श्रीलंका के जलक्षेत्र से बाहर उन्नीस ईरानी जहाज इंतजार में
खाद्य सामग्री, पीने के पानी और ईंधन की कमी से जूझ रहे उन्नीस ईरानी जहाज स्वदेश लौटने का मार्ग बाधित होने और अमेरिकी प्रतिबंधों को लेकर श्रीलंका की चिंता के बीच फंसे हुए हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता थुषारा रोड्रिगो ने 9 अक्टूबर, 2026 को कहा कि कोलंबो की फिलहाल उनकी मदद करने की कोई योजना नहीं है। वहीं, विदेश मंत्री विजिथा हेराथ ने कहा है कि मानवीय परिस्थितियों में कार्रवाई की जरूरत पड़ने पर सरकार मदद के लिए तैयार है।
विषय-सूची
- श्रीलंका के जलक्षेत्र से बाहर उन्नीस ईरानी जहाज इंतजार में
- टैंकर गाले के पास क्यों इंतजार कर रहे हैं
- अचानक नहीं आए, महीनों से समुद्र में
- कोलंबो ने अमेरिकी आदेश मिलने से किया इनकार
- श्रीलंकाई आपूर्तिकर्ता तक प्रतिबंध कैसे पहुंचते हैं
- बचाव की जिम्मेदारी नाविकों की स्थिति पर निर्भर
- पहले किए गए बचाव अभियानों में समुद्र पर अलग रुख दिखा
- व्यापार और समुद्री रोजगार भी फैसले को प्रभावित करते हैं
- निगरानी जारी, सुरक्षा की चिंता बढ़ी
- मुख्य बिंदु
हेराथ ने श्रीलंका के पास मौजूद विदेशी जहाजों की कुल संख्या करीब 47 बताई, जिनमें 19 ईरानी जहाज शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये जहाज देश के प्रादेशिक जलक्षेत्र से बाहर हैं, जो तट से 12 समुद्री मील तक फैला है, और हाल में नहीं आए हैं, बल्कि लंबे समय से वहां मौजूद हैं।
रोड्रिगो ने राष्ट्रीय हितों और जहाजों को आपूर्ति करने वाले कारोबारों के सामने मौजूद जोखिमों का हवाला देकर सरकार का रुख स्पष्ट किया।
किसी भी मदद पर विचार करने से पहले श्रीलंका अपने राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देगा, और जहाजों को आपूर्ति करने वाली कंपनियां अमेरिका के संभावित द्वितीयक प्रतिबंधों से अवगत हैं।
कोलंबो त्रिंकोमाली बंदरगाह पर अलग नौसैनिक पोत IRIS Bushehr में सवार 13 ईरानी चालक दल के सदस्यों को पहले से भोजन, आवास और सुरक्षा मुहैया करा रहा है। लेकिन समुद्र में दूर मौजूद वाणिज्यिक जहाजों के आपूर्तिकर्ताओं के सामने अलग सवाल है: क्या जरूरी सामान पहुंचाने से अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग तक उनकी पहुंच खतरे में पड़ सकती है?
