एक विशाल आकाशगंगा में जेट की चार पीढ़ियाँ
लगभग 42 लाख प्रकाश-वर्ष तक फैली एक आकाशगंगा ने अपने केंद्रीय अतिविशाल ब्लैक होल के आसपास गतिविधि के चार अलग-अलग दौरों के प्रमाण सुरक्षित रखे हैं। इससे खगोलविदों को इस ब्रह्मांडीय इंजन के बंद होने और फिर से चालू होने का असाधारण रूप से लंबा रिकॉर्ड मिला है।
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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (IISER), पुणे और नेशनल सेंटर फॉर रेडियो एस्ट्रोफिजिक्स (NCRA-TIFR) के शोधकर्ताओं ने S-आकार की आकाशगंगा J023721.13-010528.5 में चमकीली रेडियो विशेषताओं के चार जोड़े पहचाने। हर जोड़ा जेट की एक अलग पीढ़ी से जुड़ा है। ये ऊर्जावान कणों की शक्तिशाली धाराएँ हैं, जो ब्लैक होल के आसपास के क्षेत्र से निकलती हैं।
शोध दल के अनुसार, यह ऐसी चार गतिविधियों के प्रमाण दिखाने वाली पहली ज्ञात रेडियो आकाशगंगा है। खगोलविदों ने जिन हज़ारों रेडियो आकाशगंगाओं का अध्ययन किया है, उनमें से अधिकांश में जेट गतिविधि का एक बड़ा दौर दिखाई देता है। इससे पहले केवल छह आकाशगंगाओं में तीन दौरों के प्रमाण पहचाने गए थे।
अध्ययन का नेतृत्व IISER पुणे के पीएचडी छात्र पवन खडकेकर ने किया। उन्हें NCRA-TIFR के धरम वीर लाल और IISER पुणे के रमना अथ्रेया का मार्गदर्शन मिला। इसके निष्कर्ष 21 अक्टूबर, 2026 को द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में प्रकाशित बताए गए।
ब्लैक होल गतिविधि चक्र का क्या अर्थ है?
एक अतिविशाल ब्लैक होल का द्रव्यमान सूर्य से लाखों या अरबों गुना अधिक हो सकता है। उसके आसपास जमा पदार्थ एक गर्म, घूमती हुई धारा बना सकता है। इस आसपास के क्षेत्र में निकलने वाली ऊर्जा का कुछ हिस्सा ऐसे जेट चला सकता है, जो अपनी मूल आकाशगंगा के दृश्य विस्तार से बहुत दूर तक जाते हैं।
जब इस गतिविधि से जुड़ी संरचनाएँ रेडियो तरंगदैर्ध्य पर तेज़ी से चमकती हैं, तो खगोलविद उस आकाशगंगा को रेडियो आकाशगंगा कहते हैं। रेडियो दूरबीनें इस विकिरण को पकड़ती हैं और ऐसी विशेषताएँ दिखाती हैं, जो दृश्य प्रकाश में ली गई सामान्य तस्वीरों में छूट सकती हैं।
मद्धम पड़ने से पहले जेट लाखों वर्षों तक सक्रिय रह सकते हैं। बाद में फिर शुरू होने वाली गतिविधि एक नई जोड़ी को बाहर भेज सकती है, जबकि पुरानी संरचनाएँ अब भी अधिक दूर तक दिखाई देती हैं। इस तरह एक आकाशगंगा में गतिविधि की कई पीढ़ियों के निशान एक साथ रह सकते हैं, जैसे किसी भूभाग पर समय के साथ बने निशान अलग-अलग दौर की घटनाओं को दर्ज रखते हैं।
J023721.13-010528.5 में मुख्य खोज एक ही प्रणाली में चार पीढ़ियों की मौजूदगी है। इन दौरों के दौरान ब्लैक होल अपनी जगह बना रहता है; बदलाव उसके आसपास के पदार्थ से जुड़ी गतिविधि और उससे चलने वाले जेट में आता है।
