दुशांबे में सुरक्षा और निवेश पर चर्चा
चीनी प्रधानमंत्री ली च्यांग ने 19 अक्टूबर, 2026 को दुशांबे में राष्ट्रपति इमोमाली रहमोन के साथ बातचीत के दौरान ताजिकिस्तान के साथ खुफिया जानकारी साझा करने को मजबूत करने की अपील की। उन्होंने सुरक्षा सहयोग बढ़ाने को चीनी नागरिकों और कारोबारों की सुरक्षा से जोड़ा। यह अपील पिछले साल के अंत में हुए उन हमलों के बाद आई है, जिनमें ताजिकिस्तान में पांच चीनी नागरिक मारे गए थे। ताजिक अधिकारियों के अनुसार, हमले पड़ोसी अफगानिस्तान से किए गए थे।
विषय-सूची
- दुशांबे में सुरक्षा और निवेश पर चर्चा
- ली ने ताजिकिस्तान से क्या करने को कहा
- अफगान सीमा क्यों अहम है
- सुरक्षा की भाषा और अधिकारों पर विवाद
- व्यापार, खनिज और कृत्रिम बुद्धिमत्ता
- हस्ताक्षरित दस्तावेजों में क्या शामिल है
- क्षेत्रीय बैठक से एजेंडा व्यापक हुआ
- बैठकें किस तरह एक-दूसरे से जुड़ी हैं
- लोगों और परियोजनाओं के लिए क्या बदलेगा
- मुख्य बातें
चीन के आधिकारिक बैठक वक्तव्य के मुताबिक, ली ने दोनों देशों से कानून प्रवर्तन और सुरक्षा में सहयोग गहरा करने, खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान करने और आतंकवाद, अलगाववाद तथा उग्रवाद से संयुक्त रूप से लड़ने का आग्रह किया। उन्होंने व्यापार और बुनियादी ढांचे, हरित खनिजों, संपर्क, डिजिटल अर्थव्यवस्था तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का प्रस्ताव भी रखा।
बातचीत में दो परस्पर जुड़ी प्राथमिकताएं सामने आईं: चीनी लोगों और परियोजनाओं को सुरक्षित रखना तथा करीब 1.1 करोड़ आबादी वाले देश में चीन की आर्थिक मौजूदगी बढ़ाना। चीन पहले से ही ताजिकिस्तान में एक बड़ा निवेशक है। चीन के साथ उसकी दूरस्थ और पहाड़ी सीमा इस रिश्ते को प्रत्यक्ष भौगोलिक महत्व देती है।
ली ने ताजिकिस्तान के प्रधानमंत्री कोखिर रसूलज़ोदा के साथ बातचीत के एक दिन बाद रहमोन से मुलाकात की। रसूलज़ोदा के साथ चर्चा में बुनियादी ढांचे के निर्माण, शिक्षा, भ्रष्टाचार-विरोधी प्रयासों और मानकीकरण से जुड़े दस्तावेजों पर सहमति बनी। इससे यात्रा के सुरक्षा संदेश के साथ एक व्यावहारिक आर्थिक एजेंडा भी जुड़ा।
ली ने ताजिकिस्तान से क्या करने को कहा
ली की मांग दोस्ती के सामान्य आश्वासन से आगे थी। उन्होंने खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान और साझा करने का आह्वान किया। इसका अर्थ है कि अधिकारी संदिग्ध खतरों से जुड़ी जानकारी एक-दूसरे को देंगे, ताकि वे जोखिमों की पहचान कर सकें और जवाबी कार्रवाई में तालमेल बिठा सकें।
19 अक्टूबर की सुबह हुई बैठक पर चीन के विवरण में ली के सुरक्षा प्रस्ताव को इस तरह दर्ज किया गया:
दोनों पक्षों को कानून प्रवर्तन और सुरक्षा सहयोग गहरा करना चाहिए, खुफिया आदान-प्रदान और साझा करने को मजबूत करना चाहिए, 'तीन ताकतों' से संयुक्त रूप से लड़ना चाहिए और क्षेत्र में स्थायी शांति तथा स्थिरता की रक्षा करनी चाहिए।
चीन के प्रधानमंत्री ली ने चीनी नागरिकों और कंपनियों की सुरक्षा को इस एजेंडे का स्पष्ट हिस्सा बनाया। चीनी सरकार के वक्तव्य में उनकी मांग इस तरह दर्ज की गई:
आशा है कि ताजिकिस्तान वहां चीनी नागरिकों और उद्यमों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मजबूत कदम उठाता रहेगा।
