20 मिनट की बातचीत से वर्षों की खामोशी टूटी
आंग सान सू ची ने 22 अक्टूबर, 2026 को अपने बेटे किम एरिस से 20 मिनट बात की। पांच साल से अधिक समय में यह उनकी पहली सीधी बातचीत थी। म्यांमार के सैन्य अधिकारियों ने हिरासत में रखी गईं पूर्व नेता की एक और दुर्लभ झलक की अनुमति दी। एरिस ने लंदन के मेफेयर इलाके में म्यांमार के दूतावास से फोन पर बात की, जबकि उनकी 81 वर्षीय मां नेपीडॉ में हिरासत में थीं।
विषय-सूची
- 20 मिनट की बातचीत से वर्षों की खामोशी टूटी
- परिवार की बातें, बातचीत पर सीमाएं
- एरिस को उनकी सेहत और हिरासत के बारे में क्या पता चला
- तख्तापलट से फिर शुरू हुए बाहरी संपर्क तक
- दो किताबें और राजा का सीलबंद संदेश
- इस संपर्क का राजनीतिक महत्व क्यों है
- 18 साल की सजा और व्यापक कैदी अभियान
- परिवार की अगली मांगें
- मुख्य बातें
म्यांमार के राष्ट्रपति के प्रवक्ता ने बताया कि फोन पर बातचीत म्यांमार के समयानुसार दोपहर 2:30 बजे, यानी 0800 GMT पर शुरू हुई। प्रवक्ता ने मां-बेटे की टेलीफोन पर बात करते हुए तस्वीरें भी जारी कीं। एरिस ने कहा कि ब्रिटेन के विदेश कार्यालय ने उन्हें दूतावास जाने के लिए सूचित किया था।
49 वर्षीय एरिस ने कहा कि सू ची की आवाज़ "काफी स्वस्थ" लग रही थी और उन्होंने बताया कि उनकी तबीयत अच्छी है। बातचीत परिवार पर केंद्रित रही और शुरुआत में सू ची ने उनकी तथा अन्य रिश्तेदारों की खैरियत पूछी। दोनों ने संवेदनशील मुद्दों पर बात नहीं की, क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि बातचीत रिकॉर्ड की जाएगी।
वर्षों तक मां के बारे में कभी-कभार मिलने वाली अप्रत्यक्ष जानकारी पर निर्भर रहे एरिस के लिए उनकी आवाज़ सुनना राहत देने वाला था। 22 अक्टूबर को फेसबुक पर प्रकाशित अपने बयान में उन्होंने संपर्क के लिए अभियान चलाने वालों का धन्यवाद किया और बताया कि यह पल उनके लिए कितना मायने रखता है।
उनकी आवाज़ फिर से सुनना मेरे लिए शब्दों में बयां करने से कहीं अधिक मायने रखता है।
1 फरवरी, 2021 को सेना द्वारा उनकी निर्वाचित सरकार का तख्तापलट किए जाने के बाद से सू ची हिरासत में हैं। यह फोन कॉल अगस्त में रेड क्रॉस के एक प्रतिनिधि से हुई मुलाकात और 19 अक्टूबर को ब्रिटेन के राजा चार्ल्स तृतीय की ओर से किताबें तथा पत्राचार सौंपे जाने के बाद हुआ। एरिस ने संपर्क का स्वागत किया, लेकिन नियमित निजी बातचीत, स्वतंत्र चिकित्सा देखभाल और बिना शर्त रिहाई की मांग जारी रखी।
परिवार की बातें, बातचीत पर सीमाएं
एरिस ने कहा कि उनकी मां ने सबसे पहले उनकी और परिवार के बाकी सदस्यों की सेहत के बारे में पूछा। वह उनसे उनकी हालत और रहने की व्यवस्था के बारे में पूछ सके और उन्हें भरोसा दिला सके कि उनकी आज़ादी के लिए प्रयास जारी हैं।
