पांच उपग्रह, इस्तेमाल की जा रही खुफिया जानकारी की मात्रा पर अलग-अलग दावे
दक्षिण कोरिया की सेना पर आरोप है कि वह अपने पांच 425 टोही उपग्रहों से मिली तस्वीरों में से केवल करीब 40% का ही इस्तेमाल कर पाती है, क्योंकि जमीन पर मौजूद उपकरण जानकारी को पर्याप्त तेजी से डाउनलोड और विश्लेषित नहीं कर सकते। ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि उपग्रहों से मिली सारी जानकारी का इस्तेमाल हो रहा है और तस्वीरों को संभालने वाली अलग-अलग प्रणालियों की क्षमता पर्याप्त है।
विषय-सूची
- पांच उपग्रह, इस्तेमाल की जा रही खुफिया जानकारी की मात्रा पर अलग-अलग दावे
- 425 उपग्रहों का निर्धारित काम
- तस्वीरें कहां अटक रही हैं
- एक परीक्षण में 10 से कम तस्वीरें इस्तेमाल हुईं
- विश्लेषकों को डेटा की गति के साथ तालमेल रखना होगा
- घरेलू उत्पादन के आंकड़े एक और बाधा दिखाते हैं
- अधिक उपग्रहों से काम का बोझ काफी बढ़ेगा
- अगले उपग्रह बेड़े का इस्तेमाल सेना और नागरिक उपयोगकर्ता साझा करेंगे
- समय पर विश्लेषण अब क्यों अहम है
- मुख्य बिंदु
23 अक्टूबर, 2026 को प्रकाशित और अगले दिन अपडेट की गई खबरों में 2022 में 70 अरब वॉन से अधिक की लागत से शुरू की गई प्रणाली पर सवाल उठाए गए। इसका मकसद उपग्रहों और टोही विमानों से मिली तस्वीरों को एक जगह जोड़ना था, ताकि सैन्यकर्मी कई स्रोतों की जानकारी एक साथ देखकर खतरों का आकलन कर सकें।
प्रणाली के संचालन से परिचित सैन्यकर्मियों के हवाले से बताया गया है कि समय पर निगरानी के लिए तस्वीरें हासिल करने और उनकी व्याख्या करने में यह प्रणाली बहुत देर लगाती है। अलग विश्लेषण उपकरणों ने काफी काम संभाल लिया है, लेकिन उन सैन्यकर्मियों का कहना है कि वे जानकारी की पूरी मात्रा नहीं संभाल सकते। नतीजतन, आधे से अधिक तस्वीरों का प्रभावी रूप से इस्तेमाल नहीं हो पाता।
खबरों के मुताबिक, एक आंतरिक आकलन में अनुपयोगी रह जाने वाली जानकारी का मूल्य सालाना 900 अरब वॉन से अधिक, यानी 960 अरब वॉन आंका गया। यह अनुपयोगी खुफिया जानकारी को दिया गया अनुमानित मूल्य है, रक्षा बजट से होने वाला सालाना भुगतान नहीं। इस आकलन का आधार सार्वजनिक नहीं किया गया है।
यह विवाद पहले से प्रक्षेपित पांच उपग्रहों से आगे तक जाता है। दक्षिण कोरिया दर्जनों छोटे उपग्रह जोड़ने और अंततः मौजूदा बेड़े की जगह नए उपग्रह लाने की योजना बना रहा है। ऐसे में जमीनी प्रणालियों की गति यह तय करने में अहम होगी कि इन निवेशों से कितनी उपयोगी खुफिया जानकारी मिलती है।
425 उपग्रहों का निर्धारित काम
425 उपग्रह समूह में सिंथेटिक अपर्चर रडार, यानी SAR, से लैस चार उपग्रह और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल तथा इन्फ्रारेड सेंसर वाला एक उपग्रह शामिल है। रडार रेडियो संकेत भेजकर और उनके परावर्तन को मापकर तस्वीरें बनाता है। यह रात में और बादलों के बीच भी जमीन पर नजर रख सकता है, जबकि ऑप्टिकल और इन्फ्रारेड उपकरण अलग-अलग तरह की दृश्य और ताप संबंधी जानकारी जुटाते हैं।
दक्षिण कोरिया इन पूरक सेंसरों के जरिए उत्तर कोरिया की सैन्य गतिविधियों, जिनमें मिसाइल अड्डे और परमाणु सुविधाएं शामिल हैं, पर नजर रखना चाहता है। ये उपग्रह किल चेन प्रणाली को सहयोग देते हैं। इस प्रणाली का उद्देश्य हमले की तैयारियों का पता लगाना, खतरे की पहचान करना और पहले से हमला करने में मदद देना है।
नवंबर 2025 के एक बयान के समय रक्षा मंत्री बताए गए आन ग्यू-बेक ने निगरानी की इस प्रस्तावित क्षमता का वर्णन इन शब्दों में किया था:
हर मौसम में, चौबीसों घंटे पूरे कोरियाई प्रायद्वीप पर निगरानी और टोही करने में सक्षम...