शोध दल ने आकाशगंगा का इतिहास कैसे फिर से बनाया
खडकेकर और उनके सहयोगियों ने भारत के जायंट मीटरवेव रेडियो टेलीस्कोप (GMRT), अमेरिका के वेरी लार्ज ऐरे और दक्षिण अफ्रीका के MeerKAT टेलीस्कोप के प्रेक्षणों को मिलाकर अध्ययन किया। इन प्रेक्षणों से शोध दल आकाशगंगा की विस्तृत रेडियो संरचना की जाँच कर सका और अलग-अलग दौरों से जुड़ी विशेषताओं में अंतर कर पाया।
सबसे अहम प्रमाण हॉटस्पॉट के चार जोड़े थे। हॉटस्पॉट जेट से जुड़ा एक चमकीला क्षेत्र होता है, जो अक्सर उस जगह बनता है जहाँ तेज़ प्रवाह आसपास के पदार्थ को ऊर्जा देता है। ऐसे क्षेत्र खगोलविदों को यह पता लगाने में मदद करते हैं कि जेट ने कितनी दूर तक यात्रा की और अपने परिवेश के साथ कैसे संपर्क किया।
चार जोड़ों का अर्थ है चार संबद्ध समूहों में व्यवस्थित आठ चमकीले क्षेत्र। जोड़ों में बाँटना इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि जेट आम तौर पर केंद्रीय क्षेत्र से विपरीत दिशाओं में निकलते हैं। शोधकर्ताओं ने इन चार समूहों को एक ही लगातार चलने वाले दौर के बजाय अलग-अलग पीढ़ियों का प्रमाण माना।
लाल के आग्रह के बावजूद अथ्रेया को शुरू में यकीन नहीं था कि आकाशगंगा गतिविधि के चौथे चरण तक पहुँची है। उन्होंने कहा कि भरोसेमंद प्रमाण जुटाने में समय लगा। निष्कर्ष के लिए यह जाँच अहम थी: चौथी पीढ़ी की पहचान करने के लिए शोध दल को यह स्थापित करना था कि देखी गई संरचनाएँ आपस में कैसे जुड़ती हैं।
लाखों वर्षों में मापा गया इतिहास
हॉटस्पॉट की पीढ़ियों से जुड़ी अनुमानित आयु लगभग 60 लाख से 2.1 करोड़ वर्ष तक है। शोधकर्ताओं के अनुसार, गतिविधि का सबसे नया दौर कुछ लाख वर्ष पहले शुरू हुआ। ये अनुमान आकाशगंगा के रेडियो उत्सर्जन से फिर से बनाए गए इतिहास को बताते हैं, न कि ऐसे बदलावों को जिन्हें किसी इंसान के जीवनकाल में घटते देखा गया हो।
इसका मोटा क्रम इस प्रकार है:
- लगभग 2.1 करोड़ वर्ष पहले: देखी गई जेट पीढ़ियों से जुड़ी अनुमानित आयु-सीमा का पुराना सिरा।
- लगभग 60 लाख वर्ष पहले: इस अनुमानित आयु-सीमा का नया सिरा।
- कुछ लाख वर्ष पहले: गतिविधि के चौथे और सबसे हाल के दौर की अनुमानित शुरुआत।
- 21 अक्टूबर, 2026: द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में निष्कर्ष प्रकाशित होने की बताई गई तारीख।
इन आँकड़ों में बताई गई आयु-सीमा के पुराने और नए सिरों के बीच लगभग डेढ़ करोड़ वर्षों का अंतर है। इससे रिकॉर्ड की गहराई का अंदाज़ा मिलता है, हालाँकि शोधकर्ताओं ने हर बार गतिविधि फिर शुरू होने या उनके बीच के शांत अंतरालों का पूरा समयक्रम नहीं दिया है।
