5,184 पिक्सल और स्पर्श नियंत्रण वाली आस्तीन
नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर (NUS) के शोधकर्ताओं ने एक कपड़े की आस्तीन में 54 इलेक्ट्रॉनिक रेशे बुने हैं। इससे रंगीन टचस्क्रीन तैयार हुई है, जिस पर वीडियो चलाया जा सकता है, कैलकुलेटर इस्तेमाल किया जा सकता है और शरीर का तापमान देखा जा सकता है। हर रेशे में 96 छोटे प्रकाश उत्सर्जक डायोड हैं, जिससे कपड़े की स्क्रीन में 5,184 पिक्सल हैं। इसकी संवेदक परत उंगली से दबाने पर प्रतिक्रिया देती है।
विषय-सूची
- 5,184 पिक्सल और स्पर्श नियंत्रण वाली आस्तीन
- इलेक्ट्रॉनिक्स धागे के भीतर
- हजारों चिप एक रेशे में कैसे समाते हैं
- स्क्रीन पर क्या दिख सकता है
- कैलकुलेटर, कंपास और आवाज से नियंत्रण
- धुलाई और मोड़ने के परीक्षणों में क्या हुआ?
- स्वास्थ्य सेवा पर ध्यान क्यों
- बेहतर डिस्प्ले और सामान्य कपड़ा मशीनें
- काम करने वाली आस्तीन से बाजार में मिलने वाले कपड़ों तक
- मुख्य बिंदु
इस प्रोटोटाइप में 168 मिलीमीटर गुणा 105 मिलीमीटर का डिस्प्ले, माइक्रोफोन, स्पीकर और सेंसर शामिल हैं। विश्वविद्यालय के अनुसार, डिटर्जेंट के साथ मशीन में 50 बार धोने और केवल 5 मिलीमीटर की त्रिज्या पर 1,000 बार मोड़ने के बाद भी इसकी रोशनी और स्पर्श प्रतिक्रिया लगभग अपरिवर्तित रही।
NUS का कहना है कि यह किसी कपड़े में बनी दुनिया की पहली टचस्क्रीन है। अपनी शोध घोषणा में विश्वविद्यालय ने बताया कि टीम ने अपने निष्कर्ष 21 अक्टूबर 2026 को Nature में प्रकाशित किए। NUS के कॉलेज ऑफ डिजाइन एंड इंजीनियरिंग के सामग्री विज्ञान एवं इंजीनियरिंग विभाग के सहायक प्रोफेसर तुराल खुदियेव ने इस काम का नेतृत्व किया।
इलेक्ट्रॉनिक्स धागे के भीतर
आस्तीन की स्क्रीन ऐसे रेशों से बनी है जिनमें प्रकाश पैदा करने वाले घटक और स्पर्श सेंसर, दोनों मौजूद हैं। हर बहुपरत धागा लगभग 1 मिलीमीटर मोटा है। शोधकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने 10 मीटर लंबा धागा बनाया। संख्या 54 आस्तीन में इस्तेमाल पिक्सल वाले रेशों की है, उनकी मोटाई की नहीं।
खुदियेव ने कहा कि यह प्रगति ग्राफिकल यूजर इंटरफेस के मूल घटकों को रेशे के रूप में बनाने पर निर्भर थी। ग्राफिकल यूजर इंटरफेस उन दृश्य नियंत्रणों को कहते हैं जिनके जरिए लोग किसी डिवाइस का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने बताया कि शोधकर्ताओं ने पतले धागे के साथ बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक घटक कैसे जोड़े:
हमने एक नई इंटरकनेक्शन संरचना के जरिए इस सीमा को पार किया। इससे हजारों सूक्ष्म इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को एक रेशे के साथ जोड़ा और एकीकृत किया जा सकता है।
इससे डिस्प्ले और उसके नियंत्रण कपड़े की सामग्री में ही समा जाते हैं। पहनने वाला जानकारी देख सकता है और उसी कपड़े की सतह को दबाकर उससे संवाद कर सकता है।
हजारों चिप एक रेशे में कैसे समाते हैं
शोधकर्ताओं ने पहले छोटे, इंसुलेटेड तारों के साथ विद्युत संपर्क बनाने का एक प्रोग्राम करने योग्य तरीका विकसित किया। लेजर तारों के चुने हुए बिंदुओं पर उनकी परत हटाता है, जिससे अलग-अलग माइक्रोचिप जोड़ने की जगह बनती है।
