अधिक गर्म शुष्क मौसम से पानी और बिजली की आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है
मजबूत होता अल नीनो म्यांमार में 2027 तक असामान्य रूप से गर्म और शुष्क हालात बनाए रखने की आशंका पैदा कर रहा है। इससे पीने के पानी की आपूर्ति घट सकती है, जलविद्युत उत्पादन कम हो सकता है और गर्मी से जुड़ी बीमारियां बढ़ सकती हैं। यह खतरा रोजमर्रा की तीन जरूरतों को जोड़ता है: घरों के लिए पानी, खेतों की सिंचाई और जलाशयों से मिलने वाली बिजली।
विषय-सूची
- अधिक गर्म शुष्क मौसम से पानी और बिजली की आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है
- जून की कमजोर स्थितियों से अक्टूबर के मजबूत पूर्वानुमान तक
- प्रशांत महासागर के माप क्या बताते हैं
- पानी के छोटे भंडार इतने लोगों को क्यों प्रभावित करते हैं
- बिजली की मांग बढ़ने पर जलविद्युत उत्पादन घट सकता है
- गर्मी और असुरक्षित पानी से स्वास्थ्य को अलग-अलग खतरे
- फसलों और पशुधन पर दबाव का सामना करेंगे किसान
- 2027 के मानसून तक अहम तारीखें
- तैयारी में सूखे से आगे की स्थितियों को भी शामिल करना होगा
- मुख्य बिंदु
अमेरिकी जलवायु पूर्वानुमान केंद्र ने 8 अक्टूबर 2026 को जारी अपनी अक्टूबर ईएनएसओ चर्चा में अनुमान लगाया कि जनवरी से मार्च 2027 तक अल नीनो की मजबूत से बहुत मजबूत स्थितियां बने रहने की संभावना 83% से अधिक है। म्यांमार के मौसम विज्ञान और जल विज्ञान विभाग ने अनियमित बारिश, दिन के समय अधिक तापमान, असामान्य तूफानी गतिविधि और सूखे को इसके संभावित परिणाम बताया है।
म्यांमार के लिए व्यावहारिक चिंता पानी और ऊर्जा, दोनों की कमी का दबाव है। जलाशयों में कम पानी पहुंचने से बिजली उत्पादन के लिए उपलब्ध पानी घट सकता है, जबकि गर्म मौसम से बिजली की मांग बढ़ सकती है। नदियों, झीलों, कुओं और तालाबों का जलस्तर गिरने से आने वाली सर्दी और गर्मी के दौरान घरों और किसानों के बीच सीमित आपूर्ति को लेकर प्रतिस्पर्धा भी बढ़ सकती है।
जिन तैयारियों की अपील की गई है उनमें पीने और सिंचाई के पानी का संरक्षण, भंडारण प्रणालियों से होने वाली अनावश्यक बर्बादी कम करना, लोगों को खतरनाक गर्मी से बचने के लिए जगहें उपलब्ध कराना और खाद्य उत्पादन की रक्षा करना शामिल है। योजना की अवधि अल नीनो के संभावित चरम के बाद 2027 के मानसून की शुरुआत तक जाती है।
जून की कमजोर स्थितियों से अक्टूबर के मजबूत पूर्वानुमान तक
म्यांमार के मौसम विभाग ने घटना के काफी शुरुआती चरण का वर्णन अपने जून के अल नीनो बुलेटिन में किया था, जो 11 जून 2026 को सुबह 07:00 बजे जारी हुआ। उस समय उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में भूमध्य रेखा के पास समुद्र की सतह के तापमान कमजोर अल नीनो स्थितियों का संकेत दे रहे थे। अंतरराष्ट्रीय मौसम एजेंसियों के पूर्वानुमानों के मुताबिक 2026 के अंत तक स्थितियां मजबूत हो सकती थीं।
विभाग ने जून में देखी गई स्थितियों का वर्णन इस तरह किया:
भूमध्य रेखा के पास उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान (SST) कमजोर अल नीनो स्थितियों का संकेत देता है।
अक्टूबर तक जलवायु पूर्वानुमान केंद्र ने महासागर और वायुमंडल की ऐसी प्रणाली का वर्णन किया जिसमें पिछले महीने के दौरान अल नीनो और मजबूत हुआ था। उसके पूर्वानुमान में साल के अंत तक इसके लगातार मजबूत होने और फिर 2027 की शुरुआत तक मजबूत से बहुत मजबूत घटना बने रहने की संभावना जताई गई।