गतिरोध उस तत्काल सहायता रोकने के फैसले के बाद बना हुआ है, जिसका जिक्र 11 अक्टूबर को किया गया था। आपूर्ति पहुंचाने का कोई समय तय नहीं हुआ है और न ही मानवीय सहायता की कोई सहमत व्यवस्था घोषित की गई है। फंसे टैंकरों पर नाविकों की संख्या, उनके पास बची आपूर्ति और उनकी चिकित्सकीय स्थिति के बारे में भी सार्वजनिक रूप से कोई जानकारी नहीं दी गई है।
टैंकर गाले के पास क्यों इंतजार कर रहे हैं
जुलाई में अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की अपनी नौसैनिक नाकेबंदी फिर शुरू की, जिसके बाद ये जहाज फंस गए। इस बाधा से पहले 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के साथ युद्ध शुरू हुआ था, जिसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई की और होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही पर पाबंदियां लगीं।
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को खुले समुद्र से जोड़ता है। वहां पाबंदियों का असर ईरानी बंदरगाहों तक पहुंचने या वहां से निकलने की कोशिश कर रहे जहाजों पर पड़ता है, भले ही वे हजारों किलोमीटर दूर इंतजार कर रहे हों।
यूनाइटेड अगेंस्ट न्यूक्लियर ईरान के वरिष्ठ सलाहकार और योकोसुका काउंसिल ऑन एशिया-पैसिफिक स्टडीज़ में दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय कार्यक्रमों के निदेशक चार्ली ब्राउन ने कहा कि कई टैंकरों ने मलेशिया के ईस्टर्न आउटर पोर्ट लिमिट्स में अपना तेल दूसरे जहाजों में स्थानांतरित किया था। बाद में कच्चा तेल चीन की रिफाइनरियों तक पहुंचाया गया।
ब्राउन ने कहा कि इन स्थानांतरणों के बाद जहाजों को आम तौर पर ईरान लौटना था, लेकिन वे नाकेबंदी हटने का इंतजार कर रहे थे। कई विवरणों के मुताबिक, आपूर्ति पहुंचाने के बाद फंसे टैंकर खाली हैं। इसलिए इंतजार के दौरान चालक दल के लिए जरूरी सामान और जहाज चलाने के लिए ईंधन उनकी तात्कालिक जरूरतें हैं।
हेराथ ने कहा कि मलेशिया और इंडोनेशिया के पास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में भी जहाज इंतजार कर रहे हैं। श्रीलंका की मुश्किल, ईरानी तेल निर्यात को एशियाई खरीदारों से जोड़ने वाले समुद्री परिवहन नेटवर्क में आई व्यापक बाधा का एक हिस्सा है।
अचानक नहीं आए, महीनों से समुद्र में
21 अगस्त को की गई निगरानी में श्रीलंका के दक्षिण-पश्चिमी तट पर गाले के पास प्रादेशिक सीमा से बाहर कतार में खड़े 16 ईरानी टैंकरों की पहचान हुई थी। कुछ जहाज जुलाई के मध्य से निष्क्रिय थे। बाद में हेराथ ने पास में मौजूद करीब 47 विदेशी जहाजों में 19 ईरानी जहाज होने की बात कही।
अगस्त में पहचाने गए जहाजों में लगभग 333 मीटर लंबे बहुत बड़े कच्चा तेल वाहक शामिल थे। इनमें MT Amber भी था, जिसकी पहचान अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन के नंबर 9357406 से हुई। ब्राउन के मुताबिक, यह 16 जुलाई को गाले के पास पहुंचा था। पहचान संख्या जहाजों को अलग-अलग पहचानने में मदद करती है, भले ही उनके नाम या झंडे बदल जाएं।
मुख्य घटनाक्रम कई महीनों में फैले हैं:
- 28 फरवरी: अमेरिका और इजरायल के हमलों के साथ संघर्ष शुरू हुआ, जिससे क्षेत्रीय जहाजरानी बाधित हुई।
