तीन शहरों के दौरे में समान नागरिकता पर जोर
प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने 20 अक्टूबर, 2026 को रंगपुर, राजशाही और चट्टोग्राम में दुर्गा पूजा स्थलों के दौरे के दौरान राजशाही के एक हिंदू मंदिर को 10 लाख टका का चेक दिया। उनका संदेश था कि धर्म, जातीयता, पेशे या सामाजिक पहचान की परवाह किए बिना हर बांग्लादेशी को कानून के तहत समान व्यवहार और सरकारी सहायता तक समान पहुंच मिलनी चाहिए।
विषय-सूची
- तीन शहरों के दौरे में समान नागरिकता पर जोर
- राजशाही को मिला चेक, स्थायी सहायता की मांग
- रंगपुर, राजशाही और चट्टोग्राम को जोड़ता लंबा दिन
- जेएम सेन हॉल में बहुसंख्यक की पहचान से ऊपर नागरिकता
- समुदाय के नेताओं ने संस्थानों, मरम्मत और न्याय की मांग की
- मंदिर अनुदान और आवास से सामने आईं ठोस जरूरतें
- विकास के वादे धार्मिक स्थलों से आगे तक
- रहमान ने साझा अधिकारों को 1971 और 2024 के जनउभार से जोड़ा
- त्योहार के दौरान सुरक्षा भी अहम
- मुख्य बातें
राजशाही के धर्मसभा, जिसे राधा गोबिंद मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, में रहमान ने इस वादे को राष्ट्रीय विकास से जोड़ा। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि हर धर्म के लोग देश के निर्माण में शामिल हों, क्योंकि किसी समुदाय को पीछे छोड़कर प्रगति संभव नहीं होगी।
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के अध्यक्ष रहमान ने समानता को संविधान और कानूनों के तहत मिलने वाला अधिकार बताया। मंदिर के पूजा मंडप, यानी पूजा-अर्चना के स्थल, का दौरा करने के बाद हिंदू समुदाय के सदस्यों से बात करते हुए उन्होंने कहा:
किसी व्यक्ति का धर्म, पेशा या जातीय पहचान चाहे जो हो, नागरिक के तौर पर उसके अधिकार समान हैं।
मंदिर के प्रतिनिधियों ने इस दौरे के दौरान व्यावहारिक सहायता मांगी: पूजा समारोहों के लिए एक कोष और मंदिरों की स्थापना में मदद। दौरे के बाद चट्टोग्राम में समुदाय के नेताओं ने धार्मिक संस्थानों, उपेक्षित स्थलों और आपराधिक मामलों का सामना कर रहे लोगों से जुड़े मुद्दों पर और मांगें रखीं।
ये दौरे महा नवमी के दिन हुए, जो दुर्गा पूजा का नौवां दिन है। त्योहार का समापन 21 अक्टूबर को विजयादशमी और मूर्ति विसर्जन के साथ होना था। रहमान ने इन बैठकों में समान नागरिकता का वादा किया, जबकि आयोजक आर्थिक सहायता, संस्थागत बदलाव और न्याय तक पहुंच की मांग भी कर रहे थे।
राजशाही को मिला चेक, स्थायी सहायता की मांग
राजशाही धर्मसभा के अध्यक्ष बिश्वनाथ सरकार ने 10 लाख टका का चेक प्राप्त किया, जो 10 लाख बांग्लादेशी टका के बराबर है। मदरसा मैदान में जनसभा को संबोधित करने के बाद रहमान ने शाम 5 बजे से 5:30 बजे के बीच शहर के मियापारा इलाके में स्थित मंदिर में पूजा समारोह के नेताओं से मुलाकात की।
