तूफान के विकसित होने के साथ 100 मिलीमीटर से अधिक बारिश का पूर्वानुमान
श्रीलंका के मौसम विज्ञान विभाग ने कुछ इलाकों में 100 मिलीमीटर से अधिक बारिश का अनुमान जताया है और बंगाल की खाड़ी के एक बड़े हिस्से में मछली पकड़ने वाली नौकाओं को जाने से बचने की चेतावनी दी है। विभाग के अनुसार, अवदाब के 27 अक्टूबर 2026 की सुबह तक प्रचंड चक्रवाती तूफान में बदलने की आशंका है।
विषय-सूची
- तूफान के विकसित होने के साथ 100 मिलीमीटर से अधिक बारिश का पूर्वानुमान
- मौसम प्रणाली के और प्रबल होने का अनुमान
- किन इलाकों में सबसे अधिक बारिश की आशंका
- 24 अक्टूबर के बाद से पूर्वानुमान में क्या बदलाव आया
- तेज हवाओं का असर बारिश वाले क्षेत्रों से आगे तक
- बंगाल की खाड़ी के निर्धारित जलक्षेत्रों से दूर रहने की मछुआरों को सलाह
- श्रीलंका के अधिकांश हिस्सों के आसपास समुद्र उफनने का अनुमान
- 28 अक्टूबर को भारत के तट से टकराने की आशंका
- मुख्य बातें
विभाग का यह पूर्वानुमान 25 अक्टूबर को सुबह 5:30 बजे जारी किया गया था। इसके मुताबिक, मौसम प्रणाली उत्तरी अंडमान द्वीपसमूह के पास है। 24 अक्टूबर को रात 11:30 बजे इसका केंद्र 15.5 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 91.0 डिग्री पूर्वी देशांतर के पास था। इसके 25 अक्टूबर को गहरे अवदाब, अगले दिन सुबह तक चक्रवाती तूफान और 27 अक्टूबर को बंगाल की खाड़ी के पश्चिम-मध्य हिस्से में प्रचंड चक्रवाती तूफान बनने की आशंका जताई गई थी।
श्रीलंका में बारिश बढ़ने की संभावना है, क्योंकि इस मौसम प्रणाली की ओर बहने वाली हवाएं द्वीप के दक्षिण-पश्चिमी इलाकों समेत पूरे देश में फैलेंगी। तूफान के सीधे देश से टकराने की आशंका नहीं है। समुद्र में चेतावनी का दायरा बड़ा है: मछुआरा और नौसैनिक समुदायों को अगली सूचना तक निर्धारित जलक्षेत्रों से दूर रहने को कहा गया है, जबकि वहां पहले से मौजूद नौकाओं को सुरक्षित क्षेत्रों में जाने की सलाह दी गई है।
श्रीलंका के राष्ट्रीय मौसम पूर्वानुमान प्राधिकरण, मौसम विज्ञान विभाग ने दूर स्थित मौसम प्रणाली और स्थानीय बारिश के बीच संबंध इस तरह समझाया:
हालांकि इस प्रणाली का श्रीलंका पर सीधे असर पड़ने की आशंका नहीं है, लेकिन अगले कुछ दिनों में द्वीप के दक्षिण-पश्चिमी हिस्सों में बारिश बढ़ने की संभावना है, क्योंकि इस प्रणाली से जुड़ा हवा का प्रवाह पूरे द्वीप में फैलेगा।
स्थानीय लोगों के लिए तत्काल चिंताओं में तेज बारिश के दौर, बिजली गिरना और तेज हवाएं शामिल हैं। समुद्र में मौजूद नाविकों के लिए पूर्वानुमान में उफनता समुद्र, कुछ जलक्षेत्रों में करीब 2.5 मीटर तक ऊंची लहरें और गरज-चमक के दौरान अस्थायी रूप से 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक की हवा के झोंके भी शामिल हैं।
मौसम प्रणाली के और प्रबल होने का अनुमान
उत्तरी अंडमान द्वीपसमूह के पास कम वायुदाब वाले क्षेत्र से यह अवदाब विकसित हुआ। अवदाब एक संगठित मौसम प्रणाली है, जिसमें कम वायुदाब वाले क्षेत्र के चारों ओर हवाएं घूमती हैं। गहरा अवदाब, चक्रवाती तूफान और प्रचंड चक्रवाती तूफान इसके क्रमशः बढ़ती तीव्रता के चरणों को दर्शाते हैं।
मौसम विज्ञान विभाग का अनुमान है कि यह प्रणाली बंगाल की खाड़ी में पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ेगी। पूर्वानुमान में घटनाक्रम इस प्रकार बताया गया है:
- 24 अक्टूबर, रात 11:30 बजे: अवदाब का केंद्र 15.5 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 91.0 डिग्री पूर्वी देशांतर के पास था।
- 25 अक्टूबर: पूर्व-मध्य और उससे सटी दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी में आगे बढ़ते हुए इसके गहरे अवदाब में बदलने की आशंका थी।
- 26 अक्टूबर, सुबह: इसके प्रबल होकर चक्रवाती तूफान बनने का पूर्वानुमान था।
- 27 अक्टूबर, सुबह: बंगाल की खाड़ी के पश्चिम-मध्य हिस्से में इसके प्रचंड चक्रवाती तूफान की तीव्रता तक पहुंचने की आशंका थी।
- 28 अक्टूबर: भारत के पूर्वानुमानों में तट पार करने की संभावना जताई गई थी। विस्तृत अनुमान के मुताबिक, यह बापटला और विशाखापत्तनम के बीच तट से टकरा सकता है।
ये तारीखें मौसम प्रणाली के अनुमानित विकास को दर्शाती हैं। श्रीलंका में बारिश और समुद्री चेतावनियां तब लागू हैं, जब यह प्रणाली अभी समुद्र में है, क्योंकि इसके आसपास का हवा का प्रवाह तूफान के केंद्र से कहीं अधिक दूर तक पहुंचता है।
किन इलाकों में सबसे अधिक बारिश की आशंका
25 अक्टूबर के पूर्वानुमान में पश्चिमी, सबरागमुवा, दक्षिणी, उत्तर-पश्चिमी और उत्तरी प्रांतों में रुक-रुककर बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारों की संभावना जताई गई है। कैंडी, नुवारा एलिया और अनुराधापुरा जिले भी इसमें शामिल हैं। इन क्षेत्रों के कुछ स्थानों पर 100 मिलीमीटर से अधिक बारिश हो सकती है।
100 मिलीमीटर बारिश का मतलब है कि समतल सतह पर 10 सेंटीमीटर गहरी पानी की परत बन सकती है, अगर पानी बहकर न जाए, जमीन में न समाए या वाष्पित न हो। विभाग ने चेतावनी वाले क्षेत्रों के कुछ स्थानों पर इतनी बारिश की संभावना जताई है, न कि हर कस्बे में समान मात्रा का पूर्वानुमान दिया है।
उवा प्रांत और अम्पारा तथा बट्टीकलोआ जिलों में बारिश का समय अलग रहने की आशंका है। वहां दोपहर 1:00 बजे के बाद कई स्थानों पर बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। ऐसे में वहां यात्रा करने या बाहर काम करने वालों के लिए दोपहर का पूर्वानुमान खास तौर पर महत्वपूर्ण है।
24 अक्टूबर के बाद से पूर्वानुमान में क्या बदलाव आया
24 अक्टूबर को सुबह 5:30 बजे जारी विभाग के पूर्वानुमान में पहले ही चेतावनी दी गई थी कि यह प्रणाली श्रीलंका के दक्षिण-पश्चिमी हिस्सों में बारिश बढ़ाएगी। उस समय कम वायुदाब वाले क्षेत्र के दिन में अवदाब बनने, फिर 25 अक्टूबर तक गहरे अवदाब और 26 अक्टूबर की सुबह तक चक्रवाती तूफान में बदलने की आशंका थी।
पहले के पूर्वानुमान में पश्चिमी, सबरागमुवा, उत्तरी और उत्तर-पश्चिमी प्रांतों में रुक-रुककर बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारों की संभावना जताई गई थी। अन्य क्षेत्रों में दोपहर बाद बारिश का अनुमान था और कुछ स्थानों पर 50 मिलीमीटर से अधिक बारिश हो सकती थी।
25 अक्टूबर तक अवदाब बन चुका था और पूर्वानुमान में 27 अक्टूबर को प्रचंड चक्रवाती तूफान बनने की संभावना शामिल हो गई। बारिश की चेतावनी में 100 मिलीमीटर से अधिक बारिश की आशंका बताई गई और दक्षिणी प्रांत के साथ कैंडी, नुवारा एलिया तथा अनुराधापुरा जिले भी शामिल किए गए।
24 अक्टूबर के पूर्वानुमान में मध्य और उवा प्रांतों के कुछ हिस्सों में सुबह-सुबह धुंध छाने की संभावना भी बताई गई थी। इस तरह विकसित हो रहे मौसम में अलग-अलग समय पर अलग स्थितियां बन सकती हैं: कुछ ऊंचाई वाले क्षेत्रों में धुंध, अन्य इलाकों में दोपहर के समय गरज-चमक और नवीनतम बुलेटिन में बताए गए प्रांतों में रुक-रुककर बारिश।
