मछली पकड़ने वाली नौकाएं ताइवान के तटीय रक्षा-तंत्र का नक्शा बनाने में मदद करेंगी
ताइवान की सेना संभावित चीनी आक्रमण तटों का नक्शा बनाने के लिए नागरिक मछली पकड़ने वाली नौकाओं और विमानों को काम पर रखने की योजना बना रही है। वाणिज्यिक सेंसरों की मदद से उथले पानी का सर्वेक्षण किया जाएगा, जहां बड़े नौसैनिक पोत नहीं पहुंच सकते। प्रस्तावित काम में ताओयुआन का झूवेई, न्यू ताइपेई शहर के बाली जिले का वाझीवेई और ताइनान का सिशु तट शामिल होगा।
विषय-सूची
- मछली पकड़ने वाली नौकाएं ताइवान के तटीय रक्षा-तंत्र का नक्शा बनाने में मदद करेंगी
- किन तटों का सर्वेक्षण होगा?
- मौसमी बदलाव पुराने मापों को कम उपयोगी बनाते हैं
- पानी के नीचे ध्वनि, ऊपर लेजर
- रक्षा योजना में नक्शों का इस्तेमाल
- संवेदनशील विश्लेषण सैन्य इकाइयों के पास रहेगा
- वाणिज्यिक तकनीक की बड़ी भूमिका
- मुख्य बिंदु
इस पहल का प्रबंधन राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय का रक्षा नवाचार प्रभाग करेगा। निजी सर्वेक्षण कंपनियां समुद्र और हवा से माप जुटाएंगी, जबकि सैन्य इकाइयां इन्हें मिलाकर उभयचर लैंडिंग के खिलाफ रक्षा योजना बनाने के लिए विस्तृत त्रि-आयामी नक्शे तैयार करेंगी। उभयचर लैंडिंग में सैनिक समुद्र से तट की ओर बढ़ते हैं।
नौकाएं तट के पास 3 मीटर तक गहरे पानी पर ध्यान केंद्रित करेंगी। विमान समुद्रतट के भूभाग और, जहां उपकरण व पानी की स्थितियां अनुमति दें, सतह के नीचे की विशेषताओं का मापन करेंगे। इन सर्वेक्षणों से योजनाकारों को समुद्र तल से तट तक के बदलाव को समझने में मदद मिलेगी। लैंडिंग पोतों और उभयचर वाहनों को इसी क्षेत्र से होकर गुजरना होगा।
एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर इस तरीके को नौसेना के लिए पहली बार इस्तेमाल किया जा रहा तरीका बताया। उन्होंने कहा कि इससे तटीय परिचालन स्थितियों की जानकारी पहले के तरीकों की तुलना में दर्जनों गुना तेजी से जुटाई जा सकती है। प्रस्तावित कार्य-विभाजन के तहत नागरिक ठेकेदार माप जुटाएंगे और सेना उन्हें परिचालन योजनाओं में बदलेगी।
किन तटों का सर्वेक्षण होगा?
ताइवान के रक्षा योजनाकार उन तटीय इलाकों के लिए "रेड बीच" शब्द का इस्तेमाल करते हैं जिन्हें चीनी उभयचर हमले के लिए उपयुक्त माना जाता है। रक्षा मंत्रालय, अमेरिकी थिंक टैंक और ताइवान के राष्ट्रीय रक्षा एवं सुरक्षा अनुसंधान संस्थान से जुड़े आकलनों के मुताबिक, संभावित लैंडिंग स्थलों की संख्या लगभग चार से 20 के बीच है।
यह दायरा संभावित लैंडिंग स्थलों के अलग-अलग आकलनों को दर्शाता है। झूवेई और वाझीवेई उन उत्तरी स्थलों में शामिल हैं जिनका नाम लिया गया है, जबकि सिशु दक्षिण-पश्चिमी शहर ताइनान में है। इन स्थलों को शामिल करने से प्रस्तावित सर्वेक्षण एक ही तट तक सीमित न रहकर व्यापक भौगोलिक क्षेत्र को कवर करेगा।
योजनाकारों ने इस अवधारणा का विस्तार करके "कंपोजिट रेड बीच" भी शामिल किए हैं। इन जगहों पर बंदरगाह सुविधाओं के साथ-साथ हवाई अभियानों के लिए उपयुक्त क्षेत्र होते हैं। ऐसे स्थानों के आकलन में कई जुड़ी हुई विशेषताओं को देखना पड़ता है: समुद्र से पहुंच, उपयोग योग्य तटीय भूभाग, बंदरगाह का बुनियादी ढांचा और वे इलाके जहां सेनाएं हवाई मार्ग से पहुंच सकती हैं।
