छह जीत, एक भी गेम गंवाए बिना काहिरा में ऐतिहासिक खिताब
चेन पिंग-शुआन और ली वेई-टिंग ने 17 अक्टूबर को फाइनल में जापान के माहिरो ओकु और मासातो यामाशिरो को 15-10, 15-9 से हराकर काहिरा में 2026 विश्व जूनियर बैडमिंटन चैंपियनशिप में ताइवान के लिए पुरुष युगल का पहला स्वर्ण जीता। शीर्ष वरीयता प्राप्त इस जोड़ी ने एक भी गेम गंवाए बिना छह जीत दर्ज कीं। विश्व जूनियर पुरुष युगल फाइनल में उनका यह चौथा प्रदर्शन था, जिसने ताइवान को इस स्पर्धा का पहला खिताब दिलाया।
विषय-सूची
- छह जीत, एक भी गेम गंवाए बिना काहिरा में ऐतिहासिक खिताब
- फाइनल का रुख ताइवान की ओर कैसे मुड़ा
- छह दौर में शानदार प्रदर्शन
- सेमीफाइनल में भी दिखा ऐसा ही नियंत्रण
- इससे पहले के तीनों फाइनल में रजत मिला था
- तातुंग में बनी साझेदारी
- छोटे गेम उनके लिए क्यों मुफीद रहे
- विशेष प्रशिक्षण और सीनियर स्तर का पहले का अनुभव
- काहिरा के नतीजों में इस स्वर्ण की जगह
- मुख्य बातें
बैडमिंटन विश्व महासंघ (बीडब्ल्यूएफ) ने 18 अक्टूबर को प्रकाशित अपनी चैंपियनशिप फाइनल समीक्षा में स्कोर की पुष्टि की और इस नतीजे को चैंपियनशिप की किसी भी युगल स्पर्धा में चीनी ताइपे का पहला स्वर्ण बताया। टूर्नामेंट में ताइवान इसी नाम से हिस्सा लेता है।
यह व्यापक उपलब्धि अहम है। ताइवान के इससे पहले के तीनों विश्व जूनियर खिताब एकल में आए थे, जहां एक खिलाड़ी दूसरे खिलाड़ी से मुकाबला करता है। चेन और ली विश्व जूनियर खिताब जीतने वाली पहली ताइवानी जोड़ी बने, जिन्होंने ऐसी स्पर्धा में जीत हासिल की जिसमें हर ओर से दो खिलाड़ी खेलते हैं।
चुंग चोउ तातुंग बैडमिंटन टीम का प्रतिनिधित्व करने वाले और ताइपे म्यूनिसिपल तातुंग हाई स्कूल में पढ़ने वाले दोनों खिलाड़ी एक साल से कुछ ही अधिक समय से नियमित जोड़ीदार थे। उनके कोच लिन चुन-युंग ने उन्हें पदक जीतने का लक्ष्य दिया था। फाइनल के दो निर्णायक दौर पर नियंत्रण रखते हुए वे स्वर्ण लेकर लौटे: पहले गेम के आखिरी चरण में तेजी से अंक जुटाए और दूसरे गेम में 6-6 के स्कोर से लगातार पांच अंक बनाए।
फाइनल का रुख ताइवान की ओर कैसे मुड़ा
चेन और ली ने जापान की छठी वरीय जोड़ी के खिलाफ आक्रामक शुरुआत करते हुए पहले गेम में 7-2 की बढ़त बना ली। उनके हमलों और सटीक शॉट्स ने प्रतिद्वंद्वियों को मुश्किल रिटर्न खेलने पर मजबूर किया और जापानी जोड़ी के कई शॉट कोर्ट से बाहर गए।
ओकु और यामाशिरो ने अंतर घटाकर दो अंक कर दिया। 11-9 के स्कोर पर चेन और ली ने लगातार तीन अंक बनाए और अंतिम चरण में जापानी जोड़ी की सर्विस की गलती का फायदा उठाया। उन्होंने 15-10 से गेम अपने नाम किया।
दूसरे गेम की शुरुआत ज्यादा बराबरी की रही। 6-6 तक कोई भी जोड़ी बढ़त नहीं बना सकी। इसके बाद चेन और ली ने लगातार पांच अंक लेकर 11-6 की बढ़त हासिल की। जापान की एक और सर्विस गलती से उन्हें मौका मिला और ताइवानी जोड़ी ने नियंत्रण बनाए रखते हुए 15-9 से गेम जीत लिया।
फाइनल में चेन और ली ने प्रतिद्वंद्वियों के 19 के मुकाबले 30 अंक बनाए। पांच और छह अंकों के उनके जीत के अंतर से पता चलता है कि दोनों गेम उन्होंने कितने निर्णायक अंदाज में खत्म किए, हालांकि दोनों में ऐसे मौके आए जब जापानी जोड़ी करीब पहुंचकर चुनौती दे सकती थी।