इसके बाद पिघले हुए सोल्डर को उन खुली जगहों तक पहुंचाया जाता है। सोल्डर वह धातु है जिसका इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक घटकों को जोड़ने में होता है। तरल सोल्डर सतह पर किस तरह फैलेगा, इसे नियंत्रित करके टीम उसे तय बिंदुओं पर जोड़ती है। इस तरीके से 20,000 से अधिक विद्युत संपर्कों के जरिए 5,000 से ज्यादा चिप जोड़ी गईं।
इसके बाद तापीय ड्रॉइंग प्रक्रिया से जुड़ी हुई डिजिटल एलईडी पट्टी को बहुपरत रेशे में समाहित किया जाता है। इससे ऐसा धागा बनता है जिसकी अलग-अलग परतें लंबाई में साथ-साथ व्यवस्थित होकर रोशनी दिखाती और स्पर्श पहचानती हैं।
स्पर्श-संवेदी परत एलईडी के नीचे होती है। रेशे को दबाने पर विद्युत परिपथ पूरा होता है और उससे पैदा संकेत बताता है कि उंगली कहां लगी। इसके बाद सिस्टम निकटतम पिक्सल को रोशन कर सकता है। सीधे शब्दों में कहें तो धागा जानकारी दिखाता भी है और यह भी पहचानता है कि किसी ने उसे दबाया है।
स्क्रीन पर क्या दिख सकता है
आस्तीन का रिजॉल्यूशन 96 गुणा 54 पिक्सल है और यह प्रति सेकंड 30 बार रिफ्रेश होती है। पिक्सल उन छोटे बिंदुओं में से एक है जिनसे मिलकर तस्वीर बनती है। रिफ्रेश दर बताती है कि डिस्प्ले कितनी बार अपडेट होता है। NUS के अनुसार, इसमें 8-बिट रंग गहराई है, जो बताती है कि रंगों की जानकारी किस तरह दर्शाई जाती है।
प्रोटोटाइप तस्वीरें दिखा सकता है और प्रति सेकंड 30 फ्रेम की दर से वीडियो चला सकता है। वीडियो के साथ समकालिक ऑडियो होने पर यह दर 25 फ्रेम प्रति सेकंड है। यह ब्लूटूथ से तस्वीरें भी प्राप्त कर सकता है, जिससे कोई अन्य डिवाइस कपड़े पर वायरलेस तरीके से दृश्य सामग्री भेज सकता है।
इस स्क्रीन में आधुनिक स्मार्टफोन की तुलना में बहुत कम पिक्सल हैं, इसलिए तस्वीरों, टेक्स्ट और वीडियो में बारीक विवरण सीमित हैं। फिलहाल इसकी खासियत यह दिखाना है कि कपड़े में रंगीन डिस्प्ले और स्पर्श नियंत्रण साथ हो सकते हैं और कपड़ा पहनने लायक लचीला भी रह सकता है।
डिस्प्ले के 54 रेशों में से हर एक का अपना नियंत्रण चैनल है। अगर किसी एक लाइन में खराबी आती है, तो पास की लाइनें काम करती रह सकती हैं। सिस्टम एक ही समय में कई स्पर्श भी दर्ज कर सकता है, जिससे यह उस कपड़े के नियंत्रण से ज्यादा लचीला बनता है जो केवल एक बार दबाने की पहचान करता है।
कैलकुलेटर, कंपास और आवाज से नियंत्रण
अतिरिक्त इलेक्ट्रॉनिक रेशे आस्तीन को तस्वीरें दिखाने के अलावा भी कई काम करने में सक्षम बनाते हैं। उनमें माइक्रोफोन, स्पीकर और गति, चुंबकीय उत्तर दिशा, तापमान तथा आसपास की रोशनी का स्तर पहचानने वाले सेंसर हैं।
ये घटक मिलकर प्रोटोटाइप को कैलकुलेटर चलाने, फोटो गैलरी दिखाने, कंपास की तरह काम करने और आवाज के आदेशों पर प्रतिक्रिया देने देते हैं। गति और रोशनी के सेंसर स्क्रीन को अपने आप घुमाने और उसकी चमक समायोजित करने में भी मदद करते हैं।
ये काम शुरुआती स्मार्टफोन के कुछ फीचरों जैसे हैं, लेकिन यहां वे किसी कठोर पैनल में एक जगह केंद्रित होने के बजाय धागों में फैले हैं। पहनने वाला आस्तीन पर ही दिशा देख सकता है, मिली हुई तस्वीर खोल सकता है या कोई साधारण नियंत्रण इस्तेमाल कर सकता है।
तापमान की जांच आस्तीन के डिस्प्ले तक सीमित नहीं है। तापमान मापने वाले रेशे को बांह के नीचे रखने पर कपड़ा शरीर का तापमान पढ़कर स्क्रीन पर दिखा सकता है। इस तरह सेंसर और डिस्प्ले कपड़े के अलग-अलग हिस्सों में होते हुए भी एक साथ काम कर सकते हैं।
धुलाई और मोड़ने के परीक्षणों में क्या हुआ?
