कारखानों और कंप्यूटिंग सुविधाओं के लिए नए कार्बन लक्ष्य
चीन उद्योग और सूचना प्रौद्योगिकी को शामिल करने वाली नई योजना के तहत प्रमुख औद्योगिक उत्पादों के लिए कार्बन फुटप्रिंट लेखांकन के लगभग 400 नियम और मानक बनाने तथा 2030 तक करीब 500 राष्ट्रीय शून्य-कार्बन कारखाने और कंप्यूटिंग सुविधाएं स्थापित करने की योजना बना रहा है।
विषय-सूची
- कारखानों और कंप्यूटिंग सुविधाओं के लिए नए कार्बन लक्ष्य
- कार्बन पर दो तरह का नियंत्रण क्या है?
- नीति का विकास
- पारंपरिक उद्योग और नई ऊर्जा मांग, दोनों पर ध्यान
- 500 शून्य-कार्बन सुविधाओं में क्या शामिल होगा
- किन तकनीकों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है?
- 400 उत्पाद लेखांकन मानक क्यों मायने रखते हैं
- स्थानीय बजट और नई परियोजनाओं की अधिक कड़ी जांच
- व्यापक जलवायु चुनौती में इन लक्ष्यों की जगह
- मुख्य बिंदु
उद्योग और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 21 अक्टूबर, 2026 को योजना सार्वजनिक की। इसमें 2030 तक औद्योगिक मूल्यवर्धन की प्रति इकाई कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को 2025 के स्तर से कम से कम 17% घटाने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही, निर्धारित आकार सीमा से ऊपर के औद्योगिक उद्यमों में मूल्यवर्धन की प्रति इकाई ऊर्जा खपत कम से कम 10% घटाई जाएगी।
उद्योग और सूचना प्रौद्योगिकी में कार्बन उत्सर्जन की दोहरी नियंत्रण प्रणाली की स्थापना तेज करने की कार्यान्वयन योजना 2026 से 2030 तक की अवधि को कवर करती है। इसका मुख्य उद्देश्य ऐसी प्रणाली बनाना है जो उत्सर्जित कार्बन की कुल मात्रा और आर्थिक मूल्य पैदा करने से जुड़े उत्सर्जन, दोनों का प्रबंधन करे।
इस योजना के लक्षित स्थापित उद्योगों में इस्पात कारखाने, रासायनिक संयंत्र और निर्माण सामग्री उत्पादक शामिल हैं। सौर ऊर्जा उपकरणों का विनिर्माण और कंप्यूटिंग सुविधाएं भी ध्यान के दायरे में हैं, क्योंकि उनकी ऊर्जा मांग तेजी से बढ़ रही है। मंत्रालय कार्बन प्रबंधन का विस्तार कारखानों, औद्योगिक पार्कों, उत्पादों, निवेश परियोजनाओं और स्थानीय सरकारों तक कर रहा है।
व्यवसायों के लिए बदलाव सिर्फ अधिक दक्ष उपकरण लगाने तक सीमित नहीं हैं। कंपनियों को उत्सर्जन का बेहतर लेखा-जोखा रखना होगा, बिजली और गर्मी के लिए स्वच्छ स्रोत अपनाने होंगे और अपने उत्पादों से जुड़े कार्बन की अधिक सुसंगत जानकारी देनी होगी। स्थानीय अधिकारियों के कामकाज में इस बात की अधिक कड़ी जांच होगी कि नई औद्योगिक परियोजनाएं उत्सर्जन को किस तरह प्रभावित करती हैं।
कार्बन पर दो तरह का नियंत्रण क्या है?