तैयारी के लिए यह क्रम अहम है: जून में स्थितियां मजबूत होने की संभावना को लेकर शुरुआती चेतावनी दी गई थी, जबकि अक्टूबर में अगले साल तक चलने वाली शक्तिशाली घटना का पूर्वानुमान आया। म्यांमार की चेतावनी में नवंबर और दिसंबर 2026 को संभावित चरम अवधि बताया गया है।
प्रशांत महासागर के माप क्या बताते हैं
अल नीनो तब विकसित होता है जब भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर का असामान्य रूप से गर्म हिस्सा वायुमंडल के साथ परस्पर प्रभाव डालता है, जिससे हवाओं और उष्णकटिबंधीय वर्षा के स्थान में बदलाव आता है। ये बदलाव उस महासागर से दूर के मौसम को भी प्रभावित कर सकते हैं जहां गर्मी शुरू होती है। इनमें दक्षिण-पूर्व एशिया में बारिश और दिन के तापमान पर असर शामिल है।
अक्टूबर के आकलन में पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत के कुछ हिस्सों में समुद्र की सतह का तापमान औसत से 4.0°C से अधिक दर्ज किया गया। मध्य प्रशांत के निगरानी क्षेत्र को मापने वाला नीनो-3.4 सूचकांक औसत से 2.1°C अधिक पहुंच गया। नीनो-3 और नीनो-1+2 सूचकांक क्रमशः औसत से 3.0°C और 3.9°C अधिक रहे।
ये आंकड़े उन क्षेत्रों के सामान्य समुद्री तापमान से अंतर बताते हैं। हवाओं और बारिश में साथ दिखे बदलावों से पता चला कि वायुमंडल भी प्रतिक्रिया दे रहा था: मध्य से पूर्वी प्रशांत तक बारिश अधिक बनी रही, जबकि इंडोनेशिया के ऊपर कम रही।
जलवायु पूर्वानुमान केंद्र ने यह भी अनुमान लगाया कि अक्टूबर से दिसंबर के दौरान ऐतिहासिक घटना की सीमा पार होने की संभावना 83% थी। इसकी तुलना में सितंबर से नवंबर के लिए यह संभावना 54% और नवंबर से जनवरी के लिए 70% थी। इस सीमा का मतलब तीन महीने तक उसके आरओएनआई सूचकांक पर कम से कम 2.5°C का मान है। इससे यह घटना 1950 से शुरू होने वाले रिकॉर्ड में सबसे मजबूत घटनाओं में शामिल होगी।
पानी के छोटे भंडार इतने लोगों को क्यों प्रभावित करते हैं
म्यांमार की चेतावनी में संभावित कमी का एक सिलसिला बताया गया है, जिसकी शुरुआत नदियों, झीलों, कुओं और तालाबों का जलस्तर घटने से होती है। घरों को पीने का पानी कम मिल सकता है और खेतों को सिंचाई के लिए भी कम पानी मिल सकता है। गर्म और शुष्क स्थितियां जारी रहने पर भूजल का घटना भी चिंता का विषय है।
कुछ टाउनशिप में तापमान पहले से सामान्य से अधिक है। तापमान बढ़ने से पानी की जरूरत भी बढ़ सकती है, ठीक ऐसे समय में जब आपूर्ति की भरपाई करना मुश्किल हो जाए। कुओं या छोटे तालाबों पर निर्भर समुदायों पर शुष्क मौसम में इन स्रोतों का स्तर गिरने पर खास दबाव पड़ सकता है।
जलाशय कई काम आते हैं, जिनमें सिंचाई के लिए पानी जमा करना और बिजली बनाना शामिल है। उनमें कम पानी आने पर यह तय करना कठिन हो जाता है कि कितना पानी छोड़ा जाए। अभी इस्तेमाल किया गया पानी बाद की जरूरतों के लिए भंडार में नहीं रह सकता।
चेतावनियों में जलाशयों में संभावित कमी, पानी की किल्लत झेलने वाले घरों की संख्या या बिजली उत्पादन में संभावित गिरावट का अनुमान नहीं दिया गया है। इन आंकड़ों के अभाव में स्थानीय असर का पैमाना अनिश्चित बना हुआ है, हालांकि मौसमी पूर्वानुमान समय रहते तैयारी करने का आधार देता है।
बिजली की मांग बढ़ने पर जलविद्युत उत्पादन घट सकता है