अपने सार्वजनिक बयान में उन्होंने शुरुआत में बातचीत के बारे में बहुत कम जानकारी दी। बाद में की गई टिप्पणियों में उन्होंने ऐसी बातचीत का जिक्र किया, जिस पर अधिकारियों के सुनने की आशंका थी। एरिस ने बताया कि उन्होंने निजी विषयों तक ही बात क्यों सीमित रखी।
मूल रूप से हमने सिर्फ परिवार की बातें कीं।
हमें पता था कि फोन कॉल रिकॉर्ड की जाएगी, इसलिए हमने किसी संवेदनशील विषय पर बात नहीं की।
एरिस ने कहा कि उन्हें दूतावास में अकेले फोन पर बात करने की अनुमति दी गई थी। रिकॉर्डिंग की उनकी चिंता बताती है कि उनकी मांगों में निजता अब भी केंद्रीय मुद्दा क्यों है: कमरे में किसी दूसरे व्यक्ति के बिना बात कर पाना भी परिवार को अपने शब्द सावधानी से चुनने पर मजबूर करता है, जब उसे लगता हो कि कोई बातचीत सुन रहा है।
म्यांमार के अधिकारियों ने इस बातचीत को "वाणिज्य दूतावास की टेलीफोन बातचीत" बताया। राष्ट्रपति के प्रवक्ता की ओर से जारी तस्वीरों में सू ची गुरुवार की तारीख दिखाने वाले कैलेंडर के नीचे बैठी दिखाई दीं। एरिस ने भी कुछ तस्वीरें प्रकाशित कीं, जिनमें वह दूतावास के बाहर नजर आते हैं।
एरिस को उनकी सेहत और हिरासत के बारे में क्या पता चला
सू ची ने एरिस से कहा कि उनकी तबीयत अच्छी है और उन्होंने उनकी आवाज़ को मजबूत बताया। एरिस ने यह भी कहा कि उनकी मां के दाएं हाथ में टेंडिनाइटिस है। टेंडिनाइटिस उस ऊतक में जलन या सूजन है जो मांसपेशी को हड्डी से जोड़ता है और इससे हिलने-डुलने में दर्द हो सकता है।
एरिस ने कहा कि उनकी मां नेपीडॉ के एक घर में अधिकतर अकेली रहती हैं, जिसके आसपास पुलिस तैनात है। उन्हें एक बगीचे में जाने की अनुमति है, जिसे एरिस ने लगभग पूरी तरह झाड़-झंखाड़ वाली जगह बताया। अधिकारियों का कहना है कि अप्रैल में उन्हें जेल से घर में नजरबंदी में भेजा गया था। बताया गया कि यह स्थानांतरण 30 अप्रैल को हुआ।
उनका सटीक पता सार्वजनिक नहीं किया गया है और स्थानांतरण तथा उनकी चिकित्सा स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इससे पहले उनकी सेहत को लेकर चिंताओं में हृदय संबंधी समस्याओं की खबरें भी शामिल थीं। कॉल के बाद भी एरिस ने उनकी सेहत को लेकर चिंता जताई और स्वतंत्र चिकित्सा देखभाल तक पहुंच की मांग की।
सू ची की उम्र इस मांग को और तात्कालिक बनाती है। एरिस ने कहा कि उनकी मां उन्हें बता सकीं कि वह ठीक हैं, हालांकि उन्होंने हिरासत में उम्र बढ़ने की मुश्किलों को भी स्वीकार किया। स्वतंत्र रूप से उनकी जांच कर सकने वाला डॉक्टर परिवार को उनकी स्थिति का अधिक विस्तृत आकलन दे सकता है और बता सकता है कि उन्हें किस उपचार की जरूरत है।
तख्तापलट से फिर शुरू हुए बाहरी संपर्क तक
सू ची का अलगाव फरवरी 2021 के सैन्य तख्तापलट के साथ शुरू हुआ, जब सैनिकों ने उनकी सरकार को हटा दिया और नागरिक नेताओं को गिरफ्तार कर लिया। परिवार पांच साल से अधिक समय तक उनसे सीधे बात नहीं कर पाया, जबकि उन्हें लगातार मुकदमों और लंबी जेल की सजा का सामना करना पड़ा।