प्रस्तावित नक्शे इन आसपास के इलाकों को एक साझा भौगोलिक चित्र में दिखाएंगे। सैन्य योजनाकारों के लिए व्यावहारिक जरूरत यह समझना है कि उथले पानी से होकर आने वाला रास्ता तटरेखा के ठीक आगे की जमीन से कैसे जुड़ता है।
मौसमी बदलाव पुराने मापों को कम उपयोगी बनाते हैं
नौसेना के 192वें और 151वें बेड़े ने पहले प्रशिक्षण अभ्यासों के दौरान जलमाप संबंधी जानकारी जुटाई थी। जलमाप सर्वेक्षण में पानी की गहराई और पानी के नीचे की विशेषताओं का मापन किया जाता है, जिससे समुद्र तल की बनावट और पानी में आवाजाही को प्रभावित करने वाली स्थितियों को समझने में मदद मिलती है।
ताइवान के तट के पास का वातावरण मौसम और तूफानों के साथ बदलता रहता है। इन बदलावों से उथले समुद्र तल की बनावट बदल सकती है, इसलिए सर्वेक्षण कितनी बार किए जाते हैं, यह महत्वपूर्ण है। समुद्री नक्शा माप लिए जाने के समय की स्थितियां दर्ज करता है; तट बदलने पर योजनाकारों को नए मापों की जरूरत होती है।
पारंपरिक नौसैनिक सर्वेक्षण पोतों को लचीलेपन, सर्वेक्षण की आवृत्ति और बेहद उथले पानी तक पहुंच के मामले में सीमाओं का सामना करना पड़ा है। छोटी नागरिक नौकाओं के प्रस्तावित इस्तेमाल से पहुंच की समस्या दूर होगी, जबकि निजी सर्वेक्षण कंपनियां और वाणिज्यिक उपकरण विस्तृत माप जुटाने की क्षमता बढ़ाएंगे।
इस बदलाव से कुछ आंकड़े बेड़े के प्रशिक्षण अभ्यासों के दौरान जुटाई गई जानकारी से अलग, समर्पित सर्वेक्षणों के जरिए भी मिलेंगे। सर्वेक्षण का यह काम सेना को तटीय भूभाग की जानकारी अपडेट करने का एक और तरीका देगा, जबकि परिणामों की व्याख्या की जिम्मेदारी नौसैनिक इकाइयों के पास रहेगी।
पानी के नीचे ध्वनि, ऊपर लेजर
मछली पकड़ने वाली नौकाओं पर मल्टीबीम इको साउंडर लगाए जाएंगे। ये उपकरण पानी में ध्वनि तरंगें भेजते हैं और समुद्र तल से लौटने वाली तरंगों को मापते हैं। नौका के नीचे एक चौड़े हिस्से में कई माप लेकर, यह उपकरण पानी के भीतर की ढलानों, चैनलों और अन्य विशेषताओं की विस्तृत तस्वीर तैयार कर सकता है।
प्रस्तावित सर्वेक्षण क्षेत्र में सर्फ ज़ोन शामिल है, जिसे तटरेखा से लेकर लगभग 3 मीटर गहरे पानी तक का क्षेत्र बताया गया है। छोटी नौकाएं इस उथले इलाके में काम करेंगी, जहां बड़े सर्वेक्षण पोत नहीं जा सकते। इससे मिलने वाले बैथिमेट्रिक आंकड़ों, यानी पानी के नीचे की गहराई और आकार के मापों में, मापन बिंदु एक-दूसरे के काफी करीब होंगे।
किराये पर लिए गए विमानों में प्रकाश पहचान और दूरी मापन उपकरण होंगे, जिन्हें आम तौर पर LiDAR कहा जाता है। ये उपकरण जमीन की ओर लेजर तरंगें भेजते हैं और लौटने वाले संकेतों से दूरी का हिसाब लगाते हैं। पानी की पारदर्शिता और अन्य स्थितियां अनुकूल हों तो उपयुक्त प्रणालियां उथले पानी के नीचे के भूभाग का भी मापन कर सकती हैं।