कपड़े को सामान्य वॉशिंग मशीन में डिटर्जेंट के साथ 50 बार धोया गया। NUS के अनुसार, इसके बाद भी रोशनी और स्पर्श प्रतिक्रिया लगभग अपरिवर्तित रही। इन दोनों मापों से पता चलता है कि डिस्प्ले रोशनी पैदा करता है या नहीं और उपयोगकर्ता के इनपुट को पहचानता है या नहीं।
शोधकर्ताओं ने कपड़े को 5 मिलीमीटर की त्रिज्या पर 1,000 बार मोड़कर भी परखा। उन्हें डिस्प्ले और स्पर्श के प्रदर्शन में बहुत कम बदलाव मिला। मोड़ने की क्षमता अहम है, क्योंकि हाथ बढ़ाने, बांह घुमाने या कपड़ा तह करने पर आस्तीन बार-बार मुड़ती है।
NUS का कहना है कि तैयार डिस्प्ले में हवा का आवागमन सूती कपड़े, पॉलिएस्टर और डेनिम जितना है। हवा और नमी को कपड़े से गुजरने देने वाली इस विशेषता से समझ आता है कि इलेक्ट्रॉनिक्स से भरा कपड़ा भी पहनने में आरामदायक क्यों हो सकता है।
विश्वविद्यालय का यह भी कहना है कि त्वचा के संपर्क के लिए तय सुरक्षा सीमाओं के भीतर ही डिस्प्ले काम करता है। धुलाई, मोड़ने, हवा के आवागमन और सुरक्षा के ये नतीजे रोजमर्रा के कपड़ों की कई व्यावहारिक जरूरतों को संबोधित करते हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स को काम करने लायक बनाने की चुनौती इससे अलग है।
स्वास्थ्य सेवा पर ध्यान क्यों
खुदियेव ने सेंसर, डिस्प्ले और नियंत्रण वाले कपड़ों के लिए स्वास्थ्य सेवा को एक संभावनाशील उपयोग बताया। प्रोटोटाइप में पहले से ही शरीर के तापमान की रीडिंग लेने और उसे सीधे कपड़े पर दिखाने की सुविधा है।
उन्होंने एक व्यापक संभावना का जिक्र किया, जिसमें कपड़ा शरीर से जुड़ी जानकारी जुटाए और उसे कपड़े के जरिए उपयोगकर्ता तक पहुंचाए। शरीर के कामकाज से जुड़े मापों को शारीरिक जानकारी कहा जाता है:
कपड़े में लगे रेशे-आधारित सेंसर लगातार शारीरिक जानकारी जुटा सकते हैं और पहनने वाले को कपड़ों के जरिए ही उस जानकारी तक पहुंचने और उससे संवाद करने की सुविधा दे सकते हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के साथ मिलकर यह व्यक्तिगत स्वास्थ्य निगरानी, प्रतिक्रिया और सहायता संभव कर सकता है।
इसका व्यावहारिक लाभ माप और उस तक पहुंच के बीच का जुड़ाव है। कपड़े के किसी दूसरे हिस्से में लगा सेंसर रीडिंग जुटा सकता है, जबकि आस्तीन उसे देखने और स्पर्श सतह के जरिए जानकारी चुनने की जगह दे सकती है।
लगातार निगरानी, व्यक्तिगत सहायता और स्वास्थ्य से जुड़े अन्य काम भविष्य के विकास लक्ष्य हैं। अब तक बताया गया काम ऐसे प्रोटोटाइप पर केंद्रित है जो दिखाता है कि संवेदन, डिस्प्ले और संवाद एक ही कपड़ा मंच पर साथ काम कर सकते हैं।
बेहतर डिस्प्ले और सामान्य कपड़ा मशीनें
NUS की टीम ज्यादा रिजॉल्यूशन, अधिक एकीकृत संवेदन और डिवाइस पर ही चलने वाली कृत्रिम बुद्धिमत्ता विकसित करने की योजना बना रही है। जानकारी को स्थानीय स्तर पर प्रोसेस करने से कपड़ा सिस्टम अपने इलेक्ट्रॉनिक्स के भीतर कुछ काम कर सकेगा।