गुरुवार की फोन कॉल से पहले की सार्वजनिक रूप से ज्ञात घटनाएं कई महीनों में फैली हैं:
- 1 फरवरी, 2021: सेना ने निर्वाचित सरकार का तख्तापलट किया और सू ची तथा राष्ट्रपति विन मिंट को हिरासत में लिया।
- अप्रैल 2026: तख्तापलट के नेता मिन आंग ह्लाइंग सेना नियंत्रित चुनावों के बाद राष्ट्रपति बने। इन चुनावों में सू ची की पार्टी को शामिल नहीं होने दिया गया। अधिकारियों ने उनकी बाकी सजा घटाकर 18 वर्ष कर दी और कहा कि उन्हें घर में नजरबंदी में रखा गया है।
- 17 अप्रैल: विन मिंट को म्यांमार के नए साल की आम माफी के तहत रिहा किया गया, लेकिन उन पर कड़ी निगरानी जारी रही।
- 3 अगस्त: सू ची ने म्यांमार में रेड क्रॉस की अंतरराष्ट्रीय समिति के प्रतिनिधि अरनॉद द बेएक से मुलाकात की।
- 7 सितंबर: एरिस ने अपना नया फ्री हर अभियान शुरू किया।
- 19 अक्टूबर: अधिकारियों ने राजा चार्ल्स की ओर से किताबें और पत्राचार सौंपते अधिकारियों की तस्वीरें जारी कीं।
- 22 अक्टूबर: सू ची और एरिस ने 20 मिनट तक फोन पर बात की।
अगस्त की मुलाकात उनकी गिरफ्तारी के बाद किसी स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय संगठन के प्रतिनिधि से उनकी पहली सार्वजनिक रूप से घोषित मुलाकात थी। इन शुरुआती संपर्कों के बाद गुरुवार की कॉल से एरिस को खुद उनसे सीधे बात करने का मौका मिला।
दो किताबें और राजा का सीलबंद संदेश
म्यांमार के अधिकारियों ने कहा कि गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने 19 अक्टूबर को मिट्टी पर दो किताबें, एक सीलबंद लिफाफा और राजा चार्ल्स की ओर से एक सीलबंद राजनयिक संदेश पहुंचाया। तस्वीरों में सू ची लकड़ी की दीवारों वाले कमरे में एक छोटी मेज के दूसरी ओर दो अधिकारियों के सामने बैठी दिखाई दीं।
किताबें थीं ब्रिजेट एलवर्थी और हेनरीएटा कोर्टल्ड की The Land Gardeners: Soil to Table और लंदन के समरसेट हाउस में लगी एक प्रदर्शनी के साथ प्रकाशित पुस्तक The World at Our Feet। दोनों किताबें मिट्टी और भोजन तथा जीवन को बनाए रखने में उसकी भूमिका से जुड़ी हैं।
बकिंघम पैलेस ने इस घोषणा या सीलबंद संदेश की सामग्री पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। म्यांमार के अधिकारियों ने सू ची को "विशेष महिला कैदी" कहा, यह शब्दावली उन्होंने पहले सार्वजनिक रूप से इस्तेमाल नहीं की थी।
वकालत समूह बर्मा कैंपेन यूके ने 22 अक्टूबर को ब्रिटिश सरकार के रुख की आलोचना की। उसने ब्रिटेन पर "बर्मी सैन्य शासन के प्रति अपने रुख को धीरे-धीरे नरम करने" का आरोप लगाया और कहा कि अधिकारियों के जरिए किताबें पहुंचाने से सेना को "प्रचार का मौका" मिला।