- 4 और 5 मार्च: एक ईरानी पोत के डूबने और दूसरे का इंजन खराब होने के बाद श्रीलंका ने दो ईरानी नौसैनिक जहाजों के नाविकों को बचाया।
- जुलाई: अमेरिका की नई नाकेबंदी के कारण ईरानी टैंकर अपने सामान्य स्वदेशी मार्ग के बाहर इंतजार करने लगे।
- 16 जुलाई: ब्राउन के मुताबिक, MT Amber गाले के पास पहुंचा।
- 24 अगस्त: वॉशिंगटन ने प्रतिबंधित जहाजों को सेवाएं देने पर असर डालने वाले अतिरिक्त प्रतिबंधों की घोषणा की।
- 9 से 11 सितंबर: श्रीलंका के 40 से अधिक अधिकारियों ने समुद्री प्रतिबंधों से बचने के तरीकों पर अमेरिकी प्रशिक्षण में हिस्सा लिया।
- 9 अक्टूबर: रोड्रिगो ने कहा कि श्रीलंका की 19 ईरानी जहाजों की मदद करने की तत्काल कोई योजना नहीं है।
लंबे इंतजार से आपूर्ति की समस्या और व्यावहारिक होती जा रही है। जहाजों के चालक दल के लिए पीने का पानी और भोजन जरूरी है, जबकि जहाज खड़े होने पर भी मशीनरी और जरूरी सेवाएं चलाने के लिए ईंधन चाहिए।
कोलंबो ने अमेरिकी आदेश मिलने से किया इनकार
हेराथ ने उन आरोपों को खारिज किया है कि वॉशिंगटन ने श्रीलंका को भोजन या पानी की आपूर्ति रोकने का निर्देश दिया था। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसी कोई चेतावनी, दखल या दबाव नहीं मिला है और वह देश की संप्रभुता तथा गुटनिरपेक्षता की नीति की रक्षा करते हुए फैसले ले रही है।
अन्य खबरों में बताया गया है कि अमेरिकी अधिकारियों ने कोलंबो पर स्थानीय कंपनियों को जहाजों को सेवाएं देने से रोकने का दबाव डाला था। इनमें अगस्त में भेजा गया एक संदेश भी शामिल है, जिसमें 19 टैंकरों की पहचान कर संभावित द्वितीयक प्रतिबंधों की चेतावनी दी गई थी। कोलंबो का सार्वजनिक रुख है कि ये प्रतिबंध वैश्विक उपाय हैं, न कि विशेष रूप से श्रीलंका पर लगाए गए प्रतिबंध।
3 अक्टूबर की टिप्पणियों में रोड्रिगो ने यह फर्क बताते हुए स्पष्ट किया कि सरकार वॉशिंगटन की नीति को किस तरह समझती है।
अमेरिका ने अपने सामान्य नीतिगत नजरिये के तहत द्वितीयक प्रतिबंध जारी किए हैं, जो वैश्विक स्तर पर लागू होते हैं और केवल श्रीलंका या किसी खास देश को निशाना नहीं बनाते।
हेराथ ने यह भी कहा कि सरकार ने अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आने वाले जहाजों को कोई सामान नहीं दिया है। उन्होंने निजी आपूर्तिकर्ताओं की जिम्मेदारी बताई कि वे जिन हालात में काम कर रहे हैं, उन्हें समझें। साथ ही उन्होंने कहा कि मानवीय कारणों से श्रीलंका उचित कदम उठाएगा।
कारोबारों के लिए व्यावहारिक चिंता सिर्फ यह नहीं है कि किसी अमेरिकी अधिकारी ने सीधे निर्देश दिया या नहीं। सार्वजनिक रूप से घोषित प्रतिबंध नीति कंपनी के फैसलों को प्रभावित कर सकती है, क्योंकि उसके बैंकों और कारोबारी साझेदारों को भी लेन-देन से जुड़े जोखिम का आकलन करना होता है।
श्रीलंकाई आपूर्तिकर्ता तक प्रतिबंध कैसे पहुंचते हैं
द्वितीयक प्रतिबंध, प्रतिबंध लगाने वाले देश से बाहर के कारोबारों को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं। इस मामले में वॉशिंगटन उन विदेशी कंपनियों पर पाबंदियां लगाने की धमकी दे सकता है जो प्रतिबंधित ईरानी हितों से कारोबार करती हैं। इनमें अमेरिकी वित्तीय प्रणाली तक पहुंच पर रोक भी शामिल हो सकती है।