विश्वविद्यालय के अनुसार, छोटे माइक्रोचिप और पतले रेशे ज्यादा स्पष्ट और बड़े स्क्रीन बनाने का रास्ता दे सकते हैं। रोशनी पैदा करने वाले तत्वों को करीब-करीब रखने से डिस्प्ले अधिक बारीक विवरण दिखा सकेगा और मौजूदा प्रोटोटाइप की एक बड़ी सीमा दूर होगी।
रेशों के साथ घटकों की व्यवस्था विनिर्माण के लिए भी अहम है। NUS का कहना है कि इनके पतले रूपों को सामान्य औद्योगिक मशीनों से बुना, सिलाई-कढ़ाई की जा सकती है। इससे इलेक्ट्रॉनिक रेशा तकनीक का जुड़ाव कपड़े बनाने में पहले से इस्तेमाल होने वाले तरीकों से होगा।
टीम स्वास्थ्य संकेतों पर नजर रखने और स्पर्श के जरिए प्रतिक्रिया देने में भी संभावित उपयोग देखती है। इससे कपड़ा केवल जानकारी दिखाने तक सीमित न रहकर पहनने वाले की स्थिति पहचान और एक से अधिक तरीकों से संवाद कर सकेगा।
काम करने वाली आस्तीन से बाजार में मिलने वाले कपड़ों तक
शोधकर्ताओं ने एक ही कपड़े में कई सुविधाएं जोड़ी हैं: रंगीन स्क्रीन, एक से अधिक स्पर्श इनपुट, वायरलेस तरीके से तस्वीरें प्राप्त करना, ध्वनि और आसपास के वातावरण को मापना। टिकाऊपन के परीक्षण इसे व्यावहारिक रूप से भी अहम बनाते हैं, क्योंकि बार-बार धुलाई और मोड़ने के बाद भी आस्तीन काम करती रहती है।
बाजार में उपलब्ध होने की तारीख और कीमत की घोषणा नहीं की गई है। आगे की बताई गई योजनाएं तस्वीरों के विवरण में सुधार और संवेदन तथा AI को अधिक करीब से एकीकृत करने पर केंद्रित हैं, न कि टचस्क्रीन वाले कपड़ों के दुकानों तक पहुंचने की तारीख तय करने पर।
इस प्रोटोटाइप की सबसे उपयोगी प्रगति यह है कि ये सभी काम कपड़े में एक साथ हो सकते हैं। कपड़े के एक हिस्से से मिली रीडिंग दूसरे हिस्से पर दिख सकती है और उंगली के स्पर्श से चुनी जा सकती है। साथ ही कपड़ा मुड़ता रहता है और उसमें से हवा गुजरती है। यह मेल शोधकर्ताओं को आगे विकास के लिए एक ठोस आधार देता है।
मुख्य बिंदु
- NUS के शोधकर्ताओं ने 54 इलेक्ट्रॉनिक रेशों को आस्तीन में जोड़कर 5,184 पिक्सल वाली रंगीन टचस्क्रीन बनाई।
- डिस्प्ले 168 मिलीमीटर गुणा 105 मिलीमीटर का है, एक से अधिक स्पर्श पहचान सकता है और प्रति सेकंड 30 बार रिफ्रेश होता है।
- प्रोटोटाइप वीडियो चलाता है, कैलकुलेटर इस्तेमाल करता है, ब्लूटूथ से तस्वीरें प्राप्त करता है और शरीर का तापमान दिखाता है।
- मशीन में 50 बार धुलाई और कसकर 1,000 बार मोड़ने के बाद भी रोशनी और स्पर्श प्रतिक्रिया लगभग अपरिवर्तित रही।
- टीम अधिक स्पष्ट डिस्प्ले, बेहतर एकीकृत संवेदन और कपड़ा सिस्टम के भीतर AI विकसित करने की योजना बना रही है।
- बाजार में आने की तारीख या कीमत की घोषणा नहीं की गई है।






