तीन जीत के साथ ओलंपिक चैंपियन ने फिर हासिल किया पोडियम
उज्बेकिस्तान की दियोरा केल्डियोरोवा ने 17 अक्टूबर, 2026 को कजाकिस्तान में आयोजित अकताऊ एशियन ओपन में स्वर्ण पदक और विश्व रैंकिंग के 100 अंक जीते। 28 जुलाई, 2024 को पेरिस में ओलंपिक खिताब जीतने के बाद पहली बार उन्होंने अंतरराष्ट्रीय जूडो में वापसी की। 28 वर्षीय केल्डियोरोवा ने फाइनल में अजरबैजान की फरीदा मिर्जायेवा को हराने से पहले कजाकिस्तान की दो खिलाड़ियों को शिकस्त दी।
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उज्बेकिस्तान की राष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने बताया कि उनका वर्ग महिलाओं का 52 किलोग्राम से कम भार वर्ग था, न कि उनकी जीत के शुरुआती विवरण में बताया गया 57 किलोग्राम से कम भार वर्ग। समिति ने उनकी वापसी का स्वागत किया और पुष्टि की कि उन्होंने निर्धारित समय समाप्त होने से पहले फाइनल जीत लिया।
प्रतियोगिताओं से दूर रहने के दौरान केल्डियोरोवा मां बनीं। वह अपने परिवार के साथ अकताऊ पहुंचीं और स्वर्ण पदक लेकर लौटीं। उन्होंने कहा कि वह उस खिलाड़ी से अलग हैं, जो दो साल से कुछ अधिक समय पहले ओलंपिक पोडियम के शीर्ष पर खड़ी थी।
उनकी तीनों जीत में एक अहम समानता थी: उन्होंने खड़े होकर किए गए हमलों को मैट पर निर्णायक दांव में बदला। शुरुआती दो मुकाबले उन्होंने प्रतिद्वंद्वी को पकड़ के जरिए समर्पण के लिए मजबूर कर जीते, जबकि फाइनल में पहले थ्रो और फिर होल्ड से जीत हासिल की।
तुरार झोल्दीबायेव की स्मृति में 17 और 18 अक्टूबर को आयोजित इस टूर्नामेंट में सात देशों के 182 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। केल्डियोरोवा के लिए यह महीनों की तैयारी के बाद प्रतिस्पर्धी मुकाबला था और अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग फिर से बनाने की दिशा में पहला कदम भी। उनका दीर्घकालिक लक्ष्य लॉस एंजिलिस 2028 है।
हर मुकाबले में कैसे जीतीं
केल्डियोरोवा ने क्वार्टर फाइनल में कजाकिस्तान की नुराइलिम सार्सेनबेक के खिलाफ मुकाबले से शुरुआत की। उन्होंने नीचे झुककर आस्तीन पकड़ते हुए हिप थ्रो लगाया, जिसे जूडो में सोदे-त्सुरिकोमी-गोशी कहा जाता है, और युको अंक हासिल किया। युको का स्कोर वाजा-आरी या इप्पोन से कम होता है।
उसी थ्रो की उनकी अगली कोशिश पर कोई अंक नहीं मिला, लेकिन उससे मैट पर मुकाबला जारी रखने का मौका बना। केल्डियोरोवा ने जूजी-गातामे यानी आर्म लॉक लगाया और इप्पोन से जीत हासिल की। इप्पोन से मुकाबला तुरंत समाप्त हो जाता है।
सेमीफाइनल में कजाकिस्तान की गुलखान शिंग्गिसखान के खिलाफ भी कुछ ऐसा ही हुआ। केल्डियोरोवा ने उसी नीचे झुककर किए गए थ्रो से युको अंक लिया, फिर तुरंत आर्म लॉक लगाकर प्रतिद्वंद्वी को समर्पण के लिए मजबूर कर दिया।
फाइनल में मिर्जायेवा ने चुनौती पेश की। केल्डियोरोवा ने पहले ओउची-गारी यानी भीतरी पैर से बड़ी रीप लगाकर युको अंक हासिल किया। इसके बाद नीचे झुककर किए गए थ्रो से वाजा-आरी लिया और तुरंत होल्ड लगाकर दूसरा वाजा-आरी हासिल किया।