खगोलविद रेडियो संरचनाओं की भौतिक विशेषताओं और उनके विकास के मॉडलों का उपयोग करके उनकी आयु का अनुमान लगाते हैं। ऊर्जावान कण विकिरण छोड़ते हुए और यात्रा करते हुए बदलते हैं, जिससे रेडियो संकेत में सुराग छूटते हैं। इनसे मिलने वाली आयु अनुमानित होती है, इसलिए इस क्रम को लाखों वर्षों के पैमाने पर समझना चाहिए।
चार दौर इस आकाशगंगा को असामान्य क्यों बनाते हैं
J023721.13-010528.5 गतिविधि के ऐसे इतिहास में चौथा अध्याय जोड़ती है, जिसे खगोलविद तीन दौरों तक भी बहुत कम ही दर्ज कर पाए हैं। पहले पहचानी गई तीन दौरों वाली छह आकाशगंगाएँ बार-बार होने वाली गतिविधि के उदाहरण थीं; यह पिंड उस देखे गए क्रम में एक और पीढ़ी जोड़ता है।
आकाशगंगा का विशाल आकार इस रिकॉर्ड को और भी उल्लेखनीय बनाता है। प्रकाश-वर्ष वह दूरी है, जो प्रकाश एक वर्ष में तय करता है। इसलिए 42 लाख प्रकाश-वर्ष की दूरी पार करने में प्रकाश को लगभग 42 लाख वर्ष लगेंगे। यहाँ बताई गई माप आकाशगंगा और उसकी रेडियो संरचना के विशाल विस्तार को दर्शाती है।
इसका S-आकार भी देखी गई बनावट का एक हिस्सा है। अध्ययन में कई हॉटस्पॉट जोड़ों के साथ इस आकार की पहचान की गई है, लेकिन खोज के विवरण में इसके मुड़ाव का कारण स्थापित नहीं हुआ है। आकार की व्याख्या करना और गतिविधि चक्रों का पुनर्निर्माण करना आपस में जुड़े काम हैं, जिनमें रेडियो विशेषताओं की व्यवस्था पर ध्यान देना पड़ता है।
इसका वैज्ञानिक महत्व इस बात में है कि एक ही केंद्रीय इंजन के आसपास लगातार हुए दौरों के निशान सुरक्षित हैं। शोधकर्ता एक ही आकाशगंगा में इन पीढ़ियों की तुलना कर सकते हैं, जहाँ उनका मेज़बान और आसपास का परिवेश समान है। उन्हें पूरी तरह अलग-अलग पिंडों के बीच तुलना पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।
क्या जेट कमज़ोर या छोटे होते जा रहे हैं?
शोधकर्ताओं का कहना है कि हर अगले दौर में जेट की शक्ति घट सकती है, वे कम समय तक सक्रिय रह सकते हैं, या दोनों बदलाव हो सकते हैं। चार पीढ़ियाँ इस संभावना की जाँच के लिए केवल एक बार गतिविधि फिर शुरू होने वाली आकाशगंगा से अधिक अवसर देती हैं।
शक्ति और अवधि अलग-अलग बातें हैं। कम शक्तिशाली जेट ऊर्जा अधिक धीमी गति से पहुँचाता है। कम अवधि वाला दौर ऊर्जा कम समय तक पहुँचाता है। दोनों में से कोई भी बदलाव पीछे छूटी संरचनाओं को बदल सकता है। आसपास की गैस भी जेट के फैलने और मद्धम पड़ने के तरीके को प्रभावित कर सकती है।
इसलिए यह संभावना बार-बार होने वाले दौरों में ब्लैक होल से निकलने वाली ऊर्जा के बदलने से जुड़ी है। यह खोज शोधकर्ताओं को इस प्रवृत्ति की जाँच के लिए एक प्रणाली देती है, जहाँ तुलना के लिए पुराने अवशेष और अपेक्षाकृत नई संरचनाएँ मौजूद हैं।
