न्याय व्यवस्था में बदलाव गहराने के बीच तालिबान ने अफगानिस्तान के कम से कम 200 पूर्व अभियोजकों को बर्खास्त किया

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Taliban Dismiss at Least 200 Former Afghan Prosecutors as Justice Overhaul Deepens

तालिबान के नियुक्त लोग पद संभाल रहे हैं, अनुभवी अभियोजकों की नौकरी गई

कम से कम छह मौजूदा और पूर्व अभियोजकों के अनुसार, अफगानिस्तान की पूर्व सरकार के तहत काम कर चुके कम से कम 200 अभियोजकों को एक महीने के दौरान बर्खास्त किया गया है। तालिबान अधिकारी बचे हुए कर्मचारियों की जगह आंदोलन से जुड़े लोगों को नियुक्त कर रहे हैं। इन बर्खास्तगियों का असर उस संस्था पर पड़ रहा है जो हिरासत केंद्रों की निगरानी और तालिबान नेता हिबतुल्लाह अखुंदज़ादा के आदेशों को लागू करने के लिए जिम्मेदार है।

विषय-सूची
  1. तालिबान के नियुक्त लोग पद संभाल रहे हैं, अनुभवी अभियोजकों की नौकरी गई
  2. बिना लिखित स्पष्टीकरण के पहुंचाए गए बर्खास्तगी के नोटिस
  3. अटॉर्नी जनरल के कार्यालय का रूपांतरण कैसे हुआ
  4. एक सदी का संस्थागत इतिहास, फिर तेजी से बदलाव
  5. नई नियुक्तियां कौन कर रहा है?
  6. बर्खास्तगी के विवरणों में भ्रष्टाचार के मामले
  7. अब सरकारी अभियोजकों के बिना मामले संभालते हैं न्यायाधीश
  8. हिरासत की निगरानी और पूर्व कर्मचारियों को खतरे
  9. महिलाओं और कमजोर वर्गों के लिए बनी विशिष्ट संस्थाओं का नुकसान
  10. मुख्य बातें

अभियोजकों ने बताया कि अखुंदज़ादा के मौखिक आदेश के बाद काबुल और प्रांतों में बर्खास्तगी की रफ्तार तेज हुई। इनमें से कुछ लोग अगस्त 2021 में तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद भी काम करते रहे थे। वे उस संस्था में कार्यरत थे जिसने अटॉर्नी जनरल के कार्यालय की जगह ली थी।

एक अभियोजक ने बताया कि हर हफ्ते 50 से 60 लोगों को बर्खास्त किया जा रहा था और पूर्व गणराज्य के करीब 700 अभियोजक अब भी काम कर रहे थे। पूर्व अभियोजक फारूक अलीम ने इससे बड़ा आंकड़ा देते हुए कहा कि 700 से अधिक अनुभवी अभियोजकों को बर्खास्त किया गया है, हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि उनकी गिनती किस अवधि की है।

हालिया बर्खास्तगियों, अखुंदज़ादा के कथित आदेश या उनकी जगह नियुक्त किए जा रहे लोगों की योग्यता और चयन पर टिप्पणी के अनुरोधों का तालिबान अधिकारियों ने जवाब नहीं दिया। इस हालिया विवरण में बताए गए महीने की तारीखें नहीं दी गई हैं।

कर्मचारियों में बदलाव एक गहरे संस्थागत रूपांतरण का हिस्सा है: कभी अपराधों की जांच करने और मामले पेश करने वाला कार्यालय अब तालिबान नेता के निर्देश लागू करने पर केंद्रित निदेशालय बन गया है। न्याय पाने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए इससे यह बदलता है कि साक्ष्यों की जांच कौन करता है, हिरासत की स्थितियों पर कौन नजर रखता है और अधिकारियों के आचरण पर सवाल कौन उठा सकता है।

बिना लिखित स्पष्टीकरण के पहुंचाए गए बर्खास्तगी के नोटिस

नई संस्था में काम कर चुके एक अभियोजक ने बताया कि कर्मचारियों को कार्यालय में उनके नाम पुकारे जाने पर पता चला कि उनकी नौकरी जा रही है। उनके मुताबिक, उन्हें न तो लिखित सूचना मिली और न ही एक महीने का वेतन।

अभियोजक ने बताया कि उन्हें और कई सहकर्मियों को नौकरी खत्म होने की सूचना कैसे दी गई:

एक दिन मैं कार्यालय में था, तभी बिना किसी आधिकारिक लिखित नोटिस के मेरा और कई अन्य अभियोजकों के नाम पुकारे गए। हमें बताया गया कि अगले महीने से काम पर नहीं लौटना है। इसके अलावा, उन्होंने हमें एक महीने का वेतन भी नहीं दिया।

एक अन्य अभियोजक ने बर्खास्तगी की एक नियोजित प्रक्रिया का वर्णन किया, जिसकी शुरुआत गणराज्य के दौर के कर्मचारियों से हुई और जो फिर कर्मचारियों की दूसरी श्रेणियों तक पहुंची। उनके बयान से संकेत मिलता है कि मौजूदा बर्खास्तगी जारी कर्मचारी समीक्षा का हिस्सा है।

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24 अक्टूबर 2026 के एक संबंधित विवरण में छह प्रांतों: दाइकुंडी, बामियान, नंगरहार, कापिसा, नूरिस्तान और मैदान वरदक में 11 अभियोजकों की बर्खास्तगी दर्ज करने वाले एक पत्र का जिक्र है। उस विवरण में एक पूर्व अभियोजक ने अनुमान लगाया कि एक समिति हर हफ्ते पूर्व कर्मचारियों में से 40 से 50 लोगों को बर्खास्त कर रही थी। यह संख्या हालिया विवरण में बताए गए 50 से 60 अभियोजकों से कम है।

अटॉर्नी जनरल के कार्यालय का रूपांतरण कैसे हुआ

मानवाधिकार संगठन रवादारी ने अपने 24 मार्च 2023 के बयान में संस्थागत बदलाव का दस्तावेजीकरण किया। उसने कहा कि अखुंदज़ादा ने मौखिक फरमान जारी कर अटॉर्नी जनरल के कार्यालय को फरमानों और निर्देशों की निगरानी एवं अनुवर्ती कार्रवाई के लिए सामान्य निदेशालय में बदल दिया था।

नई संस्था को फरमानों और आदेशों की निगरानी एवं अभियोजन का सामान्य निदेशालय भी कहा जाता है। रवादारी ने कहा कि इस बदलाव से कार्यालय तालिबान नेतृत्व के निर्देशों का पालन करने तक सीमित रह गया और अपराध से लड़ने, न्याय सुनिश्चित करने तथा मौलिक अधिकारों का समर्थन करने की उसकी जिम्मेदारी कम हो गई।

अटॉर्नी जनरल के कार्यालय की कुछ पूर्व शक्तियां तालिबान की अदालतों और खुफिया अधिकारियों को सौंप दी गईं। पूर्व कर्मचारियों ने बताया कि पुनर्गठन के फरमान के बाद कम से कम 4,000 लोगों की नौकरी चली गई थी। यह आंकड़ा पहले हुए संस्थागत पुनर्गठन से जुड़ा है, जबकि हालिया कम से कम 200 का आंकड़ा बचे हुए अभियोजकों की एक महीने में हुई बर्खास्तगी से संबंधित है।

पुनर्गठन के समय तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा था कि नई संस्था में पूर्व कर्मचारी काम करेंगे। उस समय अभियोजकों ने कहा कि उन्हें इस व्यवस्था के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली थी। कुछ पूर्व अभियोजकों का नौकरी पर बने रहना और फिर हालिया बर्खास्तगियां दिखाती हैं कि कर्मचारियों में बदलाव कई चरणों में हुआ।

एक सदी का संस्थागत इतिहास, फिर तेजी से बदलाव

अफगानिस्तान अभियोजक संघ ने इस संस्था को भंग करने का विरोध किया था। उसने अटॉर्नी जनरल के कार्यालय को एक तटस्थ संस्था बताया, जिसकी स्थापना 1921 में राजा अमानुल्लाह खान के शासनकाल में हुई थी। संघ ने चेतावनी दी थी कि कार्यालय को खत्म करने से न्यायिक मूल्य मिट जाएंगे।

मुख्य तारीखें अभियोजन सेवा से तालिबान नेता के फरमानों पर केंद्रित संस्था तक के बदलाव को दर्शाती हैं:

  • 1921: अफगानिस्तान अभियोजक संघ के अनुसार, राजा अमानुल्लाह खान के शासन में अटॉर्नी जनरल का कार्यालय स्थापित हुआ।
  • 15 अगस्त 2021: तालिबान सत्ता में लौटा और पूर्व गणराज्य की संस्थाओं को खत्म करना या उनकी जगह नई संस्थाएं लाना शुरू किया।
  • 24 मार्च 2023: रवादारी ने मौखिक फरमान और अटॉर्नी जनरल के कार्यालय की जिम्मेदारियां घटाने वाले बदलाव पर अपना बयान प्रकाशित किया।
  • 24 अक्टूबर 2026: एक विवरण में जारी बर्खास्तगियों, कर्मचारी समीक्षा समिति और छह प्रांतों में हटाए गए 11 अभियोजकों के नाम वाले पत्र का जिक्र किया गया।
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2021 में सत्ता पर कब्जे के बाद अभियोजन का काम व्यावहारिक रूप से खत्म होना शुरू हुआ। रवादारी के बयान में 2023 में हुए औपचारिक पुनर्गठन का दस्तावेजीकरण है। दोनों घटनाक्रम बताते हैं कि तालिबान शासन के अलग-अलग चरणों के संदर्भ में इस कार्यालय को भंग किए जाने की तारीख अलग-अलग क्यों बताई जाती है।

नई नियुक्तियां कौन कर रहा है?

पूर्व अभियोजकों ने बताया कि एक समिति सेवा रिकॉर्ड की समीक्षा कर रही है और कर्मचारियों की जगह तालिबान के सदस्यों को नियुक्त कर रही है। 24 अक्टूबर 2026 के विवरण में उन्होंने समिति के अध्यक्ष की पहचान निदेशालय के वित्त और प्रशासन के उप-निदेशक शाह मोहम्मद शाहिद के रूप में की।

उन्होंने नागरिक मामलों के उप-निदेशक इज़्ज़तुल्लाह हक्कानी, सैन्य मामलों के उप-निदेशक और कार्मिक मामलों के प्रमुख को समिति के अन्य सदस्यों के रूप में नामित किया। पूर्व कर्मचारियों ने कहा कि समीक्षा में बर्खास्तगी के अलावा भविष्य में भर्ती पर पाबंदियां भी शामिल थीं।

कुछ उम्मीदवारों ने कहा कि वे भर्ती परीक्षा में सफल हुए, लेकिन अटॉर्नी जनरल के कार्यालय में उनकी पिछली सेवा का पता चलने पर उन्हें बाद में अस्वीकार कर दिया गया। उनके मुताबिक, कर्मचारियों ने उनसे कहा कि अखुंदज़ादा ने पूर्व अभियोजकों को नौकरी न देने का आदेश दिया है।

हालिया विवरण में एक पूर्व अभियोजक ने नई नियुक्तियों के प्रशिक्षण पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ नियुक्त लोगों ने छह महीने की धार्मिक पढ़ाई की थी, जिसे मास्टर डिग्री के बराबर माना गया, जबकि अभियोजन के काम के लिए जरूरी पेशेवर ज्ञान और अनुभव उनके पास नहीं था। उन पाठ्यक्रमों और उनकी समकक्षता का यह विवरण अभियोजक के बयान पर आधारित है।

अभियोजकों को गवाहों के बयान परखने, दस्तावेजों की जांच करने और यह तय करने की जरूरत होती है कि साक्ष्य किसी आरोप का समर्थन करते हैं या नहीं। अनुभवी कर्मचारियों की जगह नए लोगों को नियुक्त करने से संस्था की इन कामों को करने की क्षमता बदल जाती है, खासकर तब जब नियुक्तियां संबद्धता पर निर्भर हों और पिछली सरकार में सेवा करना बाहर किए जाने का कारण बन जाए।

बर्खास्तगी के विवरणों में भ्रष्टाचार के मामले

पूर्व अभियोजकों ने बर्खास्तगियों को तालिबान के वरिष्ठ अधिकारियों की उन शिकायतों से जोड़ा, जिनमें आंदोलन के सदस्यों के खिलाफ जांच का जिक्र था। उनका आरोप है कि खुफिया और न्यायिक अधिकारियों ने कंधार में अखुंदज़ादा से कहा था कि पूर्व सरकार के अभियोजक तालिबान सदस्यों के खिलाफ झूठे मामले बना रहे हैं।