पहले की एक योजना में पूरे उपग्रह समूह के तैयार होने पर उत्तर कोरिया की प्रमुख सुविधाओं की जानकारी करीब हर दो घंटे में जुटाने की क्षमता बताई गई थी। इसलिए प्रायद्वीप पर निगरानी के तहत बार-बार अवलोकन के मौके मिलते हैं। हर तस्वीर को संचार, व्याख्या और सैन्य रिपोर्टिंग की प्रक्रिया से गुजरना होता है।
ताजा खबर के अनुसार, पांचों उपग्रह 2025 में परिचालन सेवा में आ गए। पहले की योजना में पांचवें उपग्रह के जून में सेवा में आने की प्रतीक्षा की बात कही गई थी, लेकिन उसकी प्रकाशन तिथि उपलब्ध नहीं है, इसलिए दोनों खबरों के कार्यक्रम का सटीक मिलान संभव नहीं है।
तस्वीरें कहां अटक रही हैं
बहु-स्रोत छवि संयोजन प्रणाली को 425 उपग्रहों की तस्वीरों को टोही विमानों से ली गई तस्वीरों के साथ जोड़ने के लिए बनाया गया था। छवि संयोजन का अर्थ है अलग-अलग अवलोकनों को साथ लाना, ताकि विश्लेषक उनकी तुलना कर किसी स्थान या गतिविधि की अधिक पूरी तस्वीर बना सकें।
जमीनी उपकरण पहले उपग्रहों की तस्वीरें प्राप्त करते हैं। इसके बाद सैन्यकर्मी उनकी व्याख्या करते हैं और खुफिया रिपोर्ट तैयार करते हैं। यह संयोजन प्रणाली इस काम को मिलिट्री इंटेलिजेंस मैनेजमेंट सिस्टम, यानी MIMS, से जोड़ती है। MIMS का इस्तेमाल सैन्य खुफिया जानकारी के प्रबंधन और कमान नेटवर्क के साथ सूचना साझा करने के लिए किया जाता है।
खबरों के मुताबिक, समस्या सामग्री को भेजने और संसाधित करने में लगने वाले समय की है। सैन्यकर्मियों का कहना है कि उपग्रहों की तस्वीरों को अब अलग विश्लेषण प्रणालियों के जरिए संभाला जा रहा है। टोही ड्रोन भी अलग उपकरणों पर निर्भर हैं, क्योंकि संयोजन प्रणाली उनकी तस्वीरों को पर्याप्त तेजी से संसाधित नहीं कर सकती।
मिसाइल केंद्र पर नजर रख रहे कमांडर के लिए हर चरण में गति अहम है। तस्वीर को जमीन तक पहुंचना, उसकी जांच होना और जवाबी कार्रवाई के जिम्मेदार लोगों तक पहुंचना जरूरी है, जबकि उसमें दिखाई गई गतिविधि अब भी प्रासंगिक हो। ज्यादा तस्वीरें जुटाने से पूरी प्रक्रिया पर काम का बोझ बढ़ता है।
एक परीक्षण में 10 से कम तस्वीरें इस्तेमाल हुईं
जून 2024 का एक परिचालन मूल्यांकन इस प्रक्रिया में आई दिक्कतों का अधिक ठोस विवरण देता है। मूल्यांकन के सात मदों में से एक कथित तौर पर निर्धारित मानक पर खरा नहीं उतरा। एक खराबी के कारण उपग्रहों की तस्वीरें जमीनी प्रणाली से छवि संयोजन प्रणाली तक नहीं पहुंच सकीं।
प्रक्षेपण से पहले सिम्युलेटर परीक्षण में 10 से कम उपग्रह तस्वीरें भेजने और प्राप्त करने का आकलन किया गया था। इस अभ्यास के लिए केवल कुछ गीगाबिट डेटा की जरूरत थी। पहले चार उपग्रहों के वास्तविक परिचालन में 100 से अधिक तस्वीरें और सैकड़ों गीगाबिट डेटा पैदा हुआ, जिसके बाद संचार की समस्याएं सामने आईं।
इस तुलना से पता चलता है कि वास्तविक परिचालन में तस्वीरों की संख्या सिमुलेशन में इस्तेमाल संख्या से दस गुने से भी अधिक थी। गीगाबिट डिजिटल जानकारी की एक इकाई है, जो एक अरब बिट के बराबर होती है। बड़ी और अधिक विस्तृत तस्वीरों की फाइलों के लिए ज्यादा संचार क्षमता, भंडारण और प्रसंस्करण शक्ति चाहिए।