दोनों तरीके एक-दूसरे के पूरक होंगे। नौकाएं पानी से समुद्र तल का मापन करेंगी, जबकि विमान ऊपर से समुद्रतट और उपयुक्त उथले इलाकों का सर्वेक्षण करेंगे। इसके बाद सैन्य कर्मी इन मापों को मिलाकर ऐसे मॉडल बनाएंगे जिनमें जमीन और उससे सटा समुद्र तल एक साथ दिखे।
इन मापों को जोड़ना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि लैंडिंग का रास्ता दोनों तरह के क्षेत्रों से होकर गुजरता है। पानी के नीचे का विस्तृत नक्शा और समुद्रतट का अलग नक्शा योजना बनाने में तब अधिक उपयोगी होते हैं, जब उनके माप तटरेखा पर सटीक रूप से एक-दूसरे से मेल खाते हों।
रक्षा योजना में नक्शों का इस्तेमाल
सैन्य योजनाकार तैयार मॉडलों का इस्तेमाल संभावित लैंडिंग मार्गों का आकलन करने और रक्षात्मक बारूदी सुरंगों व अवरोधों के लिए स्थान तय करने में करेंगे। नाम न बताने वाले वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि गहरे चैनल सुरंगें बिछाने के संभावित स्थान हो सकते हैं, जबकि रीफ उन जगहों में शामिल हैं जहां अवरोध आगे बढ़ती सेनाओं को रोकने में मदद कर सकते हैं।
भूभाग के मापों से योजनाकारों को जहाजों, उभयचर वाहनों और होवरक्राफ्ट के लिए उपलब्ध रास्तों का अध्ययन करने में मदद मिलेगी। हर एक को पानी की गहराई, समुद्र तल की विशेषताओं और समुद्रतट से बने भौतिक वातावरण से होकर तट तक पहुंचना होगा।
एक सरल तुलना में, सड़क का नक्शा दिखाता है कि सड़कें आपस में कैसे जुड़ती हैं, जबकि भूभाग का नक्शा ढलान और अवरोध भी दिखाता है। प्रस्तावित तटीय मॉडल पानी के किनारे पर इसी तरह काम करेंगे और सैन्य इकाइयों को यह देखने में मदद करेंगे कि कहां आवाजाही आसान हो सकती है और कहां रक्षा-व्यवस्थाएं उसे मुश्किल बना सकती हैं।
सर्वेक्षण इन फैसलों के लिए भौगोलिक आधार उपलब्ध कराएगा। रक्षात्मक ठिकानों का चुनाव सैन्य काम रहेगा और विशेषज्ञों द्वारा मापों की जांच और उन्हें एकीकृत करने के बाद किया जाएगा। कच्चे आंकड़े जुटाने और सुरंगों या अवरोधों की जगह तय करने का काम अलग-अलग चरणों में होगा।
संवेदनशील विश्लेषण सैन्य इकाइयों के पास रहेगा
नागरिकों की भागीदारी से तटीय सर्वेक्षण में शामिल कंपनियों, कर्मचारियों और आंकड़े संभालने वालों की संख्या बढ़ेगी। वरिष्ठ सैन्य अधिकारी के बताए सुरक्षा इंतजाम के तहत, नागरिकों का काम आंकड़े जुटाने तक सीमित रहेगा, जबकि विश्लेषण और योजना सेना करेगी।
ठेकेदार भौतिक स्थितियों के कच्चे माप जुटाएंगे। नौसेना मौसम विज्ञान एवं समुद्र विज्ञान कार्यालय सहित सैन्य इकाइयां शोर हटाने, आंकड़ों को एकीकृत करने, सामरिक विश्लेषण करने और लैंडिंग के खिलाफ रक्षा के लिए निर्देशांक तय करने का काम संभालेंगी।
शोर हटाने का अर्थ है अवांछित संकेतों या मापन की त्रुटियों की पहचान कर उन्हें कम करना। आंकड़ों को एकीकृत करने का अर्थ है मापों के अलग-अलग समूहों को एक सुसंगत मॉडल में लाना। योजनाकारों को सर्वेक्षण के नतीजों को रक्षा-स्थानों के फैसलों से भरोसेमंद ढंग से जोड़ने के लिए, दोनों चरण जरूरी हैं।
इस व्यवस्था में अंतिम परिचालन व्याख्या सैन्य इकाइयों के भीतर ही रहेगी। नागरिक दल भौतिक वातावरण के माप उपलब्ध कराएंगे; सैन्य विशेषज्ञ उस जानकारी को रक्षा संबंधी जरूरतों और खास स्थानों से जोड़ेंगे।