श्रीलंका का कोई आपूर्तिकर्ता स्थानीय स्तर पर सामान पहुंचाने का इंतजाम कर सकता है, लेकिन उसे फिर भी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय नेटवर्क से जुड़े बैंकों, बीमा कंपनियों या साझेदारों पर निर्भर रहना पड़ सकता है। जहाज की प्रतिबंध स्थिति के कारण ये संस्थाएं भुगतान या सेवा देने से इनकार कर सकती हैं।
रोड्रिगो ने कहा कि 24 अगस्त को घोषित उपायों के तहत प्रतिबंधित जहाजों को सेवा देने वाले व्यक्तियों या संस्थाओं की अमेरिकी वित्तीय प्रणाली तक पहुंच खत्म हो सकती है। इसलिए जोखिम सिर्फ उस कंपनी तक सीमित नहीं हैं जो टैंकर तक पानी, जरूरी सामान या ईंधन पहुंचाती है।
बंदरगाह और नागरिक उड्डयन उप मंत्री जनिथा रुवान कोडितुवक्कु ने अगस्त में ही इस चिंता को स्वीकार किया था। उन्होंने कहा कि निजी आपूर्तिकर्ताओं और उनकी गतिविधियों को सक्षम बनाने वाले बैंकों पर अमेरिकी प्रतिबंध लग सकते हैं, लेकिन विदेश मंत्रालय के जरिए मंत्रालय को प्रतिबंधों की सूची नहीं मिली थी। उन्होंने कहा कि आधिकारिक सूचना मिलने पर स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं को चेतावनी दी जा सकेगी।
श्रीलंका पोर्ट्स अथॉरिटी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह भी बताया कि समुद्र में सेवा देने वाली कंपनियों को टैंकरों की ओर से आए अनुरोधों से कैसे निपटना चाहिए, इस पर नीति संबंधी मार्गदर्शन मांगा गया था। गाले जैसे बंदरगाहों से काम करने वाली कंपनियों के लिए जहाज रवाना करने, आपूर्ति खरीदने या बैंक से भुगतान करवाने से पहले स्पष्ट निर्देश जरूरी हैं।
बचाव की जिम्मेदारी नाविकों की स्थिति पर निर्भर
ईरान के राजदूत अलीरेज़ा देलख़ोश ने संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि के अनुच्छेद 98 और साथ ही समुद्र में जीवन की सुरक्षा तथा समुद्री खोज और बचाव संबंधी संधियों का हवाला देते हुए कहा है कि श्रीलंका को फंसे जहाजों की मदद करनी चाहिए।
अनुच्छेद 98 समुद्र में खतरे में पड़े लोगों की सहायता से जुड़ा है। इसके तहत देशों को जहाज के कप्तानों से यह अपेक्षा करनी होती है कि वे जोखिम में पड़े लोगों की मदद करें, बशर्ते ऐसा करने से उनके अपने जहाज और उसमें सवार लोगों को गंभीर खतरा न हो। यह प्रभावी खोज और बचाव व्यवस्था की भी मांग करता है।
बताया गया है कि टैंकर श्रीलंका के विशेष आर्थिक क्षेत्र में, लेकिन उसके प्रादेशिक समुद्र से बाहर हैं। विशेष आर्थिक क्षेत्र में तटीय देश को संसाधनों और कुछ गतिविधियों पर अधिकार मिलते हैं, जबकि दूसरे देशों के जहाजों को वहां आवाजाही का अधिकार रहता है। नाविकों को बचाव या किसी अन्य तत्काल हस्तक्षेप की जरूरत है या नहीं, यह उनकी वास्तविक स्थिति और मदद के अनुरोध की परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
संयुक्त राष्ट्र में श्रीलंका के पूर्व स्थायी प्रतिनिधि दयान जयतिलेक ने वाणिज्यिक जहाजों के चालक दल पर ध्यान देने की अपील की है और कहा है कि उन्हें लड़ाकू पक्ष नहीं समझना चाहिए। उन्होंने मदद और अन्य चिंताओं के बीच संतुलन बनाने में सरकार के सामने मौजूद मुश्किल का जिक्र किया।