बर्खास्त किए गए एक अभियोजक ने आरोप लगाया कि काबुल के गवर्नर और दाइकुंडी के पूर्व गवर्नर के रूप में पहचाने गए अमीनुल्लाह ओबैद ने अफगान रेड क्रिसेंट की 8.1 मिलियन अफगानी की सहायता राशि का गबन किया। अभियोजक ने कहा कि सहायता में आटा, खाना पकाने का तेल, तंबू और कंबल शामिल थे। जांचकर्ताओं ने मामले की फाइल तैयार कर काबुल भेजी थी।

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24 अक्टूबर 2026 के विवरण में यह भी आरोप लगाया गया कि दाइकुंडी के निवासियों के लिए 20 ट्रकों में ले जाया गया कम से कम 50 टन गेहूं और मानवीय सहायता काबुल, घोर, मैदान वरदक, फराह और उरुज़गान में ओबैद के दोस्तों और रिश्तेदारों को दे दी गई। ये आरोप पूर्व अभियोजकों और सहायता वितरण से जुड़ी रिपोर्टिंग के हवाले से हैं।

इन परस्पर विरोधी दावों का संबंध एक ही संवेदनशील जिम्मेदारी से है: सत्ता में बैठे लोगों पर लगे आरोपों की जांच करना। पूर्व अभियोजक कहते हैं कि भ्रष्टाचार की जांच करने पर उन्हें निशाना बनाया गया; वहीं तालिबान अधिकारियों से जुड़ी शिकायतों में आरोप है कि इन अभियोजकों ने अपने पद का इस्तेमाल आंदोलन के खिलाफ किया।

अब सरकारी अभियोजकों के बिना मामले संभालते हैं न्यायाधीश

तालिबान के उप मुख्य न्यायाधीश अब्दुल मलिक हक्कानी ने ऐसी व्यवस्था का वर्णन किया है जिसमें न्यायाधीश बिना सरकारी अभियोजकों के मामले के सभी चरणों को संभालते हैं। उनके मुताबिक, आरोपों की जांच और फैसला देने की जिम्मेदारी अदालत की होती है।

हक्कानी ने एक टेलीविजन साक्षात्कार में तालिबान का रुख बताया:

एक न्यायाधीश अभियोजक की जांच के आधार पर अपना फैसला नहीं दे सकता। यही हमारे शरीयत के सिद्धांत हैं,

आम तौर पर अभियोजक कथित अपराध की जांच करता है और अदालत के सामने जांच के लिए साक्ष्य पेश करता है। इसके बाद न्यायाधीश मामले पर फैसला करता है। इन जिम्मेदारियों को अलग रखने से अदालत के सामने लाए गए मामले की जांच हो सकती है, बजाय इसके कि अदालत हर चरण की जिम्मेदारी खुद संभाले।

अफगानिस्तान के पूर्व अटॉर्नी जनरल फरीद हमीदी ने कार्यालय के विघटन को न्याय के लिए घातक झटका बताया। उनका तर्क था कि त्वरित फैसलों पर जोर के कारण मामलों की सावधानीपूर्वक जांच पीछे छूट रही है।

हमीदी ने अपनी चिंता इस तरह जाहिर की:

वे तेजी के लिए न्याय की बलि दे रहे हैं,

खबरों के मुताबिक, तालिबान के न्यायाधीशों ने शासन के पहले दो वर्षों में 200,000 से अधिक मामलों का निपटारा किया। इनमें पूर्व सरकार के कार्यकाल में लंबित रह गए मामले भी शामिल थे। पिछली अदालतों में देरी से निराश अफगानों ने तेज फैसलों का स्वागत किया है। प्रतिवादियों और शिकायतकर्ताओं के लिए मुख्य व्यावहारिक सवाल यह है कि क्या तेज सुनवाई में भी साक्ष्यों की जांच और दोनों पक्षों को सुनने के लिए पर्याप्त समय मिलता है।

हिरासत की निगरानी और पूर्व कर्मचारियों को खतरे

नई निदेशालय के पास ऐसी जिम्मेदारियां बरकरार हैं जिनका असर सीधे हिरासत में रखे लोगों पर पड़ता है। इनमें हिरासत केंद्रों और अखुंदज़ादा के फरमानों के क्रियान्वयन की निगरानी शामिल है। इसके कामों में नेता के आदेश पर गिरफ्तारी वारंट जारी करना, विदेश से कैदियों को स्थानांतरित करना, संदिग्धों का प्रत्यर्पण करना और तालिबान के दस्तावेज तैयार करना या उनमें बदलाव करना भी शामिल बताया गया है।