चीन की दोहरी नियंत्रण प्रणाली दो अलग-अलग मापदंडों पर नजर रखती है। कुल उत्सर्जन से आशय जारी की गई कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा है। उत्सर्जन तीव्रता बताती है कि आर्थिक उत्पादन की प्रत्येक इकाई के लिए कितना उत्सर्जन होता है। कोई कारखाना कम कार्बन प्रदूषण के साथ उतने ही मूल्य का सामान बनाकर अपनी उत्सर्जन तीव्रता घटा सकता है।
औद्योगिक मूल्यवर्धन का अर्थ है उत्पादन के दौरान पैदा हुआ आर्थिक मूल्य, जिसमें से अन्य व्यवसायों से खरीदे गए इनपुट का मूल्य घटा दिया जाता है। इसलिए मंत्रालय का 17% लक्ष्य उद्योग द्वारा पैदा किए गए मूल्य की तुलना में उत्सर्जन से जुड़ा है, जबकि 10% का लक्ष्य उस मूल्य के सापेक्ष इस्तेमाल की गई ऊर्जा से संबंधित है।
सूचकांक के जरिए लक्ष्यों को समझना आसान है। अगर 2025 में औद्योगिक कार्बन तीव्रता 100 थी, तो कम से कम 17% की कमी के बाद 2030 में यह 83 या उससे नीचे होनी चाहिए। 100 से शुरू होने वाले ऊर्जा तीव्रता सूचकांक को 90 या उससे नीचे लाना होगा।
उत्पादन में वृद्धि भी मायने रखती है। अगर कारखाने अपना उत्पादन पर्याप्त रूप से बढ़ाते हैं, तो प्रति इकाई उत्पादन उत्सर्जन घटने के बावजूद कुल उत्सर्जन बढ़ सकता है। दोनों मापदंडों का प्रबंधन अधिकारियों को स्वच्छ उत्पादन और वायुमंडल में पहुंचने वाले प्रदूषण की मात्रा पर नजर रखने का तरीका देता है।
राज्य परिषद के सामान्य कार्यालय की अगस्त 2024 की नीति घोषणा ने राष्ट्रीय ढांचा तय किया था: 2026 से 2030 के दौरान कुल उत्सर्जन नियंत्रण के सहारे उत्सर्जन तीव्रता नियंत्रण को प्राथमिकता दी जाएगी। नई औद्योगिक योजना इस ढांचे को अलग-अलग क्षेत्रों और व्यवसायों के लिए कार्यों में बदलती है।
नीति का विकास
कार्बन नियंत्रण की दिशा में चीन का कदम पहले की उस प्रणाली के बाद आया है, जिसका जोर कुल ऊर्जा खपत और आर्थिक उत्पादन की तुलना में ऊर्जा के इस्तेमाल पर था। कार्बन को सीधे मापने से ऊर्जा के स्रोत को अधिक महत्व मिलता है: पवन या सौर ऊर्जा से बनी बिजली का उत्सर्जन स्वरूप कोयला जलाकर पैदा की गई बिजली से अलग होता है।
नीति कई चरणों में विकसित हुई है:
- 2021: चीन ने घोषणा की कि वह ऊर्जा खपत पर दोहरे नियंत्रण से धीरे-धीरे कार्बन उत्सर्जन के दोहरे नियंत्रण की ओर बढ़ेगा।
- जुलाई 2023: व्यापक सुधारों को गहरा करने वाली केंद्रीय समिति ने इस बदलाव का समर्थन किया।
- 2 अगस्त, 2024: राज्य परिषद ने कार्बन उत्सर्जन की दोहरी नियंत्रण प्रणाली स्थापित करने की राष्ट्रीय कार्ययोजना जारी की।
- 2025 के अंत तक: कार्ययोजना में स्थानीय कार्बन बजट के परीक्षणों के साथ मापन, लेखांकन और निगरानी क्षमता मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया।
- 21 अक्टूबर, 2026: मंत्रालय ने 2026 से 2030 तक की अवधि को कवर करने वाली औद्योगिक कार्यान्वयन योजना सार्वजनिक की।
- 2030 तक: औद्योगिक मानक, सुविधाओं का निर्माण और उत्सर्जन तीव्रता में कमी के लक्ष्य पूरे किए जाने हैं।
2024 के ढांचे में यह भी कहा गया था कि कार्बन संकेतकों को राष्ट्रीय आर्थिक और सामाजिक विकास की योजना तथा स्थानीय सरकारों के प्रदर्शन के आकलन में शामिल किया जाए। चीन के उत्सर्जन चरम पर पहुंचने के बाद यह ढांचा कुल उत्सर्जन नियंत्रण को मुख्य मापदंड बनाने की दिशा में बढ़ेगा, जबकि उत्सर्जन तीव्रता नियंत्रण उसका समर्थन करेगा।
पारंपरिक उद्योग और नई ऊर्जा मांग, दोनों पर ध्यान
इस्पात, अलौह धातुएं, पेट्रोकेमिकल, रसायन और निर्माण सामग्री मंत्रालय की प्रवर्तन योजनाओं के केंद्र में हैं। अधिकारियों को औद्योगिक ऊर्जा संरक्षण निरीक्षण मजबूत करने और औद्योगिक ऊर्जा संरक्षण पर्यवेक्षण उपाय लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