जलविद्युत में बहता पानी टरबाइन घुमाकर बिजली बनाता है। बांधों में पानी की आवक कम होने से इस प्रक्रिया के लिए उपलब्ध पानी सीमित हो सकता है। इससे ऐसे समय में उत्पादन घटने का खतरा है जब गर्मी के कारण ठंडक के लिए बिजली की मांग बढ़ सकती है।
म्यांमार की चेतावनी इन दबावों को सीधे जोड़ती है: जलाशयों में कम पानी से जलविद्युत उत्पादन घट सकता है, जबकि बिजली की जरूरत बढ़ सकती है। इसके बाद बिजली की कड़ी आपूर्ति उन अन्य गतिविधियों को भी प्रभावित कर सकती है जो भरोसेमंद बिजली पर निर्भर हैं।
इसलिए पानी और बिजली की योजना साथ-साथ बनानी होगी। जलाशय प्रबंधकों को बिजली उत्पादन के साथ सिंचाई की जरूरतों पर भी विचार करना होगा, जबकि अन्य क्षेत्रों को इस संभावना के लिए तैयारी करनी होगी कि दोनों संसाधनों पर एक ही समय दबाव पड़े। चेतावनी में अल नीनो के विकसित होने के साथ संबंधित क्षेत्रों में तैयारियां करने की अपील की गई है।
गर्मी और असुरक्षित पानी से स्वास्थ्य को अलग-अलग खतरे
बच्चों, बुजुर्गों और पुरानी बीमारियों से पीड़ित लोगों को अत्यधिक गर्मी के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील बताया गया है। म्यांमार की चेतावनी में आने वाली सर्दी और गर्मी के दौरान अधिक तापमान के संभावित परिणामों में निर्जलीकरण और लू लगना शामिल हैं।
निर्जलीकरण तब होता है जब शरीर से निकलने वाले पानी की मात्रा, शरीर में जाने वाले पानी से अधिक हो जाती है। लू लगना एक चिकित्सकीय आपातस्थिति है, जिसमें शरीर का तापमान खतरनाक रूप से बढ़ जाता है। पीने के पानी तक पहुंच कम होने से लंबे समय तक गर्म मौसम में लोगों के लिए खुद को सुरक्षित रखना मुश्किल हो सकता है।
पानी की कमी से दस्त और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है, क्योंकि लोगों के पास पीने और साफ-सफाई के लिए सुरक्षित पानी कम रह जाता है। इससे गर्मी के सीधे प्रभावों के साथ स्वास्थ्य की एक और समस्या पैदा होती है, खासकर उन समुदायों में जहां आपूर्ति पहले से दबाव में है।
प्रस्तावित तैयारियों में लोगों को गर्मी से राहत देने के लिए आश्रय स्थल खोलना और कमी गंभीर होने से पहले पीने के पानी का संरक्षण करना शामिल है। ये उपाय अलग-अलग जरूरतों को पूरा करते हैं: खतरनाक तापमान में लोगों को ठंडी जगह के साथ-साथ दिन भर के लिए पर्याप्त सुरक्षित पानी भी चाहिए।
फसलों और पशुधन पर दबाव का सामना करेंगे किसान
बांधों, जलाशयों और अन्य भंडारण सुविधाओं में पानी का स्तर घटने पर किसानों को सिंचाई के लिए कम पानी मिल सकता है। अनियमित बारिश से एक और मुश्किल पैदा होती है, क्योंकि फसलों को विकास के खास चरणों में पानी चाहिए होता है और ऐसे में बारिश का समय, कुल मात्रा जितना ही अहम होता है।
जिन तैयारियों की अपील की गई है उनमें उत्पादन लक्ष्यों को पूरा करने में मदद के लिए देर से बोई जाने वाली मानसूनी फसलों की खेती, पानी का भंडारण और सिंचाई के पानी का कुशल उपयोग शामिल है। भंडारण और आपूर्ति प्रणालियों में अनावश्यक बर्बादी कम करने से शुष्क मौसम में बाद के इस्तेमाल के लिए पानी बचाया जा सकता है।
पशुपालन भी तैयारी की अपील का हिस्सा है। गर्म मौसम और पानी की कमी के दौरान इसे जारी रखने के लिए फसल उत्पादन के साथ योजना बनाना जरूरी है, न कि आपूर्ति घट जाने के बाद इसे अलग समस्या मानना।