दो वाजा-आरी मिलकर इप्पोन बनाते हैं। इस नतीजे को वाजा-आरी-अवासेते-इप्पोन कहा जाता है। इसी तरह फाइनल समाप्त हुआ। तीनों मुकाबले निर्धारित समय से पहले खत्म हुए, हालांकि मिर्जायेवा के खिलाफ निर्णायक दांव शुरुआती मुकाबलों की समर्पण वाली जीत से अलग था।
मां बनने के बाद वापसी
अकताऊ से पहले केल्डियोरोवा की आखिरी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता पेरिस में ओलंपिक चैंपियन बनने का दिन था। इसके बाद के अंतराल में उन्होंने और उनके पति अजात मात्याकुबोव ने एक बेटी का स्वागत किया।
अप्रैल 2026 में केल्डियोरोवा ने पुष्टि की कि उन्होंने व्यक्तिगत प्रशिक्षण फिर शुरू कर दिया है। शुरुआत में उन्होंने राष्ट्रीय टीम के गहन प्रशिक्षण शिविरों से बाहर रहकर अभ्यास किया और प्रतियोगिताओं में लौटने से पहले अपनी शारीरिक क्षमता फिर से बनाई। इस दौरान वह 2026 एशियाई खेलों में भी हिस्सा नहीं ले पाईं।
अकताऊ में जीत के बाद ओलंपिक चैंपियन ने कहा कि वह अभी पेरिस वाली लय में पूरी तरह नहीं लौटी हैं। उज्बेक भाषा से अनूदित उनकी बातों में उन्होंने बताया कि अब वह खुद को किस रूप में देखती हैं:
अब मैं अलग हूं, नई दियोरा, एक मां।
केल्डियोरोवा ने कहा कि प्रतियोगिताओं से दूर रहने के दो वर्षों के दौरान भी वह जूडो से जुड़ी रहीं, हालांकि प्रतियोगिताओं के माहौल में उनका समय कम रहा। वह खेल का फिर से आनंद लेना चाहती थीं, न कि वापसी के हर पहलू की तुलना अपने ओलंपिक प्रदर्शन से करना।
उनकी बेटी भी परिवार के साथ कजाकिस्तान गई थी। यह पूछे जाने पर कि क्या बच्ची समझती है कि उसकी मां चैंपियन हैं, केल्डियोरोवा ने कहा कि बेटी को मुख्य रूप से उनका पास रहना और उन्हें गोद में लेने के लिए तैयार रहना चाहिए। खेलों में मिली पहचान और पारिवारिक जीवन अब एक ही सफर के दो अलग पहलू बन गए हैं।
अबू धाबी अगली संभावित चुनौती
केल्डियोरोवा ने 29 अक्टूबर को अबू धाबी में होने वाले मुकाबले को अपनी अगली संभावित प्रतियोगिता बताया। अकताऊ टूर्नामेंट के बाद उन्होंने कहा कि कजाकिस्तान में मिली चुनौती से उन्हें अपनी तैयारी का आकलन करने और उन पहलुओं को पहचानने में मदद मिली जिन पर काम करना है।
ओलंपिक चैंपियन ने वापसी के तुरंत बाद जीत हासिल करने पर हैरानी जताई। रूसी भाषा से अनूदित उनकी बातों में उन्होंने कहा:
मैं बहुत खुश हूं कि दो साल बाद लौटी और स्वर्ण पदक जीता। सच कहूं तो मुझे इसकी उम्मीद नहीं थी, लेकिन मैं बहुत खुश हूं।
केल्डियोरोवा ने आने वाली प्रतियोगिता को अबू धाबी ग्रैंड स्लैम कहा, हालांकि इसे ग्रां प्री के रूप में भी बताया गया। प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के बारे में उनके अपने शब्द निश्चित नहीं थे, इसलिए 29 अक्टूबर उनकी अगली नियोजित चुनौती है, पक्की भागीदारी नहीं।
