खतरनाक मौसम के तीन दिनों में पर्वतीय यात्राएं रोकने की अपील
नेपाल के आव्रजन विभाग ने भारी बर्फबारी, बर्फीले तूफानों और हिमस्खलन के पूर्वानुमान का हवाला देते हुए ट्रेकर्स से 29 से 31 अक्टूबर तक ऊंचाई वाले पहाड़ी और हिमालयी क्षेत्रों की यात्राएं स्थगित करने की अपील की है। विभाग ने प्रतिबंधित ट्रेकिंग क्षेत्रों के लिए नए परमिट जारी करना भी रोक दिया है। प्रभावित पर्वतीय क्षेत्रों में पहले से मौजूद पर्यटकों से अपनी यात्राएं रोकने और सुरक्षित स्थानों पर ठहरने को कहा गया है।
विषय-सूची
- खतरनाक मौसम के तीन दिनों में पर्वतीय यात्राएं रोकने की अपील
- परमिट पर रोक किन क्षेत्रों में लागू है
- पहाड़ों में पहले से मौजूद ट्रेकर्स से सुरक्षित रहने की अपील
- चक्रवात से नेपाल में बारिश और बर्फबारी कैसे हो सकती है
- कब और कहां हालात बिगड़ सकते हैं
- मुस्तांग में सड़क और हवाई यातायात बाधित होने की चेतावनी
- कोराला की यात्रा के लिए अलग स्थानीय चेतावनी
- नदी किनारे रहने वाले समुदायों और किसानों के लिए भी खतरा
- मुख्य बातें
राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से इन तीन दिनों के दौरान खतरनाक हालात की चेतावनी के बाद विभाग के महानिदेशक सूर्य प्रसाद चापागाईं ने यह सूचना जारी की। नेपाली सूचनाओं में इन तारीखों को कार्तिक 12, 13 और 14 भी बताया गया है। विभाग ने ट्रेकिंग एजेंसियों, गाइडों, पर्यटकों और अन्य संबंधित पक्षों को निर्देशों का पालन करने को कहा है।
मुस्तांग अधिकारियों ने भी इसी अवधि के लिए अलग चेतावनियां जारी कीं। जिला प्रशासन कार्यालय ने लोगों से अधिक ऊंचाई पर ट्रेकिंग से बचने की अपील की, जबकि लोमन्थांग ग्रामीण नगरपालिका ने मौसम में सुधार होने तक कोराला सीमा चौकी की ओर यात्रा और वाहनों की आवाजाही से बचने की सलाह दी।
चेतावनियां पर्वतीय पगडंडियों तक सीमित नहीं हैं। नेपाल के कुछ हिस्सों में भारी बारिश, गरज-चमक, बिजली गिरने और तेज हवाओं से सड़क और घरेलू उड़ानों का संचालन प्रभावित हो सकता है। धान की कटाई कर रहे किसानों और नदियों या अस्थिर पहाड़ी ढलानों के पास रहने वाले लोगों से भी सावधानी बरतने को कहा गया है।
मौसम का खतरा बंगाल की खाड़ी के ऊपर चक्रवात अर्नब से जुड़ा है। नेपाल के जल तथा मौसम विज्ञान विभाग का अनुमान है कि तूफान से जुड़ा मौसम अन्य वायुमंडलीय प्रणालियों के साथ मिलकर बारिश और बर्फबारी की आशंका बढ़ा सकता है। यात्रियों के लिए तत्काल सलाह है: जोखिम वाले पर्वतीय सफर टालें, प्रस्तावित मार्ग के नियम जांचें और आगे बढ़ने से पहले स्थानीय निर्देशों का पालन करें।
परमिट पर रोक किन क्षेत्रों में लागू है
आव्रजन विभाग का परमिट संबंधी कदम ऊंचाई वाले पहाड़ी और हिमालयी क्षेत्रों के निर्धारित प्रतिबंधित इलाकों पर लागू है। विभाग विदेशी नागरिकों को ये ट्रेकिंग परमिट जारी करता है। सुरक्षा संबंधी इसकी व्यापक अपील में लोगों से पूर्वानुमानित खतरों की आशंका वाले पर्वतीय इलाकों की यात्राएं स्थगित करने को कहा गया है।
यात्रा योजनाएं बदलते समय यह अंतर महत्वपूर्ण है: परमिट पर रोक प्रतिबंधित ट्रेकिंग क्षेत्रों के लिए है, जबकि मौसम संबंधी सलाह अधिक ऊंचाई वाले व्यापक पर्यटन स्थलों पर लागू होती है। यात्रियों को यह पुष्टि करनी होगी कि उनके मार्ग के लिए प्रतिबंधित क्षेत्र का परमिट जरूरी है या नहीं और स्थानीय अधिकारियों ने कोई अतिरिक्त निर्देश जारी किए हैं या नहीं।