मंदिर प्राधिकरणों ने इस वर्ष दुर्गा पूजा के लिए सरकारी अनुदान और सहायता में हुई बढ़ोतरी का स्वागत किया। समारोहों के लिए एक समर्पित कोष की उनकी मांग से एक बार के दौरे से आगे भी मदद मिल सकती है, जबकि मंदिर निर्माण की अपील उन जगहों से जुड़ी थी जहां समुदाय के लोग जुटते और पूजा करते हैं।
रहमान ने कहा कि बीएनपी बांग्लादेश में जन्मे और पले-बढ़े लोगों को बांग्लादेशी नागरिक मानती है और सभी धर्मों के लोगों को समान समझती है। उन्होंने वहां मौजूद लोगों से राष्ट्रीय विकास में सहयोग करने को कहा और साझा राष्ट्रीय पहचान को मिलकर काम करने का आधार बताया।
सरकार बनने के बाद राजशाही का यह उनका पहला दौरा था। बीएनपी ने संसदीय बहुमत हासिल कर सरकार बनाई थी। मंदिर में बैठक के बाद वह चट्टोग्राम जाने के लिए शाह मखदूम हवाई अड्डे रवाना हुए।
रंगपुर, राजशाही और चट्टोग्राम को जोड़ता लंबा दिन
रहमान के कार्यक्रम में धार्मिक स्थलों के दौरे, जनसभाएं और समर्थकों के साथ बैठकें शामिल थीं। वह ढाका से सैन्य विमान द्वारा सईदपुर पहुंचे और फिर सड़क मार्ग से रंगपुर की ओर रवाना हुए। वहां तारागंज और पगलापीर में लोग उनके काफिले के स्वागत के लिए जुटे।
यात्रा के मुख्य पड़ाव इस प्रकार थे:
- 20 अक्टूबर, सुबह 9 बजे: रहमान ने ढाका के तेजगांव हवाई अड्डे से उड़ान भरी और सुबह 9:50 बजे सईदपुर पहुंचे।
- दोपहर के आसपास: उन्होंने रंगपुर के राधा गोबिंद धर्मसभा मंदिर का दौरा किया।
- करीब दोपहर 3 बजे: उनका विमान राजशाही में उतरा। इसके बाद जनसभा हुई और शाम 5 बजे से 5:30 बजे के बीच मंदिर का दौरा किया गया।
- शाम 7:40 बजे: वह चट्टोग्राम के शाह अमानत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंचे और करीब रात 8:20 बजे जेएम सेन हॉल पहुंचे।
- 21 अक्टूबर, रात 1:10 बजे: वह ढाका के शाहजलाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे लौटे।
शाह अमानत हवाई अड्डे के जनसंपर्क अधिकारी मोहम्मद इब्राहिम खलील ने 20 अक्टूबर को चट्टोग्राम पहुंचने की पुष्टि की। चट्टोग्राम का दान भी 21 अक्टूबर की तारीख वाला है, हालांकि विस्तृत कार्यक्रम के मुताबिक मंदिर का आयोजन 20 अक्टूबर की शाम को हुआ था।
जेएम सेन हॉल में बहुसंख्यक की पहचान से ऊपर नागरिकता
रहमतगंज स्थित चट्टोग्राम के जेएम सेन हॉल में मंदिर दौरे का अंतिम पड़ाव था। बांग्लादेश पूजा उद्जापन परिषद की महानगरीय शाखा यहां 40 वर्षों से दुर्गा पूजा आयोजित करती आ रही है। इसके नेताओं ने कहा कि किसी प्रधानमंत्री का इस स्थल पर यह पहला दौरा था।
रहमान ने सभा को बताया कि कानून उन पर और हर दूसरे नागरिक पर समान रूप से लागू होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य को अलग-अलग धर्मों के लोगों को समान अधिकार और लाभ देने चाहिए। धार्मिक बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक की पहचान के इस्तेमाल पर प्रधानमंत्री ने कहा:
बहुसंख्यक या अल्पसंख्यक होना मुद्दा नहीं है। बस इतना मायने रखता है कि आप बांग्लादेशी हैं।