राजा की ओर से भेजे गए पैकेज और फोन कॉल से सू ची और उनके परिवार को निजी तौर पर लाभ हुआ है। इन घटनाओं को सार्वजनिक रूप से पेश करने से म्यांमार के शासकों को ऐसा दिखाने वाली तस्वीरें भी मिली हैं कि वे नरम व्यवहार कर रहे हैं। वे व्यापक कूटनीतिक स्वीकार्यता हासिल करने की कोशिश में इन तस्वीरों को प्रसारित कर सकते हैं।
इस संपर्क का राजनीतिक महत्व क्यों है
सू ची को सत्ता से हटाने वाले सैन्य प्रमुख मिन आंग ह्लाइंग अप्रैल में चुनाव के बाद राष्ट्रपति बने। लोकतंत्र पर नजर रखने वाले संगठनों ने उस चुनाव की आलोचना करते हुए उसे सैन्य सत्ता मजबूत करने के लिए रची गई प्रक्रिया बताया। इसके बाद उन्हें कूटनीतिक दौरों के निमंत्रण मिले हैं, जिनमें दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संगठन यानी आसियान के देशों के दौरे भी शामिल हैं।
सू ची की हिरासत लंबे समय से म्यांमार के क्षेत्रीय संगठन के साथ संबंधों को जटिल बनाती रही है। शाही परिवार, मानवीय संगठन के प्रतिनिधि और उनके बेटे से संपर्क की अनुमति देकर अधिकारी विदेशी सरकारों के सामने ऐसे घटनाक्रम रख रहे हैं, जिन पर वे उनसे बातचीत करने का फैसला लेते समय विचार कर सकती हैं।
इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज के शोधकर्ता मॉर्गन माइकल्स ने कहा कि अधिकारी सू ची का इस्तेमाल "अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सदस्यों से रियायतें हासिल करने के लिए" कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि सीमित कदमों को विदेशों में सकारात्मक प्रतिक्रिया क्यों मिल सकती है।
लेकिन आसियान और उससे बाहर के कई लोग उनकी रिहाई देखना चाहते हैं," उन्होंने कहा। "इस तरह के कदमों का स्वागत होने की संभावना है, भले ही वे दिखावटी हों या रणनीतिक मकसद से उठाए गए हों।
सू ची की जीवनीकार मोन मोन म्यात ने भी बिना शर्त रिहाई की मांग की और उनकी हिरासत के राजनीतिक इस्तेमाल पर आपत्ति जताई। उन्होंने हिरासत को गैरकानूनी बताया।
शासन को आंग सान सू ची का इस्तेमाल सौदेबाजी के मोहरे के तौर पर बंद करना चाहिए," उन्होंने कहा। "यह गैरकानूनी हिरासत है। उन्हें बिना शर्त रिहा किया जाना चाहिए।
18 साल की सजा और व्यापक कैदी अभियान
सू ची भड़काने, भ्रष्टाचार, चुनावी धोखाधड़ी और राज्य गोपनीयता कानून के उल्लंघन समेत कई आरोपों में बाकी 18 साल की सजा काट रही हैं। वह आरोपों से इनकार करती हैं। उनके समर्थक और मानवाधिकार संगठन मुकदमों को राजनीति से प्रेरित और सेना को सत्ता में बनाए रखने की कोशिश मानते हैं।
पूर्व स्टेट काउंसलर सू ची 2016 से तख्तापलट तक म्यांमार की वास्तविक नेता थीं। वह 1989 से 2010 के बीच कुल 15 साल पहले ही घर में नजरबंदी में बिता चुकी थीं। लोकतंत्र के लिए उनके अहिंसक अभियान के लिए उन्हें 1991 में नोबेल शांति पुरस्कार मिला था।
एरिस ने अपनी मां के मामले को हजारों अन्य लोगों की हिरासत से जोड़ा है। उनके फ्री हर अभियान में मां के साथ 15,088 अन्य राजनीतिक कैदियों की रिहाई की मांग की गई। अभियान की खबरों में यह संख्या दी गई थी। वकालत संगठन असिस्टेंस एसोसिएशन फॉर पॉलिटिकल प्रिजनर्स तख्तापलट के विरोध से जुड़ी गिरफ्तारियों के दैनिक आंकड़े जारी करता है।