खबरों के मुताबिक, रक्षा अधिग्रहण कार्यक्रम प्रशासन ने जमीनी प्रणाली को संयोजन प्रणाली से जोड़ने के लिए अलग सर्वर और नए उपकरणों की व्यवस्था की। यह काम एलआईजी नेक्स1 ने किया। पहले की खबर में इसे पिछले वर्ष दिसंबर में पूरा हुआ बताया गया था।
अक्टूबर के आरोपों में लगातार हो रही देरी और अलग विश्लेषण उपकरणों पर निर्भरता का जिक्र है। ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ ने जवाब दिया कि उपग्रहों की सारी जानकारी का इस्तेमाल किया जा रहा है और अलग-अलग विश्लेषण प्रणालियां पर्याप्त हैं। हालांकि, संयोजन प्रणाली की आलोचना पर उसने अलग से कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया।
विश्लेषकों को डेटा की गति के साथ तालमेल रखना होगा
दक्षिण कोरिया की निगरानी से जुड़ी कार्यबल क्षमता भी इस सवाल का एक हिस्सा है। पहले की योजना में सैन्य निगरानी और टोही विशेषज्ञों की संख्या करीब 210 बताई गई थी। अगले वर्ष तक इसे बढ़ाकर लगभग 280 करने की योजना थी।
इससे करीब 70 विशेषज्ञ जुड़ेंगे, यानी एक-तिहाई की वृद्धि। नियोजित विस्तार के साथ और उपग्रह, अधिक तस्वीरें और विमानों से मिले अवलोकनों तथा दूसरी खुफिया जानकारी से तुलना करने के लिए अधिक डेटा भी आएगा।
मुख्य उपग्रह जमीनी केंद्र आनयांग स्थित रक्षा खुफिया कमान में है। दूसरा केंद्र ओसान स्थित वायुसेना संचालन कमान में है, जबकि मोबाइल जमीनी प्रणाली बैकअप क्षमता देती है।
ये केंद्र उपग्रहों के संचालन, उनसे मिली जानकारी प्राप्त करने और उसकी व्याख्या करने का काम बांटते हैं। सर्वर और संचार उपकरण फाइलें संभालते हैं, जबकि प्रशिक्षित कर्मी तस्वीरों में दिखाई गई सैन्य गतिविधियों की पहचान कर कमांडरों के लिए आकलन तैयार करते हैं।
घरेलू उत्पादन के आंकड़े एक और बाधा दिखाते हैं
खबरों के मुताबिक, पांचवें टोही उपग्रह में घरेलू उत्पादन की हिस्सेदारी 51.3% थी। SAR सेंसर में यह हिस्सेदारी इससे कम, 45% थी, जबकि डेटा लिंक ट्रांसमीटर और एंटीना पूरी तरह विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर थे।
खरीद के बताए गए आंकड़ों में देश में हासिल किए गए पुर्जों के लिए 121.2 अरब वॉन और विदेश से हासिल किए गए पुर्जों के लिए 58.9 अरब वॉन शामिल हैं। विदेश से खरीदे गए SAR सेंसर की लागत 30.2 अरब वॉन थी।
ट्रांसमीटर उपग्रह से जानकारी भेजता है और एंटीना जमीन से संचार के लिए जरूरी संपर्क उपलब्ध कराता है। डेटा प्रक्रिया में उनकी भूमिका के चलते आपूर्ति और तकनीकी सहायता व्यापक प्रणाली के संचालन के लिए अहम हैं।
एक सैन्य अधिकारी ने पांचवें उपग्रह को प्रक्षेपण के लिए अमेरिका ले जाते समय सीमा शुल्क से जुड़ी अड़चनों का भी जिक्र किया। अधिकारी ने छोटे टोही उपग्रहों के भविष्य के प्रक्षेपणों में ऐसे जोखिमों पर पहले से विचार करने की अपील की।