इन स्थापित क्षेत्रों के साथ सौर विनिर्माण और कंप्यूटिंग सुविधाएं भी शामिल हैं। स्वच्छ ऊर्जा के लिए उपकरण बनाने में भी ऊर्जा लगती है, जबकि डिजिटल जानकारी को संसाधित और संग्रहित करने वाली सुविधाओं को उपकरण और शीतलन प्रणालियां चलाने के लिए बिजली चाहिए।
बीजिंग इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की बीजिंग लैबोरेटरी ऑफ कार्बन न्यूट्रैलिटी सिस्टम्स इंजीनियरिंग के निदेशक वेई यिमिंग ने कहा कि योजना में अधिक ऊर्जा खपत वाले पारंपरिक उद्योगों और तेजी से बढ़ते उभरते क्षेत्रों, दोनों को शामिल किया गया है। उनके आकलन में मौजूदा औद्योगिक उत्सर्जन घटाने के साथ नए स्रोतों से होने वाली वृद्धि का प्रबंधन भी जरूरी है।
मंत्रालय ऊर्जा खपत सीमा, कार्बन उत्सर्जन सीमा और अधिक ऊर्जा खपत वाले प्रमुख उपकरणों की दक्षता के लिए मानकों को भी मजबूत करना चाहता है। ये उपाय निरीक्षणों को अधिक स्पष्ट तकनीकी जरूरतों से जोड़ते हैं, जिससे नियामकों और कंपनियों को प्रदर्शन के आकलन के लिए समान मानक मिलते हैं।
उद्योगों का दायरा एक व्यापक ढांचे का हिस्सा है। योजना के काम को चार क्षेत्रों में बांटा गया है: प्रमुख क्षेत्र; उद्यम और औद्योगिक पार्क; औद्योगिक उत्पाद; और स्थानीय अधिकारी तथा परियोजनाएं। ये सभी मिलकर राष्ट्रीय लक्ष्यों को उपकरणों, कारखानों के संचालन और नए निर्माण से जुड़े फैसलों से जोड़ते हैं।
500 शून्य-कार्बन सुविधाओं में क्या शामिल होगा
करीब 500 का लक्ष्य राष्ट्रीय शून्य-कार्बन कारखानों और शून्य-कार्बन कंप्यूटिंग सुविधाओं, दोनों को मिलाकर है। सार्वजनिक घोषणा में इन दोनों श्रेणियों के बीच कोई ब्योरा या अलग-अलग सुविधाओं के लिए विस्तृत समय-सीमा नहीं दी गई है।
पात्र व्यवसायों को हरित बिजली से सीधे जुड़ाव और बिजली आपूर्ति, पावर ग्रिड, मांग तथा ऊर्जा भंडारण का समन्वय करने वाली प्रणालियां अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। व्यावहारिक रूप से इसका अर्थ है कि बिजली उत्पादन और कारखानों की खपत की योजना साथ-साथ बनाई जाए। भंडारण से बिजली उत्पादन और जरूरत के समय के बीच के अंतर को संतुलित करने में मदद मिलेगी।
योजना में शून्य-कार्बन बिजली, गर्मी, हाइड्रोजन और ईंधन का अधिक इस्तेमाल करने की बात कही गई है। इसके अलावा, पात्र स्थानीय क्षेत्रों को प्रांतीय स्तर के शून्य-कार्बन कारखाने और कंप्यूटिंग सुविधाएं विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है, जिससे यह पहल राष्ट्रीय कार्यक्रम से आगे भी बढ़ेगी।
औद्योगिक पार्क और आपूर्ति शृंखलाएं भी इसमें शामिल हैं। नई परियोजनाओं को शून्य-कार्बन पार्कों की ओर निर्देशित किया जाना चाहिए, जबकि व्यवसायों को कम या शून्य कार्बन उत्सर्जन वाली आपूर्ति शृंखलाएं विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस तरह किसी कारखाने के फैसले उसके ऊर्जा आपूर्तिकर्ताओं, सामग्री प्रदाताओं और लॉजिस्टिक्स व्यवस्थाओं की जरूरतों को भी प्रभावित कर सकते हैं।
डिजिटल प्रबंधन एक अन्य प्रस्तावित उपाय है। ऊर्जा इस्तेमाल और उत्सर्जन पर अधिक बारीकी से नजर रखने से कंपनियों को अक्षम उपकरण पहचानने, उत्पादन प्रक्रियाओं की तुलना करने और मांग का प्रबंधन करने में मदद मिल सकती है। योजना में बुद्धिमान उपकरणों के साथ औद्योगिक ऊर्जा संरक्षण और कार्बन कटौती के लिए बड़े कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल विकसित करने का भी समर्थन किया गया है।
किन तकनीकों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है?