विन मिंट की स्थिति इसका एक और उदाहरण है कि जेल से रिहाई के बाद भी पाबंदियां जारी रह सकती हैं। 17 अप्रैल की आम माफी के तहत रिहा होने के बावजूद पूर्व राष्ट्रपति कड़ी निगरानी में रहे।
म्यांमार का संकट हिरासत में रखे गए नेताओं से कहीं व्यापक है। तख्तापलट के खिलाफ विरोध प्रदर्शन सशस्त्र प्रतिरोध और गृहयुद्ध में बदल गए, जिससे लाखों लोग विस्थापित हुए। हिरासत से बिछड़े परिवारों की तात्कालिक मांगें स्पष्ट हैं: अपने रिश्तेदारों का पता जानना, चिकित्सा देखभाल पाना, निजी तौर पर बात करना और उन्हें घर वापस लाना।
परिवार की अगली मांगें
एरिस ने नियमित, सीधे और निजी पारिवारिक संपर्क, स्वतंत्र चिकित्सा जांच तक पहुंच और अपनी मां तथा सभी अन्य राजनीतिक कैदियों की तत्काल, बिना शर्त रिहाई की मांग की। अगली कॉल के लिए कोई समय तय नहीं किया गया और न ही उनकी रिहाई की तारीख घोषित हुई।
उन्होंने ब्रिटेन और म्यांमार के सैन्य अधिकारियों से बातचीत करने वाली अन्य सरकारों से आग्रह किया कि वे प्रगति को "आजादी, मानवाधिकार और जवाबदेही के आधार पर परखें, न कि प्रचार या कूटनीतिक दिखावे के आधार पर।" उन्हें चिंता है कि उनकी मां तक पहुंच को मान्यता, प्रतिबंधों या राजनीतिक लाभ से जुड़ी बातचीत का हिस्सा बनाया जा सकता है।
अपने बयान में एरिस ने बताया कि गुरुवार की बातचीत से परिवार के लिए क्या बदला और क्या नहीं।
आपकी आवाज़ों ने मुझे अपनी मां की आवाज़ फिर से सुनने में मदद की। कृपया दुनिया को इस पल को उनकी आज़ादी न समझने दें। एक बातचीत नियमित पारिवारिक संपर्क नहीं है। पारिवारिक संपर्क आज़ादी नहीं है।
एरिस ने कॉल को संभव बनाने में मदद के लिए समर्थकों का धन्यवाद किया और उनसे रिहाई की मांग जारी रखने को कहा। वर्षों की खामोशी के बाद वह आखिरकार अपनी मां की आवाज़ सुन पाए और उनके रोजमर्रा के जीवन के बारे में पूछ सके। उनकी 20 मिनट की बातचीत खत्म होने पर भी वह हिरासत में थीं।
मुख्य बातें
- सू ची और किम एरिस ने 22 अक्टूबर, 2026 को बात की। पांच साल से अधिक समय में यह उनकी पहली सीधी बातचीत थी।
- कॉल 20 मिनट चली। एरिस ने लंदन स्थित म्यांमार के दूतावास से बात की।
- एरिस ने कहा कि उनकी मां की आवाज़ काफी स्वस्थ लगी, लेकिन उनके दाएं हाथ में टेंडिनाइटिस है।
- अधिकारियों का कहना है कि वह नेपीडॉ में घर में नजरबंद हैं और बाकी 18 साल की सजा काट रही हैं।
- फोन कॉल से पहले अगस्त में रेड क्रॉस की मुलाकात हुई थी और 19 अक्टूबर को राजा चार्ल्स की ओर से किताबें तथा पत्राचार पहुंचाए गए थे।
- एरिस अपनी मां और सभी राजनीतिक कैदियों के लिए नियमित निजी संपर्क, स्वतंत्र चिकित्सा देखभाल और बिना शर्त रिहाई चाहते हैं।