अधिक उपग्रहों से काम का बोझ काफी बढ़ेगा
दक्षिण कोरिया 425 परियोजना के बाद करीब 40 छोटे और सूक्ष्म टोही उपग्रह तैनात करने की योजना बना रहा है। 2020 के दशक के उत्तरार्ध में सेवा शुरू होने पर इनके जरिए करीब हर 30 मिनट में निगरानी का लक्ष्य है।
पांच 425 उपग्रहों के लिए बताए गए करीब दो घंटे के अंतराल की तुलना में इससे चार गुनी बार अवलोकन के मौके मिलेंगे। इससे योजनाकारों को बदलती गतिविधियों पर अधिक बार नजर रखने का मौका मिलेगा, लेकिन जमीनी केंद्रों को ज्यादा जानकारी प्राप्त और विश्लेषित करनी होगी।
कोरिया एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज और हनव्हा सिस्टम्स छोटे उपग्रह कार्यक्रम में प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। पहले के कार्यक्रम में उस योजना वर्ष के दिसंबर में दोनों कंपनियों के एक-एक प्रदर्शन उपग्रह प्रक्षेपित करने की बात थी। सेना ने करीब 40 उपग्रहों के लिए एक आपूर्तिकर्ता चुनने पर विचार किया था, लेकिन दोनों कंपनियों के बीच उत्पादन बांटने पर भी विचार हुआ।
अक्टूबर की खबर के अनुसार, सूक्ष्म उपग्रह समूहों का आगमन 2027 में शुरू होना है और सेना उनकी जानकारी बहु-स्रोत छवि संयोजन प्रणाली से प्राप्त करना चाहती है। इससे विवादित प्रसंस्करण क्षमता अगली विस्तार योजना के केंद्र में आ जाती है।
छोटे उपग्रहों के लिए जमीनी उपकरण एलआईजी नेक्स1 द्वारा विकसित किए जाने की उम्मीद है। योजना के अनुसार, सैन्य जमीनी केंद्र वायुसेना संचालन कमान में और नागरिक केंद्र जेजू स्थित राष्ट्रीय उपग्रह संचालन केंद्र में होगा।
अगले उपग्रह बेड़े का इस्तेमाल सेना और नागरिक उपयोगकर्ता साझा करेंगे
छोटे उपग्रह कार्यक्रम में 60% मिशन सैन्य उद्देश्यों, जिनमें उत्तर कोरिया पर निगरानी शामिल है, और 40% नागरिक उद्देश्यों, जिनमें आपदा प्रतिक्रिया शामिल है, के लिए निर्धारित हैं। अभियान की एकीकृत योजना का अधिकार सेना के पास रहेगा, ताकि वह अभियानों के लिए जरूरी अवलोकन के मौके सुनिश्चित कर सके।
साझा इस्तेमाल के लिए सुरक्षा व्यवस्थाओं का तालमेल भी जरूरी है। पहले की योजना में यह चिंता जताई गई थी कि सैन्य एन्क्रिप्शन के बिना नागरिक जमीनी उपकरण सैन्य प्रणालियों से जुड़ने पर सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकते हैं। दोनों क्षेत्रों के इस्तेमाल के लिए तैयार किया गया जमीनी ढांचा इसका प्रस्तावित समाधान है।
दक्षिण कोरिया मिलिट्री रिकॉनिसेंस सैटेलाइट II कार्यक्रम की भी तैयारी कर रहा है। इस पर 1.3 ट्रिलियन वॉन खर्च होने की खबर है और 2031 से सेवा शुरू करने की योजना है। मौजूदा उपग्रहों की परिचालन अवधि पूरी होने पर यह कार्यक्रम उनकी जगह लेगा। इसमें भी एक ऑप्टिकल और इन्फ्रारेड उपग्रह तथा चार रडार उपग्रह होंगे।
प्रक्षेपण, परीक्षण और नियोजित विस्तार का क्रम दिखाता है कि जमीनी नेटवर्क पर मांग कितनी तेजी से बढ़ रही है:
- दिसंबर 2023: ऑप्टिकल और इन्फ्रारेड सेंसर वाला पहला 425 उपग्रह प्रक्षेपित किया गया।