मंत्रालय ने दक्ष मोटरों, ट्रांसफॉर्मरों, औद्योगिक हीट पंपों, शीतलन और तापन उपकरणों, पानी के विद्युत अपघटन से हाइड्रोजन बनाने वाले उपकरणों तथा सूचना एवं संचार उपकरणों को विकास और व्यापक इस्तेमाल की प्राथमिकता बताया है।
औद्योगिक हीट पंप पूरी तरह दहन के जरिए नई गर्मी पैदा करने के बजाय गर्मी को वहां पहुंचाते हैं जहां उसकी जरूरत होती है। पानी के विद्युत अपघटन में बिजली से पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विभाजित किया जाता है। स्वच्छ स्रोतों की बिजली इस्तेमाल करने से उस हाइड्रोजन के उत्पादन से जुड़े उत्सर्जन घट सकते हैं।
चाइना इलेक्ट्रॉनिक्स इन्फॉर्मेशन इंडस्ट्री डेवलपमेंट रिसर्च इंस्टीट्यूट के लियू वेनचियांग ने कहा कि ऊर्जा के अन्य स्रोतों की जगह बिजली का इस्तेमाल और हरित ऊर्जा की खपत बढ़ाने से 15वीं पंचवर्षीय योजना अवधि में कार्बन कटौती में करीब 25% योगदान मिलने की उम्मीद है। उन्होंने उच्च तापमान वाले हीट पंप, औद्योगिक हरित माइक्रोग्रिड तथा हरित हाइड्रोजन, अमोनिया और मेथनॉल को ऐसे क्षेत्र बताया जिन्हें विकसित करने की जरूरत है।
मंत्रालय के कार्यक्रम में विनिर्माण पायलट प्लेटफॉर्म और नवाचार केंद्र बनाने की बात भी कही गई है। पायलट सुविधाओं में तकनीकों को प्रयोगशाला अनुसंधान और पूर्ण व्यावसायिक उत्पादन के बीच के चरण में परखा जाता है। इससे व्यवसायों को यह जानने में मदद मिलती है कि कोई प्रक्रिया बड़े पैमाने पर भरोसेमंद ढंग से चल सकती है या नहीं।
चाइना पेट्रोलियम एंड केमिकल इंडस्ट्री फेडरेशन के उपाध्यक्ष लिंग यिचुन ने कहा कि ये प्राथमिकताएं पेट्रोकेमिकल और रासायनिक उद्योगों में पहले से चल रहे काम के अनुरूप हैं। उन्होंने हरित हाइड्रोजन, हरित अमोनिया और मेथनॉल के इस्तेमाल से रिफाइनिंग, विद्युतीकरण तथा कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण का उल्लेख किया। इस अंतिम प्रक्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड को वायुमंडल में छोड़ने के बजाय इस्तेमाल या भंडारण के लिए एकत्र किया जाता है।
400 उत्पाद लेखांकन मानक क्यों मायने रखते हैं
कार्बन फुटप्रिंट लेखांकन के करीब 400 नियमों और मानकों का लक्ष्य एक व्यावहारिक समस्या का समाधान करना है: कंपनियों को औद्योगिक उत्पादों से जुड़े उत्सर्जन की गणना के लिए सुसंगत तरीके चाहिए। साझा पद्धति के बिना खरीदारों और नियामकों के लिए अलग-अलग मान्यताओं के आधार पर निकाले गए आंकड़ों की तुलना करना मुश्किल होता है।
किसी उत्पाद का कार्बन फुटप्रिंट उसके जीवन के तय चरणों में होने वाले उत्सर्जन को गिनता है, जैसे कच्चे माल का उत्पादन और विनिर्माण। लेखांकन नियम तय करते हैं कि किन गतिविधियों को शामिल करना है और उनसे होने वाले उत्सर्जन की गणना कैसे करनी है।