अपनी बात समझाने के लिए रहमान ने लंदन में बिताए अपने 17 वर्षों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में वह मुस्लिम बहुसंख्यक समुदाय से थे, लेकिन यूनाइटेड किंगडम में धार्मिक अल्पसंख्यक के सदस्य के रूप में रहे। उनका कहना था कि किसी व्यक्ति की धार्मिक बहुसंख्यक में स्थिति देश के हिसाब से बदलती रहती है, जबकि समान व्यवहार करना राज्य की जिम्मेदारी बनी रहनी चाहिए।
उन्होंने मुसलमानों, हिंदुओं, बौद्धों और ईसाइयों से शांतिपूर्ण देश बनाने में सहयोग करने को कहा और कहा कि सरकार को हर समुदाय की भागीदारी चाहिए।
समुदाय के नेताओं ने संस्थानों, मरम्मत और न्याय की मांग की
चट्टोग्राम महानगरीय पूजा उद्जापन परिषद के अध्यक्ष अर्पण कांति बनर्जी ने रहमान का स्वागत किया और कई मांगें रखीं। उन्होंने हिंदू धार्मिक कल्याण ट्रस्ट को एक फाउंडेशन बनाने, चंद्रनाथ धाम का राष्ट्रीयकरण करने और मेधस आश्रम में सुधार की मांग की, जिसे उन्होंने खराब हालत में बताया।
बनर्जी ने दुर्गा पूजा की छुट्टी बढ़ाने के लिए सरकार को धन्यवाद भी दिया। उन्होंने कहा कि हिंदू समुदाय के लोग बांग्लादेश से प्रेम करते हैं और धार्मिक शत्रुता से मुक्त माहौल में वहीं रहना चाहते हैं।
समुदाय के नेता ने 5 अगस्त, 2024 के बाद की चिंता को याद किया और हिंदू निवासियों के साथ खड़े रहने के लिए बीएनपी नेताओं को श्रेय दिया। उन्होंने कहा कि चट्टोग्राम में सांप्रदायिक हिंसा नहीं हुई, लेकिन कुछ छिटपुट घटनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने सेवक कॉलोनी और हजारी लेन के उन लोगों का उल्लेख किया जो उनके अनुसार झूठे मामलों में अब भी जेल में हैं।
पूजा परिषद के नेताओं ने 5 अगस्त के बाद दर्ज मामलों की जांच और न्याय सुनिश्चित करने के लिए हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने उचित मामलों में मुकदमे वापस लेने की भी अपील की। उनकी मांगें धार्मिक जीवन के साथ-साथ पुलिस और अदालतों के हाथों व्यक्तियों के साथ होने वाले व्यवहार से भी जुड़ी थीं। प्रस्तावित संस्थागत बदलावों, वित्तीय सहायता की मांगों या मामलों की समीक्षा पर फैसले के लिए कोई समयसीमा घोषित नहीं की गई।
मंदिर अनुदान और आवास से सामने आईं ठोस जरूरतें
रहमान ने रंगपुर के मंदिर को 10 लाख टका का चेक दिया, जैसा 10 लाख टका राजशाही में भी दिया गया था। चट्टोग्राम में उन्होंने जेएम सेन हॉल के पूजा स्थल के विकास के लिए 20 लाख टका दिए। तीनों राशियां मिलाकर कुल 40 लाख टका, यानी 40 लाख बांग्लादेशी टका होती हैं; चट्टोग्राम का अनुदान बाकी दोनों पड़ावों पर दी गई राशि से दोगुना था।
रंगपुर मंदिर के अध्यक्ष भवतोष सरकार और महासचिव खोकन सरकार ने रहमान को एक स्मृति-चिह्न भेंट किया। प्रधानमंत्री ने मंदिर के पीछे बनी अधूरी इमारत का भी जिक्र किया, जिसका उद्देश्य दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को ठहरने की जगह देना है।
उन्होंने लोक प्रशासन राज्य मंत्री से उस आवास के लिए वित्तीय सहायता की संभावना पर विचार करने को कहा। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए इमारत पूरी होने का मतलब मंदिर के पास ठहरने की जगह उपलब्ध होना होगा। चट्टोग्राम में आयोजकों ने रहमान को एक बोनसाई पौधा भेंट किया।
