों के साथ-साथ जारी है।
अंतरराष्ट्रीय विज्ञान परिषद के निर्वाचित अध्यक्ष रॉबर्ट डाइकग्राफ ने चीन को वैश्विक वैज्ञानिक ज्ञान में लगातार महत्वपूर्ण योगदान देने वाला देश बताया। उन्होंने चीन के प्रकाशन आउटपुट, बढ़ते निवेश और वैज्ञानिकों की उभरती पीढ़ी का उल्लेख किया। उन्होंने खोजों के आदान-प्रदान के महत्व पर भी जोर दिया:
"ज्ञान ही एकमात्र ऐसा संसाधन है जो साझा करने पर बढ़ता है," उन्होंने कहा।
डाइकग्राफ ने कहा कि बड़ी खोजें अक्सर अप्रत्याशित होती हैं, उनके लाभ सामने आने में दशकों लग सकते हैं और उनका असर राष्ट्रीय सीमाओं से आगे तक जाता है। उन्होंने कहा कि कोई भी देश यह अनुमान नहीं लगा सकता कि अगली बड़ी खोज कहां होगी या उससे मिलने वाले हर लाभ को अपने तक सीमित कर सकता है।
देशों के लिए साथ काम करने की व्यावहारिक वजह बताते हुए डाइकग्राफ ने कहा:
इसलिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग केवल सद्भावना की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि हमारा साझा हित है।
तत्काल लाभ न देने वाले शोध की रक्षा
नेचर की प्रधान संपादक मैग्डालेना स्किपर ने कहा कि संपादक के रूप में उनके 25 वर्षों के अनुभव ने उन्हें चीन के प्रकाशनों, शोध समुदाय और वैश्विक ज्ञान में बढ़ते योगदान को देखने का अवसर दिया है। उन्होंने दुनिया भर में वैज्ञानिक गतिविधियों के अधिक व्यापक प्रसार का भी उल्लेख किया।
स्किपर ने चेताया कि कई जगहों पर ध्यान अब अनुप्रयुक्त विज्ञान और निवेश से तेजी से लाभ पाने की ओर जा रहा है। अनुप्रयुक्त शोध किसी निश्चित व्यावहारिक समस्या को हल करता है, जबकि बुनियादी शोध इस सवाल से शुरू होता है कि कोई चीज कैसे काम करती है। दोनों के महत्व को समझाते हुए उन्होंने कहा:
"अनुप्रयुक्त विज्ञान बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन वैज्ञानिक जिज्ञासा की बुनियाद में बुनियादी विज्ञान ही है," उन्होंने कहा।
अनिश्चित शोध को लगातार समर्थन देने की रिपोर्ट की अपील, त्वरित नतीजों के इस दबाव को संबोधित करती है। किसी अनजाने वैज्ञानिक सवाल की पड़ताल करने वाली परियोजना में यह जानने से पहले कई साल लग सकते हैं कि शोधकर्ताओं का तरीका सफल होगा या नहीं।
चीन का बढ़ता वित्तपोषण और बड़ा कार्यबल ऐसे सवालों पर काम करने की उसकी क्षमता बढ़ाते हैं। रिपोर्ट की सिफारिश है कि इस क्षमता को मौलिक काम और उसे सहारा देने वाली शोध प्रणाली की ओर लगाया जाए, न कि प्रकाशनों की संख्या को मुख्य लक्ष्य माना जाए।
शोध पत्र गिनने से उनके मूल्य को समझने तक
यह आकलन कई मापों को साथ रखता है, क्योंकि हर माप शोध गतिविधि के अलग पहलू को दिखाता है। वित्तपोषण प्रतिबद्ध संसाधनों को दर्शाता है। कार्यबल के आंकड़े उपलब्ध शोध समय बताते हैं। शोध पत्र प्रकाशित निष्कर्षों का रिकॉर्ड रखते हैं, जबकि उद्धरण यह पता लगाने में मदद करते हैं कि आगे के काम में उन निष्कर्षों का उपयोग कैसे हो रहा है।
प्रकाशनों के पैमाने और शोध संसाधनों के विस्तार के मामले में चीन के नतीजे सबसे मजबूत हैं। राष्ट्रीय सीमाएं पार करने वाले उद्धरणों में उसकी कम हिस्सेदारी उसके शोध की अंतरराष्ट्रीय पहुंच के एक अलग चरण की ओर संकेत करती है। इन आंकड़ों को साथ देखकर एक अकेली रैंकिंग से अधिक उपयोगी तस्वीर मिलती है।
रिपोर्ट वैज्ञानिक डेटा मंचों और संसाधन साझा करने में हुई प्रगति भी बताती है। शोधकर्ताओं को डेटा और विश्लेषण के उपकरण उपलब्ध कराना उसी दृष्टिकोण को आगे बढ़ाता है जिसका उल्लेख झांग ने आकलन के बारे में किया था: दूसरों को तरीकों की जांच करने, निष्कर्षों को परखने और साझा आधार पर आगे काम करने का अवसर देना।
इसलिए केंद्रीय नीतिगत सिफारिश स्पष्ट है। चीन को अपने संचित पैमाने को मौलिक खोज की अधिक मजबूत क्षमता में बदलना चाहिए और युवा शोधकर्ताओं तथा विफलता के बड़े जोखिम वाली पड़ताल को लगातार समर्थन देना चाहिए। रिपोर्ट जारी करते समय इन सिफारिशों को लागू करने के लिए नई वित्तपोषण प्रतिबद्धता या समयसीमा तय नहीं की गई।
मुख्य बिंदु
- वैश्विक बुनियादी शोध प्रकाशनों में चीन की हिस्सेदारी 1985 के 0.9% से बढ़कर 2024 में 32.6% हो गई।
- बुनियादी शोध पर खर्च 2018 के 16.5 अरब डॉलर से बढ़कर 2023 में 31.9 अरब डॉलर हो गया, यानी करीब 93% की वृद्धि।
- 2010 से 2023 के बीच चीन का शोध कार्यबल 12.1 लाख से बढ़कर 30 लाख पूर्णकालिक समकक्ष हो गया।
- 2024 में चीन को दुनिया भर के 20.8% उद्धरण मिले; घरेलू उद्धरण हटाने पर यह हिस्सेदारी 9.5% थी।
- 2024 में 1,30,000 से अधिक शोध पत्रों में अंतरराष्ट्रीय सह-लेखक शामिल थे।
- रिपोर्ट मौलिक खोज, शोध को लगातार समर्थन और साझा वैज्ञानिक संसाधनों पर अधिक ध्यान देने की अपील करती है।