मंत्रालय मानकों, सहायक डेटाबेस और व्यावहारिक अनुप्रयोगों को मिलाकर औद्योगिक उत्पादों के कार्बन फुटप्रिंट प्रबंधन की प्रणाली बनाना चाहता है। इससे मापन उन फैसलों से जुड़ता है जो व्यवसाय सामग्री, उत्पादन प्रक्रियाओं और आपूर्तिकर्ताओं को चुनते समय करते हैं।
राज्य परिषद के 2024 के ढांचे में पहले ही उत्पाद कार्बन फुटप्रिंट लेखांकन और कार्बन लेबल प्रमाणन की बात कही गई थी। इसमें ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कारकों का राष्ट्रीय डेटाबेस पूरा करने और उसे नियमित रूप से अद्यतन करने का भी आह्वान किया गया था। उत्सर्जन कारक वह मान है जिसका इस्तेमाल किसी गतिविधि, जैसे एक निश्चित मात्रा में ईंधन की खपत, से जुड़े उत्सर्जन का अनुमान लगाने के लिए किया जाता है।
विश्वसनीय डेटाबेस तब विशेष रूप से उपयोगी होते हैं जब कोई निर्माता हर उत्सर्जन को सीधे माप नहीं सकता। साझा गणना मान और उत्पाद नियम कंपनियों और क्षेत्रों में तैयार किए गए लेखों को अधिक सुसंगत बना सकते हैं।
स्थानीय बजट और नई परियोजनाओं की अधिक कड़ी जांच
स्थानीय अधिकारियों से उत्सर्जन लेखांकन व्यवस्था स्थापित करने, उत्सर्जन का शुरुआती स्तर तय करने और औद्योगिक विकास से होने वाली बढ़ोतरी का प्रबंधन करने की अपेक्षा है। योजना में अधिक ऊर्जा खपत और अधिक उत्सर्जन वाली औद्योगिक परियोजनाओं के लिए कार्बन उत्सर्जन प्रतिस्थापन व्यवस्था और मूल्यांकन का भी आह्वान किया गया है।
कार्बन उत्सर्जन प्रतिस्थापन के तहत किसी परियोजना से बढ़ने वाले उत्सर्जन को लागू व्यवस्था के अनुसार अन्य जगहों पर की गई कटौती से जोड़ा जाता है। मंत्रालय ने इसे परियोजना मूल्यांकन और कार्बन उत्सर्जन चरम तथा कार्बन तटस्थता की दिशा में प्रगति के आकलन के साथ रखा है।
राष्ट्रीय ढांचे में स्थानीय कार्बन बजट भी शामिल हैं। जैसे वित्तीय बजट धन का हिसाब रखता है, वैसे ही कार्बन बजट लक्ष्य के मुकाबले नियोजित उत्सर्जन पर नजर रखता है। 2026 से 2030 के दौरान प्रांतों को अपने उत्सर्जन तीव्रता में कमी के लक्ष्यों के आधार पर ये बजट तैयार और समायोजित करने हैं।
योजना जारी होने के साथ दी गई टिप्पणियों में चाइना इलेक्ट्रॉनिक्स इन्फॉर्मेशन इंडस्ट्री डेवलपमेंट रिसर्च इंस्टीट्यूट के पार्टी सचिव बताए गए लियू वेनचियांग ने कार्बन प्रबंधन के विभिन्न स्तरों को जोड़ने में योजना की भूमिका का वर्णन किया। उनके अनूदित बयान में कहा गया:
योजना जारी होने और लागू किए जाने से उद्योग और सूचना प्रौद्योगिकी में स्थानीय कार्बन आकलन, क्षेत्रीय कार्बन नियंत्रण, उद्यम कार्बन प्रबंधन, परियोजना कार्बन मूल्यांकन और उत्पाद कार्बन फुटप्रिंट के लिए नीतियां और प्रणालियां स्थापित तथा बेहतर करने के स्पष्ट दिशा-निर्देश मिलते हैं। इससे इन क्षेत्रों में कार्बन उत्सर्जन को चरम पर पहुंचाने के लक्ष्य को मजबूत समर्थन मिलेगा।