तेज हवाओं का असर बारिश वाले क्षेत्रों से आगे तक
मध्य पहाड़ियों की पश्चिमी ढलानों, उत्तरी, उत्तर-मध्य और उत्तर-पश्चिमी प्रांतों तथा त्रिंकोमाली, हंबनटोटा और मातले जिलों में कभी-कभी 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की आशंका है।
तेज हवाओं की चेतावनी का भौगोलिक दायरा उन इलाकों से अलग है जहां सबसे अधिक बारिश का अनुमान है। तेज हवाओं के लिए त्रिंकोमाली, हंबनटोटा और मातले के नाम खास तौर पर दिए गए हैं, जबकि दोपहर की गरज-चमक के पूर्वानुमान में उवा, अम्पारा और बट्टीकलोआ शामिल हैं। लोगों को अपने इलाके के लिए पूर्वानुमान के दोनों हिस्से देखने चाहिए।
विभाग ने लोगों को गरज-चमक के दौरान बिजली गिरने और स्थानीय स्तर पर अस्थायी रूप से तेज हवाओं से बचाव के उपाय करने की सलाह भी दी है। ऐसे अचानक तेज हवा के झोंके किसी एक तूफान के आसपास भी आ सकते हैं और बंगाल की खाड़ी की मौसम प्रणाली से जुड़े व्यापक हवा के प्रवाह में भी।
प्रभावित क्षेत्रों के लोगों से बदलते हालात पर नजर रखने और आगे जारी होने वाली आधिकारिक मौसम सलाह का पालन करने का आग्रह किया गया है। चेतावनी अगले कुछ दिनों के लिए है, जब मौसम प्रणाली के प्रबल होकर खाड़ी में आगे बढ़ने की आशंका है।
बंगाल की खाड़ी के निर्धारित जलक्षेत्रों से दूर रहने की मछुआरों को सलाह
मौसम विज्ञान विभाग ने मछुआरा और नौसैनिक समुदायों को 10 डिग्री उत्तरी और 20 डिग्री उत्तरी अक्षांश तथा 80 डिग्री पूर्वी और 95 डिग्री पूर्वी देशांतर से घिरे गहरे समुद्री क्षेत्रों में जाने से बचने की चेतावनी दी है। यह निर्देश अगली सूचना तक लागू रहेगा।
इन सीमाओं के भीतर पहले से काम कर रही नौकाओं को सुरक्षित जलक्षेत्रों में जाने की सलाह दी गई है। यह चेतावनी उन मछली पकड़ने वाली नौकाओं के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो कई दिन समुद्र में रहती हैं। उन्हें मार्ग और वापसी की योजना बनाते समय विकसित हो रही मौसम प्रणाली को ध्यान में रखना होगा।
ये निर्देशांक नौवहन करने वालों के लिए बंगाल की खाड़ी का एक बड़ा क्षेत्र निर्धारित करते हैं। अक्षांश भूमध्य रेखा के उत्तर या दक्षिण में किसी स्थान की स्थिति बताता है; देशांतर पृथ्वी पर पूर्व या पश्चिम की स्थिति दर्शाता है। इन चार सीमाओं से मिलकर चेतावनी के दायरे वाले जलक्षेत्र की रूपरेखा बनती है।
विभाग ने मछुआरा और नौसैनिक समुदायों से आगे के पूर्वानुमानों और बुलेटिन पर ध्यान देने को कहा है। चेतावनी हटाने की कोई तारीख नहीं दी गई है, इसलिए प्रभावित जलक्षेत्रों में दोबारा जाने की योजना बनाने से पहले चालक दल को बाद के निर्देशों का पालन करना चाहिए।
श्रीलंका के अधिकांश हिस्सों के आसपास समुद्र उफनने का अनुमान
द्वीप के आसपास दक्षिण-पश्चिमी हवाएं 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने का अनुमान है। त्रिंकोमाली से पोट्टुविल तक के तटवर्ती जलक्षेत्रों में, कंकसंतुराई, पुत्तलम, कोलंबो, गाले और हंबनटोटा से गुजरने वाले मार्ग पर, हवा की रफ्तार कभी-कभी 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।
यह मार्ग श्रीलंका के उत्तरी, पश्चिमी और दक्षिणी तट के बड़े हिस्से से होकर दक्षिण-पूर्व तक जाता है। इस मार्ग पर समुद्र कभी-कभी उफन सकता है, जबकि द्वीप के आसपास के अन्य जलक्षेत्रों में समुद्र कुछ अशांत रह सकता है।