अनुदानों से स्थानीय जरूरतों को तत्काल मदद मिली, जबकि समारोह कोष, मंदिर निर्माण और कल्याण ट्रस्ट में बदलाव की मांगें निरंतर सहायता से जुड़ी थीं। इन मांगों ने सरकारी संसाधनों तक समान पहुंच की व्यापक चर्चा को व्यावहारिक रूप दिया।
विकास के वादे धार्मिक स्थलों से आगे तक
रहमान की बातों में रंगपुर का व्यापक विकास कार्यक्रम प्रमुखता से शामिल रहा। उन्होंने कहा कि दो सप्ताह पहले राष्ट्रीय आर्थिक परिषद की कार्यकारी समिति की बैठक में शहर के लिए 1,800 करोड़ टका आवंटित किए गए थे। यह 18 अरब टका है, जिसका उपयोग मंदिरों के अनुदान से कहीं व्यापक सार्वजनिक निर्माण कार्यों के लिए होना है।
रहमान ने कहा कि पुलों, पुलियाओं, स्कूलों और कॉलेजों का चरणबद्ध तरीके से विकास किया जाएगा। गांव, यूनियन और उपजिला स्तर पर जरूरतों की पहचान करने में स्थानीय सरकारी निकाय मदद करेंगे। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में संतुलित विकास को सरकार की वित्तीय क्षमता से जोड़ा।
राजशाही की जनसभा में क्षेत्र के 38,970 गन्ना किसानों को मोबाइल वित्तीय सेवाओं के माध्यम से 12 करोड़ टका प्रोत्साहन राशि मिली। इस भुगतान से ऐसी वित्तीय खातों में पैसा पहुंचा जिन्हें फोन के जरिए इस्तेमाल किया जा सकता है। रहमान ने पानी की कमी दूर करने के लिए पद्मा और तीस्ता नदियों पर बैराज बनाने की योजनाओं पर भी चर्चा की, साथ ही नदी के पानी में बांग्लादेश के हिस्से को लेकर बातचीत का जिक्र किया।
सड़क किनारे हुई सभाओं में उन्होंने 10,000 टका तक के कृषि ऋण माफ करने, फैमिली कार्ड और फार्मर्स कार्ड कार्यक्रमों तथा इमामों, मुअज्जिनों और दूसरे धर्मों के धार्मिक नेताओं को मासिक भत्ते देने का जिक्र किया। उन्होंने इन उपायों को अलग-अलग पेशों और समुदायों के लोगों की सहायता के प्रयासों के रूप में पेश किया।
रहमान ने साझा अधिकारों को 1971 और 2024 के जनउभार से जोड़ा
रहमान ने बार-बार 1971 के मुक्ति संग्राम, लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए बाद के आंदोलनों और जुलाई-अगस्त 2024 के जनउभार का जिक्र किया। उन्होंने इन्हें ऐसे अवसर बताया जब लोगों ने एकजुट होकर काम किया और एकजुटता की शर्त धार्मिक पहचान को नहीं बनाया।
चट्टोग्राम में मुक्ति संग्राम के बारे में बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा:
हमने यह नहीं देखा कि कौन मुसलमान है, हिंदू, बौद्ध या ईसाई। हमने सिर्फ उन लोगों को देखा जो मुक्ति संग्राम के लिए लड़ रहे थे। वे देश को आजाद कराना चाहते थे और उन्होंने ऐसा किया।
उन्होंने 2024 के जनउभार के बारे में भी इसी तरह की बात कही। उन्हें याद था कि लोग घायल प्रदर्शनकारियों को अस्पताल ले जा रहे थे और डॉक्टर उनका धर्म पूछे बिना इलाज कर रहे थे। रहमान ने कहा कि इन संघर्षों का साझा उद्देश्य ऐसा बांग्लादेश था जहां लोग शांति से रह सकें और अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर सकें।