- अप्रैल 2024: दूसरा उपग्रह प्रक्षेपित किया गया।
- जून 2024: खबरों के मुताबिक, परिचालन मूल्यांकन में संचार संबंधी खराबी और सात में से एक आकलन मद में कमी का पता चला।
- 23 से 24 अक्टूबर, 2026: तस्वीरों के इस्तेमाल को लेकर आरोप और ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ का खंडन प्रकाशित हुआ।
- 2027: ताजा खबर के अनुसार, इसी वर्ष सूक्ष्म उपग्रह समूहों को शामिल करना शुरू होना है।
- 2031 से: प्रतिस्थापन टोही उपग्रह कार्यक्रम के सेवा में आने की योजना है।
समय पर विश्लेषण अब क्यों अहम है
उत्तर कोरिया के 12 अक्टूबर के मिसाइल प्रक्षेपण तात्कालिक सुरक्षा संदर्भ देते हैं। दक्षिण कोरिया के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ ने सुबह करीब 9:20 बजे प्योंगयांग क्षेत्र से कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागे जाने का पता लगाया। इनमें से कम से कम एक ने 900 किलोमीटर से अधिक दूरी तय की।
उपग्रहों की तस्वीरों का काम उन सेंसरों से अलग है जो प्रक्षेपण के बाद मिसाइल को ट्रैक करते हैं। अड्डों, उपकरणों और तैयारियों की तस्वीरें सैन्यकर्मियों को प्रक्षेपण से पहले गतिविधियों का आकलन करने और बाद में हुए बदलावों को समझने में मदद कर सकती हैं। इसके लिए अवलोकनों की तुलना करना और समय पर आकलन पहुंचाना जरूरी है।
मुख्य असहमति इस बात पर है कि क्या दक्षिण कोरिया के मौजूदा उपकरण उपग्रहों से आने वाले पूरे डेटा को उपयोगी खुफिया जानकारी में बदल सकते हैं। कमी की बात करने वाले सैन्यकर्मियों का कहना है कि इस डेटा का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल नहीं हो पाता; ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ का कहना है कि सारी जानकारी का इस्तेमाल हो रहा है। दर्जनों उपग्रह जोड़ने की योजना के मद्देनजर प्रसंस्करण क्षमता, कर्मचारी और सुरक्षित सूचना-वितरण निगरानी के अगले चरण की व्यावहारिक जरूरतें हैं।
मुख्य बिंदु
- खबरों के मुताबिक, सैन्यकर्मियों का कहना है कि दक्षिण कोरिया के पांच 425 उपग्रहों से मिली तस्वीरों में से केवल करीब 40% का इस्तेमाल हो रहा है।
- ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ का कहना है कि उपग्रहों से मिली सारी जानकारी का इस्तेमाल होता है और अलग विश्लेषण प्रणालियों की क्षमता पर्याप्त है।
- 2022 में 70 अरब वॉन से अधिक की लागत से शुरू की गई संयोजन प्रणाली पर उपग्रहों और ड्रोन की तस्वीरों को बहुत धीमी गति से संसाधित करने का आरोप है।
- खबरों के मुताबिक, जून 2024 के मूल्यांकन में संचार संबंधी खराबी सामने आई। इससे पहले परीक्षण में वास्तविक परिचालन के मुकाबले बहुत कम तस्वीरें इस्तेमाल हुई थीं।
- करीब 40 छोटे उपग्रहों की योजना है, जिनसे लगभग हर 30 मिनट में निगरानी का लक्ष्य है।
- खबरों के मुताबिक, 1.3 ट्रिलियन वॉन की लागत वाला प्रतिस्थापन उपग्रह समूह 2031 से सेवा में आने की योजना है।