इसलिए चीनी कामगार और कारोबारी सुरक्षा संबंधी चर्चाओं के केंद्र में हैं। ताजिकिस्तान में काम कर रही कंपनियों के लिए सुरक्षा यह तय करती है कि कर्मचारी यात्रा कर सकते हैं या नहीं, परियोजना स्थलों पर काम कर सकते हैं या नहीं और कामकाज जारी रख सकते हैं या नहीं। रसूलज़ोदा के साथ बातचीत में भी ली ने सुरक्षा का मुद्दा उठाया और इसे दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क के लिए स्थिर वातावरण से जोड़ा।
18 अक्टूबर की दोपहर हुई बातचीत के आधिकारिक विवरण में ली ने कहा कि दोनों पक्षों को "कानून प्रवर्तन और सुरक्षा सहयोग लगातार गहरा करना चाहिए, ताकि दोनों पक्षों के लोगों के बीच संपर्क के लिए स्थिर और शांतिपूर्ण वातावरण बनाया जा सके।"
घोषणाओं में खुफिया जानकारी साझा करने की नई प्रक्रियाओं, अतिरिक्त तैनाती, धनराशि या सुरक्षा उपायों की समयसीमा का उल्लेख नहीं था। सार्वजनिक रूप से की गई ठोस प्रतिबद्धताएं सहयोग गहरा करने और सुरक्षा बेहतर बनाने तक सीमित रहीं; उन्हें लागू करने का ब्योरा नहीं दिया गया।
अफगान सीमा क्यों अहम है
ताजिक अधिकारियों ने पिछले साल के अंत में पांच चीनी नागरिकों की हत्या के लिए अफगानिस्तान से सक्रिय हमलावरों को जिम्मेदार ठहराया था। इन मौतों से ली की अपील को तत्काल मानवीय और आर्थिक संदर्भ मिलता है: विदेश में काम कर रहे चीनी नागरिक ताजिकिस्तान की दक्षिणी सीमा पार से फैली हिंसा में पहले ही मारे जा चुके हैं।
अफगानिस्तान में तालिबान अधिकारियों के साथ ताजिकिस्तान के संबंध तनावपूर्ण हैं। ताजिकिस्तान पहले भी सीमा पर सक्रिय नशीले पदार्थों के तस्करों और अवैध रूप से सोना निकालने वालों को लेकर चेतावनी दे चुका है। ये चिंताएं सीमा पर अलग-अलग तरह की गतिविधियों का दबाव बढ़ाती हैं, जिनमें सशस्त्र हमलों से लेकर अवैध व्यापार और खनन तक शामिल हैं।
चीन की चिंता उसके अपने क्षेत्र तक भी फैली है। बीजिंग को लंबे समय से आशंका रही है कि मध्य एशिया की हिंसा उसके सुदूर पश्चिमी क्षेत्र शिनजियांग तक फैल सकती है, जहां मुख्य रूप से मुस्लिम उइगर समुदाय रहता है। चीनी अधिकारियों ने वहां पहले हुए कई हमलों के लिए उइगर उग्रवादियों को जिम्मेदार ठहराया है।
चीन और अफगानिस्तान के बीच ताजिकिस्तान की स्थिति से समझ आता है कि बातचीत में खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान प्रमुखता से क्यों शामिल है। सीमा के एक ओर जुटाई गई जानकारी दूसरी ओर के अधिकारियों के लिए अहम हो सकती है, खास तौर पर तब, जब संदिग्ध हमलावर या तस्कर दूरदराज के इलाकों से गुजरते हों।
सुरक्षा की भाषा और अधिकारों पर विवाद
ली ने आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से संयुक्त रूप से लड़ने का आह्वान किया। बीजिंग अक्सर इन श्रेणियों को "तीन बुरी ताकतें" कहता है। अलगाववाद का अर्थ किसी क्षेत्र को राज्य से अलग करने की कोशिश है। चीन की सुरक्षा नीति में यह शब्द क्षेत्रीय नियंत्रण से जुड़ी चिंताओं के साथ निकटता से जुड़ा है, जिनमें शिनजियांग भी शामिल है।
मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि चीन ने उइगरों का गंभीर दमन किया है और उनके धार्मिक, सांस्कृतिक तथा भाषाई अधिकारों पर पाबंदियां लगाई हैं। चीन का कहना है कि ऐसे दुरुपयोग नहीं हुए हैं। यह विवाद उन सुरक्षा प्राथमिकताओं के इर्द-गिर्द अंतरराष्ट्रीय सहयोग बनाने की बीजिंग की कोशिशों का भी संदर्भ है।