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रवादारी ने मार्च 2023 में चेतावनी दी थी कि मनमानी गिरफ्तारियां, अधूरी जांच, मामलों में देरी और अनिश्चितकालीन हिरासत न्याय तक पहुंच को कमजोर कर रही हैं। उसने यह भी कहा कि संविधान भंग कर दिया गया है और दंड संहिता समेत कानूनों को निलंबित कर दिया गया है, जिससे अधिकारियों से जुड़े मामलों में लोगों के लिए प्रकाशित कानूनी सुरक्षा कम रह गई है।

नौकरी जाने के साथ-साथ पूर्व अभियोजकों को निजी सुरक्षा का खतरा भी है। संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार संस्था ने बताया कि 2021 में रिहा हुए कैदियों की बदले की कार्रवाई में एक दर्जन से अधिक पूर्व अभियोजकों की हत्या हुई। कई पूर्व अभियोजकों ने पहले तालिबान विद्रोहियों के खिलाफ मामले तैयार किए थे।

इसलिए बचे हुए कर्मचारियों की बर्खास्तगी का असर उनकी घरेलू आय और निजी सुरक्षा, दोनों पर पड़ता है। वेतन खोने वाले अभियोजक को एक ओर संस्थागत पद भी गंवाना पड़ सकता है, जबकि पुराने मामलों से जुड़ी शत्रुता का सामना अब भी करना पड़ सकता है।

महिलाओं और कमजोर वर्गों के लिए बनी विशिष्ट संस्थाओं का नुकसान

रवादारी ने अटॉर्नी जनरल के कार्यालय में बदलाव को 15 अगस्त 2021 के बाद संस्थाओं को व्यापक रूप से खत्म किए जाने के संदर्भ में रखा। उसने भंग की गई संस्थाओं में अफगानिस्तान का स्वतंत्र मानवाधिकार आयोग, चुनावी निकाय और महिला मामलों का मंत्रालय भी गिनाया।

संगठन ने महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हिंसा से जुड़े मामलों के लिए बनी विशेष अदालतों और अभियोजन इकाइयों को हटाए जाने का भी जिक्र किया। इन इकाइयों में ऐसे विशिष्ट अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई थी जो इन शिकायतों की जांच और सुनवाई संभालते थे।

तालिबान ने महिलाओं को न्यायिक रोजगार से भी बाहर कर दिया है, जिससे महिला वादी और प्रतिवादियों के विवादों की सुनवाई के लिए कोई महिला न्यायाधीश नहीं है। विशेष इकाइयों और महिला न्यायिक कर्मचारियों को हटाने से महिलाओं के लिए शिकायत दर्ज कराने और सुनवाई पाने के रास्ते बदल जाते हैं।

हालिया बर्खास्तगियां इसी संस्थागत बदलाव को आगे बढ़ाती हैं। पूर्व गणराज्य के बचे हुए अभियोजकों को ऐसी संस्था से हटाया जा रहा है जिसकी जिम्मेदारियां पहले से ही तालिबान नेता के आदेशों पर केंद्रित हैं, जबकि अदालतें वे शक्तियां इस्तेमाल कर रही हैं जो पहले अभियोजन सेवा के साथ साझा थीं।

मुख्य बातें

  • मौजूदा और पूर्व अभियोजकों के अनुसार, एक महीने में पूर्व सरकार के कम से कम 200 अभियोजकों को बर्खास्त किया गया।
  • कर्मचारियों ने कहा कि हिबतुल्लाह अखुंदज़ादा से जुड़े मौखिक आदेश के बाद बर्खास्त लोगों की जगह तालिबान से जुड़े लोगों को नियुक्त किया गया।
  • रवादारी ने मार्च 2023 में अटॉर्नी जनरल के कार्यालय के औपचारिक पुनर्गठन का दस्तावेजीकरण किया।
  • पूर्व कर्मचारियों ने पहले कहा था कि व्यापक पुनर्गठन के दौरान कम से कम 4,000 लोगों की नौकरी गई।
  • नई निदेशालय फरमानों और हिरासत केंद्रों की निगरानी करती है, जबकि तालिबान की अदालतें सरकारी अभियोजकों के बिना काम करती हैं।
  • हालिया बर्खास्तगियों, कथित आदेश या नई नियुक्तियों पर पूछे गए सवालों का तालिबान अधिकारियों ने जवाब नहीं दिया।
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