अबू धाबी में मुकाबला अकताऊ की शुरुआती परीक्षा से आगे उनकी वापसी को बढ़ाएगा। ग्रैंड स्लैम अंतरराष्ट्रीय जूडो के प्रमुख टूर्नामेंटों में शामिल है और एशियन ओपन से अधिक कड़ी प्रतिस्पर्धा पेश करता है। इससे उन्हें अपनी फिर से विकसित की जा रही टाइमिंग, कॉम्बिनेशन और सहनशक्ति को परखने का एक और मौका मिलेगा।
रैंकिंग के 100 अंकों का महत्व
स्वर्ण पदक के साथ केल्डियोरोवा ने विश्व रैंकिंग के लिए 100 अंक हासिल किए। लंबे अंतराल के बाद अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में वापसी करते हुए ये अंक उन्हें एक नया परिणाम देते हैं।
विश्व रैंकिंग में मान्य प्रतियोगिताओं के नतीजे दर्ज किए जाते हैं। विराम के बाद लौटने वाले खिलाड़ी को अपनी रैंकिंग फिर बनाने के लिए प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर दोबारा अंक हासिल करने होते हैं। अकताऊ ने तीन प्रतिस्पर्धी मुकाबले पूरे करने के अनुभव के साथ उन्हें एक ठोस शुरुआती नतीजा दिया।
मैट पर किए गए उनके दांव खास तौर पर कारगर रहे। कजाकिस्तान की दोनों खिलाड़ियों के खिलाफ खड़े होकर किए गए हमले से आर्म लॉक लगाने का मौका बना। मिर्जायेवा के खिलाफ थ्रो के तुरंत बाद होल्ड लगाया गया। केल्डियोरोवा ने बार-बार जूडो के दोनों चरणों के बीच मुकाबले की गति बनाए रखी और प्रतिद्वंद्वी को संभलने का समय नहीं दिया।
लॉस एंजिलिस 2028 उनका घोषित लक्ष्य है। ओलंपिक अभियान तक पहुंचने के लिए फिलहाल उनका काम इस पहली सफल वापसी को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में नियमित भागीदारी में बदलना है। अपनी फिटनेस के बारे में उनके आकलन के मुताबिक, यह प्रक्रिया अभी शुरुआती चरण में है।
वापसी से पहले पेरिस की उपलब्धि
केल्डियोरोवा ने पेरिस में जूडो में उज्बेकिस्तान का पहला ओलंपिक स्वर्ण पदक जीता था। फाइनल में कोसोवो की डिस्ट्रिया क्रास्निकी को हराने से पहले उन्होंने जापान की उता आबे को शिकस्त दी थी, जो मौजूदा ओलंपिक चैंपियन और चार बार की विश्व चैंपियन थीं।
उनके मुकाबले में आबे ने वाजा-आरी के साथ बढ़त बनाई, लेकिन केल्डियोरोवा ने इप्पोन से जवाब दिया। इसके बाद उन्होंने जर्मनी की माशा बालहाउस और फ्रांस की अमांडिन बुशार को हराकर स्वर्ण पदक के लिए क्रास्निकी का सामना किया।
उस ओलंपिक चक्र में उन्हें मार्गदर्शन देने वाले जर्मन कोच मार्को स्पिट्का ने पहले ही इस संभावना के लिए तैयारी कराई थी कि उनका सामना आबे से जल्दी हो सकता है। केल्डियोरोवा ने बाद में उनका संदेश याद करते हुए कहा:
हो सकता है पहला मुकाबला उसी के साथ हो। कोई बात नहीं। हमें लड़ना है।
स्पिट्का अब उनके निजी कोच नहीं हैं, लेकिन सलाहकार की भूमिका में उज्बेकिस्तान जूडो महासंघ लौट आए हैं। केल्डियोरोवा अब पेरिस के अनुभव, परिवार की नई दिनचर्या और प्रतियोगिताओं का कार्यक्रम दोबारा बनाने की व्यावहारिक चुनौती के साथ एक और ओलंपिक चक्र शुरू कर रही हैं।
उज्बेकिस्तान से बाहर भी गर्मजोशी से स्वागत
केल्डियोरोवा ने पाया कि कजाकिस्तान में भी उनकी ओलंपिक सफलता को पहचान मिली। उन्होंने बताया कि अकताऊ के एक कैफे में जाने के दौरान लोगों ने उनके साथ तस्वीरें खिंचवाने के लिए संपर्क किया। इनमें कुछ लोग खेलों से करीबी तौर पर जुड़े नहीं थे।