गतिविधि बार-बार क्यों रुकती और फिर शुरू होती है, यह अब भी अज्ञात है। केंद्रीय क्षेत्र तक पहुँचने वाला पदार्थ जेट को शक्ति देने वाली प्रक्रिया के लिए ऊर्जा का स्रोत होता है, इसलिए इस आपूर्ति में बदलाव चक्र को समझने के लिए अहम है। इस आकाशगंगा में क्या हुआ, यह तय करने के लिए इसकी रेडियो संरचनाओं और परिवेश का और अध्ययन करना होगा।
तीन वेधशालाएँ, एक साझा रिकॉर्ड
इस खोज में तीन महाद्वीपों के उपकरणों से मिले प्रेक्षणों को एक साथ लाया गया। अलग-अलग रेडियो प्रेक्षणों से शोधकर्ता चमकीली, सघन विशेषताओं और बहुत धुँधले, विस्तृत उत्सर्जन, दोनों की जाँच कर सकते हैं। कई पीढ़ियों की गतिविधि वाली आकाशगंगा का इतिहास फिर से बनाने के लिए पुराने निशानों को ढूँढ़ना ज़रूरी है।
अध्ययन का नेतृत्व करने वाले IISER पुणे के डॉक्टरेट शोधार्थी खडकेकर ने बताया कि वेधशालाओं के आँकड़ों तक पहुँच ने इस पड़ताल में कैसे मदद की:
"कई रेडियो दूरबीनें दुनिया भर के शोधकर्ताओं को अपने आँकड़े निःशुल्क उपलब्ध कराती हैं। वेधशालाओं का यह सहयोगी दृष्टिकोण अधिक व्यापक पड़ताल और आँकड़ों के अधिक कुशल उपयोग को संभव बनाता है; अलग-अलग वैज्ञानिक एक ही प्रेक्षणों का उपयोग अलग-अलग विचारों की पड़ताल के लिए कर सकते हैं," खडकेकर ने कहा।
GMRT, वेरी लार्ज ऐरे और MeerKAT के प्रेक्षणों का संयोजन इस दृष्टिकोण का उदाहरण है। किसी एक पड़ताल के लिए जुटाए गए रेडियो प्रेक्षणों में दूसरी पड़ताल के लिए उपयोगी प्रमाण भी हो सकते हैं। इनमें ऐसी धुँधली संरचनाएँ शामिल हैं, जिनका महत्व दूसरे आँकड़ों के साथ देखने पर स्पष्ट होता है।
इसी तरह की आकाशगंगाओं पर आगे के अध्ययन यह पता लगाने में मदद कर सकते हैं कि बार-बार होने वाली गतिविधि कितनी आम है और क्या बाद के जेट अक्सर कमज़ोर या कम अवधि वाले होते हैं। फिलहाल, J023721.13-010528.5 जाँच के लिए चार पीढ़ियों वाला एक दुर्लभ उदाहरण देती है और ब्लैक होल की बार-बार होने वाली गतिविधि के दर्ज इतिहास को पहले ज्ञात उदाहरणों से आगे बढ़ाती है।
मुख्य बातें
- IISER पुणे और NCRA-TIFR के शोधकर्ताओं ने ब्लैक होल गतिविधि के चार अलग-अलग दौरों के प्रमाण वाली पहली ज्ञात रेडियो आकाशगंगा की पहचान की।
- S-आकार की आकाशगंगा J023721.13-010528.5 लगभग 42 लाख प्रकाश-वर्ष तक फैली है।
- हॉटस्पॉट के चार जोड़े जेट की अलग-अलग पीढ़ियों के निशान हैं। उनकी अनुमानित आयु 60 लाख से 2.1 करोड़ वर्ष तक है।
- सबसे नया दौर कुछ लाख वर्ष पहले शुरू हुआ लगता है।
- शोध दल ने भारत के GMRT, अमेरिका के वेरी लार्ज ऐरे और दक्षिण अफ्रीका के MeerKAT टेलीस्कोप के प्रेक्षणों को मिलाया।
- शोधकर्ताओं का कहना है कि बाद के जेट कमज़ोर हो सकते हैं या कम समय तक सक्रिय रह सकते हैं। बार-बार बंद होने और फिर शुरू होने का कारण अब भी अज्ञात है।