यह सूचना तत्काल प्रभाव से लागू हुई, और ट्रेकिंग रोकने की अवधि 29–31 अक्टूबर बताई गई है। जिन लोगों के पास पहले से परमिट हैं, उनसे भी इन दिनों ट्रेकिंग न करने को कहा गया है। किसी क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति होने से मौसम संबंधी सलाह का पालन करने की जरूरत खत्म नहीं होती।
चापागाईं की सूचना में यह भी कहा गया है कि पर्वतीय यात्राएं तब तक स्थगित रहेंगी, जब तक किसी आधिकारिक घोषणा में खतरा टलने की बात न कही जाए। दोबारा यात्रा शुरू करने का कोई निश्चित समय नहीं दिया गया है। इसलिए 31 अक्टूबर खत्म होने को यात्रा फिर शुरू करने की अनुमति मानने से पहले एजेंसियों और यात्रियों को अद्यतन सूचना का इंतजार करना चाहिए।
पहाड़ों में पहले से मौजूद ट्रेकर्स से सुरक्षित रहने की अपील
आव्रजन विभाग ने उन पर्यटकों को भी संबोधित किया है जिन्होंने यात्रा शुरू कर दी है और उन्हें भी जो निकलने की तैयारी कर रहे हैं। विभाग के बयान में प्रभावित इलाकों में मौजूद लोगों से ट्रेक रोकने और सुरक्षित स्थानों पर ठहरने को कहा गया:
जो लोग ट्रेकिंग के लिए पहले ही निकल चुके हैं, उनसे सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की जाती है,
विभाग की सूचना में पर्यटकों से अनावश्यक रूप से इधर-उधर जाने से बचने और सुरक्षित जगहों या आश्रयों में ठहरने को कहा गया है। पर्वतीय मार्ग पर पहले से मौजूद समूहों को तय कार्यक्रम के बजाय स्थानीय अधिकारियों और गाइडों के तत्काल सुरक्षा निर्देशों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
ट्रेकिंग एजेंसियों और गाइडों को सूचना का पालन करने और दूसरों से भी इसका पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं। उनकी जिम्मेदारियों में ग्राहकों को यात्रा स्थगित होने की जानकारी देना और चेतावनी की अवधि में प्रभावित क्षेत्रों में जाने वाली यात्राओं में बदलाव करना शामिल है।
चक्रवात से नेपाल में बारिश और बर्फबारी कैसे हो सकती है
बंगाल की खाड़ी के ऊपर चक्रवात अर्नब तेज हो रहा है और भारत के आंध्र प्रदेश तट की ओर बढ़ रहा है। नेपाल के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने कहा कि नेपाल में इसके संभावित प्रभाव शुरू होने से पहले भारत में इसके तट से टकराने का अनुमान था। नेपाल में प्रभाव गुरुवार रात से शुरू होने की आशंका है।
जल तथा मौसम विज्ञान विभाग ने कहा कि चक्रवात से जुड़ी नमी और मौसम प्रणालियां पश्चिमी हवाओं तथा वायुमंडल की ऊंचाई पर मौजूद एक अन्य मौसम प्रणाली के साथ मिल सकती हैं। पश्चिमी हवाएं पश्चिम से पूर्व की ओर चलती हैं। इन प्रणालियों के मिलने से निचले इलाकों में बारिश और अधिक ठंडे, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी हो सकती है।
मौसम विज्ञानी बिभूति पोखरेल ने कहा कि बंगाल की खाड़ी से उठी प्रणाली नेपाल पहुंचने से पहले कमजोर हो सकती है। बारिश की मात्रा इसकी गति, ताकत और दूसरी मौसम प्रणालियों के साथ इसकी परस्पर क्रिया पर निर्भर करेगी।
इसलिए पूर्वानुमान चक्रवात के व्यापक मौसमी प्रभावों से जुड़ा है, जिनके खतरे स्थान और ऊंचाई के अनुसार अलग-अलग होंगे। पहाड़ों में भारी बर्फबारी से पगडंडियों और दर्रों से गुजरना मुश्किल हो सकता है। बर्फीले तूफानों से दृश्यता घट सकती है, जबकि हिमस्खलन में बर्फ तेजी से ढलान से नीचे खिसकती है।
कब और कहां हालात बिगड़ सकते हैं