सुरक्षा की चुनौती आंकड़े जुटाने से लेकर उनके हस्तांतरण और प्रसंस्करण तक, पूरे कार्यप्रवाह में बनी रहती है। सामरिक योजना सेना के भीतर रखने से जिम्मेदारियों का स्पष्ट बंटवारा होता है, जबकि सर्वेक्षण फाइलों को संभालना भी परियोजना का ऐसा हिस्सा रहेगा जिसकी सुरक्षा जरूरी है।
वाणिज्यिक तकनीक की बड़ी भूमिका
इस पहल में वाणिज्यिक रूप से उपलब्ध तैयार तकनीक का इस्तेमाल होगा, जिसे अक्सर COTS कहा जाता है। सरल शब्दों में, इसका मतलब है ऐसा उपकरण जो बाजार में पहले से उपलब्ध है, न कि सशस्त्र बलों के लिए खास तौर पर विकसित नई प्रणाली। मल्टीबीम इको साउंडर और हवाई लेजर स्कैनिंग का इस्तेमाल सैन्य नक्शा-निर्माण की जरूरत के लिए किया जाएगा।
वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने इस तरीके को अमेरिकी रक्षा नवाचार इकाई के उदाहरण से जोड़ा, जो सैन्य जरूरतों को वाणिज्यिक तकनीक से जोड़ती है। ताइवान की प्रस्तावित परियोजना का तात्कालिक उद्देश्य व्यावहारिक है: निजी सर्वेक्षण क्षमता और छोटे प्लेटफॉर्मों का इस्तेमाल करके तटीय जानकारी तेजी से जुटाना।
पहले की तुलना में आंकड़े दर्जनों गुना तेजी से जुटाने का अधिकारी का अनुमान, प्रदर्शन को लेकर दिया गया सबसे स्पष्ट दावा है। योजना के विवरण में सार्वजनिक बजट, ठेका दिए जाने, सर्वेक्षण शुरू होने की तारीख, पूरा करने की समय-सीमा या तय अद्यतन कार्यक्रम की जानकारी नहीं दी गई।
सर्वेक्षण कंपनियों और इसमें शामिल कर्मचारियों की प्रस्तावित भूमिका माप जुटाने की होगी, सैन्य योजना बनाने की नहीं। नौसैनिक विशेषज्ञों के लिए अतिरिक्त आंकड़ों से गुणवत्ता जांचने, सर्वेक्षणों को एकीकृत करने और तटीय रक्षा संबंधी फैसलों में इस्तेमाल होने वाली भौगोलिक जानकारी अपडेट करने का काम बढ़ेगा।
मुख्य बदलाव यह होगा कि ताइवान अपने तटों के बारे में जानकारी कैसे जुटाता है। केवल नौसैनिक पोतों पर निर्भर रहने के बजाय सेना नागरिक नौकाओं, विमानों और पहले से उपलब्ध सेंसरों का सहारा लेगी, फिर उन मापों को रक्षा योजनाओं में बदलने वाले विश्लेषण पर अपना नियंत्रण बनाए रखेगी।
मुख्य बिंदु
- ताइवान संभावित चीनी लैंडिंग स्थलों का नक्शा बनाने के लिए निजी सर्वेक्षण कंपनियों, मछली पकड़ने वाली नागरिक नौकाओं और विमानों को काम पर रखने की योजना बना रहा है।
- नामित स्थानों में ताओयुआन का झूवेई, न्यू ताइपेई शहर का वाझीवेई और ताइनान का सिशु शामिल हैं।
- नौकाएं 3 मीटर तक गहरे पानी में मल्टीबीम इको साउंडर का इस्तेमाल करेंगी, जबकि विमान पूरक लेजर सर्वेक्षण करेंगे।
- सैन्य इकाइयां मापों को मिलाकर ऐसे नक्शे तैयार करेंगी जिनसे लैंडिंग मार्गों, रक्षात्मक सुरंगों और अवरोधों के बारे में फैसले लेने में मदद मिलेगी।
- नागरिक ठेकेदार कच्चे आंकड़े जुटाएंगे, जबकि प्रसंस्करण और सामरिक योजना की जिम्मेदारी सैन्य विशेषज्ञों के पास रहेगी।
- नाम न बताने वाले एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने आंकड़े जुटाने की गति में बड़ी बढ़ोतरी का अनुमान जताया, लेकिन बजट या कार्यान्वयन की समय-सारणी नहीं बताई गई।