सिफारिशों में लंबे समय तक रखे जा सकने वाले खाद्य पदार्थों और फलों का भंडार करना भी शामिल है। इन उपायों का उद्देश्य गर्मी और शुष्कता की संभावित लंबी अवधि में घरों और उत्पादकों पर दबाव के बीच कृषि उत्पादन और खाद्य उपलब्धता, दोनों की रक्षा करना है।
2027 के मानसून तक अहम तारीखें
पूर्वानुमान के मुताबिक कई महीनों तक तैयारी और निगरानी करनी होगी। महासागर में सबसे तेज गर्मी 2026 के अंत के आसपास रहने की उम्मीद है, जबकि मजबूत स्थितियां और उनसे जुड़े मौसम प्रभाव 2027 तक जारी रह सकते हैं।
- 11 जून 2026: म्यांमार के मौसम विभाग ने कमजोर अल नीनो स्थितियां दर्ज कीं और चेतावनी दी कि साल के अंत तक स्थितियां मजबूत हो सकती हैं।
- 8 अक्टूबर 2026: जलवायु पूर्वानुमान केंद्र ने जनवरी से मार्च 2027 तक अल नीनो की मजबूत से बहुत मजबूत स्थितियां बने रहने का पूर्वानुमान दिया, जिसकी संभावना 83% से अधिक है।
- 12 नवंबर 2026: अगली ईएनएसओ नैदानिक चर्चा जारी होने की तारीख तय है।
- नवंबर से दिसंबर 2026: म्यांमार की चेतावनी में इस अवधि को घटना का संभावित चरम बताया गया है।
- मार्च से मई 2027: मौसम के प्रभाव जारी रह सकते हैं; 2027 के मानसून की शुरुआत तक तैयारी करने की अपील की गई है।
म्यांमार के मौसम विभाग का कहना है कि अल नीनो के विकसित होने के साथ वह आगे भी अपडेट जारी करता रहेगा। हर अपडेट से अधिकारियों और समुदायों को यह आकलन करने में मदद मिलेगी कि मौसमी पूर्वानुमान कैसे बदल रहा है और क्या तैयारियों में बदलाव जरूरी है।
तैयारी में सूखे से आगे की स्थितियों को भी शामिल करना होगा
म्यांमार के जून बुलेटिन में अनियमित बारिश और असामान्य तूफानी गतिविधि को भी अल नीनो के संभावित प्रभावों में शामिल किया गया है। इसलिए योजना में लंबे समय तक रहने वाली गर्मी और पानी की कमी के साथ-साथ असमान मौसम का भी ध्यान रखना होगा।
चेतावनियों में सबसे अहम व्यावहारिक संदेश यह है कि मांग पूरी करना मुश्किल होने से पहले उपयोग योग्य पानी बचाया जाए। पीने के पानी की आपूर्ति की रक्षा करना, जलाशयों में पानी बनाए रखना, बर्बादी सीमित करना और सिंचाई को बिजली उत्पादन के साथ तालमेल में रखना, ये सभी एक ही समस्या के अलग-अलग पहलुओं से निपटते हैं।
पानी के स्रोतों, स्थानीय तापमान और कृषि या जलविद्युत पर निर्भरता के आधार पर समुदायों पर इन दबावों का असर अलग-अलग हो सकता है। तात्कालिक काम ऐसे शुष्क मौसम की तैयारी करना है, जिसमें कई जरूरी सेवाओं पर एक साथ दबाव पड़ सकता है, और 2027 तक पूर्वानुमानों पर नजर बनाए रखना है।
मुख्य बिंदु
- अल नीनो के मजबूत होने से म्यांमार में पीने के पानी की संभावित कमी, सिंचाई के लिए घटती आपूर्ति और कम जलविद्युत उत्पादन का खतरा है।
- अक्टूबर के पूर्वानुमान में जनवरी से मार्च 2027 तक मजबूत से बहुत मजबूत स्थितियां जारी रहने की संभावना 83% से अधिक बताई गई है।
- म्यांमार के जून बुलेटिन में उस शुरुआती चरण में कमजोर स्थितियां दर्ज की गई थीं और 2026 के अंत तक इनके मजबूत होने की संभावना जताई गई थी।
- लू लगना, निर्जलीकरण और असुरक्षित पानी से जुड़ी बीमारियां पहचाने गए स्वास्थ्य जोखिमों में शामिल हैं।
- तैयारियों में पानी का संरक्षण, गर्मी से राहत देने वाले आश्रय स्थल, खाद्य भंडारण और फसलों तथा पशुधन को बनाए रखने के उपाय शामिल हैं।
- अगली ईएनएसओ नैदानिक चर्चा 12 नवंबर 2026 को जारी होने की तारीख तय है। 2027 के मानसून की शुरुआत तक तैयारी करने की अपील की गई है।