राज्य परिषद के ढांचे में उत्सर्जन की नियमित निगरानी, उत्सर्जन तेजी से बढ़ने पर चेतावनी और राष्ट्रीय कार्बन उत्सर्जन व्यापार बाजार के विस्तार की बात भी कही गई है। इन उपायों से अधिकारियों को विकास संबंधी फैसलों को उत्सर्जन प्रदर्शन से जोड़ने के कई तरीके मिलते हैं।
व्यापक जलवायु चुनौती में इन लक्ष्यों की जगह
सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर के 2024 के नीति विश्लेषण ने राष्ट्रीय कार्ययोजना को कार्बन उत्सर्जन के दोहरे नियंत्रण पर चीन की पहली योजना बताया। उसके मुताबिक, यह बदलाव ध्यान को केवल ऊर्जा खपत से हटाकर ऊर्जा उपयोग के उत्सर्जन परिणामों पर केंद्रित करता है।
केंद्र ने बताया कि 2020 से 2025 के लिए चीन का राष्ट्रीय कार्बन तीव्रता लक्ष्य 18% कमी का था और उस समय उसने प्रगति को लक्ष्य से पीछे आंका था। पहले के उस लक्ष्य में उत्सर्जन की तुलना पूरी अर्थव्यवस्था के उत्पादन से की गई थी। नए औद्योगिक लक्ष्य में औद्योगिक मूल्यवर्धन और 2025 का आधार स्तर लिया गया है, इसलिए दोनों प्रतिशत अलग-अलग मापदंडों और अवधियों से जुड़े हैं।
केंद्र के अगस्त 2024 के आकलन के अनुसार, उस वर्ष की पहली तिमाही में उत्सर्जन संभवतः चरम पर पहुंचा था और दूसरी तिमाही में घटा था। इसमें स्वच्छ बिजली की बढ़ोतरी तथा सीमेंट और इस्पात उत्पादन में कमजोरी का योगदान था। यह उस समय का अनुमान था; राष्ट्रीय नीति का लक्ष्य 2030 से पहले कार्बन उत्सर्जन को चरम पर पहुंचाना बना हुआ है।
केंद्र ने यह भी तर्क दिया कि पेरिस समझौते के जलवायु लक्ष्यों के अनुरूप होने के लिए 2035 तक उत्सर्जन को उसके चरम स्तर से 30% नीचे लाना होगा। यह आकलन मंत्रालय के तात्कालिक कार्यों के साथ लंबी अवधि की चुनौती रखता है: बेहतर लेखांकन, औद्योगिक ऊर्जा के स्वच्छ स्रोत, अधिक दक्ष उपकरण और नए विकास से होने वाले उत्सर्जन पर कड़ा नियंत्रण।
मुख्य बिंदु
- चीन की औद्योगिक कार्बन नियंत्रण योजना 2026 से 2030 तक की अवधि को कवर करती है और 21 अक्टूबर, 2026 को सार्वजनिक की गई थी।
- 2030 तक औद्योगिक कार्बन तीव्रता को 2025 के स्तर से कम से कम 17% घटाने का लक्ष्य है, जबकि ऊर्जा तीव्रता में कम से कम 10% की कमी की जाएगी।
- मंत्रालय उत्पादों के कार्बन फुटप्रिंट के करीब 400 नियम और मानक तथा कुल मिलाकर लगभग 500 राष्ट्रीय शून्य-कार्बन कारखाने और कंप्यूटिंग सुविधाएं बनाने की योजना बना रहा है।
- इस्पात, रसायन और निर्माण सामग्री के साथ सौर विनिर्माण और कंप्यूटिंग सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जाएगा।
- कारखानों, औद्योगिक पार्कों, उत्पादों, स्थानीय सरकारों और नई परियोजनाओं को परस्पर जुड़ी लेखांकन तथा मूल्यांकन प्रणालियों के दायरे में लाया जाएगा।
- राष्ट्रीय नीति 2026 से 2030 के दौरान उत्सर्जन तीव्रता नियंत्रण को प्राथमिकता देती है; उत्सर्जन चरम पर पहुंचने के बाद कुल उत्सर्जन नियंत्रण मुख्य मापदंड बनेगा।