हम मुश्किल स्थिति में हैं। दुनिया के सामने यह स्पष्ट है कि हम जानबूझकर मदद से इनकार नहीं कर रहे, लेकिन सावधानी बरतने और विचार-विमर्श करने के कारण हैं।
मानवीय जरूरतों पर कार्रवाई करने की हेराथ की प्रतिबद्धता से आपात स्थिति में कदम उठाने की गुंजाइश बनी हुई है। अनसुलझा व्यावहारिक सवाल यह है कि कोलंबो तत्काल मदद के अनुरोध का आकलन कैसे करेगा और इसमें शामिल आपूर्तिकर्ताओं तथा बैंकों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए सहायता का इंतजाम कैसे करेगा।
पहले किए गए बचाव अभियानों में समुद्र पर अलग रुख दिखा
मार्च में ईरान के दो नौसैनिक जहाजों से जुड़ी घटनाओं के दौरान श्रीलंका ने 238 नाविकों को बचाया था। इनमें IRIS Dena के 32 जीवित बचे नाविक शामिल थे, जो 4 मार्च को अमेरिकी नौसेना के टॉरपीडो हमले में डूब गया था। साथ ही, इंजन खराब होने और 5 मार्च को मदद मांगे जाने के बाद IRIS Bushehr के 206 नाविकों को बचाया गया था।
हेराथ ने कहा है कि IRIS Bushehr त्रिंकोमाली में ही है और उसके 13 चालक दल सदस्यों को भोजन, आवास और सुरक्षा दी जा रही है। यह जारी सहायता अभियान, समुद्र में मौजूद वाणिज्यिक टैंकरों से जुड़े अनसुलझे अनुरोधों के साथ-साथ चल रहा है।
राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने 20 मार्च को यह भी बताया था कि श्रीलंका ने दक्षिण के एक नागरिक हवाई अड्डे पर दो लड़ाकू विमानों को उतरने देने का अमेरिकी अनुरोध ठुकरा दिया था। उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन ने 26 फरवरी को, युद्ध शुरू होने से दो दिन पहले, यह अनुरोध किया था।
अक्टूबर में एक अलग तरह का जहाजी दौरा हुआ। USS Tulsa 7 अक्टूबर को कोलंबो पहुंचा, वहां ईंधन और आपूर्ति ली और 9 अक्टूबर को रवाना हो गया। अमेरिकी दूतावास ने इस दौरे को अमेरिकी और श्रीलंकाई नाविकों के बीच संबंध मजबूत करने का अवसर बताया।
इस तरह कोलंबो एक साथ कई संबंधों का प्रबंधन कर रहा है: ईरानी नौसैनिक कर्मियों को सहायता देना, अमेरिका के साथ सहयोग बनाए रखना और प्रतिबंधों से प्रभावित ईरानी वाणिज्यिक जहाजों को लेकर स्थानीय कंपनियों के रुख पर फैसला करना।
व्यापार और समुद्री रोजगार भी फैसले को प्रभावित करते हैं
इस विवाद से जुड़े विवरणों में दिए गए व्यापार आंकड़ों के मुताबिक, श्रीलंकाई कंपनियों ने 2025 में अमेरिका को 2.999 अरब डॉलर के सामान का निर्यात किया और वहां से 544 मिलियन डॉलर का आयात किया। अमेरिका ने श्रीलंका के कुल निर्यात का करीब 24% खरीदा, यानी विदेश में बिकने वाले सामान से होने वाली हर चार डॉलर की कमाई में लगभग एक डॉलर।
इन आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका के साथ वस्तु व्यापार में करीब 2.455 अरब डॉलर का अधिशेष है। ये आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि श्रीलंकाई निर्यातकों और उनके कर्मचारियों के लिए अमेरिकी बाजार तक पहुंच क्यों अहम है।
1948 में स्वतंत्रता के बाद के सबसे गंभीर आर्थिक संकट, यानी 2022 के संकट से श्रीलंका अब भी उबर रहा है। मार्च 2023 में 3 अरब डॉलर का चार वर्षीय आईएमएफ कार्यक्रम मंजूर हुआ था। व्यापार या वित्तीय पहुंच में एक और बाधा इस सुधार के दौरान आएगी।