छह दौर में शानदार प्रदर्शन
चेन और ली काहिरा में विश्व की शीर्ष रैंक वाली जूनियर पुरुष युगल जोड़ी के रूप में पहुंचे थे। रैंकिंग कई टूर्नामेंटों के नतीजों के आधार पर तय होती है, जबकि वरीयता किसी खास ड्रॉ में जोड़ी की जगह निर्धारित करती है। उनके मामले में रैंकिंग और पहली वरीयता, दोनों खिताब की मजबूत दावेदारी का संकेत थीं।
पुरुष युगल ड्रॉ में 128 स्थान थे। पहले दौर में बाई मिलने का मतलब था कि चेन और ली बिना खेले अगले दौर में पहुंच गए। उन्होंने 64 खिलाड़ियों के दौर से मुकाबला शुरू किया। इसके बाद फाइनल में जापान की एक और जोड़ी का सामना करने से पहले उन्होंने अमेरिका, दक्षिण कोरिया, तुर्किये, जापान और हांगकांग की जोड़ियों को हराया।
सीधे गेमों में छह जीत का मतलब था कि उन्होंने खेले गए सभी 12 गेम जीते। यह उनके पिछले विश्व जूनियर अभियान से भी बेहतर प्रदर्शन था, जो क्वार्टर फाइनल में खत्म हुआ था।
- 2025: चेन और ली विश्व जूनियर क्वार्टर फाइनल तक पहुंचे।
- 16 अक्टूबर, 2026: काहिरा सेमीफाइनल में उन्होंने हांगकांग के यू ची-रुई और येउंग शुन-ऑन को 15-4, 15-8 से हराया।
- 17 अक्टूबर, 2026: पुरुष युगल खिताब के लिए उन्होंने ओकु और यामाशिरो को 15-10, 15-9 से हराया।
- 18 अक्टूबर, 2026: बीडब्ल्यूएफ ने फाइनल समीक्षा प्रकाशित कर युगल स्पर्धा में ताइवान के पहले स्वर्ण की पुष्टि की।
सेमीफाइनल में भी दिखा ऐसा ही नियंत्रण
हांगकांग बैडमिंटन संघ ने अपनी सेमीफाइनल रिपोर्ट में 16 अक्टूबर को चेन और ली की 15-4, 15-8 की जीत दर्ज की। उनके प्रतिद्वंद्वी यू और येउंग जूनियर विश्व रैंकिंग में 25वें स्थान पर थे और ब्राजील, भारत, मलेशिया तथा चीन की जोड़ियों को हरा चुके थे।
पहले गेम में चेन और ली ने हांगकांग की जोड़ी को सिर्फ चार अंक बनाने दिए। दूसरा गेम शुरुआत में ज्यादा बराबरी का रहा, लेकिन फिर ताइवानी जोड़ी ने लगातार पांच अंक लेकर नियंत्रण हासिल कर लिया।
सेमीफाइनल और फाइनल का पैटर्न मिलता-जुलता रहा: प्रतिद्वंद्वी दूसरे गेम की शुरुआत में मुकाबले में बने रहे, फिर चेन और ली ने लगातार अंक जुटाकर अंतर बना लिया। ये दौर लिन के उस आकलन से मेल खाते हैं कि उनकी ताकत खेल के शुरुआती और मध्य चरणों पर नियंत्रण रखने में है।
इसके बावजूद हांगकांग ने पुरुष युगल में कांस्य पदक जीता। 2012 में ली चुन-हेई और ङ का-लॉन्ग के स्वर्ण जीतने के बाद इस स्पर्धा में उसका यह पहला पदक था। हांगकांग की टीम ने 16 वर्षीय यिप सम-याऊ के जरिए महिला एकल का कांस्य भी जीता और काहिरा में कुल दो पदक हासिल किए।
इससे पहले के तीनों फाइनल में रजत मिला था
पुरुष युगल खिताब के लिए ताइवान का इंतजार 1996 तक गया, जब हुआंग शिह-चुंग और चिएन यू-शुन फाइनल में पहुंचे थे। 2011 में हुआंग पो-जुई और लिन चिया-यू ने फाइनल खेला, जबकि 2023 में लाई पो-यू और त्साई फू-चेंग खिताबी मुकाबले तक पहुंचे। इन तीनों जोड़ियों को रजत से संतोष करना पड़ा।
चेन और ली इस फाइनल तक पहुंचने वाली चौथी ताइवानी जोड़ी और इसे जीतने वाली पहली जोड़ी बने। यह कामयाबी पहली फाइनल उपस्थिति के 30 साल बाद आई और ताइवान के बार-बार खिताबी मुकाबले तक पहुंचने, लेकिन खिताब न जीत पाने के सिलसिले का अंत हुआ।