जल तथा मौसम विज्ञान विभाग ने गुरुवार रात से बारिश और बर्फबारी की आशंका बढ़ने का पूर्वानुमान दिया है। इसके बाद शुक्रवार और शनिवार को कुछ जगहों पर भारी बारिश या बर्फबारी हो सकती है। आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने 29–31 अक्टूबर की अवधि में सावधानी बरतने को कहा है।
चेतावनियों के क्रम में यात्रियों और स्थानीय लोगों के लिए ध्यान रखने के कई समय दिए गए हैं:
- 29 अक्टूबर से पहले: आव्रजन विभाग की सूचना लागू हो जाती है और एजेंसियों तथा यात्रियों से प्रभावित यात्राएं स्थगित करने को कहा जाता है।
- 29–31 अक्टूबर, जिसे कार्तिक 12–14 भी बताया गया है: ट्रेकिंग रोकने और प्रतिबंधित क्षेत्रों के परमिट पर रोक की अवधि तीन दिन है।
- गुरुवार रात से: बारिश और बर्फबारी की आशंका बढ़ने की उम्मीद है।
- शुक्रवार और शनिवार: कुछ जगहों पर भारी बारिश या बर्फबारी, गरज-चमक और बिजली गिरने की घटनाएं हो सकती हैं।
- यात्रा फिर शुरू करने से पहले: यात्रियों को अद्यतन आधिकारिक सूचनाएं और स्थानीय हालात जांचने चाहिए।
कोशी, मधेश, बागमती, गंडकी और लुंबिनी प्रदेशों के कई हिस्सों में बारिश हो सकती है। कुछ स्थानों पर भारी बारिश, गरज-चमक और बिजली गिरने की आशंका है। कर्णाली और सुदूरपश्चिम के कुछ हिस्सों में भी बारिश और बर्फबारी का पूर्वानुमान है।
इन प्रदेशों में खतरे अलग-अलग होंगे। नम पहाड़ी ढलान से गुजरने वाली सड़क पर भूस्खलन का खतरा हो सकता है, जबकि काफी ऊंचाई पर स्थित पगडंडी पर भारी बर्फबारी और हिमस्खलन का जोखिम हो सकता है। यात्रियों को अपने वास्तविक गंतव्य और वहां पहुंचने के मार्ग की जानकारी जुटानी चाहिए, जिसमें रास्ते में इस्तेमाल होने वाली सड़कें या उड़ानें भी शामिल हैं।
मुस्तांग में सड़क और हवाई यातायात बाधित होने की चेतावनी
मुस्तांग के मुख्य जिला अधिकारी परशुराम पोखरेल ने कहा कि तापमान में गिरावट, भूस्खलन और खराब मौसम से सड़क और हवाई परिवहन, दोनों प्रभावित हो सकते हैं। जिला प्रशासन कार्यालय की चेतावनी में 29 से 31 अक्टूबर तक अधिक ऊंचाई पर ट्रेकिंग से बचने को कहा गया है।
जिले की सूचना में गंडकी प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में गरज, बिजली और तेज हवाओं के साथ मध्यम से भारी बारिश के पूर्वानुमान का हवाला दिया गया। ऊंचाई वाले पहाड़ी और हिमालयी क्षेत्रों में भारी बर्फबारी और हिमस्खलन हो सकते हैं।
सड़क और उड़ानों में व्यवधान से केवल ट्रेकिंग ही नहीं, दूसरी गतिविधियां भी प्रभावित हो सकती हैं। पर्यटकों को यात्रा शुरू करने की जगह तक पहुंचने या सफर के बाद लौटने में परेशानी हो सकती है, जबकि स्थानीय लोगों और कारोबारियों की आवाजाही तथा सामान की ढुलाई बाधित हो सकती है। इसलिए पैदल यात्रा का कार्यक्रम बदलते समय आगे के परिवहन की स्थिति भी जांचनी होगी।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने अलग से लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी। यात्रियों से निकलने से पहले संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने को कहा गया, क्योंकि सड़क संपर्क और घरेलू उड़ानों का संचालन मौसम पर निर्भर करेगा।
कोराला की यात्रा के लिए अलग स्थानीय चेतावनी
लोमन्थांग ग्रामीण नगरपालिका ने कोराला सीमा चौकी और आसपास के क्षेत्रों के बारे में विशेष अपील जारी की। अध्यक्ष तासी नरबू गुरुङ ने पूर्वानुमानित हालात के कारण परिवहन संचालकों, चालकों, व्यापारियों और पर्यटकों से कोराला की ओर यात्रा न करने को कहा।