बैठक में रहमोन ने चीन के मूल हितों के लिए ताजिकिस्तान का समर्थन दोहराया। उनकी सरकार ने एक-चीन सिद्धांत के प्रति प्रतिबद्धता भी दोहराई। बीजिंग के इस सिद्धांत के अनुसार, एक ही चीन है और ताइवान उसका हिस्सा है।
चर्चा में राजनीतिक समर्थन और व्यावहारिक सुरक्षा सहयोग साथ-साथ दिखे। ली ने कथित खतरों से निपटने के लिए बेहतर तालमेल मांगा, जबकि रहमोन ने उन मुद्दों पर समर्थन दिया जिन्हें बीजिंग अन्य सरकारों के साथ अपने संबंधों के केंद्र में रखता है।
व्यापार, खनिज और कृत्रिम बुद्धिमत्ता
ली ने द्विपक्षीय व्यापार और बुनियादी ढांचे, हरित खनिजों तथा परिवहन संपर्क के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने डिजिटल अर्थव्यवस्था और कृत्रिम बुद्धिमत्ता को भी विकास के क्षेत्र बताया। डिजिटल अर्थव्यवस्था में डिजिटल सेवाओं और डेटा पर आधारित कारोबारी गतिविधियां शामिल हैं, जबकि कृत्रिम बुद्धिमत्ता में ऐसे कंप्यूटर सिस्टम आते हैं जो पैटर्न पहचानने या जानकारी तैयार करने जैसे काम करते हैं।
19 अक्टूबर के बैठक-विवरण में उनका आर्थिक प्रस्ताव इस तरह दिया गया:
चीन ताजिकिस्तान के साथ मिलकर द्विपक्षीय व्यापार का दायरा बढ़ाने, बुनियादी ढांचे, हरित खनिजों, संपर्क और अन्य क्षेत्रों में सहयोग मजबूत करने, डिजिटल अर्थव्यवस्था और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे उभरते उद्योगों में सहयोग बढ़ाने तथा आर्थिक विकास के कारकों को संयुक्त रूप से मजबूत करने के लिए तैयार है।
चीन ने ताजिकिस्तान से अधिक सामान आयात करने और चीनी कंपनियों को वहां निवेश तथा कारोबार स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करने की मंशा भी जताई। रसूलज़ोदा के साथ बातचीत में ली ने ताजिकिस्तान से इन कंपनियों के लिए अनुकूल कारोबारी माहौल बनाए रखने का आग्रह किया।
18 अक्टूबर के विवरण में कहा गया कि चीन ताजिकिस्तान के अधिक उच्च गुणवत्ता वाले सामान आयात करने को तैयार है। ली ने पारस्परिक लाभ के लिए व्यापार और निवेश, हरित खनिजों, संपर्क, स्वच्छ ऊर्जा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता में गहरे सहयोग का प्रस्ताव रखा।
रहमोन की आर्थिक प्राथमिकताएं ली के प्रस्तावों से काफी हद तक मेल खाती थीं। उन्होंने व्यापार, उद्योग, कृषि, ऊर्जा, खनिज, परिवहन संपर्क और कृत्रिम बुद्धिमत्ता को ऐसे क्षेत्र बताया जिनमें ताजिकिस्तान सहयोग गहरा करने के लिए तैयार है। रसूलज़ोदा ने भी हरित और डिजिटल अर्थव्यवस्थाओं के साथ निवेश, कृषि, लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा तथा खनिज क्षेत्रों में गतिविधियां बढ़ाने की मांग की।
रसूलज़ोदा ने चीन को ताजिकिस्तान का सबसे महत्वपूर्ण व्यापार और निवेश साझेदार बताया और ताजिक आर्थिक विकास के लिए उसके लंबे समय से मिल रहे समर्थन के लिए आभार जताया। उन्होंने सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए अंतर-सरकारी आर्थिक एवं व्यापार सहयोग समिति का अधिक उपयोग करने का आह्वान किया।
इस एजेंडे का व्यापक दायरा ताजिकिस्तान के लिए अहम है। प्रस्तावित संबंध में सामान की आवाजाही, बुनियादी ढांचे का निर्माण, संसाधनों का दोहन और नई सेवाओं का विकास शामिल है। इन योजनाओं के साथ सुरक्षा सहयोग भी जुड़ा है, क्योंकि हर योजना लोगों और कंपनियों के सुरक्षित रूप से काम कर पाने पर निर्भर करती है।
हस्ताक्षरित दस्तावेजों में क्या शामिल है