पुत्तलम से पोट्टुविल तक, कोलंबो, गाले और मातरा के रास्ते वाले जलक्षेत्रों में लहरें करीब 2.0 से 2.5 मीटर तक ऊंची हो सकती हैं। श्रीलंका के आसपास के समुद्र में कई स्थानों पर बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की भी आशंका है।
गरज-चमक के दौरान हवा के अस्थायी झोंके 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं और समुद्र बहुत उफन सकता है। इस तरह, तूफानी बारिश के दौरान हवा के झोंकों की अधिकतम अनुमानित रफ्तार समुद्र में आमतौर पर चलने वाली 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की हवाओं की ऊपरी सीमा से 30 किलोमीटर प्रति घंटे अधिक है। इससे पता चलता है कि किसी नौका के आसपास हालात कितनी जल्दी बिगड़ सकते हैं।
28 अक्टूबर को भारत के तट से टकराने की आशंका
भारत के पूर्वी तट पर विकसित हो रहे तूफान का सीधा असर पड़ने की आशंका है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने सुबह के एक आकलन में इस प्रणाली को अंडमान द्वीपसमूह के श्री विजयपुरम से करीब 440 किलोमीटर उत्तर-उत्तर-पश्चिम में बताया।
विस्तृत पूर्वानुमान में 28 अक्टूबर की सुबह के दौरान आंध्र प्रदेश में बापटला और विशाखापत्तनम के बीच इसके तट से टकराने की संभावना जताई गई। इस दौरान निरंतर हवाओं की रफ्तार 115 से 125 किलोमीटर प्रति घंटे और झोंकों की रफ्तार 140 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। भुवनेश्वर स्थित आईएमडी मौसम विज्ञान केंद्र के एक व्यापक अनुमान में 28 अक्टूबर तक दक्षिणी ओडिशा और उत्तरी आंध्र प्रदेश के तट पर इसके पहुंचने की संभावना बताई गई।
पूर्वानुमानों में यह भी संकेत दिया गया कि 28 अक्टूबर तक यह प्रणाली बहुत प्रचंड चक्रवाती तूफान की तीव्रता तक पहुंच सकती है। तट से टकराने का सटीक स्थान और अंतिम तीव्रता के पूर्वानुमान में मौसम प्रणाली के विकास के साथ बदलाव हो सकता है।
इस तरह श्रीलंका और भारत एक ही मौसम प्रणाली के अलग-अलग असर का सामना कर रहे हैं। श्रीलंका के लिए चेतावनी अवदाब की ओर बहने वाली हवाओं से बारिश बढ़ने, तेज हवाओं और खतरनाक समुद्री हालात पर केंद्रित है। भारत के तटीय पूर्वानुमान में तूफान का केंद्र तट से टकराने और बहुत तेज हवाएं चलने की आशंका शामिल है।
मुख्य बातें
- श्रीलंका के 25 अक्टूबर के पूर्वानुमान के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी का अवदाब 27 अक्टूबर की सुबह तक प्रचंड चक्रवाती तूफान बन सकता है।
- इस प्रणाली के श्रीलंका से सीधे टकराने की आशंका नहीं है, लेकिन इससे जुड़ी हवाओं के कारण खासकर दक्षिण-पश्चिमी हिस्सों में बारिश बढ़ सकती है।
- पांच प्रांतों के कुछ हिस्सों और कैंडी, नुवारा एलिया तथा अनुराधापुरा जिलों में 100 मिलीमीटर से अधिक बारिश हो सकती है।
- उवा, अम्पारा और बट्टीकलोआ में दोपहर 1:00 बजे के बाद बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने का अनुमान है।
- मछुआरा और नौसैनिक समुदाय अगली सूचना तक बंगाल की खाड़ी के निर्धारित जलक्षेत्रों से दूर रहें; वहां पहले से मौजूद नौकाएं सुरक्षित क्षेत्रों में जाएं।
- समुद्र में गरज-चमक के दौरान हवा के झोंके 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं, जबकि कुछ तटीय जलक्षेत्रों में लहरें 2.5 मीटर तक ऊंची हो सकती हैं।
- पूर्वानुमानों में 28 अक्टूबर को भारत के पूर्वी तट पर मौसम प्रणाली के पहुंचने की संभावना जताई गई है।