नगरपालिका ने कई परस्पर जुड़े जोखिम बताए: बर्फबारी से सड़कें फिसलन भरी हो सकती हैं, वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा है और जमा बर्फ रास्ता बंद कर सकती है। उसकी सलाह है कि हालात सुधरने तक कोराला की ओर यात्रा और वाहनों की आवाजाही रोक दी जाए।
यह स्थानीय निर्देश वाहनों से यात्रा करने वाले लोगों और पर्यटन के लिए वहां जाने वालों, दोनों पर लागू होता है। सीमा की ओर जाने वाले व्यापारियों और चालकों को भी यही रास्ता संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं, यदि बर्फ से सड़क असुरक्षित या अवरुद्ध हो जाए।
कोराला संबंधी चेतावनी में फिर से आवाजाही शुरू करने का कोई निश्चित समय नहीं दिया गया है; इसे मौसम में सुधार से जोड़ा गया है। वहां जाने की योजना बना रहे लोगों को रवाना होने से पहले नगरपालिका के ताजा निर्देशों के साथ राष्ट्रीय मौसम और यात्रा संबंधी सूचनाएं भी जांचनी चाहिए।
नदी किनारे रहने वाले समुदायों और किसानों के लिए भी खतरा
नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण ने चेताया कि खराब मौसम से परिवहन के साथ-साथ रोजमर्रा की गतिविधियां भी बाधित हो सकती हैं। भारी बारिश से नदियों और जलधाराओं का जलस्तर बढ़ सकता है और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन की आशंका बढ़ सकती है।
प्राधिकरण ने लोगों से खतरनाक जगहों से दूर रहने की अपील की, खास तौर पर उन नदी किनारों से जहां बाढ़ का खतरा हो सकता है। उसके बयान में यह निर्देश दिया गया:
लोगों को अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों में ठहरने से बचना चाहिए, खासकर उन नदी किनारों पर जहां संभावित बाढ़ का असर हो सकता है,
किसानों के लिए अलग चिंता है, क्योंकि बारिश का पूर्वानुमान धान की कटाई के समय के साथ मेल खाता है। पकी फसल और बाहर सूखने के लिए रखा धान बारिश से खराब हो सकता है। मौसम संबंधी सलाह में किसानों से अपनी फसलों की रक्षा करने और जहां संभव हो, बारिश शुरू होने से पहले कृषि उपज को सुरक्षित भंडारण में रखने को कहा गया है।
इन संयुक्त चेतावनियों के अनुसार अलग-अलग जगहों पर अलग कदम उठाने की जरूरत है: पर्वतीय पर्यटकों के लिए सुरक्षित आश्रय और यात्रा स्थगित करना, जोखिम वाली सड़कों पर अनावश्यक यात्राएं कम करना, नदियों और अस्थिर ढलानों के पास सावधानी बरतना तथा कटाई की गई फसल की रक्षा करना। आगे के फैसलों में जल तथा मौसम विज्ञान विभाग के अद्यतन पूर्वानुमान और आव्रजन, आपदा प्रबंधन तथा स्थानीय अधिकारियों के निर्देश मार्गदर्शन करेंगे।
मुख्य बातें
- नेपाल ने 29 से 31 अक्टूबर तक ऊंचाई वाले पहाड़ी और हिमालयी क्षेत्रों में ट्रेकिंग रोकने की अपील की है।
- प्रतिबंधित ट्रेकिंग क्षेत्रों के लिए नए परमिट जारी करना रोक दिया गया है और मौजूदा परमिट धारकों से भी यात्राएं रोकने को कहा गया है।
- प्रभावित क्षेत्रों में पहले से मौजूद ट्रेकर्स को सुरक्षित स्थानों पर ठहरना और स्थानीय निर्देशों का पालन करना चाहिए।
- पूर्वानुमानित खतरों में भारी बर्फबारी, बर्फीले तूफान, हिमस्खलन, भारी बारिश, बिजली गिरना और तेज हवाएं शामिल हैं।
- मुस्तांग ने सड़क और उड़ान सेवाओं में व्यवधान की चेतावनी दी है; लोमन्थांग ने हालात सुधरने तक कोराला की ओर यात्रा न करने की सलाह दी है।
- अधिकारियों ने नदियों का जलस्तर बढ़ने, भूस्खलन और कटाई या भंडारण की प्रतीक्षा कर रहे धान को नुकसान पहुंचने की भी चेतावनी दी है।
- यात्रा योजनाओं में अद्यतन आधिकारिक सूचनाओं का पालन करना चाहिए, जिसमें पर्वतीय मौसम का खतरा टलने की कोई घोषणा भी शामिल है।