18 अक्टूबर की बातचीत के बाद ली और रसूलज़ोदा ने बुनियादी ढांचे के निर्माण, शिक्षा, भ्रष्टाचार-विरोधी प्रयासों और मानकीकरण से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर होते देखे। मानकीकरण का अर्थ साझा तकनीकी नियम या आवश्यकताएं तय करना है, जिससे उत्पाद, उपकरण और सेवाएं सीमाओं के पार काम कर सकें।
18 अक्टूबर को प्रकाशित आधिकारिक विवरण में दस्तावेजों के विशिष्ट शीर्षक या उनका पूरा पाठ नहीं दिया गया।
शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी यात्रा के एजेंडे में शामिल थे। ली ने संस्कृति, शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल और स्थानीय समुदायों के बीच संपर्क में व्यापक सहयोग का प्रस्ताव रखा। रसूलज़ोदा ने आर्थिक कार्यक्रम के साथ सांस्कृतिक और मानवीय आदान-प्रदान बढ़ाने का समर्थन किया।
रहमोन ने ली से मुलाकात के दौरान लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने का भी आह्वान किया।
ली ने आर्थिक प्रस्तावों को चीन की अंतरराष्ट्रीय बुनियादी ढांचे और व्यापार संपर्कों से जुड़ी योजना, बेल्ट एंड रोड पहल, के दायरे में रखा। उन्होंने दोनों देशों की विकास रणनीतियों के बीच बेहतर तालमेल का आह्वान किया, जिसमें स्वच्छ ऊर्जा, खनिज, संपर्क और कृत्रिम बुद्धिमत्ता में सहयोग शामिल है।
इससे यात्रा में दो स्तरों की गतिविधियां दिखती हैं: कुछ तय क्षेत्रों में हस्ताक्षरित दस्तावेज और निवेश तथा सहयोग बढ़ाने की व्यापक राजनीतिक प्रतिबद्धता। कारोबारों के लिए बुनियादी ढांचे और मानकों से जुड़े दस्तावेज सबसे सीधे तौर पर प्रासंगिक हैं; छात्रों और संस्थानों के लिए शिक्षा का हिस्सा संपर्क का एक और माध्यम है।
18 अक्टूबर की दोपहर ली ने ताजिकिस्तान के राष्ट्रीय मेल-मिलाप और पुनरुत्थान स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की। वू झेंगलॉन्ग ने बातचीत और पुष्पांजलि अर्पित करने के कार्यक्रम में, साथ ही अगली सुबह रहमोन के साथ हुई बैठक में भी हिस्सा लिया।
क्षेत्रीय बैठक से एजेंडा व्यापक हुआ
ली आधिकारिक यात्रा और शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की शासनाध्यक्ष परिषद की 25वीं बैठक में भाग लेने के लिए दुशांबे पहुंचे थे। यह परिषद क्षेत्रीय संगठन के सदस्य देशों के शासनाध्यक्षों को एक साथ लाती है और द्विपक्षीय बैठकों से आगे चर्चा के लिए मंच देती है।
चीन ने इस बैठक की मेजबानी कर रहे ताजिकिस्तान को पूरा समर्थन दिया। ली ने संयुक्त राष्ट्र और चीन-मध्य एशिया तंत्र के जरिए बेहतर तालमेल का भी आह्वान किया। रसूलज़ोदा के साथ उनकी बातचीत में विश्व कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहयोग संगठन के जरिए तालमेल का प्रस्ताव भी शामिल था।
रहमोन के साथ बैठक में ली ने कहा कि चीन एससीओ के उच्च गुणवत्ता वाले विकास को बढ़ावा देने के लिए सभी पक्षों के साथ काम करने को तैयार है। उन्होंने शी की चार वैश्विक पहलों को सक्रिय रूप से लागू करने और मानवता के साझा भविष्य वाला समुदाय बनाने के लिए मिलकर काम करने का भी आह्वान किया।