उज्बेक चैंपियन ने कहा कि इस स्वागत से उन्हें हैरानी हुई। रूसी भाषा से अनूदित उनकी बातों में उन्होंने बताया कि इस सत्कार का उनके लिए क्या अर्थ था:
यह मेरे लिए सम्मान की बात है और मैं बहुत खुश हूं। मेरा बहुत गर्मजोशी से स्वागत किया गया और कजाकिस्तान में मुझे घर जैसा महसूस हुआ।
पेरिस के बाद उनकी सार्वजनिक जिम्मेदारियां भी बढ़ गई थीं। अगस्त 2024 में वह उज्बेकिस्तान की राष्ट्रीय सामाजिक संरक्षण एजेंसी की विशेष प्रतिनिधि बनीं और लैंगिक असमानता तथा बच्चों के खिलाफ हिंसा से जुड़े काम की जिम्मेदारी संभाली।
अकताऊ में उनके जीवन के ये अलग-अलग पहलू एक साथ आए: ओलंपिक चैंपियन के रूप में पहचान, परिवार के साथ यात्रा और मैट पर उज्बेकिस्तान का प्रतिनिधित्व करने के लिए वापसी।
पहले दिन अजरबैजान ने जीते आठ पदक
अजरबैजान जूडो महासंघ के अनुसार, मिर्जायेवा का रजत पदक पहले दिन अजरबैजान के आठ पदकों में शामिल था। टीम ने चार रजत और चार कांस्य पदक जीते।
अजरबैजान के अन्य रजत पदक विजेता 66 किलोग्राम वर्ग में नाजिम तालिबोव, 73 किलोग्राम में कामरान सुलेमानोव और महिलाओं के 57 किलोग्राम वर्ग में उल्विया बायरामोवा थे। गुलनारा बायरामोवा ने भी 57 किलोग्राम वर्ग में कांस्य पदक जीता, जबकि मिर्जायेवा का केल्डियोरोवा के खिलाफ फाइनल अलग 52 किलोग्राम वर्ग में था।
टूर्नामेंट में उज्बेकिस्तान के 24 अन्य टीम सदस्य भी पदक के लिए मुकाबला कर रहे थे। इसलिए केल्डियोरोवा की जीत इस प्रतियोगिता में टीम की व्यापक मौजूदगी का हिस्सा थी, जो 18 अक्टूबर तक जारी रही।
उनकी वापसी की यात्रा इन चार तारीखों से समझी जा सकती है:
- 28 जुलाई, 2024: केल्डियोरोवा ने पेरिस में ओलंपिक स्वर्ण जीता। विराम से पहले यह उनकी आखिरी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता थी।
- अप्रैल 2026: उन्होंने व्यक्तिगत प्रशिक्षण फिर शुरू करने की पुष्टि की।
- 17 अक्टूबर, 2026: उन्होंने अकताऊ में तीन मुकाबले जीतकर स्वर्ण पदक हासिल किया।
- 29 अक्टूबर, 2026: उन्होंने अबू धाबी को अपनी अगली संभावित प्रतियोगिता बताया।
मुख्य बातें
- दियोरा केल्डियोरोवा ने 17 अक्टूबर को अकताऊ एशियन ओपन में महिलाओं के 52 किलोग्राम से कम भार वर्ग का खिताब जीता और विश्व रैंकिंग के 100 अंक हासिल किए।
- उन्होंने फाइनल में अजरबैजान की फरीदा मिर्जायेवा को हराने से पहले कजाकिस्तान की नुराइलिम सार्सेनबेक और गुलखान शिंग्गिसखान को शिकस्त दी।
- उनकी तीनों जीत निर्धारित समय से पहले आईं। फाइनल दो वाजा-आरी के इप्पोन में बदलने से तय हुआ।
- अकताऊ में उनकी भागीदारी पेरिस 2024 के बाद पहली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता और मां बनने के बाद उनकी पहली वापसी थी।
- उन्होंने 29 अक्टूबर को अबू धाबी को अपनी अगली संभावित प्रतियोगिता बताया। उनका दीर्घकालिक लक्ष्य लॉस एंजिलिस 2028 है।