उन्होंने राजनीतिक संबद्धता के आधार पर भी अपील की। रंगपुर में उन्होंने कहा कि सरकार बीएनपी को वोट देने वालों और न देने वालों, दोनों की सेवा करना चाहती है। उन्होंने राजनीतिक समूहों से रोजमर्रा की जिंदगी बाधित करने के बजाय संसद के जरिए मतभेद सुलझाने का आग्रह किया और कहा कि अस्थिरता का असर शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, व्यापार और रोजगार पर पड़ सकता है।
त्योहार के दौरान सुरक्षा भी अहम
रहमान का दौरा 16 अक्टूबर को घोषित दुर्गा पूजा की विस्तारित सुरक्षा व्यवस्था के बाद हुआ। ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने त्योहार की सुरक्षा के लिए 2,072 अतिरिक्त कर्मियों को तैनात किया था, पूजा स्थलों के कैमरों को नियंत्रण कक्ष से जोड़ा था और ऑनलाइन अफवाहों तथा गलत सूचनाओं पर निगरानी बढ़ाई थी।
बांग्लादेश भर में सुरक्षा व्यवस्था में 212,818 अंसार और ग्राम रक्षा दल के सदस्य, बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश के कर्मी और करीब 3,500 तटरक्षक सदस्य भी शामिल थे। उनकी तैनाती पूजा स्थलों, दूरदराज के समुदायों, सीमावर्ती इलाकों और त्योहार के दौरान इस्तेमाल होने वाले नदी तटों पर थी।
उत्सव का पैमाना 19 अक्टूबर की पूजा सभाओं में दिखा, जब ढाका में श्रद्धालु कुमारी पूजा में शामिल हुए। बांग्लादेश पूजा उद्जापन परिषद ने देशभर में 33,851 मंडपों की गिनती की। इसलिए रहमान का तीन शहरों का दौरा ऐसे त्योहार के बीच हुआ जिसमें हजारों पूजा स्थल शामिल थे और जिनमें से हर एक स्थानीय आयोजन, वित्तपोषण और सार्वजनिक सुरक्षा व्यवस्था पर निर्भर था।
चट्टोग्राम के कार्यक्रम में शामिल लोगों में वित्त मंत्री अमीर खोसरू महमूद चौधरी, गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद और सांस्कृतिक मामलों के मंत्री निताई रॉय चौधरी भी थे। समुदाय के नेताओं ने प्रधानमंत्री के साथ सार्वजनिक वित्त, सुरक्षा और सांस्कृतिक मामलों के लिए जिम्मेदार वरिष्ठ नेताओं के सामने अपनी मांगें रखीं।
मुख्य बातें
- रहमान ने 20 अक्टूबर के दौरे में रंगपुर, राजशाही और चट्टोग्राम के दुर्गा पूजा स्थलों का दौरा किया।
- उन्होंने धर्म, जातीयता, पेशे या राजनीतिक संबद्धता की परवाह किए बिना समान अधिकारों और सरकारी सहायता का वादा किया।
- तीनों स्थलों पर घोषित अनुदान कुल 40 लाख टका था, जिसमें राजशाही के धर्मसभा मंदिर के लिए 10 लाख टका शामिल हैं।
- हिंदू समुदाय के नेताओं ने समारोह कोष, धार्मिक स्थलों में सुधार, कल्याण ट्रस्ट में बदलाव और आपराधिक मामलों का सामना कर रहे लोगों के लिए न्याय की मांग की।
- रहमान ने रंगपुर के विकास के लिए 1,800 करोड़ टका और राजशाही क्षेत्र के 38,970 गन्ना किसानों के लिए 12 करोड़ टका प्रोत्साहन राशि का जिक्र किया।
- दुर्गा पूजा का समापन 21 अक्टूबर को विजयादशमी और मूर्ति विसर्जन के साथ होना था।