रसूलज़ोदा के साथ बातचीत में ली ने कहा कि वैश्विक दक्षिण के महत्वपूर्ण सदस्यों के रूप में चीन और ताजिकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय हालात में लगातार हो रहे जटिल बदलावों के बीच एकजुट होकर अधिक निकट सहयोग करना चाहिए, अपने साझा हितों की रक्षा करनी चाहिए और अंतरराष्ट्रीय निष्पक्षता तथा न्याय को कायम रखना चाहिए। उन्होंने अधिक न्यायसंगत और तर्कसंगत वैश्विक शासन व्यवस्था बनाने में मदद के लिए संयुक्त राष्ट्र, एससीओ, चीन-मध्य एशिया तंत्र और विश्व कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहयोग संगठन के जरिए तालमेल का आह्वान किया।
रहमोन ने संयुक्त राष्ट्र, एससीओ और चीन-मध्य एशिया तंत्र के जरिए निकट सहयोग का समर्थन किया। उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की ओर से पेश की गई चार वैश्विक पहलों के लिए भी समर्थन जताया। इससे ताजिकिस्तान चीन की व्यापक कूटनीतिक प्राथमिकताओं के साथ जुड़ गया।
रहमोन ने कहा कि इस सहयोग से नए युग में व्यापक रणनीतिक साझेदारी नई ऊंचाइयों पर पहुंचेगी और दोनों देशों के बीच साझा भविष्य वाला समुदाय आगे बढ़ेगा। रसूलज़ोदा ने भी द्विपक्षीय संबंधों में और परिणाम हासिल करने के लिए एससीओ तथा चीन-मध्य एशिया तंत्र के जरिए करीबी तालमेल का आह्वान किया।
यह यात्रा मध्य एशिया में कूटनीतिक गतिविधियों के व्यस्त दौर में हुई। ताजिकिस्तान जाने से पहले ली उज्बेकिस्तान में थे, जबकि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो रविवार को उज्बेकिस्तान पहुंचे। ताजिकिस्तान के रूस के साथ भी घनिष्ठ संबंध हैं। रूस वहां एक सैन्य अड्डा बनाए हुए है। चीन के साथ उसके बढ़ते संबंध इस स्थापित रूसी सुरक्षा साझेदारी के साथ-साथ आगे बढ़ रहे हैं।
बैठकें किस तरह एक-दूसरे से जुड़ी हैं
ली और रहमोन दोनों ने मई में रहमोन की चीन यात्रा और शी के साथ उनकी मुलाकात का उल्लेख किया। अक्टूबर की चर्चाएं संबंधों की दिशा तय करने की उस पहले की कोशिश के बाद हुईं और प्रधानमंत्री स्तर की बातचीत से आगे बढ़कर ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति के साथ बैठक तक पहुंचीं।
ली ने रहमोन से कहा कि दोनों देश साझा भविष्य वाला समुदाय बनाने के लिए काम कर रहे हैं और मई की बैठक में द्विपक्षीय संबंधों की दिशा पर और रूपरेखा तय हुई थी। उन्होंने कहा कि चीन ताजिकिस्तान के साथ अपनी गहरी दोस्ती को महत्व देता है, संबंधों को हमेशा रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से देखेगा और राजनीतिक विश्वास मजबूत करना, एक-दूसरे के मूल हितों का दृढ़ समर्थन करना, सहयोग की गुणवत्ता और प्रभावशीलता बढ़ाना तथा आधुनिकीकरण की दिशा में साथ आगे बढ़ना चाहता है। रहमोन ने कहा कि ताजिकिस्तान ने हमेशा चीन के साथ साझेदारी को बहुत महत्व दिया है और उसका गहरा सम्मान किया है। मई में बनी महत्वपूर्ण समझ ने इसके विकास की दिशा तय की थी।
- मई 2026: रहमोन ने चीन का दौरा किया और शी से मुलाकात की। दोनों ने द्विपक्षीय संबंधों के विकास पर समझ बनाई।
- 18 अक्टूबर, 2026: ली दुशांबे पहुंचे और रसूलज़ोदा के साथ बातचीत की। दोनों पक्षों ने सहयोग दस्तावेजों पर हस्ताक्षर होते देखे।
- 19 अक्टूबर, 2026: ली ने रहमोन से मुलाकात की और खुफिया जानकारी साझा करने, सुरक्षा सहयोग तथा चीनी नागरिकों और उद्यमों की सुरक्षा मजबूत करने का आह्वान किया।
- 2027: चीन और ताजिकिस्तान राजनयिक संबंधों की 35वीं वर्षगांठ मनाएंगे। दोनों पक्षों ने इसे करीबी संबंधों की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताया।