समुद्री उद्योग भी जोखिम में है। मूल विवरण में दिए आंकड़ों के मुताबिक, इस क्षेत्र का ऐतिहासिक योगदान सकल घरेलू उत्पाद में करीब 2.5% रहा है और इसमें लगभग 40,000 से 50,000 लोग प्रत्यक्ष रूप से पूर्णकालिक काम करते हैं। सेवा प्रदाताओं में करीब 70% स्थानीय स्वामित्व वाले हैं और देश में लगभग 130 शिपिंग एजेंसियां हैं।
इसलिए टैंकरों से जुड़ा विवाद कूटनीति से आगे तक पहुंचता है। आपूर्तिकर्ताओं को काम करने योग्य नियम चाहिए, बैंकों को लेन-देन का आकलन करना है और बंदरगाह कारोबारों को अपने अंतरराष्ट्रीय संपर्क बनाए रखने हैं। समुद्र में मौजूद चालक दल को जरूरी सामान की नियमित आपूर्ति चाहिए।
निगरानी जारी, सुरक्षा की चिंता बढ़ी
श्रीलंका की नौसेना समुद्री निगरानी प्रणालियों के जरिए टैंकरों पर नजर रख रही है। रक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि आगे की कार्रवाई के लिए सरकार के निर्देश जरूरी हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि इतने बड़े जहाजों से जुड़ा टकराव आग या समुद्र में तेल रिसाव का कारण बन सकता है।
अधिकारी ने 2020 में MT New Diamond में लगी आग का जिक्र किया और कहा कि समुद्र में कच्चे तेल के रिसाव से निपटने के लिए श्रीलंका को बाहरी मदद की जरूरत होगी। इसलिए दक्षिण-पश्चिमी तट के पास इतने बड़े टैंकरों का लंबे समय तक जमा रहना समुद्री सुरक्षा और आपातकालीन योजना का भी मामला है।
श्रीलंका की नौसेना, तटरक्षक बल, बंदरगाहों और वित्तीय प्राधिकरणों के 40 से अधिक अधिकारियों ने सितंबर में अमेरिकी दूतावास की कार्यशाला में हिस्सा लिया। इसमें संदिग्ध जहाजों और प्रतिबंधों से बचने के तरीकों की पहचान पर प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में जहाज की पहचान संबंधी जानकारी में हेरफेर जैसी गतिविधियां शामिल थीं, जो दिखाती हैं कि जहाजरानी की निगरानी और वित्तीय प्रतिबंध अब कितने करीब से जुड़े हैं।
कोलंबो के घोषित रुख के सामने दो प्रतिबद्धताओं के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है: राष्ट्रीय आर्थिक हितों की रक्षा करना और समुद्र में लोगों को मानवीय सहायता की जरूरत पड़ने पर कार्रवाई करना। किसी ठोस व्यवस्था के लिए चालक दल की जरूरतों का आकलन और उन तक पहुंचने में सक्षम कंपनियों को दिए जाने वाले निर्देश, दोनों को जोड़ना होगा।
मुख्य बिंदु
- श्रीलंका के मुताबिक, उसके प्रादेशिक जलक्षेत्र से बाहर इंतजार कर रहे करीब 47 विदेशी जहाजों में 19 ईरानी जहाज शामिल हैं।
- विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता थुषारा रोड्रिगो ने 9 अक्टूबर को कहा कि उनकी मदद करने की फिलहाल कोई योजना नहीं है।
- कोलंबो ने भोजन या पानी की आपूर्ति रोकने का अमेरिकी निर्देश मिलने से इनकार किया है, लेकिन आपूर्तिकर्ताओं को द्वितीयक प्रतिबंधों की चिंता है।
- ईरान लौटने का मार्ग बाधित होने के बाद टैंकर महीनों से इंतजार कर रहे हैं।
- श्रीलंका त्रिंकोमाली में IRIS Bushehr पर सवार 13 ईरानी चालक दल के सदस्यों की सहायता जारी रखे हुए है।
- फंसे टैंकरों के लिए आपूर्ति की कोई सहमत व्यवस्था या समय-सारिणी घोषित नहीं की गई है।