इस स्वर्ण से विश्व जूनियर चैंपियनशिप में ताइवान के कुल पदकों की संख्या चार स्वर्ण, सात रजत और 15 कांस्य, यानी कुल 26 हो गई। उसके इससे पहले के चैंपियन 2004 में महिला एकल में चेंग शाओ-चिएह, 2015 में पुरुष एकल में लू चिया-हुंग और 2022 में पुरुष एकल में कुओ कुआन-लिन थे।
काहिरा में टीम स्पर्धा के क्वार्टर फाइनल तक न पहुंच पाने के बाद इस खिताब ने एक बड़ी व्यक्तिगत कामयाबी दिलाई। कई पीढ़ियों से ताइवानी खिलाड़ी जिस स्पर्धा में खिताब के करीब पहुंचते रहे थे, उसमें चेन और ली ने यह उपलब्धि हासिल की।
तातुंग में बनी साझेदारी
लिन ने दोनों खिलाड़ियों की क्षमता देखने के बाद उन्हें तातुंग के स्कूल कार्यक्रम में शामिल किया। हाई स्कूल के पहले वर्ष में वे उम्र में बड़े साथियों के साथ खेले और नियमित जोड़ी बनने से पहले घरेलू प्रतियोगिताओं का अनुभव हासिल किया। दूसरे वर्ष में वे नियमित जोड़ीदार बने।
ली ताइचुंग से उत्तर की ओर आए थे और शुरुआत में उन्हें तातुंग की व्यवस्था में ढलने की चिंता थी। टीम ने उन्हें सहज होने में मदद के लिए एक उम्रदराज खिलाड़ी के साथ जोड़ा। इस बीच चेन ने एक वरिष्ठ साथी के साथ हाई स्कूल कप का पुरुष युगल खिताब जीता।
लिन ने इस जोड़ी को मानसिक रूप से परिपक्व, तकनीकी रूप से हरफनमौला और आपस में संवाद करने में सहज बताया। उन्होंने जिम्मेदारियों के स्पष्ट बंटवारे और तेज खेल-लय का भी उल्लेख किया।
काहिरा से पहले यह जोड़ी एशियाई जूनियर चैंपियनशिप में रजत जीत चुकी थी। हांगकांग बैडमिंटन संघ के मुताबिक यह नतीजा 2026 में आया था और उनके सत्र के विवरणों में इसे जुलाई का बताया गया है; वहीं लिन ने इस रजत को पिछले साल का नतीजा कहा। ताइवान के लिन शेंग-मिंग और हुआंग त्ज़ु-युआन ने एशियाई खिताब जीता था, लेकिन उनका विश्व जूनियर अभियान 16 खिलाड़ियों के दौर में खत्म हो गया।
छोटे गेम उनके लिए क्यों मुफीद रहे
लिन के मुताबिक 2026 की चैंपियनशिप पहला विश्व जूनियर टूर्नामेंट था जिसमें पारंपरिक 21 अंकों के बजाय 15 अंकों पर आधारित गेम खेले गए। इस प्रारूप की तैयारी के लिए तातुंग ने गर्मियों की छुट्टी के बाद अपना प्रशिक्षण बदला।
अंक का लक्ष्य कम होने से खराब शुरुआत के बाद वापसी के लिए खिलाड़ियों के पास मौके भी कम होते हैं। इसलिए चेन और ली की शुरुआती बढ़त हासिल करने की क्षमता खास अहमियत रखती थी। लिन ने कोर्ट के मध्य और नेट के पास उनके दबाव, रैली के शुरुआती पांच शॉटों पर उनकी प्रतिक्रिया और हमला या बचाव करने के सही मौके पहचानने की क्षमता को उनकी प्रमुख ताकत बताया।
फ्रंट कोर्ट नेट के पास का हिस्सा होता है। इस पर नियंत्रण से प्रतिद्वंद्वी शटल को ऊंचा मारने पर मजबूर हो सकते हैं, जिससे हमला करने का मौका बनता है। वहां तेज प्रतिक्रिया से रैली लंबी होने से पहले जोड़ी को पहल बनाए रखने में भी मदद मिलती है।
लिन ने कहा कि उनका जोरदार खेल काफी ऊर्जा मांगता था और छोटे गेमों में वे इसे ज्यादा प्रभावी ढंग से अपना सके। उन्होंने यह भी माना कि पहले के 21 अंकों वाले प्रारूप में नतीजा अलग हो सकता था। उनकी तैयारी उसी प्रतियोगिता के अनुरूप थी जिसका उन्हें सामना करना था: शुरुआत में नियंत्रण हासिल करना, बढ़त बचाए रखना और प्रतिद्वंद्वियों को फिर से लय पकड़ने का मौका मिलने से पहले मैच खत्म करना।