रसूलज़ोदा ने द्विपक्षीय संबंधों को ऐतिहासिक रूप से उच्चतम स्तर पर बताया। ली ने आने वाली वर्षगांठ को राजनीतिक विश्वास गहरा करने और विकास योजनाओं में बेहतर तालमेल का अवसर बताया।
18 अक्टूबर की बातचीत में ली ने कहा कि दोनों देशों के लोगों में हमेशा एक-दूसरे के प्रति मित्रतापूर्ण भाव रहे हैं और शी तथा रहमोन के रणनीतिक मार्गदर्शन में संबंधों का विकास उच्च स्तर पर बना रहा है। सभी क्षेत्रों में सहयोग गहरा हुआ है। उन्होंने रणनीतिक विश्वास बढ़ाने, एक-दूसरे का दृढ़ समर्थन करने और व्यापक सहयोग से और व्यावहारिक परिणाम हासिल करने का आह्वान किया, ताकि दोनों देशों के लोगों को लाभ हो। रसूलज़ोदा ने कहा कि मई में रहमोन की सफल चीन यात्रा से संबंध विकास के नए चरण में पहुंचे।
लोगों और परियोजनाओं के लिए क्या बदलेगा
ताजिकिस्तान में चीनी कर्मी ली की सुरक्षा संबंधी मांग का सबसे तात्कालिक केंद्र हैं। पांच चीनी नागरिकों की मौत के बाद राष्ट्रीय नेताओं की बातचीत में कामगारों और उद्यमों की सुरक्षा सीधे तौर पर शामिल हुई। साथ ही उस कारोबारी मौजूदगी को बढ़ाने पर भी चर्चा हुई, जिसके कारण ये कामगार देश में आते हैं।
ताजिकिस्तान की सरकार कृषि और ऊर्जा जैसे स्थापित क्षेत्रों के साथ-साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे नए क्षेत्रों में व्यापार, निवेश और सहयोग बढ़ाना चाहती है। चीन का निवेश को प्रोत्साहित करने और ताजिकिस्तान से अधिक सामान आयात करने का वादा आर्थिक संबंध के दोनों पक्षों से जुड़ा है: पूंजी आकर्षित करना और खरीदार ढूंढना।
रहमोन 1990 के दशक में ताजिकिस्तान के गृहयुद्ध के दौरान सत्ता में आए थे। वह एक धर्मनिरपेक्ष देश का नेतृत्व करते हैं, जिसे अफगान सीमा पर सुरक्षा दबावों का सामना करना पड़ता है। ली के साथ उनकी बातचीत ने इन घरेलू चिंताओं को चीन, रूस और क्षेत्रीय संगठनों से जुड़ी व्यापक कूटनीतिक रणनीति के साथ जोड़ा।
मुख्य घटनाक्रम यह है कि आर्थिक विस्तार और करीबी सुरक्षा समन्वय को साथ लेकर आगे बढ़ने का फैसला किया गया है। चीन व्यापार और निवेश के अधिक अवसर चाहता है और साथ ही अपने लोगों के लिए बेहतर सुरक्षा भी। ताजिकिस्तान राजनीतिक समर्थन दे रहा है और अपनी अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों में गहरा सहयोग चाहता है।
मुख्य बातें
- ली च्यांग ने 19 अक्टूबर, 2026 को दुशांबे में इमोमाली रहमोन से मुलाकात की और खुफिया जानकारी साझा करने तथा सुरक्षा सहयोग मजबूत करने का आह्वान किया।
- पिछले साल के अंत में हुए हमलों में पांच चीनी नागरिकों की मौत के बाद ली ने चीनी नागरिकों और कंपनियों की सुरक्षा जारी रखने की मांग की।
- ताजिक अधिकारियों के अनुसार, हमले पड़ोसी अफगानिस्तान से किए गए थे।
- चीन ने व्यापार, निवेश और बुनियादी ढांचे, हरित खनिजों, संपर्क, स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल अर्थव्यवस्था तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता में सहयोग बढ़ाने का प्रस्ताव रखा।
- प्रधानमंत्री कोखिर रसूलज़ोदा के साथ बातचीत में बुनियादी ढांचे, शिक्षा, भ्रष्टाचार-विरोधी प्रयासों और मानकीकरण से जुड़े दस्तावेज तैयार हुए। आधिकारिक विवरण में उनके विशिष्ट शीर्षक या पाठ नहीं दिए गए।
- रहमोन ने एक-चीन सिद्धांत और अंतरराष्ट्रीय संगठनों में बीजिंग के साथ करीबी तालमेल का समर्थन दोहराया।
- दोनों देश 2027 में राजनयिक संबंधों की 35वीं वर्षगांठ मनाएंगे।