विशेष प्रशिक्षण और सीनियर स्तर का पहले का अनुभव
एशियाई जूनियर चैंपियनशिप के बाद तातुंग की तैयारी में दोनों खिलाड़ियों के लिए अलग-अलग बदलाव किए गए। कोचों ने चेन के नेट के पास शॉट की सटीकता और ली की कोर्ट पर आवाजाही पर काम किया, ताकि जोड़ी की मौजूदा ताकत और प्रभावी हो सके।
लिन ने साल के पहले छह महीनों में दोनों को दो टूर्नामेंटों में उतारकर अंतरराष्ट्रीय सीनियर प्रतियोगिता से भी पहले परिचित कराया। ताइवान के गोल्डन प्लान वित्तपोषण कार्यक्रम के छठे स्तर तक मिली सहायता से उन्हें वयस्क खिलाड़ियों के खिलाफ अनुभव हासिल करने में मदद मिली।
विश्व जूनियर खिताब की कोशिश से पहले इन प्रतियोगिताओं ने किशोर खिलाड़ियों को अलग स्तर के मुकाबले से परिचित कराया। लिन ने इस अनुभव को उनके आत्मविश्वास और खेल को अधिक संपूर्ण बनाने का श्रेय दिया। टीम के कॉरपोरेट साझेदार ने साल के दूसरे हिस्से में और अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों की व्यवस्था भी की।
दोनों खिलाड़ी 2027 में फिर विश्व जूनियर चैंपियनशिप में हिस्सा लेने के पात्र हैं। लिन को उम्मीद है कि काहिरा के खिताब से उन्हें सीनियर टूर्नामेंटों में अनुभव हासिल करने के लिए और संसाधन मिलेंगे। भविष्य के किसी खास टूर्नामेंट कार्यक्रम या नई वित्तीय सहायता की घोषणा नहीं हुई।
काहिरा के नतीजों में इस स्वर्ण की जगह
पांच व्यक्तिगत स्पर्धाओं में खिताब जीतने वाली चार टीमों में ताइवान शामिल था। बीडब्ल्यूएफ की फाइनल समीक्षा के मुताबिक इंडोनेशिया ने दो स्वर्ण जीते, जबकि ताइवान, मलेशिया और चीन को एक-एक स्वर्ण मिला।
इंडोनेशिया ने मिश्रित युगल में मुहम्मद लुत्फी हबीबी और दियान रमाधानी मुक्ति के जरिए स्वर्ण जीता। उन्होंने निर्णायक गेम में चीन के फेंग यी लैंग और ली मेंग हान के खिलाफ 11-14 से पिछड़ने के बाद वापसी की। इसके बाद राधित्य बायू वर्धाना ने पुरुष एकल के पूरी तरह इंडोनेशियाई फाइनल में फरधान रैनंदा जो को हराया।
मलेशिया की लो ज़ी यू और जेनेवी लिम ने जापान की निजिका कामाता और शिज़ुकु काशियो को तीन गेम में हराकर देश का पहला विश्व जूनियर महिला युगल स्वर्ण जीता। चीन की झांग यी शिन ने जापान की साकी मात्सुमोतो के खिलाफ एक गेम से पिछड़ने के बाद वापसी कर महिला एकल का खिताब अपने नाम किया।
इस तरह जापान ने पुरुष युगल, महिला युगल और महिला एकल में रजत पदक जीते। चेन और ली की जीत ही ऐसा फाइनल रही जो दो गेम में तय हुआ। इस तरह टूर्नामेंट में किसी भी प्रतिद्वंद्वी को उनसे एक गेम भी जीतने का मौका नहीं मिला।
मुख्य बातें
- चेन पिंग-शुआन और ली वेई-टिंग ने काहिरा में जापान के माहिरो ओकु और मासातो यामाशिरो को 15-10, 15-9 से हराया।
- यह पुरुष युगल में ताइवान का पहला विश्व जूनियर स्वर्ण और किसी भी युगल स्पर्धा में उसका पहला स्वर्ण था।
- शीर्ष वरीय जोड़ी ने शुरुआती दौर में बाई मिलने के बाद छह मैच और सभी 12 गेम जीते।
- ताइवान के पुरुष युगल के इससे पहले के तीन फाइनल, 1996, 2011 और 2023 में, रजत पदक के साथ खत्म हुए थे।
- कोच लिन चुन-युंग ने उनकी परिपक्वता, कौशल, विशेष प्रशिक्षण और सीनियर प्रतियोगिताओं के अनुभव को कामयाबी का श्रेय दिया।
- दोनों खिलाड़ी 2027 में विश्व जूनियर चैंपियनशिप में हिस्सा लेने के पात्र हैं।






